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                <title>स्वस्थ नहीं, बीमार कर रहा पार्क का वातावरण</title>
                                    <description><![CDATA[गंदगी का लगा अंबार, लोग परेशान सरसा (सच कहूँ न्यूज)। एक ओर भाजपा शासन की ओर से पूरे देश में स्वच्छता अभियान को तेजी से चलाए जाने के दावे किए जा रहे हैं वहीं सरसा में यह अभियान पूरी तरह से ठप नजर आता है। हालांकि शहरभर के विभिन्न हिस्सों में गंदगी कहीं भी देखी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-dirt-is-felt-the-people-are-upset/article-4694"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/park.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">गंदगी का लगा अंबार, लोग परेशान</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> एक ओर भाजपा शासन की ओर से पूरे देश में स्वच्छता अभियान को तेजी से चलाए जाने के दावे किए जा रहे हैं वहीं सरसा में यह अभियान पूरी तरह से ठप नजर आता है। हालांकि शहरभर के विभिन्न हिस्सों में गंदगी कहीं भी देखी जा सकती है मगर वार्ड नंबर 13 में पटेल बस्ती स्थित मुख्य पार्क जीवन सिंह पार्क का इलाका ज्यादा ही प्रभावित है।</p>
<p style="text-align:justify;">अहम बात यह है कि इस वार्ड और उसके समीपस्थ इलाके से सैकड़ों लोग यहां प्रात:काल स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए भ्रमण पर आते हैं मगर पार्क में एंट्री से पूर्व ही उनका सामना गंदगी के अंबार से होता है। ऐसे में कहीं से भी यह महसूस नहीं हो पाता कि यहां स्वास्थ्य लाभ लेने आए व्यक्ति स्वस्थ होंगे बल्कि एहसास यह होता है कि गंदगी और दुर्गंध के वातावरण में वे कहीं बीमार न हो जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">अहम बात यह है कि सरसा के उपायुक्त रहे जीवन सिंह जैन के नाम पर यह पार्क स्थापित किया गया था और लोग यहां सुबह शाम सैर के लिए आने लगे थे मगर यहां पसरी गंदगी को लेकर अब सैर करने वाले स्थानीय लोगों की संख्या भी कम होती जा रही है।</p>
<h1 style="text-align:center;">पार्क के पास है आध्यात्मिक स्थल</h1>
<p style="text-align:justify;">जीवन सिंह जैन पार्क के समीप ही अनेक आध्यात्मिक स्थल हैं जहां शहर भर के अनेक हिस्सों से श्रद्धालु अलसुबह शीश झुकाने आते हैं मगर उन्हें भी यहां पसरी गंदगी से होकर ही उन्हें गुजरना पड़ता है। क्षेत्रवासी सरोज सैनी, सुलोचना देवी, कांता रानी, महंत नित्यानंद, पंडित संतलाल, सुरेश कुमार, ममता रानी, कुंदन सैनी आदि ने बताया कि पिछले करीब छह सालों से नगरपरिषद प्रशासन की ओर से यहां कूड़ाघर बनाकर गंदगी डाली जाती है जिससे समूचा इलाका दुर्गंधमय हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने बताया कि अनेक मर्तबा नगरपरिषद प्रशासन से इस कूड़ाघर को यहां से तबदील करने की मांग की जा चुकी है मगर हर बार उनकी मांग अनसुनी कर दी जाती है। उन्होंने बताया कि धार्मिक स्थलों के साथ-साथ यहां दस जमा दो कक्षा का एक स्कूल भी है जहां सैकड़ों बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं।</p>
<h1 style="text-align:center;">ये बोले नप के कार्यकारी अधिकारी</h1>
<p style="text-align:justify;">वहीं जब इस सिलसिले में नगर परिषद् के कार्यकारी अधिकारी विरेंद्र श्योराण से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वे दो मर्तबा यहां सफाई करवा चुके हैं। फिर भी यदि वहां गंदगी है तो मुख्य सफाई निरीक्षक से कहकर पुन: सफाई कराई जाएगी। जहां तक इस कूड़ाघर को हटाने की बात है तो यह मुमकिन नहीं क्योंकि अब कोई भी वार्डवासी अपने वार्ड में कूड़ाघर बनाने को सहमत नहीं है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Jul 2018 04:01:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बेटी की हत्या कर खुद को लगाया फंदा</title>
