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                <title>Syria War: - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Syria War News Update: सीरिया में असद सरकार का तख्ता पलट!</title>
                                    <description><![CDATA[Syria Civil War: दमिश्क (एजेंसी)। सीरिया में विपक्षी गठबंधन के नेता हादी अल-बहरा ने कहा है कि राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार गिर गई है और इसके साथ ही सीरिया के इतिहास का एक काला युग बीत चुका है। बहरा ने अरबी समाचार संगठन अल-अरबिया से बातचीत में यह जानकारी दी। बीबीसी ने बताया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/assad-government-overthrown-in-syria/article-65152"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/syria-war.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Syria Civil War: दमिश्क (एजेंसी)। सीरिया में विपक्षी गठबंधन के नेता हादी अल-बहरा ने कहा है कि राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार गिर गई है और इसके साथ ही सीरिया के इतिहास का एक काला युग बीत चुका है। बहरा ने अरबी समाचार संगठन अल-अरबिया से बातचीत में यह जानकारी दी। बीबीसी ने बताया कि नेशनल कोलिशन फॉर सीरियन रिवोल्यूशन एंड अपोजिशन फोर्सेज के नेता बहरा ने जनता को आश्वासन दिया है कि दमिश्क सुरक्षित है। बहरा ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘सभी संप्रदायों और धर्मों के हमारे लोगों के लिए संदेश है कि जब तक आप किसी अन्य नागरिक के खिलाफ हथियार नहीं उठाते हैं और जब तक आप अपने घरों में रहते हैं, तब तक आप सुरक्षित हैं। Syria War News Update</p>
<p><a title="Kurukshetra Family Murder: ख़त्म कर पूरा परिवार खुद भी की ख़ुदकुशी!" href="http://10.0.0.122:1245/after-finishing-the-whole-family-they-committed-suicide/">urukshetra Family Murder: ख़त्म कर पूरा परिवार खुद भी की ख़ुदकुशी!</a></p>
<p style="text-align:justify;">बदला या प्रतिशोध के कोई मामले नहीं होंगे और मानवाधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं होगा। लोगों की गरिमा का सम्मान किया जाएगा और उनकी गरिमा को बनाये रखा जाएगा।’’ रिपोर्ट के अनुसार, सीरिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद गाजी अल-जलाली ने कहा कि वह लोगों द्वारा चुने गए नेतृत्व के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं। मोहम्मद गाजी अल-जलाली ने सोशल मीडिया पर प्रसारित एक भाषण में यह भी कहा कि सीरिया एक सामान्य देश हो सकता है जो अपने पड़ोसियों और दुनिया के साथ अच्छे संबंध बनाता है।</p>
<h3>राष्ट्रपति बशर अल असद अज्ञात स्थान पर भागे</h3>
<p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले डेढ़ सप्ताह में विद्रोही बलों की ओर से प्रमुख शहरों में सफल आक्रमण शुरू करने पर सीरियाई लोग खुशी से झूम रहे हैं। रविवार को, दमिश्क में भी जश्न के ऐसे ही दृश्य देखे गए, जब विद्रोही अंदर घुसे और राष्ट्रपति बशर अल-असद के भाग जाने की सूचना मिली। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विपक्षी लड़ाकों द्वारा हवाई अड्डे पर कब्जा करने से कुछ ही क्षण पहले ओपन-सोर्स फ्लाइट ट्रैकर्स ने सीरिया के हवाई क्षेत्र में एक विमान की गतिविधि रिकॉर्ड की।</p>
<p><a title="Delhi Elections 2025: केजरीवाल सरकार ने लगाए दिल्ली में कूड़े के पहाड़: भाजपा" href="http://10.0.0.122:1245/kejriwal-government-has-created-mountains-of-garbage-in-delhi-bjp/">Delhi Elections 2025: केजरीवाल सरकार ने लगाए दिल्ली में कूड़े के पहाड़: भाजपा</a></p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में कहा गया है कि उड़ान संख्या सीरियन एयर 9218 वाला इल्युशिन 76 विमान दमिश्क से उड़ान भरने वाला अंतिम विमान था। पहले यह पूर्व की ओर उड़ा, फिर उत्तर की ओर मुड़ गया। कुछ मिनट बाद, होम्स के ऊपर चक्कर लगाते ही इसका सिग्नल गायब हो गया। दावे किए जा रहे हैं कि असद विमान में सवार होकर दमिश्क से किसी अज्ञात स्थान के लिए रवाना हो गए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लोगों में खुशी की लहर</h3>
<p style="text-align:justify;">देश से बाहर जबरन विस्थापित किए गए लाखों सीरियाई लोगों ने आठ दिसंबर को देश पर राष्ट्रपति असद के दशकों लंबे शासन के अंत का जश्न मनाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है। फिलहाल आॅस्ट्रेलिया में रह रहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता रीमा फ्लिहान ने अपने फेसबुक पर लिखा, ‘‘हे भगवान, मैं रोना बंद नहीं कर सकती। मैं उस दिन की कल्पना कर रही हूँ, जब मैं वापस जाऊंगी।’’</p>
