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                <title>One Nation - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>One Nation, One Election: एक राष्ट्र, एक चुनाव और चुनौतियाँ</title>
                                    <description><![CDATA[One Nation, One Election: लोकसभा और राज्य की विधान सभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने का मामला लम्बे समय से बहस में है मगर अब इस पर कुछ कदम उठाए जा रहे हैं। विदित हो कि स्वस्थ एवं निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आधारशिला होती हैं और भारत में निष्पक्ष चुनाव हमेशा चुनौती रही है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/one-nation-one-election-and-challenges/article-52493"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/one-nation-one-election-1.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">One Nation, One Election: लोकसभा और राज्य की विधान सभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने का मामला लम्बे समय से बहस में है मगर अब इस पर कुछ कदम उठाए जा रहे हैं। विदित हो कि स्वस्थ एवं निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आधारशिला होती हैं और भारत में निष्पक्ष चुनाव हमेशा चुनौती रही है। पड़ताल बताती है कि हर साल भारत में किसी न किसी राज्य में चुनाव होते रहते हैं। मौजूदा समय में देखें तो लोकसभा के साथ आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, सिक्किम और अरूणाचल प्रदेश के विधानसभा के चुनाव सम्पन्न कराए जाते जबकि 28 राज्यों में 23 राज्य और 2 केन्द्र शासित प्रदेश पुदुचेरी और दिल्ली के चुनाव अलग-अलग समय में होते हैं। One Nation, One Election</p>
<p style="text-align:justify;">खास यह भी है कि लोकसभा चुनाव के 6 महीने पहले छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश और तेलंगाना का चुनाव होता है जो कि साल 2023 में होने जा रहा है और साल 2024 के अप्रैल-मई में लोकसभा का चुनाव होगा। इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव के 6 महीने बाद महाराष्ट्र और हरियाणा का चुनाव होता है यदि इन राज्यों को लोकसभा के साथ जोड़कर चुनाव कराया जाए तब भी कम से कम ये छह राज्य एक चुनाव में आ सकते हैं और 5 पहले से हैं तो ऐसे में 11 राज्य लोकसभा के साथ चुनाव कराने में संवैधानिक कोई दिक्कत दिखती नहीं है। बस कुछ की विधानसभा पहले भंग करनी है, कुछ के लिए कुछ पेचीदगियों से निपटना है। One Nation, One Election</p>
<p style="text-align:justify;">देखा जाए तो अलग-अलग समय में चुनाव होना मतलब लोकसभा का एक बार जबकि विधानसभा का हर साल कोई न कोई चुनव रहता है। नतीजन मानव संसाधन और खजाना दोनों दबाव से गुजरते रहते हैं साथ ही चुनाव आयोग के लिए आदर्श चुनाव आचार संहिता भी चुनौती लिए रहती है। कहा जाए तो देश हमेशा चुनावी मोड में रहता है फलस्वरूप प्रशासनिक और नीतिगत निर्णय भी निरंतरता लिए रहते हैं, प्रभावित भी होते हैं और खजाने पर भी भारी बोझ पड़ता है। इन्हीं सब कारणों के चलते लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एक साथ कराने का इरादा मजबूत होता दिख रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीते एक सितम्बर को मोदी सरकार ने वन नेशन, वन इलेक्शन को लेकर एक कदम और तब बढ़ा दिया जब विधि मंत्रालय ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी जिसमें सात अन्य सदस्य भी शामिल हैं। एक देश एक चुनाव की वकालत स्वयं प्रधानमंत्री मोदी 2020 में पहले ही कर चुके हैं। हालांकि साल 1983 में भारत निर्वाचन आयोग ने एक चुनाव कराने का प्रस्ताव दिया था जिसका जिक्र विधि आयोग की 1999 की रिपोर्ट में भी है। इसके पीछे सबसे बड़ा तर्क चुनावी खर्च को बचाने को माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">देखा जाए तो एक अरब चालीस करोड़ की जनसंख्या वाला भारत एक विकासशील देश है और महज तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से युक्त है। अशिक्षा, गरीबी, भुखमरी समेत कई ढांचागत विकास और समावेशी संदर्भ को अभी बहुत उठान देना है। ऐसे में बड़ी और बढ़ी हुई अर्थव्यवस्था बेफिजूल की खर्ची रोकने से भी सम्भव है। वन नेशन, वन इलेक्शन इस बचत को कुछ हद तक बढ़ावा दे सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बानगी के तौर