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                <title>परिवार ही घर को मन्दिर बनाता है</title>
                                    <description><![CDATA[देश एवं दुनिया को परिवार के महत्व को बताने के लिए World Family Day हर साल 15 मई को मनाया जाता है। प्राणी जगत एवं सामाजिक संगठन में परिवार सबसे छोटी इकाई है। परिवार के अभाव में मानव समाज के संचालन की कल्पना भी दुष्कर है। प्रत्येक व्यक्ति किसी-न-किसी परिवार का सदस्य होकर ही अपनी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/family-makes-home-a-temple/article-61759"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/family-day.jpg" alt=""></a><br /><p>देश एवं दुनिया को परिवार के महत्व को बताने के लिए World Family Day हर साल 15 मई को मनाया जाता है। प्राणी जगत एवं सामाजिक संगठन में परिवार सबसे छोटी इकाई है। परिवार के अभाव में मानव समाज के संचालन की कल्पना भी दुष्कर है। प्रत्येक व्यक्ति किसी-न-किसी परिवार का सदस्य होकर ही अपनी जीवन यात्रा को सुखद, समृद्ध, विकासोन्मुख बना पाता है। उससे अलग होकर उसके अस्तित्व को सोचा नहीं जा सकता है। हमारी संस्कृति और सभ्यता अनेक परिवर्तनों से गुजर कर अपने को परिष्कृत करती रही है, लेकिन परिवार संस्था के अस्तित्व पर कोई भी आंच नहीं आई। वह बने और बन कर भले टूटे हों लेकिन उनके अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता है। उसके स्वरूप में परिवर्तन आया और उसके मूल्यों में परिवर्तन हुआ लेकिन उसके अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जा सकता है।</p>
<h3 class="entry-title td-module-title"><a title="Sirsa News : 76वीं सीनियर वाटर पोलो चैंपियनशिप के लिए चुने गए हरियाणा के जल धुरंधर" href="http://10.0.0.122:1245/trial-of-water-polo-players-concluded-at-msg-bhartiya-khel-gaon/">Sirsa News : 76वीं सीनियर वाटर पोलो चैंपियनशिप के लिए चुने गए हरियाणा के जल धुरंधर</a></h3>
<p>हम चाहे कितनी भी आधुनिक विचारधारा में पल (World Family Day) रहे हों लेकिन अंत में अपने संबंधों को विवाह संस्था से जोड़ कर परिवार में परिवर्तित करने में ही संतुष्टि एवं जीवन की परिपूर्णता-सार्थकता अनुभव करते हैं। परिवार का महत्व न केवल भारत में बल्कि दुनिया में सर्वत्र है, यही कारण है कि अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस परिवार संस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य युवाओं को परिवार के प्रति जागरूक करना है ताकि युवा तथाकथित आधुनिक के प्रवाह में अपने परिवार से दूर न हों। परिवार दो प्रकार के होते हैं- एक एकल परिवार और दूसरा संयुक्त परिवार। एकल परिवार में पापा- मम्मी और बच्चे रहते हैं। संयुक्त परिवार में पापा- मम्मी, बच्चे, दादा दादी, चाचा-चाची, बड़े पापा, बड़ी मम्मी, बुआ इत्यादि रहते हैं।</p>
<p>इस दिवस को मनाने की घोषणा सर्वप्रथम 15 मई 1994 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने की थी। संयुक्त परिवार टूटने एवं बिखरने की त्रासदी को भोग रहे लोगों के लिये यह दिवस बहुत अहमियत रखता है। बढ़ती जवाबदारी और जरूरतों को पूरा कर पाने का भय ही वह मुख्य कारण है जो अब संयुक्त परिवारों के टूटने का कारण बना है। जबकि वास्तव में मानव सभ्यता की अनूठी पहचान है संयुक्त परिवार और वह जहाँ है वहीं स्वर्ग है। रिश्तों और प्यार की अहमियत को छिन्न-भिन्न करने वाले पारिवारिक सदस्यों की हरकतों एवं तथाकथित आधुनिकतावादी सोच से बुढ़ापा कांप उठता है। संयुक्त परिवारों का विघटन और एकल परिवार के उद्भव ने जहां बुजुर्गांे को दर्द दिया है वहीं बच्चों की दुनिया को भी बहुत सारे आयोजनों से बेदखल कर दिया है। दुख सहने और कष्ट झेलने की शक्ति जो संयुक्त परिवारों में देखी जाती है वह एकल रूप से रहने वालो में दूर-दूर तक नही होती है।</p>
<h3>परिवार में रहने से तनावमुक्त व प्रसन्नचित्त रहते हैं | World Family Day</h3>
<p>आज के अत्याधुनिक युग में बढ़ती महंगाई और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए संयुक्त परिवार समय की मांग कहे जा सकते हैं। हम पुराने युगों की बात करें या धार्मिक मान्यताओं के आधार पर भी बात करें तो आज की ही तरह पहले भी परिवारों का विघटन हुआ करता था। लेकिन आधुनिक समाज में परिवार का विघटन आम बात हो चुकी है और उसने जीवन को जटिल से जटिलतर कर दिया है। ऐसे में परिवार न टूटे इस मिशन एवं विजन के साथ अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाता है। परिवार के बीच में रहने से आप तनावमुक्त व प्रसन्नचित्त रहते हैं, साथ ही आप अकेलेपन या डिप्रेशन के शिकार भी नहीं होते, यही नहीं परिवार के साथ रहने से आप कई सामाजिक बुराइयों से अछूते भी रहते हैं। समाज की परिकल्पना परिवार के बगैर अधूरी है और परिवार बनाने के लिए लोगों का मिलजुल कर रहना व जुड़ना बहुत जरूरी है। हम चाहे कितनी भी आधुनिक विचारधारा में हम पल रहे हों लेकिन अंत में अपने संबंधों को विवाह संस्था से जोड़ कर परिवार में परिवर्तित करने में ही संतुष्टि अनुभव करते हैं।</p>
<p>भारत गांवों का देश है, परिवारों का देश है, शायद यही कारण है कि न चाहते हुए भी आज हम विश्व के सबसे बड़े जनसंख्या वाले राष्ट्र के रूप में उभर चुके हैं और शायद यही कारण है कि आज तक जनसंख्या दबाव से उपजी चुनौतियों के बावजूद, एक ‘परिवार’ के रूप में, जनसंख्या नीति बनाये जाने की जरूरत महसूस नहीं की। ईंट, पत्थर, चूने से बनी दीवारों से घिरा जमीं का एक हिस्सा घर-परिवार कहलाता है जिसके साथ ‘मैं’ और ‘मेरापन’ जुड़ा है। संस्कारों से प्रतिबद्ध संबंधों की संगठनात्मक इकाई उस घर-परिवार का एक-एक सदस्य है। हर सदस्य का सुख-दुख एक-दूसरे के मन को छूता है। प्रियता-अप्रियता के भावों से मन प्रभावित होता है। घर-परिवार जहां हर सुबह रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा की समुचित व्यवस्था की जुगाड़ में धूप चढ़ती है और आधी-अधूरी चिंताओं का बोझ ढोती हुई हर शाम घर-परिवार आकर ठहरती है। कभी लाभ, कभी हानि, कभी सुख, कभी दुख, कभी संयोग, कभी वियोग, इन द्वंद्वात्मक परिस्थितियों के बीच जिंदगी का कालचक्र गति करता है। भाग्य और पुरुषार्थ का संघर्ष चलता है।</p>
<h3>घर-परिवार निश्चित रूप से पूजा का मंदिर है</h3>
<p>आदमी की हर कोशिश ‘घर-परिवार’ बनाने की रहती है। सही अर्थों में घर-परिवार वह जगह है जहां स्नेह, सौहार्द, सहयोग, संगठन सुख-दुख की साझेदारी, सबमें सबक होने की स्वीकृति जैसे जीवन-मूल्यों को जीया जाता है। जहां सबको सहने और समझने का पूरा अवकाश है। अनुशासन के साथ रचनात्मक स्वतंत्रता है। निष्ठा के साथ निर्णय का अधिकार है। जहां बचपन सत्संस्कारों में पलता है। युवकत्व सापेक्ष जीवनशैली से जीता है। वृद्धत्व जीए गए अनुभवों को सबके बीच बांटता हुआ सहिष्णु और संतुलित रहता है। ऐसा घर-परिवार निश्चित रूप से पूजा का मंदिर बनता है। संयुक्त परिवारों की परम्परा पर आज धुंधलका छा रहा है, परिवार टूटता है तो दीवारें भी ढहती हैं, आदमी भी टूटता है और समझना चाहिए कि उसका साहस, शक्ति, संकल्प, श्रद्धा, धैर्य, विश्वास बहुत कुछ टूटता/बिखरता है।</p>
