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                <title>Women's day - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Hansi: रोशनी देवी ई-रिक्शा चलाकर घर की अर्थव्यवस्था को दे रही गति</title>
                                    <description><![CDATA[Hansi (सच कहूँ/मुकेश)। आमतौर पर देखा जाता है कि Women’s Day के (E-rickshaw) उपलक्ष्य में तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मगर महिलाओं के बिना किसी दिवस की कल्पना भी नहीं की जा सकती। जहां एक तरफ महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। वहीं एक महिला […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/speeding-up-the-economy-of-the-house-by-driving-an-e-rickshaw/article-47622"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/e-rickshaw.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Hansi (सच कहूँ/मुकेश)।</strong> आमतौर पर देखा जाता है कि Women’s Day के (E-rickshaw) उपलक्ष्य में तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मगर महिलाओं के बिना किसी दिवस की कल्पना भी नहीं की जा सकती। जहां एक तरफ महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। वहीं एक महिला अपने पति के कम वेतन को अपने बच्चों की शिक्षा में किसी प्रकार की बाधा नहीं बनने दे रही। हम बात कर रहे हैं, हांसी कि वकील कॉलोनी में रहने वाली एक महिला रोशनी देवी की जो ई-रिक्शा चलाकर अपने बच्चों को उच्च शिक्षा हासिल करवा रही है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/chief-minister-manohar-lals-big-announcement-for-mandi-dabwali/">Mandi Dabwali के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल की बड़ी घोषणा | CM Manohar Lal</a></p>
<p style="text-align:justify;">रोशनी देवी अपने पति कौर सिंह के साथ दिन-रात (E-rickshaw) एक कर के अपने बच्चों को उस मुकाम पर बैठाने की कोशिश कर रही है, जिस मुकाम पर वह दोनों नहीं बैठ पाए। दरअसल रोशनी देवी कक्षा दो तक ही पढ़ाई कर पाई और उसके पति कौर सिंह ने आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई की। अब रोशनी देवी की बेटी ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही है और बेटा मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। इसके बावजूद लगातार बढ़ रही महंगाई में जहां एक तरफ घर खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था, वही बच्चों की महंगी शिक्षा ने भी परेशानी की लकीर को और मोटा कर दिया। ऐसे में रोशनी देवी ने अपने पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करने की ठानी और ई रिक्शा लेकर निकल पड़ी कुछ सहयोग करने। आइए जानते हैं रोशनी देवी की इस पहल के बारे में-</p>
<h3>पड़ोसियों ने किया पूरा सहयोग | E rickshaw</h3>
<p style="text-align:justify;">रोशनी देवी का उसके पड़ोस के लोगों ने भी काफी सहयोग किया। और आसपास के बच्चों को ट्यूशन आदि छोड़ने की जिम्मेवारी भी लगा दी। जिससे उसे सवारी ढूंढ़ने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती।</p>
<h4 style="text-align:justify;">परिवार के सदस्यों का मिला पूरा सहयोग</h4>
<p style="text-align:justify;">रोशनी देवी ने बताया कि उसके पति और बच्चों ने भी उसके इस काम को छोटा ना मानते हुए उसका पूरा सहयोग किया। रोशनी देवी ने बताया कि जब शाम को उसके पति फैक्ट्री से आ जाते हैं तो वह घर का काम करने लग जाती है और उसके पति ई रिक्शा लेकर काम पर लग जाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">महिला सवारियों ने बढ़ाई हिम्मत | E rickshaw</h3>
<p style="text-align:justify;">रोशनी देवी का कहना है कि जब उसे रास्ते में महिला सवारियां मिलती हैं तो वह एक महिला को ही ई रिक्शा चलाते देखकर अपने आपको ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं। रोशनी देवी ने बताया कि नौकरी आदि पर जाने वाली महिलाओं ने उसके साथ ऐसा तालमेल बैठा रखा है कि जब भी महिलाओं को जरूरत पड़ती है तो वह फोन करके रोशनी देवी को अपने कार्यक्षेत्र पर बुला लेते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कोई भी काम नहीं होता छोटा बड़ा</h3>
