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                <title>Chandrayaan-2 - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Chandrayaan-2 RSS Feed</description>
                
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                <title>चंद्रयान-2: विक्रम लैंडर की हुई ‘हार्ड लैंडिंग’: नासा</title>
                                    <description><![CDATA[अक्टूबर में जब प्रकाश तेज होगा तो एक बार फिर ऑर्बिटर लोकेशन और तस्वीर भेजेगा वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि Chandrayaan-2 की चंद्रमा की सतह पर हार्ड लैंडिंग हुई थी और इसी कारण उसका संपर्क भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) टूट गया था। नासा की ओर से कहा गया कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-2-vikram-landers-hard-landing-nasa/article-10491"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-09/chandrayaan-2-2.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">अक्टूबर में जब प्रकाश तेज होगा तो एक बार फिर ऑर्बिटर लोकेशन और तस्वीर भेजेगा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)। </strong>अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि <strong>Chandrayaan-2</strong> की चंद्रमा की सतह पर हार्ड लैंडिंग हुई थी और इसी कारण उसका संपर्क भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) टूट गया था।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>नासा की ओर से कहा गया कि चंद्रयान-2 से संपर्क स्थापित करने में लगी टीम अभी तक सफल नहीं हो पाई है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम ने सात सितंबर को लैंड करने की कोशिश की थी, </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>चंद्रमा की किसी पर्वतीय भूमि पर इसकी लैंडिंग के बाद इसका पता नहीं लग पाया है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>नासा ने ट्वीट के साथ ही लैंड करने वाली जगह की तस्वीर भी जारी की है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इस तस्वीर को नासा के ऑर्बिटर की ओर से खींची गई है, जिसमें धूल की तस्वीर है। </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">नासा की ओर से यह भी कहा गया है कि अक्टूबर में जब प्रकाश तेज होगा तो एक बार फिर ऑर्बिटर लोकेशन और तस्वीर भेजेगा। गौरतलब है कि विक्रम से संपर्क स्थापित करने की समय सीमा शनिवार को खत्म हो जाएगी क्योंकि जिस जगह पर विक्रम लैंडर उतरा है वहां पर अब 14 दिन के लिए रात शुरू हो जाएगी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Sep 2019 09:46:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंद्रयान-2: चांद की सतह से 2.1 किमी पहले पृथ्वी से संपर्क टुटा</title>
                                    <description><![CDATA[चांद पर उतरने से ठीक पहले ठिठके विक्रम के ‘कदम’ मोदी ने कहा हिम्मत बनाएं रखें व बाद में बच्चों से रूबरू हुए बैंगलुरू (एजेंसी)। चंद्रयान-2 की लैंडिंग को लेकर स्थिति अभी साफ नहीं है। लैंडर विक्रम की रात 1 बजकर 55 मिनट पर लैंडिंग होनी थी, लेकिन इसका समय बदलकर 1 बजकर 53 मिनट कर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-2-contact-with-earth-was-lost-2-1-km-before-the-surface-of-the-moon/article-10382"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-09/chandrayaan-2-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">चांद पर उतरने से ठीक पहले ठिठके विक्रम के ‘कदम’</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">मोदी ने कहा हिम्मत बनाएं रखें व बाद में बच्चों से रूबरू हुए</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>बैंगलुरू (एजेंसी)। </strong>चंद्रयान-2 की लैंडिंग को लेकर स्थिति अभी साफ नहीं है। लैंडर विक्रम की रात 1 बजकर 55 मिनट पर लैंडिंग होनी थी, लेकिन इसका समय बदलकर 1 बजकर 53 मिनट कर दिया गया। हालांकि, यह समय बीत जाने के बाद भी लैंडर विक्रम की स्थिति पता नहीं चल सकी। इसरो चेयरमैन डॉ. के. सिवन ने बताया, लैंडर विक्रम की लैंडिंग प्रक्रिया एकदम ठीक थी। जब यान चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह से 2.1 किमी दूर था, तब उसका पृथ्वी से संपर्क टूट गया। हम आॅर्बिटर से मिल रहे डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं। अगर लैंडर विक्रम की लैंडिंग की पुष्टि हो जाती है तो सुबह 5 बजकर 19 मिनट पर रोवर प्रज्ञान बाहर आएगा, यह सुबह 5:45 पहली तस्वीर क्लिक करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा, जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। देश आप लोगों की मेहनत पर गर्व करता है। मेरी ओर से आप सब को बधाई। आप लोगों ने विज्ञान और मानव जाति की काफी सेवा की है। आगे भी प्रयास जारी रहेगा। मैं पूरी तरह आपके साथ हूं। आॅल द बेस्ट। इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बहुप्रतीक्षित मिशन को लेकर विवादित बयान दिया है। ममता बनर्जी ने मिशन को देश के आर्थिक हालातों से जोड़ते हुए इसे ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। ममता बनर्जी ने यह बात पश्चिम बंगाल की विधानसभा में एनआरसी पर बात करते हुए कही।</p>