<p>क्रांति और विकास की सोच ठंडी पड़ जाती है और जीवन के इसी पड़ाव पर फिर परिवार का महत्व सामने आता है। परिवार ही वह जगह है भाग्य की रेखाएं बदलने का पुरुषार्थी प्रयत्न होता है। जहां समस्याओं की भीड़ नहीं, वैचारिक वैमनस्य का कोलाहल नहीं, संस्कारों के विघटन का प्रदूषण नहीं, तनावों की त्रासदी की घुटन नहीं। कोई इसी परिवाररूपी घेरे के अंधेरे में रोशनी ढूंढ लेता है। बाधाओं के बीच विवेक जमा लेता है। भीड़ में अकेले रह जाता है। दुख में सुख का संवेदन कर लेता है। घर-परिवार को सिर्फ अपनी नियति मानकर नहीं बैठा जा सकता। क्योंकि इसी घर में मंदिर बनता है और कहीं घर ही मंदिर बन जाता है। कहते हैं कि आपका काम, रबड़ की गेंद है, जिस पर जितना जोर देते हैं, वह उतना ऊंचा उठता है। पर आपका परिवार कांच की गेंदें हैं, जो हाथ से छूटती हैं तो टूट ही जाती हैं।</p>
<p>कई बार हम सब भूल जाते हैं कि जीवन में सबसे जरूरी क्या है। हम इधर-उधर की बातों में इतना डूब जाते हैं कि जो सच में जरूरी है, उसे छोड़ देते हैं। हम परिवार की खुशियों के नाम पर सामान तो खरीदने में लगे रहते हैं, पर उन चीजों पर ध्यान नहीं देते जो परिवार में सबको संतुष्टि का एहसास कराती हैं, सबको जोड़ती है। ‘परिवार’ शब्द हम भारतीयों के लिए अत्यंत ही आत्मीय होता है। अपने घर-परिवार में अपने आपका होना ही जीवन का सत्य है। यह प्रतीक्षा का विराम है। यही प्रस्थान का शुभ मुहूर्त है। उम्मीद है जल्द ही समाज में संयुक्त परिवार की अहमियत दुबारा बढ़ने लगेगी और लोगों में जागरूकता फैलेगी कि वह एक साथ एक परिवार में रहें जिसके कई फायदे हैं। इंसानी रिश्तों एवं पारिवारिक परम्परा के नाम पर उठा जिन्दगी का यही कदम एवं संकल्प कल की अगवानी में परिवार के नाम एक नायाब तोहफा होगा।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>ललित गर्ग, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (ये लेखक के निजी विचार हैं।)</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Sep 2024 16:40:58 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>20 माह से लापता 21 वर्षीय युवक को परिजनों से मिलाया</title>
                                    <description><![CDATA[दिपक कुमार के पिता व भाई ओमप्रकाश लेने यहा पहुंचे। इतने समय बाद पुत्र को देखकर पिता की आखें नम हो गई व गले से लगा लिया। कानूनी प्रक्रिया के बाद दीपक को उनके परिवार के हवाले कर दिया गया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/missing-person-introduced-to-family/article-12281"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/missing-person-introduced-t-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">डेरा प्रेमी राजेन्द्र इन्सां ने अब तक 39 बिछुडे लोगों</h1>
<h1 style="text-align:center;">को परिजनों से मिला दिया है  (Humanity)</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>केसरीसिंहपुर, सच कहूँ न्यूज।</strong> डेरा सच्चा सौदा के पूज्य संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा चलाए गए (Humanity,)  मानवता भलाई के कार्यों पर चलते हुए उनके अनुयाई समाजहित के लिए कई कार्य कर रहे हैं। स्थानीय ब्लॉक केसरीसिंहपुर के सेवादार भी इन कार्यों के लिए दिन रात एक कर रहै है। मण्डी में घूम रहे मंदबुद्धि लोगें का ईलाज करवाकर उनके घर पहुंचाने का कार्य लगातार जारी किया हुआ है। 20 माह से लापता मानसिक रोगी के परिजनों के लिए रविवार का दिन खुशियों का पैगाम लेकर आया। एक बार फिर स्थानीय डेरा प्रेमी राजेन्द्र इन्सां एवं उसकी टीम मानसिक रोगियों के लिए वरदान साबित हुए। उनकी ओर से यह 39वां प्रयास था जिसमे वे सफल हुए और परिवार से बिछुड़े पुत्र को एक बार फिर मिला दिया ।</p>
<h2>डेरा प्रेमी के इस पुनीत कार्य की चहुंओर हो रही सराहना</h2>
<p style="text-align:justify;">गांव नयागांव बहेरवागांछी, बिहार का रहने वाला 21 वर्षीय युवक दिपक कुमार पुत्र अकलु पंडित 18 अप्रैल 2018 से लापता था। घरवाले बहुत परेशान थे और उन्होंने बहुत तलाश की लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। मिली जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले यह युवक केसरीसिंहपुर क्षेत्र में घूमता नजर आया। जब इस बारे डेरा सच्चा सौदा के राजेंद्र कुमार इन्सां को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने आधार कार्ड व अन्य सूत्रों से सुराग निकाला तो उसकी पहचान हो पाई।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">उस युवक के घर का ठिकाना पता लगाकर उनके बच्चों को सूचना दी गई।</li>
<li style="text-align:justify;">दिपक कुमार के पिता व भाई ओमप्रकाश लेने यहा पहुंचे।</li>
<li style="text-align:justify;">इतने समय बाद पुत्र को देखकर पिता की आखें नम हो गई व गले से लगा लिया।</li>
<li style="text-align:justify;">कानूनी प्रक्रिया के बाद दीपक को उनके परिवार के हवाले कर दिया गया।</li>
<li style="text-align:justify;">परिवारजनों ने डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों की मानवता की प्रशंसा की व धन्यवाद भी किया।</li>
<li style="text-align:justify;">राजेंद्र इन्सां सहित इस मानवता भलाई के कार्य में प्रेमी परविंद्र इन्सां, जयंत इन्सां व काला सिंह इन्सां आदि का भरपूर सहयोग रहा ।</li>
</ul>
<p><strong>पार्षद सोमनाथ नायक कहा डेरा प्रेमी राजेन्द्र इन्सां का कार्य बहुत ही सराहनीय है। </strong></p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><em>कस्बे के प्रत्येक समाजसेवी कार्यो में भी इनका खूब योगदान रहता है। </em></li>
<li style="text-align:justify;"><em>मानव भलाई का यह पुनित कार्य है। </em></li>
<li style="text-align:justify;"><em>जिसमे उन्होंने 39 बिछुड़े लोगों को मिलाने का कार्य कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।</em></li>
<li style="text-align:justify;"><em>हम इनके इस पुनीत कार्य की जितनी प्रशंसा की जाए कम है । </em></li>
</ul>
<p><strong>सीआई साहब सुरेंद्र पूनिया ने कहा राजेंद्र इन्सां जी का कार्य बहुत ही सराहनीय है।</strong></p>
<ul>
<li><em>इनका धरातल पर कार्य देखकर मन बड़ा प्रसन्न हुआ।</em></li>
<li style="text-align:justify;"><em> वास्तव में मानसिक रोगी को संभाल कर रखना और उसके बाद उसके परिवार का पता लगाना बहुत बड़ी जिम्मेदारी वाला काम होता है।</em></li>
<li style="text-align:justify;"><em> इसे बड़ी शिद्दत के साथ राजेंद्र इन्सां निभा रहे हैं। हमें सदैव इनका सहयोग रहता है।</em></li>
</ul>
<p> </p>