<p style="text-align:justify;">रोशनी देवी का कहना है कि उसे ई रिक्शा चलाने में किसी प्रकार की कोई शर्म या झिझक महसूस नहीं होती। क्योंकि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता और ना ही हमें किसी काम को करने में कोई शर्म महसूस करनी चाहिए। बशर्ते की मेहनत और पूरी लगन से अपने काम को अंजाम देना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">महिला सवारियों ने बढ़ाई हिम्मत | E rickshaw</h3>
<p style="text-align:justify;">रोशनी देवी का कहना है कि जब उसे रास्ते में महिला सवारियां मिलती हैं तो वह एक महिला को ही ई रिक्शा चलाते देखकर अपने आपको ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं। रोशनी देवी ने बताया कि नौकरी आदि पर जाने वाली महिलाओं ने उसके साथ ऐसा तालमेल बैठा रखा है कि जब भी महिलाओं को जरूरत पड़ती है तो वह फोन करके रोशनी देवी को अपने कार्यक्षेत्र पर बुला लेते हैं। रोशनी देवी का कहना है कि उसे ई रिक्शा चलाने में किसी प्रकार की कोई शर्म या झिझक महसूस नहीं होती। क्योंकि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता और ना ही हमें किसी काम को करने में कोई शर्म महसूस करनी चाहिए। बशर्ते की मेहनत और पूरी लगन से अपने काम को अंजाम देना चाहिए।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/speeding-up-the-economy-of-the-house-by-driving-an-e-rickshaw/article-47622</link>
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                <pubDate>Sun, 14 May 2023 17:21:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानवाधिकारों का सम्मान राष्ट्र के उत्थान का बेहतर तरीका: सं.रा.</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र (एजेंसी) संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि महिला सशक्तिकरण तथा मानवधिकारों का सम्मान करना किसी राष्ट्र, समुदाय अथवा संस्थानों के उत्थान के लिए सबसे बेहतर तरीका है। ऐंटोनियो ने शुक्रवार को महिला दिवस के अवसर पर लैंगिक समानता और मानवाधिकारों की के सम्मान की नयी दूरदर्शिता का आह्वान किया और कहा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र (एजेंसी)</strong></p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि महिला सशक्तिकरण तथा मानवधिकारों का सम्मान करना किसी राष्ट्र, समुदाय अथवा संस्थानों के उत्थान के लिए सबसे बेहतर तरीका है। ऐंटोनियो ने शुक्रवार को महिला दिवस के अवसर पर लैंगिक समानता और मानवाधिकारों की के सम्मान की नयी दूरदर्शिता का आह्वान किया और कहा कि इससे दुनिया की आधी आबादी विश्व में सभी क्षेत्र में सफलता के लिए अपना योगदान दे सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “ हाल के दशकों में महिलाओं के अधिकार तथा नेतृत्व में अद्भुत प्रगति हुई है लेकिन यह प्रगति निरंतर नहीं हुई है। लैंगिक समानता मौलिक रूप से शक्ति की मिसाल है। हम अभी भी एक पुरुष-प्रधान दुनिया में रह रहे है और इस संस्कृति ने महिलाओं को सदियों से प्रताड़ित,खामोश और नज़रअंदाज़ किया है।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इस वर्ष अंतराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम “ समान सोच , बिल्ड स्मार्ट , बदलाव का नवीकरण ” रखा गया है। अंतराष्ट्रीय समुदायों से महिला सशक्तिकरण एवं महिलाओं के अधिकारों काे महत्व देने की अपील करते हुए उन्होंने कहा , “ हमने लंबे समय से लैंगिंग समानता को खारिज रखा है जिससे हमें नुकसान हुआ है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/honor-of-human-rights-better-way-of-uplift-of-the-nation-s-r/article-7978</link>
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                <pubDate>Sat, 09 Mar 2019 09:32:15 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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