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                <title>पीछे आ रही ‘मौत’ से बचाकर ‘जिंदगियों’ को हांककर ले गया कुत्ता</title>
                                    <description><![CDATA[जानवर का जानवर होता वफादार, कुत्ते ने दिखाया गायों के प्रति अपना प्यार नई दिल्ली। (सच कहूँ)। अभी हाल ही में ट्विटर अकाउंट पर एक (Viral Video) हो रहा है जिसमें एक कुत्ता गायों के झुंड की रक्षा करते दिखाई दे रहा है। पर वो किस से गायों के झुंड की रक्षा कर रहा है। ये […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/video-of-saving-cow-from-lion-goes-viral/article-46535"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/viral-video-1.jpg" alt=""></a><br /><h3>जानवर का जानवर होता वफादार, कुत्ते ने दिखाया गायों के प्रति अपना प्यार</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। (सच कहूँ)।</strong> अभी हाल ही में ट्विटर अकाउंट पर एक (Viral Video) हो रहा है जिसमें एक कुत्ता गायों के झुंड की रक्षा करते दिखाई दे रहा है। पर वो किस से गायों के झुंड की रक्षा कर रहा है। ये तो आपको वीडियो देखकर अपने आप ही पता लग जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आपने कई बार देखा होगा कि गांवों में कुछ लोग कुत्ता इसलिए पालते हैं क्योंकि गांव वाले कुत्तों को समझदार समझते हैं, उन्हें लगता है कि कुत्ते अक्सर उनके जानवरों की देखभाल कर सकते हैं, उनकी रक्षा करने में सहयोगी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस वीडियो में कुत्ता कुछ ऐसा ही करता दिखाई दे रहा है। (Viral Video) गायों के झुंड के पीछे उनका शिकार करने के मकसद से एक शेर लगा हुआ है और कुत्ता उसी से बचाने के लिए गायों को हांक कर ले जाता हुआ दिख रहा है। जब गाय आगे चली जाती हैं तो कुत्ता कुछ देर रुक कर शेर का इंतजार करता है कि शेर कहां तक आ गया। और जब शेर नजदीक आने लगता है तो तभी कुत्ता भी वहां से रफुचक्कर हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि वायरल हो रही इस वीडियो को अब तक 23 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं और बहुत से लोगों ने इस पर तरत-तरह के कॉमेंट्स कर रहे हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Apr 2023 12:08:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Humanity: रक्तदान कर बचाई मासूम की जान</title>
                                    <description><![CDATA[वहीं डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत अपने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं पर चलकर गर्व से खुनदान करती है और किसी की भी जान बचाने के लिए दौडे चले आते है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/saved-innocents-life-by-donating-blood/article-13024"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/donating-blood.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">किसी की भी जान बचाने के लिए दौडे चले आते है डेरा प्रेमी (Humanity)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>संगरिया, सच कहूँ न्यूज।</strong> रक्तदान के क्षेत्र में इतनी जन जागृति आ जाएगी किसी ने सोचा भी नहीं था। जहां लोग रक्तदान के नाम से घबरा जाते थे व दुर्घटनाओं व बीमारी से पीड़ित लोग रक्त की कमी से असमय मौत के शिकार हो जाते थे। वहीं डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत अपने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं पर चलकर गर्व से खुनदान करती है और किसी की भी जान बचाने के लिए दौडे चले आते है। (Humanity) इसी कड़ी में टिब्बी निवासी आलोक आर्य ने हनुमानगढ़ के सरकारी हस्पताल में उपचाराधीन 1 वर्षीय मासूम बच्चे को अपना एक यूनिट रक्तदान कर उसकी जान बचाई।</p>
<p style="text-align:justify;">टिब्बी के सेवादार भाई रमेश भुनान इन्सां ने बताया कि यहां के वार्ड नं 20 निवासी संदीप सिंह के 1 वर्षीय पुत्र को खुन की कमी के चलते हनुमानगढ़ के सरकारी हस्पताल में भर्ती करवाया गया। ईलाज दौरान खुन की जरूरत पड़ने पर समाजसेवी भाई आलोक आर्य ने मौके पर जाकर अपना 1-यूनिट रक्तदान कर बच्चे के ईलाज में सहायता कर इंसानियत का फर्ज अदा किया।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2020 18:04:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनाली में पटरी से उतरी जिदंगी</title>
                                    <description><![CDATA[-7.8 डिग्री तक पहुंचा पारा  | Manali मनाली (सच कहूँ डेस्क)। भारी बर्फबारी के चलते हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के मनाली में जिदंगी (Life) पटरी से उतर गई है। एक ओर जहां बर्फबारी (Snowfall)के चलते यातायात व्यवस्था ठप पड़ गई है। वहीं बिजली की आपूर्ति बाधित होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/lives-derailed-in-manali/article-12370"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/manali-snowfall.jpg" alt=""></a><br /><h2>-7.8 डिग्री तक पहुंचा पारा  | Manali</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>मनाली (सच कहूँ डेस्क)।</strong> भारी बर्फबारी के चलते हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के मनाली में जिदंगी (Life) पटरी से उतर गई है। एक ओर जहां बर्फबारी (Snowfall)के चलते यातायात व्यवस्था ठप पड़ गई है। वहीं बिजली की आपूर्ति बाधित होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। भीषण ठंड के चलते स्थानीय लोगों को जीना मुहाल हो गया है। मनाली (Manali) में न्यूनतम तापमान -7.8 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका है। नलों की पाइपलाइनें जम गई हैं। इस कारण पीने के पानी तक की किल्लत हो गई है। वहीं होटलों और घरों में खाने के सामान तक की किल्लत हो गई है। वहीं बर्फबारी को लेकर पर्यटकों में भारी उत्साह है। मौसम विभाग के अनुसार 11 से 14 जनवरी के बीच मूसलाधार बारिश, मध्य और ऊंची पहाड़ियों में बर्फबारी का पूर्वानुमान लगाया।</p>
<p><strong> </strong></p>
<ul>
<li><strong>शिमला, मनाली और कुफरी समेत हिमाचल के ऊंचाई वाले स्थानों पर भारी बर्फबारी </strong></li>
<li><strong>पाइप लाइनों में पानी जमा, पेयजल तक की किल्लत बढ़ी</strong></li>
<li><strong>होटलों और घरों में खाने के सामान के लिए जूझ रहे लोग</strong></li>
