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                <title>सुमिरन से कटते हैं जन्मों-जन्मों के कर्म</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अगर इन्सान सेवा के साथ-साथ मालिक के नाम का सुमिरन करता है तो उसके जन्मों-जन्मों के पाप-कर्म कट जाया करते हंै। लेकिन वे जीव बहुत भाग्यशाली होते हैं जो तन-मन-धन से मालिक की बताई राह पर चला करते हैं और वे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/meditation-is-the-only-way-to-meet-with-god/article-303"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/guruji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अगर इन्सान सेवा के साथ-साथ मालिक के नाम का सुमिरन करता है तो उसके जन्मों-जन्मों के पाप-कर्म कट जाया करते हंै। लेकिन वे जीव बहुत भाग्यशाली होते हैं जो तन-मन-धन से मालिक की बताई राह पर चला करते हैं और वे अपने भाग्य को और भी अच्छा बना लेते हैं। मनुष्य के जन्मों-जन्मों के पापकर्म जिनकी वजह से उसके जीवन में कोई कमी होती है, वह राम नाम जपने से दूर हो जाया करती है। अगर आप प्रभु के नाम का सुमिरन करोगे तो जीते-जी व मरणोपरांत दोनों जहानों में आपको खुशियां व हाथों-हाथ सेवा का फल भी मिलेगा। पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि सेवा ही इन्सान को मालिक से मिलाती है, वह इन्सान को अंदर व बाहर से पवित्र बना देती है। लेकिन सेवा के साथ सुमिरन व वचनों के पक्के रहना भी बहुत जरूरी है। यह तभी संभव है जब इन्सान दृढ़ निश्चय करे कि वह सारी जिंदगी उस मालिक की भक्ति-इबादत करेगा। लेकिन जब इन्सान यह सोचता है कि कुछ समय के लिए सेवा-सुमिरन कर लेंगे, जब तक काम चलता है चला लेंगे। लेकिन वह मालिक सब जानता है, वह आपके झांसे में नहीं आता। अगर वाकई आप उसको खुश करना चाहते हैं व उसकी कृपादृष्टि के काबिल बनना चाहते हैं तो दृढ़ निश्चय करो कि आप ताउम्र एक घंटा सुबह व शाम उस मालिक को जरूर याद करोगे व यह भी निश्चित कर लें कि मैं इतना समय मानवता की भलाई के लिए जरूर लगाऊंगा। अगर इन्सान यह निश्चय करके चलेगा तो हो सकता है कि उस मालिक को रिझने में ज्यादा समय न लगे और वह आपको खुशियों से मालामाल कर दे। पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि यह सब कुछ करने में कोई दिखावा नहीं होना चाहिए, उसको सच्ची भावना से व सच्चे दिल से याद करो तो वह मालिक कोई कमी नहीं छोड़ता। जब इन्सान दिखावे के तौर पर उस मालिक को याद करता है तो मालिक भी उसे दिखावे के तौर पर ही खुशियां देता है। आप पर सच्चा रहमो-कर्म तभी बरसेगा जब आप सच्चे दिल से उस मालिक को याद करोगे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Wed, 09 Nov 2016 18:53:18 +0530</pubDate>
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                <title>वैराग्य से जल्दी मिलता है परमात्मा</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि प्रभु कण-कण में मौजूद है। जहां तक निगाह जाती है, वो मालिक है और जहां निगाह नहीं जाती वहां भी मालिक है। लेकिन जो उसको पाने की कोशिश करते हैं, उन्हें ही वो नजर आता है। जो इन्सान सच्चे राह पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/meditation-is-only-the-way-to-meet-god/article-280"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/pitaji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि प्रभु कण-कण में मौजूद है। जहां तक निगाह जाती है, वो मालिक है और जहां निगाह नहीं जाती वहां भी मालिक है। लेकिन जो उसको पाने की कोशिश करते हैं, उन्हें ही वो नजर आता है। जो इन्सान सच्चे राह पर चलते हुए यानि भक्ति, इबादत करते हुए, उस प्रभु-परमात्मा का नाम जपेंगे उसके लिए वैराग्य पैदा करेंगे, तो वह वैराग्य से बहुत जल्दी मिल जाया करता है। खुश्क नमाजें, खुश्क इबादत परमात्मा को जल्दी से मंजूर नहीं होती। जो भावना, श्रद्धा, सच्ची तड़प से उसको बुलाते हैं, वो जरूर चला आता है क्योंकि उसने तो कहीं से आना ही नहीं वो तो सबके अंदर पहले से मौजूद है। इन्सान की आत्मा इस काबिल बन जाती है कि उस परमात्मा को देख सके, उसकी कृपा-दृष्टि के काबिल बन सके। उसके लिए यह जरूरी है कि आप उसके नाम का सुमिरन करें ताकि उसकी कृपा हमेशा बनी रहे और उसकी रहमत से आप मालामाल होते रहें। पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि सतगुरु की रहमत पाने के लिए कोई पैसा, कपड़ा नहीं चाहिए, घर-परिवार छोड़ने की जरूरत नहीं और ना ही उसको आपके तन की जरूरत है, यह तो आपको जरूरत है। तो आप तन, मन, धन से दीन-दुखियों की सेवा करो और जितना हो सके दूसरों का सहारा बनो। अल्लाह, वाहेगुरू की बात जहां भी होती है उसमें बैठो, मन चाहे आने ना दे। मन तो बहुत जालिम है, यह नेगेटिव चीजों को बहुत जल्दी पकड़ता है। मन की सेवा आप सत्संग सुनें, मालिक की याद में समय लगाएं और धन की सेवा बीमार का ईलाज करवा दो, भूखे को खाना जो भी आर्थिक तौर पर कमजोर हैं, उनकी सहायता करो सच्चे दिल से तो वो धन की सेवा है। जैसे परमार्थी कार्य चलते रहते हैं आश्रम की तरफ से, आप उसमें समय निकालते हंै तन, मन, धन से तो यह आपकी सच्ची परमार्थी सेवा है। लेकिन जब आप सेवा करते हैं, उसके बाद मन को हावी ना होने दो। तरह-तरह की बातें बनाएगा मन। अपने मन से भक्ति के द्वारा लड़ो, सेवा के द्वारा लड़ो, तभी मन आपको मालिक के प्यार से जुड़ने देगा और तभी आप मालिक के प्यार को पा करखुशियों के हकदार बनते जाएंगे। जब तक आप मन की लगाम ढीली छोड़े रखते हैं, यह छोड़ेगा नहीं। इसे राम नाम से कस डालो, तभी यह जंगली घोड़ा काबू में आएगा। यह बताना फकीरों का काम है, मानना या ना मानना आपकी मर्जी है।</p>
