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                <title>controversy - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Sitamarhi : नूपुर के समर्थक अंकित पर चाकू से 6 बार हमला किया, पुलिस दर्ज की एफआईआर</title>
                                    <description><![CDATA[सीतामढ़ी (सच कहूँ न्यूज)। नूपुर शर्मा के समर्थक पर बिहार में हमला हुआ है। यह मामला सीतामढ़ी का है, जहां एक युवक को नूपुर शर्मा का वीडियो देखने पर कुछ युवकों ने चाकू मार दिया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना 16 जुलाई की बताई जा रही है। परिजनों का आरोप […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sitamarhi-nupur-supporter-ankit-attacked/article-35659"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/nupur-sharma1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सीतामढ़ी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> नूपुर शर्मा के समर्थक पर बिहार में हमला हुआ है। यह मामला सीतामढ़ी का है, जहां एक युवक को नूपुर शर्मा का वीडियो देखने पर कुछ युवकों ने चाकू मार दिया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना 16 जुलाई की बताई जा रही है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने मामला दबाने की कोशिश की। जानकारी के अनुसार, पुलिस ने अभी तक 2 जनों को गिरफ्तार कर लिया है और नूपुर शर्मा का नाम हटा दिया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट की मानें तो घायल युवक अंकित झा नानपुर गांव में पान खाने के लिए पानी की दुकान पर आया था। इस केस में पीड़ित अंकित झा के अनुसार, उसने अपने फोन में नूपुर शर्मा का स्टेटस लगाया था और उसे देख रहा था। इतने में ही पीछे से कुछ युवक आए और पूछने लगे क्या देख रहे हो? इस पर अंकित ने कहा कि वो नूपुर शर्मा का सपोर्ट करेगा। इतना कहने पर ही हाथापाई शुरू हो गई।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>6 बार चाकू से किया हमला: अंकित</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">अंकित ने मीडिया को बताया कि वो 3-4 लोग थे। इतने में एक युवक ने सिगरेट का धुआं उसके मुंह की ओर फेंका। ऐसे में फिर झगड़ा हो गया और उन्होंने मेरे पर चाकू से 6 बार हमला बोल दिया। उसके बाद 25-30 मुस्लिम लोग आए और उसे बचाकर लेकर चले गए। इसके बाद अंकित को अस्पताल लेकर लोग चले आए। आपको बता दें कि इस मामले में पुलिस पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jul 2022 12:11:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>धर्म व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता</title>
                                    <description><![CDATA[‘काली’ फिल्म के विवादित पोस्टर का विरोध शुरू होने के बाद एक बार फिर धर्म व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या कला की स्वतंत्रता का मामला चर्चा का विषय बन गया है। अति व हठधर्मिता ही ऐसे विवादों के कारण बनते हैं जब कलाकार अपनी स्वतंत्रता के सही अर्थों को ना समझकर हठधर्मिता करता है तो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/protest-against-the-controversial-poster-of-the-film-kaali/article-35234"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/leena-manimekalai1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">‘काली’ फिल्म के विवादित पोस्टर का विरोध शुरू होने के बाद एक बार फिर धर्म व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या कला की स्वतंत्रता का मामला चर्चा का विषय बन गया है। अति व हठधर्मिता ही ऐसे विवादों के कारण बनते हैं जब कलाकार अपनी स्वतंत्रता के सही अर्थों को ना समझकर हठधर्मिता करता है तो कला का धर्म भंग हो जाता है। वास्तव में धर्म को मशीनी या तकनीकी नजरिये के चश्में से देखने की गलती ही विवादों की जड़ है। धर्म, धार्मिक विश्वास, चिन्ह्, प्रतीकों के पिछले संकल्प हजारों वर्षों की यात्रा कर आगे बढ़ रहे हैं। इन विश्वासों, प्रतीकों को विज्ञान या गणित के तरीके से नहीं समझा जा सकता। वैज्ञानिक विचारों वाले मनुष्य के लिए इतिहास कल्पना व असंभव वस्तुएं हैं जो केवल विश्वास पर आधारित हैं, लेकिन धर्म के प्रत्येक संकल्प का अपना अर्थ, संदर्भ व महत्व है।</p>
