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                <title>saint - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Nature of saint: संत का स्वभाव</title>
                                    <description><![CDATA[एक संत गांव में प्रवेश कर रहे थे। सैकड़ों भक्त उनके पास थे। अचानक एक व्यक्ति संत के सामने आया। उसके हाथ में एक पात्र था। वह कोयले और राख से भरा हुआ था। संत के निकट आते ही उसने राख और कोयला संत के सिर पर फेंक दिया। संत के भक्त क्रोधित हो उठे। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/nature-of-saint/article-21497"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/saint.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एक संत गांव में प्रवेश कर रहे थे। सैकड़ों भक्त उनके पास थे। अचानक एक व्यक्ति संत के सामने आया। उसके हाथ में एक पात्र था। वह कोयले और राख से भरा हुआ था। संत के निकट आते ही उसने राख और कोयला संत के सिर पर फेंक दिया। संत के भक्त क्रोधित हो उठे। उन्होंने कहा, ‘‘यह बदतमीजी है।’’ कुछ लोग उसे मारने के लिए आगे बढ़े। लेकिन संत ने कहा, ‘‘ शांत रहो।’’ लोग बोले, ‘‘महाराज, हमें मत रोकिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मूर्ख आदमी को सजा देना ही उचित है।’’ संत ने उत्तेजित लोगों को शांत करते हुए कहा, ‘‘यह आदमी मेरे लिए कितना अच्छा है। इसने मुझ पर जलते हुए अंगारे नहीं फेंके। बुझे हुए कोयले की राख फेंकी है। इससे मेरा कोई नुकसान नहीं हुआ। स्नान करते ही राख का सारा मैल साफ हो जाएगा।’’ संत के समर्थक भौचक्क होकर उन्हें देखते रह गए।</p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Feb 2021 16:27:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>संत शेख फरीद</title>
                                    <description><![CDATA[महापुरुष सूखे नारियल की तरह होते हैं और आम आदमी गीले नारियल जैसा। जब तक वह भौतिक वस्तुओं के आकर्षण और रिश्ते-नातों के मोह में बँधा है, कष्ट की नौबत आने पर दुखी होता है, जबकि संत-महात्मा सूखे नारियल की भाँति मोह से परे होते हैं, जैसे खोल से सूखा नारियल।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/saint-sheikh-farid/article-13012"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/sheiksh-farid.jpg" alt=""></a><br /><h3>महापुरुष सूखे नारियल की तरह होते हैं</h3>
<h4 style="text-align:justify;">शेख फरीद एक गाँव में पहुँचे थे। उनसे कई लोग मिलने आए। एक व्यक्ति ऐसा भी था जिसके पास कई प्रश्न थे। उसने फरीद को प्रणाम किया और प्रश्न पूछा- ‘ऐसा क्यों होता है कि ईसा मसीह को लोग सूली पर चढ़ाते हैं और वे सूली पर चढ़ाने वालों के लिए ही मंगलकामना करते हैं। तब भी वे हंस ही रहे थे?’ फरीद मुस्कुराए और उसे एक गीला नारियल हाथ में दिया। प्रश्नकर्त्ता को समझ नहीं आया कि फरीद ऐसा क्यों कर रहे हैं। जब फरीद ने प्रश्नकर्त्ता से कहा, अब इसे फोड़ो लेकिन इस बात का ख्याल रखना कि नारियल का गिरि वाला हिस्सा बिल्कुल अलग और पूरा खोल ही बाहर निकले। प्रश्नकर्त्ता व्यक्ति ने ऐसा ही किया, लेकिन जब खोपरा बाहर निकला तो टुकड़ों में था और नारियल की खोल भी चिपकी हुई थी। तब फरीद ने उसे एक सूखा नारियल दिया और इसे फोड़ने को कहा। उसे व्यक्ति ने जब सूखा नारियल फोड़ा तो देखा गिरि वाला गोला पूरा साबूत अलग निकला और नारियल की खोल पूरी की पूरी अलग हो गई थी। तब फरीद ने सवाल पूछने वाले को कहा, बस यही तुम्हारे सवाल का जवाब है। महापुरुष सूखे नारियल (Coconut) की तरह होते हैं और आम आदमी गीले नारियल जैसा। जब तक वह भौतिक वस्तुओं के आकर्षण और रिश्ते-नातों के मोह में बँधा है, कष्ट की नौबत आने पर दुखी होता है, जबकि संत-महात्मा सूखे नारियल की भाँति मोह से परे होते हैं, जैसे खोल से सूखा नारियल। भौतिक वस्तुओं के प्रति आकर्षण हो या संबंधों का मोह, हम जब तक जुड़े हैं कष्ट है। कोशिश करें यह जुड़ाव ऊपरी हो, भीतरी नहीं।</h4>
<h2 style="text-align:justify;">युधिष्ठिर का ध्यान</h2>
<h4 style="text-align:justify;">वन में बैठे युधिष्ठिर ध्यान मग्न थे। ध्यान से उठे तो द्रौपदी ने कहा, ‘‘महाराज! आप भगवान का इतना भजन करते हैं, इतनी देर तक ध्यान में बैठे रहते हैं, फिर उनसे क्यों नहीं कहते कि आपके संकटों को दूर कर दें? इतने वर्षों से आप और दूसरे पांडव वन में भटक रहे हैं। इतना कष्ट होता है, इतना क्लेश। फिर आप भगवान से क्यों नहीं कहते कि इन कष्टों का अंत कर दें।’’ युधिष्ठिर बोले, ‘‘द्रोपदी मैं भगवान का भजन तो करता हूँ, लेकिन सौदे के लिए नहीं। मैं भजन करता हूँ केवल इसलिए कि भजन करने में आनंद मिलता है। सामने फैली हुई उस पर्वतमाला को देखो। उसे देखते ही मन प्रफुल्लित हो जाता है। हम उससे कुछ माँगते नहीं। हम देखते हैं इसलिए कि उसे देखने से प्रसन्नता होती है। बस इसी तरह अपनी प्रसन्नता के लिए मैं भगवान का भजन करता हूँ।’’</h4>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2020 12:17:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेंट एमएसजी ग्लोरियस इंटरनेशनल स्कूल द्वारा ‘स्टूडेंट एक्सचेंज’ प्रोग्राम आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[आक्सफोर्ड स्कूल दुबई की शैक्षणिक गतिविधियों से रूबरू विद्यार्थी व शिक्षक -प्रधानाचार्या आयशा अंसारी ने फूलों का गुलदस्ता भेंट कर किया स्वागत -दोनों स्कूलों के छात्रों ने सांझा किए अपने विचार सरसा (सच कहूँ न्यूज)। सेंट एमएसजी ग्लोरियस इंटरनेशनल स्कूल द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को लेकर स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम द आॅक्सफोर्ड स्कूल दुबई के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">आक्सफोर्ड स्कूल दुबई की शैक्षणिक गतिविधियों से रूबरू विद्यार्थी व शिक्षक</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">-प्रधानाचार्या आयशा अंसारी ने फूलों का गुलदस्ता भेंट कर किया स्वागत</li>
<li style="text-align:justify;">-दोनों स्कूलों के छात्रों ने सांझा किए अपने विचार</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सेंट एमएसजी ग्लोरियस इंटरनेशनल स्कूल द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को लेकर स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम द आॅक्सफोर्ड स्कूल दुबई के साथ संयुक्त रुप से आयोजित किया गया। इस दौरान स्कूल के विद्यार्थी व अध्यापकगणों ने दो दिन द आॅक्सफोर्ड स्कूल दुबई में बिताए और रोजमर्रा की गतिविधियों को समझा। जिसमें शैक्षणिक व सहशैक्षणिक गतिविधियां सम्मिलित