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                <title>Tax - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Tax RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Supreme Court : रॉयल्टी टैक्स को लेकर आया सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला!</title>
                                    <description><![CDATA[Royalty is not a Tax : नई दिल्ली (एजेंसी)। सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 25 जुलाई को 1989 के 7 न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले को गलत करार देते हुए बहुमत से फैसला सुनाया कि राज्यों को खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने का अधिकार है। शीर्ष न्यायालय ने यह भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/supreme-courts-big-decision-on-royalty-tax/article-60294"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/supreme-court-of-india1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Royalty is not a Tax : नई दिल्ली (एजेंसी)। सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 25 जुलाई को 1989 के 7 न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले को गलत करार देते हुए बहुमत से फैसला सुनाया कि राज्यों को खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने का अधिकार है। शीर्ष न्यायालय ने यह भी कहा कि नाबालिगों द्वारा केंद्र को दी जाने वाली रॉयल्टी को कर नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह एक संविदात्मक भुगतान है। Supreme Court</p>
<h3>सुप्रीम कोर्ट ने सात जजों की संविधान पीठ के फैसले को गलत ठहराया!</h3>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने अपने सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ के 1989 के फैसले को गलत करार देते हुए कहा कि खनिजों पर रॉयल्टी को कर माना जाता है तथा राज्यों को खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने के अधिकार को 8:1 बहुमत से बरकरार रखा। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने 9 न्यायाधीशों की पीठ का नेतृत्व किया जिसने फैसला सुनाया और इसमें न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय, अभय ओका, बीवी नागरत्ना, जेबी पारदीवाला, मनोज मिश्रा, उज्ज्वल भुयान, एससी शर्मा और एजी मसीह शामिल हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने और 7 सहयोगियों के लिए फैसला लिखा। कानूनी समाचार वेबसाइट लाइव लॉ के अनुसार, न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने असहमतिपूर्ण निर्णय दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने जिन मुख्य प्रश्नों की जांच की, वे थे कि क्या खनन पट्टों पर रॉयल्टी को कर माना जाना चाहिए और क्या संसदीय कानून खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 के अधिनियमित होने के बाद राज्यों के पास खनिज अधिकारों पर रॉयल्टी/कर लगाने का अधिकार है। अदालत ने कहा, ‘‘रॉयल्टी कर की प्रकृति में नहीं है क्योंकि यह खनन पट्टे के तहत पट्टेदार द्वारा भुगतान किया जाने वाला एक संविदात्मक प्रतिफल है। रॉयल्टी और डेड रेंट दोनों ही कर की विशेषताओं को पूरा नहीं करते हैं।’’ Supreme Court</p>
<p><a title="Making Dabwali a District Protest : डबवाली को जिला बनाने से पहले मचा बवाल, बीडीपीओ कार्यालय में बुलाई महापंचायत" href="http://10.0.0.122:1245/protest-before-making-dabwali-a-district/">Making Dabwali a District Protest : डबवाली को जिला बनाने से पहले मचा बवाल, बीडीपीओ कार्यालय में बुला…</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jul 2024 12:04:27 +0530</pubDate>
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                <title>Tax: टैक्स को लेकर केजरीवाल का बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Tax: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अब आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनने के बाद लोग खुद ही आगे बढ़कर टैक्स देने लगे हैं क्योंकि उन्हें भरोसा है कि उनका दिया पाई पाई लोगों के विकास पर खर्च होगा। केजरीवाल ने ट्वीट कर आज कहा, ‘पहले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/kejriwals-big-statement-regarding-tax/article-49546"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/arvind-kejriwal-cbi-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Tax: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अब आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनने के बाद लोग खुद ही आगे बढ़कर टैक्स देने लगे हैं क्योंकि उन्हें भरोसा है कि उनका दिया पाई पाई लोगों के विकास पर खर्च होगा। केजरीवाल ने ट्वीट कर आज कहा, ‘पहले भाजपा के वक़्त लोग टैक्स नहीं देते थे। उन्हें लगता था कि उनका दिया हुआ टैक्स चोरी हो जाएगा। अब आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद लोग खुद ही आगे बढ़कर टैक्स देने लगे हैं। उन्हें भरोसा है कि अब ईमानदार सरकार है और उनका दिया पाई पाई लोगों के विकास पर खर्च होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली नगर निगम की महापौर शैली ओबरॉय ने कहा ‘केजरीवाल के विजन से लोगों का निगम में विश्वास बढ़ा है, जो आंकड़ों में दिख रहा है। पहले कर नेताओं के कोठी बंगले गाड़ी बनाने में बह जाता था। अब निगम में ईमानदार सरकार है। पार्क, नालियां, सड़कें बनाएंगे, शिक्षा स्वास्थ्य सेवाएं ठीक करेंगे और कर्मचारियों की समस्याएं खत्म करेंगे। महापौर ने कहा कि इस साल अप्रैल से जून की पहली तिमाही में प्रोपर्टी टैक्स कलेक्शन 1113 करोड़ रुपये रहा जबकि 2022-23 (पहली तिमाही) में 695 करोड़ रुपये था। 2021-22 (पहली तिमाही) में 540 करोड़ था।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jul 2023 13:43:30 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार पेंशन पर लगाए टैक्स को वापस ले : राजविंदर</title>
                                    <description><![CDATA[जालंधर (सच कहूँ न्यूज)। संयुक्त किसान मोर्चा की सदस्य महिला किसान यूनियन ने पंजाब सरकार की ओर से पेंशनधारकों पर दो सौ रुपए का मासिक विकास कर लगाने के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए रविवार को कहा कि इससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर वित्तीय बोझ पड़ेगा। Jalandhar News महिला किसान यूनियन की अध्यक्ष राजविंदर कौर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/rajwinder-kaur-has-demanded-the-government-to-withdraw-the-tax-levied-on-pensioners/article-49251"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/pension-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जालंधर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> संयुक्त किसान मोर्चा की सदस्य महिला किसान यूनियन ने पंजाब सरकार की ओर से पेंशनधारकों पर दो सौ रुपए का मासिक विकास कर लगाने के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए रविवार को कहा कि इससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर वित्तीय बोझ पड़ेगा। Jalandhar News</p>
<p style="text-align:justify;">महिला किसान यूनियन की अध्यक्ष राजविंदर कौर राजू ने रविवार को आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा अतीत में और रोजाना किए जा रहे बड़े दावों और गारंटिओं के बावजूद सरकार की मौजूदा गलत प्राथमिकताओं पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस टैक्स के कारण पेंशनभोगियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। Jalandhar News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के लंबे समय से चले आ रहे आंदोलन के बावजूद राज्य सरकार केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों की तुलना में अपने कर्मचारियों के वेतन और भत्ते बढ़ाने के अपने दायित्वों और गारंटिओं को पूरा करने में पूरी तरह से विफल रही है। आप सरकार पेंशनभोगियों को जनवरी 2016 से संशोधित वेतनमान और अवकाश भुगतान का बकाया देने के बजाय उन्हें उनकी वैध पेंशन से वंचित करने पर तुली हुई है। महिला किसान यूनियन ने राज्य के सभी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, सामाजिक संगठनों और आम जनता से इस अन्यायपूर्ण कर का विरोध करने का आह्वान करते हुए पेंशनभोगियों पर 200 रुपए मासिक कर को तत्काल वापस लेने की मांग की है। Jalandhar News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="BSNL Recharge Plans: स्मार्टफोन यूजर्स के लिए बीएसएनएल की बड़ी खबर" href="http://10.0.0.122:1245/bsnls-big-news-for-smartphone-users/">BSNL Recharge Plans: स्मार्टफोन यूजर्स के लिए बीएसएनएल की बड़ी खबर</a></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jun 2023 18:24:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Income Tax Slab: ITR भरने वालों के लिए नई गाइडलाइन&amp;#8230; राहत या आफत?</title>
