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                <title>game - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>मोबाइल गेम की लत में फंसे दो किशोरों ने 15 दिन में उड़ा दिए 6 लाख 25 हजार, मुकदमा दर्ज करवाया</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। पदमपुर कस्बे में दो किशोरों द्वारा मोबाइल गेम की लत में फंसकर करीब 6 लाख 25 हजार रुपए बैंक खातों से उड़ा दिए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस संबंध में अज्ञात व्यक्तियों पर आॅनलाइन दो बैंक खातों से 6 लाख 24 हजार से अधिक राशि निकाल लेने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/two-teenagers-trapped-in-mobile-game-addiction-blew-6-lakh-25-thousand-in-15-days/article-30170"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/online-game.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पदमपुर कस्बे में दो किशोरों द्वारा मोबाइल गेम की लत में फंसकर करीब 6 लाख 25 हजार रुपए बैंक खातों से उड़ा दिए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस संबंध में अज्ञात व्यक्तियों पर आॅनलाइन दो बैंक खातों से 6 लाख 24 हजार से अधिक राशि निकाल लेने के आरोप में मुकदमा दर्ज करवाया गया है। थाना प्रभारी रामकेश मीणा ने बताया कि नगरपालिका के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी कृष्णसिंह निवासी वार्ड नंबर 7 पदमपुर द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर उसके एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक खातों से 2 से 17 जनवरी के बीच यह रकम अज्ञात व्यक्तियों द्वारा निकाल लिए जाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">शुरुआती जांच में सामने आया है कि कृष्णसिंह के किशोर उम्र के पोते-दोहते ने मोबाइल फोन पर आॅनलाइन कोई गेम खेलते हुए इन खातों से रुपए निकाले। दोनों किशोर दोनों बैंक खातों से धीरे-धीरे रकम मोबाइल गेम पर खर्च करते रहे। बैंक खाते मोबाइल नंबर से लिंक किए हुए थे। पीड़ित कृष्णसिंह ने बताया कि विगत 29 दिसंबर को उसके पिता का देहांत हो गया था।वे लोग शोकाग्रस्त थे। इस दौरान उन्हें पता ही नहीं चला कब दोहते और पोते मोबाइल फोन पर कोई गेम खेलने के लिए उसके ही दोनों खातों से रुपए निकाल रहे हैं। कृष्णसिंह के अनुसार उन्हें 17 जनवरी को पता चला, जब बैंक से मैसेज आया कि उसके खातों से इतनी बड़ी रकम निकल गई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बैंक में जाने पर पता चला कि यह रकम आॅनलाइन निकाली गई है। इस पर उन्होंने थाने में रिपोर्ट दे दी। रिपोर्ट में उल्लेख नहीं किया गया कि बच्चों ने मोबाइल पर गेम खेलने के लिए रकम निकाली है। अलबत्ता थाना प्रभारी रामकेश मीणा ने बताया कि बुधवार को अज्ञात लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मामला दर्ज कर लेने के बाद परिवादी ने दोबारा थाने में आकर बताया कि उसके ही परिवार के बच्चों ने यह राशि मोबाइल पर गेम खेलने के चक्कर में निकाली है।</p>
<p style="text-align:justify;">उसने घर परिवार का मामला होना बताकर अपनी रिपोर्ट वापस मांगी, लेकिन तब तक मुकदमा दर्ज कर जांच एएसआई सुभाषचंद्र को सौंप दी गई थी। थाना प्रभारी ने बताया कि कृष्णसिंह का दोहिता नोहर जिला हनुमानगढ़ में रहता है। उसका पोता भी नोहर गया हुआ है। दोनों किशोरों से पूछताछ करने पर ही पता चलेगा कि वे मोबाइल पर ऐसा कौन सा गेम खेलते थे,जिसमें उन्होंने महज 15 दिन में ही करीब सवा 6 लाख रुपए उड़ा दिए। मोबाइल गेम का पता चलने के बाद प्रयास किए जाएंगे की इस रकम को वापस प्राप्त किया जा सके।</p>
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                                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Jan 2022 10:35:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सावधान! ऑनलाइन गेम ने छीनी बच्चे की जिंदगी, पैसे गंवाकर दी जान</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। छठी कक्षा के एक बच्चे ने खुदकुशी कर ली। दरअसल यह बच्चा फ्री फायर नाम का एक ऑनलाइन गेम खेलते हुए 40 हजार रुपये हार गया। इसके बाद बाद उसने ये खौफनाक कदम उठाया। पुलिस को बच्चे का लिखा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/online-game-snatched-the-life-of-the-child/article-25631"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/online-game.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भोपाल।</strong> मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। छठी कक्षा के एक बच्चे ने खुदकुशी कर ली। दरअसल यह बच्चा फ्री फायर नाम का एक ऑनलाइन गेम खेलते हुए 40 हजार रुपये हार गया। इसके बाद बाद उसने ये खौफनाक कदम उठाया। पुलिस को बच्चे का लिखा एक सुसाइड नोट भी मिला है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">ये है पूरा मामला</h5>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक सिविल लाइन में सागर रोड निवासी कृष्णा पाण्डेय (13) मोबाइल पर फ्री फायर गेम खेलता था। इसके चलते उसकी माँ के खाते से 40 हजार रुपये निकल गए। जब ये बात उसकी माँ को पता चली तो उन्होंने बेटे कृष्णा पाण्डेय को गेम खेलने से मना कर दिया। 