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                <title>Holi festival - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>होली पर पूज्य गुरु जी के वचन</title>
                                    <description><![CDATA[बरनावा (सच कहूँ न्यूज)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि आज होली है सबको बहुत-बहुत मुबारक हो। होली में वो रंग जिससे आपकी कुलें रंग जाए, वो रंग जो तमाम बदरंगों को दूर कर दे, वो रंग जो काल-महाकाल के उतारने पर भी उतरे ना, वो रंग जो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/respected-guru-ji-words-on-the-festival-of-holi/article-81948"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-03/holi-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरनावा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि आज होली है सबको बहुत-बहुत मुबारक हो। होली में वो रंग जिससे आपकी कुलें रंग जाए, वो रंग जो तमाम बदरंगों को दूर कर दे, वो रंग जो काल-महाकाल के उतारने पर भी उतरे ना, वो रंग जो खुशियों से लबरेज कर दे, वो रंग जो प्यार मोहब्बत से मालामाल कर दे, वो सतगुरु, अल्लाह, वाहेगुरु का रंग आप पर चढ़ता जाए, बदरंग दूर होता जाए ये मालिक से दुआएं करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने फरमाया आमतौर पर ये सुना हमने जब होली आती है तो बड़ा शोर मचता है कि भई पानी की बर्बादी ना करो। पर कभी ध्यान दिया है कि शराब बनाने में कितना पानी प्रयोग हो रहा है? चमड़ा, जिससे जूते, बैग वगैरह बनाते हो, उसको धोने में, उसको साफ करने में कितना पानी बर्बाद हो रहा है? और भी कई फैक्टरियों में पानी बर्बाद होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">तो कभी उस तरफ किसी का ध्यान गया? जाना चाहिए, सिर्फ एक हमारा त्यौहार है होली, हम नहीं कहते कि उसमें पानी बर्बाद करो, पर अगर थोड़ा सा पानी उसमें आप प्रयोग में लाएं तो त्यौहार भी मन जाए और पानी की बर्बादी भी ना हो। पर शोर उसी दिन क्यों मचता है? आम दिनों में क्यों नहीं बात उठती? कि भई शराब से इतना पानी बर्बाद हो रहा है, चमड़ा धोने में इतना पानी बर्बाद हो रहा है, फैक्टरियों में इतना पानी बर्बाद हो रहा है। कोई उठता है इस बारे में सोचता है। हर इन्सान को सोचना चाहिए, तभी तो समाज और देश का भला होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर हर इन्सान समाज में से उठेगा, जागेगा तभी देश का भला होना है और तभी देश के जो राजा हैं वो आपका साथ दे पाएंगे। वो कितना भी कुछ करते फिरें, अगर आप साथ नहीं देते तो सुधार संभव नहीं, पानी की बर्बादी हो गई, जनसंख्या का विस्फोट हो गया, या यूं कह लीजिये बिजली की बर्बादी हो गई, ये तो आपके हाथ में है ना जी, कमरे से निकलते हैं बल्ब जल रहे हैं, एसी चलता छोड़ गए, कि आऊंगा तो कमरा बिल्कुल ठंडा मिलना चाहिए। पंखा चलता छोड़ गए, आपको लगता है कि छोटी सी चीज है, जी नहीं, ये बहुत बड़ी बर्बादी कर रहे हैं आप। क्या हर्ज कि अगर आप बंद करके जाएं कमरे की सारी लाइटें। जब आपने 12 घंटे, 8 घंटे बाहर रहना है। आप दफ्तर जा रहे हैं, आप खेत में जा रहे हैं, कॉलेज में जा रहे हैं, कहीं भी जा रहे हैं तो उस समय आपके घर में कोई नहीं है, आपके कमरे में कोई नहीं है, कम से कम उसकी लाइटें, पंखे, एसी जो भी आप चलाते हैं, वो तो बंद होने चाहिए। कौन इस तरफ ध्यान देता है। कौन माथापच्ची करे।</p>
<p style="text-align:justify;">आमतौर पर ये सुना हमने जब होली आती है तो बड़ा शोर मचता है कि भई पानी की बर्बादी ना करो। पर कभी ध्यान दिया है कि शराब बनाने में कितना पानी प्रयोग हो रहा है? चमड़ा, जिससे जूते, बैग वगैरह बनाते हो, उसको धोने में, उसको साफ करने में कितना पानी बर्बाद हो रहा है? और भी कई फैक्टरियों में पानी बर्बाद होता है। तो कभी उस तरफ किसी का ध्यान गया? जाना चाहिए, सिर्फ एक हमारा त्यौहार है होली, हम नहीं कहते कि उसमें पानी बर्बाद करो, पर अगर थोड़ा सा पानी उसमें आप प्रयोग में लाएं तो त्यौहार भी मन जाए और पानी की बर्बादी भी ना हो। पर शोर उसी दिन क्यों मचता है? आम दिनों में क्यों नहंी बात उठती? कि भई शराब से इतना पानी बर्बाद हो रहा है, चमड़ा धोने में इतना पानी बर्बाद हो रहा है, फैक्टरियों में इतना पानी बर्बाद हो रहा है। कोई उठता है इस बारे में सोचता है। हर इन्सान को सोचना चाहिए, तभी तो समाज और देश का भला होगा। आपको बता दें कि पूज्य गुरु जी के ये वचन 7 मार्च 2023 के है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Mar 2026 09:34:04 +0530</pubDate>