<li><strong>बर्फबारी से पर्यटकों के चेहरों पर रौनक आई</strong></li>
<li><strong>11 से 14 जनवरी के बीच मूसलाधार बारिश, मध्य और ऊंची पहाड़ियों में बर्फबारी का पूर्वानुमान</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jan 2020 12:06:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल से थमा जनजीवन</title>
                                    <description><![CDATA[बस यात्रियों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी | Nationwide strike जालंधर (एजेंसी)। मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ बुधवार को ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल (Nationwide Strike) से जनजीवन थम गया। बुधवार को हड़ताल के चलते पंजाब में बस यातायात पूरी तरह से ठप्प रहा। जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पंजाब […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/life-stopped-due-to-nationwide-strike/article-12318"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/nationwide-strike.jpg" alt=""></a><br /><h2>बस यात्रियों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी | Nationwide strike</h2>
<p style="text-align:justify;">
<strong>जालंधर (एजेंसी)।</strong> मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ बुधवार को ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल (<span lang="en" xml:lang="en">Nationwide Strike</span>) से जनजीवन थम गया। बुधवार को हड़ताल के चलते पंजाब में बस यातायात पूरी तरह से ठप्प रहा। जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पंजाब रोड़वेज यूनियन प्रदेश प्रधान मंगत खान ने बताया कि रोड़वेज तथा पनबस की सभी 1800 बसें डिपो में खड़ी हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब रोड़वेज की सांझा एक्शन कमेटी से संबंधित स्थायी कर्मचारी अपराह्न दो बजे तक हड़ताल पर रहेंगे। जबकि ठेके पर काम कर रहे कर्मचारी शाम पांच बजे तक हड़ताल पर रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि राज्य में कहीं भी कोई बस नहीं चल रही है। पंजाब रोड़वेज के निदेशक परनीत सिंह मिन्हास ने दावा किया कि रोड़वेज की 27 फीसदी बस चल रही है। उन्होंने बताया कि सुबह नौ बजे तक लगभग 35 फीसदी बसें चल रहीं थी। लेकिन संगठनों द्वारा रास्ते जाम करने के कारण घट कर 27 फीसदी रह गई है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>होशियारपुर-फगवाड़ा राष्ट्रीय उच्च मार्ग को चार घंटे रखा जाम। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>तहसीलदार को सौंपा पीएम मोदी के नाम ज्ञापन, आश्वासन पर मार्ग को खोला</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>अमृतसर में मजदूर तथा किसान संगठनों ने अमृतसर-दिल्ली रेल ट्रेक पर धरना देकर यातायात रोक दिया। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>भारी पुलिस बल मौके पर रहा तैनात</strong></li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">बंद में ये हुए शामिल</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>रोड़वेज कर्मचारी संगठन </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पंजाब पेंशन युनियन</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>दोआबा जनरल कैटागिरी</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जमहूरी किसान सभा पंजाब</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>लोक इंसाफ पार्टी दोआबा</strong></li>
</ul>
<pre class="tw-data-text tw-text-large tw-ta" dir="ltr"><span lang="en" xml:lang="en"> </span></pre>
<div class="QmZWSe">
<div class="DHcWmd">
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</span></span></p>
</div>
</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/life-stopped-due-to-nationwide-strike/article-12318</link>
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                <pubDate>Wed, 08 Jan 2020 13:29:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिन्दगी क्यों भार स्वरूप लगने लगती है?</title>
                                    <description><![CDATA[कितनी ही बार बड़े काम आसानी से हो जाते हैं, पर छोटी चीजें देर तक अटकाए रहती हैं।
बड़ी मुसीबतें और दुख झेल लिए जाते हैं, छोटे-छोटे दुखों से उबरना कठिन हो जाता है। दरअसल शुरू में हमें छोटे कामों की अहमियत ही नहीं पता चलती।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/why-does-life-become-a-burden/article-11921"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/life.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जीवन से जुड़ा एक बड़ा सवाल है कि विषम परिस्थितियां क्यों आती है? जिन्दगी क्यों भार स्वरूप लगने लगती है? क्यों हम स्वयं से ही खफा से रहने लगते हैं? इसका सबसे बड़ा कारण है हमने जीने के जो साफ-सुथरे तरीके थे या जो जीवनमूल्य थे उन्हें भुला दिया है। जिंदगी का मकसद अगर खुद को खुश रखते हुए अपने से जुड़े एवं आस-पड़ोस के लोगों की भलाई की चाहत है तो इनमें अब एक धुंधला-सा रंग चढ़ गया है। शायद यही वजह है कि हमारे समाज की सामूहिक जिंदगी और व्यक्तिगत जिन्दगी छीजती जा रही है, इसमें गिरावट दर्ज की जा रही है और अंतरात्मा की आवाज पर गौर करने के बजाय अनसुना करने, उसकी अवहेलना करने का प्रचलन, किसी चालू फैशन की तरह, जोर पकड़ता जा रहा है। आर्थर रूबिन्स्टीन ने तो कहा है कि ‘मैंने यह पाया है कि यदि आप जिंदगी को प्यार करते हैं, तो जिंदगी भी आपको प्यार करती है।’ हमारी समस्याओं का मूल कारण भी यही है कि हम जिन्दगी को प्यार करना ही भूल गये हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आराम और सुकून से चल रही जिंदगी में अगर अचानक ऐसी कोई घटना घट जाए, जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की तो ऐसी स्थिति में अधिकांश लोग बिलकुल घबरा जाते हैं। हालाँकि कई तो ऐसे बौखला उठते हंै कि बाकी लोग भी विचलित हो जाते हैं। सभी के जीवन में कभी-न-कभी विषम परिस्थितियाँ आती हैं, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि आप उनसे घबराकर हार मान बैठें। ऐसी स्थितियों में सहजता एवं सहिष्णुता जरूरी है। मार्क ट्वेन ने कहा कि ‘जीवन मुख्य रुप से अथवा मोटे तौर पर तथ्यों और घटनाओं पर आधारित नहीं है। यह मुख्य रुप से किसी व्यक्ति के दिलो दिमाग में निरन्तर उठने वाले विचारों के तूफानों पर आधारित होती है।’</p>
