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                <title>Polling for 10 seats in Haryana on May 12 - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>महासंग्राम-2019। हरियाणा में आखिर किसका पलड़ा भारी?</title>
                                    <description><![CDATA[छठे चरण में 12 मई को होना है हरियाणा की 10 सीटोंं पर मतदान, मतदाताओं का मूड भांप रहे नेता जी हिसार/हांसी सच कहूँ/संदीप कम्बोज । लोकसभा चुनाव की जंग में इस बार हरियाणा के नतीजे काफी चौंकाने वाले हो सकते हैं। सियासत के सूरमां इन दिनों हरियाणा की सभी लोकसभा सीटों पर नजरें गड़ाए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h3 style="text-align:justify;">छठे चरण में 12 मई को होना है हरियाणा की 10 सीटोंं पर मतदान, मतदाताओं का मूड भांप रहे नेता जी</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिसार/हांसी सच कहूँ/संदीप कम्बोज ।</strong> लोकसभा चुनाव की जंग में इस बार हरियाणा के नतीजे काफी चौंकाने वाले हो सकते हैं। सियासत के सूरमां इन दिनों हरियाणा की सभी लोकसभा सीटों पर नजरें गड़ाए बैठे हैं क्योंकि यह चुनाव इसी साल के अंत यानि अक्तूबर में होने जा रहे विधानसभा चुनावों की तस्वीर भी अभी से साफ कर देगा कि प्रदेश की जनता किस राजनीतिक दल की नीतियों को पसंद करती है और प्रदेश में बनने वाली आगामी सरकार किस दल की होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हम यहां कोई सर्वे नहीं कर रहे हैंं बल्कि पिछले चुनाव नतीजों के आंकड़ों व सत्तासीन भाजपा राज में हुए विकास कार्यों के बूते जमीनी सच्चाई को पकड़ने का प्रयास कर रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव 2014 की अगर बात करें तो हरियाणा की 10 सीटों में से भाजपा के खाते में 7, इनेलो को 2 तो कांग्रेस को महज एक ही सीट से संतोष करना पड़ा था। भाजपा ने जहां अम्बाला, करनाल, गुरुग्राम, फरीदाबाद, भिवानी-महेंद्रगढ़, सोनीपत व कुरुक्षेत्र सीट पर विजय पताका फहराई भी वहीं इनेलो के हिस्से सिरसा व हिसार तथा कांग्रेस के हिस्से एकमात्र जाटलैंड सीट रोहतक आई।</p>
<h3>इसी साल होने जा रहे हरियाणा विधानसभा चुनावों की तस्वीर भी साफ कर देगा यह लोस चुनाव</h3>
<p style="text-align:justify;">इस बार के लोकसभा चुनावों में किस पार्टी के खाते कौनसी सीट आएगी, इसका अभी से आंकलन करना इसलिए सही नहीं होगा क्योंकि अभी तक सभी राजनीतिक दलों ने अपने चुनावी योद्धाओं यानि उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। कांग्रेस ने अपनी यात्रा के दौरान पांच सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है लेकिन महत्वपूर्ण सीटोंं पर अभी भी कशमकश जारी है। अब देखना यह है कि पांच साल की सत्ता के बाद क्या हरियाणा में भाजपा का जनाधार बढ़ता है, क्या भाजपा सभी 10 सीटों पर विजय पताका फहराने का संकल्प पूरा कर पाएगी या फिर मौजूदा 7 सीटों में से भी सीटें खिसक जाएंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अनुमान के मुताबिक कांग्रेस की अगर बात करें तो वो रोहतक, कुरुक्षेत्र व भिवानी सीट को पक्का मानकर चल रही है। वहीं इनेलो सिरसा व अंबाला तो भाजपा करनाल, फरीदाबाद, गुरुग्राम व सोनीपत को पक्का मानकर चल रही है। हिसार सीट की अगर बात करें तो जेजेपी इसे हर हाल में जीतने का दावा कर रही है। यह पूरा आंकलन अनुमानित विश्लेषण भर है। हार-जीत के सबसे बड़े कारक चुनावी माहौल और टिकट हासिल करने वाले उम्मीदवार होते हैं, उससे पहले के सारे कयास या अंदाज भर होते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भाजपा, कांग्रेस, जेजेपी व आप के बीच दिखाई दे रहा है मुख्य