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                <title>Article 370: - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अनुच्छेद 370: कश्मीर में बदलती फिजा</title>
                                    <description><![CDATA[Article 370: पांवर्ष 2014 से पहले कोई सोच भी नहीं सकता था ​कि देश का मस्तिष्क कहे जाने वाले कश्मीर में शांति की स्थापना हो पाएगी। आए दिन संघर्ष विराम का उल्लंघन, आतंकी हमले और गोलियों व तोप के गोलों की गूंजती आवाज कश्मीर की तंद्रा (नींद) भंग करने के लिए काफी थी। वहीं अब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/changing-atmosphere-in-kashmir/article-54038"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/article-370.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Article 370: पांवर्ष 2014 से पहले कोई सोच भी नहीं सकता था ​कि देश का मस्तिष्क कहे जाने वाले कश्मीर में शांति की स्थापना हो पाएगी। आए दिन संघर्ष विराम का उल्लंघन, आतंकी हमले और गोलियों व तोप के गोलों की गूंजती आवाज कश्मीर की तंद्रा (नींद) भंग करने के लिए काफी थी। वहीं अब 2014 के बाद एकाएक ही कश्मीर का माहौल बदल गया। कश्मीर का लालचौक जहां पर अधिकांश समय कर्फ्यू के हालात रहते थे वहीं अब शांत हो गया है। इतना ही नहीं पिछले दिनों तो लालचौक पर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ये लाल चौक भारत के खिलाफ कश्मीर के अलगाववादी मंसूबों और देश विरोधी साजिशों का अड्डा हुआ करता था, लेकिन केंद्र सरकार के कश्मीर से आर्टिकल 370 (Article 370) हटाने के बाद यहां की फिजा ही बदल गई है। पिछले 9 वर्षों में ही वहां हालात कितने बदल गए हैं। यह सब वहां एक साथ नहीं हुआ है लेकिन केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार की कूटनीति तथा दूरगामी निर्णयों का नतीजा है कि आज भारत के लोग कश्मीर को एक बार फिर अपने ही देश का हिस्सा मानने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसे कश्मीर के लालचौक का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में लाल चौक पर एक मंदिर को दिखाया गया है। इसमें कई लोग एक साथ रोड किनारे खड़े होकर पूजा करते दिख रहे हैं। इसके साथ हनुमान आरती बज रही है। इसके साथ ही सिक्योरिटी के इंतजाम भी देखे जा सकते हैं। लोग इसके कमेंट में मोदी सरकार के कश्मीर में कड़े एक्शन और कामों की तारीफ कर रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि ऐसा नजारा किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को वो कर दिया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं था। सरकार ने चार साल पहले जम्मू-कश्मीर पर लागू संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) को निष्प्रभावी बना दिया। इसके चलते ही कश्मीर की आबोहवा बदल गई।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं अब घाटी में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग शून्य हो गई हैं। ऊपर से एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियों के कठोर कदमों से आतंकवाद की कमर टूट गई। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2021 के जनवरी से जुलाई तक कश्मीर में 76 पत्थरबाजी की घटनाएं रिकॉर्ड हुईं, जो 2020 की इसी अवधि में 222 और 2019 की इसी अवधि में हुईं 618 घटनाओं के मुकाबले काफी कम हैं। इन घटनाओं में सुरक्षा बलों के घायल होने की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2019 में जनवरी से जुलाई महीने के बीच सुरक्षा बलों के 64 जवान पत्थरबाजी और आतंकवाद की घटनाओं में घायल हुए थे। लेकिन वर्ष 2021 की इस अवधि में यह आंकड़ा घटकर 10 हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2019 के जनवरी से जुलाई महीने में 339 नागरिकों को पैलेट गन और लाठीचार्ज के कारण चोटें आई थीं, जबकि 2021 की इस अवधि में यह आंकड़ा 25 तक आ गिरा। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 2022 से कानून-व्यवस्था को लेकर ओवरआॅल डेटा संग्रह का काम शुरू किया है। इसमें पत्थरबाजी समेत कानून-व्यवस्था भंग होने की सभी घटनाएं शामिल हैं। इस डेटा के अनुसार, 2022 में जम्मू-कश्मीर में सिर्फ 20 बार कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश हुई थी। ये आंकडे बताते हैं कि कश्मीर के लोग भी जो अब तक पाकिस्तान की सरपरस्ती चाहते थे वहीं अब भारत की हिमायत कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम नरेन्द्र मोदी की दूरगामी सोच और कडेÞ निर्णयों का ही असर है कि वहां पर आतंकवादियों के ओवर-ग्राउंड वर्करों की गिरफ्तारियों में भारी वृद्धि हुई। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2019 (जनवरी-जुलाई) में 82 गिरफ्तारियों के मुकाबले 2021 (जनवरी-जुलाई) में 178 गिरफ्तारियां हुईं। 5 अगस्त, 2019 से 6 जून, 2022 तक के 10 महीनों में हुई आतंकी घटनाओं के आंकड़ों की तुलना उसके पिछले 10 वर्षों की बात करें तो इसमें 32% की गिरावट देखी गई है। इसी तरह, आतंकी घटनाओं में भारतीय सुरक्षा बलों की शहादत 52% और नागरिकों की मृत्यु 14% कम हो गई। इसी दौरान आतंकवादियों की भर्तियों में भी 14% की कमी दर्ज हुई है। कश्मीर घाटी में जहां पहले पत्थरबाजी की घटना आम होती थी। आए दिन पत्थरबाजी की घटना से बेकसूर लोगों की मौत तक हो जाती थी।</p>