                                    <description><![CDATA[Income Tax Latest News Hindi: अगर आप इनकम टैक्स (Income Tax) भरते हैं तो आपके लिए एक खुशखबरी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने टैक्स पेयर्स को राहत देते हुए बताया है कि अब आपकी इनकम पर किसी भी तरह का कोई टैक्स नहीं लगेगा। केंद्र सरकार (Central Government) अब ऐसी कई सुविधाएं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/fm-nirmala-sitharaman-on-income-tax-in-hindi/article-48845"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/income-tax.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Income Tax Latest News Hindi: अगर आप इनकम टैक्स (Income Tax) भरते हैं तो आपके लिए एक खुशखबरी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने टैक्स पेयर्स को राहत देते हुए बताया है कि अब आपकी इनकम पर किसी भी तरह का कोई टैक्स नहीं लगेगा। केंद्र सरकार (Central Government) अब ऐसी कई सुविधाएं देने जा रही है, जिसका फायदा लेने पर आपको उस इनकम पर कोई भी टैक्स नहीं देना होगा। इसको लेकर सरकार की तरफ से गाइडलाइन जारी कर दी गई है। Income Tax Slab</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि अभी 2.5 लाख रुपये तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं होता है, लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसी आय के स्रोत हैं, जिस पर आपको एक भी रुपया टैक्स नहीं देना होता है। आज हम आपको उसी इनकम के बारे में बताने जा रहे हैं जिस पर आपको कोई टैक्स नहीं देना है। Income Tax</p>
<p style="text-align:justify;">कोई भी जॉब करने वाला व्यक्ति अगर किसी भी संस्थान में लगातार 5 साल नौकरी करता है और 5 साल बाद वह अपनी कंपनी को छोड़ता है तो उसे ग्रेच्युटी का फायदा मिलता है। यह राशि पूरी तरह से टैक्स फ्री होती है। अगर सरकारी कर्मचारी की बात करें तो इनकी 20 लाख तक की राशि टैक्स फ्री होती है। वहीं, प्राइवेट कर्मचारियों की 10 लाख तक की राशि टैक्स फ्री होती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पीपीएफ और ईपीएस भी है टैक्स फ्री |Income Tax Slab</h4>
<p style="text-align:justify;">जानकारी दी जा रही है कि नौकरीपेशा व्यक्ति के पीपीएफ के पैसे पर भी कोई टैक्स नहीं लगता है। इस पर मिलने वाला ब्याज, मैच्योरिटी का समय पूरा होने पर मिलने वाली रकम तीनों पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इसके साथ ही लगातार 5 साल काम करने के बाद कर्मचारी अपना ईपीएफ निकालता है तो उसको इस राशि पर भी टैक्स नहीं भरना होता है। इतना ही नहीं अगर आपको अपने मां-बाप से कोई भी पारिवार प्रॉपर्टी, कैश या फिर जेवर मिलते हैं तो वह भी टैक्स से बाहर हैं। इस तरह के उपहार पर भी कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर माता-पिता से मिली हुई राशि को निवेश करता है और उससे कमाई करना चाहता है तो फिर उसे इससे होने वाली आमदनी पर टैक्स देना होगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jun 2023 15:37:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>कर वृद्धि से श्रीलंका में बढ़ेंगी आत्महत्या की घटनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो (एजेंसी)। गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में सरकार की ओर से प्रस्तावित कर वृद्धि से स्थिति और भयावह होने तथा इससे लोगों को आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिए विवश होने की आशंका जतायी गयी है। श्रीलंका के एक प्रमुख समाचारपत्र ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आम लोग अब टैरिफ और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/tax-hike-will-increase-suicides-in-sri-lanka/article-39085"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/sri-lanka-economic.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोलंबो (एजेंसी)।