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                <title>निराली है हरियाणा में फागण की मस्ती&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चे, बड़े- बुजुर्गों सब पर छा जाता है रंगों का खुमार हिसार (सच कहूँ/संदीप सिंहमार)। Holi Festival 2025: हरियाणा एक ऐसा राज्य है जहाँ की संस्कृति, परंपरा और त्योहारों का विशेष महत्व है। होली, जो कि रंगों का त्योहार है, हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखता है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-fun-of-fagun-in-haryana-is-unique/article-68362"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/holi-festival.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">बच्चे, बड़े- बुजुर्गों सब पर छा जाता है रंगों का खुमार</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिसार (सच कहूँ/संदीप सिंहमार)।</strong> Holi Festival 2025: हरियाणा एक ऐसा राज्य है जहाँ की संस्कृति, परंपरा और त्योहारों का विशेष महत्व है। होली, जो कि रंगों का त्योहार है, हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखता है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि एक ऐसा अवसर है जो भाईचारे और प्रेम का प्रतीक होता है। हरियाणा की होली पारिवारिक बंधनों को मजबूत करने, रिश्तों को नजदीक लाने और सामूहिक आनंद का अनुभव करने का माध्यम रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक समय था जब होली और फाग उत्सव के दौरान देवर-भाभी, भाई-बहन, और मित्र एक साथ मिलकर उत्सव मनाते थे। सभी मिलकर रंग खेलते, गाने गाते और एक-दूसरे को मिठाइयाँ खिलाते थे। इस दिन, न केवल परिवारों के बीच, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भी प्रेम और मित्रता का बंधन मजबूत होता था। गलियों में महिलाएं कई प्रकार के ‘कोरडे’ लेकर निकलती थीं, जहाँ वे एक-दूसरे पर रंग डालतीं और सामूहिक खेल का आनंद लेतीं। हरियाणा की होली ने एक ऐसा माहौल तैयार किया, जिसमें एकता, प्रेम और खुशी का समावेश होता था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने का फर्ज | Holi Festival</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर को संजोकर रखना अत्यंत आवश्यक है। हमें मिलकर प्रयास करना होगा कि हम रंगों के खेल और त्योहारों के आनंद को पुन: जीवित करें। हमें एक-दूसरे के प्रति प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावना को जागरूक करना होगा, ताकि त्योहार बिना किसी द्वेषभावना के मनाए जा सके।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मशहूर हैं भाभी के कोरडे</h3>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, समय के साथ-साथ समाज में कई परिवर्तन आए हैं। तकनीकी प्रगति, सामाजिक परिवर्तन, और व्यक्तिगत व्यस्तताओं ने त्योहारों की भावना को कहीं न कहीं प्रभावित किया है। अब उस एकता और प्रेम की भावना में कमी आ गई है। महिलाएं, जो कभी खुशी-खुशी कोरडे लेकर गलियों में घूमती थीं। हालांकि अब त्यौहार आधुनिकता की चकाचौंध में सिमट कर रह गया है परंतु ग्रामीण आंचल में अब भी वो ही निराला अंदाज म्हारे हरियाणा में देखा जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्रेम और सौहार्द का त्योहार मनाएं होली</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा में होली और फाग उत्सव का विघटन एक गंभीर मुद्दा है जो समाज के मूल्यों और एकता के प्रतीक के रूप में देखा जा सकता है। यदि हम इस स्थिति को सुसंगत रखना चाहते हैं, तो हमें एकजुट होकर इसे सुधारने का प्रयास करना होगा। हमें अपने त्योहारों को अपनी जड़ों से जोड़कर उन्हें पुनर्जीवित करना होगा ताकि आगामी पीढ़ियाँ भी इसका आनंद ले सकें और एकता के बंधन में बंधी रहें। चलिए, हम एक नई शुरूआत करें और होली को केवल रंगों का नहीं, बल्कि प्रेम और सौहार्द का उत्सव बनाएं। Holi Festival</p>