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</span></span></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2020 20:49:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खुलासा: बच्चों को बचाने के लिए मां ने किया संघर्ष, पति ने किया 15 बार चाकू से वार</title>
                                    <description><![CDATA[गाजियाबाद (सच कहूँ)। यूपी के गाजियाबाद में मरने से पहले अंशुबाला ने अपने बच्चों को बचाने के लिए जमकर संघर्ष किया था। अंशुबाला के शरीर पर हत्यारे ने चाकू के कुल 15 वार किए हैं। मौके पर भी महिला का शव रसोई के बाहर जिस स्थान पर मिला वहां कई जगह खून उसके हाथ-पैर से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/software-engineer-killed-entire-family/article-8671"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/muder.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>गाजियाबाद (सच कहूँ)।</strong> यूपी के गाजियाबाद में मरने से पहले अंशुबाला ने अपने बच्चों को बचाने के लिए जमकर संघर्ष किया था। अंशुबाला के शरीर पर हत्यारे ने चाकू के कुल 15 वार किए हैं। मौके पर भी महिला का शव रसोई के बाहर जिस स्थान पर मिला वहां कई जगह खून उसके हाथ-पैर से लगा हुआ था। जबकि बच्चों के सिर पर धारदार हथियार से पीछे से वार करने के साथ ही गला रेता गया है। यह खुलासा शवों के पोस्टमार्टम से हुआ है। आपको बता दें कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी पत्नी और तीन बच्चों की हत्या कर फरार हो गया था।</p>
<p>शाम करीब तीन बजे अंशुबाला (32), प्रथमेश (7) आकृति (4) और आरव (4) के शव का पोस्टमार्टम शुरू किया गया। शाम 5:30 बजे शवों का पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। शाम करीब छह बजे से सात बजे के बीच परिजनों ने शवों का अंतिम संस्कार हिंडन स्थित शमशान घाट पर कर दिया। अंतिम संस्कार में बिहार से आए कुछ रिश्तेदार भी शामिल हुए।</p>
<p>पोस्टमार्टम में मृतकों के किसी नशीली दवा पाए जाने का पता नहीं चला है। जिस तरह महिला के शरीर पर चाकू के 15 वार मिले हैं और फ्लैट में रसोई के बाहर महिला का शव मिला उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि महिला ने बच्चों को बचाने के लिए संघर्ष किया था। हाथों पर चाकू के सबसे अधिक वार किए गए हैं। क्योंकि महिला ने खुद को बचाने के लिए हाथों से वार रोकने का प्रयास किया होगा। पुलिस अनुमान लगा रही है कि शनिवार देर रात 12 बजे से 2 बजे के बीच यह वारदात हुई होगी।</p>
<h3>‘खुद मर जाता सुमित तो दिल को तसल्ली हो जाती’</h3>
<p>मृतका अंशूबाला उर्फ पूजा के भाई पंकज कुमार का कहना है कि सुमित बेहद चालाक इंसान है। वह एक झूठ को छिपाने के लिए हजारों झूठ बोल सकता है। उसने वीडियो में सायनाइड खाकर जान देने की बात कही है, लेकिन उसने खाया क्यूं नहीं, अगर वह सायनाइड खाकर मर जाता तो उन्हें तसल्ली हो जाती। अंशूबाला के परिवार ने आर्थिक तंगी में चार लोगों की नृशंस हत्या से इंकार किया है। .</p>
<p>अंशु के पिता वैद्यनाथ का कहना है कि सुमित 14 लाख रुपये के पैकेज पर बंगलुरू में आईटी कंपनी में नौकरी करता था। तीन माह पहले ही उसकी नौकरी छूटी थी इसलिए आर्थिक तंगी जैसे हालात नहीं थे। वह कोरबा में कोल इंडिया से सेवानिवृत्त हैं। वह भी उसके परिवार की अक्सर मदद करते थे। सुमित की नशे की लत की जानकारी उन्हें करीब डेढ़ साल पहले ही हुई थी। इसी लत के चलते वह पत्नी से झगड़ा करता था और बच्चों को बुरी तरह मारता पीटता था। पंकज का कहना है कि बुधवार को वह अंतिम बार अपनी बहन अंशू के घर गया था। उस वक्त सब कुछ ठीक ठाक था। .</p>
<h3>फेसबुक पर सक्रिय था</h3>
<p>ज्ञान खंड-4 में पत्नी और तीन बच्चों की धारदार हथियार से हत्या के बाद से फरार आरोपी ने घटना वाली रात में ही फेसबुक पर एक वीडियो को शेयर किया है। फेसबुक पर शेयर वीडियो दुनिया में बढ़ती आबादी को लेकर जिक्र है। इसके अलावा हाल के दिनों में आरोपी लगातार पीएम मोदी के विरोधी पोस्ट शेयर करता रहा है। जबकि उसकी पत्नी के फेसबुक पर आखिरी पोस्ट साल 2018 में की गई है। घटना की रात में आरोपी सुमित कुमार ने फेसबुक पर अपनी ही पोस्ट को दोबारा शेयर किया है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Apr 2019 10:26:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कोर्ट में बच्ची ने कहा, मम्मी घर चलो, साथ ही रहेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[बच्ची की कस्टडी को लेकर हुई सुनवाई भोपाल (एजेंसी)। कुटुम्ब न्यायालय, दोपहर के 1.45 बजे हैं। 7 साल की मासूम, उसके माता-पिता और पक्षकारों से भरा कोर्ट रूम। डायस पर जज भावना साधौ। मामला था, बच्ची की कस्टडी का। अदालत को तय करना था कि वो मां के पास रहेगी या पिता के पास। दरअसल, अब […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/in-court-the-girl-said-mummy-lets-go-home-we-will-stay-together/article-6843"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/court.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">बच्ची की कस्टडी को लेकर हुई सुनवाई</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>भोपाल (एजेंसी)।</strong> कुटुम्ब न्यायालय, दोपहर के 1.45 बजे हैं। 7 साल की मासूम, उसके माता-पिता और पक्षकारों से भरा कोर्ट रूम। डायस पर जज भावना साधौ। मामला था, बच्ची की कस्टडी का। अदालत को तय करना था कि वो मां के पास रहेगी या पिता के पास। दरअसल, अब तक मासूम अपने पिता के साथ रहती थी और मां भोपाल में अलग रहती हैं।सुनवाई शुरू हुई। जज भावना साधौ ने बच्ची से पूछा कि तुम किसके साथ रहना चाहती हो? बच्ची ने कहा- पापा के पास रहती हूं। इसी दाैरान बच्ची की नजर कोर्ट में खड़ी अपनी मम्मी पर पड़ी तो उसने कहा- मम्मी, आप हमारे साथ घर चलो, हम साथ-साथ रहेंगे। सब ठीक हो जाएगा। बच्ची की ये बातें सुनकर मां की आंखों में आंसू आ गए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कोर्ट रूम में इस दौरान सभी भावुक हो गए</h3>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट रूम में इस दौरान सभी भावुक हो गए। जज भावना साधौ ने बच्ची के सिर पर हाथ फेरा और उसे अपनी मम्मी के पास जाने को कहा। बच्ची डॉयस से नीचे आई और अपनी मां से लिपट गई। यह देख अन्य पक्षकारों की आंखों में आंसू आ गए। इसके बाद जज ने बच्ची के माता- पिता को समझाया। उन्हेंं बच्ची का वास्ता देकर मनमुटाव खत्म कर साथ रहने की सलाह दी। इस बीच पति-पत्नी में थोड़ी बहुत तकरार हुई लेकिन आखिरकार दोनों साथ रहने के लिए राजी हो गए।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">भोपाल में रहने वाली सोनाली (परिवर्तित नाम) की शादी सुरेश (परिवर्तित नाम) से 10 साल पहले हुई थी।</li>
<li style="text-align:justify;">दो साल बाद बेटी का जन्म हुआ। सोनाली का आरोप था कि ससुराल वाले उसे बेवजह परेशान करते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">ससुराल वालों ने कुछ कागजों पर साइन करवाकर उसे घर से निकाल दिया था।</li>