                                    <description><![CDATA[घर के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के कारण मानसिक तौर पर परेशान था चरणजीत सिंह भटिंडा (सुखजीत मान)। स्थानीय शहर के लाईनो पार स्थित परसराम नगर में आज एक मानसिक तौर पर परेशान व्यक्ति ने अपनी बेटी की हत्या कर खुद को पंखे से लटका कर खुदकुशी कर ली। थाना कैनाल की पुलिस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/man-suicide-after-murder-of-daughter/article-3114"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/murder-4.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">घर के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के कारण मानसिक तौर पर परेशान था चरणजीत सिंह</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>भटिंडा (सुखजीत मान)।</strong> स्थानीय शहर के लाईनो पार स्थित परसराम नगर में आज एक मानसिक तौर पर परेशान व्यक्ति ने अपनी बेटी की हत्या कर खुद को पंखे से लटका कर खुदकुशी कर ली। थाना कैनाल की पुलिस ने मौके पर पहुंच कर जांच शुरू कर दी है। प्रार्थमिक जानकारी में पता चला है कि उक्त व्यक्ति घर के बंटवारे आदि को लेकर मानसिक तौर पर परेशान चल रहा था। परसराम नगर की कृष्ण गली, गली नंबर-6 में रहने वाले चरनजीत सिंह (47) पुत्र कन्नईया लाल ने आज अपनी मंदबुद्धि बेटी सोनिया को कोई जहरीली वस्तु खिला कर मार दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद चरनजीत सिंह ने खुद को भी पंखे से लटका कर खुदकुशी कर ली। घटना का पता चलते ही बड़ी संख्या में लोग घटना स्थल पर एकत्रित हो गए। सूचना मिलते ही थाना कैनाल कालोनी की पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। मृतक चनरजीत सिंह की जेब से मिले सुसाइड नोट में लिखा हुआ है कि वह और उसकी बेटी अपनी जीवन लीला समाप्त कर रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मृतक के दो भाईयों सहित परिवार के 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज</h3>
<p style="text-align:justify;">सोसाइड नोट में मृतक ने लिखा था कि जिस घर में वह रह रहा था, इस घर में उसके दो भाई, दो भरजाईयां व दो भतीजे हिस्से की मांग कर रहे थे, जबकि उन्हें पहले ही हिस्सा दिया जा चुका है। घर में इस बात को लेकर पैदा हुए विवाद कारण उसने यह कदम उठाया है। मामले की जांच कर रहे डीएसपी दविन्द्र सिंह ने बताया कि मृतक की जेब से मिले सुसाइड नोट के आधार पर उसके दोनों भाईयों, दोनों भरजाईयों व दोनों भतीजों सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करके आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Aug 2017 09:27:48 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पत्नी से था मनमुटाव, नहर में छलांग लगा दी जान</title>
                                    <description><![CDATA[नहर से बरामद अज्ञात शव की हुई पहचान हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। सार्दुल ब्रांच नहर के जोड़कियां हैड पर सोमवार को बरामद अज्ञात युवक के शव की मंगलवार को पहचान हो गई। मृतक की पहचान जंक्शन के वार्ड तीन, नई खुंजा के मेजर सिंह (37) पुत्र गंगासिंह कुम्हार सिख के रूप में हुई। मंगलवार सुबह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/death-from-leaping-in-the-canal/article-2976"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/drown.