</strong> गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में सरकार की ओर से प्रस्तावित कर वृद्धि से स्थिति और भयावह होने तथा इससे लोगों को आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिए विवश होने की आशंका जतायी गयी है। श्रीलंका के एक प्रमुख समाचारपत्र ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आम लोग अब टैरिफ और करों में भारी वृद्धि के कारण बड़ी मात्रा में सार्वजनिक धन की चोरी करने वाले और देश को दिवालिया बनाने वाले, आर्थिक अपराधियों के पापों का भुगतना करने के लिए मजबूर हैं। प्रस्तावित कर वृद्धि यदि लागू की जाती है, तो कई लोगों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका में मुद्रास्फीति बढ़कर 70 प्रतिशत से अधिक हो गई है और खाद्य पदार्थों की कीमतें एक साल पहले की तुलना में 84.6 प्रतिशत से अधिक बढ़ गयी हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>श्रीलंका के परिधान उद्योग में सुधार आएगा: शर्मा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">कोट्स इंटरनेशनल ग्लोबल ने उम्मीद जतायी है कि श्रीलंका का परिधान उद्योग एक बार फिर पटरी पर वापस लौटेगा और यहां की अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी। डेली एफटी अखबार ने कोट्स इंटरनेशनल ग्लोबल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजीव शर्मा के हवाले से अपन रिपोर्ट में पिछले तीन माह की अशांति और भ्रम वाली स्थिति होने के बावजूद भी यह वास्तव में हो रहा है जैसा कि पहले कहा गया था। शर्मा ग्राहकों और कर्मचारियों से मिलने के लिए श्रीलंका की यात्रा पर थे। उन्होंने कहा कि देश का माहौल बहुत अच्छा था। उन्होंने कहा ‘आप कभी भी श्रीलंकाई को निराश या हताश नहीं देख सकते हैं क्योंकि वे हमेशा खुश, आशावादी और विश्वास रखने वाले लोग हैं कि आने वाला कल आज से बेहतर होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सीईओ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रीलंका को जो समर्थन मिलता है, वह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है क्योंकि श्रीलंका ने कई दशकों तक सद्भावना निर्माण का कार्य किया है। उन्होंने कहा ‘मैं यूरोप और अमेरिका के ग्राहकों से मिला। वे श्रीलंका और यहां के कपड़ा उद्योग को सहानुभूतिपूर्वक और दिल से सहयोग करने के लिए इच्छुक हैं। हर कोई अपने समर्थन को बढ़ाना चाहता है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/news-brief/tax-hike-will-increase-suicides-in-sri-lanka/article-39085</link>
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                <pubDate>Tue, 18 Oct 2022 12:03:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निजी स्कूलों के बिजली बिल, प्रोपर्टी टैक्स व बसों के पैसेंजर टैक्स माफ करने पर बनी सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[नियमावली-134 ए के तहत रिंबरेशमैंट की ऐवज में 200 रुपए बढ़ाने पर भी हुआ निर्णय भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा प्रदेश में कोरोना काल के दौरान बंद पड़े स्कूलों को एक बार फिर से पूर्ण संख्या के साथ खोलने का आदेश दे दिया हैं। स्कूलों में अब कोरोना काल के बाद स्थितियां सामान्य हो गई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/agreed-on-waiving-electricity-bill-property-tax-and-passenger-tax-of-buses-of-private-schools/article-31171"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/tax.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>नियमावली-134 ए के तहत रिंबरेशमैंट की ऐवज में 200 रुपए बढ़ाने पर भी हुआ निर्णय</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा प्रदेश में कोरोना काल के दौरान बंद पड़े स्कूलों को एक बार फिर से पूर्ण संख्या के साथ खोलने का आदेश दे दिया हैं। स्कूलों में अब कोरोना काल के बाद स्थितियां सामान्य हो गई हैं। कोरोना काल के दौरान प्राईवेट स्कूलों के बिजली बिल, प्रोपर्टी टैक्स (Tax) व स्कूल बसों के पैसेंजर टैक्स को माफ करने को लेकर मुख्यमंत्री ने सहमति बना ली है। हरियाणा प्राईवेट स्कूल वेल्फेयर एसोसिएशन की मांग पर 31 मार्च से पहले इसका नोटिफिकेशन आ जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बात भिवानी के विधायक घनश्याम सर्राफ ने प्राईवेट स्कूल वेल्फेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के बाद कही। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने ना केवल बिजली बिल, प्रोपर्टी टैक्स (Tax) व पैसेंजर टैक्स को माफ करने की बात कही है, बल्कि नवमी से 12वीं तक प्राईवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए हरियाणा शिक्षा नियमावली 134-ए के तहत फीस भी निर्धारित करने का निर्णय लिया हैं। यह फीस आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को पढ़ाने की ऐवज में सरकार द्वारा प्राईवेट स्कूलों को दी जाती है। इस फीस में 200 रुपए बढ़ोत्तरी करने की बात पर भी सहमति बनी हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">31 मार्च से पहले जारी होगा नोटिफिकेशन</h4>
