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                <title>Manifesto - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Delhi Assembly Election : आज जारी होगा &amp;#8216;आप&amp;#8217; का घोषणा पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[आम आदमी पार्टी आज (मंगलवार) अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी करेगी। पार्टी का कहना है कि इस बार 10 बिंदुओं पर पूरा घोषणा पत्र आधारित होगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-assembly-election-aap-manifesto-to-be-released-today/article-12920"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/untitled-3-8.jpg" alt=""></a><br /><h2>पुरानी योजनाएं जो चल रही है वह पहले की ही तरह जारी रहेगी| Delhi Assembly Election</h2>
<p><strong>नई दिल्ली(एजेंसी) । (Delhi Assembly Election ) </strong>आम आदमी पार्टी आज (मंगलवार) अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी करेगी। पार्टी का कहना है कि इस बार 10 बिंदुओं पर पूरा घोषणा पत्र आधारित होगा। पुरानी योजनाएं जो चल रही है वह पहले की ही तरह जारी रहेगी। उम्मीद की जा रही है कि इस बार पार्टी परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने, फीडर सेवाएं बेहतर करने।दिल्ली की साफ-सफाई और यमुना की सफाई को अपने घोषणा पत्र में सबसे ऊपर जगह देगी। पार्टी का कहना है कि अलग-अलग वर्गों से मिले सुझावों के आधार पर इसे तैयार किया गया है। मंगलवार को घोषणा पत्र सबके सामने रखेंगे। भाजपा और कांग्रेस पहले ही अपने घोषणा पत्र जारी कर चुके है। भाजपा ने जहां स्कूटी और दो रूपये किलो आटा देने की बात कही है। वहीं कांग्रेस ने 300 यूनिट मुफ्त बिजली के साथ कई बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया है।</p>
<h2>अब तक इन मुद्दों पर गारंटी दे चुके हैं अरविंद केजरीवाल | Delhi Assembly Election</h2>
<ul>
<li><strong>फ्री बिजली योजना के तहत 24 घंटे लगातार बिजली दी जाएगी।</strong></li>
<li><strong> दिल्ली के निवासियों को 200 यूनिट फ्री मुफ्त बिजली दी जाएगी।</strong></li>
<li><strong>दिल्लीवासियों को को 24 घंटे शुद्ध पीने के पानी की सुविधा दी जाएगी।</strong></li>
<li><strong> दिल्ली में पानी का साफ होना लोगों के लिए बड़ी समस्या है। </strong></li>
<li><strong>हर परिवार को 20 हजार लीटर मुफ्त पानी उपलब्ध कराया जाएगा।</strong></li>
<li><strong>दिल्ली के हर बच्चे के लिए विश्वस्तरीय शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी।</strong></li>
<li><strong> दिल्ली के स्कूलों को और ज्यादा बेहतर बनाया जाएगा।</strong></li>
<li><strong>दिल्ली के हर परिवार को आधुनिक अस्पतालों और </strong><strong>मोहल्ला क्लीनिक के जरिए इलाज की समुचित व्यवस्था होंगी। </strong></li>
</ul>
<h2><strong>11,000 से अधिक बसें दिल्ली की सड़कों पर होंगी</strong><strong>। Delhi Assembly Election </strong></h2>
<ul>
<li><strong>500 किलोमीटर लंबा मेट्रो का नेटवर्क तैयार किया जाएगा।</strong></li>
<li><strong> महिलाओं के साथ-साथ छात्रों को भी बस में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी।</strong></li>
<li><strong>प्रदूषण कम करने के लिए दिल्ली में 2 करोड़ पेड़ लगाएं जाएंगे।</strong></li>