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">नहर से बरामद अज्ञात शव की हुई पहचान</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सार्दुल ब्रांच नहर के जोड़कियां हैड पर सोमवार को बरामद अज्ञात युवक के शव की मंगलवार को पहचान हो गई। मृतक की पहचान जंक्शन के वार्ड तीन, नई खुंजा के मेजर सिंह (37) पुत्र गंगासिंह कुम्हार सिख के रूप में हुई। मंगलवार सुबह जंक्शन पुलिस ने राजकीय जिला चिकित्सालय में मोर्चरी में पोस्टमार्टम करवा शव परिजनों को सौंप दिए। जंक्शन थाने के सहायक उप निरीक्षक शम्भूदयाल स्वामी ने बताया कि सोमवार शाम सूचना मिलने पर जोड़कियां हैड पहुंचे तथा अज्ञात युवक का शव नहर में तैरता मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">शव को बाहर निकलवाया। पहचान नहीं होने पर शव को टाउन के राजकीय जिला चिकित्सालय की मोर्चरी में रखवा दिया। इस संबंध में जोड़कियां हैड के गेज रीडर बनवारीलाल पुत्र ज्योतराम बावरी निवासी सुरेशिया की सूचना पर मर्ग दर्ज शिनाख्त के प्रयास शुरू किए। इस दौरान पता चला कि नई खुंजा से मेजर सिंह रविवार सुबह दस बजे से घर से लापता है। मेजर सिंह के परिजनों को बुलाया तो उन्होंने शव की शिनाख्त की। परिजनों ने बताया कि मेजर सिंह रविवार सुबह करीब दस बजे घर से साइकिल लेकर गया था। मेजर सिंह अपनी पत्नी से मनमुटाव के चलते पिछले कई दिनों से मानसिक रूप से परेशान रहता था। इसी के चलते उसने नहर में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Tue, 08 Aug 2017 05:21:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रशासनिक कार्यप्रणाली को दुरुस्त किया जाए</title>
                                    <description><![CDATA[चाहे सरकारों की तरफ से प्रशासनिक स्तर की सेवाएं बिना किसी देरी व बिना किसी मुश्किल के करने की बातें की जाती हैं, लेकिन वास्तव में सच्चाई कुछ और ही होती है। दरअसल लोगों को सरकारी दफ्तरों में जिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसे कोई नहीं जानता। जबकि आम व्यक्ति को अपने काम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/administrative-procedures-should-be-corrected/article-2281"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/government-work.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चाहे सरकारों की तरफ से प्रशासनिक स्तर की सेवाएं बिना किसी देरी व बिना किसी मुश्किल के करने की बातें की जाती हैं, लेकिन वास्तव में सच्चाई कुछ और ही होती है। दरअसल लोगों को सरकारी दफ्तरों में जिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसे कोई नहीं जानता। जबकि आम व्यक्ति को अपने काम के लिए इतने सारे चक्कर काटने पड़ते हैं कि उनके जूते-चप्पलें घिस जाती हैं। अब तो लोग अपने काम सरकारी दफ्तरों में करवाने से भी डरते रहते हैं। उन लोगों की बहुत संख्या है, जिनके काम कई-कई महीने मंझधार में लटकते रहते हैं। कई लोग तो लगातार चक्कर लगा-लगाकर इतना थक जाते हैं कि वे अपने काम को ही बीच में छोड़ देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अब अगर लोगों को होने वाली परेशानियों पर विस्तार से चर्चा की जाए, तो पहली बात यह सामने आती है कि सरकारी कार्यों को पूरा करने का प्रोसेस बहुत लंबा होता है। फिर अगर किसी तरह कार्य पूरा हो भी जाता है, तो यह एक परमात्मा की दया माना जाता है, लेकिन बहुत से लोगों पर फिर एक आफत का सामना करना पड़ता, जब उनके सरकारी दफ्तरों में से तैयार हुए तस्तावेजों में गलतियां पाई जाती हैं। इस तरह के मामले बहुत सामने आते हैं। लोग पहले तो बड़ी मुश्किल से अपने पत्रों को तैयार करवाते हैं, लेकिन उनमें किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है, तो पहले से भी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह गलतियाँ तरह-तरह के प्रमाणपत्रों में, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, पहचान पत्र और जरूरी पत्रों में देखने को मिलती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि सरकार के प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों द्वारा यह दावा अक्सर किया जाता है कि सभी कार्य कम्प्यूटरीकृत हो चुका है, लेकिन सवाल यह है कि सभी कार्य कम्प्यूटरीकृत होने के बावजूद यह गलतियां क्यों? लोगों को यह गलतियां ठीक करवाने के लिए परेशानियों के अलावा अपनी जेब भी ढीली करनी पड़ती है। इसके अलावा जो लोग गांवों में रहते हैं, उनको अपने कार्यों के लिए दूर शहरों में जाना पड़ता है। इससे उनका समय भी बर्बाद होता है और वहां पर पहुंचने के लिए खर्चा करना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब कोई काम सही तरीके से न हो, तो फिर गलतियों पर गलतियां होने के चांस और बढ़ जाते हैं। जैसे कि सरकारी कार्य में किसी पर की त्रुटि रह जाए, फिर व्यक्ति जब उसे ठीक करवाने के लिए जो अन्य कागजात साथ लेकर जाने होते हैं, कई बार वे घर पर ही रह जाते हैं, या रास्ते में कहीं गिर जाते हैं, तो फिर से कार्य पूरा किए बिना घर वापिस लौटना पड़ता है। मुझे भी एक बार ऐसी तरही की परेशानियों से दो-चार होना पड़ा है। मेरे मैट्रिक के प्रमाणपत्र पर गलती से मेरे पिता जी का नाम गलत छप गया था। जिसको सही करवाने के लिए पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड मोहाली की कई बार यात्रा करनी पड़ी और फीसें भी भरनी पड़ी। यह तो मेरा अपना उदाहरण है, न जाने मेरे जैसे कितने ही और होंगे!</p>
<p style="text-align:justify;">प्राय: लोगों के जन्म प्रमाण पत्र में त्रुटियां आम देखने को मिलती हैं। क्योंकि जन्म प्रमाण-पत्र के कार्य अभी तक कम्प्यूटरीकृत नहीं हो सके हैं। जन्म प्रमाणपत्र मैन्युअल रूप से तैयार किए जाते हैं, जिस कारण त्रुटियों से भरे रहते हैं। केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक आधार कार्ड बनाने का कार्य लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अभी तक कई लोगों के आधार कार्ड नहीं बने। इसके अलावा जिनके बन चुके हैं, उनमें से बहुत से लोग ऐसे भी हैं, जिनके आधार कार्ड पर नाम, जन्म तिथि या अन्य और त्रुटियां हैं। ये लोग फिर से त्रुटियों को ठीक करवाने के लिए दफ्तरों में घूमते रहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए अब जरूरत है इस पूरे घटनाक्रम को रोकने की। सरकारी स्तर पर तैयार पत्रों पर होने वाली त्रुटियों को रोकना समय की मुख्य जरूरत है। जब कोई व्यक्ति अपने कागजात तैयार करवाने के लिए सरकारी दफ्तर में आता है, तो उनको फाईनल कॉपी देने से पहले कम्प्यूटरीकृत नमूने के रूप में एक कॉपी प्रिंट करके दी जाए, ताकि जो कोई गलती हो उसे ठीक करवाया जा सके। इसके अलावा जिन लोगों को अब गलतियों की समस्या आ रही है, उनके लिए एक ऐसी प्रणाली लागू करनी चाहिए, जिससे जो भी कोई त्रुटि का मामला सामने आता है, तो उसको तुरंत प्रभाव से ठीक किया जाए या फिर कुछ दिन का समय रखा जाए, जिससे किसी को बार-बार चक्कर काटने की जरूरत ना पड़े।</p>
<p><em><br />
सरकार के प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों द्वारा यह दावा अक्सर किया जाता है कि सभी कार्य कम्प्यूटरीकृत हो चुका है, लेकिन सवाल यह है कि सभी कार्य कम्प्यूटरीकृत होने के बावजूद यह गलतियां क्यों? लोगों को यह गलतियां ठीक करवाने के लिए परेशानियों के अलावा अपनी जेब भी ढीली करनी पड़ती है।</em></p>
<p style="text-align:justify;">
