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                <title>Mustard - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Mustard RSS Feed</description>
                
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                <title>Mustard: खरखौदा मंड़ी में हुई अब तक सरसों की सबसे ज्यादा खरीद, 1272 मीट्रिक टन</title>
                                    <description><![CDATA[खरखौदा (सच कहूँ/हेमनट कुमार)। Kharkhoda News: उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि रबी सीजन के तहत जिले में सरसों की खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी है। प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार किसानों की उपज निर्धारित मानकों के अनुरूप खरीदी जा रही है और उनकी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। अब तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/one-thousand-two-hundred-and-seventy-two-metric-tonnes-of-mustard-was-purchased-in-kharkhauda-mandi/article-69555"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/mustard.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>खरखौदा (सच कहूँ/हेमनट कुमार)।</strong> Kharkhoda News: उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि रबी सीजन के तहत जिले में सरसों की खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी है। प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार किसानों की उपज निर्धारित मानकों के अनुरूप खरीदी जा रही है और उनकी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। अब तक जिले में कुल 4174.47 मीट्रिक टन सरसों की खरीद हो चुकी है। इसमें से 3892.8 मीट्रिक टन सरसों की लिफ्टिंग पूरी हो चुकी है और शेष लिफ्टिंग का कार्य तेज गति से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरसों की खरीद निर्धारित एमएसपी मूल्य 5950 पर की जा रही है। Kharkhoda News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि हरियाणा वेयरहाउस कॉरपोरेशन (एचडब्ल्यूसी) और खरखौदा व सोनीपत तथा हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति और विपणन संघ (हैफेड) की ओर से गन्नौर तथा गोहाना की मण्डियों में सरसों खरीदी गई। उन्होंने बताया कि मण्डियों में खरीद की गई 4174.47 मीट्रिक टन सरसों में से गन्नौर मण्डी में 1068 मीट्रिक टन, गोहाना मण्डी में 762 मीट्रिक टन, खरखौदा में 1272.4 मीट्रिक टन तथा सोनीपत मण्डी में 1072.07 मीट्र्रिक टन सरसों की आवक हुई है, जिसकी एचडब्ल्यूसी व हैफेड द्वारा खरीद की जा चुकी है। Kharkhoda News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Suspended: जिला कारागार के 2 सुरक्षा कर्मी सस्पेंड" href="http://10.0.0.122:1245/two-security-personnel-of-jind-district-jail-suspended/">Suspended: जिला कारागार के 2 सुरक्षा कर्मी सस्पेंड</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Apr 2025 18:39:41 +0530</pubDate>
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                <title>हकृवि के कृषि वैज्ञानिकों ने सरसों की दो उन्नत किस्म विकसित की</title>
                                    <description><![CDATA[पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ तेल की मात्रा भी मिलेगी अधिक | Hisar News हिसार (सच कहूँ/डॉ संदीप सिंहमार)। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि वैज्ञानिकों ने सरसों (Mustard) की बिजाई का मौसम आने से पहले दो नई उन्नत किस्में विकसित की है। भारत देश में रबी की महत्वपूर्ण फसल माने जाने वाली […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/agricultural-scientists-of-chaudhary-charan-singh-haryana-agricultural-university-have-developed-two-new-improved-varieties-of-mustard/article-52117"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/chaudhary-charan-singh-haryana-agricultural-university.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ तेल की मात्रा भी मिलेगी अधिक | Hisar News</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिसार (सच कहूँ/डॉ संदीप सिंहमार)।</strong> चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि वैज्ञानिकों ने सरसों (Mustard) की बिजाई का मौसम आने से पहले दो नई उन्नत किस्में विकसित की है। भारत देश में रबी की महत्वपूर्ण फसल माने जाने वाली सरसों की बिजाई सितंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू हो जाती है। उससे पहले कृषि वैज्ञानिक को विशेष कर तिलहन वैज्ञानिकों ने सरसों की नई किस्म ईजाद कर देश भर के किसानों को सही समय पर फायदा देने का काम किया है। इन नई किस्मों में आरएच 1424 व आरएच 1706 शामिल हैं। Hisar News</p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बलदेव राज कंबोज ने बताया कि सरसों की नई किस्मों से बिजाई करने से किसानों को पहले से बेहतर लाभ मिलेगा। इनकी बिजाई से जहां खेतों में सरसों की पैदावार में बढ़ोतरी होगी वहीं तेल की मात्रा भी पहले से अधिक मिलेगी तिलहन वैज्ञानिकों का मानना है कि औसतन रूप से सरसों की फसल के कुल उत्पादन का 40 फ़ीसदी तेल निकलता है। लेकिन इन किस्म के बिजाई करने से 40 प्रतिशत से अधिक तेल की मात्रा मिलेगी। Hisar News</p>
<h3 style="text-align:justify;">अनुसंधान के लिए सर्वश्रेष्ठ केंद्र अवार्ड मिला | Hisar News</h3>
