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                <title>make - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>ट्रंप की भारत यात्रा को यादगार बनाने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के निमंत्रण पर ट्रंप एवं उनकी पत्नी दो दिन की भारत यात्रा पर 24 फरवरी को सबसे पहले अहमदाबाद पहुंचेंगे और 25 तारीख को उनके सरकारी कार्यक्रम नयी दिल्ली में होंगे।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/preparations-to-make-trumps-visit-to-india-memorable/article-13023"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/welcome-trump.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">24 फरवरी को सबसे पहले अहमदाबाद पहुंचेंगे (Welcome Trump)</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अहमदाबाद में ट्रंप का स्वागत करेंगे</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप की भारत की यात्रा में चुनावी राजनीति, व्यापार एवं रक्षा सहयोग के तीनों आयामों का मिश्रण और उत्सव की चाशनी होगी जो न केवल मेहमानों बल्कि देशवासियों के लिए भी बेहद यादगार होगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के निमंत्रण पर ट्रंप एवं उनकी पत्नी दो दिन की भारत यात्रा पर 24 फरवरी को सबसे पहले अहमदाबाद पहुंचेंगे और 25 तारीख को उनके सरकारी कार्यक्रम नयी दिल्ली में होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अहमदाबाद में ट्रंप का स्वागत करेंगे और दोनों नेता सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लेकर साबरमती आश्रम तक 10 किलोमीटर के रोड शो में शामिल होंगे। (Welcome Trump) इसके लिए हवाई अड्डे से साबरमती आश्रम तक मार्ग को सजाया जा रहा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सड़क के दोनों ओर लाखों लोग विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र के नेता का स्वागत करेंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">बाद में दोनों नेता नवनिर्मित सरदार पटेल स्टेडियम में एक विशाल जनसभा ‘केम छो ट्रंप’ को संबोधित करेंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">यह स्टेडियम विश्व का सबसे बड़ा स्टेडियम है जिसमें एक लाख दस हजार लोगों के बैठने की क्षमता है।</li>
<li style="text-align:justify;">हवाई अड्डे, रोड शो एवं स्टेडियम में देश की विविधता पूर्ण संस्कृति की झांकियां भी अमेरिकी राष्ट्रपति को रिझाएंगी।</li>
<li style="text-align:justify;">अहमदाबाद में अमेरिकी राष्ट्रपति का पूरा कार्यक्रम उत्सवमय रहेगा।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">अहमदाबाद में रोड शो एवं जनसभा ‘केम छो ट्रंप’ होगी (Welcome Trump)</h3>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका में इस साल के अंत में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिहाज से अहमदाबाद में रोड शो एवं जनसभा ‘केम छो ट्रंप’ बहुत महत्वपूर्ण होगी। अमेरिका में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं और उनमें गुजरातियों की संख्या काफी अधिक है। गत वर्ष सितंबर में ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री मोदी के हाउडी मोदी कार्यक्रम में भाग लेकर श्री ट्रंप को इस ताकत का अहसास हो गया था। अहमदाबाद के ‘केम छो ट्रंप’ से वह अमेरिका में रहने वाले प्रवासी भारतीय समुदाय पर असर डालेंगे। मंच पर श्री मोदी की मौजूदगी का संदेश सीधा प्रवासियों तक पहुंच जाएगा। इस कार्यक्रम में रिपब्लिकन पार्टी के बड़े नेताओं के भी शिरकत करने की संभावना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">25 हजार करोड़ रुपए के रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर होने की संभावना</h3>
<p style="text-align:justify;">शिखर बैठक में दोनों देशों के बीच करीब 25 हजार करोड़ रुपए के रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। केन्द्रीय मंत्रिमंडल की रक्षा संबंधी समिति ने हाल ही में नौसेना के लिए 24 रोमियो मल्टीमिशन हेलीकॉप्टर, वायुसेना के लिए छह अपाचे युद्धक हेलीकॉप्टर और छह पी 8 आई समुद्री टोही विमान खरीदने के सौदों को मंजूरी दी है। इनकी आपूर्ति 2023-24 तक होने की संभावना है। इसके अलावा ट्रंप मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत एफ-18, एफ-15ईएक्स अथवा एफ-16 का उन्नत संस्करण एफ-21 संयुक्त रूप से बनाने का प्रस्ताव भी कर सकते हैं। दोनों देशों ने रक्षा प्रौद्योगिकी एवं व्यापार पहल (डीटीटीआई) के तहत सात परियोजनाओं को चिह्नित किया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">द्विपक्षीय व्यापार करार को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ेगी</h3>