<p style="text-align:justify;">प्राईवेट स्कूल वेल्फेयर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रामअवतार शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने भिवानी में एक दिन के प्रवास के बाद प्राईवेट स्कूलों की समस्याओं को समझते हुए सहमति जताई हैं। इस संबंध में अधिकारियों से मिलकर इसे 31 मार्च तक अमलीजामा पहनाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री चाहते है कि एक अप्रैल से नए सैशन के दौरान बच्चों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार की कोई बाधित ना आए, क्योंकि कोरोना काल के दौरान पिछले दो वर्षो से पहले ही पढ़ाई बाधित रही है, ऐसे में प्राईवेट स्कूल की समस्याओं को सैशन शुरू होने से पहले 31 मार्च तक निपटाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि पढ़ेगा हरियाणा तो बढ़ेगा हरियाणा के स्लोग्न को आगे बढ़ाते हुए नए सत्र में स्कूलों में पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री ने प्राईवेट स्कूलों को निर्देश दिए है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Feb 2022 18:51:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बजट में आमजन को मिले कर छूट व आर्थिक सहायता</title>
                                    <description><![CDATA[कोविड-19 से पिछले दो सालों में छोटे आयकरदाताओं और मध्यम वर्ग की आर्थिक चुनौतियां खासा बढ़ गई हैं। उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्री छोटे आयकरदाताओं और मध्यम वर्ग को राहत देते हुए इनकी क्रयशक्ति बढ़ाकर मांग में वृद्धि करने की रणनीति अपना सकती हैं। इसमें दो मत नहीं है कि पिछले दो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/tax-exemption-and-financial-assistance-to-the-general-public-in-the-budget/article-30408"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/welfare-budget-availability-of-funds-is-important.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कोविड-19 से पिछले दो सालों में छोटे आयकरदाताओं और मध्यम वर्ग की आर्थिक चुनौतियां खासा बढ़ गई हैं। उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्री छोटे आयकरदाताओं और मध्यम वर्ग को राहत देते हुए इनकी क्रयशक्ति बढ़ाकर मांग में वृद्धि करने की रणनीति अपना सकती हैं। इसमें दो मत नहीं है कि पिछले दो वर्षों में कोरोना संकट के कारण एक तरफ जहां बड़ी संख्या में लोगों के रोजगार गए, उनके वेतन-पारिश्रमिक में कटौती हुई और ‘वर्क फ्रॉम होम’ की वजह से टैक्स में छूट के कुछ माध्यम कम हो गए, तो वहीं दूसरी तरफ डिजिटल तकनीक, ब्रॉडबैंड, बिजली के बिल जैसे खर्चों में बढ़ोतरी से बड़ी संख्या में छोटे करदाताओं की आमदनी घट गई। इन दिनों महंगाई भी बढ़ गई है। दिसंबर 2021 में थोक महंगाई दर गिरकर 13.56 फीसदी पर रही, जबकि उसी महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.59 फीसदी पर पहुंच गई। पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी ऊंची हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चूंकि कोरोना के कारण पैदा हुए आर्थिक हालात से लड़ने और छोटे करदाताओं व मध्यम वर्ग की क्रयशक्ति बढ़ाने के लिए पिछले वर्ष के बजट में कोई बड़ी राहत नहीं दी गई थी, इसलिए इस बार उम्मीद है कि सरकार टैक्स का बोझ कम करने के लिए अभूतपूर्व प्रोत्साहन दे सकती है। छोटे करदाताओं व मध्यम वर्ग की मुश्किलों के बीच आयकर के पुराने स्लैब के पुन: निर्धारण की आवश्यकता खूब महसूस की जा रही है। आयकरदाताओं को राहत देते हुए सरकार को टैक्स छूट की सीमा दोगुनी कर पांच लाख रुपये कर देनी चाहिए। नए बजट में वित्त मंत्री को नौकरी-पेशा वर्ग के लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा 75 हजार रुपये तक बढ़ानी चाहिए। इसी तरह, मौजूदा समय में धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये की छूट मिलती है, जिसमें ईपीएफ, पीपीएफ, एनएससी, जीवन बीमा, बच्चों की ट्यूशन फीस और आवास ऋण का मूलधन भुगतान भी शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार द्वारा आयकर अधिनियम की धारा 80डी के तहत कर कटौती की सीमा को भी बढ़ाना चाहिए। चूंकि अभी भी कोरोना की चुनौतियों के बावजूद देश में स्वास्थ्य बीमा अधिक चलन में नहीं है और अधिकतर लोगों के स्वास्थ्य बीमे का कवर कोरोना वायरस के कारण अस्पताल के खर्चे से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है, इसलिए 80डी के तहत स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम पर कर छूट को बढ़ाना चाहिए, ताकि करदाता स्वास्थ्य बीमा की तरफ प्रेरित हों। निश्चित रूप से नए बजट के माध्यम से आयकर सुधारों को गतिशील किया जाना जरूरी है। सरकार द्वारा बजट के तहत नए डायरेक्ट टैक्स कोड और नए इनकम टैक्स कानून बनाने के कार्य को भी सुनिश्चित करना होगा।