<p style="text-align:justify;">उतार-चढ़ाव, हर्ष- विषाद एवं आशा-निराशा का नाम ही जिन्दगी है, वेन डब्ल्यू डायर ने कहा भी है कि हर चीज या तो बढ़ने का एक अवसर है या बढ़ने से रोकने वाली एक बाधा। चुनाव आपको करना है। संतुलन एवं सहजता जरूरी है। मनोवैज्ञानिकों के मतानुसार सहजता मनुष्य का प्राकृतिक गुण है, जो सबको आकर्षित करता है और एक-दूसरे को जोड़ने का काम भी करता है। यह विषम परिस्थितियों के बीच समता की स्थापना करता है। असफलता को सहन करने की शक्ति देता है। आइंस्टाइन जब कभी किसी प्रयोग में असफल हो जाते या किसी अन्य कारण से तनावग्रस्त होते, तो उसी समय वायलिन बजाने बैठ जाते। वायलिन बजाने में वे इतने मगन हो जाते थे कि उन्हें अपनी असफलता के विषय में कुछ भी याद नहीं रहता था। इस गतिविधि से वे पूरी तरह शांत हो जाते और नई ऊर्जा के साथ नये प्रयोग में जुट जाते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">जब भी हम जी-जान से किसी कर्म में लग जाते हैं तो सफलता मजबूर होकर हमारे कदम चूमती है। उसे चूमना ही होता है, वह बंधी हुई है नियम से, जो कालांतर से चला आ रहा है। यदि आप कहीं फेल हो गए हैं तो ऐसा नहीं है कि सृष्टि ने आपके साथ धोखा कर अपना नियम बदल दिया है। ऐसा नहीं होता, हमें सहजता एवं धैर्य से इन वितरीत परिस्थितियों का सामना करना चाहिए। जबकि अधिकांशत: देखने में आता है कि हम उन्हीं परिस्थितियों में साथ सहज रह पाते हैं जो हमारे मनोनुकूल होती हंै। जबकि हर स्थिति में सहजता जरूरी होती है क्योंकि ऐसा होने पर ही हम विषम परिस्थितियों में धैर्य बनाए रख सकते हैं और अपना आपा नहीं खोते हंै। आर्कविशप डेसमण्ड टुटु ने कहा कि ‘आप जहां भी हैं, वहीं पर अपना थोड़ा-सा क्यों न हो अच्छा काम करते रहें, यही छोटी-छोटी अच्छी बातें मिलकर संसार को जीत सकती हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">तो क्या इंसानी समाज अपनी स्वभावगत उदात्त चीजों को सहेजने के बजाय इन्हें किसी कोने में पड़ी रद्दी की टोकरी में डालता जा रहा है? क्या इंसान किसी अंधेरे, संकरे बदबूदार, दमघुटे दरिया में बगैर पतवार संभाले बहता जा रहा है? क्या वह किन्हीं अनिश्चित और खतरनाक उद्देश्यों की ओर आंख मूंदे भागता जा रहा है? यकीनन नहीं, नहीं! वक्त आसमान में परवाज भरती चिड़िया के पंख पर भले ही सवार हो, लेकिन इंसान की तबीयत ही कुछ ऐसी है कि वह पंख के पार भी देखता है, भारी पहाड़ों तक को लांघता है, वक्त से जूझता है और जिंदगी की दिशा में नए-नए रास्ते तलाशता है। मैर्कस औयरिलियस ने कहा कि ‘यदि आप किसी बाह्य कारण से परेशान हैं, तो परेशानी उस कारण से नहीं, अपितु आपके द्वारा उसका अनुमान लगाने से होती है, और आपके पास इसे किसी भी क्षण बदलने का सामर्थ्य है।’</p>
<p style="text-align:justify;">परिस्थितियाँ कितनी भी विषम क्यों न हो सबसे पहले जरूरत है शांत स्वभाव की। कहते हैं न कि बुरे वक्त में समझदार मनुष्य पहले से भी ज्यादा समझदार हो जाता है और फिर यही समय तो आपके धैर्य, सोच और सहनशीलता की परीक्षा का होता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले शांत रहकर अपना दिमाग पूरी तरह इसमें लगा देना चाहिए ताकि बद से बदतर होती स्थिति को सुधारने पर विचार कर सकें। अपनी समस्या का जिक्र केवल अपने चुनिंदा विश्वसनीय परिचितों से ही करें, जो आपको ऐसे समय में सही सलाह दे सकें। ज्यादा लोगों को बताने से स्थिति आपके विपरीत भी हो सकती है और हास्यास्पद भी। सी. डब्ल्यू. वेन्डेट ने कहा कि ‘जीवन में सफलता इतना अधिक प्रतिभा अथवा अवसर का विषय नहीं है जितना वह लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता और डटे रहने का है।’</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकतर देखने में आया है कि विषम परिस्थितियों में लोग अपने इष्ट को या तो अचानक बहुत याद करने लगते हैं या फिर उनसे शिकवा-शिकायत और धमकी भरी बातें शुरू कर देते हैं। ऐसा व्यवहार ठीक नहीं, विषम परिस्थितियाँ तो केवल आपकी परीक्षा लेती हैं। कई लोग घबराकर इसे अपने पर आई मुसीबत मानते हैं और इसकी जिम्मेदारी वे दूसरों पर डालने लगते हैं। ऐसे में अमूमन नकारात्मक सोच पैदा हो ही जाती है, लेकिन इसे दरकिनार कर सकारात्मक सोच पर ही स्वयं को केंद्रित करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">धैर्य से हर कदम फूँक-फूँककर चलने से आखिरकार आप विषम परिस्थिति पर विजय पा ही लेते हैं। सहजता व्यक्तित्व के विकास की सीढ़ी है। यह एक ऐसा गुण है, जो व्यक्ति की एक अलग पहचान बनाता है। आशा, उम्मीद की ये किरणें बदले हुए मायनों और मकसदों में भी बुराई और भलाई का भेद सिखाती हैं। ये बताती हैं कि कितनी भी गाढ़ी निराशा क्यों न हो, यह बस चंद दिनों की मेहमान होती है कि इससे आगे इंसानी जिंदगी को खूबसूरत बनाने के एहसासों का खुला आसमान छिटका पड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दिशा में इकलौती कोशिश भी एक अहम शुरूआत का पहला कदम साबित होती है, जरूरत बस बदले सुरों में चीजों को स्वीकार करने की तैयारी की है। बड़ी बातों के मायने होते हैं तो छोटी बातों के भी। कितनी ही बार बड़े काम आसानी से हो जाते हैं, पर छोटी चीजें देर तक अटकाए रहती हैं। बड़ी मुसीबतें और दुख झेल लिए जाते हैं, छोटे-छोटे दुखों से उबरना कठिन हो जाता है। दरअसल शुरू में हमें छोटे कामों की अहमियत ही नहीं पता चलती। मुक्केबाज मोहम्मद अली कहते हैं,दर्द, सामने खड़ा पहाड़ नहीं देता, जिस पर चढ़ाई करनी है। परेशान जूते में फंसा छोटा कंकड़ करता है। यही कंकड़ जीवन को हरा-भरा नहीं होने देता।<br />
<strong>-ललित गर्ग</strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/article/why-does-life-become-a-burden/article-11921</link>
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                <pubDate>Sun, 22 Dec 2019 16:43:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उन्नाव दुष्कर्म केस: दोषी विधायक कुलदीप को उम्रकैद की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[उन्नाव  दुष्कर्म केस के दोषी भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित विधायक कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/unnao-rape-case-convict-mla-kuldeep-sentenced-to-life-imprisonment/article-11883"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/mla-kuldeep.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">विधायक कुलदीप सेंगर को अपहरण और दुष्कर्म का दोषी पाया गया |Unnao Rape Case</h1>