40 हजार रुपये जाने से बच्चा डिप्रेशन में आ गया। इसके चलते उसने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है। हिंदी और इंग्लिश में लिखे गए इस नोट में बच्चे ने अपने मम्मी-पापा से माफी मांगी है। साथ ही फ्री फायर गेम में पैसे गंवाने का जिक्र भी किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">खबरों के मुताबिक लड़के के पिता पैथोलॉजी लैब चलाते हैं और उसकी माँ जिला अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में काम करती हैं। डीएसपी शशांक जैन ने बताया है कि पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त करके मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही बच्चों के गेम खेलने को लेकर एक एडवाइजरी भी जारी की गई है। पुलिस जांच कर रही है कि क्या बच्चा गेम पर स्वयं पैसा खर्च कर रहा था या कोई और उसे पैसों के लिए धमकी दे रहा था।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jul 2021 13:21:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों पर हावी होती वीडियो गेम, चीन सरकार ने लगाया प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[चीन सरकार ने 18 साल से कम बच्चों के वीडियो गेम (Video Games) खेलने पर आंशिक प्रतिबंध का ऐलान कर दिया है। सरकार का कहना है कि वीडियो गेम की वजह से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा पैदा होती है, लिहाजा उनके खेलने के समय को सीमित करना जरूरी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/china-bans-video-games/article-11202"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/game.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">सरकार ने रात 10 से सुबह 8 बजे तक वीडियो गेम खेलने पर रोक लगाई | <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Video Games</span></span></h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>सरकार ने कहा- वीडियो गेम बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में गतिरोध पैदा कर रहा</strong></li>
</ul>
<p><strong>Edited By Vijay Sharma </strong></p>
<p><strong>बीजिंग(एजेंसी)।</strong> चीन सरकार ने 18 साल से कम बच्चों के वीडियो गेम<strong> (<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Video Games</span></span>)</strong> खेलने पर आंशिक प्रतिबंध का ऐलान कर दिया है। सरकार का कहना है कि वीडियो गेम की वजह से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा पैदा होती है, लिहाजा उनके खेलने के समय को सीमित करना जरूरी है। चीन के नेशनल प्रेस एंड पब्लिकेशन एडमिनिस्ट्रेनशन ने हाल ही में नए नियमों की लिस्ट जारी की। इसके मुताबिक, 18 साल से कम उम्र के युवाओं को रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक ऑनलाइन वीडियो गेम नहीं खेलने दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">नियमों के मुताबिक, हफ्ते में सोमवार से शुक्रवार तक हर दिन बच्चों को वीडियो गेम खेलने के लिए सिर्फ 90 मिनट का समय मिलेगा। हालांकि, वीकेंड्स और छुट्टियों के लिए इसे बढ़ाकर 3 घंटे कर दिया जाएगा। इसके अलावा 16 साल से कम के युवा गेम्स पर एक महीने में 200 युआन (2000 रुपए) से ज्यादा खर्च भी नहीं कर सकेंगे। 16 से 18 साल के युवाओं के लिए वीडियो गेम्स पर खर्च की सीमा बढ़ाकर 400 युआन (4000 रुपए) रखी गई है। 18 साल से कम उम्र वालों को अपने असली नाम और आइडेंटिफिकेशन नंबर भी बताना पड़ेगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जिनपिंग के विचारों के तहत लगाया जाएगा प्रतिबंध</h2>
<p style="text-align:justify;">युवाओं में वीडियो गेम्स की लत रोकने के लिए चीन सरकार की तरफ से यह नए प्रतिबंध हैं। गेमिंग कंपनियों को इन नियमों के तहत ही यूजर्स को वेरिफाई करना होगा। शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, यह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की देश को आगे ले जाने की योजनाओं का ही एक हिस्सा है। इन्हें संविधान में शामिल शी के समाजवाद के विचारों से लिया गया है। पिछले साल ही शी ने वीडियो गेम्स की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि बच्चों में नजर कमजोर होने की मुख्य वजह यह गेम्स ही हैं। इसके बाद ही चीन की गेमिंग इंडस्ट्री पर बच्चों को गेम खिलाने की सीमा निर्धारित करने का दबाव बन गया था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">अस्वस्थता फैलाने वाले गेम्स को रोकने की कवायद शुरू</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>शी के इस बयान के बाद चीन के शिक्षा मंत्रालय ने ऐलान कर दिया था कि वे ऑनलाइन गेमिंग को सीमित करने के लिए नए नियम लागू करेगी।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इसके अलावा हर साल नए गेम्स की रिलीज में भी कमी लाई जाएगी, ताकि लोगों के गेम्स खेलने का समय कम किया जा सके। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>चीनी अधिकारियों ने ऑनलाइन मीडिया कंटेंट को भी अस्वस्थ और स्वस्थ की कैटेगरी देकर साफ करने की मुहिम शुरू की। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>प्रशासन के मुताबिक, हिंसक और खूनी खेलों के साथ जुए को बढ़ावा देने वाले खेलों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से हटाया जाना था।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/china-bans-video-games/article-11202</link>
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                <pubDate>Wed, 20 Nov 2019 10:33:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकतंत्र सिर्फ बड़ों का खेल नहीं है</title>