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Feb 2022 09:52:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर करारोपण की नयी वैश्विक संधि बनी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। वैश्विक स्तर पर काम करने वाली बड़ी कंपनियों पर करारोपण की एक न्यूनतम दर के बारे में शुक्रवार को एक वैश्विक समझौते पर 136 देशों की सहमति बनी। इस सहमति के दो अंग हैं। इनके तहत ऐसी कंपनियों पर न्यूनतम 15 प्रतिशत की दर से कर लगाया जाएगा और प्रत्येक देश को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/new-global-treaty-on-taxation-of-multinational-companies/article-27510"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/google-apple-fb.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> वैश्विक स्तर पर काम करने वाली बड़ी कंपनियों पर करारोपण की एक न्यूनतम दर के बारे में शुक्रवार को एक वैश्विक समझौते पर 136 देशों की सहमति बनी। इस सहमति के दो अंग हैं। इनके तहत ऐसी कंपनियों पर न्यूनतम 15 प्रतिशत की दर से कर लगाया जाएगा और प्रत्येक देश को अपने क्षेत्र में ऐसी कंपनियों के अर्जित राजस्व तथा लाभ पर कर लगाने का अधिकार होगा, चाहे वे वहां भौतिक रूप से उपस्थित न हों। विश्लेषकों की राय में इससे गूगल तथा अमेजन जैसे मंचों का कर दायित्व बढ़ सकता है। विकसित औद्योगिक देशों के पेरिस स्थित संगठन ओईसीडी- आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन के तत्वावधान में लंबी बातचीत के बाद इस समझौते पर आज सहमति बनी। बातचीत में 140 शामिल थे।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया चैनलों की रिपोर्ट के अनुसार एस्टोनिया हंगरी और सबसे महत्वपूर्ण आयरलैंड इस समझौते पर आज राजी हुए। रिपोर्टों के मुताबिक आयरलैंड के रुख के कारण समझौता अटका हुआ था। वार्ता में शामिल चार देशों पाकिस्तान, श्रीलंका, केन्या और नाइजीरिया ने इस पर भी हस्ताक्षर नहीं किए हैं। आयरलैंड के समझौते में शामिल होने के साथ ही इससे ओईसीडी और जी20 के सभी सदस्य देशों का समर्थन प्राप्त हो गया है । इस समझौते में शामिल देश विश्व अर्थव्यवस्था में 90 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी रखते हैं । यह समझौता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया के कई देश अपने यहां निवेश आकर्षित करने के लिए कर की दरें निम्न रखते हैं। इससे कर छूट की होड़ सी लगी रहती है। बड़ी कंपनियां इसका फायदा उठाने के लिए अपना लाभ उन देशों में दिखाती थीं, जहां कर की दरें बहुत कम होती हैं। इससे सरकारों के राजस्व की हानि होती थी और अर्थव्यवस्थाओं पर प्रतिकूल असर होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए समझौता 2 स्तंभों पर खड़ा किया गया है ।इसमें पहला एक न्यूनतम कर का स्तंभ है जो 15 प्रतिशत रखा गया है। इसके अलावा सदस्य देशों को अपने क्षेत्र में बड़ी अंतरराष्ट्रीय इन्टरनेट कंपनियों के अर्जित किए गए लाभ के एक हिस्से पर कर लगाने का अधिकार प्राप्त होगा। अमेरिका में बिडेन सरकार के गठन के बाद वैश्विक न्यूनतम कर की पहल को एक गति मिली ।अमेरिकी प्रशासन के सहयोग से न्यूनतम वैश्विक कर के प्रस्ताव को शक्तिशाली जी7 समूह का समर्थन प्राप्त हुआ और जुलाई में इस पर मोटी सहमति बन गई थी, हालांकि उस समय आयरलैंड इससे सहमत नहीं हुआ था। हरलैंड में कंपनी कर की दर 12.50 प्रतिशत है। थाईलैंड में कर की दर कम होने के कारण ही फेसबुक एप्पल और गूगल जैसी कंपनियों ने अपने यूरोपीय मुख्यालय आयरलैंड में रखे हुए हैं। ओईसीडी के महासचिव मेथियस फोरमैन ने एक बयान में कहा यह एक कारगर और संतुलित बहुपक्षीय व्यवस्था की बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि आज के समझौते से हमारी अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था पहले से अधिक निष्पक्ष बनेगी और अच्छे ढंग से काम करेंगी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Oct 