<p style="text-align:justify;">हजारों वर्षों के बाद भी इतिहास आधुनिक साहित्य, समाज शास्त्र, मनोविज्ञान व इतिहास के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है। कलाकारों को अवश्य पता होना चाहिए कि वे धर्म व धार्मिक चिन्हें को समाज की खुशहाली के लिए प्रयोग करें। जहां तक कानून का संबंध है मनुष्य की भावनाओं को ठेस पहुंचाना अपराध है। कलाकार भी कोई अज्ञानी या गैर-जिम्मेदार व्यक्ति नहीं होता बल्कि वह समाज की बेहतरी के लिए सोचने वाला व्यक्ति होता है। समाज के लिए कोई अच्छा संदेश देने के सिवाय किसी साहित्यिक पुस्तक या किसी फिल्म का कोई औचित्य ही नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पष्ट शब्दों में कलाकार का काम विवाद पैदा करना नहीं है। धर्म के नाम पर हो रही बुराई को रोकना तो उचित है, लेकिन धर्म को बुरे व समाज विरोधी रूप में पेश करना गलत है। कई फिल्में ऐसी भी आर्इं हैं, जिन्होंने धर्म के नाम पर बुराईयों के खिलाफ आवाज उठाने के साथ-साथ धार्मिक सद्भावना को मजबूत किया। एक कलाकार को अपने निजी विचार पूरे देश पर नहीं थोपने चाहिए। कलाकार के साथ-साथ राजनेताओं को भी धर्म संबंधी आपत्तिजनक टिप्पणियां करने से बचना चाहिए। यह संकोच केवल कानून के भय के कारण नहीं बल्कि कलाकारों व राजनेताओं को अपने कर्तव्य व जिम्मेदारियों की तरफ भी देखना चाहिए।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jul 2022 10:21:26 +0530</pubDate>
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                <title>काली पोस्टर विवाद: फिल्म निर्माता लीना मणिमेकलाई के खिलाफ मामला दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। दिल्ली पुलिस ने फिल्म निर्माता लीना मणिमेकलाई के खिलाफ मामला दर्ज किया है। फिल्म निमार्ता ने एक डॉक्यूमेंट्री का पोस्टर जारी किया था, जिसमें देवी काली को धूम्रपान करते हुए दिखाया गया है। लीना ने अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ का एक पोस्टर शेयर किया, जिसमें पीछे एलजीबीटीक्यू समुदाय का झंडा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/kaali-poster-controversy-case-registered-against-filmmaker-leena-manimekalai/article-35221"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/leena-manimekalai.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> दिल्ली पुलिस ने फिल्म निर्माता लीना मणिमेकलाई के खिलाफ मामला दर्ज किया है। फिल्म निमार्ता ने एक डॉक्यूमेंट्री का पोस्टर जारी किया था, जिसमें देवी काली को धूम्रपान करते हुए दिखाया गया है। लीना ने अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ का एक पोस्टर शेयर किया, जिसमें पीछे एलजीबीटीक्यू समुदाय का झंडा भी दिख रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली पुलिस ने कहा, ‘एक पोस्टर के संबंध में दिल्ली पुलिस को शिकायत मिली है। शुरूआती जानकारी में आईपीसी की धारा 153-ए/295-ए के तहत अपराध किया गया है, जिसके लिए स्पेशल सेल में मामला दर्ज किया गया है। लीना को लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए निंदा का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने उनकी गिरफ्तारी की मांग की है।</p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Jul 2022 17:01:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हर मुद्दे पर विवाद उचित नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[एनपीआर का उद्देश्य देश में हर सामान्य निवासी का एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है। डेटाबेस में जनसांख्यिकीय के साथ-साथ बॉयोमीट्रिक विवरण शामिल होंगे। प्रत्येक सामान्य निवासी के लिए यह जनसांख्यिकीय विवरण आवश्यक है, जिसके तहत नाम, मां-पिता या पति का नाम, लिंग, जन्म तिथि, वैवाहिक स्थिति, जन्म स्थान, राष्ट्रीयता, वर्तमान पता, वर्तमान पते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/controversy-is-not-appropriate-on-every-issue/article-12028"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/nrc-bill.jpg" alt=""></a><br /><h4>एनपीआर का उद्देश्य देश में हर सामान्य निवासी का एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है। डेटाबेस में जनसांख्यिकीय के साथ-साथ बॉयोमीट्रिक विवरण शामिल होंगे। प्रत्येक सामान्य निवासी के लिए यह जनसांख्यिकीय विवरण आवश्यक है, जिसके तहत नाम, मां-पिता या पति का नाम, लिंग, जन्म तिथि, वैवाहिक स्थिति, जन्म स्थान, राष्ट्रीयता, वर्तमान पता, वर्तमान पते पर रहने की अवधि, स्थायी निवास पता, व्यवसाय, शैक्षणिक योग्यता से लेकर वर्तमान स्थिति की जानकारी देनी होगी।</h4>
<h4><strong>लेखक राजेश महेश्वरी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">नागरिकता संशोधन काूनन के विरोध में जिस तरह की हिंसक घटनाएं देश के कई राज्यों में घटी, उनका जितनी निंदा की जाए उतना कम है। असल में जिस कानून का देश के नागरिकों से कुछ लेना देना ही नहीं है, उस पर हिंसा समझ से परे है। लेकिन चंद ताकतों ने देश के एक बड़े वर्ग का उकसाने, भरमाने और बरगालने का काम किया जिसका नतीजा सड़कों पर हिंसा प्रदर्शनों के रूप में दिखा। सरकार के हर निर्णय का विरोध (Controversy) करना विपक्ष ने अपना धर्म समझ लिया है। अपने राजनीतिक उद्देश्य पूरे करने के लिये षडयंत्र के तहत जब राजनीतिक दल आम लोगों को उसमें शामिल कर विरोध करने लगते हैं तो अनियत्रिंत भीड़ विस्फोटक स्थितियां पैदा कर देती है।</p>