<li style="text-align:justify;">ससुराल वालों ने बेटी को अपने पास ही रख लिया।</li>
<li style="text-align:justify;">सोनाली ने अपनी बेटी से कई बार मिलने की कोशिश की लेकिन पति और ससुराल वालों ने उससे मिलने नहीं दिया।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके बाद सोनाली ने राजधानी की कोर्ट में पति के खिलाफ भरण पोषण के लिए एक दावा लगाया था।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">बेटी की कस्टडी को लेकर इसी साल मामला किया था पेश</h3>
<p style="text-align:justify;">सोनाली ने इसी साल कुटुम्ब न्यायालय में बेटी को अपने साथ रखने के लिए धारा 12 संरक्षक एवं प्रतिपाल्य अधिनियम के तहत मामला पेश किया था। अदालत में पेश मामले में सोनाली ने अपने पति पर आरोप लगाते हुए गुहार लगाई कि बच्ची का ध्यान रखने वाला कोई नहीं है। इसलिए बच्ची की सही देखभाल के लिए उसे उसकी कस्टडी दी जाए। लेकिन बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान बच्ची के भावुक शब्दों और जज की समझाइश से एक टूटा हुआ घर फिर से बस गया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Dec 2018 10:15:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>झारखंड में एक परिवार के 6 सदस्यों के शव मिले</title>
                                    <description><![CDATA[मृतकों में दो पुरुष, दो महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। Jharkhand: 6 Persons family found dead हजारीबाग (झारखंड)। खजांची तालाब के पास रविवार सुबह एक फ्लैट से एक ही परिवार के 6 सदस्यों की संदिग्ध अवस्था में लाशे बरामद हुई। मृतकों में दो पुरुष, दो महिलाएं और दो बच्चे भी शामिल हैं जाकि 8 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/jharkhand-6-persons-family-found-dead/article-4842"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/jharkhand-6-persons-family-found-dead.jpg" alt=""></a><br /><h1>मृतकों में दो पुरुष, दो महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। Jharkhand: 6 Persons family found dead</h1>
<p><strong>हजारीबाग (झारखंड)।</strong></p>
<p>खजांची तालाब के पास रविवार सुबह एक फ्लैट से एक ही परिवार के 6 सदस्यों की संदिग्ध अवस्था में लाशे बरामद हुई। मृतकों में दो पुरुष, दो महिलाएं और दो बच्चे भी शामिल हैं जाकि 8 और 10 साल के है दोनों। पुलिस को छानबीन के दौरान कमरे से तीन लिफाफे मिले हैं, जिन पर भारी कर्ज और बदनामी के डर से जान देने की बात लिखी है। हालांकि, एक ही परिवार के सभी सदस्यों (मृतकों) की पहचान महावीर महेश्वरी (70), उनकी पत्नी किरण देवी (65), बेटा नरेश अग्रवाल (40), उनकी पत्नी प्रीति अग्रवाल (38), नरेश का बेटा अमन (10) और बेटी अन्वी (8) के रूप में की हुई है। महावीर और उनकी पत्नी का शव कमरे में फंदे से झूलता मिला, जबकि बहू का शव बिस्तर पर पड़ा था। अंदाजन अन्वी को जहर दिए जाने का शक है। और उनके छोटे बेटे अमन का गला रेत कर हत्या की गई है। इस दौरान छानबीन में पुलिस को नरेश का शव अपार्टमेंट के नीचे मिला। इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद उनकी लाश के पास खून नहीं मिला। फंदे से लटके महावीर के पैर भी बिस्तर को छू रहे थे, ऐसे में पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों बिंदुओं से मामले की जांच कर रही है।</p>
<h1>मार्केट में नरेश के 50 लाख रुपए फंसे थे Jharkhand: 6 Persons family found dead</h1>
<p>सुबह अपार्टमेंट के नीचे जब नरेश की लाश मिली तो अपार्टमेंट के लोगों के होश खामोश थे। मौके पर मौजूद लोग बिना वक्त गवाए नरेश के फ्लैट में पहुंचे, फ्लैट में पहुंचने पर लोगो ने देखा की उनके फ्लैट का दरवाजा खुला हुआ है। जैसे लोग फ्लैट के अंदर गए तो अंदर का ये भयानक नजारा देख कर सभी लोग सन्न रह गए। जब वे लोगउन्होंने देखा के फ्लैट में पांच लोगों के शव नजर आए। देवेश ने बताया कि नरेश के करीब 50 लाख रुपए मार्केट में फंसे थे, जो वापस नहीं मिल रहे थे। लिहाजा, उन पर काफी कर्ज हो गया था। जिसके चलते शायद उन्हों ये कदम उठाया हो।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Jul 2018 08:51:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>साध संगत ने जरूरतमंद परिवार लड़की की शादी में सामान देकर की मदद</title>
                                    <description><![CDATA[पटियाला/पातड़ां। डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए जा रहे 133 मानवता भलाई के कार्याें को आगे बढ़ाते ब्लॉक पातड़ां की साध-संगत ने आर्थिक रूप से कमजोर एक लड़की की शादी में मदद की। प्राप्त जानकारी के अनुसार पंजाब राज्य में ब्लॉक पातड़ां की साध-संगत ने स्थानीय शहर की टिब्बा बस्ती के निवासी जरूरतमंद परिवार की लड़की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/helpful-accompaniment-giving-luggage-to-the-needy-family/article-4653"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/sangat-copy.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पटियाला/पातड़ां।</strong></p>
<p>डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए जा रहे 133 मानवता भलाई के कार्याें को आगे बढ़ाते ब्लॉक पातड़ां की साध-संगत ने आर्थिक रूप से कमजोर एक लड़की की शादी में मदद की। प्राप्त जानकारी के अनुसार पंजाब राज्य में ब्लॉक पातड़ां की साध-संगत ने स्थानीय शहर की टिब्बा बस्ती के निवासी जरूरतमंद परिवार की लड़की की शादी में जरूरत का सामान देकर मानवता भलाई कार्य कर आर्थिक रूप से इस परिवार की मदद की गई। शादी में सहयोग के लिए परिवार व उसके सदस्यों ने पूजनीय हजूर पिता संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का और साध-संगत को तहदिलों धन्यवाद किया।</p>
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Jul 2018 09:18:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आग लगने से झुलसी विवाहिता</title>
                                    <description><![CDATA[ससुर परिवार पर विवाहिता को आग लगाकर हत्या करने का आरोप, हालत गंभीर पटियाला(खुशवीर सिंह तूर)। ससुराल परिवार द्वारा एक विवाहिता को आग लगाकर जलाने का मामला सामने आया है। उसे पहले यहां राजिन्द्रा अस्पताल में दाखिल करवाया गया व उस के बाद हालत गंभीर देखते उसे पीजीआई चण्डीगढ़ में रैफर कर दिया गया है। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/murder-blame-on-in-laws-family/article-4235"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/fire-news.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;">ससुर परिवार पर विवाहिता को आग लगाकर हत्या करने का आरोप, हालत गंभीर</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटियाला(खुशवीर सिंह तूर)।</strong> ससुराल परिवार द्वारा एक विवाहिता को आग लगाकर जलाने का मामला सामने आया है। उसे पहले यहां राजिन्द्रा अस्पताल में दाखिल करवाया गया व उस के बाद हालत गंभीर देखते उसे पीजीआई चण्डीगढ़ में रैफर कर दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">22 वर्षीय रजनी बेटी अशोक कुमार निवासी गली नं: 3 नजदीक महेन्द्रा कॉलेज का दो वर्ष पहले ही नाभा के गांव छज्जूभट्ट में मेजर सिंह से विवाह हुआ था। रजनी के ताया सोम नाथ व जीजा हरजीत सिंह ने बताया कि विवाह के बाद ही उनकी लड़की को ससुराल परिवार द्वारा परेशान करना शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि वह लड़की को कहते थे कि मोटरसायकल और दो लाख रुपये ले कर आए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि वह ताने मारते थे कि आप बारात की सेवा सही नहीं की है। सोम नाथ ने बताया कि अभी लगभग दो सप्ताह पहला ही थाना कोतावाली में दोनों पक्षों में समझौता हुआ था जिसके बाद उसे ससुराल घर भेजा गया था, परंतु आज कुछ दिनों बाद ही उसे तेल डाल कर जला दिया गया।</p>
