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                <title>Court - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>Brij Bhushan Case: पहलवानों को झटका, बृजभूषण को क्लीन चिट, दिल्ली पुलिस ने बताई ये वजह</title>
                                    <description><![CDATA[बृजभूषण के खिलाफ पॉस्को रद्द करने की रिपोर्ट दाखिल Wrestlers Harassment Case: दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पॉस्को) के तहत दर्ज मामले को रद्द करने की रिपोर्ट दाखिल की। दिल्ली पुलिस ने संबंधित मामले की जांच के बाद पटियाला […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/posco-cancellation-report-filed-against-brijbhushan/article-48876"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/brij-bhushan-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">बृजभूषण के खिलाफ पॉस्को रद्द करने की रिपोर्ट दाखिल</h3>
<p style="text-align:justify;">Wrestlers Harassment Case: दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पॉस्को) के तहत दर्ज मामले को रद्द करने की रिपोर्ट दाखिल की। दिल्ली पुलिस ने संबंधित मामले की जांच के बाद पटियाला हाउस अदालत में यह रिपोर्ट दाखिल की।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले केंद्रीय खेल और युवा मामलों के मंत्री अनुराग ठाकुर ने पिछले सप्ताह पहलवानों से अपने सभी विरोध को वापस लेने का अनुरोध करते हुए आश्वासन दिया था कि पुलिस से 15 जून तक आरोपपत्र दाखिल करने के लिए कहा गया है। वहीं, 6 बालिग महिला पहलवानों का मामला राउज एवेन्यू कोर्ट में दर्ज किया गया। Brij Bhushan Case</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली पुलिस ने जांच पूरी होने के बाद अदालत के समक्ष एक रिपोर्ट पेश की है और पीड़िता एवं उसके पिता के बयानों के आधार पर डब्ल्यूएफआई प्रमुख के खिलाफ पॉस्को मामले को रद्द करने का अनुरोध किया है। पुलिस ने नाबालिग के बयान और जांच के विवरण को शामिल किया और कोई साक्ष्य नहीं मिलने पर इसे रद्द करने की रिपोर्ट दाखिल की है।<br />
मामले की अगली सुनवाई के लिएचार जुलाई की तिथि मुकर्रर की गयी है। Brij Bhushan Case</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jun 2023 16:19:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अदालत में उलझी जातीय जनगणना</title>
                                    <description><![CDATA[समाजशास्त्रीय विचारक डी.एन. मजूमदार ने कहा था कि जाति एक बन्द वर्ग है। देखा जाए तो अभी भी यह मानो खुलेपन की मोहताज है। फिलहाल इन दिनों Caste Census को लेकर मामला काफी फलक पर है। हालांकि यह पूरे देश में नहीं है मगर बिहार जाति आधारित सर्वेक्षण के चलते चर्चा में है। गौरतलब है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/caste-census-embroiled-in-court/article-47892"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/bihar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">समाजशास्त्रीय विचारक डी.एन. मजूमदार ने कहा था कि जाति एक बन्द वर्ग है। देखा जाए तो अभी भी यह मानो खुलेपन की मोहताज है। फिलहाल इन दिनों Caste Census को लेकर मामला काफी फलक पर है। हालांकि यह पूरे देश में नहीं है मगर बिहार जाति आधारित सर्वेक्षण के चलते चर्चा में है। गौरतलब है कि बिहार में जाति आधारित सर्वेक्षण का पहला दौर 7 से 21 जनवरी के बीच आयोजित हुआ था जबकि दूसरा दौर 15 अप्रैल को शुरू हुआ था। मगर यह न्यायालीय पचड़े में उलझ गया है। पटना उच्च न्यायालय के 4 मई के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में दायर याचिका में बिहार सरकार ने कहा कि जातीय सर्वेक्षण पर रोक से पूरी कवायद पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विदित हो कि पटना उच्च न्यायालय ने फिलहाल के लिये इस पर रोक लगायी है। जिस पर बीते 18 मई को शीर्ष अदालत ने पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर स्थगनादेश देने से इंकार कर दिया। राज्य सरकार का यह भी दृष्टिकोण है कि जाति आधारित आंकड़ों का संग्रह मूल अधिकार के अंतर्गत निहित अनुच्छेद 15 और 16 में एक संवैधानिक मामला है। विचारणीय मुद्दा यह भी है कि Caste Census का राजनीतिक या सुशासनिक दृष्टिकोण क्या होगा। वैसे तो भारत में जनगणना का चलन औपनिवेशिक सत्ता के दिनों से है और आखिरी बार ब्रिटिश शासन के दौरान जाति के आधार पर 1931 में जनगणना हुई थी। हालांकि 1941 में भी जनगणना हुई मगर आंकड़े पेश नहीं किये गये। आजादी के बाद भारत ने पहली जनगणना 1951 में सम्पन्न हुई जिसमें केवल अनुसूचित जातियों और जनजातियों को ही गिना गया जो अभी भी जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिहार में Caste Census राज्य सरकार के लिए अब सिर दर्द बन गयी है। बिहार सरकार ने पांच सौ करोड़ की लागत से इसे पूरा करने का संकल्प लिया था और अब मामला खटायी में जाता दिख रहा है साथ ही दौड़ सुप्रीम कोर्ट तक देखी जा सकती है। जबकि शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा है। हालांकि जुलाई में इसे लेकर अन्तिम निर्णय आ सकता है मगर तब तक के लिए नीतीश सरकार को असमंजस तो रहेगा ही। आखिर बिहार सरकार जातीय जनगणना को लेकर इतने उत्साहित क्यों है और अदालत का रवैया सरकार के पक्ष में क्यों नहीं है? बिहार सरकार की इस दलील कि राज्य ने कुछ जिलों में जातिगत जनगणना का 80 फीसद से अधिक सर्वे कार्य पूरा कर दिया है और महज 10 फीसद से भी कम कार्य बचा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं पूरा तंत्र जमीनी स्तर पर काम करने में लगा है। फिर भी इसे लेकर के कोर्ट पर कोई असर नहीं है और दो टूक कहें तो नीतीश सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। गौरतलब है कि दो चरणों में की जा रही इस प्रक्रिया का पहला चरण 31 मई तक पूरा करने का लक्ष्य था जबकि दूसरे चरण में बिहार में रहने वाले लोगों की जाति, उपजाति और सामाजिक, आर्थिक स्थिति से जानकारियां जुटाई जाएंगी। याचिकाकर्ता का कहना है कि बिहार में हो रही इस प्रक्रिया से संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन हो रहा है क्योंकि जनगणना का विषय संविधान की 7वीं अनुसूची की संघ सूची में है। ऐसे में जनगणना कराने का अधिकार केन्द्र के पास है।</p>