<h2 style="text-align:justify;">लगा है सोलर पैनल</h2>
<p style="text-align:justify;">छह पहियों वाला प्रज्ञान तमाम खूबियों से लैस है। इसके छह पहियों के ऊपर सोने के रंग की ट्रालीनुमा बॉडी है। इस बॉडी के सबसे ऊपर के हिस्से में सोलर पैनल लगा हुआ है जो सूर्य से ऊर्जा लेकर रोवर को संचालित रखेगा। वहीं इसके दोनों हिस्सों में एक-एक कैमरा लगा है। ये दोनों ही नैविगेशन कैमरे हैं जो रोवर को रास्ता बताएंगे। वहीं विक्रम लैंडर अपने बॉक्सनुमा आकार के बीचोंबीच से ठीक वैसे ही प्रज्ञान को बाहर उतारेगा, जैसे कोई हवाई जहाज लैंडिंग के बाद अपनी सीढ़ियां नीचे गिराकर सवारियों या सामान को उतारते हैं। ये सीढियां नहीं, बल्कि एक समतल आकार की प्लेट होगी। यहां से जैसे ही प्रज्ञान नीचे उतरेगा, उसके सोलर पैनल खुल जाएंगे और वो पूरी तरह चार्ज होगा। यहां से वो चंद्रमा की सतह पर पैर रखते ही मिशन से जुड़े सभी संदेश धरती पर भेजने लगेगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Sep 2019 03:31:37 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चाँद पर उतरने के ऐतिहासिक क्षण पर देश-विदेश की नजरें</title>
                                    <description><![CDATA[चंद्रयान-2: भारत चाँद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा बेंगलुरु (एजेंसी)। देश ही नहीं पूरे विश्व की निगाहें अब सात सितंबर पर टिकी हैं जब चंद्रयान-2 लैंडर ‘विक्रम’ अपने साथ रोवर ‘प्रज्ञान’ को लेकर रात डेढ़ बजे से ढाई बजे के बीच चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। इस अभियान के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/eyes-of-the-country-and-abroad-on-the-historic-moment-of-landing-on-the-moon/article-10373"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-09/chandrayaan-2.jpg" alt=""></a><br /><h2>चंद्रयान-2: भारत चाँद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>बेंगलुरु (एजेंसी)। </strong>देश ही नहीं पूरे विश्व की निगाहें अब सात सितंबर पर टिकी हैं जब चंद्रयान-2 लैंडर ‘विक्रम’ अपने साथ रोवर ‘प्रज्ञान’ को लेकर रात डेढ़ बजे से ढाई बजे के बीच चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। इस अभियान के सफल होने पर रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत चाँद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का चौथा और चाँद के अब तक अनदेखे दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुँचने वाला पहला राष्ट्र बन जाएगा। लैंडर के उतरने के लगभग चार घंटे बाद इसके भीतर से रोवर बाहर निकलेगा और अपने छह पहियों पर चलकर चाँद की सतह पर एक चंद्र दिन (धरती के 14 दिन के बराबर) तक वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>70 छात्र-छात्राएँ इसरो के बेंगलुरु स्थित केंद्र में होंगी मौजूद</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">इस ऐतिहासिक क्षण को नजरभर देखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ देश भर से आये करीब 70 छात्र-छात्राएँ शनिवार सुबह इसरो के बेंगलुरु स्थित केंद्र में मौजूद रहेंगी। मोदी और ये छात्र-छात्राएँ चाँद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में होने वाली चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम‘ की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के दृश्य सीधे देख सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित आनलाइन प्रतियोगिता में प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश से सर्वाधिक अंक हासिल करने वाले दो-दो छात्रों को अंतरिक्ष एजेंसी ने चाँद की सतह पर ‘चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम’ की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का सीधा नजारा देखने के लिए अपने केंद्र में आमंत्रित किया है।अंतरिक्ष कार्यक्रम के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए इसरो के बेंगलुरु स्थित मुख्यालय ने माईगोवडॉटइन के साथ मिलकर 10 से 25 अगस्त तक एक आॅनलाइन प्रतियोगिता आयोजित की थी। क्विज प्रतियोगिता की अवधि 10 मिनट की थी जिसमें अधिकतम 20 सवालों का जवाब देना था।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Sep 2019 18:52:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण सफल, देशभर में खुशी की लहर</title>
                                    <description><![CDATA[चंद्रमा पर नई चीजों की खोज करने में सफल रहेगा नई दिल्ली, sach kahoon। भारत के लिए आज बेहद खास दिन है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-2 को लॉन्च कर इतिहास रच दिया है। चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) को लेकर ‘बाहुबली’ रॉकेट दोपहर 2.43 मिनट पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रवाना हुआ। फिलहाल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-2-launch/article-10033"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-07/chandrayaan-2-launch.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">चंद्रमा पर नई चीजों की खोज करने में सफल रहेगा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली, sach kahoon।