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                <title>Women reservation bill - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Women Reservation Bill: संसद में पास होना ऐतिहासिक कदम</title>
                                    <description><![CDATA[Women Reservation Bill : आखिरकार 27 वर्षों के बाद महिला आरक्षण बिल संसद में पास हो गया। बिल के पक्ष में एकजुटता का आलम यह रहा कि राज्यसभा में बिल के खिलाफ एक भी वोट नहीं पड़ा और लोकसभा में भी बिल भारी बहुमत से पास हो गया। विपक्षी दल कांग्रेस शुरू से ही इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/historic-step-of-passing-womens-reservation-bill-in-parliament/article-52730"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/women-reservation-bill-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Women Reservation Bill : आखिरकार 27 वर्षों के बाद महिला आरक्षण बिल संसद में पास हो गया। बिल के पक्ष में एकजुटता का आलम यह रहा कि राज्यसभा में बिल के खिलाफ एक भी वोट नहीं पड़ा और लोकसभा में भी बिल भारी बहुमत से पास हो गया। विपक्षी दल कांग्रेस शुरू से ही इस बिल के पक्ष में रही है और एक-दो बिंदुओं को छोड़कर सभी पार्टियों ने इसका समर्थन किया है। बिल पर आपत्ति केवल इसके लागू होने की समय सीमा तक ही सीमित है। बिल के कानून बनने के बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में यह कानून लागू नहीं हो सकेगा। फिर भी, यह पहल ऐतिहासिक है, जिससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है। Women Reservation Bill</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, लोकतंत्र समानता के सिद्धांत पर आधारित एक राजनीतिक प्रणाली है, जहां सभी को समान अवसर दिए जाते हैं। हमारे देश में मध्यकाल से ही महिलाएं सामाजिक एवं आर्थिक रूप से बदहाली का जीवन व्यतीत करती आ रही हैं, राजनीति या शासन में भागीदारी तो दूर की बात थी। इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत में लोकतंत्र न तो असफल है और न ही पूरी तरह सफल, बल्कि निरंतर खामियों को दूर करता हुआ आगे बढ़ रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी से समाज में बदलाव आएगा तथा महिलाओं का स्वाभिमान बढ़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अब जरूरत इस बात की है कि राजनीतिक दल निष्पक्षता और सच्चाई पर चलकर योग्य व सक्षम महिलाओं को अवसर दें, भले ही वे महिलाएं गरीब वर्ग से संबंधित हों। वर्तमान स्थिति यह है कि राजनीति काफी हद तक बड़े परिवारों तक ही सीमित है। राजनीति में सिर्फ अमीर लोग ही अपनी किस्मत आजमाते हैं, लेकिन ये भी सच है कि चंद नेता आम घरों से भी निकले हैं। मौजूदा समय में देश के बड़े पदों पर आसीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi), राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) किसी अमीर परिवार से नहीं आते हैं। इसी तरह कई मुख्यमंत्री भी सामान्य परिवारों से संबंध रखते हैं, फिर भी राजनीति काफी हद तक धनाढ्य परिवारों की जागीर बनी हुई है। Women Reservation Bill</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीति में प्रतिभा को महत्व दिया जा रहा है, लेकिन इसके उदाहरण कम हैं। यदि आरक्षण देकर महिलाओं को समानता देने का प्रयास है तो पार्टियों को समानता के सिद्धांत का सम्मान करते हुए सक्षम महिलाओं को आगे लाना चाहिए। समानता का मतलब केवल योग्यता की सराहना करने से है। इसे पूरा करने के लिए यह भी जरूरी है कि महिला सरपंच पति की संस्कृति को छोड़कर अपनी क्षमताओं का उपयोग विधायक या सांसद बनने के लिए करें।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Sep 2023 09:49:09 +0530</pubDate>
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                <title>महिला आरक्षण विधेयक के लिए उप सभापति पैनल में सभी महिला सांसद</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने महिला आरक्षण (Women Reservation) से संबंधित संविधान (128 वां संशोधन) विधेयक 2023 को सदन में पारित कराने की चर्चा के संंचालन के लिए उप सभापति पैनल का पुनर्गठन करते हुए इसके सदस्यों में केवल महिलाओं को शामिल किया है। सदन में गुरुवार सुबह सदन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/all-women-mps-in-deputy-chairman-panel-for-women-reservation-bill/article-52661"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/jagdeep-dhankhar-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने महिला आरक्षण (Women Reservation) से संबंधित संविधान (128 वां संशोधन) विधेयक 2023 को सदन में पारित कराने की चर्चा के संंचालन के लिए उप सभापति पैनल का पुनर्गठन करते हुए इसके सदस्यों में केवल महिलाओं को शामिल किया है। सदन में गुरुवार सुबह सदन की कार्यवाही शुरू करने के बाद सभापति ने सदन को यह जानकारी दी और कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर राज्यसभा में उप सभापति के लिए सर्व-महिला पैनल का गठन किया गया है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पर चर्चा के दौरान 13 महिला सदस्यों को पैनल में नामांकित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस पद पर उनकी उपस्थिति से विश्वभर में एक शक्तिशाली संदेश जाएगा और यह इस बात का प्रतीक होगा कि परिवर्तन के इस युगांतकारी क्षण के दौरान वे एक ‘प्रभावशाली पद’ पर थीं। पैनल में नामित पी.टी. उषा, भारतीय जनता पार्टी की एस. फांगनोन कोन्याक, समाजवादी पार्टी के जया बच्चन, सरोज पांडे, इंदु बाला गोस्वामी, कविता पाटीदार तथा डॉ. कल्पना सैनी, कांग्रेस की रजनी अशोकराव पाटिल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की डॉ. फौजिया खान, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन, द्रविड मुनेत्र कषगम की डॉ. कनिमोझी एनवीएन सोमू, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी और बीजू जनता दल की सुलता देव शामिल हैं। Women Reservation</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पात्र होने के बावजूद मोबाइल फोन वितरित न करने का आरोप" href="http://10.0.0.122:1245/accusation-of-not-giving-mobile-phone-despite-being-eligible/">पात्र होने के बावजूद मोबाइल फोन वितरित न करने का आरोप</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 21 Sep 2023 15:47:48 +0530</pubDate>
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                <title>Women Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल मील का पत्थर सिद्ध होगा</title>
                                    <description><![CDATA[Women Reservation Bill: बीते सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट (Central Cabinet) ने लोकसभा व विधानसभाओं में तैंतीस फीसदी आरक्षण को मंजूरी दी थी। इसके अगले दिन नई संसद में कामकाज का श्रीगणेश हुआ नारी शक्ति को उसके दशकों से लंबित अधिकार देने से हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने पुराने संसद भवन में अपने अंतिम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/womens-reservation-bill-will-prove-to-be-a-milestone/article-52644"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/women-reservation-bill.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Women Reservation Bill: बीते सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट (Central Cabinet) ने लोकसभा व विधानसभाओं में तैंतीस फीसदी आरक्षण को मंजूरी दी थी। इसके अगले दिन नई संसद में कामकाज का श्रीगणेश हुआ नारी शक्ति को उसके दशकों से लंबित अधिकार देने से हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने पुराने संसद भवन में अपने अंतिम भाषण में कहा कि दोनों सदनों में अब तक 7500 से अधिक जन प्रतिनिधियों ने काम किया है, जबकि महिला प्रतिनिधियों की संख्या करीब 600 रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के योगदान ने सदन की गरिमा बढ़ाने में मदद की है। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चैधरी ने पिछले 75 सालों में कांग्रेस सरकारों के कामकाज का लेखा-जोखा पेश किया। इस दौरान सोनिया गांधी ने उन्हें महिला आरक्षण बिल की याद दिलाई थी। Women Reservation Bill</p>
<p style="text-align:justify;">इतिहास के पन्ने पलटे तो महिला आरक्षण बिल 1996 से ही अधर में लटका हुआ है। उस समय एचडी देवगौड़ा सरकार ने 12 सितंबर 1996 को इस बिल को संसद में पेश किया था। लेकिन पारित नहीं हो सका था। यह बिल 81वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में पेश हुआ था। बिल में संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रस्ताव था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस 33 फीसदी आरक्षण के भीतर ही अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए उप-आरक्षण का प्रावधान था, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं था। इस बिल में प्रस्ताव है कि लोकसभा के हर चुनाव के बाद आरक्षित सीटों को रोटेट किया जाना चाहिए। आरक्षित सीटें राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन के जरिए आवंटित की जा सकती हैं। इस संशोधन अधिनियम के लागू होने के 15 साल बाद महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण खत्म हो जाएगा।</p>