<ul>
<li>
<h2><strong>कोर्ट ने धारा 376 और पॉक्सो के सेक्शन 6 के तहत दोषी ठहराया</strong></h2>
</li>
</ul>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> उन्नाव  दुष्कर्म केस<strong> (Unnao Rape Case) </strong>के दोषी भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित विधायक कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर की सजा पर शुक्रवार दोपहर 2 बजे फैसला सुनाते हुए 25 लाख रुपये जुर्माना का भी ऐलान किया। बता दें कि जज धर्मेश शर्मा ने कुलदीप सेंगर के वकीलों की तरफ से दिए गए हलफनामों को पढ़ा और केस में बहस हुई। इससे पहले मंगलवार को भी कोर्ट में कुलदीप की सजा पर बहस हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सोमवार को कोर्ट ने कुलदीप को नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और अपहरण का दोषी करार दिया था। मंगलवार को सजा पर हुई बहस के दौरान सीबीआई ने दोषी विधायक के लिए अधिकतम सजा की मांग और पीड़ित के लिए उचित मुआवजा मांगा था। वहीं, सेंगर के वकीलों ने अदालत से उसे न्यूनतम सजा देने की प्रार्थना की थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ताकतवर इंसान के खिलाफ पीड़ित का बयान सच्चा: कोर्ट |</h2>
<h1>Unnao Rape Case</h1>
<p style="text-align:justify;">सोमवार को तीस हजारी कोर्ट ने भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप को दोषी मानते हुए कहा था कि एक ताकतवर इंसान के खिलाफ पीड़ित का बयान सच्चा और निष्कलंक है। पीड़ित की तरफ से कोर्ट में दोषी को उम्र कैद की अपील की गई। कोर्ट ने इस मामले में सह-आरोपी शशि सिंह को बरी कर दिया था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">2017 का था मामला</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>उन्नाव में कुलदीप सेंगर और उसके साथियों ने 2017 में लड़की को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म किया था। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इसी साल जुलाई में पीड़ित की कार की ट्रक से भिड़ंत हो गई थी। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>हादसे में पीड़ित की चाची और मौसी की मौत हो गई थी। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पीड़ित लड़की और उसके वकील तभी से दिल्ली एम्स में भर्ती हैं। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>सेंगर फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/unnao-rape-case-convict-mla-kuldeep-sentenced-to-life-imprisonment/article-11883</link>
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                <pubDate>Fri, 20 Dec 2019 14:36:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SBI बैंक में है अकाउंट तो 30 नवंबर तक कर लें ये काम, नहीं तो होगी परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय स्टेट बैंक ने अपने सभी पेंशनधारकों को 30 नंवबर से पहले अपने जीवित होने का प्रमाण पत्र (Life Certificate submission) जमा करने के लिए कहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/life-certificate-submission/article-11019"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/sbi.jpg" alt=""></a><br /><h2>सभी पेंशनधारकों को 30 नंवबर से पहले अपने जीवित होने का प्रमाण पत्र जमा करने के लिए कहा है। Life Certificate submission</h2>
<p><strong>नई </strong><strong>दिल्ली ।</strong> अगर आप पेंशनधारक हैं तो ये खबर आपके लिए काम की खबर है। भारतीय स्टेट बैंक ने अपने सभी पेंशनधारकों को 30 नंवबर से पहले अपने जीवित होने का प्रमाण पत्र <strong>(Life Certificate submission</strong>) जमा करने के लिए कहा है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपकी पेंशन रोकी जा सकती है।जीवित होने का प्रमाण पत्र एसबीआई बैंक की ब्रांच या अपने पास के आधार सेंटर या कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए जीवित होने का प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। ये सर्टिफिकेट डिजिटली भीजमा कराया जा सकता है।</p>
<h2>एसबीआई के पास हैं सबसे ज्यादा खाते</h2>
<p>देश में सबसे ज्यादा पेंशन खाते एसबीआई के पास हैं। अगर आप रिटायर हो चुके हैं और आपकी पेंशन एसबीआई के बैंक खाते में आती है तो आपको अपने जीवित होने का फार्म जमा करना होगा।</p>
<h2>ऐसे भी जमा कर सकते हैं सर्टिफिकेट</h2>
<p>हर साल नवम्बर महीने में पेंशन धारकों के लिए लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना अनिवार्य होता है। अगर पेंशनधारक खुद नहीं आ सकते हैं तो घर के किसी अन्य व्यक्ति को भेज कर भी ये फार्म जमा करा सकते हैं। जो पेंशनर बैंक नहीं जा सकते वे किसी मजिस्ट्रेिट या गैजेट्ड अफसर से साइन कराकर अपना लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकते हैं।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/life-certificate-submission/article-11019</link>
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                <pubDate>Mon, 04 Nov 2019 13:16:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पांच प्रतिशत पानी की जिंदगानी</title>