<li><strong> स्कूलों के आसपास वैक्यूम क्लीनर से धूल-मिट्टी साफ कराने की व्यवस्था होगी।</strong></li>
<li><strong>कूड़े को साफ कर 5 साल में दिल्ली को चमका देंगे। </strong></li>
<li><strong>सड़क पर जमा कूड़े कचरे भी हटाए जाएंगे। </strong></li>
<li><strong>दिल्ली के चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी लगवाए जाएंगे।</strong></li>
<li><strong> हर गली में स्ट्रीट लाइट लगेगी।</strong></li>
<li><strong> बसों में मार्शल की तरह मोहल्ला मार्शल की व्यवस्था शुरू की जाएगी।</strong></li>
</ul>
<h2>राहुल की दो रैलियां आज</h2>
<p>दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए राहुल गांधी आज रैली करेंगे। राहुल शाम चार बजे जंगपुरा और छह बजे संगम विहार में रैली कर जनता को संबोधित करेंगे। इस दौरान पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी उनके साथ रहेंगी।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Feb 2020 12:27:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>घोषणा-पत्रों में जन-सहभाग महत्वपूर्ण</title>
                                    <description><![CDATA[मेरी राय यह है कि विधानसभा का चुनाव है; अत: विधायी कार्य संबंधी ‘दिल्ली नीति घोषणापत्र’ बने। यह पूरी दिल्ली के स्तर पर बने। 70 विधानसभाओं की विकास संबंधी इलाकाई जरूरतें और परिस्थितियां विविध हैं। जाहिर है कि प्रत्येक विधानसभा का विकास संबंधी रोड मैप भी अलग-अलग ही होना चाहिए। अत: उम्मीदवारों को चाहिए कि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/public-participation-is-necessary-in-the-manifesto/article-12634"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/public-participation.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">मेरी राय यह है कि विधानसभा का चुनाव है; अत: विधायी कार्य संबंधी ‘दिल्ली नीति घोषणापत्र’ बने। यह पूरी दिल्ली के स्तर पर बने। 70 विधानसभाओं की विकास संबंधी इलाकाई जरूरतें और परिस्थितियां विविध हैं। जाहिर है कि प्रत्येक विधानसभा का विकास संबंधी रोड मैप भी अलग-अलग ही होना चाहिए। अत: उम्मीदवारों को चाहिए कि वे मोहल्ला निवासी समितियों का आह्वान करें। अपने प्रचार का पहला सप्ताह विधानसभा स्तरीय घोषणापत्र बनवाने और उसके प्रति अपना संकल्प बताने में लगायें।</h2>
<p style="text-align:justify;">
<strong>लेखक: अरुण तिवारी</strong></p>
<h4 style="text-align:justify;">लोकतांत्रिक पिरामिड को सही कोण पर खड़ा करने के पांच सूत्र हैं: लोक-उम्मीदवार, लोक-घोषणापत्र, लोक-अंकेक्षण, लोक-निगरानी और लोक-अनुशासन। लोक-घोषणापत्र का सही मतलब है, लोगों की नीतिगत तथा कार्य संबंधी जरूरत व सपने की पूर्ति के लिए स्वयं लोगों द्वारा तैयार किया गया दस्तावेज। प्रत्येक ग्रामसभा व नगरीय वार्ड सभाओं को चाहिए कि वे मौजूद संसाधन, सरकारी-गैरसरकारी सहयोग, आवंटित राशि तथा जनजरूरत के मुताबिक अपने इलाके के लिए अगले पांच साल के सपने का नियोजन करें। इसे लोकसभावार, विधानसभावार, मोहल्लावार व मुद्देवार तैयार करने का विकल्प खुला रखना चाहिए। इसमें हर वर्ष सुधारने का विकल्प भी खोलकर रखना अच्छा होगा। इस लोक एजेंडे या लोक नियोजन दस्तावेज को लोक-घोषणापत्र का नाम दिया जा सकता है। इस लोक-घोषणापत्र को किसी बैनर या फलेक्स पर छपवाकर अथवा सार्वजनिक मीटिंग स्थलों की दीवार पर लिखकर चुनाव प्रचार के लिए आने वाले चुनावी उम्मीदवारों के समक्ष पेश किया जा सकता है। उनसे उसकी पूर्ति के लिए संकल्पपत्र/शपथपत्र लिया जा सकता है। इससे उम्मीदवार के चयन में सुविधा होगी और पालन करने के लिए उम्मीदवार के सामने अगले पांच साल एक दिशा-निर्देश भी होगा।<br />