<h3>1998 में वाजपेयी सरकार ने पेश किया था | Women Reservation Bill</h3>
<p style="text-align:justify;">अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 1998 में लोकसभा में फिर महिला आरक्षण बिल को पेश किया था। कई दलों के सहयोग से चल रही वाजपेयी सरकार को इसको लेकर विरोध का सामना करना पड़ा। इस वजह से बिल पारित नहीं हो सका। वाजपेयी सरकार ने इसे 1999, 2002 और 2003-2004 में भी पारित कराने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुई। बीजेपी सरकार जाने के बाद 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए सरकार सत्ता में आई और डॉक्टर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।</p>
<p style="text-align:justify;">यूपीए सरकार ने 2008 में इस बिल को 108वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में राज्यसभा में पेश किया। वहां यह बिल नौ मार्च 2010 को भारी बहुमत से पारित हुआ। बीजेपी, वाम दलों और जेडीयू ने बिल का समर्थन किया था। यूपीए सरकार ने इस बिल को लोकसभा में पेश नहीं किया। इसका विरोध करने वालों में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल शामिल थीं। ये दोनों दल यूपीए का हिस्सा थे। कांग्रेस को डर था कि अगर उसने बिल को लोकसभा में पेश किया तो उसकी सरकार खतरे में पड़ सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">साल में 2008 में इस बिल को कानून और न्याय संबंधी स्थायी समिति को भेजा गया था। इसके दो सदस्य वीरेंद्र भाटिया और शैलेंद्र कुमार समाजवादी पार्टी के थे। इन लोगों ने कहा कि वे महिला आरक्षण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से बिल का मसौदा तैयार किया गया, वे उससे सहमत नहीं थे। इन दोनों सदस्यों की सिफारिश की थी कि हर राजनीतिक दल अपने 20 फीसदी टिकट महिलाओं को दें और महिला आरक्षण 20 फीसदी से अधिक न हो। साल 2014 में लोकसभा भंग होने के बाद यह बिल अपने आप खत्म हो गया। लेकिन राज्यसभा स्थायी सदन है, इसलिए यह बिल अभी जिंदा है। इसीलिए अब इसे लोकसभा में नए सिरे से पेश किय गया है और इस पर चर्चा जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे लोकसभा में मौजूद 14 फीसदी व राज्यसभा में 12 फीसदी महिलाओं की स्थिति में अब सम्मानजक ढंग से इजाफा होगा। पहले संसद के विशेष सत्र को लेकर तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे थे, अब लगता है कि विशेष सत्र बुलाना एक सार्थक कदम साबित होगा। राजग सरकार ने इस बिल का नाम नारी शक्ति वंदन अधिनियम रखा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1974 में महिलाओं की स्थिति का आकलन करने वाली समिति ने महिला आरक्षण की वकालत की थी।</p>
<h3>2010 में संप्रग सरकार ने रास में पारित किया था | Women Reservation Bill</h3>
<p style="text-align:justify;">इस बीच विभिन्न सरकारों में इस विधेयक को सिरे चढ़ाने की कोशिश हुई। फिर वर्ष 2010 में संप्रग सरकार ने इस विधेयक को राज्यसभा में पारित किया था। लेकिन तब यूपीए सरकार में शामिल राजद, सपा व झामुमो आदि दलों ने इसमें जातिगत आरक्षण की मांग उठाकर विधेयक की गति थाम दी थी। वैसे सवाल उठाया जा सकता है कि वर्ष 2014 में महिला आरक्षण के मुद्दे को अपने घोषणापत्र में शामिल करने के बावजूद इसे मूर्त रूप देने में इतना वक्त क्यों लगा।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या जब देश आम चुनाव की ओर बढ़ चुका है तब महिला आरक्षण के मुद्दे को अमलीजामा पहनाने की कवायद हुई है? एक पहलू यह भी है कि विधेयक के कानून का रूप लेने के बावजूद इसका क्रियान्वयन तब संभव होगा, जब देश में जनगणना के उपरांत होने वाला परिसीमन पूर्ण होगा। यानी महिला आरक्षण का लाभ आगामी आम चुनाव में संभव नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल, जनप्रतिनिधि संस्थाओं में महिला आरक्षण की व्यवस्था होना भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में एक बड़ी घटना होगी। बेहतर होगा कि संसद के नये भवन में इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल स्वस्थ चर्चा करें और आम सहमति बनाएं। इस तरह नया संसद भवन दोहरा इतिहास रचेगा। यद्यपि राजग सरकार ने विधेयक के मसौदे पर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी नहीं दी है, कयास लगाये जा रहे हैं कि इसके मूल स्वरूप को बरकरार रखने की कोशिश होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अब देखना होगा कि जिन मुद्दों पर लंबे समय तक महिला आरक्षण का विरोध किया जाता रहा है, उन्हें किस तरह संबोधित