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                <title>Financial Crisis - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Financial Crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>रोजगार सृजन और मांग दोनों बढ़ाने होंगे</title>
                                    <description><![CDATA[नए वित्तीय वर्ष में प्रवेश करते समय देश की आर्थिक स्थिति संतोषजनक नहीं है। मुद्रा स्फीति विशेषकर खाद्यान्न महंगाई नियंत्रण में नहीं है जिसका सीधा प्रभाव समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर पड़ता है। देश में बेमौसमी बरसात देश के कुछ भागों में कम वर्षा और हीट वेव की भविष्यवाणी के चलते देश […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/education-employement/both-job-creation-and-demand-have-to-be-increased/article-46157"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/economic.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नए वित्तीय वर्ष में प्रवेश करते समय देश की आर्थिक स्थिति संतोषजनक नहीं है। मुद्रा स्फीति विशेषकर खाद्यान्न महंगाई नियंत्रण में नहीं है जिसका सीधा प्रभाव समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर पड़ता है। देश में बेमौसमी बरसात देश के कुछ भागों में कम वर्षा और हीट वेव की भविष्यवाणी के चलते देश की कठिनाइयां और बढ़ने वाली हैं। वैश्विक आर्थिक स्थिति ने भी भारतीय आर्थिक परिदृश्य पर बुरा प्रभाव डाला है। अमरीकी मौसम एजेंसियों ने लगातार तीसरे माह इस बात की आशंका व्यक्त की है कि इस बार गर्मियों में अल नीनो प्रभाव पैदा हो सकता है। प्रशान्त महासागर में स्थितियों के बारे में नेशनल ओसिएनिक एंड एटमोसफेरिक एडमिनिस्टेशन से जुड़ी अमरीकी एजेंसियों ने 11 मार्च को जारी अपनी रिपोर्ट में अपनी पिछले दो माह की भविष्यवाणियों को दोहराया है जिसमें कहा गया कि इस वर्ष जुलाई-अगस्त में अल नीनो प्रभाव पैदा हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अल नीनो प्रभाव के पैदा होने का संकेत भारतीय मौसम विज्ञान के अधिकारियों सहित विशेषज्ञों ने भी व्यक्त किया है। उनका कहना है कि अगले माह इस बारे में स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी जब प्रशान्त क्षेत्र की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाएगा। इस वर्ष अल नीनो प्रभाव पैदा होने की संभावना से देश में मानसून के मौसम में बरसात की स्थिति अच्छी रहने की संभावना नहीं है जिसके चलते खरीफ फसलों के उत्पादन पर प्रभाव पड़ेगा। जून-सितंबर मौसम के दौरान वर्षा की मात्रा पर कई अन्य कारकों का भी प्रभाव पड़ेगा जैसा कि हिन्द महासागर में नई स्थितियां, यूरेशिया में बर्फ, मौसम के बीच में उतार चढ़ाव आदि।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="क्या आप भी रिमोट से करते हैं टीवी बंद? तो हो जाए सावधान" href="http://10.0.0.122:1245/do-you-also-switch-off-the-tv-with-the-remote-so-be-careful/">क्या आप भी रिमोट से करते हैं टीवी बंद? तो हो जाए सावधान</a></p>
<p style="text-align:justify;">क्लाइमेट ट्रेंड की रिपोर्ट के अनुसार मौसम की वर्तमन स्थिति धरती के तापमान में वृद्धि का परिणाम है। धरती के औसत तापमान में निरंतर वृद्धि से पश्चिमी विक्षोभ, अल नीनो सदर्न ओसिलेशन जैस स्थितियां देखने को मिल रही हैं। पश्मिी विक्षोभ का प्रभाव सामान्यता देश के पूर्वी भाग की ओर होता है। इसी तरह यदि बंगाल की खाड़ी में कोई स्थिति पैदा होती है और दोनों का टकराव पैदा होता है तो इसके चलते उत्तर-पूर्वी भारत में अच्छी बरसात होती है। किंतु मौसम विज्ञानियों का कहना है कि उत्तर बंगाल में पश्चिमी विक्षोभ का पर्याप्त प्रवाह देखने को नहीं मिल रहा है। स्काइमेट वैदर के अनुसार धरती के तापमान में