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                <title>राजनीतिक अपराधियों पर सख्ती</title>
                                    <description><![CDATA[शायद यह सुप्रीम कोर्ट ने ही करना था कि राजनीति में अपराधियों के दखल को रोका जाए, क्योंकि राजनीतिक पार्टियों ने सत्ता के लिए किसी भी तरह के हथकंडे प्रयोग करने से गुरेज नहीं किया। 70 साल के बाद तो भारतीय लोकतंत्र की तकदीर बदलनी ही चाहिए। देश की अधिकतर समस्याओं की जड़ अपराधियों का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/strict-action-against-political-criminals/article-12740"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/powers-of-speaker1.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">शायद यह सुप्रीम कोर्ट ने ही करना था कि राजनीति में अपराधियों के दखल को रोका जाए, क्योंकि राजनीतिक पार्टियों ने सत्ता के लिए किसी भी तरह के हथकंडे प्रयोग करने से गुरेज नहीं किया। 70 साल के बाद तो भारतीय लोकतंत्र की तकदीर बदलनी ही चाहिए। देश की अधिकतर समस्याओं की जड़ अपराधियों का राजनीतिक रसूख या राजनीतिक पदों पर कब्जा है। इसी कारण ही अदालत ने चुनाव आयोग को हिदायत दी है कि अपराधियों का राजनीति में दाखिला रोकने के लिए चुनाव आयोग फे्रमवर्क तैयार करे।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">चुनाव आयोग ने अदालत को सुझाव भी दिया है कि राजनीतिक पार्टियां ही इस मामले में पहल करें और दागी नेताओं को टिकट न दें। चुनाव आयोग ने यह अवश्य महसूस किया है कि चुनाव से पूर्व उम्मीदवारों द्वारा मीडिया में अपना अपराधिक रिकार्ड बताए जाने के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की चिंता से यह बात स्पष्ट है कि पार्टियों ने चुनाव जीतने के लिए दागी नेताओं को टिकटों देने से भी गुरेज नहीं किया, जिसका परिणाम यह निकलता रहा है कि सत्ता में पहुंचकर अपराधी पृष्टभूमि वाले नेता गैर-कानूनी कार्य सरेआम करते रहे। अदालत द्वारा बनाए गए नियमों के कारण कई नेताओं की संसद से सदस्यता समाप्त हुई और कई चुनाव मैदान से बाहर हो गए हैं।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">दरअसल चुनाव सुधार का जो बीड़ा टीएन सेशन ने उठाया था अब उनके विचारों की पुष्टि होती नजर आ रही है। राजनीति सेवा है जिसे भ्रष्ट व अपराधी पृष्टभूमि वाले नेताओं ने प्रत्येक गैर-कानूनी कार्य करने के लिए हथियार बना लिया था। अब जहां तक आयोग के सुझाव का संबंध है यह बात बेहतर होगी यदि राजनीतिक पार्टियां ही दागी व्यक्तियों को टिकट देने से परहेज करें। सख्ती जरूरी है लेकिन संस्कृति उससे भी ऊपर है। राजनीतिक पार्टियों को सैद्धांतिक मॉडल बनाने की आवश्यकता है ताकि नेक व्यक्ति आगे आ सकें। इसकी शुरूआत केवल टिकट के साथ नहीं होनी चाहिए बल्कि पार्टी के संगठन में भी हर छोटा से छोटा पद सौंपते वक्त भी नेता की पृष्टभूमि को देखा जाए। अभी तो हालात यह हैं कि कई पार्टियों के नेताओं पर गैंगस्टरों के साथ संबंध के आरोप लग रहे हैं। यूं भी केवल मामले दर्ज करने से कोई व्यक्ति दागी नहीं हो जाता फिर भी यह पार्टियों के लिए जरूरी होना चाहिए कि वह जीत की अपेक्षा नियमों व कर्तव्यों को प्राथमिकता दें।</h4>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jan 2020 13:29:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कॉल ड्रॉप को लेकर ट्राई सख्त, 10 लाख रुपए तक का लगेगा जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने कॉल ड्रॉप पर अंकुश के लिए कुछ कड़े दिशानिर्देश जारी किए, जिसके तहत यदि कोई आपरेटर लगातार तीन तिमाहियों कॉल ड्रॉप के लिए तय मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो उस पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/tria-strict-for-call-drop-fines-rs-10-lakh/article-3209"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/trai.