<h3 style="text-align:justify;">सबसे बड़ा शरणार्थी संकट झेला</h3>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर के अनुसार, सीरिया ने दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट देखा है। एजेंसी का अनुमान है कि 2011 से लगभग 66 लाख सीरियाई लोगों को अपने घरों से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही विपक्षी सेना दमिश्क पहुंची, कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने जश्न मनाते और खुशी के आंसू बहाते हुए अपने वीडियो पोस्ट किये।</p>
<h3 style="text-align:justify;">300 से अधिक आतंकियों और 55 वाहनों का सफाया: रूसी सेना</h3>
<p style="text-align:justify;">मास्को (एजेंसी)। रूस ने पिछले 24 घंटों में सीरिया के इदलिब और अलेप्पो प्रांतों में 300 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया और 55 मोटर वाहन और एक उपकरण डिपो को नष्ट किया गया है। यह जानकारी रूसी रक्षा मंत्रालय के सीरिया में विरोधी पक्षों के सुलह केंद्र के उप प्रमुख ओलेग इग्नास्युक ने दी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इजराइल ने गोलान बफर जोन में सेना की तैनात | Syria War News Update</h3>
<p style="text-align:justify;">तेल अवीव (एजेंसी)। इजरायल ने गोलान हाइट्स में इजराइल-सीरिया सीमा पर बफर जोन के भीतर नई जगहों पर अपनी सेना तैनात की है। यहूदी राष्ट्र ने यह कदम सीरिया में असद शासन के पतन के बाद उठाया है। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने इस कदम की पुष्टि की है। यह 1974 में एग्रीमेंट आॅन डिसइंगेजमेंट पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद से इस तरह की पहली तैनाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इजराइल डिफेंस फोर्सेज एक्स पर यह जानकारी दी। आगे बताया कि सेना तैनात करने का मकसद है कि गोलान हाइट्स के लोगों और इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पोस्ट में लिखा गया है कि यह कदम एक नए आकलन और बफर जोन में बंदूकधारियों के घुसने की संभावना को देखते हुए उठाया गया है। Syria War News Update</p>
<p><a title="Kisan Andolan News: शंभू बॉर्डर पर रोके गए किसान, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले" href="http://10.0.0.122:1245/farmers-were-stopped-at-shambhu-border-police-fired-tear-gas-shells/">Kisan Andolan News: शंभू बॉर्डर पर रोके गए किसान, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Dec 2024 20:13:16 +0530</pubDate>
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                <title>सीरिया युद्ध: मानव जीवन पर सबसे बड़ा प्रहार</title>
                                    <description><![CDATA[सीरिया में आठ वर्षों से लगातार जारी युद्ध में लगभग तीन लाख सत्तर हजार लोग अपनी जान गवा चुकें हैं जिसमें से नागरिकों की संख्या एक लाख बारह हजार से भी ज्यादा है। बीते शुक्रवार को यह आंकडे सीरिया के मानवाधिकार के लिए काम करने वाली संस्था सीरियन आॅबजर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइटस की ओर से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">सीरिया में आठ वर्षों से लगातार जारी युद्ध में लगभग तीन लाख सत्तर हजार लोग अपनी जान गवा चुकें हैं जिसमें से नागरिकों की संख्या एक लाख बारह हजार से भी ज्यादा है। बीते शुक्रवार को यह आंकडे सीरिया के मानवाधिकार के लिए काम करने वाली संस्था सीरियन आॅबजर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइटस की ओर से जारी किए गए हैं। आंकडों के अनुसार इस युद्ध में अभी तक 21 हजार बच्चों के अलावा 13 हजार महिलाओं की भी मौत हो चुकी है। ज्ञात हो कि विभिन्न गुटों के बीच जारी हिंसक संघर्ष की शुरूआत आज से लगभग आठ साल पहले 15 मार्च 2011 को हुई थी। उस दिन सीरिया के दक्षिणी शहर दारा में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की प्रारंभिकता हुई थी। यह विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया जिसे असद सरकार ने हिंसक तरीके से दबाने की कोशिश भी की थी लेकिन यह मिशन पूर्ण रुप से फेल हो गया था। गृह युद्ध में तब्दील हो चुके माहौल में अलग-अलग गुटों ने अपना-अपना दावा ठोकना शुरू