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                <title>Residues of wheat burnt by farmers - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>आलमगढ़ व धर्मपुरा के निकट किसानों ने जलाए गेहूं के अवशेष</title>
                                    <description><![CDATA[गेहूं के अवशेष जलाकर अपनी जमीन की उर्वरा शक्ति को नष्ट कर रहे किसान अबोहर(सुधीर अरोड़ा)। क्षेत्र में फसल कटाई का कार्य पूरा हो चुका है। किसान अब आगामी फसल की बीजाई के लिए भूमि तैयार करने में जुट गए हैं। भूमि को जल्द साफ करने के चक्कर में किसान स्वयं गेहूं के अवशेष व […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/residues-of-wheat-burnt-by-farmers/article-9124"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-05/kanak-aag.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">गेहूं के अवशेष जलाकर अपनी जमीन की उर्वरा शक्ति को नष्ट कर रहे किसान</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर(सुधीर अरोड़ा)।</strong> क्षेत्र में फसल कटाई का कार्य पूरा हो चुका है। किसान अब आगामी फसल की बीजाई के लिए भूमि तैयार करने में जुट गए हैं। भूमि को जल्द साफ करने के चक्कर में किसान स्वयं गेहूं के अवशेष व फाने जलाकर न केवल अपनी भूमि की उपजाऊ शक्ति को नष्ट कर रहे हैं बल्कि प्रदूषण को भी बढ़ावा देते हुए नियमों की भी धज्जियां उड़ा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हर साल कृषि विभाग द्वारा किसानों को गेहूं के अवशेष व फाने जलाने पर रोक के आदेश दिए जाते हैं, इसके बावजूद किसान बाज नहीं आते। कुछ किसान तो सरेआम अपने खेतों में अवशेष व गेहूं की फाने जलाते रहते हैं। ऐसा नहीं है कि प्रशासन को इनकी खबर न हो, सब कुछ देखते हुए भी प्रशासन अनदेखा बना रहता है जिससे अन्य किसान भी खेतों में खड़े अवशेष व फाने जलाना शुरू कर देते हैं। क्षेत्र में अधिकतर आग बिजली के शॉर्ट-शर्किट से कम, बल्कि किसानों द्वारा स्वयं अधिक लगाई जाती है। कुछ किसान तो स्वयं गेहूं के अवशेषों में आग लगाकर आग लगने की सूचना फायर ब्रिगेड को दे देते हैं ताकि उन पर कोई शक न करे।</p>
<p style="text-align:justify;">गाँव आलमगढ़ व धर्मपुरा के निकट किसानों द्वारा लगाई गेहूं के अवशेषों की आग को लेकर क्षेत्र के जागरूक किसानों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे किसानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए जो स्वयं अपने गेहूं के फाने व अवशेष जलाते हैं। किसानों के अनुसार वह न केवल अपनी जमीन की उर्वरा शक्ति को नष्ट करते हैं, बल्कि कई बार उनके द्वारा लगाई गई आग से पड़ोसी किसानों के खेतों में भी आग से भारी नुकसान हो जाता है। गेहूं की कटाई के सीजन में जहां बिगड़ा मौसम धरती पुत्रों के चेहरों पर चिंता की लकीरें ले आता है, उसी प्रकार कटाई के साथ किसानों द्वारा पुराने तरीके अपनाए जाने से भी धरती को नुकसान पहुंच रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस कटाई से हवा में उड़ते सूक्ष्म कणों के कारण किसानों द्वारा अपनाए जाने वाले खेती के पारंपरिक तौर तरीकों से अनेक बीमारियां फैल रही है। कृषि अधिकारियों के अनुसार फानों के जलाने से वातावरण में कार्बन डाईआक्साइड व कार्बन मोनो-आक्साइड गैस फैलती हैं, जो हानिकारक हैं। आग की तपिश से धरती में पाए जाने वाले फसलों के लिए फायदेमंद मित्रकीट, तितलियां व अन्य जीवाणु मर जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी कारण सरकार ने इन फानों को जलाने पर बैन लगाया हुआ है जिसके लिए जुर्माना व सजा का प्रावधान है। अवशेष जलाए जाने से सड़क पर जा रहे राहगीरों को उठने वाले धुएं से बड़ी परेशानी उठानी पड़ती है।<br />
अबोहर।आलमगढ़ धर्मपुरा के निकट खेत में किसान गेहूं के अवशेष जलाता हुआ।</p>
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                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 May 2019 18:49:24 +0530</pubDate>
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