<p style="text-align:justify;">धारा 370 खत्म होने के बाद इन घटनाओं में लगातार कमी देखने को मिली है। साल 2018 से 2022 के बीच आतंकी गतिविधियों में 45.2 फीसदी की कमी देखने मिली है। घाटी में कानून-व्यवस्था के मामले भी 1767 से घटकर 50 रह गए। 2022 में सुरक्षा बलों के 31 सदस्यों की जान गई, जबकि 2018 में यह 91 थी। केंद्र सरकार ने कश्मीर में जनता की बेहतरी के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। 370 हटने से पहले स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, इंडस्ट्रीज का बंद होना हर दिन की बात थी, लेकिन आज यहां स्कूल, कॉलेज हर दिन खुलते हैं। आज यहां के छात्र देश की मुख्यधारा से जुड़ते दिख रहे हंै।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा नहीं है कि पहले कश्मीर केन्द्र सरकार के एजेण्डे में नहीं रहा। आजादी के बाद वहां पर देश का अथाह धन विकास के लिए भेजा गया लेकिन भ्रष्टाचार तथा कमजोर निर्णयों के कारण यह धन वहां पर किसी काम नहीं आया। धारा 370 (Article 370) हटने के बाद कश्मीर में केन्द्र सरकार ने कई योजनाएं शुरू कर वहां के लोगो का विश्वास जीता और उसके बाद धीरे धीरे वहां पर शांति स्थापित करने का काम किया गया। केन्द्र सरकार के पहले कार्यकाल में बडा कूटनीतिक निर्णय करते हुए भाजपा ने पीडीपी के साथ गठबंधन कर वहां मजबूत पकड़ बनाई और पीडीपी से गठबंधन टूटने के बाद रणनीति के तहत धारा 370 को समाप्त किया गया। इसके बाद शुरूआती दिनों में जो विरोध देखने को मिल रहा था वहीं अब लगभग शून्य हो चुका है। इसके अलावा कश्मीर से विस्थापित किए गए लोगों को भी वहां वापस बसाने के प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले कश्मीर के युवा पाकिस्तान समर्थित आतंवादियों को अपना आईडल मानते थे वहीं युवा अब देश के संविधान में विश्वास करने लगे हैं। इसके कारण पाक प्रायोजित आतंकवाद के लिए कश्मीर क्षेत्र से की जा रही युवाओं की भर्ती पर विराम लग गया है। अब कश्मीर का युवा वर्ग हाथ में बंदूक के स्थान पर कलम पकडना चाहता है। केन्द्र सरकार की सख्ती के कारण सीमा पार से आए दिन होने वाले संघर्ष विराम के उल्लंघन का सिलसिला भी टूट गया है और पिछले एक वर्ष से शायद ही कोई ऐसी खबर हो जिसमें संघर्ष विराम का उल्लंघन किया गया हो। भारतीय सेना को पूरी छूट दिए जाने के बाद अब पाक आर्मी और आईएसआई को पता चल गया कि भारत बदल चुका है। Article 370</p>
<p style="text-align:justify;">आज से 9 वर्ष पहले जहां समाचार पत्रों में कश्मीर में शांति को लेकर आलेख छपा करते थे वहीं अब देशभर के लोगों के बीच पीओके पर कब्जे को लेकर चर्चा होने लगी है। बड़ी बात नहीं होगी कि कभी भी ऐसी खबर आ जाए कि पीओके का बड़ा हिस्सा बलूचिस्तान में मिलाकर पाकिस्तान के दो टुकडेÞ ​कर दिए गए हैं। पाकिस्तान का हिस्सा बलूचिस्तान लंबे समय से आजादी की मांग कर रहा है और अब बलूचिस्तान की आजादी के लिए वहां के नेता भारत की मदद मांग रहे हैÞ। ऐसा होना असंभव भी प्रतीत नहीं होता है क्योंकि अगर सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कुछ भी संभव है।<br />
<strong>                                   जयपुर से सांसद व भाजपा नेता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Weather: हिमाचल प्रदेश में अगले 24 घंटों में भारी बारिश के आसार: आईएमडी" href="http://10.0.0.122:1245/light-to-moderate-rain-or-snow-is-expected-at-some-places-in-himachal-pradesh/">Weather: हिमाचल प्रदेश में अगले 24 घंटों में भारी बारिश के आसार: आईएमडी</a></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/changing-atmosphere-in-kashmir/article-54038</link>
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                <pubDate>Mon, 23 Oct 2023 16:31:10 +0530</pubDate>
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                <title>New Delhi: जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य बना दिया जाएगा, 31 अगस्त को विस्तृत बयान देगी केंद्र सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[New Delhi: उच्चतम न्यायालय (Supreme court) ने मंगलवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की किस समय सीमा के बारे में सोचता है, इसके बारे में उसे आधिकारिक तौर पर अवगत कराये। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/jammu-and-kashmir-will-be-made-a-state-again-the-central-government-will-give-a-detailed-statement-on-august-31/article-51762"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">New Delhi: उच्चतम न्यायालय (Supreme court) ने मंगलवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की किस समय सीमा के बारे में सोचता है, इसके बारे में उसे आधिकारिक तौर पर अवगत कराये। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की संविधान पीठ ने अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य बनाने के लिए कोई समय सीमा है तो वे केंद्र से निर्देश प्राप्त कर शीर्ष अदालत को अवगत कारायें। Article 370</p>
<p style="text-align:justify;">सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मुद्दे पर उच्चतम स्तर पर निर्देश प्राप्त करने के बाद अपना रुख स्पष्ट करने के लिए 31 अगस्त तक का समय मांगा। उन्होंने कहा कि वह 31 अगस्त को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की केंद्र शासित प्रदेश की स्थिति के भविष्य पर एक विस्तृत बयान देंगे। संविधान पीठ अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। संविधान पीठ ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बचाव में सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद उनसे केंद्र सरकार का जम्मू कश्मीर को फिर राज्य का दर्जा बहाल करने के संबंध में आधिकारिक बयान देने को कहा। शीर्ष अदालत ने केंद्र से सवाल किया, ‘क्या संसद के पास मौजूदा भारतीय राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने की शक्ति है। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर मेहता ने जवाब दिया कि जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला स्थायी नहीं है। उन्होंने कहा, ह्लजब चीजें सामान्य हो जाएंगी तो जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य बना दिया जाएगा। सॉलिसिटर जनरल ने संविधान पीठ को बताया कि सदन (सांसद) में भी एक बयान दिया गया है और प्रयास किए जा रहे हैं। ‘एक बार प्रयास सफल हो जाएं और स्थिति सामान्य हो जाए तो हम इस ( राज्य बनाने) पर विचार करेंगे।’ New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">मेहता ने कहा, ‘हम हमेशा राष्ट्रीय एकता के पक्ष में हैं। मैं चुनाव और राजनीति की बात नहीं करूंगा। मैं राष्ट्रीय एकता के मुद्दे पर बात करूंगा। इसमें लोगों की भलाई का ध्यान रखा जा रहा है। इस पर पीठ ने कानून अधिकारी से कहा कि लोकतंत्र की बहाली भी महत्वपूर्ण है। पीठ ने कहा, ‘लोकतंत्र की बहाली भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। हमारे पास ऐसी स्थिति नहीं हो सकती, जहां …कुप्रबंधन (अव्यवस्था) हो। मेहता ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र के 5 अगस्त 2019 के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि 2020 में दशकों में पहली बार स्थानीय निकाय चुनाव हुए और कोई हड़ताल, कोई पथराव, कोई कर्फ्यू नहीं लगाना पड़ा। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने विकास कार्यों का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत को बताया, ‘नए होटल बनाए जा रहे हैं। फैसले (अनुच्छेद 370 को निरस्त करने) से सभी को फायदा हुआ है। सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठित करना उसी पैटर्न का पालन करता है, जैसा 1966 में सरकार ने पंजाब को विभाजित करके हरियाणा और चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश बनाने के लिए अपनाया था, जब यह राष्ट्रपति शासन के अधीन था।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/paper-thin-momo-recipe/">Paper Thin Momo Recipe: पेपर थिन मोमोज जो है अत्यधिक स्वाद और सेहत के लिए भी है शानदार, जानें इसे कैसे बनाएं</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 30 Aug 2023 12:28:23 +0530</pubDate>
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                <title>Article 370: अनुच्छेद 370 पर आई बड़ी अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Hearing On Article 370: उच्चतम न्यायालय पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार और शुक्रवार को छोड़कर दो अगस्त से सभी कार्य दिवसों पर रोजाना सुनवाई करेगा। मुख्य […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/big-update-on-article-370/article-49842"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/article-370.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Hearing On Article 370: उच्चतम न्यायालय पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार और शुक्रवार को छोड़कर दो अगस्त से सभी कार्य दिवसों पर रोजाना सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की एक संविधान पीठ मंगलवार को यह आदेश पारित किया। संविधान पीठ दो अगस्त से पूर्वाहन 10:30 से सुनवाई शुरू करेगी। पीठ ने इससे पहले सभी पक्षों को 27 जुलाई तक संबंधित दस्तावेज दाखिल करने का भी निर्देश दिया। Article 370</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार के करीब चार साल पूर्व 05 अगस्त 2019 को संविधान की अनुच्छेद 370 निरस्त कर दिया था। इसके बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों लद्दाख और जम्मू और कश्मीर में विभाजित कर दिया गया था। शीर्ष अदालत के समक्ष केंद्र सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा। अदालत ने उनकी इस दलील पर पर भी गौर किया कि गृह मंत्रालय ने अधिसूचना के बाद के जम्मू कश्मीर में बदले हालात पर अपना पक्ष 10 जुलाई को एक अतिरिक्त हलफनामा जरिए अदालत के समक्ष रखा है। श्री मेहता ने साथ ही यह भी कहा कि हलफनामे का संवैधानिक प्रश्न पर कोई असर नहीं होगा। Article 370</p>
<p style="text-align:justify;">सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद राज्य में जो स्थिति है, उस पर किसी भी पक्ष के पीछे हटने का कोई कारण नहीं हो सकता है। संविधान पीठ के समक्ष एक पक्षकार की राय रखते हुए वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि हलफनामे के बारे में मीडिया ने व्यापक रूप से रिपोर्ट किया गया है। इस पर पीठ ने कहा कि केंद्र के हलफनामे का संवैधानिक सवालों से कोई लेना-देना नहीं है। शीर्ष अदालत के समक्ष एक अन्य पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि राजनीतिक दलों के कुछ नेताओं को गिरफ्तार किया गया है। इसलिए उन्हें दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने की जरुरत होगी है। इस पर संविधान पीठ ने कहा कि जहां तक ​​पक्षकार बनाने का सवाल है, कृपया यह मान लें कि हम किसी को भी चुप नहीं कराएंगे लेकिन समय को संतुलित करना होगाह्व। Article 370</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने संविधान पीठ को अवगत कराया कि आईएएस अधिकारी शाह फैसल और सामाजिक कार्यकर्ता शेहला राशिद ने अपनी याचिकाएं वापस ले ली हैं। शीर्ष अदालत में यह मामला (अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के फैसले को चुनौती देने वाली) आखिरी बार मार्च 2020 में सूचीबद्ध किया गया था। तब कुछ याचिकाकतार्ओं ने इस मामले को सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए भेजने का अनुरोध किया, लेकिन पीठ ने उनके अनुरोध को ठुकरा दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कुछ याचिकाकतार्ओं की ओर से इस मामले पर शीघ्र सुनवाई की गुहार फरवरी 2023 में भी लगाई गई थी। विशेष उल्लेख के दौरान लगाई गई इस गुहार पर पीठ ने कहा था कि वह इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर उचित समय पर फैसला लेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत में 10 जुलाई 2023 को केंद्र द्वारा दायर नए हलफनामे में दावा किया कि तीन दशकों की अशांति के बाद पांच अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत पूर्ववर्ती राज्य का विशेष दर्जा वापस लेने के बाद जम्मू-कश्मीर में जनजीवन सामान्य होने के साथ ही उन्नति और प्रगति के नए युग की शुरूआत हुई है। केंद्र ने अपने लिखित जवाब में कहा है कि मई 2023 के महीने में श्रीनगर में जी -20 पर्यटन कार्य समूह की बैठक की मेजबानी घाटी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी। पर्यटन और देश ने दुनिया के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को गर्व से प्रदर्शित किया कि अलगाववादी या आतंकवादी क्षेत्र को एक ऐसे क्षेत्र में परिवर्तित किया जा सकता है। क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों को भी आमंत्रित किया जा सकता है और वैश्विक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने कहा है कि तीन दशकों की अशांति के बाद जम्मू-कश्मीर में जीवन सामान्य हो गया है। पिछले तीन वर्षों के दौरान स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बिना किसी हड़ताल के सुचारू पूर्वक चल रहे हैं। हड़ताल और बंद की पहले की प्रथा अब अतीत की बात हो गई है। खेल गतिविधियों में भागीदारी अभूतपूर्व है। यह संख्या वर्ष 2022-23 में 60 लाख तक पहुंच गयी है। ये तथ्य स्पष्ट रूप से 2019 में किए गए संवैधानिक परिवर्तनों के सकारात्मक प्रभाव को साबित करते हैं।</p>