किया जाता है। हालांकि, तब विरोध करने वाले राजनीतिक दल फिलहाल दबाव बनाने की स्थिति में नहीं हैं। जिनके विरोध के चलते ही महिला आरक्षण बिल को पांच बार पारित करने की असफल कोशिश हो चुकी है। बहरहाल, इस बिल के पारित होने से देश में लैंगिक समानता आएगी। इस समय दुनिया में लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की औसतन हिस्सेदारी 26 फीसदी है, जबकि वर्तमान में भारत में यह प्रतिशत 15.21 है। वहीं राज्य विधानसभाओं में स्थिति और ज्यादा खराब है, किसी भी राज्य में 15 फीसदी महिलाओं की भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में भागीदारी नहीं बन पायी। Women Reservation Bill</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल, नये विधेयक के कानून बनने के बाद भारतीय जनप्रतिनिधि संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी तैंतीस फीसदी हो जाएगी। वैसे तो देश के लोकतांत्रिक इतिहास में महिला जनप्रतिनिधियों की विशिष्ट भूमिका रही है। जिन्होंने न केवल सदन की गरिमा बनाने में बड़ी भूमिका निभाई, बल्कि अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों में रचनात्मक योगदान भी दिया। देश की संसद के दोनों सदनों में पिछले साढ़े सात दशकों में करीब छह सौ महिला जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। बहरहाल, देर आए दुरुस्त आए, की तर्ज पर इसे भारतीय लोकतंत्र की शुभ शुरूआत कहा जा सकता है। PM Modi</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बावजूद उम्मीद करें कि जमीन से जुड़ी व महिला सरोकारों को प्रतिबद्ध महिलाएं ही जनप्रतिनिधि सदनों में पहुंचें। ऐसा न हो कि पहले से मौजूदा राजनीति में सक्रिय राजनीतिक घरानों के नेता इस पहल को अपने परिवार की महिलाओं के नाम पर राजनीति करने के अवसर में ही बदल दें। यह प्रयास आम महिलाओं के सशक्तीकरण की राह भी खोलेगा। कह सकते हैं कि करीब तीन दशक से अटके महिला आरक्षण बिल को मूर्त रूप देने का नैतिक साहस मोदी सरकार ने दिखाया है। Women Reservation Bill</p>
<p style="text-align:right;"><strong>तारकेश्वर मिश्र, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार </strong><br />
<strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="India-Canada Relations: भारत-कनाडा के खराब होते रिश्ते चिंता का विषय" href="http://10.0.0.122:1245/worrying-relations-between-india-and-canada-are-worrying/">India-Canada Relations: भारत-कनाडा के खराब होते रिश्ते चिंता का विषय</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 21 Sep 2023 11:36:03 +0530</pubDate>
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                <title>महिलाओं ने ‘नारी अधिनियम’ को बताया क्रांतिकारी कदम</title>
                                    <description><![CDATA[27 वर्षों के बाद लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पेश बोली, लंबे सघर्ष के बाद आधी आबादी को मिलेगा उसका हक | Women Reservation Bill सरसा (सच कहूँ न्यूज)। नए संसद भवन में मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान पहला ही बिल महिला आरक्षण संबंधित (Women Reservation Bill) पेश किया गया। इसे ‘नारी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/women-called-womens-act-a-revolutionary-step/article-52613"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/sirsa-news-3.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">27 वर्षों के बाद लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पेश</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>बोली, लंबे सघर्ष के बाद आधी आबादी को मिलेगा उसका हक | Women Reservation Bill</li>
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<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> नए संसद भवन में मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान पहला ही बिल महिला आरक्षण संबंधित (Women Reservation Bill) पेश किया गया। इसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का नाम दिया गया है। इस बिल में लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है यानी अब लोकसभा व विधानसभा में हर तीसरी सदस्य महिला होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि यह विधेयक करीब 27 साल बाद पेश किया गया है। औरतों को विधान सभाओं और संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण मिले, इसके लिए लंबे समय से महिलाएं आंदोलन करती आ रही है। बरसों-बरस के संघर्ष के बाद महिला आरक्षण बिल साकार रूप लेने जा