थी। विदित है कि आॅक्सफोर्ड स्कूल दुबई में लगभग 60 से 70 देशों के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं और इसलिए यह स्कूल विभिन्न संस्कृतियों का मिश्रण है। अत: स्कूल के विद्यार्थियों को इन विदेशी संस्कृतियों के बारे में बड़ा नजदीक से जानने का मौका मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">सेंट एमएसजी ग्लोरियस इंटरनेशनल स्कूल के इतिहास में पहली बार हुआ है कि छात्रों ने इस तरह के विदेशी कार्यक्रम में हिस्सा लिया जोकि अपने आप में एक अद्भुत अनुभव है। छात्रों व अध्यापकों विद्यालय पहुंचने पर द आॅक्सफोर्ड स्कूल दुबई के प्रधानाचार्या आयशा अंसारी ने गरम जोशी के साथ फूलों का गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया और पूरे विद्यालय का भ्रमण करवाया। विद्यार्थियों ने सबसे पहले कक्षाओं का भ्रमण किया और पढ़ाई की और वहां की शिक्षा तकनीक को जाना। वहीं दूसरी ओर अध्यापकों ने भी बच्चों की कक्षा ली और भारतीय शिक्षा को लेकर<br />
विचार-विमर्श किया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">डिबेट में आक्सफोर्ड स्कूल के छात्रों को दी मात</h2>
<p style="text-align:justify;">दोनों स्कूल के छात्रों के बीच ‘‘सोशल नेटवर्किं ग हिन्डरस दा डेवलपमेंट आॅफ सोसायटी’’ विषय पर एक डिबेट आयोजित की गई। जिसमें सेंट एमएसजी ग्लोरियस इंटरनेशनलस्कूल के छात्रों ने उम्दा प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता जीती। वहीं दोनों स्कूल के छात्रों के बीच खेल गतिविधियों के तहत क्रिकेट मैच और टग आॅफ वॉर का मैच खेला गया जिसमें द आॅक्सफोर्ड स्कूल के बच्चे विजेता रहे। अंत में विदाई समारोह में बच्चों ने अपने अपने विचार रखे। दोनों स्कूलों के प्रिंसिपल ने धन्यवाद किया और टोकन आॅफ लव देकर विदाई की।</p>
<h2 style="text-align:justify;">छात्रों ने जानी शिक्षा की नई तकनीक: अभिषेक शर्मा</h2>
<p style="text-align:justify;">सेंट एमएसजी ग्लोरियस इंटरनेशनल स्कूल के निदेशक प्राचार्य अभिषेक शर्मा ने बताया कि विद्यालय का यह पहला प्रयास था जिसमें बच्चों ने काफी कुछ सीखा। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोग्राम से बच्चों की शिक्षा की नई तकनीक की जानकारी तो मिलती ही है साथ ही बच्चों का मानसिक विकास भी होता है। प्राचार्य ने बताया कि मैनेजमैंट द्वारा आॅक्सफोर्ड स्कूल दुबई को भी आमंत्रित किया गया है और वह यहां आने को काफी उत्साहित भी हैं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/saint-msg-glorious-international-school/article-7511</link>
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                <pubDate>Fri, 01 Feb 2019 19:27:42 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाग्यशाली इन्सान को मिलता है पूर्ण सतगुरु</title>
