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                <title>सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत हुए रिटायर</title>
                                    <description><![CDATA[बोले-हमारी सेना दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम नई दिल्ली (एजेंसी)। जनरल बिपिन रावत मंगलवार को सेना प्रमुख (Army Chief) के पद से रिटायर हो गए। अब वे बुधवार को चीफ आफ डिफेंस स्टाफ का पद संभालेंगे। अपने विदाई संदेश में जनरल रावत ने भारतीय सीमाओं की रक्षा कर रहे जवानों और देशवासियों को […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/army-chief-general-bipin-rawat-retired/article-12117"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/army-chief.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">बोले-हमारी सेना दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> जनरल बिपिन रावत मंगलवार को सेना प्रमुख (Army Chief) के पद से रिटायर हो गए। अब वे बुधवार को चीफ आफ डिफेंस स्टाफ का पद संभालेंगे। अपने विदाई संदेश में जनरल रावत ने भारतीय सीमाओं की रक्षा कर रहे जवानों और देशवासियों को नए साल की बधाई दी। साथ ही सभी विभागों से मिले सहयोग के लिए शुक्राना अदा किया। जनरल रावत ने कहा कि भारतीय सेना बेहतरीन तरीके से दुश्मन को मुंह तोड़ जवाब देने में सक्षम है। साथ ही उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख का पद सिर्फ एक ओहदा मात्र है। वो अकेले काम नहीं करता। उसे सेना के सभी जवान सहयोग करते हैं तभी वह काम कर पाता है। इस सहयोग से सेना आगे बढ़ती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जनरल बिपिन रावत ने नए आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे को बधाई और शुभकामनाएं दी। बता दें कि जनरल बिपिन रावत ने भारतीय सेना प्रमुख के रूप में 2016 में पद संभाला था। 16 दिसंबर 1978 को 11 गोरखा राइफल्स में उनकी नियुक्ति हुई थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">युद्ध स्मारक पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि  | Army Chief</h3>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले उन्हें साउथ ब्लॉक में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। बता दें कि सरकार ने जनरल बिपिन रावत को देश का पहला चीफ आॅफ डिफेंस स्टाफ घोषित किया है। वह इस पद को 1 जनवरी से संभालेंगे। सीडीएस की नियुक्ति तीनों सेनाओं के बीच बेहतरीन समन्वय के लिए की गई है। जनरल बिपिन रावत को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बनने पर अमेरिका ने बधाई दी है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>सेवानिवृत्ति पर जनरल बिपिन रावत को साउथ ब्लॉक में दिया गया गार्ड ऑफ आनर। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>सेना प्रमुख रहते सहयोग के लिए विभागों को दिया धन्यवाद।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>नए सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे को दी बधाई।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>देश के पहले सीडीएस होंगे जनरल बिपिन रावत।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>बुधवार को संभालेंगे पद की बागड़ोर।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>सीडीएस का उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतरीन समन्वय।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Dec 2019 11:28:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की अहम भूमिका : मुख्यमंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[12 जनवरी को रन फॉर यूथ एंड यूथ फॉर नेशन के तहत प्रदेश में होगी मैराथन | Youth power रोहतक (सच कहूँ न्यूज)। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में 12 जनवरी को पूरे हरियाणा में रन फॉर यूथ एंड यूथ फॉर नेशन के तहत मैराथन का आयोजन किया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/youth-power-plays-an-important-role-in-nation-building-chief-minister/article-12055"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/youth-power.jpg" alt=""></a><br /><h2>12 जनवरी को रन फॉर यूथ एंड यूथ फॉर नेशन के तहत प्रदेश में होगी मैराथन | Youth power</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक (सच कहूँ न्यूज)।</strong> मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में 12 जनवरी को पूरे हरियाणा में रन फॉर यूथ एंड यूथ फॉर नेशन के तहत मैराथन का आयोजन किया जाएगा। एक साथ युवा शक्ति (Youth power) नए संकल्प व सकारात्मक ऊर्जा के साथ मैराथन में भागीदार बनेगी। साथ ही राष्ट्र हित की दिशा में बेहतर करने का संकल्प लेगी। मुख्यमंत्री शनिवार को बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 51वें प्रांत अधिवेशन में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की अहम भूमिका है।</p>
