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                <title>Mist - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>धुंध भी हटेगी और धूप भी खिलेगी</title>
                                    <description><![CDATA[अहंकार से परेशान लोगों की बहुत बड़ी दुनिया है, जहां दूसरों के अहंकार से परेशान लोग कम हैं और खुद के अहंकार से परेशान ज्यादा। सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमें दूसरों का अहं तो दिखता है, लेकिन अपना नहीं। अपने भीतर का अहंकार देखे और अहंकारमुक्त होने का प्रयत्न करें। लेखिका स्पिनेजा कहती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-mist-will-also-disappear-and-the-sun-will-also-blossom/article-12587"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/sun.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">अहंकार से परेशान लोगों की बहुत बड़ी दुनिया है, जहां दूसरों के अहंकार से परेशान लोग कम हैं और खुद के अहंकार से परेशान ज्यादा। सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमें दूसरों का अहं तो दिखता है, लेकिन अपना नहीं। अपने भीतर का अहंकार देखे और अहंकारमुक्त होने का प्रयत्न करें। लेखिका स्पिनेजा कहती हैं, ‘अहंकारी व्यक्ति अपने अच्छे काम की और दूसरों के खराब काम की गिनती ही करता रहता है।’ यह अहंकार ही है जिसके चलते सब चाहते हैं कि उनके आसपास वाले उन्हें सुनें, उनका अनुसरण करें।</h2>
<h3>
<span style="text-decoration:underline;"><strong>ललित गर्ग</strong></span></h3>
<h4 style="text-align:justify;">इस दुनिया में हर व्यक्ति दु:खी है और दुखों से परेशान है, असफल होने के डर में जी रहा है। इस परेशानी से मुक्ति भी चाहता है लेकिन प्रयास अधिक दु:खी एवं असफल होने के ही करता है। हर व्यक्ति का ध्यान अपनी सफलताओं पर कम एवं असफलताओं पर अधिक टिका है। सकारात्मक नजरिया बनाने से ही असफलता की धुंध हट सकती है एवं सफलता की धूप खिल सकती है। ये हम पर ही है कि हम चाहें तो बिखर जाएं या पहले से बेहतर बन जाएं। आप बुरी किस्मत कहकर खुद को दिलासा भी दे देते हैं। लेकिन, सच यही है कि यह भाग्य पर नहीं, आप पर निर्भर करता है। आप वही बन जाते हैं, जो आप चुनते हैं। लेखक स्टीफन कोवे कहते हैं, ‘मैं अपने हालात से नहीं, फैसलों से बना हूं।’ वह व्यक्ति बहुत दु:खी है जो पूर्वाग्रह से ग्रस्त है। यह सही है कि हम सबकी एक सामाजिक जिंदगी है। हमें उसे भी जीना होता है। हम एक-दूसरे से मिलते हैं, आपस की कहते-सुनते हैं। हो सकता है कि आप बहुत समझदार हों। लोग आपकी सलाह को तवज्जो देते हों। पर यह जरूरी नहीं कि आप ही सबकुछ हो, आपको ही सारा ज्ञान हो। इस तरह का ‘हम सब जानते हैं’ का भाव चित्त को शांत नहीं होने देता। अहं से अहं टकराते रहते हैं। शक व संदेहों की कड़ियां बढ़ती जाती हैं। जहां जरूरत ठहरने की होती है, हम दौड़ते चले जाते हैं। संभावनाओं का पूरा आकाश हमारे इंतजार में होता है और हम भटकते रह जाते हैं। यह भटकन ही सारे दु:खों, परेशानियों एवं समस्याओं का कारण है।<br />
इस तरह के हठ एवं जड़ कोटि के लोग समझाने पर भी समझ नहीं पाते हैं या समझना नहीं चाहते, जो समझना नहीं चाहता, उसे समझाया नहीं जा सकता। कहावत है कि आप घोड़े को जलाशय तक ले जा सकते हैं, किन्तु उसे पानी पीने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। जो यह धार कर बैठा है कि मुझे समझा नहीं है, उन्हें ब्रह्माजी भी आ जाएं तो भी समझना नहीं सकते। रात-दिन कानों के परदों से हजारों शब्द व ध्वनियां गुजरती हंै। हम कुछ पर ही गौर करते हैं। उनमें भी बहुत कम शब्द होते हैं, जो दिल को छू पाते हैं। दरअसल, हमारे सुनने और समझने के बीच एक दूरी होती है। जरूरी नहीं जो सुना, उसे वैसा ही समझ लिया जाए। रूमी तो कहते हैं, ‘जब कान ध्यान से सुनते हैं तो वे आंख बन जाते हैं। पर शब्द अगर दिल के कानों तक नहीं जाते, तो कुछ नहीं घटता।’ इस बात का पता लगाने की कोशिश करें कि आपको अपने जीवन में किन चीजों से शिकायते हैं, क्यों आप मुस्कराते नहीं हैं, क्यों आप दूसरों के करीब जाने से हिचकिचाते हैं और आपको क्यों लगता है कि सिर्फ आप ही सब कुछ जानते हैं और जो आप सोचते हैं, वही अंतिम सत्य है।<br />
जीवन कभी एक-सा नहीं रहता, इसलिए स्थायी सुरक्षा जैसा कोई पल नहीं होता। इसलिए अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रयास कीजिए। आपके जो डर हैं, उनसे मुंह छिपाने के बजाय उनका सामना कीजिए। यह अच्छी बात है कि सकारात्मकता से हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा मिलती है, लेकिन यह भी जरूरी नहीं कि हमेशा सब कुछ खूबसूरत, सहज और सकारात्मक ही हो। इसलिए परेशानियों का सामना भी पूरी ऊर्जा के साथ करें। हमेशा खुद को सुरक्षा के घेरे में न बांधें, चुनौतियां जरूरी है सफल जीवन के लिये, इसलिये चुनौतियों से भागे नहीं, उनका सामना करें। आप भी इंसान हैं और आपसे भी गलती हो सकती है, इसका अर्थ यह नहीं कि आप कर्म करना ही छोड़ दे। गलतियों से न घबराएं, उनमें सुधार करते रहें। गलती एक ऐसा अनुभव है, जो आपको अगली बार सही काम करने के लिए प्रेरित करता है।<br />
अहंकार से परेशान लोगों की बहुत बड़ी दुनिया है, जहां दूसरों के अहंकार से परेशान लोग कम हैं और खुद के अहंकार से परेशान ज्यादा। सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमें दूसरों का अहं तो दिखता है, लेकिन अपना नहीं। अपने भीतर का अहंकार देखे और अहंकारमुक्त होने का प्रयत्न करें। लेखिका स्पिनेजा कहती हैं, ‘अहंकारी व्यक्ति अपने अच्छे काम की और दूसरों के खराब काम की गिनती ही करता रहता है।’ यह अहंकार ही है जिसके चलते सब चाहते हैं कि उनके आसपास वाले उन्हें सुनें, उनका अनुसरण करें। जैसा वह कह रहे हैं, वैसा ही करें। पर क्या ऐसा हो पाता है? ज्यादातर यही कहते हुए मिलते हैं कि डराए-धमकाए बिना काम ही नहीं होता। नतीजा, कहने और सुनने वाले के बीच एक दूरी ही बनी रहती है और नयी-नयी समस्याएं पैदा करती रहती है। मैनेजमेंट गुरु ब्रायन टेज्सी कहते हैं, ‘किसी भी क्षेत्र में प्रबंधन का एक ही अचूक नियम है। दूसरों से उसी तरह काम करवाएं, जिस तरह आप चाहते हैं कि दूसरे आप से काम करवाएं।’<br />
मैनेजमेंट का सिद्धांत है कि कर्मचारी को अधिकारी के संकेत को समझना चाहिए। दूसरे शब्दों में दृष्टांत की भाषा में कहा गया कि कर्मचारी को अपने अधिकारी का महाराणा प्रताप वाला चेतक होना चाहिए। चेतक घोड़े की समझ-बूझ और स्वामीभक्ति प्रसिद्ध है। अगर ऐसे कर्मचारी हों तो कंपनी का बहुत विकास होगा। ऐसे लोगों का जीवन भी सुखी होता है। लेकिन आज यह बात देखने में नहीं आती। यही कारण है कि हर व्यक्ति का अपने काम के प्रति उत्साह कम होता जा रहा है। कितने ही काम ऐसे होते हैं, जो रोज जेहन में आते हैं और उन्हें हम बिना कुछ किए आगे के लिए खिसका देते हैं। हमारे कितने ही सपने और विचार इसी तरह टलते-टलते अतीत बन चुके हैं। और फिर हमें लगता है कि जिंदगी भी खिसकते-खिसकते ही बीत रही है। दरअसल हम जानते ही नहीं कि आखिर हम चाहते क्या हैं? हम जो चाहते हैं और उसे पूरा करने के लिए जो करना है, इस बीच की दूरी को कम करना ही सफलता दिलाता है।<br />