<p style="text-align:justify;">हकृवि को सरसों अनुसंधान एवं विकास कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए सर्वश्रेष्ठ केन्द्र अवार्ड से भी नवाजा गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने बताया कि यह अवार्ड राया-सरसों अनुसंधान निदेशालय द्वारा जम्मू में आयोजित अखिल भारतीय राया एवं सरसों अनुसंधान कार्यकर्ताओं की वार्षिक बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के सहायक महानिदेशक तिलहन व दाल डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने प्रदान किया। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के तिलहन वैज्ञानिकों की टीम ने हाल ही में सरसों की आरएच 1424 व आरएच 1706 नामक दो नई उन्नत किस्में विकसित कर एक नया आयाम स्थापित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने इस उपलब्धि पर तिलहन वैज्ञानिक डॉ. राम अवतार सहित उनकी टीम को बधाई दी। साथ ही भविष्य में इसी प्रकार गुणवत्ताशील अनुसंधान जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान कृषि वैज्ञानिकों की ओर एक बड़ी उम्मीद से देखते रहते हैं। क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में सरसों की फसल की पैदावार बढ़ाने की बहुत जरूरत है। सरसों की फसल की उत्पादकता बढ़ने से एक तरफ जहां किसने की आमदनी में बढ़ोतरी होगी वहीं दूसरी तरफ तेल की खपत भी पूरी होगी। Hisar News</p>
<h3 style="text-align:justify;">2018 में विकसित की गई आरएच 725 भी हुई लोकप्रिय</h3>
<p style="text-align:justify;">अनुसंधान निदेशक डॉ. जीतराम शर्मा ने उम्मीद जताई कि सरसों की यह नई किस्में अपनी विशिष्ट विशेषताओं के कारण सरसों उत्पादक राज्यों में बहुत लोकप्रिय होंगी। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एस.के.पाहुजा ने बताया कि सरसों अनुभाग के वैज्ञानिकों की टीम अब तक राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर 21 किस्में विकसित कर चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में विकसित की गई किस्म आर.एच. 725 हरियाणा के अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली व बिहार राज्यों में बहुत लोकप्रिय है, जिसकी किसान 25 से 30 मण प्रति एकड़ आसानी से उपज प्राप्त कर रहे हैं। नई किस्मों से सरसों की पैदावार पहले से अधिक होगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">देश भर के बिक्री केदो पर उपलब्ध होगा बीज</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में विकसित की गई सरसों की दो नई किस्मों के अलावा पहले से विकसित चल रही सभी प्रकार की किस्मों के बीज विश्वविद्यालय के बिक्री केंद्र के साथ-साथ देशभर के सभी सरकारी बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध करवा दिए गए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">उत्पादन में वैश्विक स्तर पर तीसरे नंबर पर है भारत का स्थान | Hisar News</h3>
<p style="text-align:justify;">सरसों,राया/राई व तारामीरा रबी फसल की प्रमुख तिलहनी फसल है। इस फसल का एक तरफ जहां भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है वहीं सरसों के उत्पादन से मिलने वाले तेल से रसोई में भी तड़का लगता है। उत्तर प्रदेश, बिहार,राजस्थान,दिल्ली व हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में सरसों का तेल प्रमुखता से सब्जियां चटपटे पकवान बनाने के काम में लिया जाता है। सरसों उत्पादन और क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में चीन और कनाडा के बाद भारत का स्थान है। सरसों की खेती किसानों के लिए काफी लोकप्रिय खेती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल इस फसल की खेती कम सिंचाई और कम लागत में आसानी से हो जाती है। दूसरी तरफ सरसों की खेती से किसानों को अधिक लाभ भी होता है। साथ ही सरसों के तेल का डिमांड बाजारों में हमेशा बनी रहती है, क्योंकि सरसों के तेल के कई फायदे भी हैं। सरसों के तेल का इस्तेमाल भारत के लगभग हर एक घर में किया जाता है। वहीं सरसों का तेल बालों और त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। चर्म रोगों से छुटकारा के लिए आज भी चिकित्सा नारियल या सरसों का तेल लगाने की ही सलाह देते हैं। Hisar News</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत के मैदानी क्षेत्रों में सभी राज्यों में होता है उत्पादन, पर राजस्थान सबसे आगे</h3>
<p style="text-align:justify;">सरसों का उत्पादन भारत के लगभग सभी राज्यों में होता है, लेकिन सरसों उत्पादन के मामले में राजस्थान भारत के सभी राज्यों में सबसे आगे है। सरसों उत्पादन के मामले में राजस्थान देश के अन्य सभी राज्यों में आगे है। यहां की जलवायु और मिट्टी सरसों की खेती के लिए काफी अनुकूल है। इस वजह से सबसे अधिक सरसों का उत्पादन राजस्थान में होता है। कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग आंकड़ों के अनुसार देश में कुल उत्पादित होने वाले सरसों में राजस्थान में अकेले 46.7 प्रतिशत का उत्पादन होता है। राजस्थान सहित मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भारत का 88 फीसदी उत्पादन होता है। सेरसों के उत्पादन में मध्य प्रदेश की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="बबेले को राष्ट्रीय पुरस्कार, अकादमी द्वारा प्रकाशित 57 किताबों का लोकार्पण" href="http://10.0.0.122:1245/babele-gets-national-award-57-books-published-by-the-academy-released/">बबेले को राष्ट्रीय पुरस्कार, अकादमी द्वारा प्रकाशित 57 किताबों का लोकार्पण</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Sep 2023 17:52:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ई-खरीद पोर्टल खराब, दूसरे दिन भी नहीं हुई सरसों की खरीद</title>
                                    <description><![CDATA[किसान कम रेट पर सरसों की फसल बेचने को हो रहे मजबूर डी अधिकारी कह रहे: आजकल में हो जाएगा पोर्टल ठीक भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)। हरियाणा प्रदेश में सरसों की खरीद के दावे राज्य सरकार भले ही करती हो, परन्तु अनाज मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद ई-खरीद पोर्टल के खराब होने के चलते नहीं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/farmers-are-being-forced-to-sell-mustard-crop-at-low-rates/article-44659"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/mustard-2.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">किसान कम रेट पर सरसों की फसल बेचने को हो रहे मजबूर</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>डी अधिकारी कह रहे: आजकल में हो जाएगा पोर्टल ठीक</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)।