2021 10:46:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विवाद से विश्वास : भुगतान की समयसीमा एक महीना फिर बढ़ी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। सरकार ने करदाताओं को राहत देने के लिए प्रत्यक्ष कर विवाद निवारण योजना ‘विवाद से विश्वास’ के तहत बिना किसी अतिरिक्त राशि के भुगतान करने की समयसीमा को एक महीने और आगे बढ़ा दिया है। प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने रविवार को जारी विज्ञप्ति में बताया कि विवाद से विश्वास कानून के तहत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/payment-deadline-extended-again-by-one-month/article-26365"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/income-tax-raid-on-congress.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> सरकार ने करदाताओं को राहत देने के लिए प्रत्यक्ष कर विवाद निवारण योजना ‘विवाद से विश्वास’ के तहत बिना किसी अतिरिक्त राशि के भुगतान करने की समयसीमा को एक महीने और आगे बढ़ा दिया है। प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने रविवार को जारी विज्ञप्ति में बताया कि विवाद से विश्वास कानून के तहत करदाताओं के भुगतान से संबंधित फॉर्म तीन को जारी करने और सुधार करने में आ रही कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए इस कानून के तहत देय राशि के भुगतान का समय (बिना किसी अतिरिक्त राशि के) 31 अगस्त से बढ़ाकर 30 सितंबर 2021 कर दिया गया है। इससे पूर्व इस वर्ष 25 जून को जारी अधिसूचना में कहा गया था कि देय राशि के भुगतान की अंतिम समयसीमा (बिना किसी अतिरिक्त राशि) को बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद इस कानून के तहत अतिरिक्त राशि के साथ भुगतान की अंतिम समयसीमा 31 अक्टूबर की गई थी। सीबीडीटी ने कहा कि विवाद से विश्वास अधिनियम के तहत अतिरिक्त राशि के साथ भुगतान की अंतिम समयसीमा को 31 अक्टूबर 2021 से आगे बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला:</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत डिक्लेरेशन फाइल करने की समयसीमा 31 मार्च को समाप्त हो गई थी। इसे बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया था। विवाद से विश्वास कानून के तहत विवादित कर, विवादित जुमार्ना, विवादित ब्याज दर जैसे मामलों के निपटारे की सुविधा प्रदान की जाती है। यह कानून 17 मार्च 2020 से प्रभावी है, जिसका उद्देश्य विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों के निपटान के लिये संबंधित करदाताओं को विकल्प उपलब्ध कराना है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Aug 2021 16:25:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मोदी सरकार में लगातार आ रही है टैक्स बढ़ोतरी की लहर : राहुल</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों जारी बढ़ोतरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए सोमवार को कहा कि उनके शासन में टैक्स बढ़ोतरी की लहरें लगातार आ रही है जिससे महंगाई आसमान छू रही है और आम लोगों का जीना दूभर हो गया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/wave-of-tax-hike-is-continuously-coming-in-modi-government-rahul/article-24237"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/rahul1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों जारी बढ़ोतरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए सोमवार को कहा कि उनके शासन में टैक्स बढ़ोतरी की लहरें लगातार आ रही है जिससे महंगाई आसमान छू रही है और आम लोगों का जीना दूभर हो गया है। गांधी ने ट्वीट किया, ‘कई राज्यों में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो रही है। पेट्रोल पम्प पर बिल देते समय आपको मोदी सरकार द्वारा किया गया महंगाई में विकास दिखेगा। टैक्स वसूली महामारी की लहरें लगातार आती जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी टैक्स बढ़ोतरी को लेकर सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए ट्वीट किया, ‘भयंकर जनलूट – पिछले 13 महीने में पेट्रोल 25.72 रुपए, डीजल 23.93 रुपए प्रति लीटर महँगा हुआ। कई राज्यों में 100 रुपये प्रति लीटर पार हुआ। पेट्रोल-डीजल में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी के लिए कच्चे तेल की कीमतें नहीं, मोदी सरकार द्वारा बढ़ाए गए टैक्स जिम्मेदार हैं।