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                <title>Rulana is easy - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>रूलाना आसान है, पर हंसाना नहीं!</title>
                                    <description><![CDATA[प्रतिभाएं किसी गांव, कस्बे या छोटे-बड़े शहरों की मोहताज नहीं होती, जब निखरती हैं तो बेड़ियां तोड़कर अपनी चमक का परिचय पूरी कायनात से करा देती हैं। ऐसी ही एक दुलर्भ प्रतिभा छोटे से कद के इंसान में समाई हुई थी, लेकिन ठप्पा लगा था कि वह छोटी जगह से ताल्लुक रखता है। इसीलिए उसके […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/rulana-is-easy-but-do-not-laugh/article-9917"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-07/rulana-is-easy-but-do-not-laugh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रतिभाएं किसी गांव, कस्बे या छोटे-बड़े शहरों की मोहताज नहीं होती, जब निखरती हैं तो बेड़ियां तोड़कर अपनी चमक का परिचय पूरी कायनात से करा देती हैं। ऐसी ही एक दुलर्भ प्रतिभा छोटे से कद के इंसान में समाई हुई थी, लेकिन ठप्पा लगा था कि वह छोटी जगह से ताल्लुक रखता है। इसीलिए उसके निखरने के चांस कम थे। पर, ऐसी सोच को झूठलाते हुए उसने ऐसी कामयाबी हासिल की जिससे समूचा जगत उसका दीवाना बन बैठा। अभिनेता राजपाल यादव उसी कामयाबी का हमारे समक्ष एक उदाहरण हैं, जिन्होंने सिनेमा जगत की हास्य विधा में नए आयाम स्थापित कर खुद का नाम भी दर्ज करा दिया।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3> अभिनय की हास्य विधा सामान्य अभिनय से  कितनी अलग होती है?</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">इंसान के चहरे पर मुस्कान लाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। रूलाते तो सभी हैं, पर हंसाने वाले कुछ ही होते हैं। किसी को हंसाना पुण्य पाने जैसा होता है। हास्य कला, सामान्य कलाकारी से एकदम अलग होती है। हास्य के लिए खुद को पहले तैयार करना पड़ता है। माहौल के हिसाब से खुद के ढालना पड़ता है। आज हास्य कलाकारों की बाढ़ आई हुई है। पर, दर्शकों के दिलों पर राज कुछ ही लोग कर रह हैं। कई हास्य कलाकार दर्शकों को हंसाने में नाकाम हुए हैं जिस कारण उनकी दुकाने भी बंद हुई। खैर, इस मामले में मैं किस्मत का धनि हूं। प्रभू के आर्शीवाद और दर्शकों के स्नेह से मेरी हास्य यात्रा लगातार चल रही है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3> आपकी अभिनय जर्नी कैसे शुरू हुई?</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">मैं उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के छोटे गांव से ताल्लुक रखता हूं। जब छोटे थे तब गांव में रामलीलाएं और नाटक हुआ करते थे उनमें मैं कुछ हाथ आजमाता था। दोस्तों ने नोटिस किया और मुझसे कहा कि मैं आगे अच्छा कर सकता हूं। लोगों ने मुझे मुंबई जाने की सलाह दी। पर मैं उस वक्त इतना परिपक्य नहीं हुआ था कि तब कादर खान, गोविंदा और जॉनी लीवर के सामने टिक सकूं। फिल्मों में जब मेरा आगाज हो रहा था तो इन तीनों कलाकारों की तिगड़ी धूम मचा रही थी। मैंने सबसे पहले थियेटर में किस्मत आजमाई, उसके बाद दिल्ली का रूख किया। एनएसडी के जरिए सिनेमाई लोगों के संपर्क में आया। उसके बाद यात्रा शुरू हो गई।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3> कई बार आपको नाकामियां भी हाथ लगी होंगी?