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                <title>NATO - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Nato: नाटो का विस्तार और यूरोप की शांति</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) Nato की शिखर बैठक बिना किसी बड़ी उपलब्धि के समाप्त हो गई। बैठक में यूक्रेन की सदस्यता का मामला एक बार फिर अधरझूल में अटक गया। मंगलवार को यूरोपीय देश लिथुआनिया की राजधानी विनियस में जब दुनिया के इस सबसे बड़े सैन्य संगठन के नेता एकत्रित हुए तब उनके सामने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/nato-expansion-and-the-peace-of-europe/article-50023"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/nato.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) Nato की शिखर बैठक बिना किसी बड़ी उपलब्धि के समाप्त हो गई। बैठक में यूक्रेन की सदस्यता का मामला एक बार फिर अधरझूल में अटक गया। मंगलवार को यूरोपीय देश लिथुआनिया की राजधानी विनियस में जब दुनिया के इस सबसे बड़े सैन्य संगठन के नेता एकत्रित हुए तब उनके सामने सबसे अहम सवाल यूक्रेन को नाटो में शामिल किए जाने का था। इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध और उससे उत्पन्न परिस्थितियों से निबटने का सवाल भी उनके सामने था। लेकिन दोनों ही सवालों पर वैश्विक नेता किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाए।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल मैड्रिड शिखर बैठक में नाटो नेताओं ने रूस को अपने-अपने देशों की सुरक्षा के लिए प्रत्यक्ष खतरा बताते हुए अगले दशक के लिए ब्लू प्रिंट जारी किया था। अनुमान था कि लिथुआनिया में रूस की आक्रामकता के खिलाफ नाटो नेता कुछ ठोस कदम उठा पाएंगे। बैठक में नाटो के 31 सदस्य देशों के अलावा आॅस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ के नेता भी उपस्थित थे। Nato</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में स्वीडन और यूक्रेन की सदस्यता का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। स्वीडन की सदस्यता के कट्टर विरोधी तुर्किये द्वारा अपनी आपत्तियां वापिस लिये जाने के बाद स्वीडन की सदस्यता का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन सदस्य देशों के बीच यूक्रेन की सदस्यता को लेकर आम-सहमति नहीं बन पाई। ब्रिटेन ने जरूर यूक्रेन की सदस्यता का समर्थन किया। र्ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने नाटो सदस्यता की शर्तों को पूरा किए बिना ही कीव को फास्ट ट्रैक सदस्यता प्राप्त करने के लिए दबाव डाला।</p>
<h3>शर्तें पूरी होंगी तो यूक्रेन को समूह में शामिल किया जा सकेगा | Nato</h3>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर अधिकतर नाटो देश यह कहते हुए दिखाई दिए कि युद्ध समाप्त होने तक यूक्रेन इसमें शामिल नहीं हो सकता है। नाटो महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने कहा कि नाटो नेताओं के बीच इस बात को लेकर समहति बनी है कि जब सहयोगी देशों में रजामंदी होगी और शर्तें पूरी होंगी तो यूक्रेन को समूह में शामिल किया जा सकेगा। नाटो के निर्णय से असतुष्ट यूक्रेनी राष्टÑपति जेलेंस्की ने इसे ‘बेतुका’ निर्णय बताया। सच तो यह है कि नाटो का मानना है कि जेलेंस्की पहले रूस के खिलाफ युद्ध को जीते, क्योंकि जब यूक्रेन अस्तित्व में रहेगा तभी सदस्यता को लेकर बात आगे बढ़ाई जा सकती है। Nato</p>
<p style="text-align:justify;">2004 में लिथुआनिया के गठबंधन में शामिल होने के बाद यह पहला अवसर था, जब लिथुआनिया में इस तरह की हाई-प्रोफाइल अतंरराष्ट्रीय बैठक हुई। बैठक के मद्देनजर लिथुआनिया में सुरक्षा के तकड़े प्रबंध किए गए थे। अमेरिका निर्मित अब्राम्स टैंक, जर्मन तेंदुए और मार्डर्स तथा पैट्रियट मिसाइल डिफीस के अलावा अन्य सुरक्षा उपकरणों का सहारा लिया गया । पूरी राजधानी को अभेद्य किले में बदल दिया गया था। सड़कों पर बख्तरबंद वाहन गस्त करते दिखाई दिए। नाटो के जेट आकाश से लिथुआनिया पर नजर बनाए हुए थे। लिथुआनिया ने अपने इतिहास सुरक्षा के इतने कड़े इतजाम कभी नहीं किए होंगे जितने इस नाटो बैठक के लिए किए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस के अहम सहयोगी बेलारूस की सीमा से कुछ ही दूरी पर होने वाली नाटो नेताओं की इस बैठक पर रूस, चीन और उत्तर कोरिया सहित दुनिया भर के देशों की निगाहें लगी थी। ऐसे में सबसे अहम