<p style="text-align:justify;">विदित हो कि मूल संविधान में मूल ढांचे की कोई चर्चा नहीं है। 1973 में केशवानंद भारती मामले में पहली बार यह शब्द मुखर हुआ था। सर्वोच्च न्यायालय संविधान का संरक्षक है और उसी के द्वारा समय-समय पर यह बताया जाता है कि मूल ढांचा क्या है? याचिका में यह भी उल्लेख है कि 1948 की जनगणना कानून में जातिगत जनगणना करवाने का कोई प्रावधान नहीं है। फिलहाल बिहार सरकार के लिए अभी की स्थिति प्रतीक्षा करो और देखो की है। सभी जातियों और समुदायों का सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण सामान्य जनगणना में नहीं होती है अर्थात् यह एक अलग किस्म की अवधारणा हालांकि 1931 के बाद साल 2011 में इसे पहली बार आयोजित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल जनगणना भारतीय आबादी का एक समग्र चित्र प्रस्तुत करता है जबकि Caste Census राज्य द्वारा सहायता के योग्य लाभार्थियों की पहचान करने का एक उपाय के रूप में देखा जा सकता है। चूंकि जनगणना 1948 के जनगणना अधिनियम के अधीन आती है ऐसे में सभी आंकड़ों को गोपनीय माना जाता है। जबकि जातीय जनगणना में दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग कर सरकारी विभाग परिवारों को लाभ पहुंचाने या प्रतिबंधित करने के लिए स्वतंत्र हैं। जातीय आधारित जनगणना के पक्ष और विपक्ष दोनों देखे जा सकते हैं। देखा जाये तो इसके होने से सामाजिक समानता और कार्यक्रमों के प्रबंधन में सहायता मिल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके माध्यम से ओबीसी आबादी के आकार, आर्थिक स्थिति, नीतिगत जानकारी, जनसांख्यिकीय जानकारी मसलन लिंगानुपात, मृत्युदर, जीवनप्रत्याशा और शैक्षिक डेटा आदि प्राप्त किया जा सकता है। इसमें कमियां भी पता चलेंगी और खूबियां भी। कमियों को दूर करने के लिए सरकार नीतियां बना सकती हैं और खूबियों से भरे लोगों को सरकार से मिल रही अतिरिक्त सेवा या लाभ को प्रतिबंधित किया जा सकता है। इसके विरोध में यह भी तर्क है कि जाति में एक भावनात्मक तत्व निहित होता है जिसका राजनीतिक और सामाजिक दुष्प्रभाव सम्भव है। हालांकि भारत विविध जातियों का देश है और राजनीति में इसका भरपूर उपयोग होता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में भले ही Caste Census को लेकर अलग किस्म की चर्चा हो मगर देश कभी भी जात-पात के बगैर रहा ही नहीं है। चुनाव का यह बड़ा आधार बिन्दु है यहां का बड़े-से-बड़ा नेता भी अपनी सियासी शतरंज की चाल इन्हीं जातियों के इर्द-गिर्द बनाता है। वैसे इस सच से पूरी तरह मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि जाति के आंकड़े न केवल इस प्रश्न पर स्वतंत्र शोध करने में सक्षम होंगे कि सकारात्मक नीति या कार्यवाही की आवश्यकता किसे है और किसे नहीं बल्कि यह आरक्षण की प्रभावशीलता में भी एक नया नजरिया देगा। दुविधा यह है कि कुछ बिन्दुओं की सही समझ व परख नहीं होने से एक ऐसी भ्रम की अवस्था बनती है जिससे आम जनमानस एक नई असुविधा में फंस जाता है। जातीय जनगणना कितना सही है यह कह पाना मुश्किल है। मगर इसके केवल दुष्प्रभाव हैं ऐसे मनोदशा भी ठीक नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में प्रत्येक 10 साल में एक जनगणना की जाती है मगर कोविड-19 के कारण साल 2021 में यह हो नहीं पाया। जनगणना से सरकार को विकास योजनाएं तैयार करने में मदद मिलती है। किसे कितनी हिस्सेदारी मिली, कौन, कितना वंचित है आदि का पता भी चलता है और जातीय जनगणना तो इससे दो और कदम आगे है। साल 2010 में जब भाजपा सत्ता में नहीं थी तब ऐसा देखा गया कि संसद के भीतर भाजपा के नेता स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे जाति आधारित जनगणना को लेकर कहीं अधिक तर्कशील थे। मगर सत्तासीन भाजपा सरकार से जब संसद में सवाल किया गया कि 2021 की जनगणना किस हिसाब से होगी अर्थात जातिगत या सामान्य तरीके से। सरकार का लिखित जवाब था कि केवल अनुसूचित जाति और जनजातियों को ही गिना जायेगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="ना हों परेशान, आरबीआई ने किया समाधान ! जानें ‘गुलाबी नोट’ की कहानी आरबीआई की जुबानी" href="http://10.0.0.122:1245/dont-worry-rbi-has-a-solution/">ना हों परेशान, आरबीआई ने किया समाधान ! जानें ‘गुलाबी नोट’ की कहानी आरबीआई की जुबानी</a></p>
<p style="text-align:justify;">साफ है कि अन्य अर्थात् ओबीसी आदि को गिनने की कोई योजना नहीं थी। दरअसल जो पार्टी सत्ता में रहती है वह Caste Census को लेकर बहुत आतुर नहीं रहती है। हालांकि यह नीतीश कुमार पर लागू नहीं है मगर जब पार्टियां विपक्ष में होती हैं तो इसे लेकर जोर भी लगाती हैं और शोर भी करती हैं और जातिगत जनगणना को मुद्दे के रूप में परोसती हैं। फिलहाल नफे-नुकसान की इस सोच के साथ कि जातीय जनगणना का सकारात्मक दृष्टिकोण किस बिन्दु तक होगा और नकारात्मक पहलू भारतीय समाज में इससे कितना पनपेगा से परे न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. सुशील कुमार सिंह, वरिष्ठ स्तंभकार एवं प्रशासनिक चिंतक (ये लेखक के निजी विचार हैं।)</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 May 2023 10:10:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्तार अंसारी को बड़ी राहत, कोर्ट ने किया दोषमुक्त, जानिये क्या है मामला</title>
                                    <description><![CDATA[मीर हसन पर जानलेवा हमले के आरोप से मुख्तार दोषमुक्त Ghazipur (सच कहूँ न्यूज)। उत्तर प्रदेश में गाजीपुर की एक विशेष अदालत ने बहुचर्चित मीर हसन की हत्या के प्रयास के मामले में बुधवार को पूर्व विधायक Mukhtar Ansari को दोषमुक्त करार दिया। गौरतलब है कि 24 नवम्बर 2009 को मोहम्दाबाद थाना क्षेत्र के गांव […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/mukhtar-acquitted-of-charge-of-murderous-attack-on-mir-hasan/article-47728"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/mukhtar-ansari1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">मीर हसन पर जानलेवा हमले के आरोप से मुख्तार दोषमुक्त</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>Ghazipur (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उत्तर प्रदेश में गाजीपुर की एक विशेष अदालत ने बहुचर्चित मीर हसन की हत्या के प्रयास के मामले में बुधवार को पूर्व विधायक Mukhtar Ansari को दोषमुक्त करार दिया। गौरतलब है कि 24 नवम्बर 2009 को मोहम्दाबाद थाना क्षेत्र के गांव लिकपुरा निवासी मीर हसन अपने घर के पास सड़क पर सुबह टहल रहे थे कि बदमाशों ने उन पर गोली चलायी थी। गोली उनके कनपट्टी के बगल से निकल गई। हमलावरों में एक सोनू यादव ने पहचान लिए जाने के बाद धमकी दी थी कि दो दिन के अंदर जेल में जाकर मुख्तार अंसारी से मिल लो नही तो पूरे घर वालो को मार देंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला | Mukhtar Ansari</h3>
