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                <title>पुश्तैनी जमीन को लेकर हुए खूनी संघर्ष में दो चचेरे भाईयों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[आधा दर्जन से अधिक लोग जख्मी, एक घायल को किया पीजीआई रोहतक रेफर Two cousins die in bloody clashes over Pashtani land भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। बाढ़डा क्षेत्र के गांव जगरामबास में रविवार को एक ही परिवार के दो पक्षों के बीच पुस्तैनी जमीन को लेकर खूनी संघर्ष हो गया। इस खूनी संघर्ष में दोनों ही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/two-cousins-die-in-bloody-clashes-over-pashtani-land/article-6272"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/two-cousins-die-in-bloody-clashes-over-pashtani-land.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">आधा दर्जन से अधिक लोग जख्मी, एक घायल को किया पीजीआई रोहतक रेफर Two cousins die in bloody clashes over Pashtani land</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। </strong></p>
<p style="text-align:justify;">बाढ़डा क्षेत्र के गांव जगरामबास में रविवार को एक ही परिवार के दो पक्षों के बीच पुस्तैनी जमीन को लेकर खूनी संघर्ष हो गया। इस खूनी संघर्ष में दोनों ही पक्षों से लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए वहीं दो चचेरे भाईयों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान गांव जगरामबास निवासी 30 वर्षीय सोमबीर व विकास के रूप में हुई है। दोनों ही मृतक आपस में चचेरे भाई थे और जमीन को लेकर एक दूसरे विरोधी गुट में शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं घायल प्रदीप को भी चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार देने के बाद रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया, वहीं करीबन आधा दर्जन अन्य घायलों को भी उपचार दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और हालातों पर काबू पाया वहीं दो पक्षों के बीच हुए इस विवाद के बाद गांव में भी तनाव का माहौल बताया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि जसराम नामक किसान की बेटी ने पिता की सम्पति में अपना हिस्सा लेने के बाद पुस्तैनी जमीन को दिल्ली की एक पार्टी को बेच दिया था। जबकि इसी जमीन में जसराम के बेटे भी हिस्सेदार थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी पुस्तैनी जमीन में जगरामबास निवासी कमल सिंह भी हिस्सेदार बताया जा रहा है। कुछ अर्से पहले गांव में जमीन की चकबंदी हुई थी। जिसमें कमल सिंह ने गिरदावरी कराकर परिवार के ही सोमबीर और विकास की जमीन का हिस्सा भी अपने में मिला लिया था, जबकि उनकी जमीन दूसरी जगह दर्शायी जा रही थी। सोमबीर और विकास दोनों ही जमीन को कास्त भी करते थे। पुस्तैनी जमीन का विवाद न्यायालय में भी चल रहा था और गांव में भी पंचायत के माध्यम से आपसी सुलह हो गया था कि जो भी पक्ष न्यायालय में फैसला आएगा, उसी को मान्यता देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन रविवार दोपहर को खेतों में बने मकान पर करीबन डेढ़ दर्जन से अधिक हथियारबंद लोगों ने दूसरे पक्ष पर हमला बोल दिया। इस हमले में दोनों ही पक्षों के एक एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए। दो पक्षों के बीच हुए खूनी संघर्ष के बाद बाढ़ड़ा पुलिस ने गांव में पहुंचकर हालातों का काबू किया वहीं घायलों का हालचाल जानने अस्पताल भी पुलिस पहुंची। पुलिस ने फिलहाल मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर झगड़े में की गई हत्या मामले में परिजनों के बयान लेकर आगामी कार्रवाई आरंभ कर दी। हालांकि पुलिस ने इस सम्बंध में दोनों ही पक्षों के लोगों के बयान दर्ज कर हत्या का केस दर्ज कर जांच किए जाने की बात कही है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Oct 2018 11:39:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>चिंतन: पल्ला झाड़ो, मौज करो</title>