<p style="text-align:justify;">चीन अमेरिका व्यापार युद्ध के बीच इस करार को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रंप ने गत दिनों में भारत यात्रा के बारे में बातचीत में कहा कि अगर इसमें अमेरिका के हित पूरे होते हैं तो इस पर वह हस्ताक्षर करेंगे। भारतीय कूटनीतिक सूत्रों का भी कहना है कि अगर भारत के हितों के अनुरूप होता है तो भारत इस पर दस्तखत करेगा। सूत्रों के अनुसार कृषि एवं आॅटोमोबाइल्स उत्पादों को एक दूसरे के बाजार में पहुंच के मुद्दे पर गतिरोध कायम है। ऐसा भी माना जा रहा है कि प्रवासी भारतीयों खासकर पेशेवर युवाओं के लिए एच1बी वीजा को लेकर भारत की चिंताओं को लेकर भी श्री ट्रंप कोई आश्वासन दे सकते हैं। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, अफगानिस्तान, आतंकवाद सहित क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा होगी।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">शाम को राष्ट्रपति कोविंद राष्ट्रपति भवन में ट्रंप के सम्मान में भोज का आयोजन करेंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">उसके बाद रात में ट्रंप वापस लौट जाएंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">करीब 40 घंटे की इस यात्रा में चुनावी राजनीति का रंग और रणनीतिक सहयोग दोनों का मिश्रण होगा।</li>
<li style="text-align:justify;">उत्सव का रूप इस यात्रा को ट्रंप दंपत्ति के लिए यादगार बनाएगा।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2020 17:26:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जन योजनाओं को बनाकर धरातल पर उतारना अधिकारियों की जिम्मेदारी : मुख्य सचिव</title>
                                    <description><![CDATA[आई टी का प्रयोग करके विकास के लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार का ध्यैय है। सरकार द्वारा जनसाधारण की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए ई-गर्वनेंस पर बल दिया जा रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/it-is-the-responsibility-of-the-administrative-officials-to-make-public-schemes-accessible-to-the-people/article-12786"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/keshini-anand-arora.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">संवेदनशील और पारदर्शी प्रशासन प्रदान करना सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है</h2>
<h2 style="text-align:center;">(Keshini Anand Arora)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनन्द अरोड़ा ने कहा है कि लोगों की सुविधाओं के लिए जन योजनाएं बनाने का कार्य करना और उन्हें धरातल पर उतारकर जन-जन तक पहुंचाना प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है। श्रीमती अरोड़ा आज यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (हिपा), गुरुग्राम में हरियाणा सिविल तथा अलाइड सेवा परीक्षा के नवनियुक्त 134 अधिकारियों के पहले ज्वाइंट फाउंडेशन कोर्स के प्रारंभिक सत्र को संबोधित कर रही थी।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इस अवसर पर कार्मिक और प्रशिक्षण विभागों के सचिव नितिन यादव भी उपस्थित थे।</li>
<li style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार की अपेक्षा है।</li>
<li style="text-align:justify;">आप सेवा, समर्पण एवं कर्मठता के साथ राष्ट्रहित में योगदान देकर आदर्श स्थापित करें ।</li>
<li style="text-align:justify;">खुशहाल समाज और देश के निर्माण में भरपूर सहयोग दें।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">आप सभी मैरिट पर इस सेवा में चयनित होकर आए हैं और अब यह आपकी जिम्मेदारी बनती है कि अंत्योदय की राह पर चलते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं को पारदर्शी तरीके एवं समयबद्ध ढंग से पहुंचाने में भागीदार बनें। (Keshini Anand Arora) उन्होंने कहा कि संवेदनशील और पारदर्शी प्रशासन प्रदान करना सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। आई टी का प्रयोग करके विकास के लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार का ध्यैय है। सरकार द्वारा जनसाधारण की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए ई-गर्वनेंस पर बल दिया जा रहा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">श्रीमती अरोड़ा ने कहा कि अधिकारियों को समय-समय पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।</li>
