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                <title>Indian Economy - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Indian Economy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Stock Market Today: बिहार चुनाव परिणामों से पहले शेयर बाजार स्थिर, सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली बढ़त</title>
                                    <description><![CDATA[Bihar Election Results 2025: नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाज़ार ने गुरुवार, 13 नवंबर को अपेक्षाकृत शांत रुख बनाए रखा। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों को लेकर बनी उत्सुकता के बीच, निवेशकों ने मुनाफावसूली का रुख अपनाया। परिणामस्वरूप, सेंसेक्स 12 अंक की हल्की बढ़त के साथ 84,478.67 पर और निफ्टी 50 सूचकांक 3 अंक की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/stock-markets-stabilize-ahead-of-bihar-election-results-with-sensex-and-nifty-trading-marginally-higher/article-78094"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/share-market.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Bihar Election Results 2025: नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाज़ार ने गुरुवार, 13 नवंबर को अपेक्षाकृत शांत रुख बनाए रखा। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों को लेकर बनी उत्सुकता के बीच, निवेशकों ने मुनाफावसूली का रुख अपनाया। परिणामस्वरूप, सेंसेक्स 12 अंक की हल्की बढ़त के साथ 84,478.67 पर और निफ्टी 50 सूचकांक 3 अंक की मामूली तेजी के साथ 25,879.15 पर बंद हुआ। वहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव देखने को मिला — बीएसई मिडकैप 0.34% और स्मॉलकैप 0.30% गिरा। Stock Market Today</p>
<p style="text-align:justify;">दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 84,919.43 का उच्च स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 26,010 के पार पहुँचा। लेकिन सत्र के अंत तक बिहार चुनाव परिणामों से पहले निवेशकों ने लाभ बुकिंग शुरू कर दी, जिससे बाजार की तेजी सीमित हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकांश एग्जिट पोल ने एनडीए की जीत का अनुमान जताया है, परंतु विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वास्तविक नतीजे उम्मीदों के विपरीत आए, तो बाजार में अल्पकालिक गिरावट देखने को मिल सकती है। इनक्रेड इक्विटीज का कहना है कि यदि एनडीए को झटका लगता है, तो बाजार 5 से 7 प्रतिशत तक नीचे आ सकता है। Stock Market Today</p>
<p style="text-align:justify;">जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर के अनुसार, “विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये में कमजोरी के बीच बाजार ऊँचाई पर टिक नहीं पाया। बिहार चुनाव परिणामों से पहले सतर्क निवेशक मुनाफावसूली करते दिखे।”  निफ्टी 50 में एशियन पेंट्स 3.77% की बढ़त के साथ शीर्ष पर रहा, इसके बाद हिंडाल्को 2.47% और इंटरग्लोब एविएशन 2% ऊपर रहा। वहीं, गिरावट वाले शेयरों में इटर्नल, टाटा मोटर्स सीवी और महिंद्रा एंड महिंद्रा प्रमुख रहे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सेक्टरवार प्रदर्शन</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">पीएसयू बैंक, मीडिया, एफएमसीजी, आईटी और ऑटो सेक्टर में गिरावट देखी गई, जबकि मेटल, रियल्टी और फार्मा सूचकांक में सुधार रहा।</li>
<li style="text-align:justify;">निफ्टी बैंक और वित्तीय सेवाओं के सूचकांक में क्रमशः 0.18% और 0.22% की वृद्धि दर्ज की गई।</li>
<li style="text-align:justify;">अस्वीकरण: यह रिपोर्ट केवल सूचना व अध्ययन उद्देश्य के लिए है। निवेश से पूर्व विशेषज्ञ सलाह अवश्य लें, क्योंकि बाजार की दिशा परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। Stock Market Today</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Nov 2025 16:15:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>India’s FY25 Growth: अच्छी खबर! भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि! राजस्व बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[India’s Healthcare Sector Grew in Q2 FY25: नई दिल्ली, (एजेंसी)। वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है, जिसकी वजह से भारत के राजस्व में साल 17.