पर देखें 1951-52 के चुनाव में जहां 11 करोड़ रूपए खर्च हुए थे वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में यह आंकड़ा 60 हजार करोड़ की भारी-भरकम राशि के खर्च से भरा हुआ है। इसके अलावा 28 राज्यों और 2 केन्द्रशासित अर्थात दिल्ली और पुदुचेरी के विधानसभा चुनाव भी अलग-अलग खर्चों से पटे हैं। जाहिर है संरचनात्मक व तकनीकी तौर पर चुनाव आयोग को सशक्त करने के साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना मशीनरी, समय और खजाना तीनों की सेहत के लिए ठीक हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दो टूक यह भी है कि वन नेशन, वन इलेक्शन कोई नई बात नहीं है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् 1951-52, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही होते थे। 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले भंग हो गयी और लोकसभा भी समय से पहले 1970 में भंग हो गयी। फलस्वरूप वन नेशन, वन इलेक्शन की परम्परा यहीं से बिखर सी गयी। मगर एक सच यह है कि एक देश, एक चुनाव की राह आसान नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">1999 की विधि आयोग की 170वीं रिपोर्ट से यह स्पश्ट होता है कि हर साल और सत्र के बाहर चुनाव के चक्र को समाप्त किया जाना चाहिए और वापसी वहां पर करनी चाहिए जहां लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एक साथ होते हैं। 2015 की संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट में भी एक चुनाव करने की व्यावहारिकता पर अपनी राय मुखर की जिसमें समिति ने भारी खर्च, आचार संहिता को बनाए रखना, आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति पर प्रभाव और चुनाव के दौरान मानव शक्ति पर अतिरिक्त बोझ पड़ना आदि की पहचान की थी। 2018 की विधि आयोग की रिपोर्ट में एक साथ चुनाव एक बेहतर मसौदा था। One Nation One Election</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें कहा गया कि संविधान के मौजूदा ढांचे के तहत एक साथ चुनाव नहीं कराए जा सकते। संविधान, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 और लोकसभा व राज्य विधानसभाओं की प्रक्रिया के नियमों में उचित संशोधन के मामले में एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं। आयोग ने यह भी सुझाया था कि कम से कम 50 फीसद राज्यों को संवैधानिक संशोधनों की पुश्टि करनी चाहिए। वैसे सरकार बड़ी व्यवस्था होती है और संविधान उसी व्यवस्था को चलाने की एक सर्वोच्च विधि है। समय-समय पर संविधान में आवश्यकता और प्रासंगिकता को देखते हुए संशोधन किए जाते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल लगभग लोकसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े देश में एक साथ चुनाव की बात जोर ले चुकी है। मानसून सत्र के दौरान केन्द्रीय कानून मंत्री ने कहा था कि एक साथ चुनाव कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 83, 85, 172, 174 और 356 में संशोधन करना होगा। एक साथ चुनाव के फायदे अनेक हैं मगर क्या इसका कोई नुकसान भी हो सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि लोकसभा के चुनाव के अलग एजेण्डे होते हैं जबकि विधानसभा के चुनाव के लिए अलग चुनौतियां होती हैं। इसमें क्षेत्रीय दलों का नुकसान हो सकता है क्योंकि एक साथ चुनाव में दो अलग-अलग मुद्दे उठा पाना मुश्किल होगा। One Nation One Election</p>
<p style="text-align:justify;">क्षेत्रीय दल के आभाव में राश्ट्रीय दल सरकार के तौर पर कम दबाव वाले हो सकते हैं जिसमें अंकुश और नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। इतना ही नहीं लोकतंत्र को जनता का शासन कहा जाता है। देश में संसदीय प्रणाली में एक साथ चुनाव न होना कोई बड़ी बात नहीं है जिस खजाने में चुनावी खर्च की बात हो रही है वह देश में हुए अब तक के किसी घोटाले की तुलना में बहुत मामूली है। सरकारें साफ-सुथरी और भ्रश्टाचार पर लगाम लगाने वाली हों तो चुनावी खर्च के बावजूद भी विकास को गगनचुम्बी बनाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही जन प्रतिनिधि जवादेह बने रहेंगे। पड़ताल बताती है कि दुनिया के कई देश साउथ अफ्रीका, स्वीडन व बेल्जियम आदि एक साथ चुनाव में होते हैं। कुछ देश तो संसद से लेकर नगरपालिका तक एक ही साथ चुनाव में रहते हैं। इसके अलावा जर्मनी, फिलिपीन्स, ब्राजील आदि जैसे देश भी एक साथ चुनाव में रहते