                                    <description><![CDATA[Sirsa: पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी धाम सरसा में आयोजित बुधवार शाम की रूहानी मजलिस के दौरान फरमाया कि जिसे पूर्ण सतगुरु मिल जाता है उससे भाग्यशाली इंसान इस दुनिया में हो नहीं सकता। कहीं भी जाना हो इंसान सोचता है परफेक्ट गाईड चाहिए, रास्ता बताने वाला […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/lucky-person-gets-full-saint/article-621"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/pitaji-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Sirsa:</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी धाम सरसा में आयोजित बुधवार शाम की रूहानी मजलिस के दौरान फरमाया कि जिसे पूर्ण सतगुरु मिल जाता है उससे भाग्यशाली इंसान इस दुनिया में हो नहीं सकता। कहीं भी जाना हो इंसान सोचता है परफेक्ट गाईड चाहिए, रास्ता बताने वाला चाहिए। कहीं इधर-उधर न रुल जाऊं खो न जाऊं इसलिए किसी जानकार को अपने साथ रखना पसंद करते हैं। लेकिन जिसे दोनों जहान का गाईड मिल जाए, उसके बराबर कोई दूसरा कैसे आ सकता है। आत्मा जब शरीर छोड़ कर जाती है या यूं कहिए जीते जी जब कोई भक्ति इबादत करता है,<br />
आत्मा शरीर के अंदर मालिक तक पहुंचने की जो यात्रा तय करती ह,ै सवाल ही नहीं पैदा होता बिना जानकार के उस रास्ते पर एक कदम भी रखा जा सके। पूज्य गुरु जी ने फरमाया, गुरु पीर-फकीर वो तरीका बताते हैं जिसपर चलकर जीवात्मा परम पिता परमात्मा के दर्शन कर सकती है। मालिक के दर्श दीदार के लिए उसकी दया मेहर रहमत को हासिल करने के लिए यह जरूरी हो जाता है कि पूर्ण गाईड सतगुरु मौला मिले। और जिसे पूर्ण सतगुरु मिल जाता है उसका सुमिरन करें, भक्ति इबादत करे और ओड़ निभा दे, उसके जैसा कोई दूसरा हो नहीं सकता। बड़ा मुश्किल है सतगुरु से अल्लाह राम से प्यार पाकर ओड़ निभाना। बहुत तरह की रूकावटें खड़ी हो जाती हैं। सबसे बड़ी रूकावट इंसान का मन है हर समय अंदर रहता है, हर समय दगा देता रहता है, हर समय गलत रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। दूसरा माया है, माया के बंधन बड़े जबरदस्त हैं बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों को इसने अपने झांसे में ले लिया तो इंसान का बचना बड़ा मुश्किल हो जाता है। लेकिन जो सुमिरन करते हैं, जो भक्ति इबादत करते हैं वो मोह-माया के बंधनों को काट देते हैं। तो मन और माया से टक्कर लेता हुआ इंसान यानि जीवात्मा आगे बढ़ती है तो उसके लिए सुमिरन ही एक मात्र तरीका होता है।<br />
पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि किसी भ्रम-भुलेखे में इंसान को कभी नहीं पड़ना चाहिए। जितना ढोंगी-पाखंडी इंसान बनता जाता है उतना मालिक की खुशियों से दूर हो जाता है। बात-बात पर पाखण्ड, बात-बात पर दिखावा जो इंसान करते हैं, जिंदगी तो जीते हैं पर जो नजारे मिलने चाहिए, जो खुशियां मिलनी चाहिए उससे बहुत दूर हो जाते हैं। तो अपने आपको उस मालिक के प्यार मोहब्बत के लायक बनाओ सेवा और सुमिरन के द्वारा। सेवा करो जितनी कर सकते हो, भक्ति करो, बहुत कर सकते हो, लेट कर बैठ कर कामधंधा करते हुए चलते हुए कभी भी भक्ति करो, और ये हो नहीं सकता वो भक्ति दरगाह में मंजूर कबूल न हो। वो राम ईश्वर वो मालिक सबकी सुनता है पर कोई सुनाने वाला चाहिए। लोग उसे सुनाते हैं मुझे पैसा चाहिए, घर परिवार चाहिए, जमीन-जायदाद, धन-दौलत चाहिए । करोबार चाहिए पर कोई होता है जो भगवान को कहता है मुझे तेरे दर्श दीदार चाहिए।<br />