                                    <description><![CDATA[पेयजल के सम्बन्ध में लाख चेतावनियों के बावजूद हमारी विधायिका और कार्यपालिका के स्तर पर भारी उदासीनता और लापरवाही दिन प्रतिदिन उजागर हो रही है जो बेहद चिंताजनक और मर्मान्तक है। हाल ही में नीति आयोग ने पानी के संकट को लेकर देश को चेताया था और अब कैग की रिपोर्ट में चौकाने वाले खुलासे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/life-of-five-percent-water/article-5395"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/water-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पेयजल के सम्बन्ध में लाख चेतावनियों के बावजूद हमारी विधायिका और कार्यपालिका के स्तर पर भारी उदासीनता और लापरवाही दिन प्रतिदिन उजागर हो रही है जो बेहद चिंताजनक और मर्मान्तक है। हाल ही में नीति आयोग ने पानी के संकट को लेकर देश को चेताया था और अब कैग की रिपोर्ट में चौकाने वाले खुलासे सामने आये हैं। इससे जाहिर होता है लोकतंत्र के दो स्तम्भ सही काम नहीं कर रहे है। तीसरा स्तम्भ न्यायपालिका सरकारी क्रियाकलापों पर कई बार अपनी नाराजगी जाहिर कर चूका हैं और चौथा स्तंभ मीडिया विषय की गंभीरता सब के सामने रखता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ है कि राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत करीब 90 हजार करोड़ रुपए में से दस प्रतिशत यानी आठ हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च ही नहीं किये गये। समुचित योजना की कमी और कोष के खराब प्रबंधन के कारण विभिन्न योजनाओं के पूरा होने में बहुत देरी हुयी और लागत भी बढ़ गयी। रिपोर्ट के मुताबिक दो हजार करोड़ से अधिक राशि के उपकरणों का इस्तेमाल ही नहीं किया गया और कार्यक्रम की पुख्ता निगरानी भी नहीं की गयी।</p>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं ग्रामीण आबादी को पाईप के जरिए स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने का लक्ष्य भी पूरा नहीं किया जा सका और कई कार्यक्रम ठीक से लागू नहीं किये जा सके तथा बीच में ही अधूरे छोड़ दिये गये। रिपोर्ट के अनुसार तीन राज्यों में बिना काम के ही करीब डेढ़ करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया और 12 राज्यों में 1367 काम अधूरे रहे तथा 359 करोड़ रुपए का फंड दूसरे काम में लगा दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार बारहवीं पंचवर्षीय योजना में 2017 तक सभी ग्रामीण बस्तियों, सरकारी स्कूलों तथा आंगनवाड़ी केन्द्रों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करने का लक्ष्य था, लेकिन केवल 44 प्रतिशत ग्रामीण बस्तियों को तथा 85 प्रतिशत सरकारी स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केन्द्रों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराया जा सका।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार केवल 18 प्रतिशत ग्रामीण घरों में पाईप से पीने का पानी मिल सका, 13 राज्यों में निगरानी समितियों का गठन भी नहीं हुआ। भारत सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग की मानें तो देश इस समय भीषण जल संकट से गुजर रहा है और इस आसन्न संकट पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो हालत बदतर होने की सम्भावना है। नीति आयोग के अनुसार जल प्रबंधन सूचकांक के अनुसार भारत अब तक के सबसे बड़े जल संकट से जूझ रहा है। आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के करीब 60 करोड़ लोग पानी की कमी का सामना कर रहे हैं। करीब 75 प्रतिशत घरों में पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। साथ ही, देश में करीब 70 प्रतिशत पानी पीने लायक नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोग का कहना है कि इस संकट के चलते लाखों लोगों की आजीविका और जिंदगी खतरे में है। आयोग ने चेतावनी भी दी है कि हालात और बदतर होने वाले हैं। उसके मुताबिक साल 2030 तक देश में पानी की मांग मौजूदा आपूर्ति से दोगुनी हो सकती है। साफ और सुरक्षित पानी नहीं मिलने की वजह से हर साल करीब दो लाख लोगों की मौत होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जल की उपलब्धता को लेकर वर्तमान में भारत ही नहीं अपितु समूचा विश्व चिन्तित है। जल ही जीवन है। पृथ्वी पर कुल जल का अढ़ाई प्रतिशत भाग ही पीने के योग्य है। इनमें से 89 प्रतिशत पानी कृषि कार्यों एवं 6 प्रतिशत पानी उद्योग कार्यों पर खर्च हो जाता है। शेष 5 प्रतिशत पानी ही पेयजल पर खर्च होता है। यही जल हमारी जिन्दगानी को संवारता है।</p>
<p style="text-align:justify;">धरती पर जब तक जल नहीं था तब तक जीवन नहीं था और जल ही नहीं रहेगा तो जीवन के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती। वर्त्तमान समय में जल संकट एक विकराल समस्या बन गया है। नदियों का जल स्तर गिर रहा है. कुएं, बावडी, तालाब जैसे प्राकृतिक स्त्रोत सूख रहे हैं। घटते वन्य क्षेत्र के कारण भी वर्षा की कमी के चलते जल संकट बढ़ रहा है। वहीं उद्योगों का दूषित पानी की वजह से नदियों का पानी प्रदूषित होता चला गया लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। आवश्यकता इस बात की है कि हम जल के महत्व को समझे और एक-एक बूंद पानी का संरक्षण करें तभी लोगों की प्यास बुझाई जा सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बाल मुकुन्द ओझा</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/article/life-of-five-percent-water/article-5395</link>
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                <pubDate>Thu, 16 Aug 2018 11:59:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>मौत की गुफा से निकली खिलखिलाती जिंदगियां</title>
                                    <description><![CDATA[प्रभुनाथ शुक्ल थाईलैंड में इंसानी जिंदगी बचाने का चमत्कारिक मिशन पूरा हो गया। थाईलैंड की थैम लुआंग गुफा में फंसे 12 जूनियर फुटवालर और कोच को सुरक्षित निकाल लिया गया। मिशन पर पूरी दुनिया की निगाह टिकी थी। दुनिया भर में मासूम खिलाड़ियों के लिए दुआएं हो रहीं थीं। घटना पूरी दुनिया के लिए चुनौती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/life-out-of-the-cave-of-death/article-4791"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/life-save.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रभुनाथ शुक्ल</strong></p>