जल घोषणापत्र, हरित घोषणापत्र, उत्तराखण्ड जन घोषणापत्र – नागरिक संगठन स्तर पर ऐसे प्रयास होते रहे हैं। किंतु आदर्श स्थिति हासिल करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। फिलहाल, चर्चा करें कि दिल्ली के इस चुनाव में पार्टी घोषणापत्र बनाने में एक बार फिर से जनता की राय मांगी जा रही है। हमें इस रायशुमारी को एक सुअवसर मानना चाहिए; पार्टी घोषणापत्र से लोक घोषणापत्र की ओर बढ़ने की एक छोटी सी खिड़की मान स्वागत करना चाहिए। इसमें खुद पहल कर पार्टियों और अपने विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार तक अपनी राय पहुंचानी चाहिए।<br />
इन घोषणापत्रों को जमीन पर उतारने के लिए नीतिगत आवश्यकता होगी कि दिल्ली नियोजन क्रियान्वयन एवम निगरानी समिति का गठन हो। इसके तहत केन्द्र, राज्य, स्थानीय नगर व गांव अर्थात चार स्तरीय उपसमितियां हों। चार स्तरीय समितियों में आपसी तालमेल व पारदर्शिता की सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था बने। चुनाव बाद के पांच साल के दौरान विकास संबंधी घोषणापत्र को पूरा करने में लोग सहयोगी भी बनें और विधायक द्वारा असहयोग करने पर बाध्य करने वाले भी; इसके लिए जन-निगरानी प्रणाली विकसित की जाए। लोक-प्रतिनिधियों के बजट से क्रियान्वित होने वाले कार्यों का लोक अंकेक्षण यानी ‘पब्लिक-आॅडिट’ अनिवार्य हो। आॅडिट सिर्फ वित्तीय नहीं, कैग के नए विविध सूचकांकों के आधार पर हो। ऐसे प्रावधानों को विधिसम्मत बनाने के लिए पार्टियां, इन्हे विधान का हिस्सा बनाने की घोषणा करें। लाभ यह होगा कि पांच साल पूरे होने पर लोक-अंकेक्षण समूह की रिपोर्ट खुद-ब-खुद इस बात का आइना होगी कि निवर्तमान प्रत्याशी उसमें अपना चेहरा देख सकें; जान सकें कि वह अगली बार चुनाव लड़ने लायक है या नहीं। इस आधार पर पर्टियां अपना उम्मीदवार तय कर सकेंगी और लोग भी कि उस प्रतिनिधि को अगली बार चुना जाये या दरकिनार कर दिया जाये। पांच सालों का लेखा-जोखा, अगले पंचवर्षीय कार्यों का नियोजन व तद्नुसार लोक-घोषणापत्र निर्माण में भी बराबर का मददगार सिद्ध होगा।<br />
इसी दिशा में एक अन्य महत्वपूर्ण नीतिगत तथ्य यह है कि भारत के सभी राज्यों में गांवों में संवैधानिक स्तर पर गठित ग्राम सभा, ग्राम पंचायत और न्याय पंचायत है; विधानसभा के साथ केन्द्र शसित क्षेत्र वाली दिल्ली की तर्ज में नवगठित राज्य जम्मू-कश्मीर में भी। दिल्ली के गांवों के पास क्या है ? नये राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक, दिल्ली में 357 गांव हैं। क्या स्वराज का सपना दिखाने वालों को दिल्ली में ग्राम स्वराज का सर्वश्रेष्ठ ढांचा बनाने की पहल नहीं करनी चाहिए? उन्हें चाहिए कि दिल्ली पंचायतीराज अधिनियम बनाने को पार्टी घोषणापत्र में शामिल कर इस सपने की नींव रखें।<br />