                                    <description><![CDATA[लोकतंत्र (Democracy is not just a game of elders) का मतलब केवल चुनाव सरकार के गठन या शासन से नहीं है लोकतंत्र की परिभाषा इससे व्यापक है जिसमें राज्य समाज और परिवार सहित हर प्रकार के समूह पर सामूहिक निर्णय का सिद्धांत लागू होता है। केवल राज्य के स्तर पर लोकतंत्र के लागू होने से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/democracy-is-not-just-a-game-of-elders/article-6861"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/vote-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लोकतंत्र<strong> (Democracy is not just a game of elders)</strong> का मतलब केवल चुनाव सरकार के गठन या शासन से नहीं है लोकतंत्र की परिभाषा इससे व्यापक है जिसमें राज्य समाज और परिवार सहित हर प्रकार के समूह पर सामूहिक निर्णय का सिद्धांत लागू होता है। केवल राज्य के स्तर पर लोकतंत्र के लागू होने से हम लोकतान्त्रिक नहीं हो जायेंगें इसे सामाज के अन्य संगठनों पर लागू करना भी उतना ही जरूरी है। इस सम्बन्ध में डॉ भीमराव अंबेडकर ने भी चेताया था कि भारत सिर्फ राजनीतिक लोकतंत्र न रहे बल्कि यह सामाजिक लोकतंत्र का भी विकास करे। सहभागिता लोकतंत्र का मूल तत्त्व है लेकिन हमारे यहां इसे मतदान तक ही सीमित कर दिया गया है, चुनाव के दौरान हम अपने प्रतिनिधियों को चुनते तो हैं लेकिन इसके बाद अपना नियंत्रण खो देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे यहां चुनाव और मतदान का आधार भी लोगों के वास्तविक जीवन से जुड़े मुद्दे नहीं होते हैं बल्कि यहां मुख्य रूप से ऐसे भावनात्मक और प्रतिगामी मुद्दे हावी होते हैं जिनका लोकतान्त्रिक मूल्यों से कोई मेल नहीं होता अलबत्ता कई मामलों में तो ये न्याय समानता और बंधुत्व जैसे हमारे संविधान के बुनियादी मूल्यों की धजियां उड़ाते दिखाई पड़ते हैं। शायद लोकतंत्र कि अपनी इसी समझ के कारण हम इसे बच्चों का खेल नहीं समझते हैं। भारतीय संविधान सभी बच्चों को कुछ खास अधिकार प्रदान करता है जिसके तहत बच्चों को सही ढंग से पालन पोषण आजादी इज्जत के साथ बराबरी अवसर व सुविधाएं पाने का अधिकार है। हालांकि 18 साल की उम्र से पहले वे वोट नहीं डाल सकते हैं लेकिन इससे एक नागरिक के तौर पर उनकी महत्वता कम नहीं हो जाती है हमारा संविधान बच्चों को वे सारे अधिकार भी देता है जो भारत का नागरिक होने के नाते किसी भी बालिग स्त्री पुरुष को दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक समाज के तौर पर हमारे बीच यह समझ जरूरी है कि हम बच्चों को भी एक ऐसी स्वंतंत्र इकाई के तौर पर स्वीकार करें जिनकी खुद सोच सकते हैं उनकी अपनी एक राय हो सकती है वे निर्णय भी ले सकते हैं और किसी भी विषय पर अपनी उम्र के हिसाब से उनका अपना स्वतंत्र मूल्यांकन भी हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कनवेंशन सीआरसी में भी बच्चे की सोच का सम्मान करने और उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देने की बात की गयी है। लेकिन दुर्भाग्य से हम बच्चों के सोचने विचारने और उनकी खुद को अभिव्यक्त करने कि उनकी क्षमता को लेकर हम जागरूक नहीं हैं इसके बदले हम इस बात पर यकीन करते हैं कि बच्चों में इतनी क्षमता नहीं होती है कि वे अपने बारे में सोच सकें या खुद की राय बना सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">हम चाहते हैं कि बच्चे हमारे द्वारा निर्धारित किये गये सांचे के अनुसार ढल जायें, परिवार और समाज में उनकी अभियक्ति को लेकर हम निरंकुश हैं और कभी कभी इससे असुरक्षित भी महसूस करते हैं। जबकि हकीकत ये है कि हर बच्चे का अपना एक खास व्यक्तित्व होता है और कई बार उनकी मौलिकता हमें एक नयी दिशा दे सकती है। यदि हम बच्चों के विचरों नजरिये और मैलिकता पर यकीन करेंगें तो इससे हमारी दुनिया ज्यादा बेहतर होगी। बच्चे को हमेशा से ही बड़ों का आदर करने कि सीख दी जाती है लेकिन इस सीख को रिवर्स करके बड़ों को इसे खुद पर भी लागू करने कि जरूरत है बड़ो को भी बच्चों के साथ उतने ही आदर सम्मानपूर्ण व्यवहार करना चाहिये जितना कि वे खुद के लिये बच्चों से उम्मीद करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बाल सहभागिता का अर्थ है बच्चों से सम्बंधित मसलों और निर्।ायों में बच्चों को शामिल करना यह एक प्रक्रिया है जिसमें बच्चों को जरूरी जानकारी देनाए उनके विचारों को अहमियत देना उन्हें इसे व्यक्त करने का मौका देनाए उनके विचारों को ध्यानपूर्वक सुननाए और उन्हें प्रभावित करने वाले निर्णयों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल करना है। दुर्भाग्य से हमारे समाज में बच्चों की सोच के लिये कोई मूल्य है इसलिये हमारे जैसे देशों में बाल सहभागिता को लेकर लोगों की सोच में बदलाव से करने की जरूरत है जिससे यह कवायद महज महज दिखावटी और कागजी बनकर ना रह जाये।</p>
<p style="text-align:justify;">हमें यह समझना होगा कि अगर बच्चों को मौका मिले तो वे खुद को अपनी पूरी स्वाभिकता और सरलता के साथ अभिव्यक्त करते हैं। उनकी यह मौलाकिता बहुमूल्य है जो हमारी इस दुनिया को और खूबसरत बना सकती है। बच्चे भले ही वोटर ना हों लेकिन वे इस मुल्क के वर्तमान बाशिंदे जरूर हैं उन्हें इसी नजरिये से देखने की जरूरत है। लोकतंत्र को लेकर हम बड़ों की समझ भले ही ही सीमित हो लेकिन वास्तव में इसका दायरा इतना व्यापक है कि इसमें इसमें परिवार स्कूल बच्चे और समाज के सभी संगठन शामिल है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>जावेद अनीस</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Dec 2018 08:27:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सादिक का खेल स्टेडियम बना नशेड़ियों का अड्डा</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस ने लोगों को नशेड़ियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई करने का दिया भरोसा फरीदकोट/सादिक (सच कहूँ न्यूज)। दिन प्रतिदिन नशों के कारण मर रही जवानी को बचाने के लिए पंजाब में ‘मरो न विरोध करो’ के अंतर्गत ‘चिट्टे के खिलाफ काला सप्ताह ’ मनाया जा रहा है व विभिन्न स्थानों पर जागरूक लोगों द्वारा नशों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/sadiks-game-stadium-station-make-from-drugs/article-4705"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/drugs.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">पुलिस ने लोगों को नशेड़ियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई<br />