<h3 style="text-align:justify;">होलिका को अर्पित करते हैं बड़कूलों की मालाएं</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा की पारंपरिक होली को आज भी यहां के लोग अपने इतिहास और संस्कृति को जिंदा रखा हुआ है। होली की शुरूआत होती है बड़कूलों से…सबसे पहले गोबर से बड़कूले बनाए जाते हैं. गोबर के बने बड़कूलों में चांद, तारे और कई तरह की आकृतियां बनाई जाती हैं। इन बड़कूलों की फिर मालाएं बनाई जाती हैं। गांव के बाहर होलिका दहन के लिए लकड़ियां इकट्ठी की जाती हैं. होलिका दहन वाले दिन गांव की सभी औरतें मिलकर लोक संगीत गाते हुए, होलिका दहन तक पहुंचती हैं. होलिका दहन से पहले होली की पूजा की जाती है और फिर बड़कूलों की आहूति डाली जाती है. महिलाएं इस दिन व्रत भी रखती है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Railway News: महाप्रबंधक उत्तर पश्चिम रेलवे, अमिताभ द्वारा लालगढ़ व बीकानेर स्टेशनों का निरीक्षण" href="http://10.0.0.122:1245/general-manager-north-western-railway-amitabh-inspected-lalgarh-and-bikaner-station/">Railway News: महाप्रबंधक उत्तर पश्चिम रेलवे, अमिताभ द्वारा लालगढ़ व बीकानेर स्टेशनों का निरीक्षण</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 10:34:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Holi Festival: आधुनिकता की चकाचौंध में खो गई फागण की मस्ती</title>
                                    <description><![CDATA[Holi Festival: होली, जिसे रंगों के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है, एक जीवंत और आनंदमय उत्सव है,जो भारत और दुनिया भर में गहरा सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है। यह वसंत के आगमन, बुराई पर अच्छाई की विजय और क्षमा और नवीनीकरण का समय दर्शाता है। पर आजकल यह होली व फागण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-fun-of-phagan-got-lost-in-the-glare-of-modernity/article-55625"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/holi-festival-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Holi Festival: होली, जिसे रंगों के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है, एक जीवंत और आनंदमय उत्सव है,जो भारत और दुनिया भर में गहरा सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है। यह वसंत के आगमन, बुराई पर अच्छाई की विजय और क्षमा और नवीनीकरण का समय दर्शाता है। पर आजकल यह होली व फागण माह की मस्ती भी आधुनिकता की चकाचौंध में खो गई है। होली के दिन व होली के अगले दिन जिसे हरियाणा में फाग नाम के उत्सव के तौर पर मनाया जाता था। वह भी अब शौक नहीं बल्कि द्वेष भावना का शिकार हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब इस दिन ना तो भाभी के कोरडे देखने को मिलते और ना ही देवर का अपनी भाभी के प्रति पहले वाला सात्विक प्रेम। अब तो होली के दिन लोग जमकर नशा करते हुए हुल्लड़बाजी करते हुए दिखाई देते है। शायद यही कारण है कि इस दिन हरियाणा सरकार ने भी ऐसे हुल्लड़बाजों से निपटने के लिए विशेष आदेश देने पड़े। अब होली व फाग के दिन पुलिस पैदल गश्त कर रही है ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे। हालाँकि, यह समझ में आता है कि कुछ लोगों को कैसा महसूस हो सकता है कि आधुनिक समय में होली का सार और मज़ा फीका पड़ गया है। सोशल मीडिया के आगमन, व्यावसायीकरण और बदलती जीवनशैली के साथ, त्योहार से जुड़ी पारंपरिक प्रथाएं और मूल्य विकसित या कम हो गए हैं। Holi 2024</p>
<h3 style="text-align:justify;">सभी समुदाय में होता था विशेष चाव | Holi Festival</h3>
<p style="text-align:justify;">अतीत में, होली मुख्य रूप से समुदायों के भीतर मनाई जाती थी, जिसमें लोग एक साथ आकर रंगों से खेलते थे।शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते थे और उत्सव के भोजन का आनंद लेते थे। सामूहिक आनंद, सद्भाव और प्रेम और खुशी फैलाने पर जोर दिया जाता था। पर वह जमाना अब बीत गया है। आज, ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहां होली के व्यावसायिक पहलू को इसके सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्राथमिकता दी जाती है। होली की सच्ची भावना को पूरी तरह अपनाने के बजाय त्योहार से संबंधित उत्पादों के विपणन और बिक्री पर ध्यान केंद्रित हो गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सिंथेटिक रंगों का प्रचलन बढ़ा | Holi Festival</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा, होली के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले रंगों की सुरक्षा और स्थिरता को लेकर भी चिंताएं हैं। सिंथेटिक रंग और रसायन प्रचलन में आ गए हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण और संभावित स्वास्थ्य खतरे पैदा हो गए हैं। यह पौधों और फूलों से प्राप्त प्राकृतिक रंगों के पारंपरिक उपयोग के विपरीत है, जिसका पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर कम प्रभाव पड़ता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सांस्कृतिक असंवेदनशीलता</h3>
<p style="text-align:justify;">होली के उत्सव पर कभी-कभी पानी की बर्बादी, गुंडागर्दी और सांस्कृतिक असंवेदनशीलता जैसे अनुचित व्यवहार का साया पड़ जाता है। ये गतिविधियां त्योहार के सार और इसकी एकता, सम्मान और समावेशिता के संदेश को ख़राब कर सकती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सार्थक तरीकों से मनाया जाना चाहिए त्योहार | Holi Festival</h3>
<p style="text-align:justify;">इन चुनौतियों के बावजूद यह पहचानना आवश्यक है कि होली की भावना को अभी भी सार्थक तरीकों से मनाया और संजोया जा सकता है। प्रेम, एकजुटता और करुणा के मूल मूल्यों पर जोर देकर, व्यक्ति उन परंपराओं और रीति-रिवाजों को बनाए रखने का प्रयास कर सकते हैं जो होली को वास्तव में विशेष और समृद्ध अनुभव बनाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">त्योहार की कहानी और मिथकों को समझना होगा</h3>
<p style="text-align:justify;">होली की प्रामाणिकता को बनाए रखने का एक तरीका इसकी जड़ों से दोबारा जुड़ना और त्योहार के पीछे की कहानियों और मिथकों को समझना है। होलिका और प्रह्लाद की किंवदंतियों, रंगों के प्रतीकात्मक महत्व और होली से जुड़े अनुष्ठानों के बारे में जानने से त्योहार के प्रति किसी की सराहना और गहरी हो सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्राकृतिक रंगों का करें प्रयोग</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त, प्राकृतिक रंगों का उपयोग, जल संरक्षण और पर्यावरण का सम्मान करने जैसी पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देने से होली पर आधुनिकता के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। सचेत विकल्प चुनकर और स्थायी व्यवहार अपनाकर, व्यक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए त्योहार के आनंद और सार को संरक्षित करने में योगदान दे सकते हैं।होली के दौरान दया, क्षमा और मेल-मिलाप के कार्यों में शामिल होने से भी त्योहार की सच्ची भावना फिर से जागृत हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">चाहे पड़ोसियों के साथ मिठाइयाँ बाँटना हो, बिछड़े दोस्तों तक पहुँचना हो, या सामुदायिक सेवा पहल में भाग लेना हो, ये भाव होली के लोकाचार का प्रतीक हैं और एकता और सद्भाव की भावना को बढ़ावा देते हैं।भले ही होली का मज़ा आधुनिकता के सामने विकसित हुआ हो, प्रेम, आनंद और नवीनीकरण के इसके मूल मूल्य कालातीत और सार्वभौमिक बने हुए हैं। त्योहार के सार को अपनाकर और इसकी परंपराओं और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध होकर, व्यक्ति यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि होली सभी के लिए एक सार्थक और पोषित उत्सव बनी रहे। Holi Festival                                                                                                                                          <strong>डॉ. संदीप सिंहमार।</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे होली की शुभकामनाओं के साथ मतदान संदेश" href="http://10.0.0.122:1245/voting-messages-with-holi-wishes-going-viral-on-social-media/">सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे होली की शुभकामनाओं के साथ मतदान संदेश</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-fun-of-phagan-got-lost-in-the-glare-of-modernity/article-55625</link>