<li style="text-align:justify;">उस समय अपने विवेक एवं धैर्य का प्रयोग करते हुए समाज हित में निर्णय लेना ही अधिकारी की असली परीक्षा है ।</li>
<li style="text-align:justify;">जो इन परीक्षाओं में पास हो जाता है वहीं सफल अधिकारी माना जाता है।</li>
</ul>
<p> </p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/it-is-the-responsibility-of-the-administrative-officials-to-make-public-schemes-accessible-to-the-people/article-12786</link>
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                <pubDate>Tue, 28 Jan 2020 20:42:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वनों को आग से बचाने के लिए बने ठोस नीति</title>
                                    <description><![CDATA[वनों के बिना धरती दिवस मनाने का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। वनों की तबाही के होते विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। बेहतर हो यदि अमीर देश व अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं वनों को बचाने के लिए कोई ठोस मुहिम चलाएं, हर घटना पर चुप रहने से समस्या का निराकरण नहीं हो सकता।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/make-a-concrete-policy-to-protect-the-forest-from-fire/article-12344"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/make-a-concrete-policy-to-p.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आस्ट्रेलिया के वनों में लगी भयानक आग वातावरण के लिए चुनौती है जिसमें 50 करोड़ जानवरों की मौत होने का अनुमान है। इस हादसे में 2 हजार घर भी जल गए हैं। आग की भयानकता का अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि हमारे देश के राज्य पश्चिम बंगाल के क्षेत्रफल जितना जंगल जल गया है। तीन हजार के करीब सैनिक आग बुझाने में जुटे हुए हैं। कुछ माह पूर्व ही दुनिया के फेफड़े माने जाने वाले अमेजन के वनों को आग लग गई थी। गत वर्षों में कनाडा में भी बड़े स्तर पर वन आग की चपेट में आ गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">आग लगने का कारण भले ही कोई भी क्यों न हो लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि हरियाली कायम रखने और बढ़ाने संबंधी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस प्रकार के कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं उसके मुताबिक वनों को आग से बचाने के लिए तकनीक विकसित नहीं हो सकी और न ही प्रबंध मुकम्मल किए जा सके हैं। कनाडा में आज भी आग से वनों का उतना नुक्सान हो जाता है जितना कभी 100 साल पूर्व होता था। इस मामले में शक्तिशाली देशों के बीच सहयोग व तालमेल की कमी बनी रहती है। अधिकतर देश ऐसी घटनाओं में अपनी लड़ाई अकेला ही लड़ता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आस्ट्रेलिया, कनाडा जैसे देश तकनीक व अनुदान के लिए समर्थ देश हैं। कई वन एक से अधिक देशों की सीमाओं के साथ सटे हुए हैं।  एक देश में घटित घटना दूसरे देशों के लिए भी मुसीबत बनती है। इन हालातों में सबंधित देशों का कोई संयुक्त अभियान चलाया जा सकता है। वृक्ष प्रकृति के वरदान हैं जो मानव को आॅक्सीजन देते हैं। एक वृक्ष तैयार करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है लेकिन आग से मिनटों में लाखों पेड़ जलकर राख हो जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लगभग हर साल की तरह ऐसी घटनाएं घटती हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आग से हो रहे नुक्सान को रोकने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई। यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि बढ़ रही जनसंख्या, उद्यौगिकरण व कई अन्य कारणों के चलते वन ही धरती का अस्तित्व का आधार हैं। वनों के बिना धरती दिवस मनाने का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। वनों की तबाही के होते विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। बेहतर हो यदि अमीर देश व अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं वनों को बचाने के लिए कोई ठोस मुहिम चलाएं, हर घटना पर चुप रहने से समस्या का निराकरण नहीं हो सकता। वनों को हर हाल में आग से बचाने की आवश्यकता है।</p>