करने का दिया भरोसा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>फरीदकोट/सादिक (सच कहूँ न्यूज)।</strong> दिन प्रतिदिन नशों के कारण मर रही जवानी को बचाने के लिए पंजाब में ‘मरो न विरोध करो’ के अंतर्गत ‘चिट्टे के खिलाफ काला सप्ताह ’ मनाया जा रहा है व विभिन्न स्थानों पर जागरूक लोगों द्वारा नशों प्रति जागरूक करने के लिए प्रति दिन नशों के खिलाफ रोष मार्च निकाले जा रहे हैं व नशे बेचने वालों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई करने को लेकर रैलियां की जा रही हैं,</p>
<p style="text-align:justify;">जिससे नशोें के बह रहे दरिया में बहती जा रही नौजवानी को बचाया जा सके परंतु नशेड़ी लोगों पर इसका कोई प्रभाव देखने को नहीं मिल रहा व रोजमर्रा की नशों के साथ मौतें होने की कमी नहीं आ रही, क्योंकि नशों के आदी लोगों ने अपना काम जारी रखा हुआ है और वह सार्वजनिक स्थानों को भी अपना निशाना बना रहे हैं व वहीं चोरी छिपे आकर अपना बुरी आदत पूरा करते हैं।</p>
<h2 style="text-align:center;">आमजन ने प्रशासन से की नशेड़ियों पर नकेल कसने की मांग</h2>
<p style="text-align:justify;">इसकी ताजा मिसाल सादिक में बने खेल स्टेडियम से मिलती है जहां नशा करने वाले लोग आकर अपना समय व्यतीत करते हैं और यहीं वह अपना नशों का बुरी आदत भी पूरा करते हैं। लोगों द्वारा बताने पर ‘सच-कहूँ संवाददाता’ द्वारा स्टेडियम का दौरा किया गया तो खेल स्टेडियम में बनी झोंपड़ी नीचे अनेकों ही नशे वाली गोलियों के खाली पत्ते, इंजैक्शन, खाली पैके टों के अलावा एसआर की डिब्ब्यिां भी पड़ीं मिलीं हैं जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि शराबी यहां बैठ कर नशा करते हैं। क्षेत्र के बुद्धिमान लोगों ने मांग की कि स्टेडियम में नशा करने वाले असामाजिक तत्वों पर नकेल कसी जाए।</p>
<h2 style="text-align:center;">सार्वजनिक स्थानों को नहीं बनने दिया जाएगा नशेड़ियों का अड्डा : थाना प्रमुख</h2>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी जब थाना सादिक के मुख्य अधिकारी इंस्पेक्टर इकबाल सिंह संधू के साथ बात की तो उन्होंने कहा कि लोगों द्वारा मुझे नशों के खिलाफ ज्ञापन सौंपकर मेरी जिम्मेदारी और बढ़ा दी गई है व यह अच्छी बात है कि यह मसला उनके ध्यान में लाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने इस पर तुंरत कार्रवाई करते अपने साथियों को सुबह-शाम स्टेडियम, स्कूलों के आसपास व अन्य सार्वजनिक स्थानों की गश्त करने के लिए सख़्त हिदायतें की व विश्वास दिलाया कि वह सार्वजनिक स्थानों को नशेड़ियों का अड्डा नहीं बनने देंगे और नशे बेचने वालों के खिलाफ सख्ती के साथ पेश आऐंगे।</p>
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                <pubDate>Sat, 07 Jul 2018 03:15:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली में 1500 रुपए के लिए खूनी खेल, परिवार पर हमला, एक की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के भारत नगर इलाके के बुनकर कॉलोनी निवासी एक परिवार के तीन सदस्यों पर 15 से 20 लोगों ने चाकुओं से हमला कर दिया।  जिसमें 35 वर्षीय दीपक की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि 1500 रुपये के लेन-देन के झगड़े के बीचबचाव करने पर आरोपियों ने इस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/killer-game-for-rs-1500-in-delhi-one-killed/article-3945"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/hamla-01.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के भारत नगर इलाके के बुनकर कॉलोनी निवासी एक परिवार के तीन सदस्यों पर 15 से 20 लोगों ने चाकुओं से हमला कर दिया।  जिसमें 35 वर्षीय दीपक की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि 1500 रुपये के लेन-देन के झगड़े के बीचबचाव करने पर आरोपियों ने इस खूनी वारदात को अंजाम दिया।  परिवार के जिन तीन सदस्यों पर हमला किया गया, उसमें दीपक, उसकी मां और पिता शामिल हैं।  यह घटना रविवार रात करीब 10 बजे वजीरपुर के जेजे कॉलोनी में हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, रोहित और रवि से विशाल अपने 1500 रुपये मांग रहा था. इस बीच लेन-देन को लेकर दोनों पक्षों में कहा सुनी हो गई और झगड़ा हो गया. जब इस घटना की जानकारी विशाल के चचेरे भाई दीपक (मृतक) को हुई, तो वो मौके पर पहुंचा और आरोपी रोहित व रवि को थप्पड़ मारकर झगड़ा शांत करा दिया. इसके बाद सभी अपने-अपने घर को लौट गए। पीड़ित परिवार को लगा कि अब मामला शांत हो गया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।  पीड़ित परिवार ने इसकी कल्पना भी नहीं की थी कि महज 1500 रुपये के झगड़े में बीचबचाव करना इतना महंगा पड़ेगा कि कत्ल तक हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित परिवार ने बताया कि विवाद शांत होने के थोड़ी देर बाद आरोपी रोहित व रवि समेत 15 से 20 लोग बाइकों पर सवार होकर आए और चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इसके बाद सभी आरोपी फरार हो गए।  