मुकाबला</h3>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा चुनाव के महासंग्राम में हरियाणा की सियासत में आखिर किसका पलड़ा भारी रहेगा। इस पर हर किसी की नजर टिकी है। छठे चरण में 12 मई को हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटों पर होने जा रहे मतदान व 23 मई को संपन्न होने जा रही मतगणना के परिणामों का प्रदेशवासियों को बेसब्री से इंतजार है। कुल मिला कर मुख्य मुकाबला चुनाव मैदान में ताल ठोक रहीं भाजपा, कांग्रेस, जेजेपी, आईएनएलडी, आप व एलएसपी+बीएसपी के बीच ही होता दिखाई दे रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सभी राजनीतिक दलों के नेता अपने-अपने हिसाब से अपनी पार्टी की जीत के दावे कर रहे हैं। इस महासंग्राम में प्रदेश की 10 लोकसभा सीटों पर किस तरह से राजनीतिक समीकरण बनते और बिगड़ते हैं, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल मतदाताओं को सभी पार्टियों द्वारा उम्मीदवारों के ऐलान का इंतजार है। असल तस्वीर तो सभी सीटों पर राजनीतिक दलों द्वारा उम्मीदवार तय किए जाने के बाद ही साफ हो पाएगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आसान नहीं किसी भी राजनीतिक दल की चुनावी राह</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश की 10 लोस सीटों का चुनाव परिणाम बताएगा कि राज्य की जनता प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा की मनोहर लाल खट्टर सरकार को कितना पसंद या नपसंद करती है। इन नतीजों से यह भी साबित होगा कि प्रदेश की जनता खट्टर सरकार को पास कर पूरे अंक देती है या उसे नकारती है। साथ ही यह भी तय हो जाएगा कि जनता भाजपा के स्थान पर किस पार्टी को राज्य की सत्ता सौंपने के मूड में है। फिलहाल स्थिति यह है कि किसी भी पार्टी की चुनावी राह आसान दिखाई नहीं देती। इसलिए ही अब तक राजनीतिक दल टिकटों का ऐलान नहीं कर पा रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अभी तक नहीं किसी पार्टी की कोई लहर</h3>
<p style="text-align:justify;">अब तक के राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो हरियाणा में किसी पार्टी की लहर दिखाई नहीं दे रही है। लगता है इस बार मतदाता भी समझदार हो गए हैं। ज्यादातर वोटर अपने घरों पर किसी भी पार्टी के झंडे लगाने से परहेज कर रहे हैं। सिर्फ हार्ड कोर के कार्यकत्तार्ओं के घरों पर ही पार्टियों के थोड़े बहुत झंडे लगे दिखाई दे रहे हैं। इससे राजनीतिक पर्यवेक्षकों को मतदाताओं का मूड भांपने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। झंडों की संख्या से आसानी से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस लोस क्षेत्र में किस पार्टी के समर्थक ज्यादा हंै या फलां लोस क्षेत्र में किस पार्टी की हवा बन रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">साल 2014 में भाजपा को मिले थे 34.84 फीसद वोट</h3>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को हरियाणा से 39,93,527 वोट मिले, जो कुल वोटों का 34.84 प्रतिशत था जबकि कांग्रेस 22.99 प्रतिशत वोटों के साथ राज्य में 26,34,905 वोट हासिल करने में सफल रही थी। भाजपा की सहयोगी एचजेसी (हजकां) ने सीट साझा समझौते के अनुसार 2 सीटों पर चुनाव लड़ा और उसे 7,03,698 वोट (6.14 प्रतिशत) मिले। हालांकि, पार्टी ने चुनावों में उसके प्रमुख कुलदीप बिश्नोई अपनी ही सीट से चुनाव हार गए। वहीं बीएसपी को हरियाणा में लोकसभा चुनाव में 4.60 फीसदी वोट मिले थे।</p>
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                <pubDate>Tue, 02 Apr 2019 16:53:33 +0530</pubDate>
                
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