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                <title>2022 से 2026 की अवधि में रिकॉर्ड सबसे गर्म वर्ष होगा: रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[आगामी पांच वर्षों में विश्व में 1.5 डिग्री से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना लंदन (एजेंसी)। ग्लोबल वार्मिंग के खतरों के बीच अगले पांच वर्षों में विश्व भर में 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है। ब्रिटेन के मौसम विभाग ने यह भविष्यवाणी की है। बीबीसी ने विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/the-period-from-2022-to-2026-will-be-the-warmest-year-on-record/article-33198"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/temprature1.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>आगामी पांच वर्षों में विश्व में 1.5 डिग्री से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>लंदन (एजेंसी)।</strong> ग्लोबल वार्मिंग के खतरों के बीच अगले पांच वर्षों में विश्व भर में 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है। ब्रिटेन के मौसम विभाग ने यह भविष्यवाणी की है। बीबीसी ने विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि तापमान में वृद्धि भले ही अस्थायी हो सकती है , लेकिन इसका बढ़ता जाना चिंताजनक है।</p>
<p style="text-align:justify;">शोधकतार्ओं के मुताबिक 2022 से 2026 की अवधि में रिकॉर्ड सबसे गर्म वर्ष होगा। इससे पहले पिछले सात सालों में वैश्विक तापमान 2016 और 2020 में सबसे गर्म वर्षों के साथ एक डिग्री सेल्सियस अथवा उसके आसपास रहा। वहीं 2015 में वैश्विक नेताओं ने पेरिस जलवायु समझौते पर हस्ताक्षर किये थे, जो वैश्विक तापमान में वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस से नीचे लाने और उसे 1.5 डिग्री सेल्सियस के नीचे रखने के प्रयासों को जारी रखने के लिए प्रतिबद्धता जतायी गयी थी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>आज गौर नहीं किया बहुत जल्द धरती का तापमान टिप्पिंग पॉइंट पर पहुंच जाएग</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">डब्ल्यूएमओ के महासचिव पेटेरी तालास ने इस बारे में कहा है कि यह आंकड़ों से बढ़कर हैं। बढ़ते तापमान का मतलब है, कहीं अधिक मात्रा में बर्फ का पिघलना, समुद्र के जल स्तर का बढ़ना, हीटवेव का बढ़ना, साथ ही मौसम की चरम घटनाओं का और विनाशकारी होना हैे जिसका असर खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सतत विकास पर पड़ेगा। उनके अनुसार यह यह एक बार फिर हमें आगाह करती है कि दुनिया को बढ़ते उत्सर्जन में कमी लाने की तुरंत जरुरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि इन सब पर गौर करें तो तापमान में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से बदलाव आ रहा है जिसका खामियाजा हमें ही भुगतना पड़ रहा है यदि हमने इन सब चेतावनियों पर आज गौर नहीं किया बहुत जल्द धरती का तापमान टिप्पिंग पॉइंट पर पहुंच जाएगा, तब हमारे पास इससे निपटने का कोई मौका भी नहीं बचेगा।</p>
<blockquote class="wp-embedded-content"><p><a href="http://10.0.0.122:1245/growing-outbreak-of-heat-wave/">लू का प्रकोप: अगर आप घर से बाहर निकल रहे हो तो मौसम विभाग की यह चेतावनी जरूर पढ़ें</a></p></blockquote>
<p><iframe class="wp-embedded-content" title="“लू का प्रकोप: अगर आप घर से बाहर निकल रहे हो तो मौसम विभाग की यह चेतावनी जरूर पढ़ें” — Sach kahoon - Best Online Hindi News" src="http://10.0.0.122:1245/growing-outbreak-of-heat-wave/embed/#?secret=5moG4Jj1nU%23?secret=61BLZm8I67" width="500" height="282" frameborder="0"></iframe></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 May 2022 14:45:46 +0530</pubDate>
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                <title>अब तक का चौथा सबसे गर्म साल रहा 2018</title>
                                    <description><![CDATA[2016, 2015 और 2017 ही इससे गर्म रहे हैं जब से हम तापमान का रिकॉर्ड रख रहे हैं, तब से आज तक 2018 चौथा सबसे गर्म साल रहा है। यह निष्कर्ष यूएस के नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) और नेशनल ओशिओनोग्राफिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिनिस्ट्रेशन (एनओओए) की अलग-अलग रिपोर्ट में बताया गया है। एनओओए की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1>2016, 2015 और 2017 ही इससे गर्म रहे हैं</h1>
<p style="text-align:justify;">जब से हम तापमान का रिकॉर्ड रख रहे हैं, तब से आज तक 2018 चौथा सबसे गर्म साल रहा है। यह निष्कर्ष यूएस के नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) और नेशनल ओशिओनोग्राफिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिनिस्ट्रेशन (एनओओए) की अलग-अलग रिपोर्ट में बताया गया है। एनओओए की रिपोर्ट के मुताबिक पिछला साल इतना गर्म था कि समुद्र सतह का तापमान बीसवीं सदी के औसत से 0.79 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">तापमान के रिकॉर्ड 1880 से उपलब्ध हैं। तब से आज तक मात्र 2016, 2015 और 2017 ही इससे गर्म रहे हैं। नासा के वैज्ञानिक गेविन श्मिट का कहना है मुख्य बात यह है कि पृथ्वी गर्म हो रही है और हम भलीभांति समझते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है। इसका मुख्य कारण है ग्रीनहाउस गैसें जो हम वायुमंडल में छोड़ते चले जा रहे हैं। गर्म वर्षों की ओर यह रुझान कोई नई बात नहीं है। सदी के 10 सबसे गर्म वर्षों में से 9 तो 2005 के बाद के हैं। और सबसे गर्म 5 साल दरअसल पिछले 5 वर्ष (2014-2018) रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">नासा तथा एनओओए का यह निष्कर्ष अन्य संस्थाओं के आंकड़ों से मेल खाता है। जैसे युनाइटेड किंगडम के मौसम कार्यालय तथा विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने भी वर्ष 2018 को ही चौथा सबसे गर्म वर्ष बताया है। युरोप के अधिकांश हिस्सों, भूमध्यसागर क्षेत्र, मध्य पूर्व, न्यूजीलैंड और रूस के अलावा अटलांटिक महासागर तथा पश्चिमी प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में भी धरती और समुद्र का तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर रहा। हालांकि पृथ्वी के कुछ हिस्सों में ठंडक रही किंतु कुल मिलाकर 2018 गर्म रहा। वैश्विक औसत देखें तो बीसवीं सदी के औसत की तुलना में 2018 में धरती का तापमान 1.12 डिग्री सेल्सियस तथा समुद्र का तापमान 0.66 डिग्री सेल्सियस अधिक रिकॉर्ड किया गया।</p>
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                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Mar 2019 15:27:15 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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