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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2023 14:19:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनुच्छेद 370 संशोधन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई दशहरा अवकाश के बाद</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह दशहरा की छुट्टियों के बाद जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने का प्रावधान खत्म करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) के संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति यू यू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ वकील पी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/hearing-in-supreme-court-on-article-370-amendment-controversy-after-dussehra-holiday/article-38148"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/supreme-court-of-india-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह दशहरा की छुट्टियों के बाद जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने का प्रावधान खत्म करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) के संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति यू यू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ वकील पी सी सेन के ‘विशेष उल्लेख’ पर केंद्र सरकार द्वारा पांच अगस्त 2019 के फैसले की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार करने के लिए सहमत हुई। पीठ ने श्री सेन की शीघ्र सुनवाई करने की गुहार को स्वीकार करते हुए कहा कि मामले को दशहरा की छुट्टियों के बाद सूचीबद्ध किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत में तीन से नौ अक्टूबर तक दशहरा अवकाश रहेगा और 10 अक्टूबर को फिर से खुलेगा। वरिष्ठ वकील सेन ने पूर्व नौकरशाहों के एक समूह – राधा कुमार, जी के पिल्लई और अन्य की ओर से मामले पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया था। इन याचिकाकतार्ओं ने संयुक्त रूप से केंद्र सरकार के 5 अगस्त 2019 के फैसले की वैधता को चुनौती दी थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने मार्च 2020 में कहा था कि अनुच्छेद 370 (Article 370) से संबंधित फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेजने की कोई आवश्यकता नहीं है , तब से यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुआ। मार्च 2020 में सुनवाई करने वाली पीठ के न्यायमूर्ति एन वी रमना समेत दो सदस्यों के सेवानिवृत्त होने के कारण अब मामले पर विचार करने के लिए फिर पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का गठन किया जाना है। केंद्र ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को संशोधित करके जम्मू कश्मीर राज्य के विशेष दर्जे को रद्द कर दिया था। इसके बाद राज्य को लद्दाख और जम्मू कश्मीर दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/69-players-selected-from-haryana-in-national-games-athletics/"><strong>यह भी पढ़ें – नेशनल गेम्स एथलेटिक्स में हरियाणा के 69 खिलाड़ी शामिल</strong></a></p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Sep 2022 09:00:25 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 370 पर ग्रीष्मावकाश के बाद सुनवाई पर सहमत</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गर्मी की छुट्टियों के बाद सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त करते हुए सोमवार को कहा कि वह याचिकाओं को जुलाई में सूचीबद्ध करने की कोशिश करेगा। मुख्य न्यायाधीश […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-agrees-to-hear-article-370-after-summer-vacation/article-32695"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/supreme-court-of-india1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गर्मी की छुट्टियों के बाद सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त करते हुए सोमवार को कहा कि वह याचिकाओं को जुलाई में सूचीबद्ध करने की कोशिश करेगा। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ वकील शेखर नफड़े और पी. चिदंबरम की गुहार पर कहा कि याचिकाओं पर पांच न्यायाधीशों की पीठ सुनवाई करेगी। वरिष्ठ अधिवक्ता सर्वश्री नफड़े और चिदंबरम ने विशेष उल्लेख के दौरान याचिकाओं पर अगले सप्ताह सुनवाई की गुहार लगाई थी। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जुलाई में याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की कोशिश की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति रमन ने अगले सप्ताह सुनवाई की गुहार पर कहा कि याचिकाओं को पांच न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना है। चूंकि इन पर सुनवाई करने वाली मूल पीठ के कुछ न्यायाधीश सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लिहाजा उसे पुनर्गठित करना होगा। गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर काे प्रदत्त विशेष दर्जा खत्म करने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेश में विभाजित करने के केंद्र सरकार के अगस्त 2019 के फैसले के खिलाफ करीब दो दर्जन याचिकाएं दायर की गई थीं।</p>