<h3>शिक्षा व संस्कारों के आधार पर ही श्रेष्ठ नागरिक बनते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;">अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद युवाओं में संस्कारों का समावेश करते हुए अपना दायित्व बखूबी निभा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व संस्कारों के आधार पर ही श्रेष्ठ नागरिक बनते हैं। ऐसे में शिक्षण संस्थाएं जहां युवा वर्ग को शैक्षणिक माहौल प्रदान कर रहे हैं। वहीं एबीवीपी जैसे सामाजिक संगठन संस्कार देने में अग्रणी हैं। मुख्यमंत्री ने हरियाणा सरकार की ओर से जल्द ही वोलेंटिरिजम कार्यक्रम शुरू करने की बात भी कही।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ये भी बोले सीएम</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>युवा वर्ग के साथ हर वर्ग सामाजिक जिम्मेवारी स्वयंसेवक के रूप में निभाए </strong></li>
<li><strong>बिना लोभ, लालच के कोई भी व्यक्ति राष्ट्र हित की योजनाओं में सुझाव दे। </strong></li>
<li><strong> बेटियों के हितों को सुरक्षित व उन्हें सुरक्षित माहौल प्रदान करने के लिए उठाए जा रहे कदम </strong></li>
<li><strong>सभी छात्र संगठन यदि अनुशासनात्मक स्वरूप के साथ आगे बढ़ें</strong></li>
<li><strong> एबीवीपी जैसे सामाजिक संगठन संस्कार देने में अग्रणी</strong></li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">जोश के साथ होश भी रखें युवा : बालक नाथ</h3>
<p style="text-align:justify;">बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं अलवर से सांसद महंत बाबा बालक नाथ ने भी युवाओं को पूरे जोश के साथ होश रखते हुए सामाजिक रूप से अपना योगदान देने के लिए प्रेरित किया। एबीवीपी की राष्ट्र महामंत्री निधि त्रिपाठी ने हरियाणा सरकार की ओर से महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों की सराहना की। इस अवसर पर सांसद डॉ. अरविंद शर्मा, मेयर मनमोहन गोयल, सांसद संजय भाटिया, संगठन मंत्री सुरेश भट्ट, भूपेंद्र मलिक, राजेंद्र धीमान, सुमित जागलान, डा.लखविंद लोहानी, सीताराम व्यास, एलपीएस बोसार्ड के चेयरमैन राजेश जैन, विजय, डॉ. लाकेश शेखावत, राजेश गहलावत, डा.रीटा शर्मा प्रमुख रूप से मौजूद रहे।</p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Dec 2019 07:00:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश बने गुलजार अहमद</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने राष्ट्रपति भवन स्थित इवान-ए-सदर में दिलाई शपथ इस्लामाबाद (एजेंसी)। न्यायमूर्ति गुलजार अहमद ने पाकिस्तान (Pakistan) के 27 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शनिवार को शपथ ली। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने उन्हें यहां राष्ट्रपति भवन स्थित इवान-ए-सदर में न्यायमूर्ति अहमद को शपथ दिलाई। इस समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/gulzar-ahmed-becomes-chief-justice-of-pakistan/article-11903"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/pakistan-new-chief-justice-take-oath.jpg" alt=""></a><br /><h2>राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने राष्ट्रपति भवन स्थित इवान-ए-सदर में दिलाई शपथ</h2>
<p><strong>इस्लामाबाद (एजेंसी)।</strong> न्यायमूर्ति गुलजार अहमद ने पाकिस्तान <strong>(Pakistan)</strong> के 27 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शनिवार को शपथ ली। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने उन्हें यहां राष्ट्रपति भवन स्थित इवान-ए-सदर में न्यायमूर्ति अहमद को शपथ दिलाई। इस समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, सीनेट के अध्यक्ष सादिक संजरानी, ​​नेशनल असेंबली के स्पीकर असद कैसर, संघीय मंत्रिमंडल के सदस्य, सांसद, सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे। मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति अहमद आसिफ सईद खोसा का स्थान ग्रहण करेंगे।</p>
<h3>न्यायमूर्ति अहमद आसिफ सईद खोसा हुए सेवानिवृत्त Pakistan</h3>
<p>न्यायमूर्ति खोसा देश के शीर्ष न्यायाधीश के रूप में सेवा देने के बाद शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो गए। न्यायमूर्ति अहमद का कार्यकाल 21 फरवरी, 2022 तक रहेगा। पाकिस्तान के कानून मंत्रालय ने चार दिसंबर को न्यायमूर्ति अहमद की नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति को अधिसूचित किया था।</p>
<h3>मैंने बिना भेदभाव के फैसले किए : जस्टिस खोसा</h3>
<p>पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा ने कहा कि उन्होंने अब तक बिना किसी डर और भेदभाव के सभी फैसले लिये या किये हैं। खोसा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘मेरे निर्णयों के परिणाम या प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण नहीं हैं।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा वही किया जो लगा कि सही है।’ उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले विशेष न्यायालय ने राजद्रोह के मामले में जनरल (सेवानिवृत्त) परवेज मुशर्रफ के खिलाफ अपना फैसला सुनाए जाने के बाद उनके और न्यायपालिका के खिलाफ डराने वाला अभियान शुरू किया गया था।</p>