सवाल यह था कि इस हाई प्रोफाइल बैठक में यूरोप को परमाणु युद्ध की विभीषका से बचाने के लिए कोई बुद्विमतापूर्ण पहल होगी या हर बार की तरह यह बैठक भी भाषणों और घोषणा-पत्रों तक ही सिमट कर रह जाएगी। लिथुआनिया, जहां नाटो की बैठक हुई कभी सोवियत यूनियन का हिस्सा था। अब नाटो का सदस्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">एस्टोनिया और लातविया भी 2004 से नाटो और यूरोपीय यूनियन के सदस्य हैं। रूस इनके खिलाफ रहा है। अब जिस तरह से लिथुआनिया ने बैठक की मेजबानी कर रूस के खिलाफ ताल ठोकी है। क्या उस पर पुतिन चुप रहेंगे। महज 28 लाख की आबादी वाला लिथुआनिया बाल्टिक देशों में सबसे छोटा होने के बावजूद प्रति व्यक्ति आय के आधार पर यूक्रेन को सैन्य सहायता देने वालों में शीर्ष पर है। वह यूक्रेन को नाटो में शामिल करने का कट्टर समर्थक रहा है। लिथुआनिया के इस दुस्साहस पर पुतिन किस तरह का रिएक्ट करेंगे। यह देखना भी काफी दिलचस्प होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ के विस्तार के कथित खतरे के जवाब में संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और कुछ पश्चिमी यूरोपीय देशों ने 1949 में उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन ( नाटो ) का गठन किया था। स्थापना के समय इसमें 12 सदस्य थे। पिछली शिखर बैठक तक इसके सदस्य देशों की संख्या 30 थी। हाल ही में फिनलैंड के शामिल हो जाने के बाद इसके सदस्यों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है। Nato</p>
<p style="text-align:justify;">नाटो सदस्य के रूप में यह फिनलैंड का पहला शिखर सम्मेलन था। नाटो चार्टर का अनुच्छेद 5 इस सैन्य गठबंधन का मुख्य आधार है जो सामूहिक रक्षा की गांरटी देता है। यह नाटो के सदस्य देशों को एक-दूसरे की रक्षा करने और गठबंधन के भीतर एकजुटता की भावना स्थापित करने के लिए बाध्य करता है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो अगर नाटो के सदस्य देश पर गैर सदस्य देश द्वारा हमला किया जाता है, तो सभी सदस्य इसे अपने पर किया गया हमला मानेंगे और सामूहिक रूप से जवाब देंगे। अनुच्छेद 5 यूक्रेन जैसे गैर-सदस्य देश पर लागू नहीं होता है। Nato</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, 1992 में सोवियत यूनियन के टूटने के बाद अमेरिका और उसके यूरोपीय दोस्तों द्वारा निर्मित इस सैन्य गठबंधन का महत्व कम होने लगा था। सामरिक मामलों के जानकार यहां तक कहने लगे थे कि अगर आने वाले वक्त में नाटो यूरोप में कोई बड़ी भूमिका नहीं निभाता है, तो इसकी अहमियत समाप्त हो जाएगी। लेकिन साल 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया पर कब्जा किए जाने के बाद हालात बदल गए। अब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जिस तरह से यूक्रेन पर हमला कर अमेरिका और यूरोप को चुनौती दी है, उसके बाद नाटो पुन: 1992 से पहले वाली स्थिति में आ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछली बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूरोप में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति में भारी वृद्धि की घोषणा की जिसमें पोलैंड में एक स्थायी अमेरिकी बेस, स्पेन में दो नौसेना विध्वंसक बेस और दो एफ-35 स्क्वाड्रन शामिल है। नि:संदेह, बाइडेन के निर्णय और अब स्वीडन के आने से यूरोप में नाटो की शक्ति में विस्तार होगा। लेकिन शक्ति विस्तार की लिप्सा में यूरोप की शांति का क्या होगा। इस यक्ष प्रश्न पर नाटो नेताओं को विचार करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. एन.के सोमानी, अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2023 14:56:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी के रूप में अफगानिस्तान की यथास्थिति रद्द करेंगे बिडेन</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन ने अमेरिकी कांग्रेस को लिखे एक पत्र में कहा है कि वह अफगानिस्तान की एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी के रूप में यथास्थिति रद्द कर देंगे। बिडेन ने हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी को लिखे पत्र में कहा, “ वर्ष1961 के विदेशी सहायता अधिनियम की धारा 517 के संशोधन (22 यूएससी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/biden-to-rescind-afghanistan-status-quo-as-major-non-nato-ally/article-35248"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/joe-biden.