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। एक्सिस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी तिमाही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/good-news-indias-healthcare-sector-sees-tremendous-growth-revenues-rise/article-64713"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/india-gdp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">India’s Healthcare Sector Grew in Q2 FY25: न<strong>ई दिल्ली, (एजेंसी)।</strong> वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है, जिसकी वजह से भारत के राजस्व में साल 17.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। एक्सिस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी तिमाही दर तिमाही में 10.4 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि हुई। India FY25 Growth</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार अस्पतालों में रहने वालों की दर, जो कि साल दर साल 340 आधार अंकों (बीपीएस) और तिमाही दर तिमाही 470 बीपीएस थी, वो भी बढ़ी और इस वृद्धि के पीछे एक प्रमुख चालक थी। साथ ही बीमा भुगतानकर्ताओं ने अस्पतालों में कुल राजस्व का 33 प्रतिशत योगदान दिया, जोकि साल दर साल 23 प्रतिशत और तिमाही दर तिमाही 12 प्रतिशत की वृद्धि को रेखांकित करता है। हालांकि, रिपोर्ट में बीमा पैठ अभी भी कम बनी हुई है। जागरूकता और क्रय शक्ति बढ़ने के साथ ही इसमें विस्तार की गुंजाइश भी है।</p>
<h3>हृदय संबंधी देखभाल में दोहरे अंकों की वृद्धि | India FY25 Growth</h3>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार कैंसर और हृदय संबंधी देखभाल में दोहरे अंकों की वृद्धि जारी है। इसमें कहा गया है कि बढ़ती अधिभोग दरों और प्रति अधिभोग बिस्तर औसत राजस्व (एआरपीओबी) के अलावा, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भविष्य की वृद्धि को बनाए रखने की उम्मीद है। रिपोर्ट में वित्त वर्ष 25 की दूसरी तिमाही में भारतीय फार्मा क्षेत्र में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। भारत की प्रमुख दवा कंपनियों ने वित्त वर्ष 25 की दूसरी तिमाही में 10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की। यह उत्तरी अमेरिका और घरेलू बाजार में प्रभावशाली प्रदर्शन से प्रेरित है। भारतीय दवा बाजार (आईपीएम) में वार्षिक आधार पर 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें पुरानी चिकित्सा में 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, कमजोर मौसम के कारण तीव्र चिकित्सा में मामूली 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। Indian Economy</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में विशेष रूप से बताया गया है कि कवरेज के तहत दवा क्षेत्र में वार्षिक आधार पर 10.2 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 1.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें उत्तरी अमेरिका में वार्षिक आधार पर 10.8 प्रतिशत की वृद्धि और भारतीय व्यवसाय में वार्षिक आधार पर 9.8 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है। अगले 3 वर्षों में फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है, जिसमें बायोसिमिलर, जीएलपी-1 (ग्लूकागन-जैसे पेप्टाइड-1) और पेप्टाइड्स में आशाजनक पाइपलाइन है, जो सभी मधुमेह और अन्य स्थितियों के उपचार में महत्वपूर्ण हैं। India FY25 Growth</p>
<p><a title="RBI Governor Hospitalised: आरबीआई गवर्नर की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती!" href="http://10.0.0.122:1245/rbi-governors-health-deteriorates-admitted-to-hospital/">RBI Governor Hospitalised: आरबीआई गवर्नर की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Nov 2024 12:28:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>प्रदूषण एजेंसियां प्रदूषण के सही आंकड़े नहीं करती प्रकट!</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदूषण से भारत में गरीब सर्वाधिक प्रभावित हैं। विनिर्माण, उत्पादन, औद्योगिक गतिविधियों, सेवाओं, परिवहन और अन्य कार्यकलापों को प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से जोड़ा जा रहा है और इन पर कर लगाए जा रहे हैं जिससे महंगाई और जीवन की लागत में वृृद्धि हो रही है। इसके अलावा दिल्ली में प्रदूषण एजेंसियों द्वारा प्रदूषण के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pollution-agencies-do-not-disclose-correct-pollution-figures/article-54444"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/air-pollution-reduces-life-expectancy.