<p> </p>
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</span></span></p>
<p><span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title=""> </span></span></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jan 2020 20:52:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Real Hero : मजदूर पिता, बेटियों को डॉक्टर बनाने के लिए करता है रोजाना 12 किलोमीटर का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[बेटियों को पढ़ाने के लिए मिया खान रोज 12 किमी दूर स्कूल तक ले जाते हैं। इसके बाद जब तक उसकी क्लास चलती है। वे वहीं चार घंटे उनका इंतजार करते हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/father-travels-12km-to-take-daughter-to-school-daily-waits-4-hours-for-her-to-finish-classes/article-11673"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/father-struggle.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">मिया खान बेटियों को स्कूल पहुंचाने के बाद छुट्टी होने तक वहीं करते हैं इंतजार | Real Hero Father</h1>
<ul>
<li>
<h2><strong>मिया खान निरक्षर हैं मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते हैं<br />
</strong></h2>
</li>
</ul>
<p><strong>Edited By Vijay Sharma</strong></p>
<p><strong>काबुल (सच कहूँ डेस्क) ।</strong> <strong>(Real Hero Father)</strong> शिक्षा एक ऐसा दीपक है जिसकी रोशनी से हर इंसान अपने जीवन को एक नई दिशा दे सकता है। लेकिन बेटियों को आज भी शिक्षा से वंचित रखा जाता है। रूढ़ीवादी सोच, पुरानी परापंराओं की जंजीरों में आज भी लाखों लोग बंधे हुए हैं। लेकिन आज आपको एक ऐसे पिता के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपनी एक नहीं दो नहीं बल्कि तीन बेटियों को शिक्षित करने के लिए रोजाना 12 किलोमीटर का सफर तय करता है। जिनका नाम है मिया खान।वे अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए रोज 12 किमी दूर स्कूल तक ले जाते हैं।</p>
<p>इसके बाद जब तक उसकी क्लास चलती है। वे वहीं चार घंटे उनका इंतजार करते हैं। जब स्कूल का वक्त खत्म होता है वापस उन्हें लेकर घर आते हैं। मिया खान रोज बाइक से अपनी तीन बेटियों को नूरिनियां स्कूल ले जाते हैं।</p>
<h2>बेटियों को बनाना चाहते हैं डॉक्टर| Real Hero Father</h2>
<ul>
<li><strong>मिया खान अपने परिवार के साथ अफगानिस्तान के शाराना में रहते हैं। </strong></li>
<li><strong>लोगों ने मिया खान के इस फैलने का विरोध किया लेकिन अब धीरे-धीरे लोगों की सोच में बदलाव आने लगा है। </strong></li>
<li><strong> मिया खान ने बताया, “मैं निरक्षर हूं। मैं मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता हूं। </strong></li>
<li><strong>मेरी बेटियों की शिक्षा इसलिए जरूरी है, क्योंकि हमारे इलाके में कोई महिला डॉक्टर नहीं है।</strong></li>
<li><strong>मेरी बेटियां डॉक्टर बनकर जिन्दगियों को बचा सके। </strong></li>
</ul>
<h2>हमारा मकसद पिता के सपने को साकार करना : रोजी</h2>
<p>मिया खान की तीन बेटियों में से एक बेटी रोजी ने  बताया कि मैं खुश हूं कि मुझे ऐसे पिता मिलें है, मैं अभी कक्षा 6 में पढ़ रही हूँ मेरे पिता हम तीनों बहनों को रोजाना बाइक से स्कूल और स्कूल से घर लेकर आते हैं। साधन की कमी और स्कूल दूर होने के कारण हालांकि काफी परेशानी होती है लेकिन हमारे पिता ने हमें कभी ये महसूस नहीं होने दिया। हमारा मकसद सिर्फ पिता के सपने को साकार करना है।</p>
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<h1>Father Travels 12Km To Take Daughter To School Daily, Waits 4 Hours For Her To Finish Classes</h1>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/father-travels-12km-to-take-daughter-to-school-daily-waits-4-hours-for-her-to-finish-classes/article-11673</link>
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                <pubDate>Sat, 07 Dec 2019 15:35:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>भाजपा को नये रास्ते बनाने होंगे</title>