<h4>नागरिकता कानून से पहले मोटर वाहन कानून का भी देशभर में विरोध हुआ था। लोग हेल्मेट और सीट बेल्ट बांधने को तैयार नहीं हैं। यातायात नियमों का पालन वो करना नहीं चाहते।</h4>
<p>हर काम में राजनीति। हर निर्णय का विरोध। ऐसी प्रवृति देश में बड़ी तेजी से आम आदमी में फैल रही है। विपक्ष के राजनीतिक दल इस विरोध को हवा देने का काम कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">नागरिकता संशोधन कानून के बाद अब राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) शुरू होने से पहले ही विवाद शुरू होता दिख रहा है। केंद्र सरकार ने जनगणना-2021 की प्रक्रिया शुरू करने के साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने की मंजूरी दे दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगले साल अप्रैल से सितंबर के बीच होने वाली इस जनगणना पर 8,500 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। जनगणना आयोग ने कहा है कि एनपीआर का उद्देश्य देश के प्रत्येक ‘सामान्य निवासी’ का एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है। जनगणना पूरे देश की होगी, जबकि एनपीआर में असम को छोड़कर देश की बाकी आबादी को शामिल गया है। असम को इस प्रक्रिया से इसलिए बाहर रखा गया है, क्योंकि वहां एनआरसी हो चुका है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">एनपीआर को लेकर केंद्र सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब देश में एक बड़ा वर्ग नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ उद्वेलित है।</h4>
<p style="text-align:justify;">देश में बड़ी आबादी ऐसी भी है, जो एनसीआर और एनपीआर में अंतर नहीं समझती। इसलिए राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में अंतर समझना-समझाना आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">सीधे शब्दों में कहा जाए तो एनपीआर देश में रहने वाले निवासियों का राष्ट्रीय डाटा तैयार करने की रूटीन कवायद है। इसमें विदेशी भी शामिल किए जाएंगे, जो 6 माह से अधिक समय से एक स्थान पर रहते होंगे या आगामी 6 माह में बसने की योजना बना रहे होंगे। आबादी के स्तर पर बदलाव स्वाभाविक हैं, क्योंकि कोई दिवंगत होता है, तो कोई जन्म लेता है, कोई कामकाज के सिलसिले में अपना पुश्तैनी घर, गांव या कस्बा भी छोड़ता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">बदलाव के ऐसे असंख्य आंकड़े सामने कैसे आएंगे या सरकार की जानकारी में कैसे होंगे? बेशक सरकारें और प्रशासन इसी आधार पर योजनाओं और नीतियों के प्रारूप तय करते हैं। लेकिन चूंकि देश में नागरिकता कानून से लेकर एनआरसी की बातें चल रही हैं, ऐसे में सरकार के हर कदम को विपक्षी दल उससे जुड़ा बता रहे हैं जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।</h5>
<p style="text-align:justify;">ऐसा नहीं है कि एनपीआर जैसी कवायद केवल भारत में ही होती है। विश्व के अधिकतर देशों में एनपीआर का प्रावधान है। महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय एनपीआर की व्याख्या इस तरह करता है कि एनपीआर देश के सामान्य निवासियों का एक रजिस्टर है। यह नागरिकता अधिनियम 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र) नियम-2003 के प्रावधानों के तहत स्थानीय (ग्रामध्उप-टाउन), उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक सामान्य निवासी के लिए एनपीआर में पंजीकरण कराना अनिवार्य है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">एक सामान्य निवासी एनपीआर के उद्देश्यों के तहत वह व्यक्ति है, जो पिछले 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहता है या जो अगले 6 महीने या उससे अधिक समय तक उस क्षेत्र में निवास करने का इरादा रखता है।</h5>
<p style="text-align:justify;">आबादी के आंकड़ों के हिसाब से योजनाओं का प्रारूप बनता है और वो जमीन पर उतर पाती हैं। एक और गौरतलब तथ्य यह है कि भारत में 3.5 करोड़ से ज्यादा आदिवासी हैं। कुछ भटकी प्रजातियां भी हैं और कुछ हजार सिर्फ गन्ना काटने वाले समुदाय भी हैं। करीब 2 करोड़ भिखारी भी बताए जाते हैं। ये सभी अस्थायी और अस्थिर निवासी हैं। बेशक वे सभी ‘भारतीय’ ही होंगे। योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उन्हें भी मिलना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">आंतरिक सुरक्षा वहां भी एक संवेदनशील समस्या है। तो समय-समय पर उनका हिसाब-किताब क्यों नहीं होना चाहिए? 2003 में तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने एक नियम बनाया था-नागरिकों के पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान कार्ड जारी करना। उसके तहत गांव, कस्बा, तहसील, जिला, राज्य और देश के स्तर पर यह काम किया जाना है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">लिहाजा एनपीआर देश के स्वाभाविक निवासियों का रजिस्टर है। इसका पालन यूपीए सरकार ने भी किया। बेशक पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर किया गया, लेकिन एनपीआर की प्रक्रिया शुरू की गई।</h4>