आरोपी अपनी दो बाइकों को भी घटनास्थल पर छोड़ गए। इस हमले में दीपक की मौत हो गई और उसके मां व पिता गंभीर रूप से घायल हो गए । दोनों को दीपचंद बंधु अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के बाद इलाके में पुलिस की तैनाती की गई है।  साथ ही पुलिस ने मामला दर्जकर फरार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। आरोपी पीड़ित के पड़ोसी हैं। पीड़ित परिवार ने मामले में पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। मृतक के छोटे चचेरे भाई विशाल ने कहा, ‘अगर पुलिस वक्त पर आ जाती, तो मेरे भाई की जान नहीं जाती। पीसीआर को फोन करके झगड़े की जानकारी दी गई थी, लेकिन करीब आधे घंटे तक पुलिस मौका-ए-वारदात पर नहीं पहुंची।  लिहाजा आरोपियों ने दीपक का कत्ल कर दिया और उसके माता-पिता को कई चाकू मारे।  फिलहाल मृतक के माता-पिता अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jun 2018 21:06:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खेल में खेल की भावना व ईमानदारी बेहद महत्वपूर्ण</title>
                                    <description><![CDATA[आस्ट्रेलिया के क्रिकेट खिलाड़ी स्टीवन स्मिथ, डेविड वार्नर व प्रशिक्षक डेविड लेहमैन ने गेंद के साथ छेड़छाड़ के मामले में जिस प्रकार रो-रोकर माफी मांगी है और उम्र भर का पछतावा रहने का जिक्र किया है उससे उम्मीद की किरण दिखाई पड़ती है कि खेल भावना अभी भी जिंदा है। विश्व भर में लोकप्रिय इन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/the-games-spirit-and-integrity-are-very-important/article-3686"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/sports-mab.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आस्ट्रेलिया के क्रिकेट खिलाड़ी स्टीवन स्मिथ, डेविड वार्नर व प्रशिक्षक डेविड लेहमैन ने गेंद के साथ छेड़छाड़ के मामले में जिस प्रकार रो-रोकर माफी मांगी है और उम्र भर का पछतावा रहने का जिक्र किया है उससे उम्मीद की किरण दिखाई पड़ती है कि खेल भावना अभी भी जिंदा है। विश्व भर में लोकप्रिय इन खिलाड़ियों ने केवल ‘सोरी’ कहकर ही गलती नहीं मानी बल्कि खेल में भारी भूल गलती करने का दर्द भी छलका।</p>
<p style="text-align:justify;">खेलों में विवादों का इतिहास पुराना है लेकिन अधिकतर मामलों में खिलाड़ी न तो अपनी गलती मानते हैं न ही अपने पर लगाए गए आरोपों को मानते है, उलटा किसी साजिश का हिस्सा बताकर कई-कई वर्षों तक मामले को लटकाए रखते हैं, जिससे खेल संस्थाओं का जहां समय खराब होता है वहीं कई प्रकार के भ्रम बने रहते हैं। यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं कि खेलों का व्यापारीकरण हो चुका है। पैसे के लिए खिलाड़ी गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं। क्रिकेट में मैच फिक्सिंग लंबे समय तक विवादों का कारण बनी रही। अंडर वर्ल्ड के हाथों की कठपुतली बनकर कई खिलाड़ियों ने खेल को बदनाम किया। इन परिस्थितियों में आॅस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों ने विनम्रता से गलती को स्वीकार किया व खेल प्रति गैर-जिम्मेवार व्यवहार के लिए खुद को जिम्मेवार ठहराया।</p>
<p style="text-align:justify;">भले ही यह खिलाड़ी सजा के हकदार हैं लेकिन सामाजिक तौर पर उन्होंने अपना पक्ष मजबूत कर लिया है। भारतीय खिलाड़ी गौतम गंभीर ने स्टीवन स्मिथ के खिलाफ पाबंदी को जरूरत से ज्यादा सख्त करार दिया है। गंभीर स्मिथ को भ्रष्ट कहने के हक में नहीं हैं। दूसरी तरफ आॅस्ट्रेलियन क्रिकेट बोर्ड की कार्रवाई को भी गलत नहीं ठहराया। खेल को किसी भी उद्देश्य से नुक्सान पहुंचाना खेल भावना को ठेस पहुंचाना है। बोर्ड ने निष्पक्षता व नियमों को कायम रखा व किसी भी प्रकार का कोई समझौता नहीं किया। आॅस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड और इन खिलाड़ियों ने जिस प्रकार से प्रतिक्रिया व्यक्त की है, वह विश्वसनीय है। इस घटनाक्रम से प्रतीत होता है कि खेल को सच्चाई व ईमानदारी के साथ ही खेला जा सकता है। इन मूल्यों से ही खेल का सम्मान है जिससे दर्शकों व खेल प्रेमियों का विश्वास रोमांच बना रह सकता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Mar 2018 01:33:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आर्य स्कूल के छात्र मनदीप का एथेलेटिक्स में चयन</title>
                                    <description><![CDATA[विशाखापट्टनम में होने वाली राष्ट्रीय एथेलेटिक्स प्रतियोगिता में लेगा भाग नरवाना (सच कहूँ न्यूज)। एथेलेटिक्स फेडरेशन आॅफ इंडिया द्वारा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं हेतु खिलाड़ियों के चयन के लिए ट्रायल हुआ। जिसमें आर्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के 11वीं कक्षा के छात्र मनदीप का राष्ट्रीय स्तर पर एथेलेटिक्स में चयन हुआ है। विद्यालय पीटीआई प्रशिक्षक विनोद […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/mandeeps-selection-in-athletics/article-3337"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-09/26nrw1.jpg" alt=""></a><br /><h3>विशाखापट्टनम में होने वाली राष्ट्रीय एथेलेटिक्स प्रतियोगिता में लेगा भाग</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नरवाना (सच कहूँ न्यूज)।