</strong> हरियाणा प्रदेश में सरसों की खरीद के दावे राज्य सरकार भले ही करती हो, परन्तु अनाज मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद ई-खरीद पोर्टल के खराब होने के चलते नहीं हो पा रही है। जो खरीद हो रही है, वो ई-नेम के माध्यम से प्राईवेट स्तर पर पर्चियां काटकर की जा रही है। ई-नेम से होने वाली खरीद में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है। हरियाणा के कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल के गृह जिला भिवानी में भी ऐसा ही हाल है। यहां पर अभी तक सरसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य 5450 रुपए पर हैफेड ने एक भी दाना नहीं खरीदा है। जो भी खरीद हुई है, वह प्राईवेट स्तर पर हुई है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="सेना का चीता हेलीकॉप्टर अरुणाचल प्रदेश में दुर्घटनाग्रस्त" href="http://10.0.0.122:1245/army-cheetah-helicopter-crashes-in-arunachal-pradesh/">सेना का चीता हेलीकॉप्टर अरुणाचल प्रदेश में दुर्घटनाग्रस्त</a></p>
<p style="text-align:justify;">भिवानी के पालुवास गांव के किसान रविंद्र ने बताया कि वे 20 क्विंटल सरसो मंडी में लेकर आए है, परन्तु कोई भी सरकारी खरीद नहीं हो रही। इसके लिए उन्होंने मजबूरन उन्हें अपनी सरसों की फसल 5100 से 5200 के बीच खुले बाजार में बेचनी पड़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मंडी के आढ़ती रमेश ने बताया कि सरसों की खरीद को लेकर सरकार के बहुत दावे है, परन्तु हैफेड द्वारा अभी तक खरीद नहीं की जा रही। हैफेड ने कंडीशन लगा रखी है कि 8 प्रतिशत से कम नमी वाली सरसो ही खरीदेंगे तथा प्रति क्विंटल 38 केजी तेल निकलेगा, उसी सरसो को हैफेड खरीदेगी। उन्होंने कहा कि इन दिनों जो मार्केट में किसान सरसो ला रहा है, उसकी नमी 20 प्रतिशत तक है तथा तेल की मात्रा भी कम है। इसीलिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 5450 पर सरसो की फसल नहीं बिक पा रही है। उन्होंने बताया कि किसान समय पर बीज बोता है, जिससे फसल तैयार होती है। अब उसमें कितना तेल होगा, इस बात का निर्धारण किसान नहीं कर सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">वही गेट पास की पर्चियां बनाने वाले कंप्यूटर आॅपरेटर पवन ने बताया कि ई-खरीद पोर्टल की साईट ठीक से काम नहीं कर रही है। इसे ठीक करने का कार्य किया जा रहा है। आजकल में पोर्टल ठीक हो सकता है, उसके बाद ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हैफेड द्वारा खरीद के लिए टोकन जारी हो पाएंगे। हालांकि उन्होंने कहा कि खुले मार्केट में सरसो बेचने के लिए ई-नेम के टोकन जारी किए जा रहे है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तकनीकी कारणों से किसानों के नहीं बन रहे गेट पास: डिप्टी सैकेटरी</h3>
<p style="text-align:justify;">भिवानी अनाज मंडी के डिप्टी सैकेटरी प्रदीप कुमार ने बताया कि भिवानी अनाज मंडी में सरसों की खरीद शुरू हो चुकी है, परन्तु तकनीकी कारणों के चलते ई-खरीद पोर्टल से किसानों के गेट पास नहीं बन पा रहे है, क्योंकि पोर्टल में किसान का फोन नंबर तो सिस्टम उठा लेता है, परन्तु आधार कार्ड को इनवैलिड बोल देता है, जिसके कारण किसानों की सरसों की फसल के गेट पास नहीं बन पा रहे है। इसके लिए ई-नेम के माध्यम से किसानों के गेट पास बनाए जा रहे है। परन्तु ई-नेम के माध्यम से बने गेट पास से किसान अपनी फसल को खुले बाजार में मंडी के माध्यम से बेच पा रहा है। उन्होंने बताया कि ई-नेम के माध्यम से खुले बाजार में लगभग 20 किसानों की 250 क्विंटल की फसल की खरीद हुई है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Mar 2023 18:24:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>हरियाणा में सरसों की सरकारी खरीद शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[समर्थन मूल्य 5450 रुपये, किसान कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा में बुधवार से सरसों की सरकारी खरीद शुरू हो गई। बता दें कि पहले सरसों की सरकारी खरीद 28 मार्च से शुरू होनी थी, लेकिन किसान बड़ी संख्या में मंडियों में सरसों की फसल लेकर पहुंच रहे हैं। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/government-procurement-of-mustard-begins-in-haryana/article-44612"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/mustard1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">समर्थन मूल्य 5450 रुपये, किसान कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा में बुधवार से सरसों की सरकारी खरीद शुरू हो गई। बता दें कि पहले सरसों की सरकारी खरीद 28 मार्च से शुरू होनी थी, लेकिन किसान बड़ी संख्या में मंडियों में सरसों की फसल लेकर पहुंच रहे हैं। जिसके चलते सरकार ने 15 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद का फैसला लिया। इस बार हरियाणा सरकार ने सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5450 रुपये घोषित किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 400 ज्यादा है। सरसों की खरीद के लिए सरकार ने हरियाणा की 114 मंडियों में इंतजाम किए हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="मेटा से 10 हजार कर्मचारियों को निकाला जाएगा, जानें क्या है वजह" href="http://10.0.0.122:1245/10-thousand-employees-will-be-fired-from-meta/">मेटा से 10 हजार कर्मचारियों को निकाला जाएगा, जानें क्या है वजह</a></p>