<p style="text-align:justify;">हमारी राष्ट्रीय जनसंख्या का मौजूदा आंकड़ा भी जानना जरूरी है। सामाजिक, आर्थिक, लैंगिक अनुपात के यथार्थ भी सामने आने चाहिए। सवाल है कि इस विश्लेषण में ऐसी कौन-सी साजिशें छिपी हैं, जिनके मद्देनजर पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार और केरल की वामपंथी सरकार ने एनपीआर की प्रक्रिया लागू करने से इनकार कर दिया है। हालांकि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और पंजाब राज्यों के अलावा पुडुचेरी संघ शासित क्षेत्र में कांग्रेस की सरकारें हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">कांग्रेस महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार में भी शामिल है। इन सरकारों को अभी निर्णय लेना है और कांग्रेस भी आधिकारिक तौर पर खामोश है। एनपीआर की अधिसूचना केंद्र सरकार ने 31 जुलाई, 2019 को जारी की थी।</h5>
<p style="text-align:justify;">उसके बाद लगभग सभी राज्य सरकारें अधिसूचना जारी कर चुकी हैं। गृहमंत्री अमित शाह और सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर भी इन तथ्यों को स्पष्ट कर चुके हैं। सरकार यह भी स्पष्ट दावा कर रही है कि एनआरसी और एनपीआर में कोई संबंध नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनपीआर का डाटाबेस एनआरसी में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। तो ओवैसी सरीखे नेता किस आधार पर यह अफवाह फैला रहे हैं कि एनपीआर ही एनआरसी का पहला कदम है? बहरहाल, कई विपक्षी दल इसे भी राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश में लग गए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अच्छा हुआ कि गृहमंत्री अमित शाह ने समय पर सफाई दे दी कि एनपीआर का एनआरसी से कोई संबंध नहीं है। देश को मालूम होना चाहिए कि उसके यहां कौन-कौन रहते हैं।</h4>
<p style="text-align:justify;">विपक्षी दलों व अन्य संगठनों की भी जिम्मेदारी है कि वह इस मामले में राजनीति करने की बजाय लोगों को सही जानकारी दें। हर मामले में राजनीति और विवाद से देश और देशवासियों का नुकसान होना लाजिमी है। सीधी सी बात है जब तक आपके पास आंकड़ें नहीं होंगे तब तक आप विकास का खाका नहीं खींच पाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में राजनीति करने के लिये तमाम मुद्दे और मसले बाकी हैं, राजनीतिक दलों का उन पर ध्यान लगाकर देश की जनता की भलाई सोचनी चाहिए। गृहमंत्री इस मामले में अपनी राय एक साक्षात्कार के माध्यम से देश के समक्ष साफ कर चुके हैं, अब इस मामले में राजनीति बंद होनी चाहिए।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/controversy-is-not-appropriate-on-every-issue/article-12028</link>
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                <pubDate>Fri, 27 Dec 2019 14:40:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अयोध्या  विवाद: SC से आज मिलेगी सुनवाई की तारीख</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ)। लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में लंबित अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद (Ayodhya Ram Janmbhoomi controversy) पर सुनवाई की उम्मीद जगी है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में मामला लगा है जिसमें मुख्य अपीलों पर सुनवाई की तिथि तय हो सकती है। क्योंकि पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने मामले को जनवरी के पहले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ)।</strong> लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में लंबित अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद <strong>(Ayodhya Ram Janmbhoomi controversy)</strong> पर सुनवाई की उम्मीद जगी है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में मामला लगा है जिसमें मुख्य अपीलों पर सुनवाई की तिथि तय हो सकती है। क्योंकि पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने मामले को जनवरी के पहले सप्ताह में तारीख तय करने के लिए लगाने का आदेश दिया था। इसके अलावा एक नयी जनहित याचिका भी सुनवाई के लिए लगी है जिसमें अयोध्या मामले की अपीलों पर तय समय में सुनवाई किये जाने की मांग की गई है। साथ ही कहा गया है कि कोर्ट दिशानिर्देश तय करे कि अगर किसी मामले की सुनवाई स्थगित होती है या याचिका खारिज होती है तो कारण दर्ज किये जाएंगे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">रामलला सहित 13 पक्षकारों ने बराबर हिस्सों में भूमि बांटने के हाईकोर्ट के आदेश को दी है चुनौती</h2>