शुद्ध हवा, स्वच्छ पानी-पर्याप्त पानी, स्थानीय कचरा प्रबंधन और सर्व सुलभ पार्किंग-दिल्ली की चार बड़ी चुनौतियां हैं। दिल्ली के चारदीवारी वाले हर संस्थान, हर कार्यालयी-व्यावसायिक परिसर, हर हाउसिंग सोसाइटी परिसर को उसके परिसर के भीतर ही इन चारों की स्वावलम्बी व्यवस्था के लिए बाध्य व प्रोत्साहित…दोनों करने की नीतिगत घोषणा करनी चाहिए। ऐसे परिसरों का सीवेज निष्पादन भी परिसर के भीतर संभव है और यमुना प्रदूषण मुक्ति के लिए जरूरी भी। स्वावलम्बी जल प्रबंधन और धूल-धुआं प्रबंधन करना ही चाहिए। वाटर रिजर्व, ग्रीन रिजर्व व वेस्ट रिजर्व एरिया नीति इसमें मदद कर सकती है। जैम फ्री ट्रैफिक और भाड़े की मनमानी से मुक्त ऑटो चालक भी दिल्ली की आवश्यकता है। फैक्टरी-दफ्तरों-बाजारों के समय में अनुकूल बदलाव तथा ऐसी नियुक्ति नीति, जिसमें लोगों को अपने आवास से कम से कम दूरी तक सफर करना पड़े़; पर्यावरण बेहतरी के लिए जरूरी है।<br />
जरूरत है कि नंबर दौड़ में लगाने की बजाय, स्कूली शिक्षा को प्रत्येक विद्यार्थी में पहले से मौजूद प्रतिभा के विकास पर केन्द्रित किया जाए। उनमें उनके आसपास के परिसरों के प्रति सकारात्मक सरोकार व संवेदना विकसित की जाए। आठवीं कक्षा के बाद प्रतिभानुसार अवसर देने के लिए मात्र खेल नहीं, नृत्य-संगीत-शिल्प विषयक श्रेष्ठ विशेषज्ञ स्कूलों की स्थापना की जाए। उच्च शिक्षा और फिर कोचिंग के लम्बे दुष्चक्र में फंस चुकी नई पीढ़ी को बचाने के लिए एनडीए, रेलवे अप्रेन्टिस की तर्ज पर पहल जरूरी है। कम से कम दिल्ली सरकार की हर छोटी-बड़ी नौकरी के लिए तो 10वीं-12वीं की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता तथा चयन पश्चात पद की जरूरत के अनुसार एक से तीन साल का शिक्षण-प्रशिक्षण का प्रावधान किया जा सकता है। पढ़ाई, दवाई, सुरक्षा, यातायात, सुरक्षा, संचार, जलापूर्ति जैसे बुनियादी सेवा क्षेत्रों में ठेकेदारी व निजीकरण को हतोत्साहित करके दिल्ली सुरक्षित रोजगार का रास्ता प्रशस्त कर सकती है। दूसरे राज्यों से दिल्ली आ रही आबादी को उनके प्रदेश में रोकने के लिए दिल्ली सरकार को चाहिए कि वह उन राज्यों के शिक्षा और रोजगार के ढांचे को स्वावलम्बी बनाने में सहयोग करे। इसके लिए वह दिल्ली में मौजूद ज्ञान, कौशल व मानव संसाधन का उपयोग करे। इससे भी अंतत: रोजगार, दिल्लीवासियों का ही बढ़ेगा। स्वास्थ्य बीमा की आड़ में उपजी लूट की जगह, 50 वर्ष से अधिक उम्र के हर दिल्लीवासी के इलाज का जिम्मा। अधिकतम संभव लागत पर सुनिश्चित मुनाफा दर के आधार पर वस्तुओं की अधिकतम फुटकर बिक्री दर का निर्धारण। मूल आवश्यकता पार्टी, उम्मीदवार व नागरिक…तीनों द्वारा अपनी-अपनी जवाबदारी ईमानदारी से निभाने का मन बनाने की है। यदि हम यह कर पायें, तो तय मानिए कि तंत्र पर लोक की हकदारी एक दिन खुद-ब-खुद आ जायेगी। धीरे-धीरे हम सही मायने में लोकतंत्र भी हो जायेंगे।</h4>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jan 2020 20:48:49 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चुनावी घोषणा पत्रों की राजनीति</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां लोक सभा चुनाव 2019 के लिए अपने-अपने घोषणा पत्रों को जारी कर चुकी हैं। दोनों पार्टियों के घोषणा पत्रों में जमीनी वास्तविकताओं में बदलाव लाने की कोशिशें कम और वोटरों को आकर्षित करने वाले वायदे ज्यादा हैं। कांग्रेस यदि गरीबों को हर साल 72000 रुपए देने का वायदा करती है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/politics-of-election-manifesto/article-8505"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/politics-election-manifesto.