                                    <description><![CDATA[एक समय वह था जब लोग खुद आगे चलकर अपनी रुचि का कोई सा काम हाथ में लेते थे और पूरा करके ही दम लेते थे। समाज के लिए उन दिनों उपयोगी लोगों की संख्या भी खूब थी। हालांकि उन दिनों भी नाकारा, नाकाबिल, धूर्त और चतुर लोगों की संख्या कोई कम नहीं थी। पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/reflection-dip-over-relax/article-6124"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/happy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एक समय वह था जब लोग खुद आगे चलकर अपनी रुचि का कोई सा काम हाथ में लेते थे और पूरा करके ही दम लेते थे। समाज के लिए उन दिनों उपयोगी लोगों की संख्या भी खूब थी। हालांकि उन दिनों भी नाकारा, नाकाबिल, धूर्त और चतुर लोगों की संख्या कोई कम नहीं थी। पर काम करने वाले लोगों की संख्या खूब ज्यादा थी और ये लोग परिश्रमी और आत्मनिर्भर थे। कालान्तर में श्रम शक्ति का ह्रास होने लगा और अभिजात्य वर्ग के लोग श्रम से जी चुराने लगे। इसके बाद लोगों का स्पष्ट धु्रवीकरण होता चला गया। एक काम करने वाले, दूसरे कुछ भी न करने वाले।</p>
<p style="text-align:justify;">इनमें भी उस किस्म के लोगों को सबसे ज्यादा फायदा है जो कोई काम-काज नहीं करते बल्कि हमेशा अपनी बुद्धि और चातुर्य से कमा खा रहे हैं, पेट और घर भर रहे हैं, श्रम करने वालों का दोहन और शोषण करने में पूरा श्रम कर रहे हैं। पर हकीकत यह भी है कि इन लोगों का धन डॉक्टरों और दवाइयों पर खर्च होता रहता है। कार्य संस्कृति का जितना क्षरण पिछले तीन-चार दशकोें में हुआ है उतना इससे पहले कभी नहीं हुआ। कार्य की गुणवत्ता, कर्मयोग की श्रेष्ठता, गुणग्राहियों की कमी कह लें अथवा और कोई कारण गिना दें, पर इतना जरूर है कि वास्तविक कर्मयोग और गुणात्मकता की पूछ जबसे प्राथमिकता खो बैठी है तभी से कार्य संस्कृति का निरन्तर क्षरण होता ही चला जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज समाज के सामने कई सारी समस्याएं हैं, कई सुलगते प्रश्नों का समंदर लहरा रहा है, हर कोई बेचैन और उद्विग्न होने की वजह से अशांत है। इसका मूल कारण यही है कि हम लोगों ने अपनी कार्य-संस्कृति को पीछे धकेल दिया है और उसका स्थान पा लिया है मुद्रार्चन तथा आत्मकेन्द्रित संकीर्णताओं ने। हमारे लिए जबसे समाज और देश दूसरी-तीसरी प्राथमिकता पर आ गए हैं तभी से हमारा परिश्रमी और लोकोन्मुखी व्यक्तित्व खण्डित हो चला है। आजकल यह स्थिति सभी क्षेत्रों में है। घर-परिवार से लेकर समाज के काम हों या फिर उन गलियारों के काम-धाम, जहां हमारी नौकरी की गारंटी है और रहेगी।<br />
सभी तरफ आजकल कार्य-संस्कृति अजीबोगरीब गलियारों की ओर भटकने लगी है। छोटे से छोटा आदमी हो या बड़े से बड़ा आदमी। हर तरफ खूब सारे लोग उसे मिल जाएंगे जिनके पास उन कामों के बारे में भी दक्षता का अभाव है जिनके लिए वे मुकर्रर हैंं।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिसंख्य लोग अपने से नीचे के लोगों के भरोसे जिन्दगी काट रहे हैं। नीचे वालों ने जैसा कह दिया, कर दिया, लिख दिया, उसी का अनुकरण करते चले जाते हैं। खुद की अकल ये लोग न लगाते हैं, न इनमें इतनी अकल होती ही है। ऐसे नाकाबिलों और कामचोरों के दर्शन आजकल सहजता से होने लगे हैंं।<br />
इन लोगों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि यह किसी भी प्रकार की मांग या समस्या सामने आने पर खुद कुछ नहीं करते बल्कि हर बात को किसी न किसी बहाने टाल देते हैं अथवा उन्हीं लोगों पर थोप देते हैं जो इसके लिए इनके सान्निध्य को पाने आए होते हैं। कई बड़े लोगों का अपने मातहतों के प्रति भी ऐसा ही व्यवहार होता है। ऐसे निकम्मे और चिड़चिड़े लोगों से शायद ही कोई अधीनस्थकर्मी खुश होता होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सर्वाधिक बार देखा यह गया है कि निकम्मे और नाकाबिल लोग कोई सा काम अपने पास