<p style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में फैसला सुनाते हुए जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। इस फैसले को रामलला सहित सभी पक्षकारों ने 13 अपीलों के जरिये सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से फिलहाल मामले में यथास्थिति कायम है।शुक्रवार को होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें लगी हैं क्योंकि हाल ही में प्रधानमंत्री ने एक साक्षात्कार में कहा था कि मामला कोर्ट में लंबित रहने तक अयोध्या मसले पर अध्यादेश नहीं लाया जाएगा। दूसरी ओर संघ परिवार और साधू समाज सुनवाई में हो रही देरी के आधार पर अयोध्या में मंदिर बनवाने के लिए अध्यादेश लाने की मांग पर अड़ा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">एक और नयी रिट याचिका विनीत कुमार मौर्या की लगी है।</li>
<li style="text-align:justify;">ये सारी याचिकाएं सातवें नंबर पर सुनवाई के लिए लगीं है।</li>
<li style="text-align:justify;">बीसवें नंबर पर हरिनाथ राम की एक नयी जनहित याचिका लगी है जिसमें अयोध्या मसले से संबंधित सभी अपीलों पर तय समय में सुनवाई की मांग की गई है।</li>
<li style="text-align:justify;">साथ ही केस के स्थगन और खारिज होने पर कारण दर्ज करने के बारे में दिशानिर्देश तय करने का भी आग्रह किया गया है।</li>
<li style="text-align:justify;">पिछली सुनवाई 29 अक्टूबर को कोर्ट ने तिथि तय करने के लिए मामला उचित पीठ के सामने लगाने का आदेश दिया था</li>
<li style="text-align:justify;">जिसके बाद शुक्रवार को मामला सुनवाई पर लगा है।</li>
<li>
<h2>राम जन्मभूमि विवाद से जुड़ी कुल 15 याचिकाएं लगी हैं।</h2>
<p style="text-align:justify;">शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ के समक्ष राम जन्मभूमि विवाद से जुड़ी कुल 15 याचिकाएं लगी हैं। जिसमें से 13 हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पक्षकारों की वे अपीलें है जिन्हें कोर्ट विचारार्थ स्वीकार कर चुका है और अब उनकी मेरिट पर सुनवाई होनी है। एक याचिका शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड की है। जिसने अयोध्या में मंदिर बनवाने के लिए हिन्दुओं का समर्थन किया है हालांकि वह याचिका अभी सिर्फ प्रारंभिक सुनवाई के स्तर पर ही है।</p>
</li>
</ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/ayodhya-ram-janmabhoomi-controversy/article-7209</link>
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                <pubDate>Fri, 04 Jan 2019 10:40:56 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विवाद को खत्म करने प्रियंका ने मांगी माफी</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई(एजेंसी)। बॉलीवुड से हॉलीवुड तक में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकी अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा का अमेरिकी शो ‘क्वांटिको सीजन 3’ इन दिनों विवादों में घिर चुका है। दरअसल ‘क्वांटिको 3 के एक एपिसोड में आतंकी हमले के पीछे हिन्दू आतंकी का हाथ होने की बात कही गई थी। इसे लेकर जमकर विवाद हुआ और लोगों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/priyanka-apologizes-for-ending-controversy/article-4145"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/prika.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई(एजेंसी)। </strong>बॉलीवुड से हॉलीवुड तक में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकी अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा का अमेरिकी शो ‘क्वांटिको सीजन 3’ इन दिनों विवादों में घिर चुका है। दरअसल ‘क्वांटिको 3 के एक एपिसोड में आतंकी हमले के पीछे हिन्दू आतंकी का हाथ होने की बात कही गई थी। इसे लेकर जमकर विवाद हुआ और लोगों ने प्रियंका चोपड़ा पर भी अपना गुस्सा निकाला। इसे देखते हुए पहले तो सीरियल निर्माताओं ने माफी मांगी, लेकिन मामला शांत नहीं होते देख अंतत: प्रियंका चोपड़ा ने भी मौन तोड़ते हुए माफी मांग ली।