हैं। संदर्भ निहित परिप्रेक्ष्य यह भी है कि यह एक संवैधानिक मुद्दा है और संवेदनशील भी है। One Nation One Election</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में संविधान की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए ही एक साथ चुनाव वाली अवधारणा को जमीन पर उतारना उचित होगा। संविधानविद् और कानूनविद् तथा सरकार इसकी बारीकियों को ध्यान में रखते हुए इस कसौटी से पार पाएंगे इसकी सम्भावना दिखती है। बावजूद इसके इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि वन नेशन, वन इलेक्शन की राह पूरी तरह समतलतो नहीं है। One Nation, One Election</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. सुशील कुमार सिंह, वरिष्ठ स्तंभकार एवं प्रशासनिक चिंतक </strong><br />
<strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="हमारे सैनिकों, निर्दोष नागरिकों के खून की हर बूंद का बदला लिया जाएगा:सिन्हा" href="http://10.0.0.122:1245/every-drop-of-blood-of-our-soldiers-innocent-civilians-will-be-avenged-sinha/">हमारे सैनिकों, निर्दोष नागरिकों के खून की हर बूंद का बदला लिया जाएगा:सिन्हा</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Sep 2023 10:40:51 +0530</pubDate>
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                <title>One Nation, One Election: वन नेशन, वन इलेक्शन को लेकर केन्द्र सरकार ने उठाया बड़ा कदम, विपक्ष में मचा हाहाकार</title>
                                    <description><![CDATA[One nation-one election big news: मोदी सरकार ने वन नेशन, वन इलेक्शन पर बड़ा कदम उठा लिया है। सरकार ने पूर्व राष्टÑपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की है। यह कमेटी कानून के सभी पहलुओं पर अध्ययन करेगी और एक देश, एक चुनाव की संभावना का पता लगाएगी। कमेटी आम लोगों की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/central-government-took-a-big-decision-regarding-one-nation-one-election/article-51813"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/one-nation-one-election.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">One nation-one election big news: मोदी सरकार ने वन नेशन, वन इलेक्शन पर बड़ा कदम उठा लिया है। सरकार ने पूर्व राष्टÑपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की है। यह कमेटी कानून के सभी पहलुओं पर अध्ययन करेगी और एक देश, एक चुनाव की संभावना का पता लगाएगी। कमेटी आम लोगों की राय भी लेगी। वहीं बताया जा रहा है कि मोदी सरकार 18-22 सितंबर को संसद का विशेष सत्र बुलाया है। जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार विशेष सत्र के दौरान एक देश, एक चुनाव को लेकर बिल पेश कर सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">संसद का विशेष सत्र 18 सितम्बर से, पांच बैठकें होंंगी: जोशी | One Nation, One Election</h3>
<p style="text-align:justify;">एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में सरकार ने आगामी 18 सितम्बर से संसद का पांच दिन का विशेष सत्र बुलाने की घोषणा की है जिसमें पांच बैठकें होंगी। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरूवार को एक ट्वीट में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संसद का विशेष सत्र 18 से 22 सितम्बर तक बुलाया जा रहा है जिसमें पांच बैठकें होंगी। यह 17 वीं लोकसभा का 13 वां और राज्यसभा का 261 वां सत्र होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अमृतकाल में सरकार सार्थक चर्चा करना चाहती है। उल्लेखनीय है कि 20 जुलाई को शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र इसी महीने की 11 तारीख को संपन्न हुआ था। इस सत्र के दौरान 23 दिन में 17 बैठकें हुई थी। विपक्षी दलों ने मणिपुर के मुद्दे को लेकर तरकीबन हर रोज सदन में हंगामा किया। हालाकि सरकार ने इस दौरान अनेक महत्वपूर्ण विधेयक हंगामे के बीच ही पारित कराये। One Nation, One Election</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>विपक्ष हैरान:</strong> सरकार के आश्चर्यजनक फैसले ने विपक्षी गुट को हैरान कर दिया है। सरकार के इस कदम से ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की अटकलें शुरू हो गईं हैं। विपक्षी धड़ों के कुछ नेताओं को लग रहा है कि केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी अगले साल अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनावों को आगे बढ़ा सकती है और अपने पुराने एजेंडे वन नेशन, वन इलेक्शन का ऐलान कर सबको चकित कर सकती है। वहीं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार का यह कदम ‘थोड़ी घबराहट’ दर्शाता है। राहुल गांधी पहले से कहते रहे हैं कि सरकार डरी हुई है। ऐसे में वह हार के डर से कोई भी कदम उठा सकती है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2023 11:34:12 +0530</pubDate>