आ जाने पर दूसरों के मत्थे मढ़ देने में माहिर होते हैं। इन लोगों को सिर्फ अपनी चवन्नी चलाने भर से सरोकार होता है, दूसरों की पीड़ाओं और संवेदनाओं से इनका कोई लेना-देना नहीं होता। ऐसे निकम्मे लोगों की दूसरी सबसे बड़ी आदत यह होती है कि ये हमेशा उन लोगों से घिरे रहते हैं जो इनके कामों को आसान कर दिया करते हैं और इनकी आड़ में मनचाहा चुग्गा डकारते रहते हैं। चापलूस लोगों की पूरी की पूरी फौज इनके लिए दाना-पानी से लेकर इनकी भोग-विलासिता के सारे इंतजाम करती है और इनका नाम भुनाते हुए रोजाना पार्टियों का मजा लेती है, अपने घरों में उपहारों के बाजार सजाती है और ऐसे कामटालू और अपने पर आश्रित सफेद हाथियों की मूर्खता या कि भोलेपन को हथियार बनाकर दुनिया भर के मजे लूटती है। अपने इलाकों में भी ऐसे खूब लोग हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि खुद कुछ नहीं जानते, चमचों और चापलूसों से घिरे हुए हैं, उन्हीं की बात मानते और करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जो लोग अपने जिम्मे के कामों को दूसरों पर ढोलने के आदी होते हैं वे लोग जिन्दगी भर परायों के भरोसे ही रहा करते हैं और पूरे जीवन में कभी कोई ऐसा मौका नहीं आता जब ये किसी भी काम में दक्षता प्राप्त कर लिए जाने का आत्मविश्वास पैदा कर सकें। तय मानकर चलें कि जो लोग खुद के करने, कहने और सुनने योग्य कामों के प्रति लापरवाह होते हैं वे आत्मविश्वासहीन, धूर्त और हर मामले में नाकाबिल होते हैं। इन्हें कभी भी यश प्राप्त नहीं होता, उलटे लोग इन्हें हमेशा गालियां बकते रहते हैं।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. दीपक आचार्य</strong></p>
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                <pubDate>Thu, 04 Oct 2018 09:59:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूरे देश में समय से पहले पहुंचेगा मानसून</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। पिछले कुछ दिनों से गर्मी से मिल रही राहत का दौर अब थम सकता है। सप्ताह की शुरुआत सोमवार से तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है। लोगों को एक बार फिर भीषण गर्मी और उमस से रूबरू होना पड़ेगा। वहीं, दिल्ली में मानसून समय से पूर्व दस्तक दे सकता है। स्काईमेट वेदर के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/monsoon-will-reach-all-over-the-country/article-3947"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/barsat.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>पिछले कुछ दिनों से गर्मी से मिल रही राहत का दौर अब थम सकता है। सप्ताह की शुरुआत सोमवार से तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है। लोगों को एक बार फिर भीषण गर्मी और उमस से रूबरू होना पड़ेगा। वहीं, दिल्ली में मानसून समय से पूर्व दस्तक दे सकता है। स्काईमेट वेदर के अनुसार इस साल मानसून दिल्ली में 6 से 7 दिन पूर्व आ सकता है। 22 जून के आसपास दिल्ली-एनसीआर में मानसून की दस्तक हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्काईमेट के अनुसार मानसून की चाल से लग रहा है कि यह न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर बल्कि पूरे देश में मानसून समय से पूर्व पहुंचेगा। हालाकि पूर्वानुमान में दो से तीन दिन ऊपर नीचे हो सकते हैं। स्काईमेट वेदर के मुख्य मौसम विज्ञानी महेश पलावत के अनुसार पूर्व और उत्तर भारत में मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तरी-पश्चिमी मैदानी इलाकों तक आते आते इसकी रफ्तार में कुछ कमी जरूर आएगी। लेकिन, उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में मानसून समय से पहले ही आएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">25 जून तक यह देश के ज्यादातर हिस्सों को कवर कर लेगा। इसमें पश्चिमी राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्से भी शामिल होंगे। पूर्वानुमान में दो से तीन दिन ऊपर-नीचे होने की संभावना भी बनी रहती है। 