<p style="text-align:justify;">वहीं किसानों का कहना है कि भले ही अनाज मंडी में सरसों की सरकारी खरीद शुरू हो गई हो, लेकिन उन्हें सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा, जिससे उन्हें काफी नुकसान हो रहा है। नूंह की पुन्हाना अनाज मंडी में निजी कंपनियां सरसों को 4200 से 5300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीद रही हैं। वहीं भिवानी में 4000 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसार से खरीद हुई। भिवानी में हालांकि दोपहर तक तो ई-खरीद पोर्टल ही नहीं चला, जिसके चलते किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि बीते साल सरसों की फसल निजी कंपनियों ने करीब 7000 से 7200 रुपये क्विंटल के हिसाब से खरीदी थी। किसानों ने कहना है कि हर साल बढ़ती महंगाई के चलते फसल पर लागत बढ़ रही है, लेकिन मुनाफा उन्हें ना के बराबर हो रहा है। जिससे उन पर आर्थिक संकट आन खड़ा हुआ है। इस बार चिंता की बात ये भी है कि पिछले साल की तुलना में इस बार ना तो सरसों की बंपर पैदावार हुई है और ना ही किसानों को भाव सही मिल पा रहा है। किसानों के मुताबिक सरकार को उनके बारे में कुछ सोचना चाहिए।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Mar 2023 18:09:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू करने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[ अखिल भारतीय किसान सभा ने मंडी समिति सचिव को सौंपा ज्ञापन हनुमानगढ़। सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय किसान सभा मक्कासर कमेटी ने शुक्रवार को कृषि उपज मंडी समिति सचिव सीएल वर्मा को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर किसान सभा सचिव ओम स्वामी ने कहा कि किसानों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/demand-to-start-procurement-of-mustard-on-support-price/article-44349"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/mustard.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;"> अखिल भारतीय किसान सभा ने मंडी समिति सचिव को सौंपा ज्ञापन</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगढ़।</strong> सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय किसान सभा मक्कासर कमेटी ने शुक्रवार को कृषि उपज मंडी समिति सचिव सीएल वर्मा को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर किसान सभा सचिव ओम स्वामी ने कहा कि किसानों को नहीं लगता कि सरकार सरसों खरीदने के मूड में है। सरकार एक अप्रेल से सरसों की खरीद शुरू करने की बात कह रही है लेकिन उससे पहले 70 प्रतिशत सरसों बाजार में आ जाएगी। क्योंकि वर्तमान में सरसों की कटाई का कार्य शुरू हो गया है। गेहूं खरीद में भी पिछले साल यही हुआ। हर बार सरकार यही करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">किसानों की मांग है कि बाजार में सरसों की फसल आते ही उसकी तुरंत प्रभाव से समर्थन मूल्य पर खरीद हो। क्योंकि सरकार की ओर से सरसों का 5450 रुपए प्रति क्विंटल भाव निर्धारित है जबकि धानमंडी में व्यापारी 4800 रुपए से 5100 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से सरसों की खरीद कर रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसलिए जल्द से जल्द सरसों की सरकारी खरीद शुरू की जाए। अन्यथा किसान सभा को मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। इस मौके पर किसान सभा अध्यक्ष बलदेव सिंह डोडावाले, उपाध्यक्ष बेअंतसिंह, सतनाम सिंह, विद्याधर शर्मा, सरपंच बलदेव सिंह, हेतराम बारुपाल, गुरमीत सिंह, वेद मक्कासर, दर्शनसिंह सहित कई किसान मौजूद थे।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Mar 2023 12:47:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बरसात से सरसों व गेहूं को फायदा: कृषि वैज्ञानिक</title>
                                    <description><![CDATA[फसल सिंचित करने के लिए डीजल का खर्चा बचाया दो-तीन दिन में साफ हो जाएगा मौसम : डॉ. देवीलाल भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)। हरियाणा प्रदेश में पिछले दो दिनों से हुई बरसात ने कृषि प्रधान राज्य हरियाणा के किसानों व उनकी फसलों के लिए सोना बरसाने का कार्य किया है। लंबे समय से बार-बार पश्चिमी विक्षोभ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/mustard-and-wheat-benefit-from-rain-agricultural-scientist/article-42956"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-01/mustard-and-wheat.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;">फसल सिंचित करने के लिए डीजल का खर्चा बचाया</li>
<li><strong>दो-तीन दिन में साफ हो जाएगा मौसम : डॉ. देवीलाल</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)।</strong> हरियाणा प्रदेश में पिछले दो दिनों से हुई बरसात ने कृषि प्रधान राज्य हरियाणा के किसानों व उनकी फसलों के लिए सोना बरसाने का कार्य किया है। लंबे समय से बार-बार पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव हरियाणा पर पड़ रहा था, परन्तु बरसात हल्की बूंदाबांदी में बदलकर रह जाती थी। लेकिन पिछले दो दिनों के दौरान हुई बरसात ने फसलों को सिंचित करके फसलों में बंपर उत्पादन का संदेश दिया है। विशेषकर हरियाणा की मुख्य खरीफ फसल सरसों व गेहूं के लिए यह बरसात वरदान साबित हुई है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पुलिस ने दबोचा चोर गिरोह" href="http://10.0.0.122:1245/abohar-police-busted-a-gang-of-thieves/">पुलिस ने दबोचा चोर गिरोह</a></p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा कृषि विज्ञान केंद्र भिवानी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवीलाल ने बताया कि पूर्वानुमान के अनुसार 29 व 30 जनवरी को मौसम विभाग ने जो बरसात बताई थी, उसका प्रभाव पूरे प्रदेश भर में नजर आया है। बीती रात्रि को दक्षिणी हरियाणा के रेगिस्तानी क्षेत्र भिवानी व दादरी में भी काफी बरसात हुई है। इस बरसात से जहां दिन के तापमान में कमी की है, वहीं रात के तापमान में बढ़ोत्तरी होगी, जो फसलों के लिए बेहतर है। किसानों का सिंचाई का खर्च भी इस बरसात के कारण बचा है। उन्होंने कहा कि दो-तीन दिन बाद मौसम साफ हो जाएगा तथा निकट भविष्य में कोई बरसात की आशंका नहीं है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसानों के खिले चेहरे</h3>