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां लोक सभा चुनाव 2019 के लिए अपने-अपने घोषणा पत्रों को जारी कर चुकी हैं। दोनों पार्टियों के घोषणा पत्रों में जमीनी वास्तविकताओं में बदलाव लाने की कोशिशें कम और वोटरों को आकर्षित करने वाले वायदे ज्यादा हैं। कांग्रेस यदि गरीबों को हर साल 72000 रुपए देने का वायदा करती है तब भाजपा ने किसानों व दुकानादारों को पेंशन देने का वायदा किया है। भाजपा के घोषणा पत्र में सबसे बड़ी बात यह है कि पेंशन राशि का कहीं भी जिक्र नहीं किया गया। यूं भी भाजपा ने अपने पहले किए वायदे को दोहराते हुए किसानों को वार्षिक छह हजार रुपए देने की घोषणा भी की है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में हुसैनीवाला फिरोजपुर में किसानों को प्रत्येक माह 5 हजार रुपए पेंशन देने की घोषणा करने के बाद चुप्पी साध ली है। उस घोषणा के अनुसार किसानों को 60 हजार रुपए वार्षिक देना बनता था जो 6000 रुपए तक ही सीमित होकर रह गया। भाजपा ने किसानों को एक लाख रुपए के कर्जे पर पांच साल तक ब्याज न लेने का वायदा किया है। उधर कांग्रेस ने पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश में किसानों के लिए कर्ज माफी योजना की शुरूआत की है। दोनों पार्टियां किसानों को आकर्षित करने के फार्मूले का इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन देश की कृषि, उद्योग और रोजगार के लिए कोई ठोस नीति का जिक्र तक नहीं किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इन योजनाओं के लिए पैसा कहां से आएगा और सरकार की आमदन कैसे बढ़ेगी?, इस बारे में कोई जिक्र नहीं। सवाल यह है कि क्या घोषणा पत्र का मतलब केवल लोगों को सुविधाएं देना है? या देश के आर्थिक विकास के लिए भी कुछ करना है? सच्चाई यह है कि इन योजनाओं से रोजगार में विस्तार नहीं होना। घोषणा पत्रों में पेंशन शब्द बड़ा आम हो गया है। हैरानी की बात यह है कि सरकार नए रोजगार के अंतर्गत वेतन देने की बजाय पेंशन का जिक्र करती है जिससे यह बात स्पष्ट होती है कि सरकार नौकरी देने से भाग रही है। यह भी हैरानी की बात है कि केंद्र व राज्य सरकारें कर्मचारियों को पेंशन देने से तो भाग ही रही हैं, दूसरी ओर अस्थाई कर्मचारियों को भी स्थाई नहीं कर रही।</p>
<p style="text-align:justify;">यही भी उसी तरह उलटी गंगा बह रही है जिस तरह आठ लाख की आमदन वालों को आर्थिक तौर पर पिछड़ा मानकर आरक्षण दिया जा रहा है, लेकिन पांच लाख से अधिक आय पर टैक्स वसूला जा रहा है। पार्टियों के लिए चुनाव का तात्पर्य केवल सत्ता प्राप्त करना है, जिसमें वायदों को अमली जामा पहनाने का स्पष्टीकरण देने की बजाए वोट नीति को ही ध्यान में रखा जाता है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Apr 2019 20:18:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पंजाब सरकार की शराब पर दोगली नीति</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य को नशा मुक्त करने के पंजाब सरकार के वायदे का सच तीन माह में ही सामने आ गया है। कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणापत्र में वायदा किया था कि सरकार आने पर प्रत्येक वर्ष की भांति 5 फीसदी शराब के ठेके बंद करवाए जाएंगे। इस तरह पांच वर्षों में 25 फीसदी ठेके खत्म कर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/punjab-governments-two-faces-on-alcohol/article-1591"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/sharab.