<ul>
<li><strong>जस्टिस गुलजार अहमद का जन्म दो फरवरी 1957 को कराची में हुआ </strong></li>
<li><strong>शुरूआती शिक्षा गुलिस्तान स्कूल, कराची से ली। </strong></li>
<li><strong>कराची से एस एम लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री हासिल की</strong></li>
<li><strong>1988 में हाई कोर्ट और 1991 में सुप्रीम कोर्ट के वकील बने। </strong></li>
<li><strong>वर्ष 1999-2000 के लिए सिंध उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन, कराची के मानद सचिव के रूप में चुना।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/gulzar-ahmed-becomes-chief-justice-of-pakistan/article-11903</link>
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                <pubDate>Sat, 21 Dec 2019 13:41:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर पुलिस हिरासत में</title>
                                    <description><![CDATA[बेकसूर लोगों को डराकर उकसाने का लगाया आरोप नई दिल्ली (एजेंसी)। नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन को दौर थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रदर्शनों में शामिल होने पर भीम आर्मी (Bhim Army) के प्रमुख चन्द्रशेखर आजाद को जामा मस्जिद के निकट से पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बताया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/bhim-army-chief-chandershekhar-in-police-custody/article-11902"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/bhim-army-chief-in-police-custody.jpg" alt=""></a><br /><h2>बेकसूर लोगों को डराकर उकसाने का लगाया आरोप</h2>
<p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन को दौर थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रदर्शनों में शामिल होने पर भीम आर्मी <strong>(Bhim Army)</strong> के प्रमुख चन्द्रशेखर आजाद को जामा मस्जिद के निकट से पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को उकसाने की आशंका को देखते शनिवार तड़के चार बजे में करीब चन्द्रशेखर को हिरासत में लिया गया। इससे पहले चंद्रशेखर ने ट्वीट में कहा कि पुलिस जामा मस्जिद के सामने गली में अपने घरों के आगे शांतिपूर्ण खड़े लोगों को लाठीचार्ज और केस दर्ज करने का डर दिखाकर उकसा रही है। यह पुलिस की आंदोलन को बदनाम करने की सोची समझी साजिश लग रही है।</p>
<h3><strong>देश को बचाने की है यह लडाई : चंद्रशेखर</strong></h3>
<p>उन्होंने एक अन्य वीडियो ट्वीट में कहा कि सीएए और एनआरसी के खिलाफ आज बड़ी लड़ाई है। यह कानून मुल्क को तोड़ देगा। उन्होंने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन चलाने की अपील की। चंद्रशेखर ने कहा कि यह लड़ाई किसी जाति या धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश बचाने की है। सरकार को इस कानून को वापस लेना होगा। देश को कमजोर करने की साजिश की जा रही है और खासकर दलितों पिछड़ों के हक को छीनने की साजिश की जा रही है।</p>
<ul>
<li><strong>नागरिकता संशोधन एक्ट और एनआरसी का विरोध जारी </strong></li>
<li><strong>दिल्ली गेट और दरियागंज में पुलिस ने किया लाठीचार्ज और छोड़ी पानी की बौछारें </strong></li>
<li><strong>हिंसा में 33 लोग हुए थे घायल</strong></li>
<li><strong>प्रदर्शनकारियों का दावा- पुलिस ने दिल्ली गेट इलाके से लगभग 200 लोगों को हिरासत लिया।</strong></li>
<li><strong>कश्मीरी गेट, राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस, जनपथ, खान मार्केट मेट्रो स्टेशन रहे बंद </strong></li>
<li><strong>पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाई</strong></li>
</ul>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/bhim-army-chief-chandershekhar-in-police-custody/article-11902</link>
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                <pubDate>Sat, 21 Dec 2019 12:16:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आसिफ सईद खोसा  होंगे पाकिस्तान उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद (एजेंसी)। न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा को पाकिस्तान उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। कानून मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के अनुसार पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने बुधवार को न्यायाधीश खोसा की नियुक्ति को स्वीकृति दी ।बयान में कहा गया है कि न्यायाधीश खोसा उच्च्तम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश हैं । […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>इस्लामाबाद (एजेंसी)।</strong> न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा को पाकिस्तान उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है<strong>। </strong>कानून मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के अनुसार पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने बुधवार को न्यायाधीश खोसा की नियुक्ति को स्वीकृति दी ।बयान में कहा गया है कि न्यायाधीश खोसा उच्च्तम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश हैं ।</p>