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रदूषण से भारत में गरीब सर्वाधिक प्रभावित हैं। विनिर्माण, उत्पादन, औद्योगिक गतिविधियों, सेवाओं, परिवहन और अन्य कार्यकलापों को प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से जोड़ा जा रहा है और इन पर कर लगाए जा रहे हैं जिससे महंगाई और जीवन की लागत में वृृद्धि हो रही है। इसके अलावा दिल्ली में प्रदूषण एजेंसियों द्वारा प्रदूषण के संबंध में आंकड़ों को प्रकट न करने से भी अनेक प्रश्न उठ रहे हैं। इसलिए यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या सरकारें अर्थव्यवस्था पर अनावश्यक लागत थोप रही है। Pollution</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदूषण अपने आप में एक बड़ा व्यवसाय बन गया है और इससे गरीब सर्वाधिक प्रभावित हो रहा है। अकेले पेट्रोल पर लगभग 13.6 लाख करोड़ के उपकर और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाए जा रहे हैं ताकि इसकी खपत में कमी हो। इसके पूर्व के पांच वर्षों में इससे 13 लाख करोड़ रूपए संग्रहित किए गए। Pollution</p>
<p style="text-align:justify;">प्रश्न यह भी उठता है कि इन प्रमुख प्रदूषण पर निगरानी रखने वाली एजेंसियां आईआईटी, कानपुर आदि ने प्रदूषण के मामले में आंकड़े जारी करने बंद क्यों कर दिए हैं। इसका कारण यह है कि नौकरशाही और दिल्ली सरकार में टकराव चल रहा है। जिसके चलते ऐसा लगता है कि वे इन आंकड़ों के बारे में स्वयं आश्वस्त नहंी है।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि संपूर्ण विश्व में प्रदूषण लागत बढाने का एक औजार बन गया है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की सरकारों ने इस संबंध में एक और तरीका निकाला है। वह यह कहकर लोगों की कारें जब्त कर रही हैं कि कार का जीवन समाप्त हो गया है और इस तरह लोगों को प्रताड़ित कर रही हैं कि वे इस संबंध में सामाजिक लागत पर भी ध्यान नहंी दे रही हैं। Pollution</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2019 में नेशनल ग्रीन एयर कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2022 तक अल्ट्रा फाइन पार्टिकुलेट के स्तर में 20 से 30 प्रतिशत की कमी करने का लक्ष्य रखा गया। केन्द्र सरकार द्वारा सितंबर 2022 में इस लक्ष्य को वर्ष 2026 तक 40 प्रतिशत करने का विस्तार किया गया किंतु वर्ष 2022 में भी कुछ शहरों में प्रदूषण का स्तर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वार्षिक औसत सुरक्षित सीमा से अधिक रहा है। दुकानदारों को दोष दिया जा रहा है कि वे प्लास्टिक के माध्यम से प्रदूषण फैला रहे हैं। किसानों को पराली जलाने के नाम पर प्रदूषण के लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वस्तुत: बड़े कारपोरेट बहुराष्ट्रीय कंपनियां जो शीतल पेयों का विनिर्माण करते हैं वे सबसे बड़ी प्लास्टिक प्रदूषक हैं और इसमें अन्य उद्योग तथा ऑटोमोबाइल सेक्टर भी शामिल हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कारों और ट्रैक्टरों से 8 प्रतिशत ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्टी के अनुसार वायु प्रदूषण में उद्योगों का हिस्सा 51 प्रतिशत है और इसकी लागत लगभग 7 लाख करोड़ हैं क्योंकि इससे श्रमिकों की उत्पादकता और राहत प्रभावित होते हैं। Pollution</p>
<p style="text-align:justify;">वस्तुत: भारत ने वर्ष 2070 तक प्रदूषण के मामले में पश्चिमी मानदंडों को स्वीकार करने से इंकार कर दिया है किंतु उसे गरीब लोगों की कारों और टैज्क्टरों के बारे में उदारता से सोचना चाहिए। प्रत्येक नई कार या ट्रैक्टर के निर्माण और पुरानी कारों को नष्ट करने से अधिक प्रदूषण होता है और इससे गरीब लोग और गरीब लोग हो रहे हैं क्योंकि इससे उनकी गतिशीलता प्रभावित होती है और इससे अधिक प्रदूषण बढ़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वस्तुत: बड़े अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय हर जगह सबसे बड़े प्रदूषक हैं। भारत की शीर्ष 12 कंपनियां जिनमें एक सरकारी कंपनी भी हैं, उन्हें सर्वाधिक प्रदूषण करने वाला घोषित किया गया है। ब्रेक फ्री फ्राम प्लास्टिक द्वारा 2022 में किए गए एक ऑडिट के अनुसार भारत में पाया जाने वाला सबसे आम प्लास्टिक उत्पाद फूड पैकेजिंग, घरेलू उत्पाद और अन्य पैकेजिंग मैटेरियल हैं। उत्तर भारत में चीनी मिलें और अन्य उद्योग सर्वाधिक जल और वायु प्रदूषण पैदा करती हैं। वे खुलेआम नदियों में प्रदूषक छोड़ रहे हैं और केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड के मानदंडों का उल्लंघन कर रहे हैं। Pollution</p>