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                <pubDate>Mon, 25 Apr 2022 12:02:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जानें, धारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर की कितनी बदली तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[आज के ही दिन हटी थी धारा 370 नई दिल्ली (सच कहूँ डेस्क)। आज यानि 5 अगस्त 2019 की वो तारीख, जिसने भारत के इतिहास की एक बेमिसाल गाथा लिख दी। आज के दिन ही आर्टिकल 370 को हटाई गई थी। आज के दिन ही लोकसभा में संविधान के आर्टिकल 370 को हटाने का प्रस्ताव […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/changed-picture-of-jammu-and-kashmir-after-abrogation-of-article-370/article-25759"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/article-370.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">आज के ही दिन हटी थी धारा 370</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ डेस्क)।</strong> आज यानि 5 अगस्त 2019 की वो तारीख, जिसने भारत के इतिहास की एक बेमिसाल गाथा लिख दी। आज के दिन ही आर्टिकल 370 को हटाई गई थी। आज के दिन ही लोकसभा में संविधान के आर्टिकल 370 को हटाने का प्रस्ताव पेश किया गया था। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह जब इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को पढ़ रहे थे तो देश टीवी पर इतिहास को बनते देख रहा था। 370 धारा तोड़ने से देश को एक देश, दो विधान, दो प्रधान और दो निशान का एहसास कराया। अनुच्छेद 370 से जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार मिले थे।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि धारा 370 हटने से पहले जम्मू-कश्मीर में अलग झंडा और अलग संविधान चलता था। रक्षा, विदेश और संचार के विषय छोड़कर सभी कानून बनाने के लिए राज्य की अनुमति लेनी पड़ती थी। जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती थी। दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते थे। 72 वर्षों से जम्मू-कश्मीर और देश के बीच अनुच्छेद 370 की जो फांस थी, जिसे आज ही के दिन 2 साल पहले इतिहास बना दिया गया और एक नए कश्मीर की कहानी लिख दी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पत्थरबाजी की घटनाओं में आई कमी</h4>
<p style="text-align:justify;">धारा 370 हटने के बाद पत्थरबाजी, आतंकी घटनाओं में कमी आई है तो अलगाववादी की जमीन भी खिसकी है। वर्ष 2018 में कश्मीर में पत्थरबाजी की 1458 घटनाएं हुर्इं, 2019 में ये बढ़कर 1999 पर पहुंच गई, फिर धारा 370 हटा और अगले साल यानी 2020 में पत्थरबाजी की सिर्फ 255 घटनाएं हुई। 2021 में जनवरी से जुलाई तक सिर्फ 76 घटनाएं हुई हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">आतंकी घटनाओं में आई कमी</h4>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा आतंकवाद जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी समस्या है। धारा 370 हटने के बाद आतंकवाद की घटनाओं में कमी आई है। अगस्त 2017 से जुलाई 2019 तक जम्मू-कश्मीर में 129 आम नागरिक की मौत हो गई है, 211 सुरक्षा बलों के जवान शहीद हुए और 509 आतंकवादी भी मारे गए। धारा 370 हटने के बाद अगस्त 2019 से अगस्त 2021 तक 66 आम नागरिकों की मौत हुई, यानी 49 प्रतिशत की कमी आई है। सुरक्षाबलों के 131 जवान शहीद हुए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पंचायत चुनाव में बढ़-चढ़कर भाग लिया</h4>
<p style="text-align:justify;">धारा 370 हटने से दूसरे राज्यों के लोग अब जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद सकते हैं। जब धारा 370 हटी तो ये कहा जा रहा था कि वहां के हालात बहुत खराब हो जाएंगे लेकिन इसके विपरित कश्मीरी लोगों ने पंचायत चुनाव में बढ़-चढ़कर भाग लिया और आज कश्मीरियों ने देश को अपने और करीब पाया है।</p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/changed-picture-of-jammu-and-kashmir-after-abrogation-of-article-370/article-25759</link>
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                <pubDate>Thu, 05 Aug 2021 10:22:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनुच्छेद 370: कश्मीर में छह महीने बाद सभी स्कूल खुले</title>
                                    <description><![CDATA[बारहवीं कक्षा के एक छात्र याहया भट ने कहा,‘छह महीने बाद मैं अपने दोस्तों से मिलने के वास्तव में बहुत उत्सुक हूं। आशा करता हूँ इस वर्ष शांति बनी रहेगी और हम अपने कक्षाओं में उपस्थित रह सकेंगे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/all-schools-open-after-six-months-in-kashmir/article-13233"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/educational-institution-ope.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">कश्मीर में पांच अगस्त से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद प्रतिबंध और बंद के कारण सामान्य जीवन बुरी तरह से प्रभावित रहा</h2>
<h4 style="text-align:center;">(Educational Institution open)</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीनगर (एजेंसी)।</strong> जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर और कश्मीर घाटी के अन्य हिस्सों में छह महीने के बाद सोमवार को सरकारी और प्राइवेट स्कूल सहित सभी शैक्षणिक संस्थान खुले। प्रदेश में पांच अगस्त से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद प्रतिबंध और बंद के कारण सामान्य जीवन बुरी तरह से प्रभावित रहा और सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। इसके बाद सरकार ने स्कूलों में तीन महीने के लंबे शीतकालीन अवकाश की घोषणा की थी। (Educational Institution open) कश्मीर और घाटी के अन्य हिस्सों के स्कूलों में छात्रों का शोर सुनाई गई जो स्कूलों में छात्र रंगीन वर्दी और उनके अभिभावक उनके साथ देखे गए।</p>
<h3>छह महीने बाद मैं अपने दोस्तों से मिलने के वास्तव में बहुत उत्सुक हूं: छात्र याहया</h3>
<p style="text-align:justify;">सोमवार सुबह स्कूल बसों की इंतजार में बस स्टैंड पर बच्चे और उनके अभिभावक बसों का इंतजार करते हुए दिखाई दिए। छह महीने तक घर पर रहने के बाद छात्र स्कूल आने के लिए उत्सुक हो रहे हैं। बारहवीं कक्षा के एक छात्र याहया भट ने कहा,‘छह महीने बाद मैं अपने दोस्तों से मिलने के वास्तव में बहुत उत्सुक हूं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">आशा करता हूँ इस वर्ष शांति बनी रहेगी और हम अपने कक्षाओं में उपस्थित रह सकेंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">अपने सहपाठियों से मिलने के लिए बहुत उत्सुक हैं जिनमें से कुछ घाटी के अन्य जिलों में रहते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">मैं केवल यह आशा कर सकता हूं कि हम पिछले साल की छूटी अपनी शिक्षा की भरपाई शीघ्र कर पाएंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">श्रीनगर के नगर निगम के स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से अपराह्न तीन बजे तक होगी।</li>