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल प्रियंका ने ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ‘क्वांटिको’ के हालिया विवादित एपिसोड से कई लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है. इसके लिए मैं बेहद दुखी हूं और आप सभी से माफी चाहती हूं। ऐसा मेरा कोई मकसद नहीं था और ना ही आगे कभी रहेगा। मैं सच्चाई के साथ माफी मागंती हूं। मुझे भारतीय होने पर गर्व है और यह कभी नहीं बदलेगा। आपको बतलाते चलें कि प्रियंका ‘क्वांटिको 3’ के एपिसोड ‘द ब्लड ऑफ रोमियो’ पर विवाद हुआ है जिसे लेकर सोशल मीडिया पर प्रियंका को टारगेट किया जा रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रियंका ‘क्वांटिको’ में एलेक्स पैरिश का किरदार निभा रही हैं जो एफबीआई एजेंट हैं। इस एपिसोड के जरिए बताया गया था कि पाकिस्तान-भारत में शांति वार्ता होने जा रही है और उससे पहले न्यूयॉर्क में परमाणु आतंकी हमले की साजिश का खुलासा होता है। जब एक शख्स को आतंकी हमले के संदेह में पकड़ा जाता है, और उसके पास से रुद्राक्ष की माला निकलती है तो प्रियंका कहती हैं कि इंडियन नेशनलिस्ट हैं जो हमले के जरिये पाकिस्तान को बदनाम करना चाहते हैं।बस यही वह सीन है जिसमें हिन्दू आतंकवादी होने का आरोप लगाया गया और विवाद को जन्म दे दिया गया है। बहरहाल अब प्रियंका ने माफी मांगकर विवाद को यहीं खत्म करने का संदेश दिया है आगे देखिए विवाद शांत होता है या विरोध जारी रहता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jun 2018 12:26:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खाने को लेकर B.Tech की छात्राओं में विवाद, खोला मोर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[गोहाना। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय में हॉस्टल की मैस से एलएलबी की एक छात्रा द्वारा कमरे में खाना ले जाने पर विवाद हो गया। छात्रा अपनी मां के लिए खाना लेकर जा रही थी। तभी रास्ते में बी-टैक की एक छात्रा ने एलएलबी की छात्रा से मारपीट की और उसका खाना गिरा दिया। इसी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/b-tech-students-controversy-over-eating/article-3291"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/student.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गोहाना।</strong> भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय में हॉस्टल की मैस से एलएलबी की एक छात्रा द्वारा कमरे में खाना ले जाने पर विवाद हो गया। छात्रा अपनी मां के लिए खाना लेकर जा रही थी। तभी रास्ते में बी-टैक की एक छात्रा ने एलएलबी की छात्रा से मारपीट की और उसका खाना गिरा दिया। इसी विवाद में एलएलबी की छात्राएं एकजुट हो गई और रात को जमकर हंगामा किया।</p>
<h1 style="text-align:justify;">बी-टैक की छात्रा के निलंबन की मांग</h1>
<p style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार एलएलबी की तृतीय वर्ष की छात्रा रीना हॉस्टल नम्बर-12 में रहती है। उसकी मां अपनी बेटी से मिलने आई थी और हॉस्टल में उसके साथ रुकी थी। रीना ने मैस इंचार्ज से हॉस्टल में अपनी मां के लिए खाना लेकर जाने की अनुमति ली।</p>
<p style="text-align:justify;">मां के लिए खाना लेकर जा ही रही थी कि तभी मनीषा ने रीना को थप्पड़ जड़ दिया। फिर रीना ने हॉस्टल की दूसरी छात्राओं को बताया, जिससे वे भी भड़क गई और एकजुट हो गईं। अब प्रदर्शनकारी छात्राओं ने बी-टैक की छात्रा के निलंबन की मांग की।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Aug 2017 01:28:07 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>वंदे मातरम की अनिवार्यता पर हाईकोर्ट के आदेश से विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। ‘वंदे मातरम’ गीत पर मद्रास हाईकोर्ट की ओर से सुनाए गए फैसले को लेकर महाराष्ट्र में भी राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। भाजपा के एक विधायक ने इसे राज्य के स्कूलों और कॉलेजों में लागू करने की मांग की है, जबकि कुछ अन्य दलों के विधायकों ने ऐसे किसी कदम का विरोध किया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/national-anthem-controversy/article-2669"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/flag1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> ‘वंदे मातरम’ गीत पर मद्रास हाईकोर्ट की ओर से सुनाए गए फैसले को लेकर महाराष्ट्र में भी राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। भाजपा के एक विधायक ने इसे राज्य के स्कूलों और कॉलेजों में लागू करने की मांग की है, जबकि कुछ अन्य दलों के विधायकों ने ऐसे किसी कदम का विरोध किया है। मुंबई से आॅल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के विधायक वारिस पठान ने कहा कि अगर कोई उनके सिर पर रिवॉल्वर भी रख दे, तो भी वह राष्ट्रगीत नहीं गाएंगे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">आसिम आजमी ने कहा कि</h2>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष एवं विधायक अबू आसिम आजमी ने भी कहा कि अगर उन्हें देश से बाहर भी फेंक दिया जाए, तो भी वह इसे नहीं गाएंगे। ये प्रतिक्रियाएं दरअसल भाजपा के एक वरिष्ठ विधायक राज पुरोहित की एक मांग के बाद आई हैं। पुरोहित ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ को महाराष्ट्र के हर स्कूल और कॉलेज में गाना अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। न्यायालय ने मंगलवार को आदेश सुनाते हुए तमिलनाडु के स्कूलों में राष्ट्रगीत को सप्ताह में कम से कम दो बार गाना अनिवार्य बना दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