<h2 style="text-align:justify;">वह 18 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश की शपथ लेंगे ।</h2>
<p style="text-align:justify;">न्यायाधीश खोसा दिसंबर 2016 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश बने थे। इससे पहले उन्होंने लाहौर उच्च न्यायालय में न्यायाधीश की सेवाएं दी ।<br />
पाकिस्तान के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश साकिब निसार 17 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Jan 2019 13:50:47 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रंजन गोगोई आज लेंगे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पद की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ) Edited By Vijay Sharma।  सुप्रीम कोर्ट के सीनियर मुख्य जज रंजन गोगोई अाज देश के 46वें मुख्य जज के रूप में शपथ लेंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उनको सी.जी.आई. के तौर पर शपथ दिलाएंगे। गोगोई का कार्यकाल 13 महीने 12 दिन रहेगा। वह 17 नवंबर 2019 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। 1954 में जन्मे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/justice-ranjan-gogoi-today-sworn-in-as-chief-justice-of-the-supreme-court/article-6101"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/hc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ) Edited By Vijay Sharma। </strong> सुप्रीम कोर्ट के सीनियर मुख्य जज रंजन गोगोई अाज देश के 46वें मुख्य जज के रूप में शपथ लेंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उनको सी.जी.आई. के तौर पर शपथ दिलाएंगे। गोगोई का कार्यकाल 13 महीने 12 दिन रहेगा। वह 17 नवंबर 2019 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। 1954 में जन्मे गोगोई वर्ष 1978 में बार काउंसिल में शामिल हुए थे। इसके बाद, 28 फरवरी, 2001 को उन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया। फरवरी, 2011 में वह पंजाब व हरियाणा के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए। उन्हें पदोन्नति देकर अप्रैल, 2012 में सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली और मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर लगाए थे सवालिया निशान</h2>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस रंजन गोगोई उस बैंच में शामिल रहे हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू को सौम्या मर्डर केस पर ब्लॉग लिखने के संबंध में निजी तौर पर अदालत में पेश होने के लिए कहा था। गौरतलब है कि रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। रंजन उन चार जजों में से एक हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली और मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवालिया निशान लगाए थे। इन लोगों ने कहा था कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में है और चीफ जस्टिस अपने पद का फायदा उठाकर रोस्टर के मामले में मनमानी कर रहे हैं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/justice-ranjan-gogoi-today-sworn-in-as-chief-justice-of-the-supreme-court/article-6101</link>
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                <pubDate>Wed, 03 Oct 2018 09:14:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ममता समेत चार मुख्यमंत्रियों की बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[नाराज चार मुख्यमंत्री पीएम मोदी से करेंगे शिकायत नई दिल्ली (एजेंसी)। नीति आयोग की संचालन परिषद की बैठक से एक दिन पहले शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन समेत चार विपक्षी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अलग-अलग मुलाकात करके राज्यों को अधिक स्वायत्तता और अधिकार दिये जाने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/meeting-of-four-chief-ministers/article-4227"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/mamta.jpg" alt=""></a><br /><h1>नाराज चार मुख्यमंत्री पीएम मोदी से करेंगे शिकायत</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">नीति आयोग की संचालन परिषद की बैठक से एक दिन पहले शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन समेत चार विपक्षी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अलग-अलग मुलाकात करके राज्यों को अधिक स्वायत्तता और अधिकार दिये जाने के मुद्दों पर बातचीत की।</p>
