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                <title>singer - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>संगीत के आसमान में उड़ान भरतीं मैथिली ठाकुर</title>
                                    <description><![CDATA[हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले नेशनल क्रिएटर्स अवॉर्ड्स में बिहार की मशहूर गायिका Maithili Thakur को ‘कल्चरल एंबेसडर अवॉर्ड आॅफ ईयर’ से सम्मानित किया। जानकारी के मुताबिक यह अवॉर्ड इनोवेशन और क्रिएटिविटी के लिए दिया जा रहा है। यह पुरस्कार ऐसे लोगों को दिया जा रहा है जिन्होंने अपनी प्रतिभा से समाज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/maithili-thakur/article-55597"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/maithili-thakur.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले नेशनल क्रिएटर्स अवॉर्ड्स में बिहार की मशहूर गायिका <strong>Maithili Thakur</strong> को ‘कल्चरल एंबेसडर अवॉर्ड आॅफ ईयर’ से सम्मानित किया। जानकारी के मुताबिक यह अवॉर्ड इनोवेशन और क्रिएटिविटी के लिए दिया जा रहा है। यह पुरस्कार ऐसे लोगों को दिया जा रहा है जिन्होंने अपनी प्रतिभा से समाज को एक नई दिशा दिखाई है और लोगों के जीवन को आसान बनाने का प्रयास किया है। गीत-संगीत के माहौल में जन्मी मैथिली ठाकुर बिहार के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखती हैं। अपने दादा से संगीत सीखकर बड़ी हुई मैथिली ठाकुर इतनी कम उम्र में इस मुकाम पर हैं कि यह कहना गलत नहीं होगा कि आज उनकी गिनती मशहूर शास्त्रीय गायिकाओं में होती है। आज वह अपनी भजन प्रस्तुति और लोक गायन शैली से करोड़ों लोगों के दिलों पर राज कर रही हैं।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">जिस घर में मैथिली का जन्म हुआ वहां शुरू से ही संगीत का माहौल था। यानी कहा जा सकता है कि संगीत मैथिली के खून में है। Maithili Thakur के दादा संगीत शिक्षक थे। उनके पिता भी एक संगीत शिक्षक हैं। मैथिली ने 4 साल की उम्र में संगीत सीखना शुरू कर दिया था। संगीत की शिक्षा के साथ-साथ मैथिली ने अपनी स्कूली शिक्षा भी शुरू की। उनकी स्कूली शिक्षा मधुबनी के बेनीपट्टी गांव स्थित एक स्कूल से शुरू हुई। लेकिन यहां वह केवल 5वीं कक्षा तक ही शिक्षा प्राप्त कर सकी। बाद में जब वह अपने पिता के साथ दिल्ली आ गई, तो उन्होंने यहीं आगे की पढ़ाई शुरू की।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">मैथिली ने आज जो मुकाम हासिल किया है वह उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा है। अन्यथा उन्हें अपने करियर में कम संघर्षों का सामना नहीं करना पड़ा। जब भी उन्होंने सिंगिंग रियलिटी शो में हिस्सा लिया, तो उन्हें रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं वह इंडियन आइडल जूनियर तक पहुंची, टॉप 20 में भी चुनी गई। लेकिन यहां से आगे नहीं बढ़ सकी। यहां भी उन्हें एक बार फिर रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। इन सबके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। वह उम्मीदों और सपनों के दम पर संगीत के आकाश में उड़ान भरती रही। सिर्फ यूट्यूब के जरिए 23 वर्षीय मैथिली सालाना 50 लाख रुपये कमाती हैं। इसके अलावा वह कई ब्रैंड एंडोर्समेंट भी करती हैं।</div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;">मैथिली ठाकुर अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। मैथिली बताती हैं कि मैंने छठवीं क्लास में दिल्ली के एक स्कूल में एडमिशन लिया। मुझे अंग्रेजी नहीं आती थी। इस वजह से साथी मजाक उड़ाते थे, वे जानबूझकर मुझसे अंग्रेजी में ही बात करते थे। आज भी शहरों में अंग्रेजी को बहुत महत्व दिया जाता है। यदि अंग्रेजी नहीं आती, तो ऐसा समझा जाता है कि आपको कुछ भी नहीं आता। आज इस बारे में सोचती हूं, तो खुशी होती है कि मैं ऐसी सोच वाले लोगों को अपने गायन से जवाब दे पाई।</div>
<div style="text-align:justify;"></div>