<p style="text-align:justify;">भिवानी जिला के किसान मांगेराम, बृजपाल, श्रीभगवान एवं ताली ने बताया कि पिछले दो दिनों से जो बरसात हुई है, उससे उनकी गेहूं व सरसों की फसल सिंचित हुई है तथा प्रति एकड़ 500 से 700 का डीजल बचा है, जो सिंचाई के लिए ट्यूव्बैल चलाने में प्रयोग होना था। इसके साथ ही बरसात का मीठा पानी उनकी फसल के लिए अमृत की तरह साबित होगा तथा फसलों का उत्पादन बढ़ेगा। हालांकि किसानों ने कहा कि कुछेक सब्जियों में पानी खड़ा होने से जरूर हल्का नुकसान हुआ है, परन्तु अधिकत्तर फसलों में इस बरसात का लाभ फसल उत्पादन बढाने में होगा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Jan 2023 09:08:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भारी मात्रा में सोयाबीन और सरसों बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के थोक और बड़े व्यवसायियों के यहां से बड़े पैमाने पर सोयाबीन और सरसों बरामद किये गये हैं तथा राज्य सरकार से इनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है । खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के सूत्रों ने मंगलवार को यहां बताया कि मध्य प्रदेश के गुना , देवास […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/huge-quantity-of-soybean-and-mustard-recovered-in-madhya-pradesh-and-maharashtra/article-32334"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/mustard.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> मध्य प्रदेश के थोक और बड़े व्यवसायियों के यहां से बड़े पैमाने पर सोयाबीन और सरसों बरामद किये गये हैं तथा राज्य सरकार से इनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है । खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के सूत्रों ने मंगलवार को यहां बताया कि मध्य प्रदेश के गुना , देवास और शाजापुर जिलों में निर्धारित भंडारण क्षमता से बहुत अधिक मात्रा में सोयाबीन तथा सरसों बरामद किया गया है। जमाखोरी के कारण सोयाबीन तेल का मूल्य बढ़ रहा था। महाराष्ट्र और राजस्थान में भारी मात्रा में खाद्य तेल बरामद किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">खाद्य तेल थोक व्यापारियों और बड़े चेन रिटेल आउटलेट से बरामद किये गये हैं। राज्य सरकारों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई करने को कहा गया है। केन्द्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय की ओर से खाद्य तेल और तिलहन के भंडारण की जांच के लिए प्रमुख राज्यों में टीम भेजी गयी है। महाराष्ट्र , राजस्थान , मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल , तेलंगाना , गुजरात और दिल्ली में टीमों को लगाया गया है। केन्द्र सरकार की ओर से खाद्य तेल के मूल्य को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाये गये हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Apr 2022 14:43:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>कैसे करें सरसों की फसल की देखभाल</title>
                                    <description><![CDATA[इन बातों का रखें ख्याल | Mustard crop सरसों (Mustard crop) की सिर्फ फसल बोने से ही किसान निश्चिंत नहीं हो जाता। फसल की बुआई के बाद भी उसे अनेक मुश्किलों से दो-चार होना पड़ता है। जैसे फसल में खरपतवार की समस्या, कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करना […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/how-to-take-care-of-mustard-crop/article-29742"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/mustard-crop.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong>इन बातों का रखें ख्याल | <span lang="en" xml:lang="en">Mustard crop</span></strong></h2>
<p style="text-align:justify;">सरसों (<span lang="en" xml:lang="en">Mustard crop</span>) की सिर्फ फसल बोने से ही किसान निश्चिंत नहीं हो जाता। फसल की बुआई के बाद भी उसे अनेक मुश्किलों से दो-चार होना पड़ता है। जैसे फसल में खरपतवार की समस्या, कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ता है। तब जाकर कहीं उसकी फसल पक कर तैयार होती है। तब जाकर किसान को अपने बोए का फल मिलता है। आईए हम जानते हैं कि किसान भाई सरसों की फसल की रेख-देख किस प्रकार करके अच्छी फसल ले सकता है। खेत में पौधों का उचित संरक्षण और खरपतवार निकालने के लिए 15-20 दिन बाद पौधे का विरलीकरण आवश्यक रूप से करना चाहिए। विरलीकरण द्वारा पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेमी. कर देनी चाहिए। जिससे पौधे की उचित खरपतवार हो सकें।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जल प्रबंधन में इन बातों का रखें ख्याल</strong></h3>
<p>सरसों की अच्छी फसल के लिए पहली सिंचाई खेत की नमी, फसल की जाति और मृदा प्रकार को देखते हुए 30 से 40 दिन के बीच फूल बनने की अवस्था पर ही करनी चाहिए। दूसरी सिंचाई फलियां बनते समय (60-70 दिन) करना लाभदायक होता है। जहां पानी की कमी हो या खारा पानी हो, वहां सिर्फ एक ही सिंचाई करना अच्छा रहता है। बंजर क्षेत्रों में सरसों की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए मानसून के दौरान खेत की अच्छी तरह दो-तीन बार जुताई करें एवं गोबर की खाद का प्रयोग करें। जिससे मृदा की जल धरण क्षमता में वृद्धि होती है। वाष्पीकरण द्वारा नमी का हृास रोकने के लिए अन्त: क्रियाएं करें एवं मृदा सतह पर जलवार का प्रयोग करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>खरपतवार नियंत्रण</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">खरपतवार फसल के साथ जल, पोषक तत्वों, स्थान एवं प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्ध करते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">खरपतवारों को खेत से निकालने और नमी संरक्षण के लिए बुआई के 25 से 30 दिन बाद निराई-गुड़ाई करनी चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;">खरपतवारों के कारण सरसों की उपज में 60 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">खरपतवार नियंत्रण के लिए खुरपी एवं हैण्ड हो का प्रयोग किया जाता है।</li>
<li style="text-align:justify;">रसायनिक खरपतवार नियंत्रण के लिए फ्रलुक्लोरेलिन (45 ईसी) की एक लीटर सक्रिय तत्व/हेक्टेयर (2.2 लीटर दवा) की दर से 800 लीटर पानी में मिलाकर बुआई के पूर्व छिड़काव कर भूमि में भली-भांति मिला देना चाहिए अथवा पेन्डीमिथेलीन (30 ईसी) की 1 लीटर सक्रिय तत्व (3.3 लीटर दवा को 800 लीटर पानी में मिलाकर बुआई के तुरन्त बाद (बुआई के 1-2 दिन के अन्दर) छिड़काव करना चाहिए।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कीट एवं रोग प्रबंधन</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सरसों की उपज को बढ़ाने तथा उसे टिकाऊ बनाने के मार्ग में नाशक जीवों और रोगों का प्रकोप एक प्रमुख समस्या है।</li>