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन ने अमेरिकी कांग्रेस को लिखे एक पत्र में कहा है कि वह अफगानिस्तान की एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी के रूप में यथास्थिति रद्द कर देंगे। बिडेन ने हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी को लिखे पत्र में कहा, “ वर्ष1961 के विदेशी सहायता अधिनियम की धारा 517 के संशोधन (22 यूएससी 2321के) के अनुसार, मैं प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी के रूप में अफगानिस्तान की यथास्थिति को रद्द करने के अपने इरादे को व्यक्त कर रहा हूं।”</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2012 में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने अफगानिस्तान को एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी करार दिया था, जिससे दोनों देशों के लिए रक्षा और आर्थिक संबंध बनाए रखने का रास्ता साफ हो गया था। अफगानिस्तान पर नवीनतम निर्णय के साथ अब अमेरिका के 18 प्रमुख गैर-नाटो सहयोगियों में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, ब्राजील, कोलंबिया, मिस्र, इज़राइल, जापान, जॉर्डन, कुवैत, मोरक्को, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, फिलीपींस, कतर, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और ट्यूनीशिया होंगे।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jul 2022 10:15:00 +0530</pubDate>
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                <title>जी7, नाटो के सम्मेलन में शामिल होने का आमंत्रण स्वीकार: जेलेंस्की</title>
                                    <description><![CDATA[कीव (सच कहूँ न्यूज)। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि उन्हें जर्मनी में आयोजित हो रहे जी7 शिखर सम्मेलन और मैड्रिड में नाटो (उत्तर अटंलाटिक संधि संगठन) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसे उन्होंने स्वीकार लिया है। जेलेंस्की ने बुधवार देर रात को ट्वीट करते हुए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/accepted-invitation-to-attend-g7-nato-summit-zeleny/article-34574"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/volodymyr-zelenskyy1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कीव (सच कहूँ न्यूज)।</strong> यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि उन्हें जर्मनी में आयोजित हो रहे जी7 शिखर सम्मेलन और मैड्रिड में नाटो (उत्तर अटंलाटिक संधि संगठन) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसे उन्होंने स्वीकार लिया है। जेलेंस्की ने बुधवार देर रात को ट्वीट करते हुए कहा, ‘‘जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज की तरफ से जी7 शिखर सम्मेलन और नाटो के महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग की तरफ से नाटो के शिखर सम्मेलन में शामिल होने का आमंत्रण मिला है, जिसे मैं पूरे दिल से स्वीकार करता हूं।’’</p>
<p style="text-align:justify;">द न्यूयॉर्क टाइम्स में पहले प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नेतृत्व को डर है कि अमेरिका में लोग यूक्रेन में जारी संघर्ष के प्रति अपनी रूचि खो देंगे और साथ ही इसके लिए यूरोपीय संगठन के एकजुट होने के आसार भी कम हो जाएंगे। सम्मेलनों में जेलेंस्की के शामिल होने से शायद यूक्रेन में मौजूदा स्थिति पर लोगों की रूचि बनी रहेगी।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jun 2022 10:40:07 +0530</pubDate>
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                <title>बाल्टिक में नाटो ने शुरू किया सैन्य अभ्यास</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रसेल्स (एजेंसी)। उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने बाल्टिक में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया। जानकारी के अनुसार, ‘हेजहोग’ नामक अभ्यास में फिनलैंड और स्वीडन सहित 10 देश शामिल हैं, जिन्होंने कुछ दिनों के भीतर गठबंधन में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आवेदन करने के अपने निर्णयों की घोषणा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/nato-begins-military-exercises-in-the-baltic/article-33514"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/11th-day-of-war.