<div style="text-align:right;"><strong>-देवेन्द्रराज सुथार</strong></div>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Mar 2024 10:21:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बॉलीवुड के मशहूर गायक के.के. का दिल का दौरा पड़ने से निधन</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता (एजेंसी)। देश के जाने-माने गायक कृष्णकुमार कुन्नथ उर्फ केके का मंगलवार को कोलकाता में आयोजित एक कॉन्सर्ट में परफॉर्म करते समय निधन हो गया है। वह महज 54 साल के थे। कॉन्सर्ट में गाते वक्त उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने करीब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/famous-bollywood-singer-kk-died-of-heart-attack/article-34061"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/singer-kk.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोलकाता (एजेंसी)।</strong> देश के जाने-माने गायक कृष्णकुमार कुन्नथ उर्फ केके का मंगलवार को कोलकाता में आयोजित एक कॉन्सर्ट में परफॉर्म करते समय निधन हो गया है। वह महज 54 साल के थे। कॉन्सर्ट में गाते वक्त उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने करीब 9:30 बजे मृत घोषित कर दिया। कलकत्ता मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएमआरआई) के डॉक्टरों के मुताबिक, के.के. को दिल का दौरा पड़ा था। उन्होंने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए जाने की भी जानकारी दी।</p>
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                                            <category>रंगमंच</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 10:10:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>संगीतकार- गायक बप्पी लहरी का मुंबई में निधन</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार और गायक बप्पी लहरी का बुधवार को मुंबई के क्रिटिकेयर अस्पताल में निधन हो गया। वह 69 वर्ष के थे। लहरी का इलाज कर रहे चिकित्सकों ने बताया कि लहरी एक महीने से अस्पताल में भती थे और उन्हें सोमवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/music-composer-singer-bappi-lahiri-passed-away-in-mumbai/article-30841"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/bappi-lahiri.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार और गायक बप्पी लहरी का बुधवार को मुंबई के क्रिटिकेयर अस्पताल में निधन हो गया। वह 69 वर्ष के थे। लहरी का इलाज कर रहे चिकित्सकों ने बताया कि लहरी एक महीने से अस्पताल में भती थे और उन्हें सोमवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। लेकिन मंगलवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">बप्पी लहरी कई स्वास्थ्य समस्याओ से पीड़ित थे। आधी रात से कुछ समय पहले ओएसए (ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया) के कारण उनका निधन हो गया। बप्पी लहरी ने को बॉलीवुड में डिस्को संगीत को लोकप्रिय बनाने के लिए जाना जाता था। उन्होंने 1970-80 के दशक के अंत में ‘चलते चलते’, ‘डिस्को डांसर’, नमक हलाल, डांस डांस और ‘शराबी’ जैसी कई फिल्मों में लोकप्रिय गाने दिए। उनका आखिरी बॉलीवुड गाना भंकस था 2020 में रिलीज हुई फिल्म ‘बागी 3’ के लिए गाया था।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>रंगमंच</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Feb 2022 10:29:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दिलकश आवाज से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर रही है अलका याज्ञनिक</title>