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने कॉल ड्रॉप पर अंकुश के लिए कुछ कड़े दिशानिर्देश जारी किए, जिसके तहत यदि कोई आपरेटर लगातार तीन तिमाहियों कॉल ड्रॉप के लिए तय मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो उस पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि हमने कॉल ड्रॉप के मामले में एक से पांच लाख रुपए तक के वित्तीय जुर्माने का प्रस्ताव किया है। यह ग्रेडेड जुर्माना प्रणाली है जो किसी नेटवर्क के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्राई के कार्यवाहक सचिव एस के गुप्ता ने कहा कि यदि कोई आपरेटर लगातार तिमाहियों में कॉल ड्रॉप के मानकों को पूरा करने में विफल रहता है तो जुर्माना राशि 1.5 गुना बढ़ जाएगी और लगातार तीसरे महीने में यह दोगुनी हो जाएगी। हालांकि, अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपए तक रहेगा। इस संशोधन के बाद किसी एक सर्किल में कॉल ड्रॉप मापने की दर सर्किल स्तर से मोबाइल टावर तक अधिक ग्रैनुलर हो जाएगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कॉल ड्रॉप को मापने को लेकर कई मुद्दे</h2>
<p style="text-align:justify;">शर्मा ने कहा कि कॉल ड्रॉप को मापने को लेकर कई मुद्दे हैं। औसत से कई चीजें छिप जाती हैं। नए नियमों के तहत हम किसी नेटवर्क के अस्थाई मुद्दे पर भी ध्यान देंगे और साथ ही नेटवर्क के भौगोलिक फैलाव को भी देखेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">संशोधित नियमों के तहत किसी दूरसंचार सर्किल में 90 प्रतिशत मोबाइल साइटें 90 प्रतिशत समय तक 98 प्रतिशत तक कॉल्स को सुगम तरीके से संचालित करने में सक्षम होनी चाहिए। यानी कुल कॉल्स में से दो प्रतिशत से अधिक ड्रॉप की श्रेणी में नहीं आनी चाहिए। किसी खराब स्थिति या दिन के व्यस्त समय में एक दूरसंचार सर्किल के 90 प्रतिशत मोबाइल टावरों पर कॉल ड्रॉप की दर तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Aug 2017 06:41:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>प्रदूषण नियंत्रण हेतु सख्ती जायज</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय हरियाली ट्रिब्यूनल ने देश की महत्वपूर्ण नदी गंगा के किनारों पर गंदगी फैलाने वालों से 50 हजार रुपए जुर्माने वसूलने की बात कही है। प्रदूषण रोकने के लिए नदियों की सफाई के लिए यह पहला व महत्वपूर्ण प्रयास है। यदि इसे इतनी ही वचनबद्धता से लागू किया जाए तो अवश्य अच्छे परिणाम आ सकते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/strict-justified-on-pollution-control/article-2308"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/garbage.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय हरियाली ट्रिब्यूनल ने देश की महत्वपूर्ण नदी गंगा के किनारों पर गंदगी फैलाने वालों से 50 हजार रुपए जुर्माने वसूलने की बात कही है। प्रदूषण रोकने के लिए नदियों की सफाई के लिए यह पहला व महत्वपूर्ण प्रयास है। यदि इसे इतनी ही वचनबद्धता से लागू किया जाए तो अवश्य अच्छे परिणाम आ सकते हैं। इस फैसले के पीछे ट्रिब्यूनल की सदस्यों की यही भावना होगी कि लोग सख्ती के बिना कानूनों की पालना नहीं करते। प्रेरणा के साथ-साथ सख्ती का अपना विशेष महत्व है। दरअसल उद्योगपतियों के साथ-साथ आमजन की सोच बन गई है कि खाली स्थान या नदियां-नालियां तो कूड़ादान ही हैं। गंगा नदी के किनारे सैंकड़ों बड़े-छोटे कारखानों का दूषित पानी गंगा में बहाया जा रहा था जिस कारण पहाड़ों से आने वाला प्राकृतिक शुद्ध पानी बुरी तरह अशुद्ध हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जनता की लापरवाही सरकार के लिए चिंता का कारण व चुनौती बन गई। आखिर केंद्र सरकार को इस नदी की सफाई के लिए एक अलग मंत्रालय बनाना पड़ा। इस मिशन के लिए हजारों करोड़ का बजट आरक्षित रखा गया है। यदि आम जनता व उद्योगपति देश में पानी की कमी के संकट को समझकर गंगा की सफाई प्रति बाखूबी जिम्मेदारी निभाएं तो हजारों करोड़ का बजट शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य भलाई कार्यों पर खर्च किया जा सकता है। दुखद बात यह है कि गंगा की सफाई का संकट लोगों की लापरवाही की देन है। केवल गंगा ही नहीं सतलुज, ब्यास, घग्गर सहित अन्य नदियां बुरी तरह से दूषित हो गई हैं। अब तो इन्हें नदियां कहना भी उचित नहीं। घग्गर नदी जो कभी शुद्ध पानी के लिए जानी जाती थी। आज फैक्टरियों के गंदे पानी की निकासी का एक नाला बनकर रह गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह शुभ संकेत हैं कि केंद्र ने गंगा की सफाई के लिए सख्ती का रास्ता अपनाया है। सफाई देश की विरासत की पहचान है जो लुप्त हो रही है। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां, जिन्होंने गंगा नदी सहित देश के 32 शहरों में सफाई महा -अभियान चलाए, आपजी के विचार भी ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्णयों का समर्थन करने वाले हैं। पूज्य गुरू जी के विचार हैं कि सफाई न रखने पर भी जुर्माना होना चाहिए भले ही 2-3 रुपए ही क्यों न हो। बस अब जरूरत है कि ग्रीन ट्रिब्यूनल अपने निर्णय को प्रभावी में लाए।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/strict-justified-on-pollution-control/article-2308</link>
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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2017 04:10:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसवाईएल पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई लताड़, दिया निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[नहर निर्माण पूरा करे पंजाब, जल बंटवारा बाद में देखेंगे दोनों राज्य इस संबंध में न करें धरने प्रदर्शन नई दिल्ली। एसवाईएल मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि वह पहले नहर का निर्माण कार्य पूरा करे। जल बंटवारे की बात बाद में होगी। साथ ही […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/supreme-court-gives-strict-instructions-on-syl-issue/article-2238"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/syl.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">नहर निर्माण पूरा करे पंजाब, जल बंटवारा बाद में देखेंगे</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>दोनों राज्य इस संबंध में न करें धरने प्रदर्शन</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> एसवाईएल मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि वह पहले नहर का निर्माण कार्य पूरा करे। जल बंटवारे की बात बाद में होगी। साथ ही दोनों राज्यों को मुद्दे पर शांति बनाए रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक सुनवाई चल रही है पंजाब और हरियाणा सरकार सुनिश्चित करें कि एसवाईएल को लेकर कोई धरना प्रदर्शन न हो। बता दें कि पंजाब लगातार राज्य से एक भी बूंद किसी अन्य राज्य को न देने की बात पर अड़ा है वहीं हरियाणा सतलुज से अपने हिस्से के पानी की मांग कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 7 सितंबर तक टाल दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि एसवाईएल पर कोर्ट का फैसला लागू होना चाहिए। कोर्ट ने पंजाब को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर हरियाणा ने अपने इलाके में नहर बनाने का काम पूरा कर लिया है तो पंजाब ने क्यों नहीं किया। अगर नहर के लिए पानी की समस्या है तो बाद में देखेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र को दो महीने का वक्त दिया ताकि वह दोनों राज्यों के बीच सुलह की कोशिश कर सकें। कोर्ट ने कहा कि वक्त का मतलब यह नहीं है कि पंजाब सरकार इसे लंबा खींचे। अगली सुनवाई सात सितंबर को होगी। वहीं केंद्र सरकार की ओर से एसजी रंजीत कुमार ने कोर्ट में कहा कि इस मामले में दोनों राज्यों के बीच फिर से सुलह की कोशिश करेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">राज्यों के बंटवारे के समय से विवाद</h3>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 1966 में हरियाणा का गठन हुआ और वर्ष 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय इंदिरा गांधी अवॉर्ड के तहत 3.5 एकड़ फुट पानी का बराबर-बराबर का बंटवारा किया गया था। अवॉर्ड में यह तय हुआ था कि हरियाणा में पानी ले जाने के लिए एक नहर का निर्माण किया जाए। उस समय पंजाब में अकाली दल प्रकाश सिंह बादल की सरकार थी। पंजाब क्षेत्र में इस नहर निर्माण के लिए हरियाणा ने पंजाब को उस समय 2 बार में 2-2 करोड़ रुपये भी दिए गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप पर बंटवारे के पानी में राजस्थान भी शामिल हो गया। अप्रैल 1982 में पंजाब के कपूरी नहर की खुदाई का काम शुरू हुआ, जिसे 2 साल में पूरा होना था। 