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                <title>देश का ढांचा मजबूत, चुनौतियों से निपटने में सक्षम: अरुण जेटली</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देश का ढांचा मजबूत है और सरकार चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं। जेटली एक पत्रकारवार्ता के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। जेटली ने कहा कि अर्थव्?यवस्?था की स्थिति को लेकर पीएम के साथ कई बैठकें हुर्इं हैं। अतंरराष्?ट्रीय संस्?थाओं ने लगातार भारत की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-structure-of-the-country-is-strong/article-3445"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/jetli.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देश का ढांचा मजबूत है और सरकार चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं। जेटली एक पत्रकारवार्ता के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। जेटली ने कहा कि अर्थव्?यवस्?था की स्थिति को लेकर पीएम के साथ कई बैठकें हुर्इं हैं। अतंरराष्?ट्रीय संस्?थाओं ने लगातार भारत की वृद्धि दर के अनुमान में कटौती की है। आईएमएफ और विश्?व बैंक समेत कई संस्?थाओं ने घटती वृद्धि? दर के लिए जीएसटी और नोटबंदी को जिम्?मेदार ठहराया है। जेटली ने कहा कि जहां तेजी से जरूरत होगी, वहां तेजी से काम होगा। तीन साल में महंगाई में कमी आई है। तीन साल में देश का विकास तेजी से हुआ। वित्?त मंत्री ने कहा कि पिछले तीन साल के दौरान जीडीपी की औसत दर 7.5 फीसदी रही। उन्?होंने कहा कि वैश्विक स्?तर पर भारत में विश्?वास बढ़ा है। अर्थव्?यवस्?था का बुनियादी ढांचा काफी मजबूत है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मोदी सरकार ने रखा तीन साल का रिपोर्ट कार्ड</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>विदेशी पूंजी निवेश बढ़ कर 400 बिलियन डॉलर हुआ।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जीएसटी सबसे बड़ा सुधार। इसके अलावा नोटबंदी, काले धन पर नकेल भी कसने में रहे कामयाब।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जीएसटी से भ्रष्?टाचार में कमी आई है।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Oct 2017 06:20:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>विवादों में घिरा खेल ढांचा</title>
                                    <description><![CDATA[ओलंपिक के क्षेत्र में देश पहले ही पस्त हालत में है, जिसे सुधारने के लिए भारत के खेल संघों का सुधार किया जाना आवश्यक है। लेकिन खेल संघों में अभी भी व्यवस्था भ्रष्टाचार की चक्की में पिस रही है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का अभी विवाद थमा नहीं है कि भारतीय ओलंपिक संघ में भ्रष्टाचार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/controversy-surrounded-the-game-structure/article-683"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/olympic.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ओलंपिक के क्षेत्र में देश पहले ही पस्त हालत में है, जिसे सुधारने के लिए भारत के खेल संघों का सुधार किया जाना आवश्यक है। लेकिन खेल संघों में अभी भी व्यवस्था भ्रष्टाचार की चक्की में पिस रही है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का अभी विवाद थमा नहीं है कि भारतीय ओलंपिक संघ में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे सुरेश कलमाड़ी व अभय चौटाला को आजीवन अध्यक्ष के पद दे दिए गए। हालांकि कलमाड़ी ने यह पद स्वीकार करने से इन्कार कर दिया, लेकिन अभय चौटाला अभी भी पद रखने के लिए कायम हैं। यहां यह प्रश्न बेहद महत्वपूर्ण है कि भारतीय ओलंपिक संघ के निर्वाचन मंडल के पास क्या कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था कि उन्हें आजीवन अध्यक्ष पद के लिए सुरेश कलमाड़ी व अभय चौटाला को चुनना पड़ा? क्या अभय चौटाला की नियुक्ति इसलिए की गई कि उनके पहले के कार्यकाल के दौरान अंतर्राष्टÑीय ओलंपिक संघ ने भारतीय ओलंपिक संघ को प्रतिबंधित कर दिया था। हाल ही में आए एक आमजन सर्वे में पाया गया है कि 92 फीसदी लोग नहीं चाहते कि खेल संघों की कमान राजनेताओं के हाथ में रहे। इससे भी बढ़कर 86 फीसदी लोगों ने तो मांग की है कि इन खेल संघों का संचालन देश के नामचीन पूर्व खिलाड़ी ही करें। भारतीय खेल मंत्रालय ने भारतीय ओलंपिक संघ को नोटिस जारी कर जानना चाहा है कि भ्रष्टता के आरोपों का सामना कर रहे कलमाड़ी व चौटाला की नियुक्ति किस बिनाह पर की गई है? हालांकि भारतीय ओलंपिक संघ एक स्वायत संस्था है। उसमें सरकार का दखल बेहद नपा-तुला हो सकता है, लेकिन सरकार के नोटिस से यह अवश्य समझा जाना चाहिए कि देश में खेलों की एक सर्वोच्चय संस्था में मनमानियां उसे सरकार से ऊपर नहीं बना सकतीं। इससे पहले कि भारतीय ओलंपिक संघ की मनमानियों पर उच्चतम न्यायालय कोई आदेश करे, ओलंपिक संघ को चाहिए कि वह अपनी रीति-नीति में स्वयं शुचिता लाए। खेल संघ खेलों व खिलाड़ियों के विकास के लिए गठित किए गए हैं, अत: इनमें राजनीति व नाहक मान-सम्मान की गैर क्रीड़ात्मक गतिविधियां न ही हों। खेल मंत्रालय को चाहिए कि वह केबीनेट से या संसद से खेल संघों पर एक निगरानी तंत्र या नियामक की नियुक्ति करवाए, ताकि खेल प्रेमियों को अपने हितों की रक्षा के लिए बार -बार न्यायालय की शरण में न जाना पड़े। ऐसे नियामक से जहां खेल संघों से भ्रष्टाचार का सफाया होगा, वहीं सरकार का इन पर नियंत्रण भी होगा।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/controversy-surrounded-the-game-structure/article-683</link>
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                <pubDate>Fri, 30 Dec 2016 05:15:32 +0530</pubDate>
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