रहा है। इस पर सच कहूँ ने अलग-अलग महिलाओं से बात की है, जिन्होंने इस विधेयक को संसद में पेश करने पर खुशी प्रकट की है। केंद्रीय केबिनेट ने महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दे दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारी संस्कृति में मातृ शक्ति को जो स्थान प्राप्त था, उसे पुर्नस्थापित करने में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ बिल मिल का पत्थर साबित होगा। महिला आरक्षण बिल संसद में पेश करना सरकार की पारदर्शिता सोच का परिणाम है। इससे महिलाएं और अधिक पावरफुल होगी। साथ ही महिलाएं अपनी बात को अच्छे तरीके से सरकार के सामने रख पाएगी। इससे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे भारतीय संविधान में महिला सशक्तिकरण का एक नया अध्याय लिखा गया है।<br />
<strong>                                                                – सुमन शर्मा, अध्यक्ष स्वर्ण परि संस्था, एवं निवर्तमान पार्षद।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">अभी लोकसभा में 15 व राज्यसभा में 13 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी है। बिल के कानून बनने से लोकसभा व विधानसभाओं में इनकी संख्या बढ़ेगी। जिससे महिलाओं के अधिकार और बढेंगे। इससे महिला अधिक मजबूत होगी। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार का एतिहासिक फैसला है। इस ऐतिहासिक और प्रगतिशील निर्णय के लिए प्रधानमंत्रीजी का मेरे सहित समूची मातृशक्ति हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त करती है, उनका अभिनंदन करती हैं।<br />
<strong>                                                                                            – शिखा शर्मा, बंसल कॉलोनी सरसा।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) आज के समय की जरूरत है। इससे पंचायत से लेकर विधानसभाओं और विधान परिषदों तथा संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ेगी। बिल के कानून बनने से महिलाओं की हर क्षेत्र में भागीदारी बढ़ेगी। देश की आधी आबादी को उनका हक देने तथा भारतीय लोकतंत्र को और अधिक मजबूत व सहभागी बनाने वाला यह कालजयी निर्णय विकसित भारत के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाएगा।<br />
<strong>                                                                                      – सुमन गौतम, गोल डिग्गी चौक सरसा।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज एक और इतिहास रचा गया है। भारत का महान लोकतंत्र आज सच्चे अर्थों में गौरवभूषित हुआ है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक युगांतरकारी कदम है। इससे लोकतंत्र मजबूत होगा। यह एक ऐसा निर्णय है, जिससे हमारी नारी शक्ति को सही मायने में उनका अधिकार मिलेगा। प्रधानमंत्री जी के इस निर्णय से देश और समाज में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आएगा।<br />
<strong>                                                                                         – सुनीता शर्मा, बंसल कॉलोनी सरसा।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ बिल संसद में पेश होना महिला आंदोलन के बरसों-बरस के संघर्ष का नतीजा है। इस बिल के कानून बनने से महिलाओं के लिए हर क्षेत्र में तरक्की के नए-नए रास्ते खुलेंगे। इससे महिलाओं के विरूद्ध होने वाले अपराधों में भी कमी आएगी।<br />
<strong>                                                                                                        – सुमन शर्मा, प्रिंसीपल।</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="हरियाणा में अब तक सिर्फ 87 महिलाएं ही पहुंची पाई विधानसभा" href="http://10.0.0.122:1245/till-now-only-eighty-seven-women-have-reached-the-haryana-assembly/">हरियाणा में अब तक सिर्फ 87 महिलाएं ही पहुंची पाई विधानसभा</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Sep 2023 16:26:47 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस ने घोषणा पत्र में किया वादा:  संसद के पहले सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराएगी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। वर्षों से लटके महिला आरक्षण विधेयक को कांग्रेस ने सत्ता में आने पर लोकसभा के पहले ही सत्र में पारित कराने का वादा किया है ताकि लोकसभा और विधानसभाओं में उनके लिए 33 प्रतिशत स्थान आरक्षित किए जा सकें। इसके साथ ही पार्टी ने केंद्र सरकार की नौकरियों में महिलाओं के लिए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> वर्षों से लटके महिला आरक्षण विधेयक