                                    <description><![CDATA[जबसे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की कमजोर स्थिति सामने आयी है, एक शीर्ष वर्ग पार्टी के भीतर थोड़ा ठहरकर अपने बीते दिनों के आकलन और आने वाले दिनों के लिये नये धरातल को तैयार करने की वकालत करने लगा है। इन पांच राज्यों के चुनाव के परिणाम एवं लोकसभा चुनाव की दस्तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">जबसे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की कमजोर स्थिति सामने आयी है, एक शीर्ष वर्ग पार्टी के भीतर थोड़ा ठहरकर अपने बीते दिनों के आकलन और आने वाले दिनों के लिये नये धरातल को तैयार करने की वकालत करने लगा है। इन पांच राज्यों के चुनाव के परिणाम एवं लोकसभा चुनाव की दस्तक जहां भाजपा को समीक्षा के लिए तत्पर कर रही है, वही एक नया धरातल तैयार करने का सन्देश भी दे रही है। इस दौरान संघ के वरिष्ठ अधिकारी किशोर तिवारी ने संघ प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर मांग की है कि भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पार्टी की बागडोर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को सौंपी जानी चाहिए। वरिष्ठ भाजपा नेता संघप्रिय गौतम ने भी मांग की है कि मौजूदा पार्टी नेतृत्व को तीन राज्यों में हार की जिम्मेदारी लेकर पद छोड़ देना चाहिए। लेकिन यह तो भविष्य की रचनात्मक समृद्धि का सूचक नहीं है। वर्तमान को सही शैली में, सही सोच के साथ सब मिलजुलकर जी लें तो विभक्तियां विराम पा जाएंगी। मोहरे फेंकना ही नहीं, खेलना भी सिखाना होगा। एक महासंग्राम की तैयारी पर ऐसा कुछ सोच सकते हैं जिसे परम्परा मानी जा सके। ऐसा कुछ कर सकते हैं जिसे इतिहास बनाया जा सके और ऐसा कुछ जीकर दिखाया जा सकता है जो औरो के लिये उदाहरण बन सके। गडकरी प्रवाह में आदमी भागता अवश्य है मगर सही रास्ता नहीं खोज पाता। भाजपा को सही रास्ता खोजना है, प्रतिकूल हवाओं को अनुकूल करना है तो नये रास्ते बनाने ही होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">संघ के नेताओं की मांग हो या केन्द्रीय मंत्री श्री नितीन गडकरी के स्वर हो या अन्य नेताओं के बयान- भाजपा में लोकसभा चुनाव से पूर्व व्यापक बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही है। पार्टी में संगठन मंत्री रहे संजय जोशी को सक्रिय करने की कोशिशें भी जोर पकड़ रही है। इन बढ़ती चचार्ओं एवं स्वरों का अर्थ पार्टी में अन्तर्कलह या विद्रोह की स्थिति को कत्तई नहीं दर्शा रहा है, बल्कि आने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी की स्थिति सुदृढ़ बने, इसकी जद्दोजहद ही दिख रही है। उद्देश्यों को सुरक्षा देने वाली उन दीवारों से भाजपा को सुदृढ़ बनाने का प्रयत्न करना होगा जो हर आघात को झेलने की शक्ति दे। इन दिनों नितिन गडकरी चचार्ओं में हैं। वे मोदी सरकार के महज एक मंत्री भर नहीं हैं। वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं और उस परिवार से आते हैं, जिसकी जड़ें आरएसएस से जुड़ी रही हैं। एक वक्त वे अपने निजी व्यवसाय की वजह से मीडिया की सुर्खियों में रहे और उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद गंवाना तक पड़ा था। इस वक्त वे अपने बयानों की वजह से चर्चा में हैं। उन्हें अपने हर बयान पर सफाई देनी पड़ रही है। लेकिन उनके बयान भाजपा के लिये अतीत को खंगालने का एवं भविष्य के लिए नये संकल्प बुनने की आवश्यकता को उजागर कर रहे हैं। देखना यह है कि उनके बयान क्या संदेश देकर जा रहा है और उस संदेश का क्या सबब है।</p>
<p style="text-align:justify;">गडकरी ने पंडित नेहरू की तारीफ करते हुए कहा कि सिस्टम को सुधारने के लिए दूसरों की बजाए पहले खुद को सुधारना चाहिए। खुद को सुधारने का अर्थ है कि पार्टी एवं सरकार में नया धरातल एवं सोच तैयार हो। गडकरी ने असहिष्णुता को लेकर भी अपने विचार रखे और कहा कि सहनशीलता और विविधता में एकता भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण पहलू है। जवाहर लाल नेहरू कहते थे- इंडिया इज नॉट नेशन, इट इज ए पॉपुलेशन। उनका यह भाषण गडकरी को बहुत पसंद है। उनका मानना है कि अगर कोई सोचता है कि उसे सब पता है तो वह गलत है। विश्वास और अहंकार में फर्क होता है। आपको खुद पर विश्वास रखना चाहिए, लेकिन अहंकार से दूर रहना चाहिए। गडकरी ने यह भी कहा कि राजनीति सामाजिक आर्थिक बदलाव का कारक है। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतना महत्वपूर्ण है, लेकिन अगर सामाजिक आर्थिक बदलाव नहीं होता है, देश और समाज की प्रगति नहीं होती है तो आपके सत्ता में आने और सत्ता से जाने का कोई मतलब नहीं रह जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए। आप बहुत अच्छे और बहुत प्रभावशाली हो सकते हैं, लेकिन अगर आपके साथ लोगों का समर्थन नहीं है तो आपके अच्छे या प्रभावशाली होने का कोई मतलब नहीं है। दिशाहीनता और मूल्यहीनता बढ़ती रही है, प्रशासन चरमरा रहा था। भ्रष्टाचार के जबड़े खुले थें, साम्प्रदायिकता की जीभ लपलपा रही थी और दलाली करती हुई कुर्सियां भ्रष्ट व्यवस्था की आरतियां गा रही थीं। उजाले की एक किरण के लिए आदमी की आंख तरस रही थी और हर तरफ से केवल आश्वासन बरस रहे थे। सच्चाई, ईमानदारी, भरोसा और भाईचारा जैसे शब्द शब्दकोषों में जाकर दुबक गये थे। व्यावहारिक जीवन में उनका कोई अस्तित्व नहीं रह गया था। इस विसंगतिपूर्ण दौर में भाजपा पर लोगों ने विश्वास किया, इस विश्वास का खंडित होना आज भाजपा को गंभीर मंथन के लिये विवश कर रहा है। आखिर ऐसे क्या कारण बने? उन कारणों को खोजकर उन्हें दूर करना होगा। भाजपा को अपनी हैसियत को नहीं भूलना है। उसे भूलने का अर्थ होगा अपने कतृत्व के कद को छोटा करना, स्वयं की क्षमताओं से बेपरवाह रहकर औरों के हाथों का खिलौना बनना।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-ललित गर्ग-</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Jan 2019 10:25:54 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रणजीत सिंह पर फिल्म बनायेंगे जे पी दत्ता</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी) बॉलीवुड के जाने माने फिल्मकार जे पी दत्ता सिख योद्धा महाराजा रणजीत सिंह पर बायोपिक बनाने वाले हैं। जे पी दत्ता की फिल्म पलटन रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म 1967 में चीन के सैनिकों को हथियार डालने पर मजबूर करने की कहानी है। जे पी दत्ता जल्द सिख योद्धा महाराजा रणजीत सिंह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/rangmanch/j-p-dutta-will-make-a-film-on-ranjit-singh/article-5799"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/j-p-dutta-will-make-a-film-on-ranjit-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई (एजेंसी)</p>
<p>बॉलीवुड के जाने माने फिल्मकार जे पी दत्ता सिख योद्धा महाराजा रणजीत सिंह पर बायोपिक बनाने वाले हैं। जे पी दत्ता की फिल्म पलटन रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म 1967 में चीन के सैनिकों को हथियार डालने पर मजबूर करने की कहानी है। जे पी दत्ता जल्द सिख योद्धा महाराजा रणजीत सिंह पर बायोपिक बनाने वाले हैं। महाराजा रणजीत सिंह ने 19वीं शताब्दी में पश्चिमोत्तर भारत में राज किया था।</p>
<p>वो शेर-ए-पंजाब के नाम से बेहद फेमस थे। जे पी दत्ता मानते हैं कि महाराजा रणजीत सिंह देश के बड़े योद्धा रहे हैं और उनके बारे में फिल्म के जरिये लोगों तक बातें पहुंचाई जा सकती हैं। उनकी खासला आर्मी में सभी धर्म के लोगों को जगह मिली थी। इसके बाद जे पी दत्ता की दूसरी बायोपिक किसी एक व्यक्ति नहीं बल्कि राजस्थान के पॉवरफुल पर्सनालिटीज पर होगी। यह फिल्म इस साल नवंबर में फ्लोर पर जायेगी। इन दोनों फिल्मों को जे पी दत्ता ही निर्देशित करेंगे।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>रंगमंच</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Sep 2018 15:04:13 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सादिक का खेल स्टेडियम बना नशेड़ियों का अड्डा</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस ने लोगों को नशेड़ियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई करने का दिया भरोसा फरीदकोट/सादिक (सच कहूँ न्यूज)। दिन प्रतिदिन नशों के कारण मर रही जवानी को बचाने के लिए पंजाब में ‘मरो न विरोध करो’ के अंतर्गत ‘चिट्टे के खिलाफ काला सप्ताह ’ मनाया जा रहा है व विभिन्न स्थानों पर जागरूक लोगों द्वारा नशों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/sadiks-game-stadium-station-make-from-drugs/article-4705"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/drugs.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">पुलिस ने लोगों को नशेड़ियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई<br />
करने का दिया भरोसा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>फरीदकोट/सादिक (सच कहूँ न्यूज)।</strong> दिन प्रतिदिन नशों के कारण मर रही जवानी को बचाने के लिए पंजाब में ‘मरो न विरोध करो’ के अंतर्गत ‘चिट्टे के खिलाफ काला सप्ताह ’ मनाया जा रहा है व विभिन्न स्थानों पर जागरूक लोगों द्वारा नशों प्रति जागरूक करने के लिए प्रति दिन नशों के खिलाफ रोष मार्च निकाले जा रहे हैं व नशे बेचने वालों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई करने को लेकर रैलियां की जा रही हैं,</p>