</strong> एथेलेटिक्स फेडरेशन आॅफ इंडिया द्वारा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं हेतु खिलाड़ियों के चयन के लिए ट्रायल हुआ। जिसमें आर्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के 11वीं कक्षा के छात्र मनदीप का राष्ट्रीय स्तर पर एथेलेटिक्स में चयन हुआ है। विद्यालय पीटीआई प्रशिक्षक विनोद कुमार ने बताया कि इस ट्रायल में जिन भी खिलाड़ियों का चयन हुआ है वो सभी खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की एथेलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लेंगे। छात्र मनदीप ने1000 मीटर रेस में भाग लिया। उन्होंने बताया कि छात्र मनदीप 17 से 19 नवम्बर 2017 तक विशाखापट्टनम में होने वाली राष्ट्रीय एथेलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लेगा। विद्यालय प्राचार्य संजय चौधरी व प्रबंधक विवेक आर्य ने कहा कि आर्य स्कूल के छात्र शिक्षा के साथ-साथ खेल के क्षेत्र में भी सबसे आगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि छात्र मनदीप एक ऐसे परिवार से संबंध रखता है जोकि आर्थिक रूप से सक्षम नही है। छात्र मनदीप ने आर्थिक रूप से सक्षम न होते हुए भी यह कर दिखाया है कि अगर मन में कुछ करने का जज्बा हो तो इंसान के लिए कोई भी लक्ष्य प्राप्त करना मुश्किल नही होता। मनदीप ने विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्रीय स्तर पर चयनित होकर इस कथन को सच कर दिखाया है कि लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती,कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। छात्र की इस उपलब्धि पर विद्यालय प्रबंधक समिति के प्रधान अनिल आर्य, प्रबंधक विवेक आर्य, कोषाध्यक्ष अमोद कुमार, आर्य समाज के प्रधान इंद्रजीत आर्य, पूर्व प्रधान नरेश चंद, मंत्री विजय आर्य और कोषाध्यक्ष अश्विनी आर्य ने छात्र व अभिभावकों को बधाई दी। छात्र की इस उपलब्धि से पूरे विद्यालय में खुशी का माहौल है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Sep 2017 07:59:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रामकृष्णन गांधी और सत्यनारायण को मिलेगा द्रोणाचार्य अवार्ड</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। एथलेटिक्स कोच दिवंगत रामकृष्णन गांधी और रियो परालम्पिक स्वर्णपदक विजेता टी मेरियाप्पन के कोच सत्यनारायण के नाम की अनुशंसा इस साल द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए की गई है। गांधी ने गुरमीत सिंह को कोचिंग दी थी जिन्होंने पिछले साल जापान के नाओमी में एशियाई रेसवाकिंग चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। बलजिंदर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/ramakrishnan-gandhi-and-satyanarayana-will-get-dronacharya-award/article-2926"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/award.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> एथलेटिक्स कोच दिवंगत रामकृष्णन गांधी और रियो परालम्पिक स्वर्णपदक विजेता टी मेरियाप्पन के कोच सत्यनारायण के नाम की अनुशंसा इस साल द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए की गई है। गांधी ने गुरमीत सिंह को कोचिंग दी थी जिन्होंने पिछले साल जापान के नाओमी में एशियाई रेसवाकिंग चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। बलजिंदर सिंह ने भी नाओमी में 20 किमी वाक में कांस्य पदक जीता था। उन्होंने भी गांधी के मार्गदर्शन में अभ्यास किया था।</p>
<h2>द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए तीसरा नाम कबड्डी कोच हीरानंद कटारिया का</h2>
<p style="text-align:justify;">गांधी एक दशक तक भारतीय एथलेटिक्स के कोच रहे जिनका 55 बरस की उम्र में पिछले साल निधन हो गया था। द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए तीसरा नाम कबड्डी कोच हीरानंद कटारिया का है। साक्षी मलिक के कोच कुलदीप मलिक और मनदीप सिंह के नाम पर भी विचार किया था लेकिन सहमति नहीं बनने से उनका नाम काट दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong> द्रोणाचार्य पुरस्कार :</strong> दिवंगत रामकृष्णन गांधी (एथलेटिक्स), हीरानंद कटारिया (कबड्डी), सत्यनारायण (पेरा एथलीट)।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार :</strong> जीएसएसवी प्रसाद (बैडमिंटन), बृजभूषण मोहंती (मुक्केबाजी), पी ए रफेल (हाकी), संजय चक्रवर्ती (निशानेबाजी), रोशन लाल (कुश्ती)।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ध्यानचंद पुरस्कार :</strong> भूपेंदर सिंह (एथलेटिक्स), सैयद शाहिद हकीम (फुटबाल), सुमराइ तेते (हाकी)। ये नाम समिति ने खेल मंत्रालय को भेजे हैं जो इस पर अंंतिम फैसला लेगा। द्रोणाचार्य समिति की बैठक में अध्यक्ष गोपीचंद के अलावा पूर्व हॉकी कोच एमके कौशिक, कुश्ती कोच महासिंह राव, एथलेटिक्स कोच वीरेंद्र पूनिया और गोपाल सैनी तथा वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र सजवान शामिल हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले अर्जुन अवार्ड समिति ने पैरालंपियन देवेंद्र झाझरिया और पूर्व हॉकी कप्तान सरदारा सिंह के नामों की देश के सर्वाेच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न और 17 अन्य खिलाड़ियों के नामों की अर्जुन पुरस्कार के लिए सिफारिश की थी। ये पुरस्कार 29 अगस्त को खेल दिवस के दिन राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति प्रदान करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Sat, 05 Aug 2017 09:49:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खूनी खेल ‘ब्लू व्हेल’ की गिरफ्त में भारत का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[हम आजतक सुनते आये हैं कि खेलों से स्वस्थ मनोरंजन व शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है। वस्तुत: खेल खेलने से मन:स्थिति में सकारात्मक सुधार, उत्साह का प्रफुस्टन एवं परस्पर भाईचारा और प्रेम के घनत्व में वृद्धि होती है, लेकिन, आधुनिक तकनीकी दौर में कम होते मैदानों के साथ मैदान में खेले जाने वाले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/indias-future-in-the-wake-of-blue-whale/article-2863"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/blue-fish.