<h2 style="text-align:center;">राजिन्द्रा अस्पताल से पीजीआई किया रैफर</h2>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि आज सुबह उनको ससुराल परिवार में से फोन आया कि रजनी के दुपट्टे के पल्ले को आग लग गई और वह भी झुलसी गई। उन्होंने बताया कि यहां राजिन्द्रा अस्पताल में ईलाज के लिए लाया गया। डॉक्टरों द्वारा उसकी गंभीर हालत को देखते पीजीआई चण्डीगढ़ में रैफर कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि उस का पति, सास, ससुर, जेठ, जेठानी लड़की को बहुत परेशान करते थे और उन की तरफ से ही उसे आग लगाई गई है।</p>
<h2 style="text-align:center;">लड़की बयानों के बाद ही की जाएगी आगामी कार्रवाई : एसएचओ</h2>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी जब थाना सदर नाभा के एसएचओ बिक्कर सिंह के साथ बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह पीजीआई चण्डीगढ़ में बयान लेने गए हैं और उस के बयानों के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि उक्त लड़की की हालत नाजुक बनी हुई है।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/murder-blame-on-in-laws-family/article-4235</link>
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                <pubDate>Sun, 17 Jun 2018 08:38:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मकान की गिरी छत, बाल-बाल बचा परिवार</title>
                                    <description><![CDATA[सच कहूँ-अमित गुलाटी/ कलायत। कलायत के वार्ड-10 में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब भारतीय सेना का हिस्सा रहे स्वर्गीय प्रेम सिंह बैरागी के आशियाने की छत अचानक ध्वस्त हो गई। घटना में सैनिक की पत्नी धनपति, अजय, मयंक और एक मासूम लड़की राखी बाल-बाल बच गई। घर पूरी तरह मलबे में तबदील […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/house-falling-roof/article-4201"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/roof.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सच कहूँ-अमित गुलाटी/ कलायत।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">कलायत के वार्ड-10 में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब भारतीय सेना का हिस्सा रहे स्वर्गीय प्रेम सिंह बैरागी के आशियाने की छत अचानक ध्वस्त हो गई। घटना में सैनिक की पत्नी धनपति, अजय, मयंक और एक मासूम लड़की राखी बाल-बाल बच गई। घर पूरी तरह मलबे में तबदील हो गया। इसके अलावा घर का सारा सामान भी मलबे में दबने से नष्ट हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रभावित धनपति ने बताया कि सभी रसोई में थे। तेज धमाके के साथ पूरा घर हिल गया। धूल और धमाके के बीच वे सहम गए। उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर क्या हुआ है? हड़बड़ाहट में बाहर निकलने के बाद उन्हें मंजर समझ आया। सैनिक आश्रित परिवार ने बताया कि वर्ष 2000 में आशियाने का निर्माण करवाया था। इसी के अंदर विधवा धनपति और उसके पौत्र-पौत्री रह रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले इस परिवार के पास आय का अन्य कोई साधन नहीं है। सिर छिपाने के लिए जो छत थी अब वह भी नहीं रही। हादसे से व्यथित सैनिक की पत्नी और अन्य सदस्य काफी समय घटना स्थल से कुछ दूरी पर खुले आसमान के तले बैठे रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">महिला पार्षद पूजा धीमान और विश्वकर्मा समाज संगठन प्रधान धर्मपाल धीमान ने प्रभावित परिवार को हिम्मत बंधाई। संकट में परिवार को समझ नहीं आ रहा था कि अब वे क्या करे? घटना की सूचना एस.डी.एम. जगदीप सिंह के पास पहुंची। प्रशासनिक अधिकारी ने तत्काल राजस्व विभाग को मौका मुआयना के निर्देश दिए। उधर परिवार ने अन्य स्थान पर वैकल्पिक रूप से शरण ली है।</p>
<h1 style="text-align:center;">पीएम और सीएम से मद्द की गुहार</h1>
<p style="text-align:justify;">प्रभावित धनपति ने बताया कि मकान ढह जाने के बाद बड़ी विपदाएं उसके समक्ष खड़ी हो गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से सैनिक परिवार को सहारा देने की अपील की है। इस घटना को लेकर महिला नगर पार्षद पूजा धीमान, शशी बाला कौशिक और सुरेश वाल्मीकि सहित कुछ दूसरे प्रतिनिधियों ने प्रशासन से सैनिक परिवार को मदद देने का आग्रह किया है।</p>
<h2 style="text-align:center;">शहीद प्रेम सिंह के परिवार को आज तक नहीं मिली सरकारी सहायता</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रेम सिंह बैरागी को भारतीय सेना के जांबाज सिपाही थे। उन्होंने देश की रक्षा के लिए 25 सितम्बर 1965 से 1 मार्च 1966 तक, 1971 और 20 अगस्त 1971 से 9 जून 1972 तक दुश्मन देशों से लड़ाईयां लड़ी। इस साहस के परिचय से खुश होकर उन्हें सरकार ने संग्राम मैडल, दीर्घ राष्ट्र सेवा और सैन्य सेवा सहित कई मैडल दिए। हैरानी का विषय है कि इस प्रकार की कुबार्नी के बाद भी आज तक सरकार से किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली? परिवार लंबे अरसे से गरीबी में जीवन जी रहा है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Jun 2018 09:06:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हमारे सुपरफास्ट जीवन से परिवार पीछे छूट गया</title>