कर दिया। इसके बाद फिर इस गृह युद्ध में वैश्विक ताकतें भी शामिल हो गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्य से झूझते सीरिया के आंकड़ों से पूरे विश्व में बैचेनी हो गई है। क्या इसको रोकने में विश्व की शक्तियों ने आतंक के आगे घुटने टेक दिए या कौन से ऐसी लाचारी है जिससे मानव जीवन की लगातार होने वाली क्षति को रोका नही जा रहा। विश्व के अहम देशों को नियंत्रण सभी देशों पर होता है व उनकी मर्जी के बिना प्रतिबंधित कार्य होता है तो उस देश की आफत हो जाती है। लेकिन सीरिया में लगातार आंतक का साया हटने का नाम ही नही ले रहा। वहां के नागरिकों का कहना है कि हम रोज सुबह जब भी उठते हैं तो अपनी जिंदगी का आखिरी दिन समझकर जीते है क्योंकि लगातार हो रहे मौत के तांडव से हमें नही पता होता कि हम अगला दिन देख पाएगें या नही।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको ज्ञात हो कि बशर अल-असद ने सन् 2000 में अपने पिता हाफेज अल असद की सीट संभाल ली थी। अरब के तमाम देशों में सत्ता के खिलाफ शुरू हुई बगावत से प्रभावित होकर मार्च 2011 में सीरिया के दक्षिणी शहर दराआ में भी लोकतंत्र के समर्थन में आंदोलन की शुरूवात हुई थी व साथ ही संघर्ष के शुरू होने से पूर्व अधिकतर सीरियाई नागरिकों में बेरोजगारी,राजनीतिक स्वतंत्रता के अभाव व भ्रष्टाचार के चलते राष्ट्रपति असद के दमन के खिलाफ बड़े स्तर पर निराशा थी। ट्रंप से लेकर पुतिन तक ने इस मामलें में कई बार हस्तक्षेप किया और असद की तानाशाही प्रक्रिया को रोकने के लिए हवाई हमले भी किये लेकिन स्थिति कभी निर्णायक नही बन पाई। 2117 में 50 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों ने सीरिया के एयर बेसों को निशाना बनाया था। अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इन हमलों के बाद टीवी पर दिए इंटरव्यू में कहा था कि सीरिया के राष्ट्रपति असद एक तानाशाह हैं जिन्होंने मासूम लोगों पर रासायनिक हथियारों से हमला किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">यह घटना एक विश्वस्तरीय विफलता का सबसे बड़ा व सजीव उदाहरण बन चुका है। सीरिया में मात्र पौने दो करोड़ लोग बचे है वो भी रोजाना घटते जा रहे है। मानवता के हनन की बात की जाए तो गरीबी व भूखमरी इतनी बढ़ चुकी है कि थोडे से खाने व पैसों के लिए महिलाओं को यौन शौषण हो रहा व कैंप में रही महिलाओं के साथ भी गलत हरकते होती रहती हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक लैंगिक हिंसा का विश्लेषण किया गया था, जिसमें कई घटनाओं का भी जिक्र था। रिपोर्ट में बताया गया था कि खाने-पीने की सामग्री के लिए महिलाएं और लड़कियां से अधिकारी कुछ समय के लिए शादी करके बाद में छोड़ देते थे। राहतकर्मी उनके फोन नंबर मांगते थे और उन्हें घर ले जाते थे। विधवा और तलाकशुदा महिलाएं निशाने पर ज्यादा होती थीं।द इंटरनेशनल रेस्क्यू कमिटी ने ऐसा ही सर्वे जून 2015 में किया था जिसमें 190 महिलाएं और लड़कियों से पूछताछ हुई थी। सर्वे के अनुसार 40 फीसदी महिलाओं ने माना था कि मदद के बदले वो यौन हिंसा की शिकार हुई थीं। सर्वे का निष्कर्ष था कि दक्षिण सीरिया में यौन हिंसा व्यापक चिंता का विषय है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा भी तमाम ऐसी बातें है जिसको हम लिख या बता नही सकते क्योंकि हर वो घृणित तस्वीर जिसका सीरिया की जनता उदाहरण बनता जा रही है जिसको दरिंदगी की सबसे घिनौनी तस्वीर कहेगें। कहते है कि किसी भी चीज का अंत होता है लेकिन यहां तो युद्ध के आठ वर्ष ऐसे बीते चुके मानो किसी देश में तरक्की का कोई बहुत बड़ा प्रोजक्ट आ रहा हो। कभी कभी तो यहां की खबरें लिखते वक्त ऐसा लगने लगा कि किसी डरावनी फिल्म की स्क्रीप्ट लिख रहे हो। सबसे दुखदायी यह है कि यदि आज इतनी कम जनसंख्या वाले देश पर नियंत्रण लगाना इतना मुश्किल है तो यदि अधिक जनसंख्या वाले देशों का क्या होगा। यूनस्को के बावजूद भी यदि यह युद्ध शांत नही हो पा रहा तो निश्चित तौर पर देश व जनता ऐसी संस्थाओं को गंभीरता से लेना बंद कर देगी। इंसान की कीमत व स्वतंत्रता को न समझने वाले हर उस तानाशाह पर नियंत्रण करना होगा जो कलयुग में राक्षस का रोल निभा रहा है वरना हम आज भी कहेगें कि हम इंसानियत के सबसे बुरे दौर में पैदा हुआ हैं।</p>
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                <pubDate>Mon, 01 Apr 2019 19:51:11 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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