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                <title>Understand the importance of Osaka - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>ओसाका के महत्व को समझें</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/understand-the-importance-of-osaka/article-9792"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-07/understand-the-importance-of-osaka.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते तनाव और धीमें होते आर्थिक विकास के बीच सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देशों के समूह जी-20 कि 14 वीं शिखर बैठक ओसाका (जापान) में संपन्न हुई। जी-20 की ताजा शिखर बैठक कई मायनों में अपनी पूर्ववर्तीं बैठकों से अलग और अहम थी। इस बार शिखर बैठक में भाग ले रहे सदस्य देशों के प्रमुखों के वक्तव्यों और बैठक के दौरान उठने वाले मुद्दों व अंत में जारी साझा घोषणा पत्र को लेकर जितनी सक्रियता दिखी उतनी पहले कभी नजर नहीं आई। सक्रियता के कई कारण भी रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">पहला और बड़ा कारण तो यह रहा कि शिखर सम्मेलन दो बडे़ देशों के बीच उत्पन्न राजनीतिक तनाव के माहौल में हो रहा था। अमेरिका और चीन के कारोबारी विवाद ने इस समय हर छोटे-बड़े देश में एक अलग किस्म का भय पैदा कर दिया है कि दोनों महाशक्तियों की कारोबारी र्प्रतिस्पर्धा से कमोबेश उनकी अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए जी-20 के सदस्य देशों के अलावा अन्य देश भी मन ही मन इस बात की दुआ मांग रहे थे कि ओसाका सम्मेलन में ट्रंप व शी जिनपिंग के बीच किसी किस्म की सर्वसम्मती बनने की खबर आए। ओसाका रवाना होने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड टंÑप ने ट्वीट करके जब बढ़े हुए टैरिफ यानी सीमा शुल्क का मसला उठाया तो इस बात के कयास लगाए जाने लगे कि दुनिया की 85 फिसदी आबादी और 80 फिसदी जीडीपी का योगदान देने वाले इस संगठन की शिखर बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त न हो जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण सुरक्षा और मुक्त व्यापार के मुद्दे पर अमेरिका कि भिन्न राय के चलते एकबारगी लग रहा था कि यह बैठक भी अपने उद्ेश्यों में सफल नहीं हो पाए। हालांकी मेजबान जापान के पीएम शिंजो आबे ने सम्मेलन की शुरूआत में सदस्य देशों से संभावित समझौते के लिए तैयार रहने का आह्वान कर इस बात की संभावनाए बनाए रखी कि ओसाका से दुनिया के लिए कोई बड़ा संदेश निकलने वाला है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के लिए सबसे अहम बात यह रही कि टंÑप-मोदी मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने न केवल अपने अपने अधिकारियों से भारत और अमेरिका के व्यापारिक मसलों को सुलझाने के निर्देश दिये बल्कि ईरान मामले में भी दोनों पक्षों ने एक दूसरे के हितों को देखते हुए समाधान निकालने की बात कही। दोनों नेताओं के बीच 5जी तकनीक, द्विपक्षीय रिश्ते और रक्षा मसलों पर चर्चा हुई । ट्रंप-मोदी बातचीत के बाद यह उम्मीद कि जाने लगी है कि भारत की मेक इन इंडिया या डिजिटल इंडिया जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं में अमेरिका सहयोग करेगा और आने वाले दिनों में इनसे जूड़ी तकनीक भारत में ट्रांसफर होगी जिससे निवेश के नए रास्ते खुलेगें। यह बैठक इसलिए अहम थी, क्योंकि अमरीका फर्स्ट की नीति के तहत टंÑप प्रशासन अमरीकी उत्पादों पर भारत की अधिक ड्यूटी को लेकर विरोध जता रहा है। हालांकी दोनों नेताओं के बीच रूस से एस-400 मिसाइल सौदे को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">सम्मेलन से इतर रूस, भारत और चीन (आरआइसी) की बैठक भी हुई। इस दौरान मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से सीमा सुरक्षा और बढते आतंकवाद पर, जबकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सीमा को सुरक्षित रखने के मद्देनजर आधुनिक हथियार प्रणाली पर बातचीत की। इसके अलावा भारत ने ब्रिक्स राष्ट्र ( ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रिका) के नेताओं के साथ मिलकर आतंकवादी नेटवर्कांे के वित्तपोषण और अपने भूभाग से आतंकवादी गतिविधियां चलाए जाने से रोकने को कहा। उन्होंने आतंकवाद और पर्दे के पीछे से आतंकवादियों को दी जा रही वित्तीय मदद को रोकने का संकल्प जताया। मोदी ने विश्व व्यापार संगठन को मजबूत बनाने, संरक्षणवाद से लड़ने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल दिया। सऊदी अरब और इटली के बाद 2022 में भारत जी-20 सम्मेलन की मेजबानी करेगा। 2019 की यह 14 वी बैठक भारत में होनी थी लेकिन देश में लोकसभा चुनावों को देखते हुए भारत ने इसकी मेजबानी को अस्वीकार कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">जी-20 विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्रीयों और केंद्रीय बैंक के गवर्नर्स का एक संगठन है, जिसमें 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल है। 2008 से पहले जी-20 की बैठकें वित्त मंत्री के स्तर पर हुआ करती थी लेकिन वित्तीय संकट के बाद बिगड़े हालात पर काबू पाने के लिए इसे शिखर सम्मेलन का दर्जा दिया गया। वर्तमान में इसमे अमेरिका, अर्जेंटीना, आस्ट्रेलिया, ब्राजील, ब्रिटेन, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूरोपीय संघ शामिल है। हालांकी अन्य वैश्विक व क्षेत्रिए संगठनों की तरह जी-20 से जुड़े देशों के बीच भी विभिन्न मुददों को लेकर पर्याप्त विरोध है, लेकिन इसके बावजुद इस संगठन के मंच पर जिस तरह से दुनिया के बडे़ संकटों को हल करने के लिए आवाज उठाई जाती है उससे यह उम्मीद तो की ही जा सकती है कि देर सवेर जी-20 के महत्व को दुनिया स्वीकार कर ही लेगी।<br />
<em><strong>-एन.के.सोमानी</strong> </em></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 05 Jul 2019 20:48:29 +0530</pubDate>
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