<li style="text-align:justify;">कश्मीर के शेष हिस्सों में समय साढ़े 10 बजे से अपराह्न साढ़े तीन बजे तक रहेगा।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">शीतकालीन छुट्टियों के बाद प्रशासन ने कॉलेजोंं की परीक्षाओं की भी घोषणा की थी</h3>
<p style="text-align:justify;">कश्मीर के शिक्षा निदेशक मोहम्मद यूनीस मलिक ने कहा कि पिछले वर्ष छात्रों ने अपने साहस को परिचय दिया और अब हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम उनका साथ दें और उनके पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करना होगा। उन्होंने फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध उपलब्धि के लिए शैक्षणिक योजनाओं का पालन करने के नजर रखते हुए नियमित स्कूलों का दौरा करें। केन्द सरकार के पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में विभाजित करने और अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के बाद प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों को सरकार ने बंद रखने का आदेश दिया।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">दो सप्ताह के शैक्षणिक संस्थानों को हालांकि चरणबद्ध तरीके से शीतकालीन राजधानी जम्मू और लद्दाख में फिर से खोल दिया गया ।</li>
<li style="text-align:justify;">घाटी में स्कूलों को बंद कर दिया गया था।</li>
<li style="text-align:justify;">नीजे स्कूलों ने विभिन्न स्थानों पर किराए पर कमरे लेकर छात्रों के लिए परीक्षा का संचालन किया।</li>
<li style="text-align:justify;">अन्य छात्रों को उनकी गृह कार्य के आधार पद प्रोन्नत किया गया।</li>
<li style="text-align:justify;">शेष स्कूलों में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में दसवीं और बारहवीं के छात्रों की परीक्षा आयोजित की गयी।</li>
<li style="text-align:justify;">शीतकालीन छुट्टियों के बाद प्रशासन ने कॉलेजोंं की परीक्षाओं की भी घोषणा की थी।</li>
</ul>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/all-schools-open-after-six-months-in-kashmir/article-13233</link>
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                <pubDate>Mon, 24 Feb 2020 16:51:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Article 370 : याचिकाओं को वृहद पीठ को भेजने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[महाराजा हरि सिंह ने भारत की मदद इसलिए मांगी थी क्योंकि वहां विद्रोही घुस चुके थे। वहां पर आपराधिक घटनाएं हुईं और आंकड़े बताते हैं कि अलगाववादियों को पाकिस्तान से ट्रेनिंग दी गई ताकि यहां बबार्दी की जा सके।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/article-370-the-decision-in-the-supreme-court-about-dispatch-of-orders-to-the-larger-bench-is-safe/article-12699"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/article-370.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">संविधान पीठ के समक्ष एक-एक कर ऐतिहासिक घटनाक्रम का दिया ब्योरा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित अनुच्छेद 370 (Article 370) को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं को वृहद पीठ के सुपुर्द करने या ना करने के मामले में गुरुवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति एन वी रमन की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने याचिकाकर्ताओं और केंद्र सरकार की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से दिनेश द्विवेदी, राजीव धवन एवम् संजय पारिख ने दलीलें दी, जबकि एटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">महाराजा हरि सिंह ने भारत की मदद इसलिए मांगी थी क्योंकि वहां विद्रोही घुस चुके थे</h3>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले सुनवाई की शुरूआत करते हुए वेणुगोपाल ने दलील दी कि अलगाववादी वहां जनमत संग्रह का मुद्दा उठाते आए हैं क्योंकि वह जम्मू कश्मीर को अलग संप्रभु राज्य बनाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि महाराजा हरि सिंह ने भारत की मदद इसलिए मांगी थी क्योंकि वहां विद्रोही घुस चुके थे।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">वहां पर आपराधिक घटनाएं हुईं और आंकड़े बताते हैं ।</li>
<li style="text-align:justify;">अलगाववादियों को पाकिस्तान से ट्रेनिंग दी गई ताकि यहां बबार्दी की जा सके।</li>
<li style="text-align:justify;">एटॉर्नी जनरल ने कहा कि जनमत संग्रह कोई स्थायी समाधान नहीं था।</li>
<li style="text-align:justify;">संविधान पीठ के समक्ष एक-एक कर ऐतिहासिक घटनाक्रम का ब्योरा दिया।</li>
<li style="text-align:justify;">साथ ही कश्मीर का भारत में विलय और जम्मू कश्मीर संविधान सभा के गठन के बारे में विस्तार से बताया।</li>
</ul>
<p> </p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/article-370-the-decision-in-the-supreme-court-about-dispatch-of-orders-to-the-larger-bench-is-safe/article-12699</link>