आज की सबसे बड़ी समस्या यह है कि ज्ञान का विकास तो बहुत हो रहा है, किन्तु आग्रह को कम करने की साधना नहीं हो रही है। समस्या यह भी है कि चरित्र का पाठ भी नहीं पढ़ाया जाता। केवल पैसा कमाने का पाठ पढ़ाया जाता है। अब कौन समझाए कि गाली के बदले में गाली देना तो गाली देने वाले की श्रेणी में आना है। सफलता सिर पर जल्दी चढ़ती है और असफलता दिल पर। जीत के नशे में झूमते हुए को हार नहीं दिखती और हारे हुए को जीत की कोई उम्मीद नजर नहीं आती। लेकिन, असली जीत उनकी होती है जो सफलता को सिर नहीं चढ़ने देते और हार को दिल से नहीं लगाते। लेखक क्रिस गार्डनर कहते हैं, ‘समस्याओं को हल नहीं कर पाना ठीक है, पर उनसे भागना, बिल्कुल नहीं।’ हार हो या जीत, हमें अपना सौ प्रतिशत देने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। यही है सार्थक एवं सफल जीवन का मार्ग, नये जीवन की शुरूआत।</h4>
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                <pubDate>Sat, 18 Jan 2020 20:20:45 +0530</pubDate>
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                <title>धुंध से सड़क पर रेंगते रहे वाहन</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूली बच्चों को हो रही परेशानी ShriGangaNagar, SachKahoon News:  लगातार दूसरे दिन सोमवार की सुबह धुंध की चादर में पूरा जिला लिपटा रहा। सुबह घनी धुंध और ठंड ने जनजीवन को प्रभावित किया। हवाएं चलने से ठंड का प्रभाव बना रहा। धुंध की वजह से सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों को भी परेशानियों का सामना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/mist-creeping-vehicle-on-the-road/article-630"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/02-31.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>स्कूली बच्चों को हो रही परेशानी</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>ShriGangaNagar, SachKahoon News: </strong> लगातार दूसरे दिन सोमवार की सुबह धुंध की चादर में पूरा जिला लिपटा रहा। सुबह घनी धुंध और ठंड ने जनजीवन को प्रभावित किया। हवाएं चलने से ठंड का प्रभाव बना रहा। धुंध की वजह से सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछेक स्कूलों ने सर्दी की छुट्टियां कर दी हैं। सुबह इतनी घनी धुंध थी कि दृश्यता काफी कम हो गई। इससे महज 50 मीटर से ज्यादा दूर तक देख पाना संभव नहीं था। इससे ट्रैफिक प्रभावित हुआ। सोमवार तड़के ही घनी धुंध का उतरना शुरू हो गया था। इससे सोमवार सुबह तक घनी धुंध हो गई। इससे सुबह के समय वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई। वाहन चालकों को सुरक्षित ड्राइविंग के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। धुंध का प्रभाव सुबह करीब 11 बजे तक रहा। धूप निकलने के बाद धुंध छटी तो लोगों ने थोड़ी राहत महसूस की, लेकिन हवाएं चलन की वजह से धूप ज्यादा असरकारक नहीं रही। शाम को सूरज ढलने के बाद फिर ठंड ने लोगों की कंपकंपी छुड़ानी शुरू कर दी। सोमवार सुबह घनी धुंध होने की वजह से लोग देर तक घरों में दुबके रहे। धुंध की वजह से मरीजों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Dec 2016 22:47:44 +0530</pubDate>
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                <title>धुंध-ठंड साथ-साथ, जनजीवन अस्त-व्यस्त</title>