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हम आजतक सुनते आये हैं कि खेलों से स्वस्थ मनोरंजन व शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है। वस्तुत: खेल खेलने से मन:स्थिति में सकारात्मक सुधार, उत्साह का प्रफुस्टन एवं परस्पर भाईचारा और प्रेम के घनत्व में वृद्धि होती है, लेकिन, आधुनिक तकनीकी दौर में कम होते मैदानों के साथ मैदान में खेले जाने वाले वे खेल जो शारीरिक व्यायाम के साथ मानसिक एवं स्मरण शक्ति को बढ़ाते थे, उनका बीते दो दशक से महत्व कम होता जा रहा है। इसका एक कारण इंटरनेट के गेम्स का बढ़ता दायरा भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इंटरनेट पर नाना प्रकार के गेम्स ने बाल एवं किशोर पीढ़ी को मैदानों के खेलों से अलगावित करने का प्रयास किया है। आज घंटों-घंटों तक एक बच्चा लेपटॉप, कम्प्यूटर व स्मार्ट फोन में इंटरनेट से डाउनलोड किये गये गेम्स खेलने में इतना मशगूल रहता है कि उसे खाने-पीने का ख्याल तक नहीं रहता। यह कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगा कि आज इंटरनेट के इन आकर्षक और रोचक गेम्स ने बड़े-बुजुर्गों का भी काफी हद तक ध्यान आकर्षित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">बेशक, इंटरनेट के बढ़ते उपयोग व तकनीकी विकास क्रम में उन्नति के साथ ऐसा होना कोई नई बात नहीं है और बच्चे इंटरनेट पर गेम्स खेलें, इससे किसी को कोई गुरेज भी नहीं है, लेकिन कोई गेम्स बाल व किशोर पीढ़ी के जान पर बन आये, तो यह निश्चित ही सोचने पर मजबूर कर देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में बीते सोमवार की सुबह मुंबई में एक दु:खद वाक्या सामने आया, जहां 14 वर्षीय मनप्रीत ने इस गेम की लत में आत्महत्या कर ली। यह गेम ज्यादातर अवसाद से अकेले जूझ रहे बच्चों का निशाना बना रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया ऐसी जगह है, जहां हर प्रकार के विचारों का पालन-पोषण किया जाता है। यहां जितनी सकारात्मकता होती है, उससे कहीं ज्यादा नकारात्मकता पायी जाती है। अच्छी बातें हमें इतनी जल्दी आकर्षित नहीं करती, जबकि नकारात्मक बातों का प्रभाव बहुत जल्दी फैलता है। चाहे वो घृणा फैलाते लेख हों, पोर्न साइट्स की उपलब्धता हो, नशे को महिमामण्डित कर किया जाने वाला प्रचार हो या और कुछ हो। जब भी ऐसा कुछ कहीं लिखा जाता है, सबसे ज्यादा इससे प्रभावित होने वाला तबका किशोरावस्था में प्रवेश करते बच्चों का होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर रूस में एक मनोविज्ञान के छात्र ने 2013 में एक अनलाइन गेम बनाया ‘ब्लू व्हेल’। यह गेम 50 दिनों की अवधि में पूरा किया जाता है। इसमें प्रतिदिन तरह-तरह की चुनौतियां खिलाड़ी को दी जाती हैं, जिन्हें पूरा करने के बाद प्रमाण स्वरूप उस चुनौती का वीडियो या फोटो ग्रुप में भेजा जाता है। हर चुनौती के पूरा होने पर हाथ पर एक कट लगाना होता है,</p>
<p style="text-align:justify;">जो 50 दिन पूरे होने पर व्हेल की आकृति बनाते हैं। इस खेल की आखिरी चुनौती आत्महत्या है। यह गेम बच्चों तक सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ ग्रुप्स के द्वारा पहुंचता है। दुनियाभर में अब तक 200-300 बच्चे इस गेम की वजह से आत्महत्या कर चुके हैं। रूस, अमेरिका जैसे देशों में इसे बैन कर दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सामान्यत: किशोरावस्था में दिमाग और शरीर विभिन्न प्रकार के परिवर्तनों से जूझ रहा होता है, हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं, पढ़ाई-लिखाई का दबाव चरम पर होता है, ऐसे में सही दिशा-निर्देश न मिले, तो भटकाव हो जाना कोई बड़ी बात नहीं है। इस समय दिमाग इतना परिपक्व नहीं होता कि अपना भला-बुरा निर्धारित कर सके, किन्तु बड़े होने का बोध खुद को सही प्रमाणित करने पर तुला रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे बचने का सिर्फ और सिर्फ एक ही तरीका है, अभिभावकों का बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार और आपसी संवाद करे ताकि बच्चे किसी भी प्रकार की बात घर पर बताते वक्त हिचके नहीं। बच्चों के व्यवहार में किसी भी प्रकार का बदलाव होने पर उसे अनदेखा न करें। उनमें इतना विश्वास भरें कि उन्हें आसानी से गुमराह न किया जा सके। अंतत: इस दिशा में सरकार को त्वरित कदम उठाने की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-देवेन्द्रराज सुथार</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2017 23:53:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डोपिंग से खत्म हो जाएगी एथलेटिक्स: बोल्ट</title>
                                    <description><![CDATA[लंदन (एजेंसी)। आठ बार के ओलंपिक चैंपियन फर्राटा धावक यूसेन बोल्ट ने लंदन में शुरु होने जा रही विश्व चैंपियनशिप से पूर्व एथलीटों को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि डोपिंग जारी रही तो ट्रैक एंड फील्ड खेल की ही समाप्ति हो जाएगी। डोपिंग के सख्त विरोधी रहे बोल्ट दुनिया के महान एथलीट हैं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/athletics-end-from-doping-bolt/article-2807"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/bolt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लंदन (एजेंसी)।</strong> आठ बार के ओलंपिक चैंपियन फर्राटा धावक यूसेन बोल्ट ने लंदन में शुरु होने जा रही विश्व चैंपियनशिप से पूर्व एथलीटों को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि डोपिंग जारी रही तो ट्रैक एंड फील्ड खेल की ही समाप्ति हो जाएगी। डोपिंग के सख्त विरोधी रहे बोल्ट दुनिया के महान एथलीट हैं जो लंदन में अपने करियर की आखिरी रेस के लिए उतरेंगे। जमैकन धावक लंदन में 100 मीटर और चार गुणा 100 मीटर रेस में हिस्सा लेंगे। गत वर्ष रियो ओलंपिक में स्वर्ण पदकों का ‘ट्रिपल ट्रिपल’ पूरा करने के बाद उन्होंने ओलंपिक को भी अलविदा कह दिया था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">आखिरी रेस से पहले एक बार फिर डोपिंग को लेकर उठाए सवाल</h2>