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                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/national-anthem-controversy/article-2669</link>
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                <pubDate>Fri, 28 Jul 2017 08:17:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विवादों में घिरा खेल ढांचा</title>
                                    <description><![CDATA[ओलंपिक के क्षेत्र में देश पहले ही पस्त हालत में है, जिसे सुधारने के लिए भारत के खेल संघों का सुधार किया जाना आवश्यक है। लेकिन खेल संघों में अभी भी व्यवस्था भ्रष्टाचार की चक्की में पिस रही है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का अभी विवाद थमा नहीं है कि भारतीय ओलंपिक संघ में भ्रष्टाचार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/controversy-surrounded-the-game-structure/article-683"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/olympic.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ओलंपिक के क्षेत्र में देश पहले ही पस्त हालत में है, जिसे सुधारने के लिए भारत के खेल संघों का सुधार किया जाना आवश्यक है। लेकिन खेल संघों में अभी भी व्यवस्था भ्रष्टाचार की चक्की में पिस रही है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का अभी विवाद थमा नहीं है कि भारतीय ओलंपिक संघ में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे सुरेश कलमाड़ी व अभय चौटाला को आजीवन अध्यक्ष के पद दे दिए गए। हालांकि कलमाड़ी ने यह पद स्वीकार करने से इन्कार कर दिया, लेकिन अभय चौटाला अभी भी पद रखने के लिए कायम हैं। यहां यह प्रश्न बेहद महत्वपूर्ण है कि भारतीय ओलंपिक संघ के निर्वाचन मंडल के पास क्या कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था कि उन्हें आजीवन अध्यक्ष पद के लिए सुरेश कलमाड़ी व अभय चौटाला को चुनना पड़ा? क्या अभय चौटाला की नियुक्ति इसलिए की गई कि उनके पहले के कार्यकाल के दौरान अंतर्राष्टÑीय ओलंपिक संघ ने भारतीय ओलंपिक संघ को प्रतिबंधित कर दिया था। हाल ही में आए एक आमजन सर्वे में पाया गया है कि 92 फीसदी लोग नहीं चाहते कि खेल संघों की कमान राजनेताओं के हाथ में रहे। इससे भी बढ़कर 86 फीसदी लोगों ने तो मांग की है कि इन खेल संघों का संचालन देश के नामचीन पूर्व खिलाड़ी ही करें। भारतीय खेल मंत्रालय ने भारतीय ओलंपिक संघ को नोटिस जारी कर जानना चाहा है कि भ्रष्टता के आरोपों का सामना कर रहे कलमाड़ी व चौटाला की नियुक्ति किस बिनाह पर की गई है? हालांकि भारतीय ओलंपिक संघ एक स्वायत संस्था है। उसमें सरकार का दखल बेहद नपा-तुला हो सकता है, लेकिन सरकार के नोटिस से यह अवश्य समझा जाना चाहिए कि देश में खेलों की एक सर्वोच्चय संस्था में मनमानियां उसे सरकार से ऊपर नहीं बना सकतीं। इससे पहले कि भारतीय ओलंपिक संघ की मनमानियों पर उच्चतम न्यायालय कोई आदेश करे, ओलंपिक संघ को चाहिए कि वह अपनी रीति-नीति में स्वयं शुचिता लाए। खेल संघ खेलों व खिलाड़ियों के विकास के लिए गठित किए गए हैं, अत: इनमें राजनीति व नाहक मान-सम्मान की गैर क्रीड़ात्मक गतिविधियां न ही हों। खेल मंत्रालय को चाहिए कि वह केबीनेट से या संसद से खेल संघों पर एक निगरानी तंत्र या नियामक की नियुक्ति करवाए, ताकि खेल प्रेमियों को अपने हितों की रक्षा के लिए बार -बार न्यायालय की शरण में न जाना पड़े। ऐसे नियामक से जहां खेल संघों से भ्रष्टाचार का सफाया होगा, वहीं सरकार का इन पर नियंत्रण भी होगा।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Dec 2016 05:15:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>रेहड़ियां हटाने को लेकर हुआ बवाल खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[रेहड़ी वालों ने किया जमकर हंगामा, पार्षद ने मांगी आयुक्त से माफी नगर परिषद के सामने रेहड़ियों वालों को दो दिन का दिया समय ShriGangaNagar, SachKahoon News:  नगर परिषद के गेट के बाहर लगने वाली सब्जी-फलों की रेहड़ियां हटवाने की कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई से रेहड़ियों वालों ने हंगामा खड़ा कर दिया। रेहड़ी वालों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/controversy-over-the-removal-rehdian/article-671"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/02-36.