</p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 13:18:22 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जनता के प्राण जाए पर, पीएम की टैक्स वसूली ना जाए : राहुल</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। कोरोना संकट के बीच केन्द्र सरकार द्वारा कोरोना वैक्सीन पर जीएसटी वसूली का जमकर विरोध होना शुरू हो गया है। एक ओर जहां ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर वैक्सीन खरीद से जीएसटी हटाने की मांग की थी। अब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/rahul-gandhi-said-about-pms-tax-collection/article-23477"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/rahul-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> कोरोना संकट के बीच केन्द्र सरकार द्वारा कोरोना वैक्सीन पर जीएसटी वसूली का जमकर विरोध होना शुरू हो गया है। एक ओर जहां ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर वैक्सीन खरीद से जीएसटी हटाने की मांग की थी। अब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी इस मसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर सीधा निशाना साधा है। राहुल ने ट्वीट कर कहा है, ‘जनता के प्राण जाए पर, पीएम की टैक्स वसूली ना जाए।’ इस ट्वीट के साथ उन्होंने हैशटैग जीएसटी का भी इस्तेमाल किया है। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने विदेशों से आने वाली कोरोना वैक्सीन से तो जीएसटी वसूली हटा दी गई है। लेकिन देश के अंदर बनने वाली वैक्सीन की खरीद पर अब भी 5 फीसदी जीएसटी वसूला जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सीरम इंस्टीट्यूट कोविशील्ड की एक डोज राज्यों को 300 रुपए और भारत बायोटेक कोवैक्सीन की एक डोज 400 रुपए में दे रही है। इसके ऊपर से 5% जीएसटी अलग से लग रहा है। इसके बाद राज्यों को कोविशील्ड की एक डोज 315 रुपए और कोवैक्सीन की एक डोज 420 रुपए में पड़ रही है। इससे राज्यों पर अतिरिक्त खर्चा बढ़ रहा है। इसलिए कई राज्य वैक्सीन पर लगने वाले जीएसटी में छूट की मांग कर रहे हैं। वहीं, केंद्र सरकार को दोनों ही वैक्सीन का एक डोज 150 रुपए में मिल रहा है। भारत में इस वक्त तीन वैक्सीन को मंजूरी मिली है, जिनमें सीरम इंस्टीटयूट की कोविशील्ड, भारत बायोटेक की कोवैक्सीन, रूसी की स्पुतनिक-वी शामिल हैं।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 May 2021 12:27:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों से पेट्रोलियम पदार्थों के करों में कमी की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ (एजेंसी)। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस जरूरी चीजों की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि पर रविवार को चिंता व्यक्त की और केंद्र तथा राज्य सरकारों से इसमें लगातार बढ़ रहे करों में कमी की मांग की। बसपा अध्यक्ष ने आज ट्वीट कर कहा कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/mayawati-calls-for-reduction-in-petroleum-products-taxes-from-central-and-state-governments/article-21926"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/mayawati2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ (एजेंसी)।</strong> बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस जरूरी चीजों की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि पर रविवार को चिंता व्यक्त की और केंद्र तथा राज्य सरकारों से इसमें लगातार बढ़ रहे करों में कमी की मांग की। बसपा अध्यक्ष ने आज ट्वीट कर कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस जैसी जरूरी चीजों की कीमतों से सरकारी नियंत्रण हटने से इसके दाम बेलगाम होकर जिस तरह से तेजी से अनवरत बढ़ रहे हैं उससे हर जगह हाहाकार मचा है ।गरीब जनता अति दुखी और त्रस्त है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थिति की गंभीरता को देखकर सरकार इसका हल निकाले। सुश्री मायावती ने अपने दूसरे ट्वीट में कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त करों में मनमानी वृद्धि कर रही हैं जिससे कीमतें आसमान छू रही हैं। करोड़ों जनता पर इसका सीधा बोझ आये दिन पड़ रहा है । उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संविधान में ऐसी ही कल्याणकारी सरकार का सिद्धांत सुनिश्चित किया गया है।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Feb 2021 14:06:57 +0530</pubDate>
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