<em><strong>सुखराज चहल धनौला</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Fri, 14 Jul 2017 03:48:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पैदावार बढ़ने से भी परेशान हैं किसान</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के किसान इस बात से भी परेशान और आक्रोशित हैं कि अच्छे मानसून से अच्छी फसल हुई है। इससे कई फसलों के दाम घट गए हैं। उदाहरण के लिए, प्याज, अंगूर, सोयाबीन, मैथी और मिर्च की हालत काफी मंदी है। भारत में सरकार फसलों की कीमत तय करती है और उत्पादन को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/farmers-are-also-upset-with-the-rising-yields/article-1855"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/farmer-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के किसान इस बात से भी परेशान और आक्रोशित हैं कि अच्छे मानसून से अच्छी फसल हुई है। इससे कई फसलों के दाम घट गए हैं। उदाहरण के लिए, प्याज, अंगूर, सोयाबीन, मैथी और मिर्च की हालत काफी मंदी है। भारत में सरकार फसलों की कीमत तय करती है और उत्पादन को प्रोत्साहित और आमदनी सुनिश्चित करने के लिए किसानों से फसल ख़रीदती है, लेकिन यादातर जगहों पर सरकारें किसानों को फायदे लायक भुगतान नहीं कर पाई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ लोग मानते हैं कि पिछले साल मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले ने फसलों के दाम को प्रभावित किया है। हालांकि अब पहले जैसी कैश की समस्या नहीं है, लेकिन उपलब्धता की दिक्कत अब भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों पर भारतीय अनुसंधान परिषद में कृषि मामलों के जानकार अशोक गुलाटी कहते हैं, ‘अगर बारिश अच्छी हो तो आपकी पैदावार अच्छी होती है और दाम घट जाते हैं। इस तरह अतिरिक्त पैदावार की चोट किसानों पर पड़ती है और यह भारत में फसलों की कीमत तय किए जाने के तरीकों की ख़ामियां भी उजागर करती है। प्याज का ही उदाहरण ले लें। प्याज में 85 फीसदी पानी होता है और सूखने पर इसका वजन तेजी से घटता है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राय: व्यापारी किसानों से फसल खरीदकर उसे तिरपाल से ढककर रखते हैं। मौसम ठीक रहा तो रखी गई फसल का 3 से 5 फीसदी हिस्सा ही खराब होता है, लेकिन पारा चढ़ने पर ज्यादा प्याज सूखती है और कई बार 25 से 30 फीसदी फसल भी बर्बाद हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि आधुनिक कोल्ड स्टोरेज में प्याज 4 डिग्री सेल्सियस पर लकड़ी के बक्सों में रखी जा सकती है। यहां फसल का अधिकतम 5 फीसदी हिस्सा खराब होने की आशंका होती है। एक किलो प्याज को एक महीने के लिए स्टोर करने में एक रुपये से भी कम खर्च होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के पास पर्याप्त संख्या में कोल्ड स्टोरेज नहीं हैं। कुल करीब 7 हजार कोल्ड स्टोरेज हैं, जिनमें से ज्यादातर उत्तर प्रदेश में आलू से भरे रहते हैं। इसलिए फल और सब्जियां जल्दी खराब होती हैं। जब तक भारत में फसलों का स्टोरेज बेहतर नहीं होता, अतिरिक्त फसल किसानों के लिए बर्बादी ही ला सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरा, फूड प्रोसेसिंग इतनी नहीं होती कि फसलों को ख़राब होने से रोका जा सके। दोबारा प्याज का उदाहरण देखिए। प्याज की घटती-बढ़ती कीमतों पर काबू करने का एक तरीका यह है कि उन्हें ‘डिहाइड्रेट’ कर दिया जाए और प्रोसेस्ड प्याज की उपलब्धता बढ़ाई जाए। लेकिन अभी भारत के कुल उत्पादन की सिर्फ 5 फीसदी फल और सब्जियां प्रोसेस की जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">साफ है कि भारत में कृषि नीतियों को जबरदस्त बदलाव की जरूरत है। भारत का अन्न भंडार कहा जाने वाला पंजाब इसका उदाहरण है। ऐसे समय में जब भारत में अन्न की कोई कमी नहीं होती, इसके फसली क्षेत्र और भूजल इस्तेमाल का 80 फीसदी गेहूं और चावल में लगता है। अनाज के बढ़ते उत्पादन का मतलब है कि धान और गेहूं की कीमतें नहीं बढ़ रही