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                <title>Lok Sabha Elections 2019 - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Lok Sabha Elections 2019 RSS Feed</description>
                
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                <title>लोकसभा चुनाव 2019: मतगणना आज, नतीजों में देरी की संभावना</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष को चुनाव आयोग से झटका: वीवीपैट मिलान में कोई नहीं होगा बदलाव | Lok Sabha Elections 2019 नतीजों में चार से पांच घंटों का समय लग सकता है नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2019) के सभी सात चरण समाप्त हो गए हैं और गुरुवार को होने वाली मतगणना के लिए सभी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/lok-sabha-elections-2019-counting-tomorrow/article-9263"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-05/lok-sabha-elections-2019.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">विपक्ष को चुनाव आयोग से झटका: वीवीपैट मिलान में कोई नहीं होगा बदलाव | Lok Sabha Elections 2019</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>नतीजों में चार से पांच घंटों का समय लग सकता है</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>लोकसभा चुनाव <strong>(Lok Sabha Elections 2019)</strong> के सभी सात चरण समाप्त हो गए हैं और गुरुवार को होने वाली मतगणना के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। निर्वाचन आयोग उन सभी केंद्रों पर तैयारियों की निगरानी कर रहा है जहां 542 लोकसभा सीटों और चार विधानसभा सीटों के लिए 23 मई की सुबह से मतगणना होने वाली है। जिलाधिकारियों और सभी संंबंधित अधिकारियों को मतगणना के लिए सुरक्षा व्यवस्था समेत सभी जरूरी इंतजामों की हर पल की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोग के निदेर्शानुसार, वीवीपैट पर्ची से वोटों के मिलान और सत्यापन के लिए पांच मतदान केंद्रों को औचक आधार पर चुना जाएगा। वीवीपैट सत्यापन प्रक्रिया में चार से पांच घंटों का समय लग सकता है। वहीं चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों की ओर से लोकसभा चुनाव की मतगणना में पहले वीवीपीएटी की पर्चियों के ईवीएम से मिलान की मांग को खारिज कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईवीएम-वीवीपीएटी के मुद्दे पर चुनाव आयोग ने अपनी बड़ी बैठकर कर इस संबंध में फैसला लिया। इस बैठक में आयोग के सीनियर अधिकारियों के साथ चुनाव आयुक्त अशोक लवासा भी मौजूद रहे। सूत्रों का कहना है कि बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि यदि आयोग विपक्षी दलों की मांग पर राजी होता है मतगणना में 2-3 दिन का समय लग सकता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सभी परिणाम वोटर हेल्पलाइन ऐप पर उलब्ध</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>इस बार लगभग सभी परिणाम वास्तविक समय पर हमारी वेबसाइट और वोटर हेल्पलाइन ऐप पर उपलब्ध होंगे। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>मतगणना के दिन केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को जिन स्ट्रांग रूम में रखा गया है, वहां भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गयी है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>आयोग ने इस बार के लोकसभा चुनावों के लिए 55 लाख ईवीएम का उपयोग किया है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>सूत्रों ने बताया कि जिलों में मतगणना कर्मियों को सभी आवश्यक प्रशिक्षण दिए गए हैं और छद्म अभ्यास भी करवाया गया है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>असिस्टेंट रिटर्निंग आॅफिसर उनके कामों की निगरानी करेंगे।</strong></li>
</ul>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 May 2019 19:09:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या हुडुडा समर्थकों की मद्द से तंवर कर सकेंगे चुनावी वैतरणी पार?</title>