                                    <description><![CDATA[वाहन चालकों ने हैडलाइटों का सहारा लिया ठंड से बाजार सुस्त, मजदूरों के हाथ खाली Bathinda, SachKahoon News:  सुबह होते ही पड़ी धुंध ने जन-जीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त करके रख दिया। हालांकि दोपहर होने तक धुंध काफी हद तक साफ हो गया था जिसके बाद जन जीवन सामान्य हो गया। सुबह के समय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/mist-cold-well-life-disrupted/article-629"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/01-37.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>वाहन चालकों ने हैडलाइटों का सहारा लिया</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>ठंड से बाजार सुस्त, मजदूरों के हाथ खाली</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>Bathinda, SachKahoon News:</strong>  सुबह होते ही पड़ी धुंध ने जन-जीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त करके रख दिया। हालांकि दोपहर होने तक धुंध काफी हद तक साफ हो गया था जिसके बाद जन जीवन सामान्य हो गया। सुबह के समय घना कोहरा होने के कारण सड़क मार्गों पर वाहन भी रेंग-रेंग कर चलते दिखाई दिए। हालांकि वाहन चालकों ने सावधानी के लिए हैडलाईटों का सहारा लिया। ठंड बढ़ने और धुंध पड़ने से बाजार में पूरी तरह सुस्ती दिखाई दी वहीं बढ़ती ठंड के कारण आसपास के गावों से यहां आने वाले मजदूरों को भी मजदूरी नहीं मिल पा रही है। एक ओर मजदूर पहले ही सरकार की नोटबंदी की मार से परेशान थे और अब कड़ाके की ठंड ने रही सही कसर पूर कर दी है जिसके कारण मजदूर वर्ग अब पूरी तरह से बेराजगार होकर रह गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
<strong>मूंगफली की मांग बढ़ी</strong><br />
गर्म कपड़ों की स्टालों पर दिखाई देने लगी है। भीड़ सर्दी का मौसम शुरू होते ही गर्म कपड़ों के साथ-साथ गजक, मूंगफली, रेवडी, तिल गजक आदि की मांग भी बढ़ने लगी है। इस प्रकार की आईटम बिक्री करने वाली दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ दिखाई देने लगी है। धुंध और सर्दी के चलते दुकानदारों ने भी गर्म कपड़ों की स्टालें लगानी शुरू कर दी हैं। गर्म कपड़ों के स्टालों से बाजार में कुछ गहमागमी होनी शुरू हो गई है। पिछले लगभग एक महीने से वीरान पड़े बाजारों में भी गर्म कपड़ों और गजक, मूंगफली की बिक्री ने कुछ राहत दी है।</p>
<p><strong>दुकानदारों ने जलाए अलाव</strong><br />
आलाव के सहारे समय पास कर रहे हैं दुकानदार दिनों दिन बढ़ती ठंड और पड़ रही धुंध ने बाजार में खासा असर डाला है। सर्दी के कारण जहां बाजार में सुबह 11 बजे से पहले ग्राहक नहीं पहुंच पाते हैं जिसके कारण दुकानदार भी अपनी दुकानें खोलकर ग्राहकों के इंतजार में बैठे रहते हैं। ठंड से सब्जी, स्पेयर पार्ट, मैकेनिक, फ्रिज, कपड़ा, आभूषण सहित अन्य सभी व्यापार प्रभावित हो रहे हैं। ठंड के मौसम में दुकानदार पूरा दिन अलाव लगाकर हाथ सेंकते रहते हैं।</p>
<p><strong>रेल समय सारिणी बिगड़ी</strong><br />
शनिवार को रेलवे मंडल से प्राप्त सूचना अनुसार लंबी दूरी की पंजाब मेल छह घंटे, धनबाद-फिरोजपुर पांच घंटे, जम्मूतवी-अहमदाबाद एक्सप्रेस साढ़े तीन घंटे, जनता एक्सप्रेस सवा घंटा, अहमदाबाद-जम्मूतवी एक घंटा, जम्मूतवी-बठिंडा एक्सप्रेस ढाई घंटे के साथ लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक लंबी दूरी की गाड़ियां अपने निर्धारित समय से घंटों की देरी से ट्रैक पर दौड़ती दिखाई पड़ीं। लंबी दूरी की रेलगाड़ियों के साथ ही 75 से डेढ़ सौ किलोमीटर के दायरे में चलने वाली पैसेंजर रेलगाड़ियां दो से ढाई घंटे की देरी से चलीं। रेलगाड़ियों की देरी से चलने का कारण ट्रैक व सिग्नल का नहीं दिखाई देना बताया जा रहा है। कमोवेश यही हाल सड़क पर वाहनों को दिखाई दिया।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/mist-cold-well-life-disrupted/article-629</link>
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                <pubDate>Sun, 25 Dec 2016 02:31:02 +0530</pubDate>
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