<p style="text-align:justify;">तथाकथित कठोर मानदंडों से किराया बढा है, पार्किंग शुल्क बढ़ा है और यह समझ नहंी आता है कि शुल्क बढ़ाकर किस तरह से प्रदूषण पर नियंत्रण लगता है। सेन्टर फोर पालिसी रिसर्च ने वर्ष 2019 में कहा था कि पर्यावरणीय विनियामक तंत्र को मानदंडों के पालन और कार्यान्वयन में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इंडिया स्पेंड ने वर्ष 2014 से वर्ष 2017 तक प्रदूषण के बारे में रिपोर्टों और आंकड़ों का विश्लेषण किया और यह बताता है कि केन्द्र और राज्य दोनों स्तरों पर सरकारों ने पर्यावरण विनियमनों का कड़ाई से पालन नहीं कराया है और वे इस मामले में उदासीन रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">एसोसिएशन फोर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जेएसडब्ल्यू स्टील 2020 में चुनावी ट्रस्टों को चंदा देने वाला सबसे बडा चंदादाता था। टाटा समूह की प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट ने अपना 75 प्रतिशत चंदा सत्तारूढ दलों को दिया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों ने 206 प्रदूषण करने वाले उद्योगों में से 146 उद्योगों को सामान्य जांच से छूट दी है और उन्हें स्वत: निगरानी तथा तृतीय पक्ष प्रमाण का विकल्प दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">केन्द्र की बिजनेस रिफोर्म एक्शन प्लान जिसे वर्ष 2014 से लागू किया जा रहा है, उसने उद्योगों के संबंध में पर्यावरण संरक्षण कम करने के लिए प्रोत्साहन दिया है। विश्व बैंक का कहना है कि विकास के नाम पर अनियमित औद्योगिकीकरण के कारण लोग अनेक तरह से प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय लोग, आदिवासी समुदायों का बलपूर्वक विस्थापन हो रहा है और स्थानीय पर्यावरण तथा आजीविका के स्रोतों के प्रदूषण के कारण उन्हे खराब स्थितियों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में विश्व के 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से 10 शहर हैं और भारत में विश्व में सर्वाधिक वायु प्रदूषण है। यह तथ्य विश्व स्वास्थ्य संगठन ने उजागर किया है। भारत के पूर्व आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु की राय है कि इनमें से अनेक समस्याओं का मुख्य कारण बड़े व्यवसायों के अनुकूल नीतियां अपनाना है। इसका तात्पर्य यह है कि उद्योगों का लाभ बढ रहा है और उसकी कीमत गरीब लोगों पर विभिन्न तरह के प्रभारों के रूप में थोपा जा रहा है और यह सब कुछ प्रदूषण को निंयत्रित करने के नाम पर किया जा रहा है और इसके चलते मुद्रा स्फीति निरंतर बढती जा रही है। अर्थात गरीब लोगों पर भारी लागत थोपी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले 15 माह से मुद्रा स्फीति की दर बढती रही है और इससे लोगों की वित्तीय व्यवस्था डगमगाई है। भारतीय रिजर्व बैंक भी मुद्रा स्फीति के बारे में अत्यधिक चिंतित है। डालर के मुकाबले रूपया लगभग 83 रूपए है और यदि रूपया कमजोर होता गया जो जीवन की लागत बढती जाएगी। बैटरी और विंड पैनल अपशिष्ट भी एक बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। 8 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया कि सरकारें महत्वाकांक्षी सामुहिक वचन-वायदे कर रही हैं किंतु वे इस संबंध में सही कदम नहीं उठा रहे है। जिसके चलते ये सामुहिक वायदे और संकल्पों का कार्यान्वयन नहीं किया जा रहा है।Pollution</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि यूरोप इस संबंध में 1979 से इस संबंध में कदम उठा रहा है किंतु यूनान और स्पेन सर्वाधिक प्रदूषक देश रहे हैं। प्रदूषण बढता जा रहा है और किसी तरह इस पर अंकुश लगाने के लिए लोगों पर अधिक लागत थोपी जा रही है। प्रदूषण के सबसे बड़े राजस्व संग्राहक होने के बावजूद इस संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की गयी है। विश्व समुदाय को इस संबंध में अपनी विफलता स्वीकार करनी चाहिए और गरीबों को अच्छे दिन दिखाने के नाम पर उन पर थोपी गयी लागत को हटाना चाहिए। Pollution</p>
<p style="text-align:right;"><strong>शिवाजी सरकार, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार<br />
(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Nov 2023 19:36:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Economy: अर्थव्यवस्था-गिरती घरेलू बचत एवं बढ़ती महंगाई से त्रस्त</title>