                                    <description><![CDATA[-23 मई के चुनावी परिणाम ही बताएंगे कांग्रेस की एकजुटता का गुणा भाग सरसा सच कहूँ/सुनील वर्मा। गर्मी का मौसम उबाल पर है और ऐसे में राजनेताओं की साख भी दांव पर लगी है। राष्टÑीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दल के प्रत्याशी भी अपने समर्थकों के साथ गर्मी के इस मौसम में गांव-गांव, घर-घर, कस्बा-कस्बा मतदाताओं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/lok-sabha-elections-2019-4/article-8720"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/lok-sabha-elections-2019-2.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">-23 मई के चुनावी परिणाम ही बताएंगे कांग्रेस की एकजुटता का गुणा भाग</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा सच कहूँ/सुनील वर्मा।</strong> गर्मी का मौसम उबाल पर है और ऐसे में राजनेताओं की साख भी दांव पर लगी है। राष्टÑीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दल के प्रत्याशी भी अपने समर्थकों के साथ गर्मी के इस मौसम में गांव-गांव, घर-घर, कस्बा-कस्बा मतदाताओं के द्वार पर दस्तक दे रहे हैं। हालांकि किस राजनीतिक पार्टी की जीत होगी, किसकी हार, यह अभी तक सुनिश्चित नहीं है, मगर इतना सुनिश्चित अवश्य है कि राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की ओर से अपनी अपनी जीत के दावों में कोई कमी नहीं है। आरक्षित सरसा संसदीय सीट पर इस समय चार प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशी अपने समर्थकों सहित अपना चुनाव प्रचार करने में जुटे हैं</p>
<p style="text-align:justify;">। सरसा संसदीय सीट पर मुख्य तौर पर तीन राष्टÑीय पार्टियों जिनमें कांग्रेस, भाजपा और बसपा व लोसुपा मैदान में हैं वहीं क्षेत्रीय स्तर पर इनेलो और जजपा व आम आदमी पार्टी का गठबंधन चुनावी समर में है। इस समय जो सर्वाधिक चर्चा का विषय है वो है कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. अशोक तंवर का चुनाव लड़ना। क्योंकि हरियाणा कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और डॉ. अशोक तंवर के बीच का  द्वंद्व जाहिर है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2014 के संसदीय चुनाव में डॉ. अशोक तंवर को मिली हार के बाद से तंवर खेमे ने इस हार के लिए हुड्डा गुट को जिम्मेदार मानते हुए हुड्डा के समतुल्य संगठन खड़ा करने की होड़ की थी। इसी कड़ी में डॉ. तंवर ने विधानसभा चुनावों के दौरान सरसा और फतेहाबाद के विधानसभा क्षेत्र में अपनी मनपसंद के कांग्रेस उम्मीदवार बनाए थे। दोनों गुटों के बीच की कड़वाहट कम करने की दिशा में कांग्रेस के अनेक दिग्गजों ने प्रयास किए थे मगर यह कम नहीं हो पाई थी।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Apr 2019 20:06:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकसभा चुनाव 2019: नेताओं की बढ़ रही धड़कनें, देखते हैं कौन भारी?</title>
                                    <description><![CDATA[नेताओं की तैयारी, जनता की समझदारी -लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए ईमानदार और स्वच्छ छवि के उम्मीदवारों का चयन जरूरी नई दिल्ली सच कहूँ/जसविन्द्र सिंह। वायदों, घोषणाओं और आरोप-प्रत्यारोप के तीखे वारों के बीच चुनावी थाली सज रही है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आती जा रही हैं, वैसे-वैसे उम्मीदवारों की धड़कनें तेज हो […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">नेताओं की तैयारी, जनता की समझदारी</h2>
<h3 style="text-align:justify;">-लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए ईमानदार और स्वच्छ छवि के उम्मीदवारों का चयन जरूरी</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली सच कहूँ/जसविन्द्र सिंह</strong>। वायदों, घोषणाओं और आरोप-प्रत्यारोप के तीखे वारों के बीच चुनावी थाली सज रही है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आती जा रही हैं, वैसे-वैसे उम्मीदवारों की धड़कनें तेज हो रही हैं। आए दिन कुछ नया देखने और सुनने को मिल रहा है। मीडिया अपने धर्म से विमुख सा नजर आ रहा है। निजी चैनल चाटुकारिता की हदें पार करते दिखाई देते हैं। चलिए अब बात करते हैं मुद्दे की।