</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">इंसान को नाकामियां ही तो आगे बढ़ने को प्रेरित करती हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से यह मानता हूं कि जीत से बड़ी ‘हार’ होती है। हार आपके भीतर अच्छा करने की ललक पैदा करती है। शुरूआत में कई आॅडीशनों में मैं नकारा गया। दरअसल सबसे बड़ी समस्या मेरी हाइट रही, कद-काठी देखकर कई बार मुझे मात मिली। कई फिल्म निदेशकों ने मुझे देखकर ही चलता किया। लेकिन आज इसी खास चीज ने मुझे यहां तक पहुंचाया। भगवान से जितना मांगा था उससे कहीं ज्यादा मुझे मिला। मेरी कामयाबी में दर्शकों के प्यार की बड़ी भूमिका रही। धन्यवाद देना चाहूंगा, उन्होंने मेरी कलाकारी को पसंद किया।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3> आप जब सार्वजनिक स्थानों पर जाते हो, तो लोगों की कैसी प्रतिक्रियाएं मिलती है?</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">मेरी शक्ल देखते ही लोग हंसने लगते हैं। ये देखकर मैं भी कई बार असहज हो जाता हूं। एकाध बार मुझे ऐसा भी प्रतीत हुआ कि कहीं मेरे चेहरे पर कुछ लगा तो नहीं। दरअसल एक हास्य कलाकार की इमेज लोगों में वैसी ही बन जाती है जैसे पर्दे पर रहती है। लेकिन पर्दे के बाद हमारा जीवन भी आम लोगों की तरह होता है। रही बात प्रतिक्रियाओं के मिलने की, तो लोग मेरे अभिनय की तारीफ करते हैं औरों से अच्छा बताते हैं। यह सुनकर मन को तसल्ली मिलती है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3> आप छोटे से गांव से निकलकर सिनेमा का हिस्सा बने हो, अतीत कभी याद आता है आपको?</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">क्यों याद नहीं आएगा। इंसान कितना भी बड़ा क्यों न बन जाए, उसे अपनी जमीन नहीं भूलनी चाहिए। मैं आज भी अपने गांव, पुराने दोस्त, अपने परिजनों आदियों से जुड़ा हूं। सब के करीब रहता हूं। कामयाब हुए इंसान को एक बात कभी नहीं भूलनी चाहिए, उनकी कामयाबी में इनकी बहुत बड़ी भूमिका होती है। हर किसी के लाइफ में परिवार और दोस्तों की भूमिका अलग-अलग होती है। दोस्त आगे बढ़ने की सलाह देते हैं और परिवार के लोग आगे बढ़ने की दुआ करते हैं। इसलिए मैं दोनों के महत्व को समझता हूं। इंसान को घंमड़ से बचना चाहिए। क्योंकि घमंड ही हमें मिट्टी में मिलाने का काम करता है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3> आपका कुछ विवादों से भी नाता रहा है?</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">अता-पता लापता फिल्म के निदेशक-फाइनेंसर ने मुझपर केस किया था। जो दिल्ली के कड़कड़डूमा अदालत में चल रहा है। मैंने अपना पक्ष अदालत के समझ रख दिया है। बाकी अदालत पर निर्भर करता है। मैं कानून में विश्वास रखने वाला भारत का एक सामान्य नागरिक हूं। कानून और भगवान में यकीन रखता हूं। खुद कोई गलत काम नहीं करता। कुछ आरोप बेबुनियाद होते हैं जो अदालतों में धराशाही हो जाते हैं। देखिए, जब आप कुछ अच्छा करते हो तो विवादों का जुड़ना भी स्वभाविक हो जाता है। लेकिन खुद से कभी किसी विवाद को जन्म नहीं देना चाहिए।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3> राजनेता बनने की भी चाहत है, आपने एक राजनीतिक पार्टी भी बनाई थी?</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">बनाई थी नहीं, बनाई है। पार्टी ने पिछले उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में कई उम्मीदवार भी उतारे थे। लेकिन आपको पता है मोदी युग में अच्छी-अच्छी पार्टियों की भी हवा निकली हुई है तो भला नई पार्टी कैसे टिक पाएंगी। अच्छे समय का इंतजार है। अनुकूल समय के साथ पार्टी की सक्रियता आपको दिखाई देने लगेगी। भीतर खाने पार्टी में संगठन को मजबूत करने का काम लगातार जारी है। हमारा मकसद जनता की सेवा करना है, सत्ता हासिल करना नहीं।<br />
<strong><em>-रमेश ठाकुर</em></strong></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sun, 14 Jul 2019 20:56:42 +0530</pubDate>
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