1987 तक इस नहर का 95 प्रतिशत निर्माण पूरा हो गया। फिर पंजाब में उग्रवाद का दौर शुरू हो गया, जिससे उसके क्षेत्र में नहर निर्माण का कार्य खटाई में पड़ गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब सरकार की परेशानी यह है कि 10 नवंबर 2016 को सतलुज यमुना लिंक नहर मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने ‘पंजाब टर्मिनेशन आॅफ वाटर एग्रीमेंट एक्ट 2004’ को असंवैधानिक करार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने अदालत के फैसलों को निष्प्रभावी करने और एसवाइएल समझौते को खत्म करने के लिए पंजाब सरकार की ओर से पारित कानून की संवैधानिक वैधता पर राष्ट्रपति की ओर से सुप्रीम कोर्ट की राय के लिए भेजे गए सभी चार प्रश्नों का उत्तर ‘नहीं’ में दिया था। इसे लेकर कांग्रेस सरकार ने तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार पर खासा दबाव बनाया था और इसके बाद कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने लोकसभा से और पंजाब के कांग्रेस विधायकों ने सामूहिक रूप से विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन 2017 में तस्वीर बदल चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2017 09:33:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कैप्टन इजाजत दें, फास्ट-वे वालों को टांग दूंगा: सिद्धू</title>
                                    <description><![CDATA[सिद्धू का पिछले पांच साल में फास्ट-वे संबंधी खुलासा 5 साल, 684 करोड़ का घोटाला सिद्धू बोले, बादलों की बोली बोलता है एक चैनल, अब नहीं छोडूंगा चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। जंग का अखाड़ा बनी पंजाब विधानसभा का आखिरी दिन भी हंगामे भेंट चढ़ गया। सत्र के बाद कांग्रेस ने प्रैस कांफ्रैंस कर अकाली दल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/strict-behavior-of-navjot-singh-sidhu/article-1540"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/sidhu1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">सिद्धू का पिछले पांच साल में फास्ट-वे संबंधी खुलासा</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>5 साल, 684 करोड़ का घोटाला</strong></li>
<li><strong>सिद्धू बोले, बादलों की बोली बोलता है एक चैनल, अब नहीं छोडूंगा</strong></li>
</ul>
<p><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> जंग का अखाड़ा बनी पंजाब विधानसभा का आखिरी दिन भी हंगामे भेंट चढ़ गया। सत्र के बाद कांग्रेस ने प्रैस कांफ्रैंस कर अकाली दल तथा आम आदमी पार्टी पर जमकर हमले किए।प्रैस कांफ्रैंस को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू व विधायक सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने कहा कि बादलों ने पंजाब को जमकर लूटा है।</p>
<p>केबल माफिया व एक कथित टीवी चैनल खिलाफ बोलते हुए रंधावा ने सिद्धू को उनके खिलाफ अवाज उठाने के लिए कहा, जिसपर सिद्धू ने कहा कि उनकी नजर केबल माफिया पर ही है। सिद्धू ने कहा कि केबल माफिया और कथित टीवी चैनल सदन की कार्रवाई की गलत रिपोर्टिंग करता है। इस चैनल को बादलों का डब्बू करार देते हुए सिद्धू ने कहा कि यह चैनल सिर्फ बादलों की बोली बोलता है।</p>
<h3>करोड़ों का टैक्स चोरी किया</h3>
<p>फास्ट-वे केबल संबंधी बोलते हुए सिद्धू ने कहा कि केबल माफिया उनके निशाने पर है और वह उन्हें नहीं छोडेंगे। सिद्धू ने खुलासा करते कहा कि फास्ट-वे केबल नैटवर्क करोड़ों रुपए के इंटरनेट टैक्स की चोरी करता है। अकाली-भाजपा सरकार समय इन्होंने 1300 करोड़ रुपए का चूना लगाया है। सिद्धू ने कहा कि यदि केबल का काम सरकार के पास आ जाए तो पंजाब के एक लाख नौजवानों को रोजगार मिल सकता है।</p>
<h3>आगे वाला समय देखने वाला होगा</h3>