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले चुनाव में मोदी लहर के बीच भाजपा ने आमजन के मन में जो आस जगाई थी, पिछले पाँच सालों वो कितनी पूरी हुई ये तो देश की जनता ही बताएगी। लेकिन नौकरियों, भ्रष्टाचार, महंगाई जैसे अहम मुद्दों पर सरकार की कार्रवाई का ज्यादा असर देखने को नहीं मिला। हालांकि विदेशों से संबंध सुधारने, सड़क निर्माण, शौचालय निर्माण, उज्जवला योजना और पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकियों की पनाहगाह पर वायुसेना की एयर स्ट्राइक से वाहवाही जरूर मिली। हालांकि पिछली सरकार के वायदों की अधूरी फेहरिस्त भी सत्ताधारी पार्टी के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">-वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने वालों से रहना होगा सावधान</h3>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में गरीबी के खिलाफ जंग का ऐलान कर सत्ता पक्ष के लिए चुनौतियां जरूर पेश कर दी हैं। लेकिन चुनावी रणनीति की धुरंधर मानी जाने वाली भाजपा और उसके सहयोगी दल अब कांग्रेस की इस चाल को कैसे मात देती है, ये काफी रोचक होगा। इस सबके बीच पिछली सरकारों के अधूरे वायदों की बनिस्पत कांग्रेस के लिए आमजन के मन में अपने वायदों को पूरा करने का विश्वास जगाना भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा</p>
<p style="text-align:justify;">आमतौर पर नजर आता है कि चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक पार्टियां अपनी गोटियां फीट करके अहम मुद्दों से ध्यान भटकाकर शराब, पैसों या अन्य प्रलोभनों से वोट हासिल कर सत्ता पर काबिज हो जाती हैं। अब ये देखना काफी रोमांचक होगा कि देश की जनता इस चुनावी रण में अहम मुद्दों को तव्वजों देती है या फिर राजनीतिक पार्टियों द्वारा वॉर रूम में बिछाई गई बिसात में उलझकर अपने वोट का इस्तेमाल करेगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लड़ें नहीं समझें</h3>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान दौर में हर व्यक्ति किसी-न-किसी पार्टी से अपने आपको इस कदर जोड़ चुका है कि उसे जनता के वास्तविक मुद्दों बेरोजगारों की फौज, गरीबी के चलते भूख से सिसकती जनता, भ्रष्टाचार, शिक्षा का गिरता स्तर से मानों कुछ लेना-देना नहीं है। एक बार अगर आप किसी नेता के खिलाफ थोड़ा बोल दें तो नौबत लड़ाई तक की आ जाती है, जो कि लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए शुभ संकेत नहीं है। जबकि नेता हमसे कितना इत्तेफाक रखते हैं या हमारे कितने हितैषी हैं, इस पर विचार करने की कोई जहमत नहीं उठा रहा है। जबकि इस वक्त देश के प्रत्येक के सिर पर नागरिक हिन्दू, मुस्लिम या जात-पात में बंटने और सत्ता और विपक्ष की चिकनी चुपड़ी बातों में आने की बजाय सतर्क होकर एक ईमानदार और स्वच्छ छवि का प्रत्याशी चुनने की जिम्मेदारी है, जिसे हमें बखूबी निभाना होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जनता से दूरी बनाने वालों से करें परहेज</h3>
<p style="text-align:justify;">अक्सर देखा जाता है कि चुनाव के वक्त नेता आपकी खुशामद करते हैं और जीत दर्ज करते ही दूरी बना लेते हैं। फिर जब भी आप कोई समस्या लेकर जाते हैं तो मिलना तो दूर की बात है, नजदीक तक फटकने नहीं दिया जाता और आप स्वयं को ठगा सा महसूस करते हैं। ऐसे नेताओं को सबक सिखाने का यही सही वक्त है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">ये हैं मुख्य मुद्दे</h1>
<h3 style="text-align:justify;">-धन कुबेरों और बाहुबलियों को सत्ता से दूर करना<br />
-देश से गरीबी और भिक्षावृत्ति को हटाना<br />
-पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार दिलाना<br />
-दफ्Þतरों में रिश्वत लेने वालों पर नकेल कसना<br />
-जात-पात और धर्म के नाम पर हिंसा को रोकना<br />
-आतंकवाद की जड़ को खत्म करना</h3>
<h1 style="text-align:justify;">कांग्रेस ने ये खोला पिटारा</h1>
<h3 style="text-align:justify;">-गरीबों के खातों में हर साल डाले जाएंगे 72000 रुपये<br />
-22 लाख सरकारी नौकरियों के पदों को भरा जाएगा।<br />
-रेल बजट की तर्ज पर किसानों के लिए अलग बजट बनेगा।<br />
-शिक्षा के क्षेत्र में जीडीपी का 6 फीसदी खर्च किया जाएगा।<br />
-मनरेगा के तहत 100 दिन से बढ़ाकर 150 दिन रोजगार</h3>
<h3 style="text-align:justify;">ऐसे बिछती है चुनावी बिसात</h3>