                                    <description><![CDATA[आजकल हमारा जीवन सुपर फास्ट हो गया है। अभी मनुष्य के पास तरह तरह की हवा से भी अधिकं तीव्रगति की सवारियां और तरह-तरह के यान हैं। इन सब की तेज गति से भी लोग संतुष्ट नहीं हैं। कंप्यूटर के नामं से जो मशीन विज्ञान ने निकाली है, उसकी शक्ति, स्मृति और रफ्तार नित्य प्रति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/our-superfest-life-left-the-family-behind/article-3457"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/family-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आजकल हमारा जीवन सुपर फास्ट हो गया है। अभी मनुष्य के पास तरह तरह की हवा से भी अधिकं तीव्रगति की सवारियां और तरह-तरह के यान हैं। इन सब की तेज गति से भी लोग संतुष्ट नहीं हैं। कंप्यूटर के नामं से जो मशीन विज्ञान ने निकाली है, उसकी शक्ति, स्मृति और रफ्तार नित्य प्रति बढ़ती जा रही है। बटन दबाओ और सामने आ जाती हैं सारे ज्ञान-विज्ञान की चीजें। अब हमारे सारे ज्ञान-विज्ञान आसमान में बादलों की तरह विचरण कर रहे हैं। पाषाण युग से आधुनिक युग तक मानव की यात्रा में लाखों वर्ष लग गये। अब आज के मनुष्य में न वह धैर्य है और न समय। वाहनों की विकास यात्रा से हम मानव समाज की विकास यात्रा को बहुत हद तक समझ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले लोग पैदल चलते थे। फिर उन्होंने तरह तरह के जानवरों को अपना वाहन बनाया जैेसे हाथी, घोड़ा,गधा, ऊंट, याक और बैल आदि। फिर गाड़ियां बनी जिनमें इन मवेशियों को जोता गया। फिर साइकिल युग आया, रेलगाड़ी का युग आया, तरह तरह के मोटर साइकिलें व मोटर गाड़ियां सड़कों पर दौड़ने लगी मगर आदमी की भूख इनकी रफ्तार से मिटी नहीं। उन्होंने हवाई जहाज बनाया, पानी में तैरने वाले यान बनाए मगर उनसे उनका मन नहीं भरा तो वह ऐसे-ऐसे राकेट बनाने लगा हैं कि मंगल, चंद्र तक जा पहुंचे हैं। उनकी खोज जारी है। अब वे सूर्य फतह करने की तैयारी में हैं। वे ऐसे हवाई यान बनाना चाहते हैं कि ब्रह्मांड में बसी अनेकों दुनियां से हमारी पृथ्वी का संबंध ऐसा बने कि धरती आकाश घर आंगन सा हो जाये।</p>
<p style="text-align:justify;">विज्ञान ने हमें अपना विस्तार करने के बहुत रास्ते दिये हैं। जब सड़कों पर चलने वाली मोटर साइकिल जहाज की तरह आसमान में उड़ेगी। अब धरती पर चलने वाली रेलगाड़ी से बहुत आगे बुलेट टेÑन भारत में चलेगी जिस पर जापान के साथ मिलकर काम हो रहा है। कहने का तात्पर्य यह है कि आज के मनुष्य को आवाज से भी अधिक तीव्र गति से चलने वाले वाहन भले ही प्राप्त हो जायें मगर रफ्तार के मामले में उसकी भूख प्यास मिटने वाली नहीं है। मुझे लगता है कि आने वाले वक्त में मनुष्य के शरीर में ही कोई मशीन फिट होगी जिसके बटन दबाने पर ही आदमी चिड़ियों की तरह बड़ी तीव्र गति से आसमान में उड़कर अपने गन्तव्य स्थान में पहुंच जाएगा। उस समय हम एक नई दुनियां के नये आदमी होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आदमी के विकास की रफ्तार में इतनी तेजी आई है कि दुनियां उसकी मुट्ठी में आ गई है। वह पलक मारते ही एक बटन दबाने पर जिस देश को देखना चाहे, जिस व्यक्ति से मिलना चाहे, अपने बिछावन पर पड़े पड़े अपने मोबाइल के स्क्रीन पर सब कुछ देख लेते हैं। विज्ञान ने लोगों के हाथ में मोबाइल पकड़ा दिया है। हम भले ही घर बैठे बैठे अपने मोबाइल या टीवी पर भले ही सारा ब्रह्यांड देख लें मगर एक ही छत के नीचे रहने वाले अपने माता-पिता को देख नहीं पाते। उनके मोबाइल पर भले ही उनके यार-‘ दोस्त आ जाये। उनके घरों के जश्नों के दृश्य उनके मोबाइल पर भले ही आ जायें मगर उनके माता-पिता के चित्र न उनके हृदय में हैं और न उनके मोबाइल पर।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले परिवार का अर्थ होता था- दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची, भाई-बहन मगर अब सारी दुनियां को अपनी मुट्ठी में लेकर चलने वालों का यह बड़ा परिवार कहां खो गया, पता नहीं चलता है। अब परिवार का मतलब है मियां-बीवी और दो बच्चे बस। सरकार कहती है छोटा परिवार, सुखी परिवार मगर आप अखबारों के पन्ने उलट कर देखिये और अपने पड़ोस में रहने वाले पड़ोसियों के घर देखिये तो मालूम पड़ेगा कि छोटे परिवारों में भी आग लगी है। वहां भी कलह-क्लेश का ऐसा तांडव होता है कि कोर्टं में तलाक के ढेर बढ़ते जा रहे हैं। इस वैज्ञानिक युग में मानवता, नैतिकता, विश्वास, बंधुत्व, विश्व शांति आदि की बड़ी आवश्यकता है क्योंकि आज विज्ञान ने ऐसे ऐसे विध्वंसक बमों और हथियारों का जखीरा बड़े -बड़े देशों के पास लगा दिया है कि यदि वे आपस में कभी भिड़ गये तो सारी दुनिया जलकर राख हो जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आइंस्टीन ने सच ही कहा था कि यदि कभी तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो आदमी उसी पाषाण युग में पहुंच जाएगा जहां उसने अपनी जीवन यात्रा प्रारंभ की थी इसलिए हम विज्ञान के विरोध में खड़े नहीं हैं। उनकी उपलब्धियों के प्रति अनुग्रहीत हैं मगर विज्ञान के भौतिकीय विकास और विस्तार के साथ साथ मानवता और उसके गुण ,प्रेम, सहानुभूति, करूणा, श्रद्धा, बंधुत्व,अपनत्व, उत्सर्ग, राष्टÑ प्रेम, समाज प्रेम, परिवार प्रेम एक दूसरे के प्रति सेवा सहयोग और उत्तदायित्व का भी विस्तार होना चाहिए जो हमारी फास्ट लाइफ में लुप्त होता जा रहा है। हम अतीत की मर्यादा और वर्तमान के उत्तरदायित्व से विमुख होने लगे हैं। आप टेÑन में कहीं यात्रा कर रहे हैं तो खिड़की से बाहर नजर दौड़ाइये तो देखियेगा कि रेलगाड़ी हवा की तरह आगे उड़ी जा रही है और उसी रफ्तार में पीछे की दुनियां पीछे छूटती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के जीवन के दर्शन और चिंतन मनन ने आधुनिकता के नाम पर एक ऐसे बौने आदमी का अवतरण हो रहा है जिसमें आदमियत और नैतिकता का अभाव है, उसमें स्वार्थ और नफरत की बारूद भरी है। कहने का तात्पर्य यह है कि विज्ञान जिस नये आदमी की परिकल्पना साकार करना चाहता है, उसमें हमारे प्राचीन मूल्यों और मर्यादाओं का कोई मेल नहीं है। संयुक्त परिवार से लघु परिवार निकला और लघु परिवार पानी के बुलबुले की तरह विलुप्त होने लगा है। पति अमेरिका में काम कर रहा है। पत्नी लंदन में काम कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बेटा कनाडा में पढ़ रहा है। बेटी स्विटजरलैंड में पढ़ रही है। अब बतलाइये इसको हम कैसा परिवार कहें। जिस तरह विज्ञान रोज नये-नये अनुसंधान कर रहा है। वैसा अनुसंधान मानव शास्त्र और समाज शास्त्र में नहीं हो रहा है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हमारा सुपर फास्ट लाइफ जिस रफ्तार से चाहे बढ़े मगर, उसका संबंध घर’-परिवार, समाज और देश व दुनियां से बना रहे क्योंकि इस संबंध से टूटा हुआ आदमी कुछ भी बन जाये मगर वह आदमी बनकर नहीं रह पायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-ज्योत्सना निधि</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Oct 2017 03:10:58 +0530</pubDate>
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                <title>परिवार में बढ़ती दूरियां</title>