</strong> भारत के लिए आज बेहद खास दिन है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-2 को लॉन्च कर इतिहास रच दिया है। चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) को लेकर ‘बाहुबली’ रॉकेट दोपहर 2.43 मिनट पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रवाना हुआ। फिलहाल रॉकेट की गति और हालात सामान्य है। चंद्रयान-2 अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंच गया है। चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग को लेकर सतीश धवन स्पेस सेंटर में मौजूद वैज्ञानिक में खुशी की लहर है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो के प्रमुख के सिवन ने बताया कि चंद्रयान-2 की लैंडिंग के अखिरी के 15 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होंगे, जब लैंडर विक्रम चांद की सतह पर उतरने वाला होगा। उन्होंने कहा कि मिशन पूरी तरह से कामयाब सबित होगा और चंद्रमा पर नई चीजों की खोज करने में सफल रहेगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">रॉकेट के प्रक्षेपण को देखने के लिए कुल 7,500 लोगों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया</h2>
<p style="text-align:justify;">लॉन्च देखने के लिए देशभर से हजारों लोग श्री हरिकोटा पहुंच रहे हैं। इसरो के अधिकारी के मुताबिक, रॉकेट के प्रक्षेपण को देखने के लिए कुल 7,500 लोगों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। इसरो ने हाल ही में लॉन्च को देखने के लिए आम जनता को अनुमति दी है। लोगों के लिए इसरो ने लगभग 10 हजार लोगों की क्षमता वाली एक गैलरी बनाई है।चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने की जिम्मेदारी इसरो ने अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल- मार्क 3 (जीएसएलवी-एमके 3) को दी है। इस रॉकेट को स्थानीय मीडिया से ‘बाहुबली’ नाम दिया गया है। 640 टन वजनी रॉकेट की लागत 375 करोड़ रुपये है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह रॉकेट 3.8 टन वजन वाले चंद्रयान-2 को लेकर उड़ान भरेगा। चंद्रयान-2 की कुल लागत 603 करोड़ रुपये है। अलग-अलग चरणों में सफर पूरा करते हुए यान सात सितंबर को चांद के दक्षिणी धु्रव की निर्धारित जगह पर उतरेगा। अब तक विश्व के केवल तीन देशों अमेरिका, रूस व चीन ने चांद पर अपना यान उतारा है। 2008 में भारत ने चंद्रयान-1 लॉन्च किया था। यह एक ऑर्बिटर अभियान था। ऑर्बिटर ने 10 महीने तक चांद का चक्कर लगाया था। चांद पर पानी का पता लगाने का श्रेय भारत के इसी अभियान को जाता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">इसरो का सबसे मुश्किल मिशन</h2>
<p style="text-align:justify;">इसे इसरो का सबसे मुश्किल अभियान माना जा रहा है। सफर के आखिरी दिन जिस वक्त रोवर समेत यान का लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा, वह वक्त भारतीय वैज्ञानिकों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होगा। खुद इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने इसे सबसे मुश्किल 15 मिनट कहा है। इस अभियान की महत्ता को इससे भी समझा जा सकता है कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी अपना एक पेलोड इसके साथ लगाया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दुनियाभर की टिकी है निगाह</h2>
<p style="text-align:justify;">चंद्रयान-2 की सफलता पर भारत ही नहीं, पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। चंद्रयान-1 ने दुनिया को बताया था कि चांद पर पानी है। अब उसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए चंद्रयान-2 चांद पर पानी की मौजूदगी से जुड़े कई ठोस नतीजे देगा। अभियान से चांद की सतह का नक्शा तैयार करने में भी मदद मिलेगी, जो भविष्य में अन्य अभियानों के लिए सहायक होगा। चांद की मिट्टी में कौन-कौन से खनिज हैं और कितनी मात्रा में हैं, चंद्रयान-2 इससे जुड़े कई राज खोलेगा। उम्मीद यह भी है कि चांद के जिस हिस्से की पड़ताल का जिम्मा चंद्रयान-2 को मिला है, वह हमारी सौर व्यवस्था को समझने और पृथ्वी के विकासक्रम को जानने में भी मददगार हो सकता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">तीन हिस्सों में बंटा है चंद्रयान-2</h2>
<p style="text-align:justify;">चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं-ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर। अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के सम्मान में लैंडर का नाम विक्रम रखा गया है। रोवर का नाम प्रज्ञान है, जो संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ज्ञान। चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद लैंडर-रोवर अपने ऑर्बिटर से अलग हो जाएंगे। लैंडर विक्रम सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव के नजदीक उतरेगा। लैंडर उतरने के बाद रोवर उससे अलग होकर अन्य प्रयोगों को अंजाम देगा। लैंडर और रोवर के काम करने की कुल अवधि 14 दिन की है। चांद के हिसाब से यह एक दिन की अवधि होगी। वहीं ऑर्बिटर सालभर चांद की परिक्रमा करते हुए विभिन्न प्रयोगों को अंजाम देगा।</p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2019 15:18:40 +0530</pubDate>
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