<p style="text-align:justify;">सूचना के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और विवेचना उपरांत आरोपी सोनू यादव और Mukhtar Ansari के विरुद्ध आरोप पत्र पेश किया। विचारण अभियोजन की तरफ से विशेष लोक अभियोजक नीरज श्रीवास्तव ने कुल चार गवाहों को पेश किया। सभी ने अपना बयान न्यायालय में दर्ज कराया। दोनो तरफ की बहस सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश (एमपी एमएलए) दुर्गेश की अदालत ने मुख्तार अंसारी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। फैसले के समय मुख्तार अंसारी जरिये वीडियो कांफ्रेंसिंग से उपस्थित रहे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 May 2023 14:38:26 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>छात्र के हत्यारे को आजीवन कैद-ए-बामुशक्कत</title>
                                    <description><![CDATA[कैराना। नौ वर्ष पूर्व खाने के विवाद में बलकटी से प्रहार करके मदरसे के छात्र की निर्मम हत्या करने के आरोपी को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए आजीवन कैद-ए-बामुशक्कत व पच्चीस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। हत्यारा घटना के बाद से ही कारागार में बंद है। जिला शासकीय अधिवक्ता संजय चौहान […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/life-imprisonment-for-the-killer-of-the-student/article-46834"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/kairana-8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कैराना।</strong> नौ वर्ष पूर्व खाने के विवाद में बलकटी से प्रहार करके मदरसे के छात्र की निर्मम हत्या करने के आरोपी को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए आजीवन कैद-ए-बामुशक्कत व पच्चीस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। हत्यारा घटना के बाद से ही कारागार में बंद है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला शासकीय अधिवक्ता संजय चौहान व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार पुंडीर ने बताया कि 26/27 अप्रैल 2014 की रात्रि में कैराना कस्बे के कांधला रोड पर स्थित मदरसा जामियातुल इमाम रहमतुल्लाह अल इस्लामिया में 21 वर्षीय छात्र सालिम की बलकटी से प्रहार करके निर्मम हत्या कर दी गई थी। मदरसे के मुफ्ती मोहम्मद इफ्तखार ने कोतवाली में घटना की रिपोर्ट दर्ज करायी थी। जांच-पड़ताल के बाद पुलिस ने सालिम की हत्या के आरोप में मदरसे के ही छात्र कासिम पुत्र अलाऊद्दीन निवासी ग्राम कोट मुकारपुर तहसील छछरौली जिला यमुनानगर हरियाणा को हत्या में प्रयुक्त बलकटी के साथ गिरफ्तार किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया था कि उसका सालिम के साथ खाने को लेकर झगडा हो गया था, जिस कारण उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी का चालान करके जेल भेज दिया। बाद में जांच अधिकारी इंस्पेक्टर अजय कुमार चौहान ने मामले की तफ्तीश करके आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाह कोर्ट के समक्ष पेश किए गए। यह मामला कैराना स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश(रेप एंड पॉक्सो) रेशमा चौधरी की अदालत में विचाराधीन था। गुरुवार को न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने एवं पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद आरोपी कासिम को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व पच्चीस हजार रूपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई। अर्थदण्ड अदा न करने पर कोर्ट ने दोषी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने के आदेश दिए है।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/life-imprisonment-for-the-killer-of-the-student/article-46834</link>
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                <pubDate>Fri, 28 Apr 2023 11:46:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चोरी के दो मामलों में आरोपी को कारावास व अर्थदंड की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[कैराना। कोर्ट ने चोरी के दो अलग-अलग मामलों के एक आरोपी को दोष सिद्ध पाए जाने पर एक-एक वर्ष के कारावास व तीन-तीन हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। एसपी शामली अभिषेक झा ने बताया कि वर्ष 2022 में सचिन पुत्र राकेश निवासी मोहल्ला नौकुआं कस्बा शामली के विरुद्ध सदर कोतवाली पर चोरी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/in-two-cases-of-theft-the-accused-was-sentenced-to-imprisonment-and-fine/article-45356"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/court-hammer14.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कैराना।