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्रसेल्स (एजेंसी)।</strong> उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने बाल्टिक में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया। जानकारी के अनुसार, ‘हेजहोग’ नामक अभ्यास में फिनलैंड और स्वीडन सहित 10 देश शामिल हैं, जिन्होंने कुछ दिनों के भीतर गठबंधन में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आवेदन करने के अपने निर्णयों की घोषणा की है। एस्टोनिया में आयोजित हो रहा यह अभ्यास तीन जून तक चलेगा और इसकी व्यवस्था यूक्रेन पर रूसी सैन्य कार्रवाई पर पहले की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि फिनलैंड या स्वीडन के नाटो में शामिल होने से रूस को कोई समस्या नहीं है, लेकिन उसकी सीमा के इतने करीब एक सैन्य विस्तार उनसे प्रतिक्रिया की मांग करेगा। एस्टोनिया में इस अभ्यास में लगभग 15,000 सैनिक शामिल हैं, जो इसे 1991 के बाद से देश में आयोजित सबसे बड़े सैन्य अभ्यासों में से एक है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 May 2022 12:36:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाटो में जाने के लिए फिनलैंड और स्वीडन असमंजस में</title>
                                    <description><![CDATA[हेलेंस्की (एजेंसी)। फिनलैंड और स्वीडन की संसद सोमवार को उन सरकारी रिपोर्टों पर चर्चा करेगी, जो नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) में सदस्यता प्राप्त करने के उनके द्वारा भेजे गए आवेदनों को मंजूरी देने की प्रक्रिया से संबंधित है। फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मरीन नाटो में फिनलैंड के शामिल होने को लेकर रिपोर्ट पेश करेंगी, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/finland-and-sweden-in-dilemma-on-whether-to-join-nato/article-33465"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/finland-sweden.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हेलेंस्की (एजेंसी)।</strong> फिनलैंड और स्वीडन की संसद सोमवार को उन सरकारी रिपोर्टों पर चर्चा करेगी, जो नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) में सदस्यता प्राप्त करने के उनके द्वारा भेजे गए आवेदनों को मंजूरी देने की प्रक्रिया से संबंधित है। फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मरीन नाटो में फिनलैंड के शामिल होने को लेकर रिपोर्ट पेश करेंगी, जिसके बाद संसद में बहस होगी। फिनलैंड की संसद ने एक बयान में कहा है, ‘यदि बहस में किसी ऐसे प्रस्ताव की पेशकश की जाती है, जो रिपोर्ट में दी गई राय से अलग है और समर्थित है, तो बहस के अंत में इन पर मतदान कराया जा सकता है।’ वहीं, स्वीडिश संसद सुरक्षा नीति भी रिपोर्ट पर चर्चा करेगी, जिसे स्वीडिश प्रधानमंत्री मैग्डेलेना एंडरसन द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वीडन की संसद ने कहा है, ‘हर पार्टी से एक-एक प्रतिनिधि को बहस में भाग लेने की अनुमति होगी, जो दस मिनट की समयावधि से अधिक नहीं होगी।’ फिनलैंड के विशेषज्ञों को बहस के मंगलवार तक चलने की उम्मीद है, जबकि स्वीडिश अखबार एक्सप्रेसन ने बताया कि संसद में बहस के तुरंत बाद स्वीडिश कैबिनेट के प्रमुख सोमवार को एक विशेष सरकारी बैठक बुलाएंगे, जहां नाटो की सदस्यता पर निर्णय लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 24 फरवरी को रूस के द्वारा यूक्रेन में एक विशेष सैन्य अभियान के शुरू करने के बाद से फिनलैंड और स्वीडन नाटो में शामिल होने की योजना पर विचार कर रहे हैं। मार्च में, नाटो महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि अगर वे नाटो में शामिल होने का फैसला कर लेते हैं, तो उनके आवेदनों पर तेजी से काम किया जाएगा।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 May 2022 11:13:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वीडन, फिनलैंड के नाटो में शामिल होने के पक्ष में कनाडा : ट्रूडो</title>