<p style="text-align:justify;">मिशन 2019 को कामयाब बनाने के लिए जुटी पार्टियों के वॉर रूम न सिर्फ पार्टी की रणनीति को अमलीजामा पहनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि नेताओं के दौरों को तय करने से लेकर हर उस क्षेत्र के मौसम तक का अपडेट तैयार करने में जुटे हैं, जहां नेताओं की अहम रैलियां हैं। इसके अलावा इसी वॉर रूम के जरिए ही विरोधी नेताओं की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों और उन्हें जवाब देने के लिए भी अपने नेताओं को इनपुट देने की जिम्मेदारी दी गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हर पहलू पर नजर</h3>
<p style="text-align:justify;">एक पार्टी से जुड़े सूत्र के अनुसार वॉर रूम में टीवी स्क्रीन के अलावा तैनात कार्यकतार्ओं और कर्मचारियों को बाकायदा लैपटॉप और कम्प्यूटर दिए गए हैं, जिन पर लगातार देश की राजनीतिक स्थिति पर नजर रखी जाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यूं चलता है काम</h3>
<p style="text-align:justify;">वॉर रूम को कई भागों में विभक्त किया गया है, जिनमें कुछ की जिम्मेदारी मीडिया के जरिए अपने और विरोधी दलों के नेताओं के बयानों पर नजर रखी जाती है और जहां भी विरोधी नेताओं पर जवाब देने की जरूरत होती है, उसके बारे में फौरन आलाकमान को जानकारी दी जाती है। वॉर रूम से मॉनीटरिंग के अलावा उसके जवाब के लिए डेटा भी दिया जाता है। मसलन, अगर विपक्षी पार्टी को घेरना है तो फौरन ही वॉर रूम में ऐक्टिव लोग मामले से जुड़े पहलुओं की जानकारी लेकर फौरन अपने नेताओं को देता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हर गतिविधि पर नजर</h3>
<p style="text-align:justify;">कौन सा नेता कब किस जगह सभा करने जाएगा और वहां तक पहुंचने के लिए विमान, हेलिकॉप्टर और कार की कैसे व्यवस्था होगी, यह सारा काम भी एक हिस्से में होता है। इसी विभाग के लोग तय करते हैं कि किस नेता को क्या वाहन दिया जाए और फिर वहां नेता को छोड़कर उस विमान या हेलिकॉप्टर को आगे कहां भेजना है। यही नहीं, जिस जगह सभा है, वहां किस तरह के मुद्दे हैं, जिन पर पार्टी के नेता को बोलना चाहिए, उसके टॉकिंग पाइंट जुटाने की भी जिम्मेदारी वॉर रूम में तैनात लोग ही निभाते हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/lok-sabha-elections-2019-2/article-8347</link>
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                <pubDate>Wed, 03 Apr 2019 16:57:06 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकसभा चुनाव 2019: बिहार में प्रथम चरण के लिए नामांकन शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[जमुई (सुरक्षित) सीट पहले से ही लोजपा के पास है पटना (एजेंसी)। बिहार में लोकसभा की 40 में से चार और विधानसभा की एक सीट के लिए 11 अप्रैल को पहले चरण में (Lok Sabha Elections 2019) होने वाले मतदान के लिए आज अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन भरने की प्रक्रिया शुरू हो […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h3>जमुई (सुरक्षित) सीट पहले से ही लोजपा के पास है</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटना (एजेंसी)।</strong> बिहार में लोकसभा की 40 में से चार और विधानसभा की एक सीट के लिए 11 अप्रैल को पहले चरण में <strong>(Lok Sabha Elections 2019)</strong> होने वाले मतदान के लिए आज अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई। राज्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, औरंगाबाद, गया (सुरक्षित), नवादा और जमुई (सुरक्षित) लोकसभा क्षेत्र के लिए आज अधिसूचना जारी कर दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही आज से नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। उम्मीदवार 25 मार्च तक नामांकन भर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 26 मार्च को होगी और 28 मार्च तक नाम वापस लिये जा सकेंगे। मतगणना 23 मई को होगी। प्रथम चरण में ही नवादा विधानसभा सीट उपचुनाव के लिए भी मतदान कराए जाएंगे। इस बार के लोकसभा चुनाव में बिहार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में तालमेल के तहत गया (सुरक्षित) सीट घटक दल जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के खाते में चली गई। वहीं, नवादा सीट लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) को दी गई है। जमुई (सुरक्षित) सीट पहले से ही लोजपा के पास है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Mar 2019 12:29:00 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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