</strong> कोर्ट ने चोरी के दो अलग-अलग मामलों के एक आरोपी को दोष सिद्ध पाए जाने पर एक-एक वर्ष के कारावास व तीन-तीन हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">एसपी शामली अभिषेक झा ने बताया कि वर्ष 2022 में सचिन पुत्र राकेश निवासी मोहल्ला नौकुआं कस्बा शामली के विरुद्ध सदर कोतवाली पर चोरी एवं बरामदगी के दो अलग-अलग अभियोग पंजीकृत किये गए थे, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार करके जेल भेजने के साथ ही दोनों मामलों से सम्बंधित साक्ष्यों के संकलन किये जाने का कार्य किया गया। विवेचक को दोनों मामलों में नियमित रूप से प्रभावी पैरवी हेतु निर्देशित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">विवेचक ने दोनों मामलों की जांच करके आरोप-पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। उक्त दोनों मामले कैराना स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में विचाराधीन थे। बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी सचिन को दोनों मामलों में दोषी करार देते हुए एक-एक वर्ष के कारावास तथा तीन-तीन हजार रूपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर पंद्रह-पंद्रह दिन के अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया गया है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Mar 2023 10:37:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो आरोपियों को कठोर कारावास व अर्थदंड की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[कैराना। कोर्ट ने लूट व अवैध हथियार बरामदगी के दो अलग-अलग मामलों में दोष सिद्ध पाए जाने पर दो आरोपियों को कठोर कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। एसपी शामली अभिषेक झा ने बताया कि वर्ष 2015 में कैराना पुलिस ने इसरार पुत्र नासिर निवासी ग्राम जहानपुरा को लूट एवं बरामदगी के एक मामले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/two-accused-sentenced-to-rigorous-imprisonment-and-fine/article-45231"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/court-hammer11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कैराना।</strong> कोर्ट ने लूट व अवैध हथियार बरामदगी के दो अलग-अलग मामलों में दोष सिद्ध पाए जाने पर दो आरोपियों को कठोर कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">एसपी शामली अभिषेक झा ने बताया कि वर्ष 2015 में कैराना पुलिस ने इसरार पुत्र नासिर निवासी ग्राम जहानपुरा को लूट एवं बरामदगी के एक मामले में गिरफ्तार करके जेल भेजा था। विवेचक ने मामले की जांच करके आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। यह मामला कैराना स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में विचाराधीन था।</p>
<p style="text-align:justify;">सोमवार को न्यायालय ने आरोपी इसरार दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दूसरे मामले में, कैराना कोतवाली पुलिस ने वर्ष 2022 में राममेहर पुत्र रघुवीर निवासी पानीपत हरियाणा के विरुद्ध अवैध हथियार बरामदगी का अभियोग पंजीकृत किया था। यह मामला भी कैराना स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में विचाराधीन था। सोमवार को कोर्ट ने आरोपी राममेहर को दोष सिद्ध पाए जाने पर साढ़े आठ माह के कारावास एवं एक हजार रूपये के अर्थदंड से दण्डित किया।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Mar 2023 19:22:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी को दस वर्ष का कठोर कारावास</title>
                                    <description><![CDATA[कैराना। न्यायालय ने नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने तथा दुष्कर्म करने के आरोपी को दोषी करार देते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास व 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जिला शासकीय अधिवक्ता संजय चौहान तथा विशेष लोक अभियोजक पुष्पेंद्र मलिक ने बताया कि 13 मई 2021 को थानाभवन क्षेत्र […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/ten-years-rigorous-imprisonment-to-the-accused-of-raping-a-teenager/article-42558"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/court3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कैराना।</strong> न्यायालय ने नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने तथा दुष्कर्म करने के आरोपी को दोषी करार देते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास व 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जिला शासकीय अधिवक्ता संजय चौहान तथा विशेष लोक अभियोजक पुष्पेंद्र मलिक ने बताया कि 13 मई 2021 को थानाभवन क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने थाने पर मुकदमा दर्ज कराया था। बताया कि थाना गढ़ीपुख्ता क्षेत्र के गांव मालैंडी निवासी विकास पुत्र ओमपाल उसकी 17 वर्षीय नाबालिग पुत्री को बहला फुसलाकर भगा ले गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">बाद में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके किशोरी को बरामद कर लिया। पुलिस ने किशोरी का मेडिकल कराया, जिसमें उसके साथ दुष्कर्म किये जाने की पुष्टि हुई। विवेचक ने मामले की जांच करके आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया। यह मामला कैराना स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश(पॉक्सो विशेष) मुमताज अली की कोर्ट में विचाराधीन था। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल सात गवाह न्यायालय के समक्ष पेश किये गए।</p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार को विद्वान न्यायाधीश मुमताज अली ने पत्रवालियों के गहन अवलोकन करने एवं दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं के तर्क-वितर्क सुनने के पश्चात आरोपी विकास को दोषी करार देते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास व 25 हजार रूपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। कोर्ट ने जुर्माना अदा न करने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने के आदेश दिए है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/ten-years-rigorous-imprisonment-to-the-accused-of-raping-a-teenager/article-42558</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Jan 2023 18:48:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आर्थिक पिछड़ों को आरक्षण पर अदालत की मुहर</title>