                                    <description><![CDATA[टोरंटो। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने गुरुवार को कहा कि ओटावा स्वीडन और फिनलैंड के नाटो में शामिल होने के पक्ष में है। ट्रूडो ने गुरुवार को ओटावा में संवाददाताओं से कहा, “स्वीडन और फिनलैंड के नाटो में शामिल होने की बातचीत चल रही है, और कनाडा निश्चित रूप से इसका बहुत समर्थन करता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/canada-in-favor-of-sweden-finland-joining-nato-trudeau/article-32618"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/justin-trudeau.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>टोरंटो।</strong> कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने गुरुवार को कहा कि ओटावा स्वीडन और फिनलैंड के नाटो में शामिल होने के पक्ष में है। ट्रूडो ने गुरुवार को ओटावा में संवाददाताओं से कहा, “स्वीडन और फिनलैंड के नाटो में शामिल होने की बातचीत चल रही है, और कनाडा निश्चित रूप से इसका बहुत समर्थन करता है।” पिछले हफ्ते, अमेरिकी मीडिया ने बताया कि फिनलैंड ने स्वीडन को नाटो में सदस्यता के लिए संयुक्त रूप से आवेदन दाखिल करने के लिए आमंत्रित किया था। एक सांसद ने गुरुवार को कहा कि हेलसिंकी आने वाले हफ्तों में सदस्यता के लिए आवेदन दाखिल करेगा। बुधवार को रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा कि रूस ने स्वीडन और फ़िनलैंड को नाटो में शामिल होने के परिणामों के बारे में चेतावनी दी थी।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Apr 2022 10:05:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिडेन ने कतर को प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी नामित किया</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को भेजे एक ज्ञापन में कतर को अमेरिका के एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी के रूप में नामित किया है। ज्ञापन ने कहा गया है कि अमेरिका के संविधान और कानूनों के मुताबिक राष्ट्रपति के रूप में प्रदत्त अधिकारों और 1961 के विदेशी सहायता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/biden-names-qatar-a-major-non-nato-ally/article-31397"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/biden1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन (एजेंसी)।</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को भेजे एक ज्ञापन में कतर को अमेरिका के एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी के रूप में नामित किया है। ज्ञापन ने कहा गया है कि अमेरिका के संविधान और कानूनों के मुताबिक राष्ट्रपति के रूप में प्रदत्त अधिकारों और 1961 के विदेशी सहायता अधिनियम की धारा 517 के तहत मैं अधिनियम और शस्त्र निर्यात नियंत्रण अधिनियम के प्रयोजनों के लिए कतर को अमेरिका के एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी के रूप में नामित करता हूँ।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/news-brief/biden-names-qatar-a-major-non-nato-ally/article-31397</link>
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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 13:07:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाटो में विलय के लिए तैयार हुआ फिनलैंड</title>
                                    <description><![CDATA[मॉस्को। यूक्रेन में रूसी सैन्य अभियान के कारण फिनलैंड नाटो में अपने संभावित विलय पर चर्चा के लिए तैयार हो गया है। इस संबंध में फिनलैंड के राष्ट्रपति साउली निनिस्टो ने कहा है कि यूक्रेन में रूसी सैन्य आक्रमण के बाद पूर्वी और उत्तरी यूरोप की स्थिति में काफी बदलाव आया है जिसकी वजह से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/finland-ready-to-merge-with-nato/article-31291"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/finland-nato.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मॉस्को।</strong> यूक्रेन में रूसी सैन्य अभियान के कारण फिनलैंड नाटो में अपने संभावित विलय पर चर्चा के लिए तैयार हो गया है। इस संबंध में फिनलैंड के राष्ट्रपति साउली निनिस्टो ने कहा है कि यूक्रेन में रूसी सैन्य आक्रमण के बाद पूर्वी और उत्तरी यूरोप की स्थिति में काफी बदलाव आया है जिसकी वजह से वह नाटो सदस्यता पर विचार करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “फिनलैंड और स्वीडन दोनों की स्थिति बदली है। हम पहली बार चुनावों में देख रहे हैं कि अधिकांश लोग नाटो में शामिल होने के समर्थन में हैं। अब हम इस पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार हैं।” निनिस्टो ने शुक्रवार देर रात फॉक्स न्यूज ब्रॉडकास्टर से कहा, ” हम सभी परिस्थितियों, जोखिमों और इस लाभ के बारे में लोगों को बताने की कोशिश कर रहे हैं।”</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/news-brief/finland-ready-to-merge-with-nato/article-31291</link>