<p style="text-align:justify;">थाईलैंड में इंसानी जिंदगी बचाने का चमत्कारिक मिशन पूरा हो गया। थाईलैंड की थैम लुआंग गुफा में फंसे 12 जूनियर फुटवालर और कोच को सुरक्षित निकाल लिया गया। मिशन पर पूरी दुनिया की निगाह टिकी थी। दुनिया भर में मासूम खिलाड़ियों के लिए दुआएं हो रहीं थीं। घटना पूरी दुनिया के लिए चुनौती बनी थी। सभ्यता के विकास और आधुनिक जीवन शैली की अकल्पनीय वारदात थी। मौत की गुफा से 18 दिन की इंसानी जद्दोजहद के बाद सभी को सुरिक्षत बाहर निकाल लिया गया। विज्ञान के साथ तकनीकी विकास की यह बड़ी जीत साबित हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">ईश्वर की कृपा रही कि कोई अनहोनी घटना नहीं हुई, लेकिन इस पूरे मिशन में सबकुछ अच्छा होने के बाद हादसा भी हुआ जब थाईलैंड नेवी का एक पूर्व जवान मिशन के दौरान आॅक्सीजन की कमी से दुनिया से अलविदा हो गया। मिशन पूरी तरह असंभव था लेकिन दुनिया ने आपसी सहयोग से कठिन प्राकृतिक स्थितियों में भी जीत हासिल की। गुफा से बाहर आए जूनियर खिलाड़ियों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम नहीं जानते यह चमत्कार है, विज्ञान है या फिर और कुछ, लेकिन हम सभी लोग गुफा से बाहर आ गए हैं। इस अद्भुत मिशन में थाईलैंड की वायु एंव नवसेना के साथ ब्रिटेन, अमेरिका, चीन, म्यांनमार, लाओस, आस्टेÑलिया और जापान के गोताखोरों का सहायोग तकनीकी विशेषज्ञों की टीम कर रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">थाई सरकार में इस मिशन की सफलता के लिए पूरी दुनिया के प्रति कृतज्ञता जतायी है। थैम लुआंग गुफा में बरसात के मौसम में घूसने पर प्रतिबंध रहता है। क्योंकि बारिश की वजह से संकरी गुफा पानी से भर जाती है। संभवत: वहां इस तरह के सुरक्षा गार्डों की तैनाती नहीं थी जिसकी वजह से कोच खिलाड़ियों को लेकर गुफा में घुस गया। कल्पना के इस युग में हमारी सोच जहां तक नहीं पहुंचती, लेकिन हादसे हमें वहां पहुंचा देते हैं। थाईलैंड के 12 जूनियर फुटबालर 23 जून को अभ्यास के बाद अपने 25 बर्षीय कोच इकाबोला के साथ चियांग राज्य की लुआंग गुफा में घूमने पहुंच गए। बाद में बारिश की वजह से गुफा में पानी भर जाने से वह बाहर नहीं नहीं निकल पाए।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि वह गुफा में चार किमी अंदर पहुंच गए थे जहां से बाहर निकलना उनके लिए बेहद मुश्किल भरा था। क्योंकि लगातार बारिस की वजह से गुफा पानी से भर गयी थी। पहाड़ों के आतंरिक जलश्रोंतों से काफी पानी गिर रहा था। सभी खिलाड़ियों की उम्र 11 से 16 साल के मध्य थी। जूनियर खिलाड़ियों ने गुफा के अंदर पट्टाया द्वीप टीले पर अपनी जान बचायी। भूख लगने पर बरसाती पानी पीकर अपनी जान बचायी। थाईलैंड सरकार के अथक प्रयास के दस दिन बाद ब्रिटेन के गोताखारों ने आखिरकार लापता खिलाड़ियों को खोज निकाला।</p>
<p style="text-align:justify;">राहत एवं बचाव दल को लापता बच्चों के स्कूली बैग मिले जिससे यह संभावना पक्की हो गयी कि बच्चे इस गुफा में हैं। टीम मिशन पर आगे बढ़ी तो सभी उस सुरक्षित टीले पर जिंदा मिले। जिसके बाद इस मिशन को गति मिली। गुफा से सभी को सुरिक्षत निकालना बड़ी चुनौती थी। इस पूरे अभियान में थाई सेना ने कहा था कि चार माह का वक्त लग सकता है। लेकिन गुफा के हालात दिन ब दिन बुरे हो रहे थे। राहत एवं बचाव कार्य की वजह से गुफा के अंदर आक्सीजन कम होती जा रही थी। बचाव अभियान के दौरान एक पूर्व सेनाकर्मी की मौत से मिशन को बड़ा झटका लगा। सरकार और अभियान में लगे 1200 राहत कर्मिया के सामने जिंदा बचे खिलाड़ियों को सुरक्षित निकालना बड़ा संकट था।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राकृतिक चुनौतियों का सामने करते हुए पानी से लबालब संकरी गुफा में पहुंचना और गुफा में फंसे खिलाड़ियों के लिए आक्सीजन, खाने-पीने के साथ दूसरी साम्रागी पहुंचाना धरती पर लड़ी जाने वाली किसी भी जंग से कठिन था। हालांकि इंसानी दृढ़ इच्छा शक्ति ने इस पर जीत हासिल कर ली। विकास के इस अद्भूत चमत्कार ने साबित कर दिया की तकनीकी विकास के दौर में विपरीत परिस्थतियों में भी इसांन चाहे तो सबकुछ हासिल कर सकता है। थाईलैंड सरकार और वैश्विक सहयोग ने असफल मिशन को कामयाब बना दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">
मानव सभ्यता का यह सबसे कठिन मिशन था। क्योंकि जहां बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना था। वहीं हर दिन मौसम की वजह से चुनौतियां बढ़ती जा रही थी। क्योंकि आक्सीजन भी सिर्फ 15 फीसदी बचा था। गुफा से पम्प के माध्यम से 12 करोड़ लीटर पानी बाहर निकाला जा चुका था लेकिन पानी का लेबल कम नहीं हो रहा था। मिशन पर एक बार जाने में पूरे 6 घंटे का वक्त लग रहा था। सरकार पाइप और सिलेंडर के जरिए आक्सीजन को अंदर भेज रही थी। मिशन के दौरान जगह-जगह आक्सीजन डिपो बनाए गए। इस अभियान में अमेरिकी वैज्ञानिक भी आ जुटे। एक वैज्ञानिक ने एयर पाइप ट्यूब डालने का प्रस्ताव दिया और इसी दौरान एक छोटी पनडुब्बी भी बना डाली। दूसरी तरफ पहाड़ को ड्रिल करने का काम चला, लेकिन पूरी ड्रिल 400 मीटर पर रोक दी गयी। क्योंकि गुफा के अंदर पहाड़ों के खींसकने का खतरा था जिसकी वजह से बच्चों की जान जा सकती थी। परिवारों को पूरा भरोसा दिलाया गया कि गुफा के अंदर सभी बच्चे सुरक्षित हैं। बच्चों ने अपने परिजनों को पत्र भी खिला था कि आप घबराएं नही ंहम बहादुर बच्चे हैं। इस दौरान उनके कोच इकाबोला ने उनकी खूब मदद की। परिजनों से इकाबोला ने माफी भी मांगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बहादुर कोच संकट की घड़ी में बच्चों को जहां जिंदगी बचाने के उपाये बताते रहे वहीं साथ में अपने हिस्से का भोजन भी उपलब्ध कराया। मिशन के दौरान बरसात थमने का इंतजार नहीं किया जा सकता था। क्योंकि हालात हर दिन बुरे हो रहे थे। जूनियर खिलाड़ियों की निगरानी एक बड़ी समस्या थी। आक्सीजन, भोजन, स्वास्थ्य की देखभाल के साथ रोशनी की सुविधा गुफा में अनवरत पहुंचाना प्राथमिकता थी। दूसरी बात गुफा के बाहर और अंदर का वातावरण बिल्कुल अलग था। गुफा में फंसे बच्चे और राहत दल के लोग किसी बीमारी की चपेट में न आएं एक अलग समस्या थी। खिलाड़ियों के पैरों में इंफेक्शन की शुरूवात भी होेने लगी थी। आपको याद होगा हरियाणा के कुरुक्षेत्र में 2006 में बोर बेल में गिरे मासूम प्रिंस को बचाने के लिए सेना ने किस तरह लीड किया था। देश भर में दुआओं का दौर चला था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह 1989 में पश्चिम बंगाल के रानीगंज में 64 मजदूरों को और चिली की एक खदान में 33 मजबूरों को कैप्सूल का ढ़ाचा तैयार कर सुरक्षित बाहर निकाला गया था। लेकिन प्रकृति और इंसान के तकनीकी विकास के मध्य इस अघोषित युद्ध पर जीत मिल गयी। गुफा में सभी जिंदगियों को सुरिक्षत निकाल लिया गया। विज्ञान, विकास और आपसी सामांजस्य से प्रकृति के साथ इंसान ने एक अद्भुत युद्ध जीतने की कला भी सीखी। यह घटना कभी इतिहास में दर्ज होगी। कहते हैं कि अंत भला तो सब भला। मिशन की इस सफलता पर पूरी दुनिया में जश्न है। सबसे अधिक मासूम बच्चों के परिजना खुश हैं जिन्होंने शायद अपने बच्चों के सकुशल बाहर आने की कल्पना की होगी। दुनिया को बनाने वाला ईश्वर खुश और मिशन कामयाब हुआ।