                                    <description><![CDATA[ सामाजिक न्याय मंत्रालय की वर्ष की बड़ी कामयाबी नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2022 में समाज के कमजोर वर्गों के लिए अनेक कार्यक्रम एवं योजनायें संचालित कीं जिनमें सरकार के प्रयासों से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए नौकरियों एवं शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/court-seal-on-reservation-for-economic-backward/article-41623"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/court.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;"><strong> सामाजिक न्याय मंत्रालय की वर्ष की बड़ी कामयाबी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2022 में समाज के कमजोर वर्गों के लिए अनेक कार्यक्रम एवं योजनायें संचालित कीं जिनमें सरकार के प्रयासों से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए नौकरियों एवं शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण को जारी रखने और नशा मुक्ति अभियान जैसे प्रमुख कार्यक्रम हैं। सरकार की कोशिशों के कारण, संविधान के 103वें संशोधन अधिनियम 2019 के माध्यम से संविधान में नये अनुच्छेद 15(6) और 16(6) को शामिल किया गया। ये अनुच्छेद राज्यों को सरकारी नौकरियों और सरकारी शैक्षिक संस्थानों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 प्रतिशत तक का आरक्षण प्रदान कराते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके आधार पर सरकार द्वारा ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की योजना जनवरी 2019 में लागू की गई। संविधान 103वें संशोधन अधिनियम 2019 की वैधता को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में कई रिट याचिकाएं दायर की गई थीं। प्रमुख मामला 2019 का रिट याचिका 55 है-जनहित अभियान बनाम भारत संघ। इन सभी मामलों को उच्चतम न्यायालय ने संविधान पीठ के पास विचार के लिए भेजा था। संविधान पीठ ने दिनांक सात नवंबर 2022 को बहुमत के फैसले से संविधान 103वें संशोधन अधिनियम 2019 की वैधता को बरकरार रखा है और सभी रिटों को खारिज कर दिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>गांवों में नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) की शुरूआत करेगा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय अगले वर्ष मई में गृह मंत्रालय के सीमा प्रबंधन विभाग के साथ मिलकर 18 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में 17,000 सीमावर्ती गांवों में नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) की शुरूआत करेगा। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 15 अगस्त 2020 को एनएमबीए की शुरूआत की थी और व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण के निष्कर्षों और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) से प्राप्त इनपुट के आधार पर इसे 372 कमजोर जिलों में पहले लागू किया जा रहा है। आध्यात्मिक/समाजसेवी जैसे चिन्मय मिशन, आर के मिशन, आर्ट आॅफ लिविंग फाउंडेशन, ब्रह्माकुमारी और संत निरंकारी मिशन जैसे संगठन सक्रिय रूप से एनएमबीए को समर्थन देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्रालय के अनुसार अब तक जमीनी स्तर पर आयोजित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से तीन करोड़ से अधिक युवाओं और दो करोड़ से अधिक महिलाओं सहित 9.3 करोड़ से अधिक लोगों को मादक द्रव्यों के सेवन के बारे में जागरुक किया गया है। एनएमबीए में 2.7 लाख से ज्यादा शैक्षिक संस्थानों की भागीदारी की है। आठ हजार से ज्यादा मास्टर स्वयंसेवकों (एमवी) की पहचान की गई और उन्हें एनएमबीए का नेतृत्व करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया। एनएमबीए के आधिकारिक ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया एकाउंट के माध्यम से भी नशे के विरुद्ध जागरुकता फैलाने का काम किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्रालय के अनुसार अब तक हरियाणा के विभिन्न जिलों के जेल परिसरों में 15 नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं, और त्रिपुरा राज्य के जेल परिसर में एक नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किया गया है। परामर्श, उपचार और पुनर्वास सेवाओं को व्यापक पहुंच प्रदान करने के लिए, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय गैप जिलों में जिला नशा मुक्ति केंद्र (डीएसी) और सरकारी अस्पतालों में व्यसन उपचार सुविधाओं (एटीएफ) की स्थापना करेगा। 99,595 शैक्षणिक संस्थानों के 1.67 करोड़ से ज्यादा छात्रों ने राष्ट्रीय नशा मुक्त प्रतिज्ञा में हिस्सा लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्रालय की ओर से वित्तीय वर्ष 2022-23 से अनुसूचित जाति और अन्य के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं को आॅनलाइन क्रियान्वित किया जाएगा और एपीबीएस के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभार्थी हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे लाभार्थी के खाते में केंद्रीय सहायता का भुगतान किया जाएगा। 2022-23 से, अनुसूचित जातियों और अन्य लोगों के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति योजनाओं का संचालन आॅनलाइन किया जाएगा और एपीबीएस के माध्यम केंद्रीय सहायता राशि का भुगतान सीधे प्रत्यक्ष लाभार्थी हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से लाभार्थियों के खाते में किया जाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>छात्रों के सत्यापन</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">वित्त वर्ष 2022-23 से, अनुसूचित जातियों के लिए पोस्ट और प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत, छात्रों के सत्यापन की सभी प्रक्रिया बिना किसी मैनुअल प्रक्रिया के डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हुए स्वचालित रूप से प्रमाणित डेटाबेस का उपयोग करके की जाएगी। वित्त वर्ष 2022-23 से प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत, आॅनलाइन एंड टू एंड प्रोसेसिंग, आॅनलाइन लेन-देन के माध्यम से पात्रता के सत्यापन में ज्यादा पारदर्शिता सुनिश्चित करने, संस्थानों द्वारा दोहरेपन और गलत दावों को नियंत्रित करने का काम शुरू किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्रालय के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 से, योजनाओं का सुचारु और प्रभावी कार्यान्वयन करने के लिए उपर्युक्त दोनों योजनाओं के लिए लाभार्थियों की प्रमाणिकता का सत्यापन करने के लिए राज्य के छात्रवृत्ति पोर्टलों पर छात्रवृत्ति आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं।वर्ष 2022 में इस विभाग द्वारा प्राप्त भौतिक और वित्तीय उपलब्धियों में प्रमुख रूप से वर्ष 2022 में राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति (एनओएस) के अंतर्गत सीटों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 कर दी है। मंत्रालय ने वर्ष 2022 (जनवरी-नवंबर, 2022) के दौरान, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) ने 1,28,409 लाभार्थियों के बीच 418 करोड़ रुपये का वितरण किया है।वर्ष 2022 के दौरान गैर-सरकारी संगठनों/संगठनों को वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम योजना के अंतर्गत 75.63 करोड़ रुपये कुल अनुदान प्रदान किया गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (डीओएसजेई) अनुसूचित जाति आदि के लिए राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति (एनओएस) लागू कर रहा है, जिसके अंतर्गत अनुसूचित जातियों के चयनित छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, गैर अधिसूचित, घुमंतू और अर्द्ध-घुमंतू जनजातियां, भूमिहीन कृषि मजदूर और पारंपरिक कारीगर श्रेणियों को विदेशों में परास्नातक और पीएचडी स्तर के पाठ्यक्रम करने के लिए छात्रवृत्ति दी जाती है। छात्रों का चयन संस्थानों की शीर्ष 500 क्यूएस अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग की योग्यता के आधार पर किया जाता है, जिस संस्थानों में उन्होंने 2021-22 से नामांकन प्राप्त किया है। एनओएस योजना की भौतिक/वित्तीय उपलब्धियां इस प्रकार हैं..वर्ष 2022-23 के दौरान 125 उम्मीदवारों का चयन किया गया, जिसका मतलब यह है कि सभी उपलब्ध सीट पूरी तरह से भरी हुई थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">2021-22 के दौरान, आवंटित राशि को 30 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 35 करोड़ रुपये कर दी गयी। 2022-23 के लिए बीई 36 करोड़ रुपये है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप (एनएफएससी) योजना का उद्देश्य अनुसूचित जातियों के छात्रों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा मान्यता प्राप्त भारतीय विश्वविद्यालयों/संस्थाओं/कॉलेजों में विज्ञान, मानविकी और सामाजिक विज्ञान विषयों में एमफिल, पीएचडी के लिए उच्च अध्ययन प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहायता के रूप में फेलोशिप प्रदान करना है। विभाग इसके अलावा अनुसूचित जातियों और कमजोर वर्गों के लिए अनेक योजनायें संचालित कर रहा है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/court-seal-on-reservation-for-economic-backward/article-41623</link>
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                <pubDate>Thu, 29 Dec 2022 17:59:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हत्या का आरोपी कोर्ट की छठी मंजिल से कूदा, मौत</title>
                                    <description><![CDATA[-पुलिस ने मेडिकल कराने के बाद अदालत में किया था पेश सच कहूँ/राजेंद्र दहिया फरीदाबाद। 19 वर्षीय युवती की बड़ी ही बेरहमी के साथ पीट-पीटकर हत्या करने वाले आरोपी (murder accused) को पुलिस ने 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार तो कर लिया लेकिन जब कोर्ट में पेश करने के लिए गए तो आरोपी महेंद्र ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/murder-accused-jumped-from-the-sixth-floor-of-the-court-died/article-39771"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/pe.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">-पुलिस ने मेडिकल कराने के बाद अदालत में किया था पेश</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/राजेंद्र दहिया</strong><br />
<strong>फरीदाबाद।</strong> 19 वर्षीय युवती की बड़ी ही बेरहमी के साथ पीट-पीटकर हत्या करने वाले आरोपी <strong>(murder accused)</strong> को पुलिस ने 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार तो कर लिया लेकिन जब कोर्ट में पेश करने के लिए गए तो आरोपी महेंद्र ने अदालत की छठी मंजिल से कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। आरोपी महेंद्र को पुलिस ने मेडिकल कराने के बाद पुलिस कस्टडी में अदालत में पेश किया था। अब इस मामले में न्यायिक जांच की मांग कर रही है</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>फरीदाबाद के सेक्टर 23 ए का रहने वाला था आरोपी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि गिरफ्तार आरोपी महेंद्र फरीदाबाद के सेक्टर 23 ए का रहने वाला है। पुलिस ने आरोपी महेंद्र को गुप्त सूत्रों की सूचना के आधार पर बल्लभगढ़ बस स्टैंड से गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ 10 नवंबर को मुजेसर थाना में हत्या की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था जिसमें आरोपी ने अपनी दोस्त 19 वर्षीय रोशनी की हत्या कर दी थी।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:-</strong><a href="http://10.0.0.122:1245/reduction-in-incidents-of-stubble-burning-in-haryana/">पंजाब की तुलना में हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी</a></p>
<p style="text-align:justify;">युवती के भाई किशन के अनुसार वह कल सुबह 9 नवंबर को वह सुबह घर से ड्यूटी करने के लिए निकली थी परंतु शाम को घर वापिस नहीं आई। 10 नवंबर की सुबह किसी अनजान व्यक्ति ने फोन करके किशन को बताया कि उसकी बहन रोशनी संजय कॉलोनी में सोहना मोड़ पर गंभीर हालत में पड़ी हुई है जिस पर किशन अपने परिजनों के साथ रोशनी को तलाशते हुए गया। वहां पहुंचते ही रोशनी ने बताया कि महेंद्र ने उसे चोट मारी है। किशन रोशनी को इलाज के लिए बीके अस्पताल ले गया लेकिन डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।</p>
<h3>घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया</h3>