मां-बाप अपने बच्चों के लिए कितना करते हैं। बच्चा अगर जरा सा रो दे तो मां उसे दूध पिला देती है। तो जो मां-बाप को बनाने वाला भगवान कोई उसके लिए तड़पे तो कैसे नहीं चलकर आएगा? क्यों नहीं दर्श-दीदार देगा। उसका तो काम ही दर्श दीदार देना है। वो तो दे रहा है अब भी कण-कण में जर्रे-जर्रे में मौजूद हैं पर उसके लायक आंखें बनाती पड़ती हैं। वो आंखें और है जिनसे उन परम पिता के दर्शन किए जा सकते हैं। आंखें यही होती है इनमें राम नाम की दवा डालो तो ये आंखें जैसे दुनिया की तरफ से बंद करोगे वैसे ही अंदर की तरफ खुलेगी और परम पिता परमात्मा के नूरी स्वरूप के दर्शन होंगे। लेकिन जब आंखें ही इंसान की कहीं और खो जाएं! ये भी तो वणज करती हैं ठग्गी का, बेईमानी का, चुगलखोरी का, रिश्वतखोरी का, भ्रष्टाचार का, काम-वासना का, क्रोध लोभ मोह अहंकार का। इंसान कहां खड़ा है इसका कुछ पता नहीं और कब उसकी आंखें चुगली खा जाएं। भक्ति मार्ग में सत्संग में आकर जो इसांन ऐसा कुछ करता है, उसे शारीरिक और मानसिक तकलीफ आती ही आती है। जब कहते हैं पतिव्रता जो पति के बिना दूसरे को देखती नहीं या पति भी पत्नीव्रता होता है वो भी किसी की तरफ ध्यान नहीं देता तो जो भगवान से राम से प्यार करने वाले हैं उनका भी तो उसी के बच्चों से नि:स्वार्थ जबरदस्त प्यार होता है। उनकी आंख में और कोई दूसरा आता ही नहीं। काश यहीं आंखें एक जगह टिका उसके दर्श-दीदार में लगाते तो न अंदर कमी न बाहर कमी रहती है। क्योंकि राम से जो प्यार करते हैं राम बिना कहे उनके काज संवार देते हैं। शक्ल पर मत जाईए, पर जिसने इसको बनाया उसपर जरूर जाईए। आप शक्ल और सूरत पर आशिक हो जाते हो। और बनाने वाले को भूल जाते हो। सोने के गहने किसी ने पहने होते हैं वो वैसे ही इतराते रहते हैं। और जिस कारीगर की कला है उसका कोई नाम ही नहीं लेता।<br />
पूज्य गुरु जी ने आगे फरमाया कि क्या है आपकी आंख में? क्या करते रहते हो? कहां घुमाते रहते हो? किसमें अटकाते रहते हो? कितना खुदगर्ज है आज का इंसान? जिंदगी जिए जा रहा है और जिस सतगुरु ने नाम दिया है उसका शुक्राना ही नहीं करता। इंसान जब बिगड़ने पर आता है तो कई तरह के बहाने बनाता है। ये तो उसकी रजा है, वो दर्श दे या नहीं तो उसकी मर्जी। सतगुरु है समय के अनुसार सब कुछ चलता है। और आज के दौर में भी कोई न कोई सज्जन होते हैं। कईयों का दिल भी खराब करते हैं ऐसे लोग, उनको सब्जबाग दिखाते हैं। अगर आप ऐसे ही निंदा चुगली कर रहे हैं तो उससे आप ने क्या पाया बल्कि जो था वो भी गंवाए बैठे हो। और दूसरों को गलत पट्टी पढ़ा कर अपने कुलों का, अपने परिवार का घात कर रहे हो उसमें फायदा होने वाला बिल्कुल भी नहीं है। जब तक पीर-फकीर बात पूरी करते रहे, वाह वाह करते हैं। और जैसे ही बात पूरी न हो तो पीर-फकीर से नाराज हो जाते हैं। अगर आपकी भावना शुद्ध है तो सतगुरु मौला इतना बख्शते हैं कि झोलियां दामन छोटे पड़ जाते हैं। इसलिए दृढ़ यकीन रखो, आंखें उस परम पिता परमात्मा सतगुरु मौला राम के लिए रखो। हम ये नहीं कहते कि दुनिया को न देखो सब उसी का रंग-राग है उसी का साजोसामान है। पर ऐसा न हो आंखें कहीं अटक जाएं रास्ता भटक जाएं। और जिसे पाना था वो कहीं और रह जाए और आप कहीं और रह जाएं। चाहे कितने साल हों गए हो नाम लिए को, पर नाम से कभी काम लिया, भक्ति की, कभी राम के प्रति इश्क जागा। अगर जागा तो इश्क में न दिन का पता चलता है न रात का पता चलता है। शाह सतनाम जी का रहमोकर्म होता है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Dec 2016 21:39:44 +0530</pubDate>
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