1998 में मानसून 16 जून को दिल्ली पहुंचा था। मध्य दिल्ली के कई इलाकों में लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। पानी की आपूर्ति नियमित न होने और गंदा पानी आने की वजह से यह समस्या कुछ दिनों से बनी हुई है। मजबूरी में लोगों को बाजार से पानी खरीदकर लाना पड़ रहा है। लोग पानी को लेकर रतजगा भी कर रहे हैं। इसके बावजूद लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सदर बाजार, पहाड़गंज, चूना मंडी, मंटोला, मोतिया खान, करोलबाग, डोरीवालान, मानकपुरा, आनंद पर्वत, वेस्ट पटेल नगर व बलजीत नगर सहित कई अन्य इलाकों में पानी की आपूर्ति प्रभावित है। लोगों का आरोप है कि कुछ दिनों से यह समस्या बनी हुई है। गर्मी का मौसम होने के बावजूद पानी की परेशानी को दूर करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड कोई उचित कदम नहीं उठाता है। मानकपुरा निवासी प्रवीण गुप्ता के मुताबिक भीषण गर्मी के मौसम में लोग पानी के संकट से जूझ रहे हैं। पिछले वर्ष भी ऐसा ही हाल रहा था, उसके बाद भी पानी की समस्या को दूर करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों के पास पानी की शिकायत लेकर जाते हैं तो उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है। बाजार से पानी खरीदकर लाना पड़ रहा है, जिसका असर घर के बजट पर भी पड़ता है। कुछ ऐसा ही कहना दूसरे लोगों का भी था।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jun 2018 21:25:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘जिंदगी की जंग जीत गया जयवीर’</title>
                                    <description><![CDATA[दिल की बीमारी से चल रही थी जद्दोजहद राष्ट्रीय  बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हुआ संभव श्रीगंगानगर (अजय राजपुरोहित)। ये दर्द भरी दास्तां है नन्हें, मासूम जयवीर की, जो जन्म से ही जिंदगी से जंग लड़ रहा था। ऐसी मार्मिक व्यथा जिसे सुन किसी की भी अश्रुधारा बह निकले। लेकिन अब खुशी इस बात की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/jaiveer-win-over-diastase-heart/article-1112"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/jayveer.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">दिल की बीमारी से चल रही थी जद्दोजहद</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>राष्ट्रीय  बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हुआ संभव</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीगंगानगर (अजय राजपुरोहित)।</strong> ये दर्द भरी दास्तां है नन्हें, मासूम जयवीर की, जो जन्म से ही जिंदगी से जंग लड़ रहा था। ऐसी मार्मिक व्यथा जिसे सुन किसी की भी अश्रुधारा बह निकले। लेकिन अब खुशी इस बात की है कि जयवीर ने यह जंग जीत ली, वह पूरी तरह से ठीक है और घर-आंगन को चहका रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह संभव हो पाया राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की बदौलत, जिसकी टीम ने न केवल जयवीर को चिन्हित किया बल्कि उसका नि:शुल्क आॅपरेशन व उपचार करवाने में अथक प्रयास भी किए। गांव 22 एमएल निवासी सवा दो वर्षीय जयवीर और उसके परिजनों की पीड़ा की कहानी, उनके पिता रतनलाल ने बताई कि जयवीर के जन्म पर हम सभी बेहद खुश थे, जैसे किसी भी बच्चे के जन्म पर उसके परिजन होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं रही, क्योंकि जन्म के कुछेक दिन बाद ही जयवीर बीमार रहने लगा और एक माह के अंतराल में ही हमें चिकित्सकों ने बता दिया कि उसके दिल में छेद है। इस दौरान अचानक बेहोश हो जाना, शरीर नीला पड़ जाना सामान्य था। नन्ही मासूम सी जान को तड़पते देख, घर के हर सदस्य की आंखों में आंसू भर आते।</p>