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                <pubDate>Sun, 24 Mar 2024 19:56:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राजनाथ ने लेह में सैनिकों के साथ मनायी होली</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने रविवार को लेह में सैनिकों के साथ रंगों का त्योहार होली हर्षोल्लास के साथ मनाया। थल सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे और फायर एंड फ्यूरी कोर के जनरल आॅफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल रशिम बाली भी इस मौके पर उनके साथ थे। रक्षा मंत्री […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/rajnath-celebrated-holi-with-soldiers-in-leh/article-55614"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/delhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने रविवार को लेह में सैनिकों के साथ रंगों का त्योहार होली हर्षोल्लास के साथ मनाया। थल सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे और फायर एंड फ्यूरी कोर के जनरल आॅफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल रशिम बाली भी इस मौके पर उनके साथ थे। रक्षा मंत्री ने सैनिकों को संबोधित करते हुए दुर्गम इलाकों और प्रतिकूल मौसम में मातृभूमि की रक्षा करने के लिए उनकी वीरता, दृढ़ संकल्प और बलिदान की सराहना की।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सैनिकों की सकारात्मक प्रतिबद्धता शून्य से भी कम तापमान से भी ज्यादा मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि जैसे दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है, मुंबई वित्तीय राजधानी है और बेंगलुरु प्रौद्योगिकी राजधानी है उसी तरह लद्दाख भारत की वीरता और बहादुरी की राजधानी है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिंह (Rajnath Singh) ने कहा, ‘पूरा देश सुरक्षित महसूस करता है क्योंकि हमारे बहादुर सैनिक सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। हम प्रगति कर रहे हैं और खुशहाल जीवन जी रहे हैं क्योंकि हमारे सतर्क सैनिक सीमाओं पर तैयार खड़े हैं। प्रत्येक नागरिक को सशस्त्र बलों पर गर्व है क्योंकि वे अपने परिवारों से बहुत दूर रहते हैं ताकि हम होली और अन्य त्योहार अपने परिवारों के साथ शांतिपूर्वक मना सकें। राष्ट्र सदैव हमारे सैनिकों का ऋणी रहेगा और उनका साहस और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने एक दिन पहले ही सैनिकों के साथ होली मनाने का फैसला किया, क्योंकि उनका मानना ​​है कि त्योहारों को सबसे पहले देश के रक्षकों के साथ मनाया जाना चाहिए। उन्होंने तीनों सेनाओं के प्रमुखों से एक दिन पहले सैनिकों के साथ त्योहार मनाने की नई परंपरा शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘कारगिल की बफीर्ली चोटियों पर, राजस्थान के तपते मैदानों में और गहरे समुद्र में स्थित पनडुब्बियों में सैनिकों के साथ इस तरह का जश्न हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग बनना चाहिए। इस अवसर पर सिंह ने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुरों को सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में लेह के युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Joint Pain Relief: इसे खाने से जोड़ों का दर्द, घुटने का दर्द, खत्म हुआ ग्रीस हो जाएगा पूरा" href="http://10.0.0.122:1245/by-eating-this-joint-pain-knee-pain-and-grease-will-be-completely-cured/">Joint Pain Relief: इसे खाने से जोड़ों का दर्द, घुटने का दर्द, खत्म हुआ ग्रीस हो जाएगा पूरा</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Mar 2024 16:34:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Holi Festival: होली में खुद को और अपने परिजनों को केमिकल वाले रंगो से बचाएं &amp;#8211; डॉ केदार बतरा</title>