वृद्धि के कारण पश्चिमी विक्षोभ हल्का होता जा रहा है और आर्कटिक हीट वेव बढ़ती जा रही है। जिसके चलते यह अधिक उंचाई वाले स्थानों की ओर बढ़ रहा है और इसका भारत के मौसम पर प्रभाव नहीं पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि जलवायु परिवर्तन एक वास्तविकता बन गई है क्योंकि ठंडे क्षेत्र अब उतने ठंडे नहीं रह गए हैं तथा उत्तरी, मध्य, पश्चिमी और यहां तक कि पूर्वी भागों में भी गर्मी का मौसम बढ़ गया है और वहां तेजी से गर्मी पड़ रही है। इस वर्ष गर्मियों के मौसम में अत्यधिक गर्मी पड़ने और कम बरसात होने की संभावना है जिसके पिछले पांच वर्षों के औसत से कम रहने की संभावना है। अर्थव्यवस्था उच्च खाद्यान्न महंगाई का सामना कर रही है और प्रतिकूल जलवायु दशाओं के कारण भारत के कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। एक अन्य प्रवृति यह देखने को मिल रही है कि सरकारी व्यय में थोड़ी वृद्धि हुई है किंतु यह अभी भी महामारी पूर्व स्थिति में नहीं पहुंचा है। पूंजीगत व्यय भी उस स्तर तक नहीं पहुंचा है जिसके चलते रोजगार के अवसरों में वृद्धि की अतिरिक्त मांग का सृजन होता किंतु अच्छे मानसून की संभावना के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में मांग में वृद्धि की संभावना भी नहीं दिखाई दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जीएसटी संग्रहण बैंक ऋण, दुपहिया वाहनों की बिक्री आदि की सामान्य वृिद्ध दर से भी प्रतिकूल संकेत मिल रहे हैं। आर्थिक पुररुद्धार भी समान नहीं है क्योंकि महामारी का प्रभाव घरों और व्यवसायियों पर समान नहीं पड़ा था। वैश्विक परिदृश्य से भारतीय अर्थव्यवस्था घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है और इसको नजरंदाज नहीं किया जा सकता है। विकसित देशों में लंबे समय बाद मुद्रा स्फीति बढ़ रही है और भारत भी इससे अछूता नहीं है किंतु इस वर्ष अमरीका में ब्याज दरों में 500 मूलांकों की वृद्धि प्रमुख केन्द्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक स्थिति को सरल बनाने के लिए एक असाधारण कदम माना जा रहा है और यह बताता है कि सभी देशों में ऋण का स्तर बहुत अधिक है।</p>
<p style="text-align:justify;">वृद्धि दर को आगे बढ़ाने के लिए घरेलू मांग की क्षमता भी संदेह में है। कृषि, खनन, सेवा और निर्माण क्षेत्रों में सुधार के बावजूद देश में उपभोक्ता मांग अपेक्षा से कम रही है। कारपोरेटों और बैंकों की स्वच्छ बैलेंस शीट के आधार पर निजी निवेश में वृद्धि और ढ़ांचागत सुधार तथा अनुकूल नीतियों को विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि में गिरावट द्वारा चुनौती दी जा रही है। अत: स्थिति बहुत उत्साहजनक नहीं है हालांकि राजनेता जी 20 की अध्यक्षता की शेखियां बघार रहे हैं। महत्वपूर्ण यह है कि देश की जनसंख्या के निचले स्तर के 40 प्रतिशत लोगों की आय स्तर में वृद्धि की जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां इस बात को दोहराए जाने की आश्यकता है कि सुरक्षा या एयरोस्पेस व्यय में वृद्धि या देश के समृद्धतम लोगों की संपत्ति मे वृद्धि या अरबपतियों की संख्या में वृद्धि महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि देश के संघर्षरत लोगों को जीवन और कार्यकलापों की मुख्य धारा में लाया जाना चाहिए। इस संबंध में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने चाहिए जिसमें मुद्रा स्फीति को नियंत्रित करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला में सुधार करना। भारत में आपूर्ति का प्रबंधन करने के लिए सेक्टरवार लक्षित प्रयास किए जाने चाहिए ताकि मुद्रा स्फीति पर नियंत्रण रखा जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">उदाहरण के लिए मुद्रा स्फीति का एक बड़ा कारक खाद्यान्नों के मूल्यों में वृद्धि है। सरकार को इस संबंध