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>रेहड़ी वालों ने किया जमकर हंगामा, पार्षद ने मांगी आयुक्त से माफी</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>नगर परिषद के सामने रेहड़ियों वालों को दो दिन का दिया समय</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>ShriGangaNagar, SachKahoon News:</strong>  नगर परिषद के गेट के बाहर लगने वाली सब्जी-फलों की रेहड़ियां हटवाने की कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई से रेहड़ियों वालों ने हंगामा खड़ा कर दिया। रेहड़ी वालों के समर्थन में पार्षद भरतपाल मैय्यर भी आ गए। इन रेहड़ी वालों के समर्थन में पार्षद मैय्यर कुछ लोगों के साथ आयुक्त के चैम्बर में घुए गए। आयुक्त उस समय बाहर से आए हुए अधिकारियोें के साथ मीटिंग कर रही थी। इस दौरान भरतपाल मैय्यर ने कहा कि आयुक्त की गुंडागर्दी नहीं चलने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नगर परिषद में मेरे सहित कचरा भरा हुआ है। कई देर तक बोलचाल के बाद पार्षद व अन्य लोग बाहर आ गए। आयुक्त ने स्पष्ट शब्दोें में कहा कि हाईकोर्ट व जिला कलक्टर के आदेश हैं वे अतिक्रमण हटाकर रहेंगे। नगर परिषद आयुक्त सुनीता चौधरी ने अपने कर्मचारियों को आदेश दिया कि वे नगर परिषद के आसपास व जिला परिषद व सीएमएचओ आफिस की दीवार के साथ जो भी अतिक्रमण हैं उन्हें हटाया जाए। इसी दौरान नगर परिषद में पार्किंग की जगह साफ करने के लिए बुलाई गई जेसीबी को देखकर रेहड़ीवाले आक्रोशित हो गए और उन्होेंने जेसीबी पर पत्थर फेंके। रेहड़ी वालों ने अन्य यूनियन नेताओं के साथ नगर परिषद के गेट पर जमकर नारेबाजी भी की। पथराव की सूचना मिलने पर आयुक्त मुख्य गेट पर पहुंची, तो नारेबाजी शुरू हो गई। इस दौरान आयुक्त सहित नगर परिषद कर्मचारियों के खिलाफ भद्दी गालियों का प्रयोग किया गया। इस पर कर्मचारी भी भड़क गए। आयुक्त ने पुलिस जाब्ता उपलब्ध कराने के लिए कलक्टर को पत्र लिख दिया। उस समय डॉ. मैय्यर व अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए प्रार्थना-पत्र कोतवाली भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। उधर, कर्मचारियों ने नगर परिषद आयुक्त व अन्य कर्मचारियों को गालियां देने पर एक आपात बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में फैसला लिया कि अब किसी भी हाल में नगर परिषद के बाहर रेहड़ियां-थड़ी नहीं लगने देंगे, बल्कि ए-माइनर नहर से स्टेशन तक यह ‘सफाई अभियान’ चलाया जाएगा। दोपहर 2 बजे की शिफ्ट में आने वाले सफाईकर्मियोें को आज सीधे नगर परिषद बुलाया गया है, जिनकी मदद से सड़क के ऐसे अतिक्रमण हटाए जाएंगे। दो बजे की हाजिरी में सभी कर्मचारी नगर परिषद पहुंच गए। मामले को बढ़ता देखकर उपसभापति लक्की दाबड़ा व अन्य पार्षदों ने पार्षद मैय्यर को नगर परिषद बुलवाया तथा उनके साथ बैठक कर वास्तुस्थिति पूछी। इसके पश्चात सभी पार्षद एकत्रित होकर आयुक्त के चैम्बर में गए तथा वहां वार्ता की गई। वार्ता में पार्षद भरतपाल मैय्यर ने कहा कि उनके द्वारा आयुक्त को गाली नहीं निकाली गई है। वे आयुक्त सुनीता चौधरी का सम्मान करते हैं। थोड़ी गहमागहमी के पश्चात पार्षद भरतपाल मैय्यर ने आयुक्त से माफी मांगी। इस पर सभी कर्मचारियों ने माफ करने का आग्रह करते हुए कार्य का बहिष्कार न करने का फैसला वापिस लिया।</p>
<p><em>मामले को बढ़ता देखकर उपसभापति लक्की दाबड़ा व अन्य पार्षदों ने पार्षद मैय्यर को नगर परिषद बुलवाया तथा उनके साथ बैठक कर वास्तुस्थिति पूछी। इसके पश्चात सभी पार्षद एकत्रित होकर आयुक्त के चैम्बर में गए तथा वहां वार्ता की गई। वार्ता में पार्षद भरतपाल मैय्यर ने कहा कि उनके द्वारा आयुक्त को गाली नहीं निकाली गई है। वे आयुक्त सुनीता चौधरी का सम्मान करते हैं। थोड़ी गहमागहमी के पश्चात पार्षद भरतपाल मैय्यर ने आयुक्त से माफी मांगी।</em></p>
<p><em>उधर, कर्मचारियों ने नगर परिषद आयुक्त व अन्य कर्मचारियों को गालियां देने पर एक आपात बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में फैसला लिया कि अब किसी भी हाल में नगर परिषद के बाहर रेहड़ियां-थड़ी नहीं लगने देंगे, बल्कि ए-माइनर नहर से स्टेशन तक यह ‘सफाई अभियान’ चलाया जाएगा।</em></p>
<p><strong>सभापति ने भी ली जानकारी</strong><br />
इस घटनाक्रम के बारे में सभापति अजय चांडक को न्यूज चैनल पर प्रसारित समाचार से पता लगा। सभापति ने आयुक्त को फोन करके जानकारी दी। आयुक्त ने बताया कि कर्मचारियों को कचरा बताना व गाली-गलौज करना और राजकार्य में बाधा डालना, इन सब शिकायतोें पर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा रही हैं। इस पर सभापति ने भी उन्हें सहमति दी।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Dec 2016 23:34:55 +0530</pubDate>
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