<h2 style="text-align:justify;">फरिश्ता बनकर आई आरबीएसके टीम</h2>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान हमारे लिए फरिश्ता बनकर आई आरबीएसके टीम नंबर एक, जिसमें शामिल डॉ. योगेंद्र, डॉ. कंचन व फार्मासिस्ट केसर भाटी ने जयवीर की सेहत को जांचा और उसका आरबीएसके कार्ड बनाया। टीम ने ही प्रयास कर उसके नि:शुल्क आॅपरेशन व उपचार के लिए जयपुर के प्रतिष्ठित फोर्टिस हॉस्पीटल में भेजा।</p>
<p style="text-align:justify;">मुझे बताया गया कि हॉस्पीटल से विभाग का टाइअप है इसलिए पूर्णत: नि:शुल्क इलाज होगा, लेकिन फिर भी इतने बडेÞ हॉस्पीटल को देख डर लग रहा था। यहां के चिकित्सकों ने भगवान बन मेरे बेटे का नि:शुल्क व सफल आॅपरेशन किया, जो मैं चाहकर भी नहीं करवा पा रहा था। वाकई में यह योजना और डॉक्टर मेरे बेटे और मेरे परिवार के लिए भगवान से कम नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>जयवीर को देख हमारा दिल पसीज उठा। परिवार के हिसाब से उसकी स्थिति बहुत दयनीय थी, लेकिन हमने ठान लिया था कि जयवीर और उसके परिवार को राहत दिलाकर ही दम लेंगे। जयपुर में भी चिकित्सकों ने हमारा साथ दिया और जयवीर का बेहतर इलाज संभव हो सका। निश्चित ही आरबीएसके के जरिए मासूमों को राहत मिल रही है।’</em><br />
<em>-डॉ. योगेंद्र, टीम प्रभारी, आरबीएसके</em></p>
<h2 style="text-align:justify;">आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण हम उसका इलाज करवाने में अक्षम</h2>
<p style="text-align:justify;">हमारे लिए यह किसी सदमें से, किसी सुनामी से कम न था। क्योंकि आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण हम उसका इलाज करवाने में अक्षम थे। इसके बाद तो हमारी दिनचर्या ही बदल गई, कभी किसी डॉक्टर के पास, किसी वैध के पास। दर-दर भटके, दवा-दुआ जो भी हमसे बन पड़ा हमने किया, लेकिन धीरे-धीरे जयवीर की हालत बिगड़ती गई।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले दिनों तो एकबारगी हालात ज्यादा खराब हो गई, हम उसे एक बड़े हॉस्पीटल में लेकर गए, जहां चिकित्सकों ने बताया कि इसका जयपुर या अन्य बड़े शहर में इलाज करवाना होगा और करीब तीन लाख रुपए खर्चा लगेगा, जो हमारे बस के बाहर था। ऐसे ही दर्द भरे माहौल में दो साल बीत गए, जयवीर का मन बहला रहे इसलिए उसे आंगनबाड़ी भी भेज देते।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jun 2017 00:17:43 +0530</pubDate>
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                <title>रेहड़ियां हटाने को लेकर हुआ बवाल खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[रेहड़ी वालों ने किया जमकर हंगामा, पार्षद ने मांगी आयुक्त से माफी नगर परिषद के सामने रेहड़ियों वालों को दो दिन का दिया समय ShriGangaNagar, SachKahoon News:  नगर परिषद के गेट के बाहर लगने वाली सब्जी-फलों की रेहड़ियां हटवाने की कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई से रेहड़ियों वालों ने हंगामा खड़ा कर दिया। रेहड़ी वालों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/controversy-over-the-removal-rehdian/article-671"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/02-36.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>रेहड़ी वालों ने किया जमकर हंगामा, पार्षद ने मांगी आयुक्त से माफी</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>नगर परिषद के सामने रेहड़ियों वालों को दो दिन का दिया समय</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>ShriGangaNagar, SachKahoon News:</strong>  नगर परिषद के गेट के बाहर लगने वाली सब्जी-फलों की रेहड़ियां हटवाने की कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई से रेहड़ियों वालों ने हंगामा खड़ा कर दिया। रेहड़ी वालों के समर्थन में पार्षद भरतपाल मैय्यर भी आ गए। इन रेहड़ी वालों के समर्थन में पार्षद मैय्यर कुछ लोगों के साथ आयुक्त के चैम्बर में घुए गए। आयुक्त उस समय बाहर से आए हुए अधिकारियोें के साथ मीटिंग कर रही थी। इस दौरान भरतपाल मैय्यर ने कहा कि आयुक्त की गुंडागर्दी नहीं चलने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नगर परिषद में