में अवसंरचना निर्माण के प्रयास करने चाहिए ताकि कृषि और कृषि व्यवसाय आपूर्ति श्रृंखला का इष्टतम उपयोग हो सके। किसानों को क्रेताओं से जोड़ने तथा दोनों के बीच वार्ता की सुविधा उपलब्ध कराकर बाजार लिंकेज विकसित किया जाना चाहिए। साथ ही रोजगार सृजन के लिए सेवा सेक्टर प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। सरकार अवसंरचना निर्माण और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है जो उचित भी है क्योंकि ये क्षेत्र सभी लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करते हैं। रिटेल, व्यापार, या सूचना प्रौद्योगिकी आदि सेवा क्षेत्र में विपुल संभावनाएं हैं इसलिए प्रोडक्ट लिंक इंसेटिव जैसी योजनाओं के विनिर्माण और सनराइज सेक्टर को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्लोबल इनहाउस सेंटर की स्थापना करने के प्रयासों से सेवा क्षेत्र का पुनरुद्धार हो सकता है और इससे रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं। इसके अलावा राजस्व के नए स्त्रोतों की तलाश की जानी चाहिए। सरकार को वैश्विक स्थितियों और वैश्विक आर्थिक मंदी के प्रभाव को कम करने के लिए व्यय में वृद्धि करनी चाहिए। व्यय के लिए संसाधन जुटाना एक चुनौती होगी इसलिए यदि अति समृद्ध लोगों पर एक या दो वर्ष के लिए उपकर लगाया जाए तो बेहतर होगा। कर राजस्व में वृद्धि हुई है। इसलिए सरकार को परिसंपत्तियों का मौद्रीकरण करना चाहिए ताकि वह 2023-24 मे अपने व्ययों को पूरा कर सके। सरकार को ऐसे राज्यों पर ध्यान देना चाहिए जहां पर मौद्रीकरण का बड़ा आधार है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार आए तो भारत को अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए तैयार रहना चाहिए। सरकार को चालू अवसंरचना परियोजनाओं को पूरा करना चाहिए और उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना चाहिए जिनका सुदृढ़ लिंकेज हो और जिनका अलग अलग क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ता है। अनेक अवसंरचना परियोजनाओं में प्रगति अच्छी है। राजमार्ग नेटर्क में अभी गति नहीं आई है। विद्युत और उर्जा क्षेत्र में प्रगति सामान्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों को सहायता देकर भारत समावेशी वृद्धि प्राप्त कर सकता है। जैसा कि इस स्तंभ में बार -बार कहा गया है कि सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर समाज के कमजोर वर्गों की प्रगति का सूचकांक नहीं हो सकता है। इसलिए वर्तमान में आवश्यकता मांग में वृद्धि करने, संगठित और असंगठित क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करने और रोजगार सृजन की संभावनाओं की तलाश करने की है जो मांग में वृद्धि में सहायता करेगा और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़Þाएगा।<br />
(ये लेखक के निजी विचार हैं।)</p>
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                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Apr 2023 15:28:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>आर्थिक मंदी से निपटने को कारपोरेट जगत गंभीर</title>
                                    <description><![CDATA[जैसे महत्वपूर्ण योजनाओं में बड़ा बदलाव लाने की कवायद कर रहा है