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                <title>सभी पार्टी प्रमुखों की बैठक आज, ममता बनर्जी ने किया किनारा</title>
                                    <description><![CDATA[One Nation One Election के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में होगी बैठक नई दिल्‍ली, एजेंसी। One Nation One Election (एक देश, एक चुनाव) के मसले पर आज सभी पार्टी प्रमुखों की बैठक होगी। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा बुलाई गई है, जिसकी अध्‍यक्षता भी वह खुद ही करेंगे। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/one-nation-one-election/article-9646"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-06/modi.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">One Nation One Election के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में होगी बैठक</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्‍ली, एजेंसी। </strong>One Nation One Election (एक देश, एक चुनाव) के मसले पर आज सभी पार्टी प्रमुखों की बैठक होगी। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (<strong>PM Narendra Modi)</strong> द्वारा बुलाई गई है, जिसकी अध्‍यक्षता भी वह खुद ही करेंगे। वहीं तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है। उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखकर इस बारे में अवगत भी करा दिया है। बैठक दोपहर बाद तीन बजे से शुरू होने की संभावना है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">20 जून को प्रधानमंत्री सभी सांसदों को दिल्ली के अशोका होटल में रात्रिभोज देंगे।</h2>
<p style="text-align:justify;">इस बैठक में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर विचार, 2022 में आजादी के 75वें वर्ष के जश्न, महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष को मनाने समेत कई मामलों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद 20 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी सांसदों को दिल्ली के अशोका होटल में रात्रिभोज देंगे। वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना रुख सार्वजनिक नहीं किया है। हालांकि, कल सोनिया गांधी के आवास पर बुलाई गई बैठक में इस मुद्दे को लेकर भी चर्चा हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी भेजे गए पत्र में लिखा है, ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ जैसे संवेदनशील एवं गंभीर विषय पर इतने कम समय में जवाब देने से इस विषय के साथ न्याय नहीं होगा। इस विषय को संवैधानिक विशेषज्ञों, चुनावी विशेषज्ञों और पार्टी सदस्यों के साथ विचार-विमर्श की जरूरत है। मैं अनुरोध करूंगी कि इस मुद्दे पर जल्दबाजी में कदम उठाने के बजाए, आप कृपया सभी सियासी दलों को इस विषय पर एक श्वेत पत्र भेजें जिसमें उनसे अपने विचार व्यक्त करने को कहा जाए।’</p>
<p style="text-align:justify;">उधर टीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव भी बैठक में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने अपनी जगह बेटे और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव को भेजने का फैसला लिया है। बता दें कि पहले भी कांग्रेस समेत कई दल ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का विरोध कर चुके हैं। इस बार भी कुछ ऐसे ही संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अधिकतर विपक्षी दलों की ओर से इस बैठक को अव्यावहारिक बताते हुए इसका विरोध किया जा सकता है।</p>
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                <pubDate>Wed, 19 Jun 2019 09:50:17 +0530</pubDate>
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