<p style="text-align:justify;">जिससे नशोें के बह रहे दरिया में बहती जा रही नौजवानी को बचाया जा सके परंतु नशेड़ी लोगों पर इसका कोई प्रभाव देखने को नहीं मिल रहा व रोजमर्रा की नशों के साथ मौतें होने की कमी नहीं आ रही, क्योंकि नशों के आदी लोगों ने अपना काम जारी रखा हुआ है और वह सार्वजनिक स्थानों को भी अपना निशाना बना रहे हैं व वहीं चोरी छिपे आकर अपना बुरी आदत पूरा करते हैं।</p>
<h2 style="text-align:center;">आमजन ने प्रशासन से की नशेड़ियों पर नकेल कसने की मांग</h2>
<p style="text-align:justify;">इसकी ताजा मिसाल सादिक में बने खेल स्टेडियम से मिलती है जहां नशा करने वाले लोग आकर अपना समय व्यतीत करते हैं और यहीं वह अपना नशों का बुरी आदत भी पूरा करते हैं। लोगों द्वारा बताने पर ‘सच-कहूँ संवाददाता’ द्वारा स्टेडियम का दौरा किया गया तो खेल स्टेडियम में बनी झोंपड़ी नीचे अनेकों ही नशे वाली गोलियों के खाली पत्ते, इंजैक्शन, खाली पैके टों के अलावा एसआर की डिब्ब्यिां भी पड़ीं मिलीं हैं जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि शराबी यहां बैठ कर नशा करते हैं। क्षेत्र के बुद्धिमान लोगों ने मांग की कि स्टेडियम में नशा करने वाले असामाजिक तत्वों पर नकेल कसी जाए।</p>
<h2 style="text-align:center;">सार्वजनिक स्थानों को नहीं बनने दिया जाएगा नशेड़ियों का अड्डा : थाना प्रमुख</h2>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी जब थाना सादिक के मुख्य अधिकारी इंस्पेक्टर इकबाल सिंह संधू के साथ बात की तो उन्होंने कहा कि लोगों द्वारा मुझे नशों के खिलाफ ज्ञापन सौंपकर मेरी जिम्मेदारी और बढ़ा दी गई है व यह अच्छी बात है कि यह मसला उनके ध्यान में लाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने इस पर तुंरत कार्रवाई करते अपने साथियों को सुबह-शाम स्टेडियम, स्कूलों के आसपास व अन्य सार्वजनिक स्थानों की गश्त करने के लिए सख़्त हिदायतें की व विश्वास दिलाया कि वह सार्वजनिक स्थानों को नशेड़ियों का अड्डा नहीं बनने देंगे और नशे बेचने वालों के खिलाफ सख्ती के साथ पेश आऐंगे।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Jul 2018 03:15:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृपया खुद के रिस्क पर करें हवाई सफर</title>
                                    <description><![CDATA[नए विमानन नियम, नई सहूलियते, आधुनिक तामझाम, यात्रा में सुगमता की गारंटी और भी कई तमाम हवाई कागजी बातें उस समय धरी की धरी रह जाती हैं जब ΄लेन उड़ने से पहले अपनी अव्यवस्था ब्यां कर देता है। उदाहरण दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के सपाट रनवे पर आमने-सामने एक साथ दो विमानों का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/please-make-yourself-at-ri-of-flight/article-682"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/plan-slip.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नए विमानन नियम, नई सहूलियते, आधुनिक तामझाम, यात्रा में सुगमता की गारंटी और भी कई तमाम हवाई कागजी बातें उस समय धरी की धरी रह जाती हैं जब ΄लेन उड़ने से पहले अपनी अव्यवस्था ब्यां कर देता है। उदाहरण दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के सपाट रनवे पर आमने-सामने एक साथ दो विमानों का आ जाना। इसे एटीएस की गलती कहें या विमानन कंपनियों की तकनीकी नाकामी, या फिर पायलटों की लापरवाही! इसे घोर लापरवाही ही कही जाएगी।<br />
28 दिसंबर को देश में दो बड़े विमान हादसे होते-होते बचे। एक दिल्ली और दूसरा गोवा में। दोनों घटनाओं ने हवाई यात्रा सुरक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर दिया है। विमानन कंपनियां इस समय सवालों के घेरे में हैं और होनी भी चाहिए। गोवा और दिल्ली में एक ही दिन दो बड़ी विमान घटनाएं हो सकती थीं। गोवा में जिस तरह से विमान लैंडिंग के दौरान अपना संतुलन खोकर धरती पर गिरा और हादसा होने से बचा उसे कुदरत का करिश्मा ही कहेंगे। अंदर बैठे यात्रियों ने बाहर निकलकर बताया कि जब विमान रनवे पर फिसल रहा था तो धड़ाम-धड़ाम की तेज आवाजें उन्हें सुनाई दे रही थी। विमान तेजी से अचानक मुड़ा और आगे की तरफ तेज आवाज करता हुआ एकदम झुक गया। थोड़ी देर के लिए सभी यात्रियों की सांसे थम सी गईं।<br />