                                    <description><![CDATA[Economy: आगामी लोकसभा (Lok Sabha) एवं विधानसभा चुनाव (Assembly elections) के मध्यनजर महंगाई का लगातार बढ़ते रहना चिंता का विषय है। घरेलू बचत, महंगाई, बढ़ता व्यक्तिगत कर्ज, बढ़ते व्यक्तिगत खर्चे आदि को लेकर निम्न एवं मध्यम वर्ग परेशान है। इस परेशानी के समाधान की बजाय सत्ता एवं विपक्ष दल एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/economy-suffered-by-falling-domestic-savings-and-rising-inflation/article-52995"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/mehngai.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Economy: आगामी लोकसभा (Lok Sabha) एवं विधानसभा चुनाव (Assembly elections) के मध्यनजर महंगाई का लगातार बढ़ते रहना चिंता का विषय है। घरेलू बचत, महंगाई, बढ़ता व्यक्तिगत कर्ज, बढ़ते व्यक्तिगत खर्चे आदि को लेकर निम्न एवं मध्यम वर्ग परेशान है। इस परेशानी के समाधान की बजाय सत्ता एवं विपक्ष दल एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी ताजा मासिक बुलेटिन में माना है कि खाद्य मुद्रास्फीति को काबू करना कठिन साबित हो रहा है। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की घरेलू बचत दर वित्त वर्ष 2022-23 में पांच दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गई। 18 सितंबर को जारी इन आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में देश की शुद्ध घरेलू बचत पिछले साल की तुलना में 19 फीसदी कम रही है। 2021-22 में देश की शुद्ध घरेलू बचत जीडीपी के 7.2 फीसदी पर थी जो इस साल और घटकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 5 दशक के निचले स्तर 5.1 प्रतिशत पर आ गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अनेक मोर्चों पर भारत की तस्वीर आशा का संचार कर रही है, लेकिन आर्थिक मोर्चें पर चिन्ता का सबब लगातार बना हुआ है, हालांकि समूची दुनिया में आर्थिक असंतुलन बना हुआ है, भारत ने फिर भी खुद को काफी संभाले हुए हैं। किसी देश की अर्थव्यवस्था इस पैमाने पर भी आंकी जाती है कि उसकी घरेलू बचत, प्रति व्यक्ति आय और क्रयशक्ति की स्थिति क्या है। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय स्टेट बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष में परिवारों की शुद्ध वित्तीय बचत में करीब पचपन फीसद की गिरावट आई और यह सकल घरेलू उत्पाद के 5.1 फीसद पर पहुंच गई। वित्त मंत्रालय ने घरेलू बचत में गिरावट पर सफाई देते हुए कहा है कि लोग अब आवास और वाहन जैसी भौतिक संपत्तियों में अधिक निवेश कर रहे है। इसका असर घरेलू बचत पर पड़ा है। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि संकट जैसी कोई बात नहीं है। सरकार ने यह भी कहा है कि पिछले दो साल में परिवारों को दिए गए खुदरा ऋण का 55 फीसद आवास, शिक्षा और वाहन पर खर्च किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">परिवारों के स्तर पर वित्त वर्ष 2020-21 में 22.8 लाख करोड़ की शुद्ध संपत्ति जोड़ी गई थी। 2021-22 में लगभग सत्रह लाख करोड़ और वित्तवर्ष 2022-23 में 13.8 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय संपत्तियां बढ़ी हैं। इसका मतलब है कि लोगों ने एक साल पहले और उससे पहले के साल की तुलना में इस साल कम वित्तीय संपत्तियां जोड़ी हैं। सरकार के अनुसार ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि वे अब कर्ज लेकर घर और वाहन जैसी भौतिक संपत्तियां खरीद रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो साल में आवास और वाहन ऋण में दोहरे अंक में वृद्धि हुई है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि महामारी के बाद से लोग काफी सचेत हुए हैं। वे जोखिम वाले निवेश से बच रहे हैं। दूसरी बात बचत खातों पर ब्याज पर दर बहुत आकर्षक नहीं हैं। भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित बी-20 बैठक में बोलते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा भी कि ब्याज दरें बढ़ाकर महंगाई नियंत्रित करने की कीमत आर्थिक विकास को चुकानी भारी पड़ सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार चाहे जो तर्क दे पर घरेलू बचत गिरना कोई शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता। घरेलू बचत सामान्य सरकारी वित्त और गैर-वित्तीय कंपनियों के लिए कोष जुटाने का सबसे महत्वपूर्ण एवं प्रभावी जरिया होती है। देश की कुल बचत में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखने वाली बचत का लगातार गिरना निम्न और मध्यम वर्ग ही नहीं, पूरी अर्थव्यवस्था के लिए चिंता की बात है।</p>