                                    <description><![CDATA[सामाजिक सौहार्द का जितना हृास विगत 50 वर्षों में हुआ है, उतना तो उससे पूर्व के पांच सौ वर्षों में भी नहीं हुआ था, जबकि उस समय न हमारी पहचान थी और न देश की। देश एक उपनिवेश मात्र था। जैसे-तैसे सैकड़ों नाम तथा अनाम सेनानियों की वजह से हमने स्वतंत्रता तो हासिल कर ली। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/increasing-distances-in-the-family/article-3384"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/family.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सामाजिक सौहार्द का जितना हृास विगत 50 वर्षों में हुआ है, उतना तो उससे पूर्व के पांच सौ वर्षों में भी नहीं हुआ था, जबकि उस समय न हमारी पहचान थी और न देश की। देश एक उपनिवेश मात्र था। जैसे-तैसे सैकड़ों नाम तथा अनाम सेनानियों की वजह से हमने स्वतंत्रता तो हासिल कर ली। किन्तु आज हम स्वयं ही उसे मिटाने में लगे हुए हैं। संचार तथा परिवहन क्रांति से देशों के मध्य दूरियां कम होती जा रही हैं, जो मनुष्य कभी सामाजिक प्राणी था, वही आज पारिवारिक प्राणी बन गया है और तेजी से एकाकी प्राणी बनने की ओर अग्रसर हो रहा है। आज सब मनुष्य एक अन्धी-लंगड़ी दौड़ लगा रहे हैं। एक-दूसरे को लंगड़ी मारते हुए आगे निकल रहे हैं। इस अन्धी-लंगड़ी दौड़ में कौन गिरा, कौन कुचला गया, यह देखने के लिए रुकने की किसी को फुर्सत नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबका एकमात्र लक्ष्य एक दूसरे से आगे निकलना है। यह मानव स्वभाव है कि लोग उन्हीं का सबसे ज्यादा हित या अहित करते हैं, जिनको वे जानते-पहचानते हैं। नगरों तथा महानगरों का तो यह हाल है कि लोग अपने आजू-बाजू रहने वाले पड़ोसियों के नाम तथा उनकी शक्ल भी नहीं जानते। कौन कब जाता है, क्या करता है। यह जानने की न तो उत्सुकता है और न ही उनके पास इन व्यर्थ की बातों के लिए समय है। जिन बेजान मशीनों को मनुष्य ने अपनी सुविधा के लिए बनाया था। आज वे ही उसकी मालिक बन बैठी हैं। इसे कहते हैं घूरे के दिन फिरना। जब जड़ वस्तुएं चेतन वस्तुओं पर भारी पड़ने लगें, उससे अजीब और क्या हो सकता है, पर यही तो कलयुग (मशीनी युग) का चमत्कार है। आज की अन्धी दौड़ का एकमात्र ध्येय है अधिकाधिक द्रव्य (धन-सम्पत्ति) का संचय कर मान-प्रतिष्ठा प्राप्त करना।</p>
<p style="text-align:justify;">भले ही इससे प्राप्त मान-प्रतिष्ठा कितनी ही अस्थायी क्यों न हो। ज्यों-ज्यों मनुष्य का द्रव्य (धन सम्पत्ति) बढ़ता जाता है, त्यों-त्यों ही उसके शरीर के लिए द्रव (तरल, पानी) सूखता जाता है। नतीजा होता है द्रव पदार्थों पर निर्भर होते जाना। ऐसे लोग धीरे-धीरे ठोस पदार्थों का सेवन करने योग्य नहीं रह जाते, क्योंकि शरीर में इनको पचाने के लिए पर्याप्त पानी नहीं रहता। सकल पदार्थ है जग मांहि करमहीन नर पावत नाही।’ ऐसे ही लोगों पर सटीक बैठती है। ऐसे लोगों को जीवन पर्यन्त तरल पदार्थों को सेवन कर गुजारना पड़ता है। दूसरी तरफ उसकी आजादी को भी ग्रहण लग जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">असुरक्षा भाव के कारण जहां एक ओर वह सुरक्षाकर्मियों से घिरा रहता है तो दूसरी ओर चिकित्सकों के दल से। ऐसे लोग समाज से स्वयं ही दूर होते जा रहे हैं। राष्टÑपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, केन्द्रीय मंत्रीगण ऐसे लोग हैं, जो सामान्य आदमी की तरह न तो बाजार में घूम सकते हैं। न चाट-पकौड़ी खा सकते हैं और न ही कहीं खरीददारी कर सकते हैं। प्राचीनकाल में राजा लोग अपनी जनता का हाल जानने के लिए वेश बदलकर रात्रि को गश्त लगाया करते थे। आज के नेतागण इसके लिए अपने सहायकों पर निर्भर रहते हैं, जिनका खामियाजा उन्हें सत्ता के पंचवर्षीय नवीनीकरण में उठाना पड़ता है। हम साम्प्रदायिक अलगाव, विभेद की तो लम्बी-चौड़ी बातें करते हैं। बड़े-बड़े विशेषज्ञ बैठकर लम्बी-लम्बी बहसें करते हैं, किन्तु दिन-प्रतिदन परिवार विभेद के रूप में मंडराते संकट की अनदेखी कर रहे हैं। प्रोफेशनल अथवा प्रैक्टिकल शब्द स्वार्थी-मतलबी शब्दों का ही रूपान्तरण है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब परिवार ही बिखर जायेगा तो न समाज रहेगा न सम्प्रदाय। यदि इन्हें बचाना है तो पहले परिवार को बचाना होगा। सौभाग्य से आज भी ऐसे संयुक्त परिवार मौजूद हैं, जिनकी तीन से भी अधिक पीढ़ियां एक साथ रह रही हैं। भले ही उनके पास अकूत धन-सम्पत्ति न हो, किन्तु उनके साथ उनका पूरा परिवार, बन्धु-बान्धव होते हैं, जो हर दु:ख-सुख में उनके साथ खड़े रहते हैं। उन्हें धन की, साधनों की, संख्या बल की कमी कभी महसूस नहीं होने देते। ऐसे ही परिवारों से स्वस्थ समाज का निर्माण होता था। आवश्यकता है परिवार के विघटन को रोकने की। बिना इसके सामाजिक सौहार्द की कल्पना करना बेमानी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लेखक- मुरली मनोहर</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Oct 2017 04:39:23 +0530</pubDate>
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                <title>वृद्धों को मिले जीने की नई दिशा</title>
                                    <description><![CDATA[हमारे देश में अन्तर्राष्ट्रीय दिवसों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। अगस्त माह में अनेक अन्तर्राष्ट्रीय दिवस आयोजित होते हैं जैसे युवा दिवस, मित्रता दिवस, हिरोशिमा दिवस, स्तनपान दिवस, आदिवासी दिवस, मच्छर दिवस, फोटोग्राफी दिवस, मानवीय दिवस आदि-आदि उनमें एक महत्वपूर्ण दिवस है विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस जो 8 अगस्त को पूरी दुनिया में वृद्धों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">हमारे देश में अन्तर्राष्ट्रीय दिवसों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। अगस्त माह में अनेक अन्तर्राष्ट्रीय दिवस आयोजित होते हैं जैसे युवा दिवस, मित्रता दिवस, हिरोशिमा दिवस, स्तनपान दिवस, आदिवासी दिवस, मच्छर दिवस, फोटोग्राफी दिवस, मानवीय दिवस आदि-आदि उनमें एक महत्वपूर्ण दिवस है विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस जो 8 अगस्त को पूरी दुनिया में वृद्धों को समर्पित किया गया है। यह दिवस वरिष्ठ नागरिकों के उन्नत, स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन के लिये आयोजित होता है। इस दिवस को आयोजित करने की आवश्यकता इसलिये पड़ी कि आज के वरिष्ठ नागरिक जो दुनियाभर में उपेक्षा के शिकार हो रहे हैं, उनको उचित सम्मान एवं उन्नत जीवन जीने की दिशाएं मिलें।