हैं और किसानों को कोई लाभ नहीं हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">‘रीस्टार्ट: द लास्ट चांस फॉर द इंडियन इकोनॉमी’ के लेखक मिहिर शर्मा कहते हैं, ‘नीतियां किसानों के पास कोई विकल्प नहीं छोड़तीं। जिन किसानों को हर साल महंगी होतीं सब्जियां उगानी चाहिए, वे गेहूं उगा रहे हैं, जिसकी हमें जरूरत ही नहीं है, लेकिन यहां सरकार यह अच्छी चीज करती है कि बिना देरी किए फसल खरीदने की कीमतें बढ़ा देती है और किसान कष्ट से बच जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की नई बीजेपी सरकार को भी अतिरिक्त पैदावार का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने आलू का खरीद मूल्य बढ़ाने और फिर ‘विवादित’ कर्जमाफी के ऐलान में देर नहीं की। इससे वहां किसानों का गुस्सा दब गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-सौतिक बिश्वास</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2017 00:15:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रशासन कर रहा लापरवाही, आमजन भुगत रहा खामियाजा</title>
                                    <description><![CDATA[समस्या: हांसी का बस स्टैंड अपनी बदहाली पर बहा रहा आंसू बरसाती पानी की नहीं हुई निकासी, राहगीर हो रहे परेशान हांसी(सच कहूँ न्यूज)। हांसी में रविवार को दूसरे दिन भी बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पाई। इसके चलते नगर के विभिन्न क्षेत्रों मेंं रविवार को जलभराव की स्थिति रही। हांसी शहर की इस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/negligence-of-pwd-department-passenger-getting-upset/article-1383"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/hansi.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">समस्या: हांसी का बस स्टैंड अपनी बदहाली पर बहा रहा आंसू</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>बरसाती पानी की नहीं हुई निकासी, राहगीर हो रहे परेशान</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>हांसी(सच कहूँ न्यूज)। </strong>हांसी में रविवार को दूसरे दिन भी बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पाई। इसके चलते नगर के विभिन्न क्षेत्रों मेंं रविवार को जलभराव की स्थिति रही।</p>
<p style="text-align:justify;">हांसी शहर की इस बदहाली को लेकर नगर परिषद व जनस्वास्थ्य विभाग तो लापरवाही बरत ही रहा है। वहीं हांसी का बस स्टैंड भी पीडलब्यूडी विभाग की लापरवाही की के चलते अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। बस स्टैंड के अधिकारियों का कहना है कि करीब 4 वर्ष पूर्व बस स्टैंड के रिनोवेशन के लिए करीब 70 लाख की राशि आई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन आज तक उसे प्रयोग में नहीं लाया गया है। इस सम्बंध में कई बार पीडब्लयूडी विभाग से जवाब मांगा गया, उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है। बारिश व तेज अंधड़ के चलते बस स्टैंड परिसर की दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई। बस स्टैंड के अधिकारियों के अनुसार स्टैंड परिसर में पिछले कई वर्षों से पेंट तक नहीं किया गया। दीवारे क्षतिग्रस्त हो गई है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ट्रैफिक व्यवस्था बेहाल</h2>
<p style="text-align:justify;">सबसे बड़ी समस्या, दूसरे दिन भी बस स्टैंड पानी से लबालब नजर आया। जब भी हांसी शहर में बारिश आती है, तो बस स्टैंड परिसर पूरी तरह पानी में डूब जाता है। इसके चलते यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर जीटी रोड़ पर पानी खड़ा होने के चलते दूसरे दिन भी ट्रैफिक व्यवस्था बेहाल रही। इसके चलते ट्रैफिक कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं नगर के एसडी कॉलेज रोड़, बजरंग आश्रम, मंडी सैनियान, जींद चौक, यति नगर आदि क्षेत्रों मे दूसरे दिन भी पानी की निकासी नहीं हो पाई।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2017 00:56:22 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>डेविस कप टीम से बाहर रखने पर नाराज ‘बोपन्ना’</title>