<p style="text-align:justify;">लगातार महंगाई का बढ़ना भी न केवल आमजन के लिये बल्कि सरकार के लिये चिन्ता का कारण है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के अनुमानों से पता चलता है कि जुलाई (7.4 प्रतिशत) की तुलना में अगस्त में यह घटकर 6.8 फीसदी हो गई है। यहां तक कि खाद्य वस्तुओं की महंगाई भी जुलाई के उच्चतम स्तर पर 11.5 फीसदी से घटकर अगस्त में 9.94 प्रतिशत हो गई। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">इन संकेतों से भले ही राहत की सांसें मिली हो, बावजूद इसके यह अब भी ज्यादा है। यह गिरावट मुख्यत: सब्जियों की कीमतों में कमी के कारण आई है, जो जुलाई की 37.4 फीसदी की तुलना में अगस्त में 26.1 प्रतिशत थी। हालांकि अनाज और दालों में महंगाई दोहरे अंकों में बनी हुई है, जिनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के मद्देनजर गिरावट की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही। आरबीआई ने स्वीकारा है कि खाद्य मुद्रास्फीति को काबू करना कठिन साबित हो रहा है। मगर अधिकारियों को महंगाई कम करने का महत्वपूर्ण काम सौंपा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पष्ट है कि दबाव और प्रतिबंधों के माध्यम से महंगाई को काबू में करने के प्रयास काफी हद तक नाकाम रहे हैं। घरेलू आपूर्ति में कमी के कारण कई खाद्य वस्तुओं, विशेषकर अनाज व दालों में महंगाई रुकने का नाम नहीं ले रही है। गेहूं का उत्पादन गरमी और बेमौसम बारिश के कारण प्रभावित है। यही कारण है कि मई 2022 में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया। चावल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। दालों का भी यही हाल है। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">महंगाई अक्सर सत्तापक्ष के लिये राजनीतिक चुनौती बनती रही है, चुनावों में हार-जीत को बहुत गहराई से प्रभावित करने में महंगाई आधार बनती रही है। महंगाई कम करने के लिए हमें वैकल्पिक रास्ते तलाशने होंगे, जो आर्थिक विकास या किसानों के हितों को प्रभावित किए बिना उपभोक्ताओं की रक्षा करे। विकृत एवं असंतुलित बाजार व्यवस्था ने भी अनेक आर्थिक विसंगतियों को जन्म दिया है। एक आदर्श व्यवस्था का चिन्तन ही वर्तमान की आर्थिक समस्याओं का समाधान हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान सरकार ने गरीबी दूर करने में सफलता पाई है, लेकिन उसकी सोच अमीरी बढ़ाने की भी रही है। छोटे उद्योग, सबके पास अपना काम, हर व्यक्ति के लिये रोजगार की सुनिश्चितता, कोई भी इतना बड़ा न हो कि जब चाहे अपने से निर्बल को दबा सके। एक आदमी के शक्तिशाली होने का मतलब है, कमजोरों पर निरन्तर मंडराता खतरा। एक संतुलन बने। सबसे बड़ी बात है मानवीय अस्तित्व और मानवीय स्वतंत्रता की। इस पर आंच न आये और आवश्यकताओं की पूर्ति भी हो जाये, ऐसी अर्थव्यवस्था की आज परिकल्पना आवश्यक है। तभी बढ़ती महंगाई, आय असंतुलन एवं घटती बचत पर काबू पाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आय असमानता, महंगाई, बेरोजगारी एक कल्याणकारी राज्य की सबसे बड़ी विडंबना है। यह जब गंभीर रूप से उच्चतम स्तर पर पहुंच जाती है तो उदार आर्थिक सुधारों के लिए सार्वजनिक समर्थन कम हो जाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत में नव उदारवादी नीतियों से आर्थिक वृद्धि दर को जरूर पंख लगे हैं, लेकिन इससे अमीरों की जितनी अमीरी बढ़ी है, उस दर से गरीबों की गरीबी दूर नहीं हुई है। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">परिणामस्वरूप आर्थिक असमानता की खाई साल दर साल चौड़ी होती जा रही है। इसलिए हमारे नीति निर्माताओं तथा योजनाकारों को इस बात पर जरूर ध्यान देना चाहिए कि सर्व समावेशी विकास के लक्ष्य को कैसे हासिल करें? ताकि हाशिये पर छूटे हुए वंचितों, पिछड़ों तथा शोषितों को विकास की मुख्यधारा में लाया जा सके। वर्तमान में आर्थिक असमानता से उबरने का सबसे बेहतर उपाय यही होगा कि वंचित वर्ग को अच्छी शिक्षा, अच्छा रोजगार उपलब्ध कराते हुए सुदूरवर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए सरकार को अपनी कल्याणकारी योजनाओं पर कहीं ज्यादा खर्च करना होगा। स्वास्थ्य और शिक्षा पर कहीं ज्यादा राशि आवंटित करनी होगी। अभी इन मदों पर हमारा देश बहुत ही कम खर्च करता है। भारत में वह क्षमता है कि वह नागरिकों को एक अधिकारयुक्त जीवन देने के साथ ही समाज में व्याप्त असमानता को दूर कर सकता है। Economy</p>
<p style="text-align:right;"><strong>ललित गर्ग, लेखक, पत्रकार, स्तंभकार</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="New Rules From 1st October: बदल रहा है महीना, हो रहे हैं बदलाव एक अक्तूबर से जिंदगी में आएगा नया पड़ाव" href="http://10.0.0.122:1245/the-month-is-changing-changes-are-taking-place-a-new-phase-will-come-in-life-from-october-1st/">New Rules From 1st October: बदल रहा है महीना, हो रहे हैं बदलाव एक अक्तूबर से जिंदगी में आएगा नया पड़ा…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>लेख</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Sep 2023 18:17:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ी खबर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। वैश्विक अर्थव्यवस्था (Economy) की अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में मजबूत घरेलू मांग और निवेश के समर्थन से सकल घरलू उत्पाद (जीडीपी) (वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन) में एक साल पहले इसी अवधि की तुलना में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/india-economy-news/article-51822"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/challenge-to-bring-economy-back-on-track.