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                <pubDate>Sat, 05 Mar 2022 11:36:58 +0530</pubDate>
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                <title>जेलेंस्की ने नाटो को कहा &amp;#8216;कमज़ोर&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[मॉस्को। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक वीडियो संदेश में यूक्रेन और रूस के बीच जारी संघर्ष के बीच हाल ही में संपन्न हुए नाटो शिखर सम्मेलन को “कमजोर” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि नाटो ने यूक्रेन को 50 टन डीजल प्रदान करने के अलावा कुछ नहीं किया। जेलेंस्की ने शुक्रवार को कहा, “आज नाटो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/volodymyr-zelenyy-calls-nato-weak/article-31284"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/volodymyr-zelenskyy1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मॉस्को।</strong> यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक वीडियो संदेश में यूक्रेन और रूस के बीच जारी संघर्ष के बीच हाल ही में संपन्न हुए नाटो शिखर सम्मेलन को “कमजोर” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि नाटो ने यूक्रेन को 50 टन डीजल प्रदान करने के अलावा कुछ नहीं किया। जेलेंस्की ने शुक्रवार को कहा, “आज नाटो शिखर सम्मेलन हुआ। यह एक कमजोर शिखर सम्मेलन था, एक भ्रमित शिखर सम्मेलन, एक ऐसा सम्मेलन जो दिखाता है कि यूरोप में हर कोई स्वतंत्रता की लड़ाई को एक लक्ष्य नहीं मानता है।” जेलेंस्की ने नाटो सदस्यों पर आरोप लगाया कि उन्होंने यूक्रेन पर हमला शुरू करने के लिए रूस को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा कि नाटो ने यूक्रेन को 50 टन डीजल प्रदान करने के अलावा कुछ नहीं किया।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Mar 2022 09:54:56 +0530</pubDate>
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                <title>रूस का यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन: नाटो</title>
                                    <description><![CDATA[मॉस्को (एजेंसी)। रूस का यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई के बाद नाटो के महासचिव जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने रुस पर आरोप लगाया कि उसने डोनबस पर हमला कर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया है। नाटो महासचिव ने ट्विटर पर कहा कि मैं यूक्रेन पर रूस के हमले की कड़ी निंदा करता हूँ। इस हमले से वहां के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>मॉस्को (एजेंसी)।</strong> रूस का यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई के बाद नाटो के महासचिव जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने रुस पर आरोप लगाया कि उसने डोनबस पर हमला कर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया है। नाटो महासचिव ने ट्विटर पर कहा कि मैं यूक्रेन पर रूस के हमले की कड़ी निंदा करता हूँ। इस हमले से वहां के अनगिनत नागरिकों की जान खतरे में है। यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंधन है तथा नाटो के लिए गंभीर खतरा है। यूक्रेन पर रूस के हमले को देखते हुए नाटो सदस्य की बैठक होगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>रूस की कार्रवाई का निर्णायक जवाब देंगे : जॉनसन</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन ने गुरुवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेन्सकी के साथ फोन पर बातचीत के बाद कहा कि पश्चिमी देश निर्णायक रूप से रूस की कार्रवाई का जवाब देंगे। जॉनसन ने ट्वीट किया कि मैं यूक्रेन में पेश आ रही भयावह घटनाओं से दुखी हूँ। मैंने राष्ट्रपति जेलेन्सकी से आगे की कार्रवाई पर चर्चा करने के लिए बात की है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर यह अकारण हमला शुरू कर रक्तपात और विनाश का रास्ता चुना है। ब्रिटेन और हमारे सहयोगी निर्णायक रूप से इसका जवाब देंगे।