<p style="text-align:justify;">कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू, सुश्री बनर्जी और श्री विजयन ने इसके अलावा दिल्ली को पूर्ण दर्जा दिये जाने समेत कई अन्य मुद्दों पर बाचतीच की और उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात के लिए समय मांगने के लिए उन्हें पत्र भी लिखा।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग हुए श्री नायडू ने आंध्र प्रदेश भवन में बैठक का नेतृत्व किया। मुख्यमंत्रियों ने श्री बैजल को लिखे पत्र में कहा, ‘हम दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मसले को लेकर आपसे मुलाकात करना चाहते हैं। नायडू की तेलगु देशम पार्टी के राजग से हटने के बाद श्री नायडू की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से रविवार को नीति आयोग की बैठक में संभवत: पहली मुलाकात होगी</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/meeting-of-four-chief-ministers/article-4227</link>
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                <pubDate>Sat, 16 Jun 2018 22:48:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हार्दिक पटेल का दावा, अगले दस दिन में गुजरात में बदल जाएगा मुख्यमंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[राजकोट/गांधीनगर (एजेंसी)। पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति (पास) के नेता हार्दिक पटेल ने वीरवार को दावा किया कि गुजरात में अगले दस दिन में मुख्यमंत्री बदल दिया जाएगा। सोशल मीडिया में पिछले कुछ दिनों से वर्तमान मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को हटाये जाने की अटकलों के बीच हार्दिक ने यहां पत्रकारों बातचीत में दावा किया कि भाजपा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chief-minister-will-change-gujarat/article-4168"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/hardik.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>राजकोट/गांधीनगर (एजेंसी)।</strong> पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति (पास) के नेता हार्दिक पटेल ने वीरवार को दावा किया कि गुजरात में अगले दस दिन में मुख्यमंत्री बदल दिया जाएगा। सोशल मीडिया में पिछले कुछ दिनों से वर्तमान मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को हटाये जाने की अटकलों के बीच हार्दिक ने यहां पत्रकारों बातचीत में दावा किया कि भाजपा श्री रूपाणी को हटा कर किसी पटेल अथवा क्षत्रिय नेता को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है। उन्होंने तो यह भी दावा किया कि रूपाणी ने कल हुई कैबिनेट की बैठक में अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसे पार्टी आलाकमान जल्द ही मंजूर कर लेगा। कांग्रेस पार्टी के समर्थक हार्दिक ने कहा कि भाजपा में पिछले काफी समय से नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट जारी थी। उधर, आज उत्तर गुजरात के साबरकांठा जिले में एक कार्यक्रम में भाग लेने गये श्री रूपाणी ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर इन मामलों से अपनी अनभिज्ञता जताई। वीरवार को ही नई दिल्ली रवाना हुए उपमुख्यमंत्री नीतिन पटेल, जिन्हे सोशल मीडिया की अटकलों में श्री रूपाणी का एक मजबूत संभावित उत्तराधिकारी बताया गया है, ने भी इन बातों को अफवाह बता कर खारिज कर दिया। हालांकि ऐसी अटकलों के बीच अचानक श्री पटेल की दिल्ली यात्रा को लेकर भी यहां राजनीतिक हलकों में चर्चा का बाजार गर्म है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Jun 2018 20:16:10 +0530</pubDate>
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                <title>स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख सेनानियों में एक थे गुलाम अब्बास</title>
                                    <description><![CDATA[जाहिद खान फिल्म निर्माता, निर्देशक, कथाकार, पत्रकार, उपन्यासकार, पब्लिसिस्ट और देश के सबसे लंबे समय तकरीबन बाबन साल तक चलने वाले स्तंभ ‘द लास्ट पेज’ के स्तंभकार ख्वाजा अहमद अब्बास उन कुछ गिने चुने लेखकों में से एक हैं, जिन्होंने अपने लेखन और फिल्मों दोनों से पूरे देश को मुहब्बत, अमन और इंसानियत का पैगाम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/one-of-chief-fighters-of-freedom-struggle-ghulam-abbas/article-4007"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/artical.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जाहिद खान</strong></p>