                                    <description><![CDATA[विशेष। अलका याज्ञनिक अपने करियर में अब तक 20 हजार से अधिक गीत गा चुकी है और आज भी फिल्म और संगीत जगत को अपनी दिलकश आवाज के जरिये सुशोभित कर रही है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/alka-yagnik-is-mesmerizing-the-audience-with-a-charming-voice/article-13793"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-03/alka-yagnik.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">जन्मदिन के अवसर पर</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> आकाशवाणी कोलकाता से अपने करियर की शुरूआत करके शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचने वाली बॉलीवुड की सुप्रसिद्ध पार्श्वगायिका अलका याज्ञनिक अपने गानों से आज भी श्रोताओं के दिलों पर राज कर रही हैं। अलका याज्ञनिक का जन्म कोलकाता में 20 मार्च 1965 को एक मध्यम वर्गीय गुजराती परिवार में हुआ। उनकी मां शुभा याज्ञनिक शास्त्रीय संगीत गायिका थी। घर में संगीत का माहौल होने के कारण अलका याज्ञनिक की रूचि भी संगीत की ओर हो गयी और वह महज छह वर्ष की उम्र से ही अपनी मां से संगीत की शिक्षा लेने लगीं।</p>
<p style="text-align:justify;">याज्ञनिक ने गायिका के रूप में अपने कैरियर की शुरूआत महज छह वर्ष की उम्र में कोलकाता आकाशवाणी से की जहां वह भजन गाया करती थीं। जब वह महज 10 वर्ष की थीं तभी उनकी मां उन्हें लेकर मुंबई आ गयी। यहां उनकी मुलाकात निमार्ता-निर्देशक राजकपूर से हुयी। राजकपूर ने अलका याज्ञनिक के गाने से प्रभावित होकर उन्हें संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल से मिलने की सलाह दी। लक्ष्मीकांत- प्यारेलाल भी अलका याज्ञनिक के पार्श्वगायन से काफी प्रभावित हुये और उनसे कहा कि अभी उनकी उम्र अभी काफी कम है। वह अभी बतौर डबिंग कलाकर काम कर ले बाद में वयस्क होने पर वे उन्हें पार्श्वगायिका के रूप में काम करने का मौका देंगे।</p>
<h3>अलका याज्ञनिक ने अपने सिने कैरियर की शुरूआत 1979 में की</h3>
<p style="text-align:justify;">अलका याज्ञनिक ने पार्श्वगायिका के रूप में अपने सिने कैरियर की शुरूआत 1979 में प्रदर्शित फिल्म ..पायल की झंकार ..से की। इस फिल्म में उन्हें एक गीत की कुछ पंक्तियां गाने का अवसर मिला। इसके बाद उन्हें फिल्म ..हमारी बहू अलका.. में भी पार्श्वगायन का अवसर मिला लेकिन कमजोर पटकथा और दोयम दर्जे के संगीत के कारण यह फिल्म टिकट खिड़की पर असफल साबित हुयी।</p>
<p style="text-align:justify;">लगभग दो वर्ष तक मुंबई में रहने के बाद अलका याज्ञनिक पार्श्वगायिका बनने के लिये संघर्ष करने लगी। आश्वासन तो सभी देते लेकिन उन्हें काम करने का अवसर कोई नहीं देता था। इस बीच अलका याज्ञनिक को 1981 में प्रदर्शित फिल्म ..लावारिस.. में पार्श्वगायन का मौका मिला। अमिताभ बच्चन अभिनीत इस फिल्म में उन्होंने ..मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है .. गीत गाया जो श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। इस गीत की सफलता के बाद अलका याज्ञनिक पार्श्वगायिका के रूप में कुछ हद तक अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गयी लेकिन उन्हें अब तक वह मुकाम हासिल नहीं हुआ था जिसके लिये वह सपनों के शहर मुंबई आई थी।</p>
<h3>श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय</h3>
<p style="text-align:justify;">लगभग आठ वर्ष तक मुंबई में संघर्ष करने के बाद 1988 में एन. चंद्रा की अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित अभिनीत पिल्म ..तेजाब .. में अपने गीत ह्यएक दो तीन की सफलता के बाद वह पार्श्वगायिका के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गयी। वर्ष 1989 में अलका याज्ञनिक के सिने करियर की एक और सुपरहिट फिल्म, कयामत से कयामत तक प्रदर्शित हुयी जिसमें उन्होंने उदित नारायण के साथ ..ऐ मेरे हमसफर, अकेले है तो क्या गम है और गजब का है दिन सोंचो जरा ..जैसे सुपरहिट युगल गीत गाये जो श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुये।</p>