                                    <description><![CDATA[पानीपत (सच कहूँ/सन्नी कथूरिया)। Holi Festival: रंगों के त्योहार होली की देशभर में धूम है। देश के सभी त्योहार अपने साथ खूब सारी खुशियां लेकर आता है, मन में उत्साह, उमंग, जोश, प्यार, भाई चारा, दिलों के गिले शिकवे भुला कर गले मिलने वाला पवित्र त्यौहार होता है, तरह-तरह के रंग-गुलाल व तरह तरह की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/protect-yourself-and-your-family-from-chemical-colors-in-holi-dr-kedar-batra/article-55594"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/panipat-news-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पानीपत (सच कहूँ/सन्नी कथूरिया)।</strong> Holi Festival: रंगों के त्योहार होली की देशभर में धूम है। देश के सभी त्योहार अपने साथ खूब सारी खुशियां लेकर आता है, मन में उत्साह, उमंग, जोश, प्यार, भाई चारा, दिलों के गिले शिकवे भुला कर गले मिलने वाला पवित्र त्यौहार होता है, तरह-तरह के रंग-गुलाल व तरह तरह की मिठाईयां, गुजिया आदि खिला कर एक दूसरे का मेल-मिलाप होली को और भी खास बना देते हैं। Panipat News</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि स्वास्थ्य संबंध में कहना यह है कि होली के उमंग-उत्साह के बीच अपनी सेहत का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है। विशेष तौर पर जिन लोगों को पहले से ही सांस की समस्या जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या फिर फेफड़ों की बीमारी है उन्हें और भी सर्तक हो जाना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">केमिकल रगों से होती है काफी परेशानियां | Panipat News</h3>
<p style="text-align:justify;">होली के दिन चारों तरफ उड़ रहे रंग-गुलाल, सांस की समस्याओं के शिकार लोगों की लिए परेशानियां बढ़ा सकते हैं। वातावरण में फैले कैमिकल वाले गुलाल के एवं तरह – तरह के रसायनिक रंगों के कारण से आपको सांस लेने में दिक्कत, सांस फूलने की समस्या हो सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">त्वचा को पहुंचाते हैं नुकसान</h3>
<p style="text-align:justify;">होली में बनने वाले कृत्रिम रंगों में इंडस्ट्रियल केमिकल्स का इस्तेमाल होता है. काले रंग में लेड ऑक्साइड, हरे में कॉपर सल्फेट, नीले में कोबाल्ट नाइट्रेट, जिंक सॉल्ट, लाल रंग में मरकरी सल्फेट जैसे रसायन मिले होते हैं. रंगों को शाइन देने के लिए मिका और ग्लास पार्टिकल्स भी मिलाए जाते हैं. इन केमिकल्स के कारण त्वचा पर एलर्जी, खुजली, ड्राईनेस, चकत्ते, फोड़े-फुंसी, घाव , अस्थाई रूप से आंखों की रोशनी जाना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बेहतर है कि होली के दिन हर्बल रंगों का इस्तेमाल करें, खासकर वे लोग जिनकी त्वचा बहुत ज्यादा संवेदनशील है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हर्बल व जैविक रंगों से खेले होली | Panipat News</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर हम फूलों के रंग से हर्बल रंग से/जैविक रंगों से होली खेलते हैं तो इसका हमारे मन और शरीर पर बहुत अच्‍छा प्रभाव पड़ता है। उनके मुताबिक, अगर हम फूलों के रंग से होली खेलेंगे तो स्किन के लिए भी फायदेमंद होगा। वहीं, कैमिकल कलर्स से होली खेलने से हमारी स्किन और आंखों में इरिटेशन की दिक्‍कत होती है तो वो भी नहीं होगी, अस्‍थमा के मरीजों के लिए हर्बल/जैविक रंगों से काफी हद तक नुकसान से बचा जा सकता है। अगर वे फ्रेगरेंस इंटॉलरेंट नहीं हैं तो फूलों के रंग/हर्बल रंगों से उन्‍हें कोई दिक्‍कत नहीं होगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैमिकल वाले रंग किडनी को भी करता हैं प्रभावित</h3>
<p style="text-align:justify;">होली में इस्तेमाल किए जाने वाले काले रंग में मोजूद लेड आक्साइड सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर किडनी को डायरेक्ट नुकसान पहुंचा सकते हैं, होली खेलते समय किसी की आंख,नाक, कान, मुंह में जबरदस्ती रंग नही डालना चाहिए। Panipat News</p>
<h3 style="text-align:justify;">होम्योपैथिक हर बीमारी का रामबाण</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर किसी को किसी कारणवश कैमिकल वाले रंग से नुकसान हो भी जाए तो होम्योपैथी एक सुरक्षित और सौम्य चिकित्सीय तरीका है जो कई प्रकार की बीमारियों का प्रभावी उपचार कर सकता है और इसकी आदत भी नहीं पड़ती ।होम्योपैथी चिकित्सा से केमिकल वाले रंगो से हुए साइड इफेक्ट को भी आसानी से हटाया जा सकता है, यह आसानी से उपलब्ध भी हो जाती है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="मंदिर से चोरी करने वाला नकदी सहित गिरफ्तार" href="http://10.0.0.122:1245/man-who-stole-from-temple-arrested-with-cash/">मंदिर से चोरी करने वाला नकदी सहित गिरफ्तार</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/protect-yourself-and-your-family-from-chemical-colors-in-holi-dr-kedar-batra/article-55594</link>