आर्थिक मंदी, और उद्योगिक चुनौतियां जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गई। 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/corporate-world-serious-to-deal-with-economic-recession/article-10753"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/financial-crisis.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">जीएसीएस की बैठक में 600 निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने लिया बैठक में हिस्सा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (सच कहूँ न्यूज)।</strong> देश में छाई आर्थिक मंदी से निपटने के लिए (financial crisis) कारपोरेट जगत सामने आना शुरू कर दिया है। इसी को लेकर यहां एक होटल में जीएसीएस (ग्लोबल एशोसिएशन फॉर कॉरपोरेट सर्विसेज) के त्तवाधान में करीब 600 निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में नो प्लास्टिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, जल संचय, आर्थिक मंदी, और उद्योगिक चुनौतियां जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गई। यहां जानकारी दी गई कि जहां सरकार 2022 तक के चुनौतियों पर काम कर रही है, वहीं जीएसीएस अगले दशक की चुनौतियों से निपटने में एक बहुत बड़ा माध्यम बन रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आपस में सांझा करें और देश में व्यवसाय को बढ़ावा दें  (financial crisis)</h3>
<p style="text-align:justify;">अशोक कुमार ने कहा कि यह संगठन पेशेवर कर्मचारियों के अनुभवों को सांझा कर सरकार के महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे स्मार्ट सिटी, हाइवेज, एयरवेज, स्किल इंडिया जैसे महत्वपूर्ण योजनाओं में बड़ा बदलाव लाने की कवायद कर रहा है। ग्लोबल चुनौतियों के देखते हुए आज जरूरत है कि सारी कंपनियां अपने अनुभवों और जानकारियों को आपस में सांझा करें और देश में व्यवसाय को बढ़ावा दें। इस बैठक में आए विभिन्न कंपनियों के बिजनेस लीडर ने हम से बात करते हुए नो प्लास्टिक जैसे मुद्दों पर राय रखी। इस बैठक में रियल स्टेट और साइबर क्राइम से जुड़े एक्सपर्ट भी हिस्सा लेने आए थे।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि देश में रियल स्टेट की हालत जल्द से जल्द सुधरेगी।</li>
<li style="text-align:justify;">साथ ही साइबर एक्सपर्ट ने लोगों से अपील किया</li>
<li style="text-align:justify;"> आजकल आए दिन डाटा से संबंधित मामले सामने आ रहे हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">ऐसे में लोगों को ज्यादा से ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।</li>
</ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Oct 2019 17:04:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार औंधे मुंह, सेंसेक्स 770 अंक टूटा</title>
                                    <description><![CDATA[आर्थिक मंदी: वित्तीय और वाहन कंपनियों के शेयर कमजोर, 15 महीने में सबसे कम रहा प्रॉडक्शन मुंबई (एजेंसी)। कमजोर आर्थिक आँकड़ों के दबाव में निवेशकों का विश्वास डगमगाने से मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में हाहाकार मच गया और चौतरफा बिकवाली के बीच प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/stock-market-crashed-sensex-fell-770-points/article-10365"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-09/financial-crisis-share-market-stock-market-falls-flat-sensex-breaks-770-points.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">आर्थिक मंदी: वित्तीय और वाहन कंपनियों के शेयर कमजोर, 15 महीने में सबसे कम रहा प्रॉडक्शन</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)।</strong> कमजोर आर्थिक आँकड़ों के दबाव में निवेशकों का विश्वास डगमगाने से मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में हाहाकार मच गया और चौतरफा बिकवाली के बीच प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही। सेंसेक्स 769.88 अंक यानी 2.06 प्रतिशत का गोता लगाकर 36,562.91 अंक पर बंद हुआ। यह बजट के बाद 08 जुलाई (792.82 अंक) के बाद सेंसेक्स की सबसे बड़ी गिरावट है। निफ्टी भी 225.35 अंक यानी 2.04 प्रतिशत लुढ़ककर 10,797.90 अंक पर बंद हुआ। इससे बड़ी गिरावट 08 जुलाई को दर्ज की गयी थी जब यह 252.55 अंक टूट गया था। दोनों सूचकांकों के मंगलवार का बंद स्तर 22 अगस्त के बाद न्यूनतम स्तर है।</p>