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान दौर की एक बहुत बड़ी विडम्बना है कि इस समय की बुजुर्ग पीढ़ी घोर उपेक्षा और अवमानना की शिकार है। यह पीढ़ी उपेक्षा, भावनात्मक रिक्तता और उदासी को ओढ़े हुए है। इस पीढ़ी के चेहरे पर पड़ी झुर्रियां, कमजोर आंखें, थका तन और उदास मन जिन त्रासद स्थितियों को बयां कर रही है उसके लिए जिम्मेदार है हमारी आधुनिक सोच और स्वार्थपूर्ण जीवन शैली। समूची दुनिया में वरिष्ठ नागरिकों की दयनीय स्थितियां एक चुनौती बन कर खड़ी है, एक अन्तर्राष्ट्रीय समस्या बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय परिप्रेक्ष्य में वरिष्ठ नागरिकों की दशा अधिक चिन्तनीय है। दादा-दादी, नाना-नानी की यह पीढ़ी एक जमाने में भारतीय परंपरा और परिवेश में अतिरिक्त सम्मान की अधिकारी हुआ करती थी और उसकी छत्रछाया में संपूर्ण पारिवारिक परिवेश निश्चिंत और भरापूरा महसूस करता था। न केवल परिवार में बल्कि समाज में भी इस पीढ़ी का रुतबा था, शान थी। आखिर यह शान क्यों लुप्त होती जा रही है? क्यों वृद्ध पीढ़ी उपेक्षित होती जा रही है? क्यों वृद्धों को निरर्थक और अनुपयोगी समझा जा रहा है? वृद्धों की उपेक्षा से परिवार तो कमजोर हो ही रहे हैं लेकिन सबसे ज्यादा नई पीढ़ी प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या हम वृद्ध पीढ़ी को परिवार की मूलधारा में नहीं ला सकते? ऐसे कौन से कारण और हालात हैं जिनके चलते वृद्धजन इतने उपेक्षित होते जा रहे हैं? यह इतनी बड़ी समस्या कि किसी एक अभियान से इसे रास्ता नहीं मिल सकता। इस समस्या का समाधान पाने के लिए जन-जन की चेतना को जागना होगा। इस दृष्टि से विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस की आयोजना की एक महत्वपूर्ण हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जरूरी है कि हम बुजुर्ग पीढ़ी को उसकी उम्र के अंतिम पड़ाव में मानसिक स्वस्थता का माहौल दें, आधि, व्याधि और उपाधियों को भोग चुकने के बाद वे अपना अंतिम समय समाधि के साथ गुजार सकें ऐसी स्थितियों को निर्मित करें। नई पीढ़ी और बुजुर्ग पीढ़ी की संयुक्त जीवनशैली से अनेक तरह के फायदे हैं जिनसे न केवल समाज और राष्ट्र मजबूत होगा बल्कि परिवार भी अपूर्व शांति और उल्लास का अनुभव करेगा। सबसे अधिक नई पीढ़ी अपने बुजुर्ग दादा-दादी या नाना-नानी की छत्रछाया में अपने आपको शक्तिशाली एवं समृद्ध महसूस करेगी। एक अवस्था के पश्चात निश्चित ही व्यक्ति में परिपक्वता और ठोसता आती है। बड़े लोगों के अनुभव से लाभ उठाकर युवा पीढ़ी भी संस्कार समृद्ध बन सकती है और वृद्धजनों के अनुभवों का वैभव और ज्ञान की अपूर्व संपदा उन्हें दुनिया की रफ्तार के साथ कदमताल करने में सहायक हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हावर्ड और वर्लिन के वैज्ञानिकों/मनोचिकित्सकों ने इस दिशा में गहन खोजें की हंै। जर्मन वैज्ञानिकों ने युवाओं और बुजुर्गों के समक्ष कुछ जटिल समस्याएं तथा कुछ सुविधाजनक परिस्थितियां प्रस्तुत कीं और उन्हें हल करने को कहा। देखा गया कि जीवन संबंधी समस्याओं को सुलझाने में युवाओं की अपेक्षा बुजुर्ग लोग अधिक सफल या कुशल साबित हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">अन्य अध्ययनों/विश्लेषणों से भी यह तथ्य सामने आया कि बुजुर्गों के सामने यदि कोई लक्ष्य रख दिया जाए तो वे अपने धीमे सोचने की शक्ति की क्षतिपूर्ति अपने पैने नजरिए एवं बेहतर योजनाओं के द्वारा कर लेते हैं। यह भी एक तथ्य है कि सम्यक दृष्टिकोण, पारदर्शी सोच, परिणामों का आंकलन किसी भी चीज के अच्छे-बुरे पहलुओं को तोलने/परखने की क्षमता-ये गुण वृद्धों में अपेक्षाकृत अच्छी मात्रा में उपलब्ध होते हैं। अत: आॅफिसों, संस्थाओं या घरों में बुजुर्गों को उपेक्षित करने का जो प्रचलन बढ़ रहा है, उस पर गंभीरता से पुनर्विचार की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>यह पीढ़ी उपेक्षा, भावनात्मक रिक्तता और उदासी को ओढ़े हुए है। इस पीढ़ी के चेहरे पर पड़ी झुर्रियां, कमजोर आंखें, थका तन और उदास मन जिन त्रासद स्थितियों को बयां कर रही है उसके लिए जिम्मेदार है हमारी आधुनिक सोच और स्वार्थपूर्ण जीवनशैली।</em></p>
<p style="text-align:justify;">
<em><strong>-ललित गर्ग</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Aug 2017 03:45:10 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>नवजात की मौत पर परिजनों का हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[डॉक्टर पर लगाया लापरवाही बरतने का आरोप सिविल अस्पताल में स्थिति बनी तनावूपर्ण, जांच टीम गठित मलोट/श्री मुक्तसर साहिब (सच कहूँ न्यूज)। सिविल अस्पताल में एक नवजात की मौत को लेकर परिजनों ने रविवार रात और सोमवार की सुबह जमकर हंगामा हंगामा किया, इससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मृतक बच्चे के परिजनों ने डॉक्टरों पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/ruckus-on-newborn-death-by-family/article-2968"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/protest-4.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">डॉक्टर पर लगाया लापरवाही बरतने का आरोप</h1>
<ul>
<li><strong>सिविल अस्पताल में स्थिति बनी तनावूपर्ण, जांच टीम गठित</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>मलोट/श्री मुक्तसर साहिब (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सिविल अस्पताल में एक नवजात की मौत को लेकर परिजनों ने रविवार रात और सोमवार की सुबह जमकर हंगामा हंगामा किया, इससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मृतक बच्चे के परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। अस्पताल प्रबंधकों ने इस मामले में डॉक्टरों की एक टीम गठित की है, जो मामले की जांच करेगी। पीड़ित परिवार की शिकायत पर पुलिस भी मामले की जांच में जुट गई है। जानकारी के अनुसार मलोट सिविल अस्पताल में रविवार रात को गांव बल्लूआणा निवासी बिंदू शर्मा पत्नी भिंदर पाल की डिलीवरी हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">बिंदू ने बेटे को जन्म दिया था। इसके चलते अस्पताल में उनके परिजन तीमारदारी के लिए अस्पताल में ही रह रहे थे। मगर रविवार की देर रात अस्पताल प्रबंधकों ने ज्यादा मरीज हो जाने के चलते सभी मरीजों के तीमारदारों को अस्पताल से बाहर जाने को कह दिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मामले की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी</h3>
<p style="text-align:justify;">थाना सिटी के प्रभारी बूटा सिंह ने कहा कि पुलिस ने मामले की जांच कर रही है। सुरिंदर सिंह ने डॉक्टरों व प्रबंधकों पर देर रात को बच्चे को अस्पताल से बाहर करने का आरोप लगाया है, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने तो सिर्फ तीमारदारों को बाहर जाने को कहा था। मामले की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बिंदू के पिता सुरिंदर कुमार शर्मा ने बताया कि उन्होंने जब बच्चा छोटा होने के चलते देखभाल के लिए अंदर बैठे होने की बात कही तो अस्पताल प्रबंधकों ने उन्हें बच्चे को भी साथ बाहर ले जाने को कहा। जब वह बच्चे को बाहर लेकर गए तो उसकी मौत हो गई। यह सब डॉक्टरों व अस्पताल प्रबंधकों की लापरवाही के कारण हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>मामले की जांच के लिए डॉक्टरों की टीम गठित कर दी गई है। अगर किसी डॉक्टर या स्टाफ की लापरवाही सामने आई तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मृतक बच्चे का पोस्टमार्टम भी इस टीम की निगरानी में होगा। </em></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>डॉ. गुरचरन सिंह, एसएमओ</strong></p>
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                <pubDate>Tue, 08 Aug 2017 02:41:40 +0530</pubDate>
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