<p style="text-align:justify;">फिल्म निर्माता, निर्देशक, कथाकार, पत्रकार, उपन्यासकार, पब्लिसिस्ट और देश के सबसे लंबे समय तकरीबन बाबन साल तक चलने वाले स्तंभ ‘द लास्ट पेज’ के स्तंभकार ख्वाजा अहमद अब्बास उन कुछ गिने चुने लेखकों में से एक हैं, जिन्होंने अपने लेखन और फिल्मों दोनों से पूरे देश को मुहब्बत, अमन और इंसानियत का पैगाम दिया। अब्बास ने न सिर्फ फिल्मों, बल्कि पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में भी नए मुकाम कायम किए। हरफनमौला शख्सियत के धनी अब्बास साहब को देश में समानांतर या नव-यथार्थवादी सिनेमा के रहनुमाओं में गिना जाता है। ख्वाजा अहमद अब्बास का जन्म 7 जून, 1914 को हरियाणा के पानीपत शहर में हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके दादा ख्वाजा गुलाम अब्बास 1857 स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख सेनानियों में से एक थे और वह पानीपत के पहले क्रांतिकारी थे, जिन्हें तत्कालीन अंग्रेज हुकूमत ने तोप के मुंह से बांधकर शहीद किया था। इस बात का भी शायद ही बहुत कम लोगों को इल्म हो कि अब्बास, मशहूर और मारूफ शायर मौलाना अल्ताफ हुसैन हाली के परनवासे थे। यानी वतन के लिए कुछ करने का जज्बा और जोश उनके खून में ही था। अदब से मुहब्बत की तालीम उन्हें विरासत में मिली थी।</p>
<p style="text-align:justify;">ख्वाजा अहमद अब्बास की शुरूआती तालीम हाली मुस्लिम हाई स्कूल में और आला तालीम अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हुई। उनके अंदर एक रचनात्मक बैचेनी नौजवानी से ही थी। वे भी देश के लिए कुछ करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने कलम को अपना हथियार बनाया। छात्र जीवन से ही वे पत्रकारिता से जुड़ गए। उन्होंने ‘अलीगढ़ ओपिनियन’ नाम की देश की पहली छात्र-प्रकाशित पत्रिका शुरू की। जिसमें उन्होंने उस वक्त देश की आजादी के लिए चल रही तहरीक से मुताल्लिक कई विचारोत्तेजक लेख प्रकाशित किए।</p>
<p style="text-align:justify;">ख्वाजा अहमद अब्बास ने उस वक्त लिखना शुरू किया जब देश अंग्रेजों का गुलाम था। पराधीन भारत में लेखन से समाज में अलख जगाना, उस वक्त सचमुच एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, पर उन्होंने यह चुनौती स्वीकार की और जिंदगी के आखिर तक अपनी कलम को विराम नहीं लगने दिया। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अब्बास जिस सबसे पहले अखबार से जुड़े, वह ‘बॉम्बे क्रॉनिकल’ था। इस अखबार में बतौर संवाददाता और फिल्म समीक्षक उन्होंने साल 1947 तक काम किया। अपने दौर के मशहूर साप्ताहिक ‘ब्लिट्ज’ से उनका नाता लंबे समय तक रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अखबार में प्रकाशित उनके कॉलम ‘लास्ट पेज’ ने उन्हें देश भर में काफी शोहरत प्रदान की। अखबार के उर्दू और हिंदी संस्करण में भी यह कॉलम क्रमश: ‘आजाद कलम’ और ‘आखिरी पन्ने’ के नाम से प्रकाशित होता था। अखबार में यह कॉलम उनकी मौत के बाद ही बंद हुआ। ‘बॉम्बे क्रॉनिकल’ और ‘ब्लिट्ज’ के अलावा ख्वाजा अहमद अब्बास ने कई दूसरे अखबारों के लिए भी लिखा। मसलन ‘क्विस्ट’, ‘मिरर’ और ‘द इंडियन लिटरेरी रिव्यूव’। एक पत्रकार के तौर पर उनकी राष्ट्रवादी विचारक की भूमिका और दूरदर्शिता का कोई सानी नहीं है। अपने लेखों के जरिए उन्होंने समाजवादी विचार लगातार लोगों तक पहुंचाए।</p>
<p style="text-align:justify;">ख्वाजा अहमद अब्बास फिल्मों में पार्ट-टाईम पब्लिसिस्ट के रूप में आए थे, लेकिन बाद में वे पूरी तरह से इसमें रम गए। साल 1936 से उनका फिल्मों में आगाज हुआ। सबसे पहले वे हिमांशु राय और देविका रानी की प्रॉडक्शन कम्पनी बॉम्बे टॉकीज से जुड़े। आगे चलकर साल 1941 में उन्होंने अपनी पहली फिल्म पटकथा ‘नया संसार’ भी इसी कंपनी के लिए लिखी। साल 1945 में फिल्म ‘धरती के लाल’ से ख्वाजा अहमद अब्बास का कैरियर एक निर्देशक के रूप में शुरू हुआ। ख्वाजा अहमद अब्बास की यथार्थवाद में गहरी जड़ें थीं। उनके लिए सिर्फ फिल्म ही महत्वपूर्ण थीं, न कि उससे जुड़े आर्थिक लाभ।</p>
<p style="text-align:justify;">अब्बास के लिए सिनेमा समाज के प्रति एक कटिबद्धता थी और इस लोकप्रिय माध्यम से उन्होंने समाज को काफी कुछ देने की कोशिश की। वे सिनेमा को बहुविधा कला मानते थे, जो मनोवैज्ञानिक और सामाजिक वास्तविकता के सहारे लोगों में वास्तविक बदलाव की आकांक्षा को जन्म दे सकती है। अब्बास की ज्यादातर फिल्में सामाजिक व राष्ट्रीय चेतना की महान दस्तावेज है। उनके बिना हिंदी फिल्मों में नेहरू के दौर और रूसी लाल टोपी का तसव्वुर नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">मशहूर निमार्ता-निर्देशक राज कपूर के लिए ख्वाजा अहमद अब्बास ने जितनी भी फिल्में लिखी, उन सभी में हमें एक मजबूत सामाजिक मुद्दा मिलता है। चाहे यह ‘आवारा’ हो, ‘जागते रहो’ (1956), या फिर ‘श्री 420’। पैंतीस वर्षों के अपने फिल्मी करियर में अब्बास ने तेरह फिल्मों का निर्माण किया। लगभग चालीस फिल्मों की कहानी और पटकथाएँ लिखीं, जिनमें ज्यादातर राजकपूर की फिल्में हैं। एक वक्त ऐसा भी था, जब उनका नाम फिल्मों में कामयाबी की जमानत होता था। उन्हें फिल्मी दुनिया में मुंह मांगी रकम मिलने लगी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">बावजूद इसके उन्होंने अदब और पत्रकारिता से अपना नाता नहीं तोड़ा। कहानी संग्रह ‘नई धरती नए इंसान’ की भूमिका में वे लिखते हैं, ‘‘मैं इन तमाम हिन्दुस्तानियों से प्रेम करता हूं। सबसे सहानुभूति रखता हूं। सबको समझने का प्रयास करता हूं। इसलिए कि वह मेरे हमवतन, मेरे साथी, मेरे समकालीन हैं। मैं अपनी कहानियों में उनके चेहरे एवं चरित्र दशार्ना चाहता हंू। न केवल औरों को बल्कि खुद उनको। मनुष्य को समाज का दर्पण दिखाना भी एक क्रांतिकारी काम हो सकता है, क्योंकि आत्मप्रवंचना नहीं बल्कि आत्मदर्शन स्वयं की वास्तविकता जानना,</p>