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                <pubDate>Sat, 23 Mar 2024 20:52:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>होली का पर्व आपसी भाईचारे व सदभाव के साथ मनाये- मोहन प्रजापति</title>
                                    <description><![CDATA[मुजफ्फरनगर (सच कहूँ न्यूज)। Muzaffarnagar News: आज भारतीय अति पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा के बैनर तले टाउन हॉल स्थित कार्यालय पर होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सभी पिछडा वर्ग के पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन प्रजापति के साथ चेहरे पर गुलाल लगाकर होली मनाई इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन प्रजापति ने कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/celebrate-the-festival-of-holi-with-mutual-brotherhood-and-harmony-mohan-prajapati/article-55513"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/muzaffarnagar-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुजफ्फरनगर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Muzaffarnagar News: आज भारतीय अति पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा के बैनर तले टाउन हॉल स्थित कार्यालय पर होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सभी पिछडा वर्ग के पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन प्रजापति के साथ चेहरे पर गुलाल लगाकर होली मनाई इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन प्रजापति ने कहा है कि होली रंगों का पर्व है रंग एक जीवन का हिस्सा है इस पर्व को हमे आपसी गिले शिकवे भूलकर सादगी के साथ मनानी चाहिए और</p>
<p style="text-align:justify;">जिससे समाज मे आपसी भाईचारा व सदभाव बढ़ सके वही होली पर जहरीले व केमिकल युक्त रंग गुलाल से बचना चाहिए इस दौरान जिला अध्यक्ष दिनेश पाल, प्रभारी डॉ. मनोज प्रजापति, वरिष्ठ नेता सुखपाल कश्यप, मंडल अध्यक्ष पुष्पेंद्र पाल एडवोकेट, मोर्चा नेता सचिन प्रजापति, राजपाल कशयप एडवोकेट, मंडल प्रभारी भरत पाल, महासचिव धीरज प्रजापति एडवोकेट, गौरव पाल, सोनिया कुमारी, मंडल उपाध्यक्ष अजय सैनी, डॉo सचिन पाल, युवा नेता नितिन कुमार एडवोकेट आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे। Muzaffarnagar News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="चिंताजनक: छठी कक्षा के छात्र ने किया सुसाइड" href="http://10.0.0.122:1245/sixth-class-student-committed-suicide/">चिंताजनक: छठी कक्षा के छात्र ने किया सुसाइड</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/celebrate-the-festival-of-holi-with-mutual-brotherhood-and-harmony-mohan-prajapati/article-55513</link>
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                <pubDate>Thu, 21 Mar 2024 20:20:00 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जीवन आनंद में डूबने का अवसर है होली का पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[होली का नाम सुनते ही रोम रोम प्रफुल्लित हो उठता है। होली का मतलब ही है- नया उत्साह, नया सृजन, पवित्रता। सब एक हो कर रहे, सब प्रेम के रंग में डूबे रहे यही उद्देश्य है होली का। रंग केवल हमारे बाहरी आवरण को ही नहीं बदलते हैं बल्कि ये रंग हमारी जिंदगी को ही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">होली का नाम सुनते ही रोम रोम प्रफुल्लित हो उठता है। होली का मतलब ही है- नया उत्साह, नया सृजन, पवित्रता। सब एक हो कर रहे, सब प्रेम के रंग में डूबे रहे यही उद्देश्य है होली का। रंग केवल हमारे बाहरी आवरण को ही नहीं बदलते हैं बल्कि ये रंग हमारी जिंदगी को ही रंगीन बना देते हैं। रंग का पर्याय है- ऊर्जा, उत्साह और उमंग। होली का प्रत्येक रंग नए जीवन के संचार की प्रेरणा देता है। जीवन में उमंग, प्रेमानंद और आदर का रंग हमेशा चढ़ता रहे यह सीख देता है यह अवसर। दूसरों के हृदय में आनंद भरने की भावना, सब कुछ न्योछावर कर देने का भाव होली में ही नजर आता है।</p>