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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2020 16:36:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब कश्मीर में बहेगी विकास की बयार</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्त करने के बाद एक माह बीत चुका है। हालात सामान्य हो रहे हैं और अराजक भी हैं। संचार व्यवस्था बहाल हुई है, लेकिन इंटरनेट पर अब भी पाबंदियां हैं। घाटी में मोबाइल फोन अभी भी चंप हैं। विपक्ष के कई नेता और अलगाववादी चेहरे आज भी हिरासत में हैं। पाकपरस्त […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/now-the-wind-of-development-will-flow-in-kashmir/article-10379"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-09/jammu-kashmir-article-370-now-development-in-kashmir.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्त करने के बाद एक माह बीत चुका है। हालात सामान्य हो रहे हैं और अराजक भी हैं। संचार व्यवस्था बहाल हुई है, लेकिन इंटरनेट पर अब भी पाबंदियां हैं। घाटी में मोबाइल फोन अभी भी चंप हैं। विपक्ष के कई नेता और अलगाववादी चेहरे आज भी हिरासत में हैं। पाकपरस्त ताकतें अब भी पोस्टर चिपका कर धमकाने में जुटी हैं। कर्फ्यू जैसे हालात के बावजूद पत्थरबाजी की घटनाएं हुई हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन के अपने दावे हैं। दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह ने कश्मीरी पंचों-सरपंचों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की। गृह मंत्री ने वादा किया है कि सरकार हर गांव के पांच लोगों को सरकारी नौकरी देगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कश्मीर में विकास की बयार के लिए मोदी सरकार एक पर एक ऐसे कई कदम उठा रही है, जिससे कश्मीर में विकास की बयार बह सकें। इसके लिए केंद्र सरकार ने कश्मीर पर मंत्री समूह का गठन किया है। कश्मीर के लिए गठित इस मंत्री समूह में रविशंकर प्रसाद, थावर चंद गहलोत, नरेंद्र तोमर, डॉ. जितेंद्र सिंह और धर्मेंद्र प्रधान हैं। इस ग्रुप का मुख्य उद्देश्य कश्मीर के विकास के लिए प्लान तैयार करना है, जो युवाओं पर केंद्रित होगा। यह प्लान केंद्रीय मंत्रालयों को सौंपा जाएगा। विकास योजनाओं में पंचायतों को भागीदार बनाया जाएगा। मोदी सरकार प्रधानमंत्री किसान योजना, किसान पेंशन योजना, जनधन योजना आदि 85 केंद्रीय योजनाओं की शुरूआत कश्मीर में करवा चुकी है। राज्यपाल ने 50 हजार नई भर्तियों की घोषणा की है। कश्मीर के ही 29,000 युवाओं ने भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए नामांकन किए थे। भर्ती की प्रक्रिया नौ सितंबर तक जारी रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पहली बार कश्मीरी नौजवानों की भीड़ की जुबां से भारत माता की जय और जयहिंद सरीखे नारे सुनाई दिए हैं। खासकर कश्मीर घाटी में प्रशासन का दावा है कि 93 फीसदी इलाकों में दिन की पाबंदियां हटा दी गई हैं। 92 पुलिस स्टेशनों पर से भी पाबंदी हटा ली गई है। टेलीफोन के 76 एक्सचेंज के तहत करीब 26,000 फोन लैंडलाइन चालू कर दी गई हैं। एक महीने के दौरान करीब 2.5 लाख बीमार लोगों ने अस्पताल की ओपीडी में इलाज कराया है। अब दवाइयां भी उपलब्ध हैं। सार्वजनिक परिवहन सड़कों पर आने लगा है और दूसरे राज्यों के लिए बसें भी उपलब्ध हैं। करीब 1.5 लाख मीट्रिक टन फल कश्मीर के बाहर भेजे गए हैं। साफ है कि ट्रक चलने लगे हैं। करीब 1500 प्राथमिक और 1000 मिडिल स्कूल खुल गए हैं। बच्चे भी आने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे गौरतलब यह है कि 25 अगस्त से श्रीनगर सचिवालय पर सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा ही लहरा रहा है। अब राज्य के सभी सरकारी दफ्तरों पर तिरंगा ही लहराया जाएगा। बेशक कश्मीर के सामान्य होने में कुछ और वक्त लगेगा, लेकिन परिवर्तन के तौर पर नया कश्मीर महसूस होने लगा है। अब नई फिजाओं में पंचों-सरपंचों को पुलिस सुरक्षा मिलेगी और उनका बीमा कराया जाएगा। जिन हालात और विरोध के तहत वे चुने गए हैं और अपने गांव जैसे क्षेत्र के लिए काम करना चाहते हैं, अब उन्हें संवैधानिक अधिकार भी दिए जाएंगे। नए कश्मीर की सूरत यह है कि एक कंपनी ने कश्मीर में 1000 करोड़ रुपए निवेश करने की घोषणा की है। अभी तो अक्तूबर-नवंबर में वहां निवेशक सम्मेलन होना है।</p>
<p style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर के भी दिन अब बहुरेंगे, वहा विकास की बयार बहेगी। कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद केंद्र सरकार अब बहुत जल्द दिल्ली की तरह कश्मीर में भी मेट्रो ट्रेनें चलाने की तैयारी कर रही है। इस पर बहुत तेजी से काम चल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेट्रो का डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार हो चुका है और वर्ष 2020 से श्रीनगर मेट्रो का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। श्रीनगर मेट्रो कश्मीर की लाइफलाइन के तौर पर काम करेगी। इस माह के दौरान पाकिस्तान भी कश्मीर पर खूब चिल्लाया, लेकिन अब उसे पूरी तरह एहसास हो गया है कि मुस्लिम देश भी उसके साथ नहीं हैं। सभी बड़े देश भारत और शिमला करार के पक्षधर हैं, लिहाजा वहां के वजीर-ए-आजम इमरान खान समेत मंत्रियों की जुबां भी बदलने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब वे मानने लगे हैं कि पाकिस्तान की फौज पांच-छह दिन से ज्यादा युद्ध नहीं लड़ पाएगी। विदेश मंत्री आपसी बातचीत की पेशकश करने लगे हैं, लेकिन अब भी कुछ शर्तों के साथ। खुद इमरान ने पलटी मारी है कि पाकिस्तान पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। बहरहाल अब भी कश्मीर और उसके बाहर ऐसे तत्त्व हैं, जो 370 को समाप्त करने पर छाती पीट रहे हैं। ऐसा एक लोकतांत्रिक देश में संभव होता है, लेकिन यह मानने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि अब कश्मीर बदल रहा है, लिहाजा उस बदले चेहरे का स्वागत किया जाना चाहिए। यही बदलता भारत है।<br />
<strong><em>तारकेश्वर मिश्र</em></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/now-the-wind-of-development-will-flow-in-kashmir/article-10379</link>
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                <pubDate>Fri, 06 Sep 2019 20:22:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कश्मीर में सेना और वायुसेना हाईअलर्ट पर</title>
                                    <description><![CDATA[ घाटी में पैरामिलिट्री के 8 हजार अतिरिक्त जवान तैनात केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाया, अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश पिछले महीने केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में 10 हजार अतिरिक्त सुरक्षाबलों की 100 कंपनियां तैनात की थीं श्रीनगर| केंद्र सरकार ने सोमवार को अनुच्छेद 370 हटा दिया। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/army-and-air-force-on-high-alert-in-kashmir/article-10186"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-08/army-and-air-force-highlights-in-kashmir.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:left;"> घाटी में पैरामिलिट्री के 8 हजार अतिरिक्त जवान तैनात</h2>