<p style="text-align:justify;">अपने व्यक्तित्व को समझना भी सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बदलावों को बड़ी गति में ला सकता है।’’<br />
अब्बास बुनियादी तौर पर एक अफसानानिगार थे, वे एक बेहतरीन अदीब थे। उन्होंने साहित्य की लगभग सभी विधाओं कहानी, उपन्यास, नाटक, रिपोर्ताज में जमकर लिखा। अब्बास की कहानियों की तादाद कोई एक सैंकड़े से ऊपर है। उन्होंने अंग्रेजी, उर्दू और हिंदी तीनों भाषाओं में जमकर लिखा।</p>
<p style="text-align:justify;">अब्बास उर्दू में भी उतनी ही रवानी से लिखते थे, जितना कि अंग्रेजी में। दुनिया की तमाम भाषाओं में उनकी कहानियों के अनुवाद हुए। अब्बास की कहानियों में वे सब चीजें नजर आती हैं, जो एक अच्छी कहानी में बेहद जरूरी हैं। एक शानदार कथानक, किरदारों का हकीकी चरित्र-चित्रण और ऐसी किस्सागोई कि कहानी शुरू करते ही, खत्म होने तक पढ़ने का जी करे। ख्वाजा अहमद अब्बास ने अपनी जिंदगी के आखिरी वक्त तक लिखा। उनकी कहानियों का दायरा पांच दशक तक फैला हुआ है। ‘एक लड़की’, ‘जाफरान के फूल’, ‘पांव में फूल’, ‘मैं कौन हूं’, ‘गेंहू और गुलाब’, ‘अंधेरा-उजाला’, ‘कहते हैं जिसको इश्क’, ‘नई धरती नए इंसान’, ‘अजंता की ओर’, 20वीं सदी के लैला मजनू’, ‘आधा इंसान’, ‘सलमा और समुद्र’, और ‘नई साड़ी’ ख्वाजा अहमद अब्बास के प्रमुख कहानी संग्रह हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी पहली कहानी ‘अबाबील’ साल 1935 में छपी और उसके बाद यह सिलसिला बीसवी सदी के आठवे दशक तक चला। इस बीच मुल्क में उन्होंने कई दौर देखे। अंग्रेजों की गुलामी, बंटवारे की आग, नये हिन्दुस्तान की तामीर, हिन्दुस्तान-पाकिस्तान जंग, हिन्दुस्तान-चीन जंग। इन सभी दौरों को यदि अच्छी तरह से जानना-समझना है, तो उनकी कहानियों को पढ़कर गुजरिये।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ देर उनके ख्यालो के साथ चलिये, कुछ देर ठहरिये। बहुत कुछ समझ में आ जाएगा। जब अब्बास ने अपनी पहली कहानी लिखी, तो उस वक्त उनकी उम्र महज उन्नीस साल थी। उन्नीस साल कोई ज्यादा उम्र नहीं होती लेकिन जो कोई भी इस छोटी सी कहानी को एक बार पढ़ लेगा, वह अब्बास के जेहन और उनके कहन का दीवाना हुए बिना नहीं रहेगा। इस एक अकेली कहानी से अब्बास रातों-रात देश-दुनिया में मशहूर हो गए। बाद में दुनिया की कई जबानों में इस कहानी के अनुवाद हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">अंग्रेजी, रूसी, जर्मन, स्वीडिश, अरबी, चीनी वगैरह-वगैरह। जर्मन जबान में दुनिया की बेहतरीन कहानियों का जब एक संकलन निकला, तो उसमें ‘अबाबील’ को शामिल किया गया। अंग्रेजी में जब इसी तरह का एक संकलन डॉक्टर मुल्कराज आनंद और इकबाल सिंह ने किया, तो वे भी इस कहानी को रखे बिना नहीं रह पाये। राष्ट्रीय स्तर पर ही नही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह कहानी खूब सराही गई। अदब में इसे आला दर्जे की रचना का खिताब हासिल है।<br />
ख्वाजा अहमद अब्बास ने अपनी आखिरी सांस माया नगरी मुंबई में ली। साल 1987 में जून के ही महीने की पहली तारीख को, बहत्तर साल की उम्र में वे इस दुनिया से दूर चले गए। उन्होंने अपने आखिरी दिनों तक अखबारों के लिए लिखा। मौत से पहले लिखे अब्बास के वसीयतनामे को उनकी आखिरी इच्छा के मुताबिक फिल्म कॉलम के तौर पर प्रकाशित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वसीयत में उन्होंने जो लिखा, वह भी कम दिलचस्प नहीं है,‘‘मेरा जनाजा यारों के कंधों पर जुहू बीच स्थित गांधी के स्मारक तक ले जाएं, लेजिम बैंड के साथ। अगर कोई खिराज-ए-अकीदत पेश करना चाहे और तकरीर करे तो उनमें सरदार जाफरी जैसा धर्मनिरपेक्ष मुसलमान हो, पारसी करंजिया हों या कोई रौशनख्याल पादरी हो वगैरह, यानी हर मजहब के प्रतिनिधि हों।’’ ख्वाजा अहमद अब्बास की साम्यवादी विचारधारा में गहरी आस्था थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके तईं समाजवाद केवल किताबों और अध्ययन तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने तमाम दुख-परेशानियां और खतरे झेलते हुए इसे अपनी जिंदगी में भी ढालने की कोशिश की। वह दूसरों के लिए जीने में यकीन करते थे। समाजवाद उनके जीने का सहारा था और आखिरी समय तक उन्होंने इस विचार से अपनी आस नहीं छोड़ी। इस दुनिया से जुदा हुए अब्बास को 21 साल हो गए, लेकिन मरने के इतने साल बाद, आज भी वे लोगों के जेहन में जिंदा हैं और आगे भी रहेंगे। कोई उन्हें भुला नहीं पाएगा।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jun 2018 12:14:50 +0530</pubDate>