<p style="text-align:justify;">बोल्ट ने अपनी आखिरी रेस से पहले एक बार फिर डोपिंग को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने रुस में डोपिंग के व्यापक मामले सामने आने का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे नहीं लगता कि इस खेल में इससे बुरा कुछ हो सकता है। डोपिंग के इन मामलों ने खेल को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है। जमैकन खिलाड़ी ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि खिलाड़ी इस बात को समझेंगे कि वे क्या कर रहे हैं और यदि वे डोपिंग को नहीं रोकेंगे तो इस खेल का ही अंत हो जाएगा। डोप समस्या खेल के लिए किसी लिहाज से अच्छी नहीं है और उम्मीद है कि इसका जल्द कोई हल निकलेगा। डोपिंग से खेल को नुकसान हो रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षाें में इसे रोकने के लिए काफी काम हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <link>https://www.sachkahoon.com/sports/athletics-end-from-doping-bolt/article-2807</link>
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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2017 09:17:58 +0530</pubDate>
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                <title>बैडमिंटन में बुलंदियां</title>
                                    <description><![CDATA[बैडमिंटन की दुनियां में भारत के ताज में एक और हीरा जड़ा गया है। श्रीकांत किदांबी ने सात दिन में दो सुपर सीरीज जीत कर शानदार सफलता प्राप्त की है। आस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज जीत कर वह साइना के बाद सबसे अधिक मजबूत भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने चीन के ओलंपिक चैंपियन को 22-20,21-16 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/srikanth-kidambi-wins-in-super-series/article-1660"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/srikant.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बैडमिंटन की दुनियां में भारत के ताज में एक और हीरा जड़ा गया है। श्रीकांत किदांबी ने सात दिन में दो सुपर सीरीज जीत कर शानदार सफलता प्राप्त की है। आस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज जीत कर वह साइना के बाद सबसे अधिक मजबूत भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने चीन के ओलंपिक चैंपियन को 22-20,21-16 से माद दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">गत सप्ताह उन्होंने इंडोनेशियाई सुपर सीरीज खिताब अपने नाम किया था। उन्होंने वर्ष 2014 में चाइना ओपनव 2015 में इंडिया ओपन सीरीज जीती थी। साइना नेहवाल के नाम आठ सुपर सीरीज खिताब हैं। बैडमिंटन व टैनिस में भारत देश ने बुलंदियों को छूहा है। इससे पहले पीवी सिंधु भी स्पेन की ओलंपिक चैंपियन कैरोलीना मारिन को धूल चटा चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बेशक देश में क्रिकेट व हॉकी का जलवा अधिक है, किन्तु बैडमिंटन में हाल ही में हुई जीतों ने साबित कर दिया है कि यदि अन्य खेलों की तरफ भी पूरा ध्यान दिया जाए तो भारत के पास अच्छे खिलाड़ियों की कमी नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में बढ़िया खेल कल्चर पैदा किए जाने की जरूरत है। असंख्य खिलाड़ी हैं, जो सुविधाओं, मार्ग दर्शन के अभाव, आवश्यक पहुंच व पक्षपाती प्रशासनिक ढांचे कारण अपने हुनर को साबित करने से वंचित रह जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गांव स्तर पर प्रबंध तो दूर अभी तक बड़े-छोटे शहरों में भी उचित प्रबंध नहीं हो सके हैं। ओलंपिक में 2-4 मैडल जीतना 121 करोड़ भारतियों के लिए निराशा वाली बात है। अमेरिका, चीन, रूस सहित यूरपी देशों ने एक दो खेलों की तरफ ध्यान देने की बजाए सभी खेलों पर जोर दिया है, जिस कारण ओलंपिक में उनके मैडलों की संख्या सूची में सबसे उपर होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे देश में कल्चर इसके विपरीत है। यदि कोई एक खेल में मैडल जीतता है तो बच्चा-बच्चा उस खेल में लग जाता है। कंपनिया अपने विज्ञापनों के लिए जिस खिलाड़ी को अपना ब्रांड अंबेस्डर बनाती हैं तो पूरा देश उस खिलाड़ी का दीवाना हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अच्छा हो यदि सरकारें व खेल संस्थाएं सभी खेलों को तरजीह दें, ताकि क्रिकेट, हॉकी जैसा सम्मान बैडमिंटन, टैनिस अन्य खेल को भी मिल सके। अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश का नाम ऊंचा करने वाले व्यक्ति का जिक्र सियासी मंचों पर भी करने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में श्रीकांत की सराहना करके पूरे देश का ध्यान इस बैडमिंटन खिलाडी की तरफ खींचा है। सभी खेलों को मान-सम्मान व आर्थिक सहायता उन्नति की तरफ लेकर जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Jun 2017 23:54:28 +0530</pubDate>
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