<li style="text-align:justify;">इस फसल को कीटों एवं रोगों से काफी नुकसान पहुंचता है, जिससे इसकी उपज में काफी कमी हो जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">यदि समय रहते इन रोगों एवं कीटों का नियंत्रण कर लिया जाये तो सरसों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी की जा सकती है।</li>
<li style="text-align:justify;">चेंपा या माहू, आरामक्खी, चितकबरा कीट, लीफ माइनर, बिहार हेयरी केटरपिलर आदि सरसों के मुख्य नाशी कीट हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">काला धब्बा, सफेद रतुआ, मृदुरोमिल आसिता, चूर्णल आसिता एवं तना गलन आदि सरसों के मुख्य रोग हैं।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सरसों के प्रमुख कीट</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">चेंपा या माहू:-</li>
<li style="text-align:justify;">सरसों में माहू पंखहीन या पंखयुक्त हल्के स्लेटी या हरे रंग के 1.5-3.0 मिमी. लम्बे चुभने एवम चूसने मुखांग वाले छोटे कीट होते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इस कीट के शिशु एवं प्रौढ़ पौधों के कोमल तनों, पत्तियों, फूलों एवम् नई फलियों से रस चूसकर उसे कमजोर एवम छतिग्रस्त तो करते ही हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">साथ-साथ रस चूसते समय पत्तियों पर मधुस्राव भी करते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इस मधुस्राव पर काले कवक का प्रकोप हो जाता है तथा प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बाधित हो जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">इस कीट का प्रकोप दिसम्बर-जनवरी से लेकर मार्च तक बना रहता है।</li>
<li style="text-align:justify;">जब फसल में कम से कम 10 प्रतिशत पौधों की संख्या चेंपा से ग्रसित हो व 26-28 चेंपा/पौधा हो तब डाइमिथोएट (रोगोर) 30 ई सी या मोनोक्रोटोफास (न्यूवाक्रोन) 36 घुलनशील द्रव्य की 1 लीटर मात्रा को 600-800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करना चाहिए। यदि दुबारा से कीट का प्रकोप हो तो 15 दिन के अंतराल से पुन: छिड़काव करना चाहिए।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>इसके प्रबन्धन के लिये</strong></h3>
<ol>
<li style="text-align:justify;"> माहू के प्राकृतिक शत्रुओं का संरक्षण करना चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;"> प्रारम्भ में प्रकोपित शाखाओं को तोड़कर भूमि में गाड़ देना चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;"> माहू से फसल को बचाने के लिए कीट नाशी डाईमेथोएट 30 ई.सी.1 लीटर या मिथाइल ओ डेमेटान 25 ई.सी.1 लीटर या फेंटोथिओन 50 ई .सी.1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर 700-800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव सायंकाल करना चाहिए।</li>
</ol>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आरा मक्खी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इस कीट की रोकथाम हेतु मेलाथियान 50 ई.सी. मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर दुबारा छिड़काव करना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>पेन्टेड बग या चितकबरा कीट</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इस कीट की रोकथाम हेतु 20-25 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 1.5 प्रतिशत क्यूनालफास चूर्ण का छिड़काव करें।</li>
<li style="text-align:justify;">उग्र प्रकोप के समय मेलाथियान 50 ई.सी. की 500 मि.ली. मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें।</li>
</ul>
<p> </p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>बिहार हेयरी केटरपिलर</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इसकी रोकथाम हेतु मेलाथियान 50 ई.सी. की 1.0 लीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सरसों के प्रमुख रोग</strong></h3>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>1. सफेद रतुवा या श्वेत किट्ट</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">फसल के रोग के लक्षण दिखाई देने पर मैन्कोजेब (डाइथेन एम-45) या रिडोमिल एम.जेड. 72 डब्लू.पी. फफूंदनाशी के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव 15-15 दिन के अन्तर पर करने के सफेद रतुआ से बचाया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>2. काला धब्बा या पर्ण चित्ती</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इस रोग की रोकथाम हेतु आईप्रोडियॉन (रोवरॉल), मेन्कोजेब (डाइथेन एम-45) फफूंदनाशी के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव रोग के लक्षण दिखाई देने पर 15-15 दिन के से अधिकतम तीन छिड़काव करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>3. चूर्णिल आसिता</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">चूर्णिल आसिता रोग की रोकथाम हेतु घुलनशील सल्फर (0.2 प्रतिशत) या डिनोकाप (0.1 प्रतिशत) की वांछित मात्रा का घोल बनाकर रोग के लक्षण दिखाई देने पर छिड़काव करें। आवश्यकता होने पर 15 दिन बाद पुन: छिड़काव करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>4. मृदुरोमिल आसिता</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सफेद रतुआ रोग के प्रबंधन द्वारा इस रोग का भी नियंत्रण हो जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>5. तना लगन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कार्बेन्डाजिम (0.1 प्रतिशत) फफूंदीनाशक का छिड़काव दो बार फूल आने के समय 20 दिन के अन्तराल (बुआई के 50वें व 70वें दिन पर) पर करने से रोग का बचाव किया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>फसल कटाई</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सरसों की फसल फरवरी-मार्च तक पक जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">फसल की उचित पैदावार के लिए जब 75 प्रतिशत फलियां पीली हो जायें, तब ही फसल की कटाई करें।</li>