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                <title>सलाहुद्दीन ने कहा, भारत में कई हमले कर चुके है, यह संघर्ष जारी रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[लाहौर: हिजबुल मुजाहिदीन चीफ सैयद सलाहुद्दीन ने पाकिस्तान के एक टीवी चैनल पर माना है कि उसने और उसके आतंकी गुट ने भारत में हमले किए हैं। उसने यह भी कहा कि कश्मीर की आजादी के लिए उसकी लड़ाई जारी रहेगी। अमेरिका से इंटरनेशल आतंकी घोषित होने के बाद हिज्बुल मुजाहिद्दीन सरगना सैय्यद सलाहुद्दीन का पहला इंटरव्यू […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/hizbul-mujahideen-chief-syed-salahuddin-admits-carried-out-terror-attacks-in-india/article-1897"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/hijbul.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लाहौर: </strong>हिजबुल मुजाहिदीन चीफ सैयद सलाहुद्दीन ने पाकिस्तान के एक टीवी चैनल पर माना है कि उसने और उसके आतंकी गुट ने भारत में हमले किए हैं। उसने यह भी कहा कि कश्मीर की आजादी के लिए उसकी लड़ाई जारी रहेगी। अमेरिका से इंटरनेशल आतंकी घोषित होने के बाद हिज्बुल मुजाहिद्दीन सरगना सैय्यद सलाहुद्दीन का पहला इंटरव्यू सामने आया है। इंटरव्यू में सलाहुद्दीन ने कबूला है कि उसने भारत में हमले कराए हैं। साथ ही कहा है कि आज भी वो भारत में कहीं भी हमला करा सकता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">बैन से बौखलाया सलाहुद्दीन</h2>
<p style="text-align:justify;">सलाउद्दीन अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंध से बुरी तरह बौखला गया है। उसने कहा कि कश्मीर की कथित आजादी के लिए संघर्ष जारी रहेगा। आतंकी सलाउद्दीन ने कहा हम आतंकवादी नहीं हैं। हमारा संघर्ष भारत से आजादी के लिए है और कश्मीर की कथित आजादी के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा। उसने कहा अमेरिका कोई एक मिसाल नहीं पेश कर सकता है, जिससे यह साबित होता हो कि मैं और दूसरे कश्मीरी लड़ाकों ने आतंकवाद की किसी वारदात को अंजाम दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सलाहुद्दीन ने इंटरव्यू में कहा अब तक हमारा पूरा ध्‍यान भारतीय पेशेवर बलों पर था। हमने जो भी ऑपरेशंस चलाए या जो चल रहे हैं उन सभी में यही फोर्स फोकस में थी। कश्मीर को अपना घर बताते हुए सलाहुद्दीन ने कहा कि बुरहान वानी की मौत के बाद से घाटी में बगावत बढ़ी है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">भारत में जहां चाहें हमले करवा सकते हैं</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li>सलाहुद्दीन ने कहा कि भारत में उसके कई सपोर्टर हैं। वह भारत में जहां चाहे हमले करवा सकता है।</li>
<li>विदेश से हथियार खरीदने की बात भी मानी। कहा कि अगर कोई उसे पैसे दे तो वह किसी भी जगह हथियार भेज सकता है।</li>
<li>भारत में उसने कई ऑपरेशन को अंजाम देने की बात मानी। कहा कि 9/11 हमले के बाद दुनिया में हालात बदले हैं।</li>
</ul>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jul 2017 01:36:50 +0530</pubDate>
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                <title>पूर्व एयर चीफ त्यागी के बचाव में आये वायु सेना प्रमुख राहा</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली: निवर्तमान वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने अगस्ता वेस्टलैंड दलाली सौदे में जेल की हवा खा चुके पूर्व वायु सेना सेना प्रमुख एस पी त्यागी का बचाव करते हुए आज कहा कि जब तक दोष साबित नहीं हो जाता वह वायु सेना परिवार का हिस्सा हैं और उन्हें सम्मान मिलना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/augusta-case-iaf-chief-backs-tyagi/article-651"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/raha.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली:</strong> निवर्तमान वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने अगस्ता वेस्टलैंड दलाली सौदे में जेल की हवा खा चुके पूर्व वायु सेना सेना प्रमुख एस पी त्यागी का बचाव करते हुए आज कहा कि जब तक दोष साबित नहीं हो जाता वह वायु सेना परिवार का हिस्सा हैं और उन्हें सम्मान मिलना चाहिए।<br />
सेवानिवृत्त होने से तीन दिन पहले एयर चीफ मार्शल राहा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में वायु सेना में भ्रष्टाचार के मामलों से जुड़े सवालों के जवाब में कहा कि अगस्ता वेस्टलैंड मामले में कानून का पालन किया जाना चाहिए और न्यायालय के फैसले का सम्मान होना चाहिए।<br />
उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय में उनके खिलाफ आरोप साबित हो जाते हैं तो किसी को काई सहानुभूति नहीं होगी। <a href="http://www.univarta.com/augusta-case-iaf-chief-backs-tyagi/india/topnews/732103.html"><em>(वार्ता)</em></a></p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Dec 2016 03:58:05 +0530</pubDate>
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