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                <title>Farmer Strike - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Farmer killed in clash: किसानों और सरकार में टकराव कोई समाधान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[Farmer killed in clash: पंजाब और हरियाणा के किसानों ने एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर संघर्ष तीव्र कर दिया है। इसी बीच संगरूर जिले में एक किसान की मौत की भी दुखद खबर है। किसानों को चंडीगढ़ जाने से रोकने के लिए पुलिस ने किसान नेताओं की गिरफ्तारी के साथ-साथ किसानों को चंडीगढ़ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/farmer-killed-in-clash-in-sangrur/article-51501"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/farmers.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Farmer killed in clash: पंजाब और हरियाणा के किसानों ने एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर संघर्ष तीव्र कर दिया है। इसी बीच संगरूर जिले में एक किसान की मौत की भी दुखद खबर है। किसानों को चंडीगढ़ जाने से रोकने के लिए पुलिस ने किसान नेताओं की गिरफ्तारी के साथ-साथ किसानों को चंडीगढ़ जाने से रोकने के लिए दिल्ली की तरह नाकाबंदी की गई है। किसानों और सरकार दोनों को मामले की गंभीरता को देखते हुए कोई रास्ता निकालना चाहिए। टकराव किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं है। सरकारें बातचीत की बजाए किसानों को रोकने पर जोर दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बेहतर होगा कि सरकार बातचीत का माहौल बनाए और इस टकराव भरे माहौल को खत्म करे। किसान संगठन भी विरोध-प्रदर्शन करें लेकिन टकराव से बचें। शांतिपूर्ण विरोध से मांगों को मनवाया जा सकता है। देश में कई शांतिपूर्ण आंदोलन ऐसे हुए, जब सरकारों को झुकना पड़ा। यह भी ध्यान दिया जाए कि धरने से आम जनता को कोई नुकसान न हो। स्कूल जाने वाले बच्चों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यूं भी यह सवाल गंभीर है कि आजादी के 76 साल बाद भी किसान आंदोलन करने को क्यों मजबूर हैं। Farmer killed in clash</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि नीतियों में कहां खामियां हैं, इन नीतियों की दोबारा जांच की आवश्यकता है। सब्सिडी, कृषि बीमा सहित कई अन्य योजनाओं के बावजूद कृषि में मूलभुत परिवर्तन क्यों नहीं आ सका। कृषि जिंसों के दाम कभी एकदम गिर जाते हैं तो कभी आसमान पर पहुंच जाते हैं। किसान, उपभोक्ता और व्यापारी के हितों की रक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा करने की जरूरत है। यह किसान आंदोलन तब हो रहा है जब प्याज के आयात पर 40 फीसदी शुल्क लगा दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उपभोक्ताओं को सस्ता प्याज उपलब्ध कराने के लिए यह कदम सही हो सकता है, लेकिन किसानों के हितों को भी देखना होगा। किसान फसलों के वर्तमान रेटों से संतुष्ट नहीं। निर्यात शुल्क बढ़ने से निर्यात रुक जाता है और किसान को लाभ नहीं मिल पाता। सरकार को संतुलित नीतियां बनाने पर बल देना होगा ताकि कृषि लाभदायक धंधा बना रहे और किसान पर बोझ न पड़े। Editorial</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Himachal Pradesh: हिमाचल में भयंकर तबाही, 227 लोगों की मौत, 280 सड़कें ठप" href="http://10.0.0.122:1245/himachal-news-today/">Himachal Pradesh: हिमाचल में भयंकर तबाही, 227 लोगों की मौत, 280 सड़कें ठप</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Aug 2023 15:46:04 +0530</pubDate>
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                <title>किसान की मौत पर फूटा गुस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[एक करोड़ मुआवजा और परिवार के सदस्य को नौकरी की मांग मांगें न मानने तक अंतिम संस्कार से इंकार भिवानी/चरखी दादरी। चरखी दादरी की ढाणी फोगाट गाँव में चल रहे किसान धरने पर एक किसान की मौत हो जाने के बाद से किसानों में गुस्सा और रोष है। किसानों ने मृतक किसान राम अवतार को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/anger-erupted-over-the-death-of-the-farmer/article-10195"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-08/farmer-strike.jpg" alt=""></a><br /><h2>एक करोड़ मुआवजा और परिवार के सदस्य को नौकरी की मांग</h2>
<ul>
<li>मांगें न मानने तक अंतिम संस्कार से इंकार</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी/चरखी दादरी</strong>। चरखी दादरी की ढाणी फोगाट गाँव में चल रहे किसान धरने पर एक किसान की मौत हो जाने के बाद से किसानों में गुस्सा और रोष है। किसानों ने मृतक किसान राम अवतार को शहीद का दर्जा देने के साथ-साथ एक करोड़ मुआवजा व आश्रितों को नौकरी देने की प्रदेश सरकार से मांग की है। शव का तब तक दाह संस्कार नहीं करेंगे, जब तक उनकी मांगें नहीं मान ली जाती है।</p>
<h4>रविवार को ढाणी फोगाट धरना स्थल पर सैकड़ों किसान एकत्रित हुए और आंदोलन की व्यापक रूप से रूपरेखा तैयार की</h4>
<p style="text-align:justify;">धरने पर पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी भागीदारी रही। वहीं किसानों की अधिक संख्या को देखते हुए और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जिला पुलिस व रेलवे पुलिस प्रशासन के द्वारा भी पुख्ता इंतजाम किए गए।  किसान धरने पर पहुंचे फोगाट प्रवक्ता ने बताया कि जमीन के मुआवजे को लेकर हो रही परेशानी की वजह से किसान की मृत्यु हुई है। इसके जिम्मेदार प्रशासन और सरकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारी मांग है कि मृतक किसान राम अवतार के परिवार को 1 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद के साथ घर में एक सरकारी नौकरी दी जाये। मृतक किसान को शहीद का दर्जा दिया जाये। अब हमारे सब्र का बांध टूट चुका है। अब हम लघु सचिवालय जाकर धरना प्रदर्शन करेंगे और तब तक नही हटेंगे जब तक हमारी मांगें नहीं मान ली जाती।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Aug 2019 16:32:49 +0530</pubDate>
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