<p style="text-align:justify;">चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर सवा छह साल के निचले स्तर पाँच प्रतिशत पर आ गयी। शुक्रवार शाम जारी इस आँकड़े के बाद सोमवार को आठ बुनियादी उद्योगों के जुलाई के आँकड़े भी नकारात्मक रहे। बुनियादी उद्योगों की उत्पादन वृद्धि दर सिमटकर दो प्रतिशत पर रह गयी। विदेशों से मिले नकारात्मक संकेतों ने भी बाजार पर दबाव बनाया। सरकार ने शेयर बाजार में बजट के बाद से ही जारी गिरावट पर ब्रेक लगाने के लिए पिछले महीने उद्योगों के निवेशकों के हित में कई घोषणाएँ की थी, जिनका बाजार पर कुछ दिनों के लिए सकारात्मक प्रभाव भी पड़ा था। लेकिन अर्थव्यवस्था के कमजोर आँकड़ों ने एक बार फिर निवेशकों के विश्वास को हिला दिया।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>निवेशकों के डूबे 2.79 लाख करोड़ रुपये</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">मंगलवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट से निवेशकों को तगड़ा झटका लगा और एक दिन में उनको 2.79 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। 30 अगस्त को बीएसई पर लिस्टेड कुल कंपनियों का मार्केट कैप 1,40,98,451.66 करोड़ रुपये था, जो आज 2,79,036.66 करोड़ रुपये घटकर 1,39,68,329.67 करोड़ रुपये हो गया।<br />
गुजरात इंडक्शन फर्नेस उद्योग पर मंदी की जबरदस्त मार</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अहमदाबाद (एजेंसी)।</strong> वाहन उद्योग तथा स्टील का बतौर कच्चा माल इस्तेमाल करने वाले अन्य उद्योगों में मौजूदा मंदी के असर से गुजरात के इंडक्शन फर्नेस उद्योग यानी लोहे के कबाड़ अथवा स्क्रैप आयरन और स्पांज आयरन को बिजली चालित भट्टियों में गला कर बिलेट या इंगट जैसे उत्पाद बनाने वाली इकाइयों पर जबरदस्त मार पड़ी है और पिछले तीन माह में ही ऐसी एक तिहाई यानी लगभग 50 इकाइयां बंद हो गयी हैं और इनके 7000 वेतनभोगी कामगार बेरोजगार हो गये हैं। इस दौरान कुल उत्पादन भी गिर कर लगभग एक चौथाई रह गया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Sep 2019 21:00:13 +0530</pubDate>
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                <title>लुढ़कती भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकार के प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो गई है। अर्थव्यवस्था का हर क्षेत्र मांग की कमी से प्रभावित है। उद्योगों के बहुत से सेक्टर में विकास दर कई सालों में सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है। वर्ष 2016-17 में जीडीपी विकास दर 8.2 प्रतिशत थी,जो 2017-18 में घटकर 7.2 प्रतिशत रह गई और वर्ष 2018-19 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-declining-indian-economy-and-the-efforts-of-the-government/article-10327"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-08/indian-economygdp-growth-rate-financial-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो गई है। अर्थव्यवस्था का हर क्षेत्र मांग की कमी से प्रभावित है। उद्योगों के बहुत से सेक्टर में विकास दर कई सालों में सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है। वर्ष 2016-17 में जीडीपी विकास दर 8.2 प्रतिशत थी,जो 2017-18 में घटकर 7.2 प्रतिशत रह गई और वर्ष 2018-19 में जीडीपी की विकास दर 6.8 प्रतिशत रह गई। ताजा अधिकारिक आँकड़ों पर यकीन करें तो वर्ष 2019 की जनवरी से मार्च की तिमाही में जीडीपी की विकास दर 5.8 फीसदी रह गई थी,जो 5 साल में सबसे कम है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह तीन साल में विकास की रफ्तार में 1.5 प्रतिशत की कमी आ गई है। पिछले 20 