<ul>
<li>केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाया, अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश</li>
<li>पिछले महीने केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में 10 हजार अतिरिक्त सुरक्षाबलों की 100 कंपनियां तैनात की थीं</li>
</ul>
<p><strong>श्रीनगर|</strong> केंद्र सरकार ने सोमवार को अनुच्छेद 370 हटा दिया। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे। राज्य में सेना और वायुसेना हाईअलर्ट पर हैं। केंद्र सरकार ने सुरक्षा को लेकर कश्मीर घाटी में पैरामिलिट्री के 8 हजार अतिरिक्त जवान तैनात करने का आदेश दिया। यह पैरामिलिट्री उत्तर प्रदेश, असम, ओडिशा समेत अन्य राज्यों से एयरलिफ्ट कर तत्काल प्रभाव से घाटी में भेजे जा रहे हैं। इससे पहले भी पिछले महीने 10 हजार अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए थे। सुरक्षा के नजरिए से संवेदनशील बने जम्मू-कश्मीर में रविवार रात 12 बजे से धारा-144 लागू कर दी गई। प्रशासन ने राज्य में रैलियों पर भी रोक लगा दी है। मोबाइल-इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई है। सोमवार को राज्य में सभी स्कूल-कॉलेज भी बंद रहे।</p>
<ul>
<li>
<h3>राज्यसभा में अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संकल्प पेश किया</h3>
</li>
</ul>
<p>सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संकल्प पेश किया था। शाह के प्रस्ताव रखने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संविधान आदेश (जम्मू-कश्मीर के लिए) 2019 के तहत अधिसूचना जारी कर दी। शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर दिल्ली और पुड्डुचेरी की तरह केंद्र शासित प्रदेश रहेगा यानी यहां विधानसभा रहेगी। वहीं, लद्दाख की स्थिति चंडीगढ़ की तरह होगी, जहां विधानसभा नहीं होगी।</p>
<ul>
<li>
<h3>जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन</h3>
</li>
</ul>
<p>जम्मू-कश्मीर में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लागू है, जो 3 जनवरी 2019 को खत्म होगा। इससे पहले केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के कश्मीर दौरे के बाद राज्य में 10 हजार अतिरिक्त सुरक्षाबलों की 100 कंपनियां तैनात की थीं। सूत्रों की मानें तो श्रीनगर में 15, पुलवामा और सोपोर में 10-10, बाकी 10 जिलों में 5-5 कंपनियां तैनात की गईं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/army-and-air-force-on-high-alert-in-kashmir/article-10186</link>
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                <pubDate>Mon, 05 Aug 2019 09:31:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा का बहुमत आने पर खत्म की जाएगी धारा 370: डॉ. अनिल</title>
                                    <description><![CDATA[-भाजपा प्रदेश प्रभारी बोले, कांग्रेस स्पष्ट करे कि वह देश के साथ या फारूख अब्दुला के साथ रोहतक सच कहूँ/नवीन मलिक । भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. अनिल जैन ने कहा कि राष्टÑवाद पर पार्टी कोई समझौता नहीं करेगी और भाजपा का केन्द्र में बहुमत आने पर जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाई जाएगी। उन्होंने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">-भाजपा प्रदेश प्रभारी बोले, कांग्रेस स्पष्ट करे कि वह देश के साथ या फारूख अब्दुला के साथ</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक सच कहूँ/नवीन मलिक ।</strong> भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. अनिल जैन ने कहा कि राष्टÑवाद पर पार्टी कोई समझौता नहीं करेगी और भाजपा का केन्द्र में बहुमत आने पर जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाई जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पहले भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में राम मंदिर निर्माण को लेकर वायदा किया था, लेकिन मामला अदालत में विचाराधीन है और वह अभी भी राम मंदिर निर्माण के लिए कटिबद्ध है। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जो चुनावी घोषणा पत्र जारी किया है कि वह देख की अखंडता व एकता को समाप्त करने व सेना का मनोबल गिराने वाला है, लेकिन भाजपा देश की एकता व अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि 70 साल तक कांग्रेस ने गरीब हटाने के लिए कोई काम नहीं किया और अब 72 हजार रूपये सालाना देने का जो घोषणा पत्र में वायदा किया है, वह केवल लोगों को गुमराह करने वाला है, लेकिन देश की जनता कांग्रेस के बहकावे में आने वाली नहीं है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारी बहुमत से दोबारा भाजपा की सरकार बनेगी। वीरवार को भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉ. अनिल जैन हुडा काम्पलेक्स स्थित पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भाजपा के पास प्रत्याशियों कमी नहीं, जल्द होगी नामों की घोषणा</h3>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा चुनाव प्रत्याशियों को लेकर डॉ. अनिल ने कहा कि जल्द ही पार्टी के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाएगी। लोकसभा चुनाव में केन्द्रीय मुद्दो के साथ साथ प्रदेश का विकास भी प्रमुख मुद्दा होगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने लो प्रोफाइल में काम करने वाली सरकार दी, जिससे प्रत्येक वर्ग पूरी तरह से संतुष्ट है। उन्होंने कहा कि पहले पर्चि के आधार पर नौकरी बंटती थी, लेकिन भाजपा ने योग्यता के आधार पर युवाओं को नौकरियां दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास प्रत्याशियों की कमी नहीं है और होमवर्क पूरा करके केन्द्रीय चुनाव समिति के पास नाम भेजे गए हैं और जल्द इनकी घोषणा होगी।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Apr 2019 17:51:44 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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