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> वैश्विक अर्थव्यवस्था (Economy) की अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में मजबूत घरेलू मांग और निवेश के समर्थन से सकल घरलू उत्पाद (जीडीपी) (वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन) में एक साल पहले इसी अवधि की तुलना में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। इस तरह भारत ने अप्रैल-जून 2023 की तिमाही में चीन के जीडीपी में वृद्धि को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे तेजी से वृद्धि कर रही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन की आलोच्य तिमाही की वृद्धि 6.3 प्रतिशत थी। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा गुरुवार शाम को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘2023-24 की पहली तिमाही में स्थिर कीमतों पर ( आधार वर्ष 2011-12 ) पर वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 40.37 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर रहने का अनुमान है, जबकि 2022-23 की पहली तिमाही में यह 37.44 लाख करोड़ रुपये था। Economy</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर अप्रैल-जून 2023 की तिमाही में रही 7.8 प्रतिशत</h3>
<p style="text-align:justify;">इस तरह यह सालाना आधार पर जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दशार्ता है। 2022-23 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि 13.1 प्रतिशत थी। पिछले साल के आंकड़ों में निम्न तुलनात्मक आधार का भी प्रभाव था। विशेषज्ञों ने पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़ों के बाजार के अनुमानों के अनुरूप बताया है लेकिन जिंस की कीमतों में गिरावट के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि का आंकड़ा कम रहने पर थोड़ी निराशा जतायी है । विनिर्माण क्षेत्र ने पहली तिमाही में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि दिखायी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में कृषि-वानिकी-मत्स्य पालन क्षेत्र का उत्पादन पिछले साल इसी अवधि की तुलना में 3.5 प्रतिशत बढ़ा तथा खनन क्षेत्र का उत्पादन की वृद्धि 5.8 प्रतिशत रही । पिछले वर्ष इन क्षेत्रों की इसी तिमाही की वृद्धि दर क्रमश: 2.4 प्रतिशत और 9.5 प्रतिशत थी।</p>
<p style="text-align:justify;">विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि एक साल पहले के 6.1 प्रतिशत की तुलना में 4.7 प्रतिशत रही जबकि बिजली,गैस, जलापूर्ति और अन्य जन सुविधाओं के क्षेत्र में उत्पादन वृद्धि 2.9 प्रतिशत रही । पिछले वर्ष इसी दौरान जनसुविधा क्षेत्र की वृद्धि 14.9 प्रतिशत थी। अप्रैल-जून 2023 की तिमाही में निर्माण क्षेत्र की वृद्धि 7.9 प्रतिशत और व्यापार, होटल, परिवहन संचार एवं प्रसारण और अन्य सेवाओं के क्षेत्र में उत्पादन सालाना आधार पर 9.2 प्रतिशत बढ़ा । एक साल पहले इन क्षेत्रों की वृद्धि दर क्रमश: 16 प्रतिशत और 25.7 प्रतिशत थी। वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवा क्षेत्र ने आलोच्य तिमाही में एक साल पहले के 8.5 प्रतिशत की तुलना में 12.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जबकि लोक-प्रशासन रक्षा और ऐसी अन्य सेवाओं के क्षेत्र की वृद्धि 7.9 प्रतिशत (पिछले वर्ष 21.3 प्रतिशत) रही। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">प्रथमिक कीमत पर सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 2023-24 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत दर्ज किया गया जबकि करों में शुद्ध रूप से 7.7 प्रतिशत की वृद्धि रही। आंकड़ों के अनुसार 2023-24 की पहली तिमाही में वर्तमान कीमतों पर जीडीपी 70.67 लाख करोड़ रुपये रहा जो 2022-23 की पहली तिमाही के 65.42 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 8.0 प्रतिशत की वृद्धि दशार्ता है । 2022-23 की पहली तिमाही में वर्तमान मूल्य पर जीडीपी में 27.