<p>नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि अकाली दल ने 10 साल तक पंजाब में राज किया और इस दौरान बादलों ने पंजाब को जी भरकर लूटा। पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए सिद्धू ने कहा कि कांग्रेस को सत्ता में आए अभी केवल तीन महीने ही हुए हैं जबकि इतने कम समय दौरान कांग्रेस ने बादलों की पोल खोलकर रख दी। भविष्य में कांग्रेस क्या कुछ करती है यह देखने वाला होगा।</p>
<h3>आप व अकाली आपस में मिले</h3>
<p>कांग्रेसी विधायक सुखजिन्द्र रंधावा ने कहा कि अकाली दल व आम आदमी पार्टी शुरू से ही मिले हुए हैं। उस वक्त ‘आप’ नेता कहां थे जब अकाली दल के कार्यकाल दौरान बैंस ब्रदर्स को उठाकर विधानसभा से बाहर निकाला था। कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि अकाली दल जान-बूझकर सदन की कार्रवाई को धार्मिक मुद्दा बना रहा है। उन्होंने कहा कि अकाली दल के समय कई बार पगड़ी उतरी उस वक्त जत्थेदार कभी कुछ क्यों नहीं बोले, अब ही इसे धार्मिक मुद्दा बनाया जा रहा है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jun 2017 08:05:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों पर अत्याचार हो रहा है तो डायल करें 181</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों पर हो रहे अत्याचार पर प्रदेश सरकार गंभीर नाबालिगों के लिए बनेंगे बाल सरंक्षण घर कानूनों के प्रति लोगों को किया जाएगा जागरूक चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)। प्रदेश सरकार आए दिन हो रहे बच्चों पर अत्याचार के प्रति संवेदनशील है। सरकार ने बच्चों पर अत्याचारों को रोकने एवं उन्हें उनका बचपन बचाने की कवायद शुरू […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;">बच्चों पर हो रहे अत्याचार पर प्रदेश सरकार गंभीर</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>नाबालिगों के लिए बनेंगे बाल सरंक्षण घर</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>कानूनों के प्रति लोगों को किया जाएगा जागरूक</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)।</strong> प्रदेश सरकार आए दिन हो रहे बच्चों पर अत्याचार के प्रति संवेदनशील है। सरकार ने बच्चों पर अत्याचारों को रोकने एवं उन्हें उनका बचपन बचाने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए बाल एवं महिला विकास कल्याण मंत्रालय विशेष योजना को जल्द ही अमलीजामा पहनाने की कोशिश में है। इस बाबत जानकारी बाल एवं महिला विकास कल्याण मंत्रालय के एडीशनल चीफ सेके्रटरी पी.के. महापात्रा ने सच कहूँ से विशेष बातचीत में दी। महापात्रा के अनुसार प्रदेश में रिश्तेदारों, अन्य जानकारों एवं अनजान लोगों व कई दफा माता-पिता के हाथों अत्याचार सह रहे नाबालिग बच्चों के प्रति सरकार संवेदनशील है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी के मद्देनज़र सरकार ने एक योजना के तहत जुवेनाइल कानून के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ बाल संरक्षण घर बनाने की योजना तैयार की है। महापात्रा ने बताया कि आए दिन स्कूलों में, घरों में, खेल स्थानों पर एवं अन्य स्थानों पर बच्चों के साथ होते दुर्वव्यहार एवं हरासमेंट की शिकायतें एवं समाचार मिलते हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा नाबालिग बच्चियां इस प्रकार के अत्याचारों का शिकार हैं। वहीं उन्होंने कहा कि नाबालिग लड़के भी अत्याचार का शिकार हो रहे हैं, जिससे उनका बचपन ही समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर केसों में बच्चे के अभिभावक, रिश्तेदार या जान-पहचान के लोग ही उस पर अत्याचार या दुर्वव्यहार करते हैं। ऐसे में बच्चा किसी को बता नहीं पाता, सरकार ने इसे ध्यान में रखते हुए योजना तैयार की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">
हैल्पलाइन पर कॉल करते ही तुरंत पहुंचेगी सहायता</h3>
<p style="text-align:justify;">महापात्रा ने कहा कि 181 नंबर की हैल्पलाइन शुरू की जाएगी जिस पर कॉल करते ही बाल विकास एवं महिला कल्याण मंत्रालय का अधिकारी शिकायतकर्ता द्वारा बताई गई जगह पर खुद पहुंचेगा। अगर पुलिस की मदद लेनी होती तो वह भी ली जाएगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यूरोप की तर्ज पर भारत में सख्त कानून</h3>