वर्षों में ऐसा पहले सिर्फ दो बार हुआ है कि लगातार तीन तिमाही में वृद्धि दर गिरी हो। जीडीपी की विकास दर घटने से लोगों की आमदनी, खपत और निवेश,सब पर असर पड़ रहा है। जिन सेक्टरों पर इस मंदी का सबसे ज्यादा असर पड़ा है,वहाँ पर नौकरियाँ घटाने के ऐलान हो रहे हैं। आरबीआई ने अपनी मौद्रिक समिति की बैठक में भारतीय अर्थव्यवस्था के जीडीपी ग्रोथ रेट के पूवार्नुमानों को घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार बढ़ी अर्थव्यवस्था के मामले में भारत की रैंकिंग 7 वें नंबर पर आ गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दौर में प्रभावशाली निजी विमान सेवा कंपनी जेट एयरवेज आज बंद हो चुकी है। एयर इंडिया काफी घाटे में चल रही है। किसी दौर में टेलीकॉम सेक्टर की पहचान रही बीएसएनएल आज अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है। सरकारी कंपनी हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स ने हाल ही में बाजार से एक हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेकर अपने कर्मचारियों को वेतन दिया। यह इस दशक में पहली बार था। भारतीय डाक सेवा का वित्त वर्ष 2019 में वार्षिक घाटा 15 हजार करोड़ हो चुका है। भारत की सबसे बड़ी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कंपनी ओएनजीसी का अतिरिक्त कैश रिजर्व तेजी से घट रहा है। सरकार द्वारा गैर जरूरी अधिग्रहण के चलते आज यह कंपनी एक बड़े कर्ज के दबाव में आ गई है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3><em>खपत में गिरावट:</em></h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">विकास दर घटने से लोगों की आमदनी पर बुरा असर पड़ रहा है। देश में बाजार की सबसे बड़ी रिसर्चर कंपनी नील्सन की रिपोर्ट कहती है कि तेजी से खपत वाले सामान यानी फास्ट मूविंग कंजपशन गुड्स अर्थात एफएमसीजी की बिक्री की विकास दर इस साल जनवरी से मार्च के बीच 9.9 प्रतिशत थी, लेकिन इसी साल अप्रैल से जून की तिमाही में ये घटकर 6.2 फीसदी रह गई। एफएमसीजी के उपरोक्त आँकड़ों से स्पष्ट है कि लोग अब अनिवार्य आवश्यकताओं में भी कटौती कर रहे हैं। ब्रिटेनिया बिस्किट का कहना है कि अब लोग 5 रू के बिस्कुट को भी खरीदने से पहले सोच रहे हैं। इसी तरह पारले जी बिस्कुट कंपनी की हालत बिगड़ती जा रही है और लगभग 10 हजार लोगों की नौकरियाँ छंटनी के कगार पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्राहकों की खरीददारी के उत्साह में कमी का बड़ा असर आॅटो उद्योग पर पड़ा है। बिक्री घटी है और नौकरियों में बड़े पैमाने पर कटौती हो रही है। भारत की सबसे बड़ी कार निमार्ता मारूति सुजुकी ने जुलाई माह में पिछले साल के मुकाबले में कारों की बिक्री में 36 प्रतिशत की गिरावट की बुरी खबर दी है। खपत में कमी की वजह से टाटा मोटर्स जैसी कंपनियों को अपनी गाड़ियों के निर्माण में कटौती करनी पड़ी है। इसका नतीजा ये हुआ है कि कल पुर्जे और दूसरे तरीके से आॅटो सेक्टर से जुड़े हुए लोगों पर भी इसका बुरा असर पड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उदाहरण के लिए जमशेदपुर का टाटा मोटर्स का प्लांट दो माह से 30 दिनों में केवल 15 दिन ही चलाया जा रहा है। इससे जमशेदपुर और आस-पास के इलाकों में 1,100 से ज्यादा कंपनियाँ बंदी के कगार पर खड़ी हैं,जो टाटा मोटर्स को सप्लाई कर रही थी। आॅटो सेक्टर में अगर यही हालत रही तो तकरीबन 10 लाख लोगों को नौकरियाँ गंवानी पड़ सकती हैं। ज्ञात हो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आॅटोमोबाइल सेक्टर की अहमियत इसी से समझी जा सकती है कि मैन्युफैक्चरिंग में इसकी हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3><em>निर्यात में लगातार गिरावट:</em></h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">आमतौर पर जब घरेलू बाजार में खपत कम हो जाती है,तो भारतीय उद्योगपति,अपना सामान निर्यात करने और विदेश में बाजार तलाशतें हैं। अभी स्थिति ये है कि विदेशी बाजार में भी भारतीय सामान के खरीददार का विकल्प बहुत सीमित है। पिछले दो सालों से जीडीपी विकास दर में निर्यात का योगदान घट रहा है। मई माह में निर्यात की विकास दर 3.9 प्रतिशत थी,लेकिन इस साल जून में निर्यात में 9.