मेरे सहित कचरा भरा हुआ है। कई देर तक बोलचाल के बाद पार्षद व अन्य लोग बाहर आ गए। आयुक्त ने स्पष्ट शब्दोें में कहा कि हाईकोर्ट व जिला कलक्टर के आदेश हैं वे अतिक्रमण हटाकर रहेंगे। नगर परिषद आयुक्त सुनीता चौधरी ने अपने कर्मचारियों को आदेश दिया कि वे नगर परिषद के आसपास व जिला परिषद व सीएमएचओ आफिस की दीवार के साथ जो भी अतिक्रमण हैं उन्हें हटाया जाए। इसी दौरान नगर परिषद में पार्किंग की जगह साफ करने के लिए बुलाई गई जेसीबी को देखकर रेहड़ीवाले आक्रोशित हो गए और उन्होेंने जेसीबी पर पत्थर फेंके। रेहड़ी वालों ने अन्य यूनियन नेताओं के साथ नगर परिषद के गेट पर जमकर नारेबाजी भी की। पथराव की सूचना मिलने पर आयुक्त मुख्य गेट पर पहुंची, तो नारेबाजी शुरू हो गई। इस दौरान आयुक्त सहित नगर परिषद कर्मचारियों के खिलाफ भद्दी गालियों का प्रयोग किया गया। इस पर कर्मचारी भी भड़क गए। आयुक्त ने पुलिस जाब्ता उपलब्ध कराने के लिए कलक्टर को पत्र लिख दिया। उस समय डॉ. मैय्यर व अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए प्रार्थना-पत्र कोतवाली भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। उधर, कर्मचारियों ने नगर परिषद आयुक्त व अन्य कर्मचारियों को गालियां देने पर एक आपात बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में फैसला लिया कि अब किसी भी हाल में नगर परिषद के बाहर रेहड़ियां-थड़ी नहीं लगने देंगे, बल्कि ए-माइनर नहर से स्टेशन तक यह ‘सफाई अभियान’ चलाया जाएगा। दोपहर 2 बजे की शिफ्ट में आने वाले सफाईकर्मियोें को आज सीधे नगर परिषद बुलाया गया है, जिनकी मदद से सड़क के ऐसे अतिक्रमण हटाए जाएंगे। दो बजे की हाजिरी में सभी कर्मचारी नगर परिषद पहुंच गए। मामले को बढ़ता देखकर उपसभापति लक्की दाबड़ा व अन्य पार्षदों ने पार्षद मैय्यर को नगर परिषद बुलवाया तथा उनके साथ बैठक कर वास्तुस्थिति पूछी। इसके पश्चात सभी पार्षद एकत्रित होकर आयुक्त के चैम्बर में गए तथा वहां वार्ता की गई। वार्ता में पार्षद भरतपाल मैय्यर ने कहा कि उनके द्वारा आयुक्त को गाली नहीं निकाली गई है। वे आयुक्त सुनीता चौधरी का सम्मान करते हैं। थोड़ी गहमागहमी के पश्चात पार्षद भरतपाल मैय्यर ने आयुक्त से माफी मांगी। इस पर सभी कर्मचारियों ने माफ करने का आग्रह करते हुए कार्य का बहिष्कार न करने का फैसला वापिस लिया।</p>
<p><em>मामले को बढ़ता देखकर उपसभापति लक्की दाबड़ा व अन्य पार्षदों ने पार्षद मैय्यर को नगर परिषद बुलवाया तथा उनके साथ बैठक कर वास्तुस्थिति पूछी। इसके पश्चात सभी पार्षद एकत्रित होकर आयुक्त के चैम्बर में गए तथा वहां वार्ता की गई। वार्ता में पार्षद भरतपाल मैय्यर ने कहा कि उनके द्वारा आयुक्त को गाली नहीं निकाली गई है। वे आयुक्त सुनीता चौधरी का सम्मान करते हैं। थोड़ी गहमागहमी के पश्चात पार्षद भरतपाल मैय्यर ने आयुक्त से माफी मांगी।</em></p>
<p><em>उधर, कर्मचारियों ने नगर परिषद आयुक्त व अन्य कर्मचारियों को गालियां देने पर एक आपात बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में फैसला लिया कि अब किसी भी हाल में नगर परिषद के बाहर रेहड़ियां-थड़ी नहीं लगने देंगे, बल्कि ए-माइनर नहर से स्टेशन तक यह ‘सफाई अभियान’ चलाया जाएगा।</em></p>
<p><strong>सभापति ने भी ली जानकारी</strong><br />
इस घटनाक्रम के बारे में सभापति अजय चांडक को न्यूज चैनल पर प्रसारित समाचार से पता लगा। सभापति ने आयुक्त को फोन करके जानकारी दी। आयुक्त ने बताया कि कर्मचारियों को कचरा बताना व गाली-गलौज करना और राजकार्य में बाधा डालना, इन सब शिकायतोें पर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा रही हैं। इस पर सभापति ने भी उन्हें सहमति दी।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/controversy-over-the-removal-rehdian/article-671</link>
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                <pubDate>Thu, 29 Dec 2016 23:34:55 +0530</pubDate>
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