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राज्य को नशा मुक्त करने के पंजाब सरकार के वायदे का सच तीन माह में ही सामने आ गया है। कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणापत्र में वायदा किया था कि सरकार आने पर प्रत्येक वर्ष की भांति 5 फीसदी शराब के ठेके बंद करवाए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह पांच वर्षों में 25 फीसदी ठेके खत्म कर दिए जाएंगे, किन्तु सत्ता परिवर्तन होते ही पार्टी ने गिरगिट रंग दिखाया और राष्ट्रीय व राज्य मार्गों पर होटलों, रेस्टरों व क्लबों में शराब परोसने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की काट ढूंढ ली।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने कानून में शोध बिल पास करके सुप्रीम कोर्ट की उस भावना पर पानी फेर दिया है कि सड़कों से शराब के ठेके उठाने से सड़क हादसों में कमी आएगी। इससे पहले राज्य के कई राजमार्गों को डीनोटीफाई करके शराब की बिक्री को पहले ही छूट दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की नीतियों की पोल इस बात से भी खुल जाती है कि शोध बिल पास करने के लिए जो दलीलें दी गई हैं, वह सरकार की घोषणा के विपरीत हैं। सरकार ने दलील दी है कि सड़कों से शराब की बिक्री खत्म होने से राज्य को आर्थिक नुक्सान हो रहा है और युवाओं को रोजगार भी नहीं मिल रहा। कांग्रेस पार्टी चुनाव घोषणा-पत्र में प्रत्येक परिवार में एक नौकरी देने की घोषणा कर चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या अब पंजाब सरकार सिर्फ शराब परोसने वालों के रूप में ही पंजाबियों को रोजगार देगी। हकीकत यह है कि शराब राज्य की तबाही का कारण बनी हुई है। 40 फीसदी सड़क हादसे व झगड़ों में कत्लेआम का कारण शराब ही है। इसी कारण राज्य में शराब के खिलाफ लहर चल रही है। विशेष तौर पर महिलाओं ने कई जगहों पर शराब के ठेकों को ताले लगाकर रोष-प्रदर्शन किए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सैंकड़ों पंचायतें शराब के खिलाफ प्रस्ताव डाल चुकी हैं, किन्तु जब सरकार को शराब में बड़ी कमाई नजर आती है, तो सिद्धांत, वायदे, घोषणा, जनता की भलाई सब कुछ पंख लगाकर उड़ जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल जैसे राज्य शराबबंदी के लिए आगे बढ़ रहे हैं। यदि बिहार जैसा राज्य शराबबंदी के बावजूद उन्नति कर रहा है, तो पंजाब पर क्या असर पड़ सकता है! पंजाब कैंसर व अन्य बीमारियों का गढ़ बन गया है। ऐसे में शराब और अधिक बीमारियां ही लेकर आएंगी। खेल यूनिवर्सिटिज खोलने का लाभ तब ही है, यदि पंजाबी शराब से मुक्त होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">पंज+आब को शर+आब बनाने की बजाए, यहां की जवानी को खेल, शिक्षा व हुनर की तरफ लगाया जाए। सरकार के पास नौकरियों का अभी से टोटा पड़ गया है कि वह शराब की दुकानें खोलने चल पड़ी है, तो पांच वर्ष शराब की कमाई पर गुजारने आसान नहीं। सरकार युवाओं को हुनरमंद बनाकर उनके लिए रोजगार के अवसर पैदा करे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jun 2017 22:57:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>9 बिन्दुओं पर आधारित होगा चुनावी मैनीफेस्टो</title>