को कांग्रेस ने सत्ता में आने पर लोकसभा के पहले ही सत्र में पारित कराने का वादा किया है ताकि लोकसभा और विधानसभाओं में उनके लिए 33 प्रतिशत स्थान आरक्षित किए जा सकें। इसके साथ ही पार्टी ने केंद्र सरकार की नौकरियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान करने का भी वादा किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस के 2019 के आम चुनाव के लिए मंगलवार को यहां जारी घोषणा पत्र में कहा है कि केंद्र में पार्टी की सरकार बनने पर 17वीं लोकसभा के पहले सत्र में और राज्य सभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित करवाकर संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा। पार्टी ने केंद्र सरकार की नौकरियों में महिलाओं को 33 प्रतशित आरक्षण देने का भी वादा किया है। उसने कहा है कि कि केन्द्र सरकार के सेवा नियमों में संशोधन करके केन्द्रीय नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा। समान पारिश्रमिक अधिनियम को प्रभावी ढ़ंग से लागू किया जायेगा और महिलाओं तथा पुरुषों को समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित करने के सभी संबधित कानूनों की समीक्षा करेंगे।</p>
<h1 style="text-align:justify;">झूठे नहीं सच्चे वादों पर आधारित है कांग्रेस का घोषणा पत्र: राहुल</h1>
<p style="text-align:justify;"> कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पिछले लोकसभा चुनाव में लोगों से झूठे वादे करने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कहा कि पार्टी के घोषणा पत्र में एक भी झूठा वादा नहीं किया गया है और यह पूरी तरह सच्चाई तथा लोगों की आकांक्षाओं पर आधारित है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह , संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी , पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम और पूर्व रक्षा मंत्री ए के एंटनी की मौजूदगी में लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी का घोषणा पत्र ह्यजन आवाजह्ण जारी करते हुए गांधी ने कहा कि यह दस्तावेज बंद कमरे में बैठकर नहीं बल्कि देश के कोने-कोने में बैठे लाखों लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।</p>
<h2>किसानों के लिए अलग से बजट की व्यवस्था की जायेगी</h2>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि घोषणा पत्र समिति से साफ-साफ कह दिया गया था कि पार्टी ऐसा कोई वादा नहीं करेगी जिसे पूरा करना संभव नहीं है। इसीलिए केवल ऐसे वादे किये गये हैं जो वास्तविक रूप से पूरे किये जा सकें। उन्होंने कहा कि घोषणा पत्र में रोजगार, न्यूनतम आय योजना (न्याय), मनरेगा , किसान, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख मुद्दे शामिल हैं। देश के 20 प्रतिशत सबसे गरीब परिवारों को हर साल 72 हजार रुपए सीधे उनके खाते में देने की घोषणा करते हुए उन्होंने नारा दिया, ‘गरीबी पर वार, 72 हजार’। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपए डालने का झूठा वादा किया था लेकिन कांग्रेस पूरी तैयारी के साथ यह वादा कर रही है कि ‘न्याय’ के वादे को पूरा किया जायेगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने ऐलान किया कि किसानों के लिए अलग से बजट की व्यवस्था की जायेगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत खर्च करने का भी कांग्रेस ने वादा किया</h2>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा कर्ज नहीं लौटाने वाले किसानों पर आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जायेगा। गांधी ने कहा कि मोदी ने हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया था लेकिन कांग्रेस इस तरह का झूठा वादा नहीं कर रही है। कांग्रेस ने वास्तविकता का पता लगाया है और इसी आधार पर वह वादा कर रही है कि सरकारी क्षेत्र में 22 लाख खाली पदों को वर्ष 2020 तक भरा जायेगा। ग्राम पंचायतों में 10 लाख युवाओं को रोजगार दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि श्री मोदी ने कांग्रेस सरकार की मनरेगा योजना की आलोचना की थी लेकिन कांग्रेस इस योजना को आगे बढ़ाते हुए इसके तहत अब 100 के बजाय 150 दिन के रोजगार की गारंटी देगी। शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत खर्च करने का भी कांग्रेस ने वादा किया है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/women-reservation-bill/article-8330</link>
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                <pubDate>Tue, 02 Apr 2019 16:26:04 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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