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Feb 2022 14:04:11 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>यूक्रेन को अमेरिका, नाटो से हथियारों की भरमार: रूस</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र में रूसी स्थायी मिशन ने कहा कि यूक्रेन को अमेरिका और नोटो से जहां हथियारों की भारी खेप मिल रही है और वहीं साथ ही साथ पश्चिम देशों से अनगिनत सलाहकार भी मिल रहे हैं। मिशन ने कहा, “नागरिकों और समान विचारधारा वाले देशों के बीच रूस के प्रति तीव्र और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/ukraine-full-of-weapons-from-us-nato-russia/article-30265"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/ukraine-weapons.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र।</strong> संयुक्त राष्ट्र में रूसी स्थायी मिशन ने कहा कि यूक्रेन को अमेरिका और नोटो से जहां हथियारों की भारी खेप मिल रही है और वहीं साथ ही साथ पश्चिम देशों से अनगिनत सलाहकार भी मिल रहे हैं। मिशन ने कहा, “नागरिकों और समान विचारधारा वाले देशों के बीच रूस के प्रति तीव्र और अक्सर तर्कहीन घृणा का माहौल तैयार किया जा रहा है, रूसी सैनिकों के एकत्र होने पर सभी समस्याओं का मूल कारण बताया जा रहा है। अमेरिका अमूमन यह स्पष्ट करना भूल जाता है कि यह रूसी क्षेत्र पर उसकी सेना के बारे में है।” उन्होंने कहा, “यह अमेरिकी और नाटो हथियारों और अनगिनत सलाहकारों के उलट है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूक्रेन और रूसी सीमाओं से सटे कुछ अन्य राज्यों में हथियारों और सलाहकारों की होड़ लगी हुई है। रूसी तटों के पास, काला सागर क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण अमेरिकी नौसेना क्या कर रही है, इस पर भी कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया जा रहा है।” रूस द्वारा यूक्रेन की सीमाओं के पास आक्रामक कार्रवाइयों में तेजी को देखते हुए यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने हाल ही में इस पर चिंता व्यक्त की है। इस बीच रूस ने पश्चिम देश और यूक्रेन द्वारा उस लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह किसी को बेवजह धमकी नहीं देता है और न ही किसी पर हमला करता है। पश्चिमी देश और यूक्रेन रूसी आक्रमण का बहाना बनाकर उसकी सीमाओं के पास नाटो सेनाओं की और अधिक तैनाती कर रहा है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Jan 2022 10:47:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>पूर्वी यूरोप की 3 महिला राजनेताओं में से एक बन सकती हैं नाटो की नई महासचिव</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रुसेल्स (एजेंसी)। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की अगली महासचिव पूर्वी यूरोप की तीन महिला राजनेताओं में से हो सकती है। पोलिटिको ने नाटो सूत्रों के हवाले से सोमवार को अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी। मौजूदा नाटो महासिचव नॉर्वे के पूर्व प्रधानमंत्री जेन्स स्टोलटेनबर्ग का कार्यकाल सितंबर-2022 में समाप्त हो रहा है। रिपोर्ट के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्रुसेल्स (एजेंसी)।</strong> उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की अगली महासचिव पूर्वी यूरोप की तीन महिला राजनेताओं में से हो सकती है। पोलिटिको ने नाटो सूत्रों के हवाले से सोमवार को अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी। मौजूदा नाटो महासिचव नॉर्वे के पूर्व प्रधानमंत्री जेन्स स्टोलटेनबर्ग का कार्यकाल सितंबर-2022 में समाप्त हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक ब्रुसेल्स में नाटो मुख्यालय में नये महासचिव पद के उम्मीदवारों पर औपचारिक चर्चा पहले ही शुरू हो चुकी है, लेकिन उनकी नियुक्ति की घोषणा अगले वर्ष की शुरूआत अथवा मैड्रिड में नाटो शिखर सम्मेलन से पहले किये जाने की उम्मीद नहीं है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के मुताबिक नये नाटो महासचिव के लिए मापदंडों को पूरा करने वाले तीन पूर्वी यूरोपीय राजनेताओं में क्रोएशिया की पूर्व राष्ट्रपति कोलिंडा ग्रैबर-कितारोविक, लिथुआनिया की पूर्व राष्ट्रपति डालिया ग्रीबाउस्काइट और एस्टोनिया की निवर्तमान राष्ट्रपति केर्स्टी कलजुलैद शामिल हैं।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jul 2021 10:02:14 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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