<p style="text-align:justify;">मृतक के भाई की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके उसकी तलाश शुरू की गई जिसे 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार किया गया। आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद उसका मेडिकल परीक्षण कराया था और आज उस को अदालत में पेश किया गया था जहां से उसने कोर्ट रूम से ही अचानक दौड़कर ऊपर से ही छलांग लगा दी। घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Nov 2022 19:00:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पति-पत्नी को उम्रकैद की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[अग्रोहा में अक्तूबर 2020 में की थी एक महिला की हत्या हिसार(सच कहूँ न्यूज) हिसार में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित शेरावत की कोर्ट ने अग्रोहा में रेनू की गैस भट्टी के बर्नर से वार कर हत्या करने के मामले (conviction in murder case) में दोषी दीपक और उसकी पत्नी पूनम को दोषी करार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/conviction-in-murder-case/article-39070"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/court.jpg" alt=""></a><br /><h3><strong>अग्रोहा में अक्तूबर 2020 में की थी एक महिला की हत्या<br />
</strong></h3>
<p><strong>हिसार(सच कहूँ न्यूज)</strong> हिसार में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित शेरावत की कोर्ट ने अग्रोहा में रेनू की गैस भट्टी के बर्नर से वार कर हत्या करने के मामले <strong>(conviction in murder case)</strong> में दोषी दीपक और उसकी पत्नी पूनम को दोषी करार देते हुए दोनों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने 20 हजार रुपए का जुमार्ना लगाया है। अग्रोहा थाना पुलिस ने इस संबंध में 6 अक्टूबर 2020 को केस दर्ज किया था।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><a href="http://10.0.0.122:1245/panchayat-election-haryana-2/">70 साल के बाद हरियाणा के इस गांव में सर्वसम्मति बनेगा सरंपच</a></p>
<p>कोर्ट में चले अभियोग के अनुसार ठंडी सड़क एरिया के गोविंदा ने पुलिस को शिकायत देकर बताया था कि 12 साल पहले बहन रेनू की शादी भिवानी के सुशील के साथ हुई थी। शादी के बाद बहन के 2 बेटे हुए। करीब 5 साल पहले वह छोटे बेटे के साथ पति को छोड़कर अग्रोहा में दीपक के पास आ गई और उसी के साथ रहने लगी। दीपक पहले से शादीशुदा था। उसकी फतेहाबाद के जांडली कलां की पूनम से शादी हुई थी।</p>
<p>दीपक के साथ अनबन के चलते वह मायके में रहती थी, लेकिन कुछ समय पहले पूनम दोबारा दीपक के साथ रहने लगी। इसी बात को लेकर पूनम और रेनू के बीच झगड़ा होता रहता था। 3 दिन पहले 3 अक्टूबर 2020 रेनू हिसार में दवाई लेने आई थी। उस समय वह मुझसे मिली थी। उसने कहा था कि दीपक और पूनम मारपीट करते हैं। पूनम और दीपक ने मिलकर अब मेरी बहन के सिर पर गैस भट्टी के बर्नर से हमला कर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने केस दर्ज किया था</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/conviction-in-murder-case/article-39070</link>
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                <pubDate>Mon, 17 Oct 2022 18:11:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अदालत को गुमराह कर रही है एसआईटी, हो अवमानना की कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[अगर फरीदकोट अदालत को सच्चाई बता देती एसआईटी तो नहीं मिलती जांच करने की इजाजत  दो एजेंसी एक ही मामले की नहीं कर सकती हैं जांच मोहाली, अश्वनी चावला / कुलवंत। पंजाब पुलिस की स्पेशल जांच टीम खुद माननीय अदालत को गुमराह करने में लगी हुई है ऐसे में एसआईटी की तरफ अवमानना की कार्रवाई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h3 style="text-align:center;">अगर फरीदकोट अदालत को सच्चाई बता देती एसआईटी तो नहीं मिलती जांच करने की इजाजत</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5> दो एजेंसी एक ही मामले की नहीं कर सकती हैं जांच</h5>
</li>
</ul>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>मोहाली, अश्वनी चावला / कुलवंत</strong>। पंजाब पुलिस की स्पेशल जांच टीम खुद माननीय अदालत को गुमराह करने में लगी हुई है ऐसे में एसआईटी की तरफ अवमानना की कार्रवाई की जानी चाहिए क्योंकि अगर स्पेशल जांच टीम फरीदकोट अदालत को इस मामले में सच्चाई बयान कर देती तो शायद उन्हें फरीदकोट अदालत की तरफ से इस तरह की जांच करने की इजाजत ही नहीं मिलती इसलिए पंजाब पुलिस के खिलाफ अवमानना की सिफारिश की जाए। यह मांग माननीय सीबीआई न्यायाधीश जीएस सेखों की अदालत में एडवोकेट आर.के हांडा की तरफ से की गई है । आर.के हांडा की तरफ से लिखित तौर पर की गई इस मांग को लेकर आने वाले समय में कोई भी फैसला माननीय सीबीआई अदालत की तरफ से लिया जा सकता है। एडवोकेट हांडा डेरा श्रद्धालु सुखजिन्द्र सिंह सन्नी की तरफ से अदालत में पेश हुए थे। एडवोकेट आर के हांडा ने पत्रकार से बात करते हुए बताया कि बेअदबी के मामलों में सीबीआई की तरफ से 2015 से लगातार अभी तक जांच की जा रही है हालांकि इस दौरान सीवे की तरफ से क्लोजर रिपोर्ट भी दायर की गई थी परंतु इसी दौरान पंजाब पुलिस की मौजूदा स्पेशल जांच टीम की तरफ से नए फैक्ट सीबीआई को दिए जाने के पश्चात सीबीआई की तरफ से पुन: जांच की जा रही है।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">अदालत को गुमराह करना</h4>
<h6 style="text-align:justify;">सीबीआई की जांच के अनुसार ही माननीय सीबीआई अदालत में लगातार सुनवाई भी चल रही है ऐसे में इसी मामले को लेकर पंजाब पुलिस की स्पेशल जांच टीम ने अलग से ही अपनी जांच शुरू कर दी जबकि इस मामले में स्पेशल जांच टीम के पास किसी तरह का अलग अधिकार ही नहीं है। सीबीआई की तरफ से दोबारा जांच शुरू करने के पश्चात जांच में आए नए तथ्यों को लेकर एक सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट भी माननीय सीबीआई की अदालत में दाखिल की गई है जो कि अभी तक जन तक भी नहीं हुई है ऐसे में सीबीआई किस तथ्य को लेकर किस स्तर की जांच कर रही है यह सीबीआई ही जानती है इसलिए सीबीआई की चल रही जांच के बीच में एसआईटी की तरफ से नए सिर्फ जांच शुरू की गई बल्कि फरीदकोट की माननीय अदालत को इन सारे तथ्यों से गुमराह किया गया क्योंकि फ्रिज कोर्ट की माननीय अदालत को यह बताया ही नहीं गया कि इस पूरे मामले को लेकर सीबीआई की माननीय अदालत में जांच चल रही है।<br />