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                <pubDate>Tue, 08 Nov 2016 18:14:37 +0530</pubDate>
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                <title>पांडव नगरी बरनावा में उमड़ी आस्था </title>
                                    <description><![CDATA[पावन भंडारा। यूपी में पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज के पवित्र अवतार माह में राम नाम की मची धूम 19600 ने गुरुमंत्र प्राप्त कर नशों व सामाजिक बुराइयों से की तौबा Barnawa, SachKahoon News: डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन अवतार माह के शुभ भण्डारे के अवसर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/holy-bhandara-held-in-barnawa-up-by-dr-msg/article-259"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/satsang-up-copy-1.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>पावन भंडारा। यूपी में पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज के पवित्र अवतार माह में राम नाम की मची धूम</strong></li>
<li><strong>19600 ने गुरुमंत्र प्राप्त कर नशों व सामाजिक बुराइयों से की तौबा </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">
<strong>Barnawa, SachKahoon News:</strong> डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन अवतार माह के शुभ भण्डारे के अवसर पर रविवार को पांडव नगरी बरनावा में आस्था का अथाह समंदर उमड़ पड़ा। सर्दी व घने कोहरे के बावजूद भी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व आसपास से लाखों की तादाद में पहुंची साध-संगत ने पावन भंडारे में शिरकत कर इस पवित्र अवसर का लाभ उठाया। बरनावा आने वाले हर रास्ते पर दिखाई दे रहा था तो सिर्फ आस्था का जनसमंदर। इस पवित्र अवसर पर 25 लाख से भी अधिक श्रद्धालुओं ने शिरकत की। शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा में आयोजित पावन भंडारे के रूहानी सत्संग के दौरान पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज के पाक-पवित्र अवतार माह की समस्त साध-संगत को बधाई देते हुए उनके जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। रूहानी सत्संग के पश्चात पूज्य गुरु जी ने 19600 नए लोगों के नशे व सामाजिक कुरीतियां छुड़ा उन्हें गुरुमंत्र प्रदान कर प्रभु-परमात्मा की प्राप्ति का बहुत ही आसान तरीका बताया।<br />
पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आप गुरु को मानने के साथ-साथ उनके वचनों को भी मानें। भगवान कण-कण, जर्रे-जर्रे में यानि हर जगह मौजूद है। जहां भगवान हो, वहां कभी भी बुरा काम मत करो। इंसान का मन बहुत चंचल है, मन दोस्त बनकर धोखा देता है। इसे गुरु के वचनों पर दृढ विश्वास करके सेवा-सुमिरन से काबू किया जा सकता है।<br />
पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इन्सान को कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। कभी अपनी औकात को नहीं भुलना चाहिए। कभी भी किसी जीव का दिल नहीं दुखाना चाहिए। ईश्वर की औलाद से बेगर्ज ΄यार, मोहब्बत करें। गुरुमंत्र का जाप करें। इससे इन्सान की जिंदगी बदल जाती है। सुमिरन करने से राक्षस प्रवृति के इन्सान भी देवता बन जाया करते हैं एवं इंसान प्रभु-परमात्मा के दर्श-दीदार के काबिल बन जाता है।<br />
पावन भण्डारे के शुभ अवसर पर पूज्य गुरु जी ने आश्रम द्वारा चलाए जा रहे मानवता भलाई कार्यों में उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड राज्य में प्रथम स्थान पर आने वाले ब्लॉकों के जिम्मेदार सेवादारों को अपने पावन कर-कमलों से चमचमाती ट्रॉफियां व मैडल प्रदान कर सम्मानित किया। भण्डारे की समाप्ति पर समस्त साध संगत को हलवे का प्रसाद वितरित किया गया तथा लंगर समिति के हजारों सेवादारों ने लाखों की तादाद में पहुंची साध-संगत को कुछ ही समय में हल्वे का प्रशाद वितरित किया।</p>
<p><strong>लाजवाब थे सभी प्रबंध</strong><br />
पूज्य सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन अवतार माह का पवित्र भंडारा मनाने शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा में लाखों की तादाद में पहुंची साध संगत की सुविधा के लिए तमाम बंदोबस्त किए गए थे। साध-संगत के लिए पीने के पानी, प्राथमिक चिकित्सा, लंगर-भोजन, पंडाल व ट्रैफिक पंडाल समेत तमाम तरह की सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई थी। साध-संगत को चंद मिनटों में ही लंगर-भोजन खिलाने के साथ हल्वे का प्रसाद वितरित कर दिया गया। आश्रम के बाहर सड़क पर हजारों की तादाद में सेवादार ट्रैफिक कमान संभाले हुए थे। सेवादारों ने जाम को खुलवा यातायात सुचारू किया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Mon, 07 Nov 2016 00:26:33 +0530</pubDate>
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