<li style="text-align:justify;">क्योंकि अधिकतर किस्मों में इस अवस्था के बाद बीज भार तथा तेल प्रतिशत में कमी हो जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">सरसों की फसल में दानों का बिखराव रोकने के लिए फसल की कटाई सुबह के समय करनी चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;">क्योंकि रात की ओस से सुबह के समय फलियां नम रहती है तथा बीज का बिखराव कम होता है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>फसल मड़ाई (गहाई)</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">जब बीजों में औसतन 12-20 प्रतिशत आर्द्रता प्रतिशत हो जाए</li>
<li style="text-align:justify;">तब फसल की गहाई करनी चाहिए। फसल की मड़ाई थै्रसर से ही करनी चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;">क्योंकि इससे बीज तथा भूसा अलग-अलग निकल जाते है,</li>
<li style="text-align:justify;">साथ ही साथ एक दिन में काफी मात्रा में सरसों की मड़ाई हो जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">बीज निकलने के बाद उनको साफ करके बोरों में भर लेने एवं 8-9 प्रतिशत नमी की अवस्था में सूखे स्थान पर भण्डारण करें।</li>
</ul>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/how-to-take-care-of-mustard-crop/article-29742</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Jan 2022 12:50:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान की सरसों को सरकारी रेट पर बेचने का प्रयास, दो गाड़िय़ां जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[जांच करते पुलिसकर्मी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/attempt-to-sell-rajasthans-mustard-at-government-rate-two-vehicles-seized/article-14818"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/mustard-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">पुलिस व मार्केट कमेटी अधिकारियों ने गाड़िय़ों को कब्जे में लिया (Mustard)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चरखी दादरी (सच कहूँ/इन्द्रवेश दुहन)।</strong> दादरी जिले में सरसों की सरकारी खरीद में लाखों रुपए का गोलमाल चल रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि राजस्थान से गाड़िय़ों में सरसों लाकर दादरी की मंडियों में बेची जा रही है। जबकि किसान अपनी बारी का इंतजार करता रहता है। (Mustard) भाकियू व किसानों ने गांव जावा के खरीद केंद्र पर राजस्थान नंबर की दो गाड़िय़ों को सरसों उतारते रोक लिया और पुलिस व मार्केट अधिकारियों को अवगत करवाया। हालांकि मंडी अधिकारियों ने दोनों गाड़िय़ों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। वहीं भाकियू ने मंडी अधिकारियों पर मिलीभगत कर सरकार को चूना लगाने का आरोप लगाया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हरियाणा में 4425 रुपए के सरकारी रेट पर सरसों की खरीद की जा रही है</h4>
<p style="text-align:justify;">जबकि आढ़ती व मंडी अधिकारियों की मिलीभगत के चलते राजस्थान से सस्ते दामों पर सरसों खरीदकर सरकारी रेट पर बेची जा रही है। ऐसा ही मामला गांव जावा के खरीद केन्द्र पर देखने को मिला। भाकियू जिलाध्यक्ष जगबीर घसोला की अगुवाई में किसानों ने दोनों गाड़िय़ों को पकड़ते हुए मंडी अधिकारियों व पुलिस को सूचित किया। पुलिस व मंडी अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर दोनों गाड़िय़ों को जब्त कर जांच शुरू कर दी है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">भाकियू जिलाध्यक्ष जगबीर घसोला ने कहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">मंडी अधिकारियों की मिलीभगत पर मंडियों में कालाबाजरी करते हुए सरकार को लाखों का चूना लगाया जा रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">अगर इस मामले की उच्च स्तर पर जांच हो तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।</li>
<li style="text-align:justify;">वहीं मार्केट कमेटी सचिव सुरेश खोखर सूचना मिलने पर मंडी में पहुंचे हैं।</li>
<li style="text-align:justify;"> राजस्थान से आई गाड़िय़ों के दस्तावेज चैक किए जा रहे हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">अगर कुछ गड़बड़ी मिलती है तो कड़ी कार्रवाई करेंगे।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">वहीं झोझू पुलिस थाना प्रभारी अनूप सिंह ने बताया कि दोनों गाड़िय़ों में 123 क्विंटल सरसों मिली है। दस्तावेज चैक कर रहे हैं। पुलिस द्वारा जांच कर कार्रवाई की जाएगी।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/attempt-to-sell-rajasthans-mustard-at-government-rate-two-vehicles-seized/article-14818</link>
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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2020 16:35:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा की मंडियों में बिक रही राजस्थान की सरसों</title>
                                    <description><![CDATA[ पुलिस थाने में खड़ा सरसों से भरा ट्रक।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/mustard-of-rajasthan-is-being-sold-in-the-mandis-of-haryana/article-14621"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/mustard.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">प्रशासन ने भरा ट्रक पकड़ा (Mustard)</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>पुलिस ने चालक व अन्य को हिरासत में लिया</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चरखी दादरी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान से बड़ी मात्रा में ट्रकों में लादकर लाई गई सरसों को हरियाणा की मंडियों में सरकारी खरीद पर बेचा जा रहा है। ऐसा ही एक मामला चरखी दादरी में भी सामने आया है। राजस्थान से सरसों भरकर दादरी के गांव झिंझर के खरीद केन्द्र पर बेचने के लिए जा रहा एक ट्रक को प्रशासन व पुलिस की टीम ने पकड़ा है। सरसों से भरा ट्रक पर चुरू से दिल्ली तक का प्रमिशन लेटर भी चस्पा हुआ था। बौंद कलां थाना पुलिस ने ट्रक को जब्त करते हुए चालक व एक अन्य को हिरासत में लिया है। उधर भाकियू पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे और मंडी अधिकारियों के साथ आढ़तियों की मिलीभगत कर लाखों रुपए का चूना लगाने का आरोप लगाया।</p>