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। ये 41 महीनों में सबसे कम निर्यात दर है। चीन-अमेरिका ट्रेड वार का विस्तार भारत के साथ भी हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में निर्यात वृद्धि के लिए विशिष्ट रणनीति की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए चीन में अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ने से एक रिक्तता पैदा हुई है,ऐसे में भारत लगभग 57 प्रकार के उत्पादों को चीन में बेच सकता है,जो चीन के साथ हमारे एकपक्षीय व्यापार में संतुलन बना सकता है। हम लोग देख सकते हैं कि किस तरह ट्रेड वार के संकट को वियतनाम और बांग्लादेश ने अपने लिए अवसर में बदला। जब चीन ने टेक्सटाइल सेक्टर को छोड़कर अधिक मूल्य वाले उत्पादों पर जोर दिया तो उस जगह को भरने के लिए बांग्लादेश और वियतनाम तेजी से आएँ,वहीं भारतीय टेक्सटाइल इसका लाभ नहीं उठा सका।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><em>बचत में गिरावट:</em></h3>
<p style="text-align:justify;">अर्थव्यवस्था का विकास धीमा होने का रियल स्टेट सेक्टर पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है। एक आकलन के अनुसार इस वक्त देश के 30 बड़े शहरों में 12.76 लाख मकान बिकने को पड़े हुए हैं। कोच्चि में मकानों की उपलब्धता 80 महीनों के उच्चतम स्तर पर है,वहीं जयपुर में 59 महीनों ,लखनऊ में 55 महीनों और चैन्नई में ये 75 महीनों के अधिकतम स्तर पर है। इसका ये मतलब है कि इन शहरों में जो मकान बिकने को तैयार हैं,उनके बिकने में 5 से 7 वर्ष लग रहे हैं। आमदनी बढ़ नहीं रही है और बचत की रकम बिना बिके मकानों में फंसी हुई है। वित्त वर्ष 2011-12 में घरेलू बचत ,जीडीपी का 34.6 प्रतिशत थी,लेकिन अब यह बचत दर जीडीपी के अनुपात में घटकर 17% पर आ गई है,जो पिछले 20 वर्षों में सबसे कम है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3><em>वित्त मंत्री द्वारा उठाए गए कदम</em></h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्री ने आर्थिक मंदी के बीच अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए “32 सूत्रीय” उपायों की घोषणा की । इसमें सर्वप्रथम कदम फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफपीआई) और घरेलू इक्विटी इन्वेस्टर्स पर बढ़ाए गए सुपर रिच सरचार्ज को वापस लेना। इसके अतिरिक्त सरकार ने बैंक लॉन और रेपो रेट को जोड़ने की भी घोषणा की। ज्ञात हो,पिछले दिसंबर से अब तक रेपो रेट में लगातार चार बार कटौती की गई है,लेकिन स्वयं आरबीआई का कहना है कि यह कटौती उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँच रही है। ऐसे में यह घोषणा भी महत्वपूर्ण है। जहाँ तक बात है गहन ढ़ाँचागत दिक्कतों की, तो उन्हें हल करना शेष है और निवेश भी बढ़ाना है। इसके लिए केंद्र सरकारी को काफी काम करना होगा। सरकार ने आर्थिक मंदी को दूर करने के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है,लेकिन इसके लिए ढ़ांचागत सुधारों के तरफ भी प्रतिबद्धता आवश्यक है।<br />
<strong><em>-राहुल लाल</em></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-declining-indian-economy-and-the-efforts-of-the-government/article-10327</link>
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                <pubDate>Wed, 28 Aug 2019 20:52:51 +0530</pubDate>
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