आर के हांडा ने कहा कि एक एफ आई आर पर दो अलग-अलग जांच एजेंसियां ने ही जांच कर सकती हैं और ना ही एक समय में दो अदालतों में सुनवाई हो सकती है ऐसे में जब एक माननीय अदालत में पहले से सुनवाई चल रही है तो दूसरी तरफ स्पेशल जांच टीम ने फरीदकोट अदालत में अपनी जांच को लेकर पेश हो रही है। इस पूरे मामले में अवमानना का मामला बनता है इसलिए उन्होंने माननीय सीबीआई अदालत से मांग की है कि सारे मामले की रोशनी में माननीय पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट को सिफारिश की जाएगी पंजाब पुलिस व स्पेशल जांच टीम के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू हो।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">20 को फिर से होगी मामलें में अहम सुनवाई</h4>
<h6 style="text-align:justify;">बरगाड़ी बेअदबी मामले में जांच सीबीआई की तरफ से की जाएगी या फिर स्पेशल जांच टीम को भी किसी तरह के अधिकार मिलेंगे इसको लेकर अभी भी पूरा मामला सीबीआई की अदालत में विचाराधीन है ऐसे में शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान पंजाब पुलिस की तरफ से समय की मांग की गई थी जिसको देखते हुए इस पूरे मामले की सुनवाई अब 20 जुलाई तक टाल दी गई है। आप इस अहम मामले की सुनवाई 20 जुलाई को होने के पश्चात यह तय होगा कि फैसला सीबीआई तरफ आता है या फिर इस मामले में किसी तरह की स्पेशल जांच टीम को भी राहत मिलती है।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">पंजाब पुलिस ने खुद दिए थे साक्ष्य तो अब खुद जांच क्यों ?</h4>
<h6 style="text-align:justify;">आर के हांडा ने बताया कि पंजाब पुलिस ने ही खुद नए साक्ष्य सीबीआई को देते हुए दोबारा से जांच करने के लिए विनती की थी ऐसे में उन्हीं साक्ष्यों को लेकर ही जांच की जा रही है जब पंजाब पुलिस की तरफ से बताए गए साक्ष्यों पर सीबीआई जांच कर रही है तो ऐसे में पंजाब पुलिस खुद क्यों जांच में जुट गई है जिसको लेकर कई तरह के नए सिर्फ सवाल उठ रहे हैं बल्कि पंजाब पुलिस की मंशा भी गलत दिखाई दे रही है।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">सीबीआई को मिली हुई है आगे की जांच की इजाजत</h4>
<h6 style="text-align:justify;">आर के हांडा ने बताया कि माननीय सीबीआई अदालत में सुनवाई के दौरान पंजाब पुलिस के सामने ही सीबीआई को आगे जांच जारी करने की इजाजत सीबीआई के माननीय न्यायधीश की तरफ से दी गई है। जब माननीय सीबीआई अदालत की तरफ से सीबीआई को आगे जांच करने की इजाजत मिली हुई है और उस समय पंजाब पुलिस भी वहां पर मौजूद थी तो ऐसे में पंजाब पुलिस ने ना सिर्फ माननीय सीबीआई के आदेश की उल्लंघना की है बाकी इन आदेशों की जानकारी फरीदकोट की माननीय अदालत से भी छुपाई है।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">पंजाब पुलिस नहीं दाखिल कर पाई जबाब, मांगा समय</h4>
<h6 style="text-align:justify;">सीबीआई की तरफ से स्पेशल जांच टीम के खिलाफ दायर की गई एप्लीकेशन को लेकर पंजाब पुलिस आज अपना जवाब दाखिल नहीं कर पाई है पंजाब पुलिस के एडवोकेट ने माननीय सीबीआई अदालत में पेश होते हुए जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की है जिसके चलते माननीय सीबीआई की अदालत की तरफ से पंजाब पुलिस को इस पूरे मामले में जवाब दाखिल करने के लिए 18 जुलाई तक का समय दे दिया गया है।</h6>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2020 23:32:00 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सानिया मिर्जा की कोर्ट पर शानदार वापसी</title>
                                    <description><![CDATA[33 वर्षीय सानिया का यह 42वां डब्ल्यूटीए युगल खिताब भी है। उन्होंने आखिरी बार 2017 में ब्रिसबेन इंटरनेशनल में अमेरिकी जोड़ीदार बेथानी माटेक सैंड्स के साथ खिताब जीता था। वह वर्ष 2018 और 2019 के डब्ल्यूटीए सत्र में खेलने नहीं उतरीं थीं। Aaj Ke Khel Samachar Hindi Main.
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/great-change-on-sania-mirzas-court/article-12572"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/sania-mirza.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">होबार्ट में बनीं चैंपियन</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>होबार्ट (एजेंसी)</strong>। Latest Sports News in Hindi: अनुभवी भारतीय टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा (Sania Mirza) ने मां बनने के बाद टेनिस कोर्ट पर शानदार वापसी करते हुये शनिवार को होबार्ट इंटरनेशनल महिला युगल का खिताब अपने नाम कर लिया। सानिया ने अपनी जोड़ीदार यूक्रेन की नादिया किचेनोक के साथ महिला युगल फाइनल मुकाबले में दूसरी वरीय शुआई पेंग तथा शुआई झांग की जोड़ी को एक घंटे 21 मिनट में 6-4, 6-4 से लगातार सेटों में हराकर खिताब अपने नाम कर लिया। भारतीय टेनिस खिलाड़ी ने लगभग दो वर्ष के ब्रेक के बाद कोर्ट पर वापसी की है और अपने करियर के दूसरे चरण की शानदार शुरूआत करते हुये उन्होंने होबार्ट में खिताब जीत लिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">Sania Mirza – नादिया ने फाइनल में बढ़िया शुरूआत करते हुये चीनी जोड़ी की पहले ही गेम में सर्विस ब्रेक कर दी</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">अपने बेटे इजहान के जन्म के बाद यह सानिया का पहला खिताब भी है।</li>
<li style="text-align:justify;">33 वर्षीय सानिया का यह 42वां डब्ल्यूटीए युगल खिताब भी है।</li>
<li style="text-align:justify;">आखिरी बार 2017 में ब्रिसबेन इंटरनेशनल में अमेरिकी जोड़ीदार बेथानी माटेक सैंड्स के साथ खिताब जीता था।</li>
<li style="text-align:justify;">वह वर्ष 2018 और 2019 के डब्ल्यूटीए सत्र में खेलने नहीं उतरीं थीं।</li>
<li style="text-align:justify;">सानिया-नादिया ने फाइनल में बढ़िया शुरूआत करते हुये चीनी जोड़ी की पहले ही गेम में सर्विस ब्रेक कर दी।</li>
<li style="text-align:justify;">अगले गेम में दूसरा सर्व गंवाया। दोनों टीमों ने फिर 4-4 की बराबरी के बाद 40 आॅल तक एक बराबरी संघर्ष किया।</li>
<li style="text-align:justify;">भारतीय-यूक्रेनियनाई जोड़ी को फिर जल्द ब्रेक मिला और 10वें गेम में आराम से उन्होंने सेट जीत लिया।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jan 2020 15:59:49 +0530</pubDate>
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