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Jul 2018 02:09:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>लोगों की जान ले रहा सोशल मीडिया</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र के धुले जिले में भीड़ द्वारा पांच लोगों की हत्या की गयी/Social Media पूनम आई कौशिश: सोशल मीडिया  (Social Media ) जान लेता है और कैसे? भीड़ द्वारा हत्याएं पुन: राजनीतिक और सामाजिक सुर्खियों में आ गयी हैं । भीड़ द्वारा महाराष्ट्र, कर्नाटक, त्रिपुरा, आंध्र, तेलंगाना, गुजरात और पश्चिम बंगाल सहित असम से लेकर तमिलनाडू तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/peoples-life-taking-social-media/article-4767"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/social-media.jpg" alt=""></a><br /><h2><strong>महाराष्ट्र के धुले जिले में भीड़ द्वारा पांच लोगों की हत्या की गयी/Social Media</strong></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>पूनम आई कौशिश:</strong> सोशल मीडिया  (<strong>Social Media ) </strong>जान लेता है और कैसे? भीड़ द्वारा हत्याएं पुन: राजनीतिक और सामाजिक सुर्खियों में आ गयी हैं । भीड़ द्वारा महाराष्ट्र, कर्नाटक, त्रिपुरा, आंध्र, तेलंगाना, गुजरात और पश्चिम बंगाल सहित असम से लेकर तमिलनाडू तक नौ राज्यों में 17 मामलों में 27 निर्दोष लोगों की हत्या की गयी। इन मामलों में भीड़ पुलिस से भी तेजी से कार्यवाही करती है और अधिकारी प्रौद्योगिकी के माध्यम से ऐसी हत्याओं को रोकने के लिए तौर-तरीकों को नहीं ढूंढ़ पा रहे हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के धुले जिले में भीड़ द्वारा पांच लोगों की हत्या की गयी और इसका कारण व्हाट्स ऐप पर बच्चों की खरीद-फरोख्त की झूठी अफवाह थी। जिसके चलते भीड़ ने इन लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी। कुछ राज्यों ने ऐसी अफवाहों से आगह करने के लिए कुछ लोगों की सेवाएं ली हैं जो लाउडस्पीकर लेकर गांव-गांव जा रहे हैं और झूठी खबरों के खतरों के बारे में लोगों को बता रहे हैं। ये राज्य ऐसी हिंसा पर नियंत्रण लगाना चाहते हैं। इन घटनाओं से दुखी उच्चतम न्यायालय ने भीड़ द्वारा ऐसी हत्याओं को सभ्य समाज में अस्वीकार्य अपराध बताया है और कहा है कि कोई भी कानून को अपने हाथ में नहंी ले सकता है और ऐसी घटनाओं पर रोक की जिम्मेदारी राज्यों पर डाली है।</p>
<h2>राज्यों को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दिशा-निर्देश बनाने चाहिए/ <strong>Social Media</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने कहा है कि राज्यों को ऐसी घटनाओं को रोकने ओर पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए दिशा-निर्देश बनाने चाहिए। न्यायालय गोरक्षकों पर नियंत्रण लगाने के लिए दिशा-निर्देश बनाने के संबंध में निर्देश देने की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। यह बताता है कि स्थानीय गुप्तचर सेवा कितनी अप्रभावी है। वह पुलिस को तनाव या भावी हमले के बारे में आगह नहंी कर पाती। यह सेवा ऐसे समूहों के पास हथियारों और उनमें शामिल व्यक्तियों के बारे में सूचना जुटाने में भी सक्षम नहीं है। ऐसी हत्याएं हमारी व्यवस्था की कमजोरी का संकेत है और यह बताता है कि देश में कानून का पालन नहीं हो रहा है। देश में घृणा और आक्रोश का एक नया पंथ स्थापित हो गया है। गुंडागर्दी द्वारा मौत और जघन्य अपराध किए जा रहे हैं और हम ऐसे तत्वों के बंदी बन गए हैं। यदि समय पर हस्तक्षेप किया जाता तो भीड़ द्वारा ऐसी हत्याओं को रोका जा सकता था। भीड़ द्वारा ऐसा उपद्रव कोई नई बात नहीं है और कुछ राज्यों में सत्तारूढ दल इसका उपयोग राजनीतिक साधन के रूप में कर रहे हैं और कई बार इसका उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता है और कई बार अपनी राजनीतिक सत्ता को बचाए तथा अपने समर्थकों को बचाने के लिए ऐसी घटनाओं को नजदरंदाज किया जाता है।</p>
<h2>उत्तर प्रदेश के दादरी में एक मुसलमान की भीड़ द्वारा हत्या/ <strong>Social Media</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">पिछले तीन वर्षों में ऐसी अनेक घटनाएं हुई। उत्तर प्रदेश के दादरी में एक मुसलमान की इस अफवाह के बाद भीड़ द्वारा हत्या कर दी गयी कि उसके फ्रिज में गोमांस है। उसके बाद गुजरात के उना में गोरक्षकों द्वारा चार दलितों की हत्या कर दी गयी। अलवर में गो की तस्करी के संदेह में पहलू खान और फरीदाबाद में जुनैद की हत्या की गयी। देश में गोहत्या और गोमांस भक्षण के मुद््दे पर ऐसी अनेक घटनाएं हुई। फिर प्रश्न उठता है कि क्या हमारे देश में अभी भी कानून का शासन है। हम भीड़ द्वारा हिंसा के बारे में इतने उदासीन क्यों हैं? ये उपद्रवी समाज और प्राधिकारियों से आगे कैसे बढ जाते हैं? हमारा समाज नैतिक दृष्टि से इतना भ्रष्ट कैसे बन गया कि ऐसी घटनाएं होने लग गयी। क्या हम ऐसी घटनाओं को पसंद करते हैं? कल तक गोरक्षकों द्वारा गोमांस को लेकर लोगों की हत्या की जा रही थी आज अफवाहों को लेकर ऐसी घटनाएं हो रही हैं और अब लगता है कि हमें हर समय अपने पहचान पत्र साथ में रखने चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">30 करोड़ से अधिक लोगों के पास व्हाट्स ऐप सुविधा/ <strong>Social Media</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">हमारे देश में 100 करोड से अधिक सक्रिय मोबाइल फोन कनेक्श्न हैं और 30 करोड़ से अधिक लोगों के पास व्हाट्स ऐप सुविधा है। इसलिए सरकार को कोई उपाय नहंी सूझता कि वह झूठी खबरों के आधार पर किस तरह हिंसा पर अंकुश लगाए। ऐसी हिंसा पर अंकुश लगाना स्थानीय प्राधिकारियों पर छोड़ दिया जाता है। चेतावनी जारी की जाती हैं और गांव गांव जाकर जन जागरण का प्रयास किया जाता है। किंतु यह पर्याप्त नहंी है। जबकि सरकार दावा करती है कि वह भरसक प्रयास कर रही है। साथ ही सरकार को बलि के बकरे के रूप में व्हाट्स ऐप मिल गया है और वह व्हाट्स ऐप से कहती है कि वह ऐसे संदेशों पर रोक लगाए। इससे पता चलता है कि सरकार का दृष्टिकोण कितना अनुचित है और उसे आधुनिक संदेश भेजने वाले साधनों की समझ नहीं है। साथ ही सरकार ऐसी जघन्य हत्याओं के मामले में व्यापक मुद्दों का निराकरण करने में भी विफल ही है। भीड़ द्वारा हत्याएं कानून और व्यवस्था की समस्याएं हैं। किंतु उसके तीन मुख्य कारण हैं। पहला, जाति और पंथ पहचान। दूसरा, न्यायालय द्वारा भीड़ द्वारा हिंसा करने वालों को दंडित न किया जाना जहां पर राज्य के प्राधिकारी उपस्थित भी होते हैं, वे भीड़ को चुनौती देने में सक्षम नहीं होते हैं और तीसरा, कानून को लागू करने वाले हिंसा में भागीदार बन जाते हैं। कानून का शासन कमजोर हो गया है और इसका उदाहरण गोमांस पर प्रतिबंध लगाने के बारे में भीड़ द्वारा हिंसा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">2019 के चुनावों के निकट आते हुए व्हाट्स ऐप ने अपना विस्तार कर दिया/ <strong>Social Media</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">विडंबना देखिए। 