<p style="text-align:justify;">होली के अद्भुत दृश्य पर गौर करें तो मनोहारी दृश्य आंखों के सामने आ जाता है। कहीं युवक-युवतियों के गुलाल और अबीर के सुर्ख लाल रंग में लिपटे चेहरे’कहीं अधेड़ और बुड्ढों के भंग के रंग में डूबे नयन। कहीं हुड़दंग के हल्ले में मशगूल बच्चों और नवयुवकों की टोली। कहीं गाल गुलाबी किये युवतियां और औरतें। तो कहीं सुनाई दे रही है ढप की थाप पर फाल्गुनी गीत की झनकार और कहीं नव विवाहिताओं का कोरस गान।…कुछ इस तरह से होली के दिनों में सारे के सारे वातावरण का मिजाज बदलकर अल्हड़ और रंगीन हो जाता है। सब के सब मगन, सब के सब नाचते, गाते, इठलाते, खिलखिलाते जैसे कोई मायूसी, कोई अवसाद, कोई गिला, कोई शिकवा है ही नहीं जीवन में। ये पल केवल एक त्यौहार का अहसास ही नहीं दिलाते हैं बल्कि ये जीवन में परमानन्द की अनुभूति के समावेश का अवसर उपलब्ध करवाते हैं। और हमे ये अवसर दिया है स्वयं भगवान ने। जिंदगी की भागमभाग से थका हारा इंसान कुछ वक़्त आनंद के पलों में डूबना चाहता है और वही पल है होली के।</p>
<p style="text-align:justify;">यह जीवन में नवीन ऊर्जा के संचार का दिवस है। किसी दुकान से रंग खरीदकर किसी के चेहरे पर पोतने मात्र से इसका सम्बन्ध न निकालो। रंग तो गौण है। रंग तो बहाना है असली मकसद तो अंतस के उत्साह में छिपा है। इसका गूढ़ अर्थ तो ये है कि रंग लगाने का तो केवल एक बहाना ढूंढों। किसी अपने, किसी पराये के दिल में मुस्कान लाने की नियत से थोडी नटखट सी शरारत कर दो। थोड़ी याराना सी मशखरी कर दो। गालों पर गुलाल की गुदगुदी कर दो। उनके अंतस के तार तार में अबीर के आनंद का स्वर भर दो। उन्हें भीतर से हँसने का एक मौका दो। आप मस्ती में इतने खो जाओ कि कोई दु:ख दर्द की पीड़ा नजदीक तक न फटके।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इस पावन पर्व के पीछे तमाम धार्मिक मान्यताएं, मिथक, परम्पराएं और ऐतिहासिक घटनाएं तो छुपी है पर अंतत: इसका मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण ही है। होली का त्यौहार रंग, राग, उमंग, उत्साह और सामाजिक समरसता का अनुपम संयोजन है। इस वक़्त प्रकृति के रूप में विलक्षण बदलाव आते हैं जो जीवन को सुखद संदेश देते हैं। होली ऋतु परिवर्तन का भी द्योतक है। धरा आपादमस्तक श्रृंगार करती है। नीले आसमान में अरुण की लालिमा, वृक्षों की हरीतिमा, रंग बिरंगे फूल, फाल्गुनी बयार की शीतलता सब के सब सुखद अनुभूति दिलाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे वातावरण में नवोत्साह छा जाता है। होली तो रंग है और जहां रंग है वहां अनुराग है, राग है, प्रेम है। साहित्य में अनुराग का रंग भी लाल माना गया है। यह प्रकृति के श्रृंगार का, अभिसार का उत्सव है। साथ ही यह स्वच्छता, सौंदर्य, सामाजिक सद्भाव, प्रेम के आदान प्रदान और जीवन में मिठास, मधुरता का महोत्सव है। यह पावन पर्व जीवन की नकारात्मकता और नीरसता को मिटाकर उसमें मधुरता और स्नेह का संचार कराता है। चलो, रंग के बहाने से सही मगर सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह में सबको तैरने का सलीका तो सिखा ही देता है यह त्यौहार।</p>
<p style="text-align:justify;">अरे हां… यह होली तो एक खेल भी है और यह खेल है उमंग और प्यार का। तुम जी भर के प्यार से खेलो। अकेले नहीं सब मिलकर खेलों। यह खेल आनंद का भी है। यह अपनत्व और स्नेह की तरंग है। यह भ्रातृत्व और प्यार का मेला है। यह खुशियां बांटने का शुभ अवसर है। इसे हाथ से मत जाने दो। अगर इसी तरह तुम मिलकर रहोगे। मिलकर हंसते गाते नाचोगे कूदोगे, तो जीवन में उदासी के मौके अवश्य ही कम आएंगे। और हां..इस होली तुम यह भी प्रण लो कि इस दिन आप किसी गरीब, किसी जरूरतमन्द के चेहरे पर भी मुस्कान लाओगे। केवल रंग से नहीं बल्कि उसकी कोई जरूरत पूरी करके। कुछ अनाज। कुछ मिठाई । कुछ वस्त्र बांटकर। ..तब देखना तुम्हारा उत्साह दुगुना हो जायेगा। तुम्हारा हृदय भीतर से आनंदानुभूति से भर जायेगा। …और वह आनंद स्थाई होगा।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/holi-festival/article-8153</link>
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                <pubDate>Wed, 20 Mar 2019 20:13:52 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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