<p style="text-align:justify;">महापात्रा ने बताया कि नाबालिग बच्चों पर अत्याचार संबंधी कार्रवाई पर यूरोप के उदाहरण दिए जाते हैं परंतु भारत में यूरोप की तर्ज पर सख्त कानून है। उन्होंने कहा कि भारत में नाबालिग बच्चे को जबरदस्ती शराब या अन्य नशीला पदार्थ देने के दोषी को 7 साल की कैद या एक लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। वहीं उत्पीड़न के दोषी को 3 साल की कैद या 50 हजार रुपए जुर्माना, बच्चों को बेचने के दोषी को 5 साल की कैद एवं एक लाख रुपए जुर्माना तक हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/children-are-being-tortured-then-dial-181/article-921</link>
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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2017 09:29:52 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चुनावों को लेकर चुनाव कमीशन सख़्त</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में लगेगी पैरामिल्ट्री फोर्स 4 जनवरी से पंजाब में पहुंचने लगेंगी पैरामिल्ट्री फोर्स की कपनियां ChandiGarh, Ashwani Chawla:  शिरोमणी अकाली दल के खिलाफ मुख्य चुनाव कमीशन को मिल रही शिकायतों को देखने के बाद शिरोमणी अकाली दल लगातार चुनाव कमीशन की सख़्त निगरानी में चल रहा है। चुनाव आयोग ने पंजाब में सबसे ज्यादा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/strict-election-commission-elections/article-659"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/election-cartoon.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>प्रदेश में लगेगी पैरामिल्ट्री फोर्स</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>4 जनवरी से पंजाब में पहुंचने लगेंगी पैरामिल्ट्री फोर्स की कपनियां </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>ChandiGarh, Ashwani Chawla:</strong>  शिरोमणी अकाली दल के खिलाफ मुख्य चुनाव कमीशन को मिल रही शिकायतों को देखने के बाद शिरोमणी अकाली दल लगातार चुनाव कमीशन की सख़्त निगरानी में चल रहा है। चुनाव आयोग ने पंजाब में सबसे ज्यादा सख़्ती करने की तैयारी करते हुए आदेश जारी कर दिए हैं कि पंजाब में सिर्फ पैरामिल्ट्री फोर्स के नेतृत्व में ही विधान सभा चुनाव करवाए जाएंगे। पंजाब में किसी भी पोलिंग बूथ में तो दूर पोलिंग बूथ के नजदीक भी पंजाब पुलिस की तैनाती नहीं होगी। पंजाब में इस पैरामिल्ट्री फोर्स की तैनाती 4जनवरी से होनी शुरू हो जाएगी और हफ़्ते भर में पंजाब के हर हलके में पैरामिल्ट्री फोर्स पहुंच कर अपनी ड्यूटी संभाल लेगी। इसके साथ ही पंजाब सरकार की कार्यवाही और खास करके शिरोमणी अकाली दल पर तीखी नजर रखने के आदेश मुख्य चुनाव कमिश्नर ने जारी करते हुए अब से ही सख़्ती के साथ आचार संहिता जैसी कार्यवाही शुरू करने के लिए कह दिया है। इसके साथ ही पंजाब के मुख्य सचिव को भी आदेश दिए हैं कि चुनावों से पहले आचार संहिता की तैयारी अनुसार ही कार्यवाही शुरू कर दी जाए और कोई भी ऐसी कार्यवाही न की जाये, जिससे किसी एक पार्टी को फायदा या फिर नुक्सान होता हो।<br />
<strong>सरकारी इमारतों से बैनर और पोस्टर उतारने के आदेश</strong><br />
चुनाव आयोग ने अपने सख़्त आदेशों में पंजाब की सरकारी इमारतें से 24 घंटों के अंदर-अंदर सरकार और राजनैतिक पार्टियों के विज्ञापन उतारने के आदेश जारी कर दिए हैं।इसके साथ पंजाब सरकार की ओर से लगातार जारी किए जा रहे करोड़ा रुपए के इस्तहारों पर भी नजर रखने के लिए कहा है। इसके साथ ही चुनाव कमीशन ने अपने मुख्य चुनाव अधिकारियों को हर शिकायत को 48 घंटों में ही निपटाने के आदेश जारी किये हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/strict-election-commission-elections/article-659</link>
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                <pubDate>Thu, 29 Dec 2016 00:24:11 +0530</pubDate>
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