<p style="text-align:justify;">इन फिल्मों की सफलता के बाद अलका याज्ञनिक को कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गये। वर्ष 1994 उनके सिने कैरियर का अहम वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष उनकी सुपरहिट फिल्म ..हम है राही प्यार के.. प्रदर्शित हुयी। इस फिल्म के लिये उन्हें पहली बार सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके बाद 1999 में प्रदर्शित फिल्म ..कुछ कुछ होता है .. के लिये भी उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अलका याज्ञनिक अपने सिने कैरियर में अब तक सात बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित की जा चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">माधुरी दीक्षित,श्री देवी काजोल और जूही चावला जैसी नामचीन अभिनेत्रियों की आवाज कही जाने वाली अलका याज्ञनिक ने तीन दशक से भी ज्यादा लंबे कैरियर में हिन्दी के अलावा अवधी. गुजराती, उड़िया, राजस्थानी, नेपाली, बंगला, भोजपुरी, पंजाबी, मराठी, तेलुगु, तमिल, मणिपुरी, अंग्रेजी और मलयालम फिल्मों के गीतों के लिये भी अपना स्वर दिया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2020 15:13:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>लोकसभा महाकुं भ, मैदान में उतरे गायक ईश्वर शर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[38 सालों से रागनियों के माध्यम से जागरूकता फैलाने का कर चुके काम सच कहूँ/विजय शर्मा करनाल। लोक सभा चुनाव की घोषणा व चुनाव आचार संहिता के साथ ही विभिन्न पार्टियां सक्रिय हो चुकी हैं ऐसे में इस बार देखा जा रहा है करनाल लोक सभा से सीट से लोकल उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>38 सालों से रागनियों के माध्यम से जागरूकता फैलाने का कर चुके काम</h2>
<p><strong>सच कहूँ/विजय शर्मा</strong><br />
<strong>करनाल।</strong> लोक सभा चुनाव की घोषणा व चुनाव आचार संहिता के साथ ही विभिन्न पार्टियां सक्रिय हो चुकी हैं ऐसे में इस बार देखा जा रहा है करनाल लोक सभा से सीट से लोकल उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। अभी तक निर्दलीय उम्मीदवार प्रमोद शर्मा प्रत्यक्ष से रूप से मैदान में उतर चुके हैं वहीं अब उनके सामने हरियाणा के सुप्रसिद्ध विशेष लोक कलाकार पंडित ईश्वर शर्मा खड़े हो चुके हैं। बता दें कि हरियाणा में करनाल लोकसभा क्षेत्र की अहम सीट है। जिस पर ज्यादातर ब्राह्मणों का कब्जा रहा है। सच कहूँ संवाददाता से विशेष बातचीत में ईश्वर शर्मा ने बताया कि उनका सपना शहीदों के सपनों का देश बनाना है। भटकते युवाओं को सही राह पर लाकर उन्हें रोजगार दिलाना व समाज में फैली कुरितियों के साथ नशों को समाप्त करना है।</p>
<h2>सांसद ऐसा हो जो समझ सके लोगों का दर्द: ईश्वर शर्मा</h2>
<p>बातचीत में लोक सभा चुनाव मैदान में कूदे गायक ईश्वर शर्मा ने बताया कि इस बार जनता चाहती है कि अबकी बार जो सांसद चुना जाए वह उनके बीच का हो। करनाल निवासियों को लोकसभा का सांसद पैराशूट वाला नहीं चाहिए जो कभी जीतने के बाद 5 सालों में ईद के चांद की तरह नजर आए। उन्होंने कहाकि सांसद ऐसा होना चाहिए जो लोगों की तकलीफ, उनके दर्द को समझ सके। और वह जनता के बीच रहे ही नहीं है बल्कि उनकी समस्याओं व दु:खों से भी बाकिफ हैं।</p>
<h2>जिन्दगी की दूसरी पारी राजनीति के साथ शुरू</h2>
<p>जिंदगी के 38 साल तक सरकार की नीतियों को जन जन तक पहुंचाने के बाद देशभर में अपनी हरियाणवी लोक गायन शैली रागनी के माध्यम से बेटी बचाओ और पढ़ाओ की अलख जगाने वाले देश लोक गायक ईश्वर शर्मा अपनी जिंदगी की दूसरी पारी राजनीति से शुरू करना चाहते हैं। ईश्वर शर्मा एक लोकल निवासी है और सेक्टर-6 करनाल में पिछले 48 वर्षों से रह हैं।</p>
<h2>समाज सेवा का है अनोखा जज्बा</h2>
<p>ईश्वर शर्मा ने बताया कि वह करनाल के सिरसल गांव के रहने वाले हंै। जिस उम्र में बच्चे बोलना सीखते हैं उस उम्र में उन्होंने गाना शुरू कर दिया था। अपने दादा पंडित बेजनाथ शर्मा और पिता राम किशन शर्मा से विरासत में मिली इस कला को उन्होंने आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि वह रागनी खुद लिखते हैं और खुद ही उसका संगीत निर्देशन करते हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने निवास पर बच्चों को नि:शुल्क गायकी का प्रशिक्षण भी देते हैं। ताकि रागनी के माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगार मिल सके।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Mar 2019 11:34:15 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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