विमान का लैंडिंग गियर जिस तरह से क्षतिग्रस्त हुआ है उससे हादसा होने की परिकल्पना की जा सकती हैं। लैंडिंग गियर पूरी तरह से चकनाचूर हो गया है। जेट एयरवेज के इस विमान में 161 यात्री यात्रा कर रहे थे। घटना के वक्त थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। विमान में सवार कू्र मेंबर यात्रियों को छोड़ खुद की जान बचाने के लिए तेजी से उतरते दिखाई दिए। इसी के चलते आपाधापी में 12 यात्री जख्मी हो गए।<br />
सवाल उठता है कि यात्रियों की सुरक्षा आखिर कौन करेगा? दोनों घटनाओं में विमानन कंपनियों की नाकामी प्रत्यक्ष रूप से सामने आ रही है। उनकी तकनीक में अव्यवस्था की तस्वीर सामने आई है। हालांकि यह गलती न विमानन कंपनी स्वीकार करेंगी और न ही सरकारी तंत्र! जिस तरह से विमान का अगला हिस्सा रनवे को पार करता हुआ दूसरी तरफ जाकर जमीन को छूआ उससे प्रतीत हो रहा है कि इसमें सिर्फ पायलट की गलती रही होगी। विमान के अंदर लोग दहशत में आ गये क्योंकि उस वक्त जोरदार झटका लगा। घटना की प्रारंभिक जांच करते हुए प्रशासन ने फिलहाल दोनों पायलटों के लाइसेंस अस्थायी रूप रद्द कर दिए हैं। सवाल उठता है कि क्या यह सब करने से हादसों को रोकने का हल निकल जाएगा। शायद नहीं! घटना की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, दोषी कर्मचारियों को सख्त सजा देनी चाहिए।<br />
हरियाणा का चरखी विमान हादसा शायद ही कोई भूल पाए! उस हादसे को भारत में अब तक के सबसे बड़े हवाई हादसे में गिना जाता है। घटना को याद करते रूहें कांप उठती हैं। एटीसी से जुड़ा हुआ भारत में अबतक का सबसे बड़ा हवाई हादसा है। दिल्ली में चरखी हादसे की पुनरावृति होते-होते बची। दो विमान आमन-सामने टक्कर खाने से बच गए। बताने की जरूरत नहीं है कि अगर टक्कर हो जाती तो क्या होता? दिल्ली की तरह 12 नवंबर, 1996 में चरखी दादरी में दो विमानों में मिड एयर कलिजन हुआ। एक विमान सऊदी अरब का था तो दूसरा कजाखिस्तान का। उस हादसे में दोनों विमानों में सवार सभी 349 यात्रियों में से कोई जिंदा नहीं बचा।<br />
दिल्ली-गोवा की इन दोनों घटनाओं ने विमान यात्रियों की आशंकाओं में बढ़ोतरी की। क्योंकि हाल ही में विमान संबंधी हादसों की भयावह घटनाएं घटी हैं। पिछले स΄ताह ही रूस का एक विमान समुद्र में समा गया था। यात्रियों में हवाई सफर को लेकर डर है। इन ताजा घटनाओं ने डर में और बढोतरी कर दी है। तकनीकी नाकामी से विमान दुर्घटनाएं होती रही हैं। अब विमानन कंपनियों द्वारा सुरक्षा संबंधी लापरवाही और अशांत क्षेत्रों के ऊपर से उड़ान भरने को लेकर नए सवाल खड़े होने लगे हैं। आखिर कैसे हो सुगम हवाई यात्रा। हालांकि उक्त घटनाओं पर केंद्र सरकार ने नाराजगी जाहिर की है। सख्त जांच के आदेश पारित किए हैं। अगर पायलटों की गलती सामने आती है तो प्रशासन को ऐसे सभी पायलटों को अयोग्य कर देना चाहिए जो यात्रा के दौरान लापरवाही दिखाते हैं। क्योंकि उनकी थोड़ी सी चूक कई लोगों की जान ले सकती है।<br />
पूर्व की घटनाओं को देखें तो एयर इंडिया पहले भी कई बार विमान हादसों की शिकार हो चुकी है। खराब मौसम, पायलट की चूक या फिर कोई टेक्निकल समस्या से अब तक हवाई हादसों में अनगिनत यात्रियों ने अपनी जान गंवाई है। जनवरी 1978 में पहली बार एयर इंडिया का विमान अरब सागर में क्रैश हुआ था। उस विमान में 213 यात्री सफर कर रहे थे, जिनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ। विमान में सवार सभी लोग मारे गए। इसके बाद 21 जून 1982 को एयर इंडिया का एक और विमान मुंबई एयरपोर्ट पर क्रैश हुआ। विमान में सवार 111 लोगों में से 17 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना में प्रत्यक्ष रूप से पायलटों की गलती सामने आई। जांच में पाया गया कि पायलट की गलती से ये हादसा हुआ।<br />
भारत के सभी रनवे और विमानों को आधुनिक करने की जरूरत है। दक्ष पायलटों को ही विमान उड़ाने की इजाजत होनी चाहिए। विमानों का रखरखाव ठीक से हो और इनकी समय पर जांच करनी चाहिए। ताकि यात्री भयमुक्त होकर विमानों में सफर कर सकें। दरअसल पूर्व में हुए कई विमान हादसों ने यात्रियों के दिलों में भय पैदा कर दिया है। दो साल पहले गायब हुए एक विदेशी जहाज का आज तक पता नहीं चल सका। वहीं कुछ दिन पहले रूस का एक विमान समुद्र में समा गया। उस जहाज में सवार सभी यात्रियों की जलसमाधी बन गई। <em>रमेश ठाकुर</em></p>
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                <pubDate>Fri, 30 Dec 2016 05:10:14 +0530</pubDate>
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