<h3>ट्रक को बौंद कलां पुलिस थाना लाया गया</h3>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि प्रशासन को सूचना मिली थी कि राजस्थान से ट्रकों में भरकर सरसों यहां की मंडियों में लाकर सरकारी खरीद पर बेची जा रही है। सूचना के आधार पर प्रशासन व पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए गांव भागेश्वरी के पास से सरसों से भरे राजस्थान नंबर ट्रक को काबू किया। ट्रक को बौंद कलां पुलिस थाना लाया गया। पुलिस की मानें तो ट्रक में 200 क्विंटल से भी ज्यादा सरसों भरी हुई थी। इसी दौरान भाकियू जिलाध्यक्ष जगबीर घसोला सहित कई पदाधिकारी भी थाना पहुंचे।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">भाकियू पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सरसों की कालाबाजारी में मार्केट कमेटी अधिकारियों के साथ-साथ आढ़तियों की भी मिलीभगत है।</li>
<li style="text-align:justify;">राजस्थान से आ रही सरसों को यहां की मंडियों में बेचने के नाम पर लाखों रुपए का गोलमाल चल रहा है</li>
<li style="text-align:justify;">साथ ही मार्केट फीस की चोरी की जा रही है।</li>
<li style="text-align:justify;">वहीं डीसी श्यामलाल पूनिया व एसपी बलवान राणा ने पुलिस थाना पहुंचकर सरसों से भरे ट्रक का निरीक्षण किया।</li>
<li style="text-align:justify;">डीसी श्यामलाल पूनिया ने कहा कि जो कार्रवाई बनेगी की जाएगी।</li>
<li style="text-align:justify;">वहीं एसपी बलवान राणा ने बताया कि इस मामले में पुलिस द्वारा जो भी संलिप्त पाएंगे, एफआईआर दर्ज की जाएगी।</li>
</ul>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/mustard-of-rajasthan-is-being-sold-in-the-mandis-of-haryana/article-14621</link>
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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2020 18:21:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों को चना एवं सरसों का 194 करोड़ का भुगतान</title>
                                    <description><![CDATA[22 हजार 395 किसानों के खातों में जमा हुई राशि जयपुर, सच कहूँ न्यूज। राज्य में समर्थन मूल्य पर 20 अप्रेल तक सरसों एवं चना उपज का बेचान करने (Mustard) वाले 22 हजार 395 किसानों को 194 करोड़ 32 लाख रुपये का भुगतान सीधे उनके पंजीकृत बैंक खातों में कर दिया गया है। जिसमें से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/mustard/article-8733"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/mustard.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">22 हजार 395 किसानों के खातों में जमा हुई राशि</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर, सच कहूँ न्यूज।</strong> राज्य में समर्थन मूल्य पर 20 अप्रेल तक सरसों एवं चना उपज का बेचान करने (Mustard) वाले 22 हजार 395 किसानों को 194 करोड़ 32 लाख रुपये का भुगतान सीधे उनके पंजीकृत बैंक खातों में कर दिया गया है। जिसमें से 153.75 करोड़ रुपएं सरसों के पेटे तथा 28.19 करोड़ रुपएं चना के पेटे भुगतान किये गये है। यह जानकारी राजफैड के प्रबंध निदेशक ने गुरूवार को दी। उन्होंने बताया कि उपज बेचने वाले सभी किसान भुगतान के लिए सहीं बैंक खाता नम्बर अंकित करें ताकि भुगतान के दौरान किसी प्रकार की समस्या नही आये।</p>
<h2>अपना सही बैंक खाता अंकित करें किसान</h2>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन में किसानों से 93 हजार 326 मी.टन सरसों, चना, गेहूं की खरीद (Mustard) राजफैड द्वारा की गई है। उन्होंने बताया कि 25 अप्रेल अपराह्न तक 45 हजार 537 किसानों से 398.22 करोड़ की उपज खरीदी गई है। उन्होंने बताया कि 30 अप्रेल तक उपज बेचान करने वाले किसानों को मई के प्रथम सप्ताह में भुगतान की प्रक्रिया सम्पन्न होगी। किसानों को उनकी उपज के बेचान भुगतान उनके पंजीकृत बैंक खातों में हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि टोंक जिले के 3 हजार 153 किसानों को 23.97 करोड़ रुपएं, भरतपुर जिले के 1 हजार 914 किसानों को 11.30 करोड़ रुपए गंगानगर जिले के 1 हजार 462 किसानों को 14.80 करोड़ रुपए का सहित अन्य जिलों के किसानों को उनके खाते में भुगतान कर दिया गया है। प्रबंध निदेशक ने बताया कि राज्य में कोटा संभाग में 15 मार्च से तथा प्रदेश के अन्य संभागों में 1अप्रेल से किसानों से समर्थन मूल्य पर सरसों, चना एवं गेहूं की खरीद 527 केन्द्रों पर की जा रही है। सरसों 4200 रुपएं प्रति क्विटल, चना 4620 रुपएं प्रति क्विटल एवं गेहंू 1840 रुपएं प्रति क्विटल से खरीदा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि सरसों के लिए 3 लाख 13 हजार 713, चने के लिए 1 लाख 29 हजार 603 एवं गेहूं के लिए 1 हजार 882 सहित कुल 4 लाख 43 हजार 316 किसानों ने उपज बेचान के लिए पंजीकरण कराया है। जिसमें से 90 हजार 262 किसानों को दिनांक आवंटित की जा चुकी है। खरीद जून माह तक चलेगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कोटा संभाग में 70 करोड़ का भुगतान</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रबंध निदेशक ने बताया कि 20 अप्रेल तक सरसों एवं चना का बेचान करने वाले कोटा संभाग के 8 हजार 916 किसानों को 70.35 करोड़ का भुगतान उनके पंजीकृत खातों में कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि कोटा के 2 हजार 355 किसानों को 17 करोड़, बारां के 2 हजार 826 किसानों को 23.43 करोड़, झालावाड़ के 2 हजार 322 किसानों को 17.92 करोड़ एवं बून्दी जिले के 1 हजार 413 किसानों को 12 करोड़ रुपयें का भुगतान किया गया है।</p>
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                <pubDate>Fri, 26 Apr 2019 13:18:08 +0530</pubDate>
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