                                    <description><![CDATA[New Delhi: भारत की डेविस कप टीम से इस बार नजरअंदाज किए जाने से बेहद खफा देश के नंबर एक पुरुष टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना ने अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) की जमकर आलोचना की है। एआईटीए ने 22 दिसंबर को न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन से पांच फरवरी तक पुणे में खेले जाने वाले डेविस कप […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/keep-out-of-the-davis-cup-team-upset-bopanna/article-642"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/07-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>New Delhi: </strong>भारत की डेविस कप टीम से इस बार नजरअंदाज किए जाने से बेहद खफा देश के नंबर एक पुरुष टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना ने अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) की जमकर आलोचना की है। एआईटीए ने 22 दिसंबर को न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन से पांच फरवरी तक पुणे में खेले जाने वाले डेविस कप मुकाबले के लिए भारतीय टीम की घोषणा की थी। साकेत मिनेनी, रामकुमार रामनाथन, यूकी भांबरी, लिएंडर पेस और प्रजनेश गुणेश्वरन इस डेविस कप टीम का हिस्सा हैं। लेकिन विश्व युगल रैंकिंग में 28वें नंबर के बोपन्ना को इसमें जगह नहीं दी गई है। बोपन्ना ने एक टीवी चैनल से कहा कि शीर्ष रैंकिंग पर होने के बावजूद वह डेविस कप टीम का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि मुझे आठ दिसंबर को एआईटीए से फोन आया था कि क्या मैं डेविस कप में खेल सकता हूं या नहीं। मैंने उनसे कहा भी था कि मैं न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलने के लिए उपलब्ध हूं। लेकिन फिर मुझे मीडिया से पता चला कि मुझे चुना नहीं गया है। उन्होंने कहा कि एआईटीए ने मुझे यह बताने तक की जरुरत महसूस नहीं की कि मैैं टीम का हिस्सा नहीं हूं। मुझे फेडरेशन के इस रवैए से बहुत दु:ख पहुंचा है। मैं भारत का युगल में शीर्ष रैंक खिलाड़ी हूं और मुझे टीम में चुना जाना चाहिए था। फेडरेशन ने मुझे कुछ तकनीकी कारण दिया था कि मैं बाएं हाथ पर खेलता हूं। लेकिन यह अजीब कारण है। 36 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी ने कहा कि वर्ष 2012 में मैं महेश भूपति के साथ खेला था और एटीपी विश्व टूर फाइनल्स में पहुंचा था। मैं उस समय दाएं हाथ पर खेला था। अगले साल फिर मैं पाब्लो क्यूवास के साथ दाएं हाथ पर खेला था। पूरी दुनिया में ही रैंकिंग ही चयन का मापदंड होता है लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। बोपन्ना अपनी चोट के कारण स्पेन के खिलाफ पिछले विश्व ग्रुुप प्लेआॅफ मुकाबले से हट गए थे।<br />
उस समय युगल मैच पेस और साकेत मिनेनी खेले थे। इससे पहले रियो ओलंपिक में बोपन्ना और पेस की जोड़ी पहले ही दौर में बाहर हो गई थी।<em> Agency</em></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/sports/keep-out-of-the-davis-cup-team-upset-bopanna/article-642</link>
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                <pubDate>Tue, 27 Dec 2016 22:55:12 +0530</pubDate>
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