2019 के चुनावों के निकट आते हुए व्हाट्स ऐप ने अपना विस्तार कर दिया है। राजनीतिक दल हजारों व्हाट्स ऐप वारियर को भर्ती कर रहे हैं जो कई मामलों में आपत्तिजनक संदेश फैलाते हैं। किंतु साथ ही सरकार और राजनीतकि दलों को सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफार्मों द्वारा दी जा रही सूचनाओं की सत्यता के बारे में जानने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए। इसके अलावा पुलिस बल को ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर प्रभावी उपाय करने चाहिए और गलत सूचनाओं के संबंध में तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए। पुलिस बल को समाज में जागरूकता पैदा करनी चाहिए, उसका विश्वास जीतना चाहिए तथा भीड़ द्वारा हिंसा पर रोक लगानी चाहिए तथा अपहरणकतार्ओं आदि जैसे मुद््दों पर लोगों के भय को दूर करना चाहिए। भीड़ द्वारा हत्या के मामले में व्हाट्स ऐप को दोषी बताना बताता है कि सरकार नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मदोरियों को न निभाने का प्रयास कर रही है। वह जनता से जुड़ने के अवसर को भी खो रही है और दुष्प्रचार की समस्या और इस पर अंकुश लगाने के उपायों को नहीं समझ पा रही है। आशा की जाती है कि सरकार प्रौद्योगिकी कंपिनयों के साथ सहयोग कर प्रौद्योगिकी के प्रयोग से इस पर अंकुश लगाने के नए उपाय ढूंढेगी। किंतु यह तभी संभव है जब सरकार इस चुनौती का सामना करने के लिए इच्छाशक्ति दिखाए।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/article/peoples-life-taking-social-media/article-4767</link>
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                <pubDate>Tue, 10 Jul 2018 02:40:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>स्पाइडर मैन कैरेक्टर को रचने वाले आर्टिस्ट स्टीव डिट्को का निधन</title>
                                    <description><![CDATA[फ्लैट से मिली थी दो दिन पुरानी डेड बॉडी मनोरंजन डेस्क। मार्वल कॉमिक्स और स्टैन ली के साथ मिलकर स्पाइडर मैन को बनाने वाले स्टीव डिट्को का 90 साल की उम्र में निधन हो गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि स्टीव अपने घर में मृत पाए गए थे। जिसके बाद उनहें होस्पीटल में उपचार के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/artist-steve-dittko-creates-spider-man-character/article-4743"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/spiderman-copy.jpg" alt=""></a><br /><h2>फ्लैट से मिली थी दो दिन पुरानी डेड बॉडी</h2>
<p><strong>मनोरंजन डेस्क।</strong></p>
<p>मार्वल कॉमिक्स और स्टैन ली के साथ मिलकर स्पाइडर मैन को बनाने वाले स्टीव डिट्को का 90 साल की उम्र में निधन हो गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि स्टीव अपने घर में मृत पाए गए थे। जिसके बाद उनहें होस्पीटल में उपचार के लिए पहुंचाया गया। होस्पीट पहुंचते ही डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। स्टीव ने स्पाइडर मैन के अलावा डाॅक्टर स्ट्रेंज के कैरेक्टर को भी अपनी कल्पनाओं से सजाकर यादगार कॉमिक कैरेक्टर बना दिया था।</p>
<p> </p>
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<pre class="tw-data-text tw-ta tw-text-medium" dir="ltr"><span lang="en" xml:lang="en"> </span></pre>
<p> </p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/rangmanch/artist-steve-dittko-creates-spider-man-character/article-4743</link>
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                <pubDate>Sun, 08 Jul 2018 08:30:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>समूल जीवन नष्ट कर देता हैं नशा</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/editorial/soto-life-destroys-narcotics/article-4504"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/01.jpg" alt=""></a><br /><p>नशा एक ऐसी बुराई हैं जो हमारे समूल जीवन को नष्ट कर देता हैं। नशे की लत से पीड़ित व्यक्ति परिवार के साथ समाज पर बोझ बन जाता हैं। युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा नशे की लत से पीड़ित हैं। नशे के रूप में लोग शराब, गांजा, जर्दा, ब्राउन शुगर, कोकीन, स्मैक आदि मादक पदार्थों का प्रयोग करते हैं, जो स्वास्थ्य के साथ सामाजिक और आर्थिक दोनों लिहाज से ठीक नहीं हैं।</p>
<p>नशे का आदी व्यक्ति समाज की दृष्टी से हेय हो जाता हैं, और उसकी सामाजिक क्रियाशीलता जीरो हो जाती हैं, फिर भी वह व्यसन को नहीं छोड़ता हैं। ध्रूमपान से फेफड़े में कैंसर होता हैं, वहीं कोकीन, चरस, अफीम लोगों में उत्तेजना बढ़ाने का काम करती हैं, जिससे समाज में अपराध और गैरकानूनी हरकतों को बढ़ावा मिलता हैं। इन नशीली वस्तुओं के उपयोग से व्यक्ति पागल और सुप्तावस्था में चला जाता हैं। तम्बाकू के सेवन से तपेदिक, निमोनिया, सांस की बीमारियों का सामना करना पड़ता हैं। इसके सेवन से जन और धन दोनों की हानि होती हैं। हिंसा, बलात्कार, चोरी, आत्महत्या आदि अनेक अपराधों के पीछे नशा एक बहुत बड़ी वजह है। शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए एक्सीडेंट करना, शादीशुदा व्यक्तियों द्वारा नशे में अपनी पत्नी से मारपीट करना आम बात है।</p>
<p>मुंह, गले व फेफड़ों का कैंसर, ब्लड प्रैशर, अल्सर, यकृत रोग, अवसाद एवं अन्य अनेक रोगों का मुख्य कारण विभिन्न प्रकार का नशा है। सरकारी स्तर पर अभी भी नशों को कम कर आंका जा रहा है। घातक मादक पदार्थों का तंत्र एक तरह से देश में शिक्षा, स्वास्थ्य व पुलिस तंत्र से ज्यादा मजबूत हुआ जान पड़ रहा है। सरकार, प्रशासन पुलिस को नशा फैलने से रोकने के लिए फिसीपीस या मलेशिया की तरह एक क ठोर अभियान चलाना चाहिए। अन्यथा प्रदेश-दर-प्रदेश नशा पूरे देश को अपनी गिरफ्त में ले लेगा।</p>
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                <pubDate>Tue, 26 Jun 2018 07:52:39 +0530</pubDate>
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