                                    <description><![CDATA[ChandiGarh, SachKahoon News: कांग्रेस के प्रदेश प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पार्टी के चुनावी मैनीफेस्टों की झलक दिखाई है। उन्होंने कहा कि इसमें नौ मुख्य बिंदु होंगे। इसक साथ ही कैप्टन ने नौ बिंदुओं पर आधारित एक्शन प्लान की शुरूआत की। इसमें पानी के बंटवारे, नशाखोरी, बेरोजगारी, औद्योगिक व कृषि विकास जैसे मुद्दों को शामिल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>ChandiGarh, SachKahoon News:</strong> कांग्रेस के प्रदेश प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पार्टी के चुनावी मैनीफेस्टों की झलक दिखाई है। उन्होंने कहा कि इसमें नौ मुख्य बिंदु होंगे। इसक साथ ही कैप्टन ने नौ बिंदुओं पर आधारित एक्शन प्लान की शुरूआत की। इसमें पानी के बंटवारे, नशाखोरी, बेरोजगारी, औद्योगिक व कृषि विकास जैसे मुद्दों को शामिल किया गया हैं।</p>
<p><strong>एजेंडे में शामिल नौ मुद्दे</strong><br />
– ‘पंजाब दा पानी, पंजाब वास्ते’ यानि पंजाब का पानी पंजाब के बास्ते। इससे सुनिश्चित किया जा सके कि पंजाब के पानी का राज्य के लिए इस्तेमाल हो और किसी भी कीमत पर दूसरे राज्य से बांटा न जा सके।<br />
– ‘नशा सप्लाई, बिक्री व उपभोग चार हफ्ते विच बंद’ यानि नशे की सप्लाई, बिक्री और इस्तेमाल चार हफ्ते में करेंगे बंद। राज्य से नशाखोरी को खत्म करने की वचनबद्धता।<br />
– घर-घर रोजगार-समयबद्ध रोजगार स्कीम, ताकि पांच सालों में प्रत्येक परिवार के कम-से-कम एक सदस्य को नौकरी मुहैया करवाई जा सके, इस दौरान चिन्हित बेरोजगारों को 2500 रुपए प्रतिमाह का बेरोजगारी भत्ता भी दिया जाएगा।<br />
– किसानों के लिए आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा।<br />
– व्यापार व उद्योग के लिए कारोबार की आजादी और उचित कीमतों पर बिजली, पानी व सफाई सुरक्षा।<br />
– महिला सशक्तीकरण-नौकरियों, शिक्षण संस्थाओं व सभी श्रेणियों में रिहायशी व व्यापारिक प्लॉटों की अलॉटमेंट में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण।<br />
– सभी बेघर अनुसूचित जातियों के लिए नि:शुल्क घर-लायक बेघर अनुसूचित जातियों को एक लाख रुपए की वित्तीय सहायता सहित मुफ्त घर या पांच मरला प्लॉट दिए जाएंगे।<br />
– पिछड़ी श्रेणियों के समर्थन के लिए-अन्य पिछड़ी श्रेणियों के लिए नौकरियों में 12 से 15 प्रतिशत, शिक्षण संस्थाओं में 5 से 10 प्रतिशत आरक्षण बढ़ाया जाएगा।<br />
– जमीनी स्तर पर गार्डियंस आॅफ गर्वनेंस (जीओजी) के तौर पर कार्य करने के लिए पूर्व सैनिकों के नए विभाग का निर्माण-ताकि सरकारी स्कीमों के लागू होने पर निगरानी रखी जा सके और सुनिश्चित किया जा सके कि गांव, कलस्टर एवं ब्लॉक स्तर पर फंडों का सही इस्तेमाल हो।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Dec 2016 23:40:41 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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