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में जीडीपी में व्यय के हिस्से के रूप में सकल स्थायी पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) पर व्यय 29.3 प्रतिशत रहा जो पिछले वर्ष इसी दौरान 29.1 प्रतिशत रहा। जीएफसीएफ का आंकड़ा अर्थव्यवस्था में पूंजीगत निवेश के रुझान को दशार्ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा, ‘पहली तिमाही की जीडीपी वृद्धि के आंकड़े हमारी उम्मीद के अनुरूप है पर इसमें अलग अलग हिस्सों के योगदान की स्थिति पर कुछ आश्चर्य होता है । जिंसों की कीमतों में वार्षिक आधार पर गिरावट के चलते आदर्श रूप से विनिर्माण क्षेत्र की फर्मों के परिचालन लाभ में वृद्धि और इस क्षेत्र के उत्पादन के मूल्य में तेज वृद्धि होनी चाहिए थी , पर इस क्षेत्र ने जिस तरह निराश किया वह आश्चर्यजनक है। उन्होंने कहा कि सेवाओं के क्षेत्र में निरंतर मजबूत वृद्धि बनी हुई है। Economy</p>
<p style="text-align:justify;">मिलवुड केन इंटरनेशनल के संस्थापक एवं सीईओ नीश भट्ट ने कहा,‘निवेश में सुधार, घरेलू मांग में वृद्धि, सेवा और कृषि क्षेत्र की तगड़ी वृद्धि जैसे कई कारकों ने पहली तिमाही में भारत के जीडीपी को 7.8 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि आलोच्य तिमाही में भारत की वृद्धि विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के 6.3 प्रतिशत से ऊपर रही और भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था की अपनी ख्याति बनाए हुए है। रियल एस्टेट क्षेत्र की परामर्श कंपनी नाइट फ्रैंक इंडिया के निदेशक (अनुसंधान) विवेक राठी ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की यह वृद्धि घरलू उपभोग और निवेश की गतिविधियों में तेजी की बदौलत है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="तरनतारन में हेरोइन बरामद" href="http://10.0.0.122:1245/heroin-seized-in-tarn-taran/">तरनतारन में हेरोइन बरामद</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2023 15:22:27 +0530</pubDate>
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                <title>भारत में जो बिकेगा वह यहीं बनेगा: राजनाथ</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भारत ने विनिमार्ताओं के लिए दरवाजे खोल रखे हैं लेकिन शर्त इतनी है कि ‘यहां जो बिकेगा वह यहीं बनेगा’ और इस मंत्र पर चलते हुए आने वाले समय में भारत दुनिया का सबसे मजबूत देश बनकर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/what-will-be-sold-in-india-will-be-made-here-rajnath/article-37843"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भारत ने विनिमार्ताओं के लिए दरवाजे खोल रखे हैं लेकिन शर्त इतनी है कि ‘यहां जो बिकेगा वह यहीं बनेगा’ और इस मंत्र पर चलते हुए आने वाले समय में भारत दुनिया का सबसे मजबूत देश बनकर उभरेगा। सिंह ने शुक्रवार को यहां एक कार्यक्रम में कहा, ‘आज भारत ‘वैश्विक उम्मीद’ का केन्द्र है क्योंकि इस देश में अवसरों का भंडार है, विकल्प की भरमार है और खुलेपन का विस्तार है। भारत में जन, मन और सारा तंत्र खुलेपन का प्रतीक है। आत्मनिर्भर भारत खुले मन से नए दरवाजे खोलने का नाम है। हमारे दरवाजे बंद नही हो रहे बल्कि और खुल रहे हैं बस शर्त इतनी है कि विनिर्माण हमारे घर पर ही करिये भारत के बड़े बाजार के रूप में उभरने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘ यहां जो मौका है वह कहीं और नही है। हमारा सिर्फ इतना ही आग्रह है कि हमारे लिए बनाना है तो इसी देश में बनाइए। सीधे शब्दों में कहा जाये कि ‘भारत में जो बिकेगा वह यहीं बनेगा’।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अगले 25 वर्षों में भारत दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति होगा</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पिछले लगभग साढ़े आठ वर्षों में भारत ने विश्व में जो प्रतिष्ठा और सम्मान अर्जित किया है वह अभूतपूर्व है। ह्ल मुझे विश्वास है कि अगले दस वर्षों में भारत जापान को पीछे छोड़ कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। मैं तो यहां तक मानता हूं कि अगले 25 वर्षों में भारत दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति होगा। भारत ऐसी महाशक्ति बनेगा जहां धन भी होगा और बुद्धि भी होगी। सिंह ने आजादी के समय देश का नेतृत्व करने वाले दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने देशहित को सर्वप्रथम नहीं समझा। उन्होंने कहा कि यदि आजादी के समय से ही जिन लोगों के हाथ इस देश की सत्ता रही उन्होंने राष्ट्र प्रथम की नीति पर काम किया होता तो भारत दशकों पहले ही एक विकसित देश की कतार में खड़ा होता।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें:–</strong></span> <a href="http://10.0.0.122:1245/iit-madras-4th-year-btech-student-commits-suicide/"><strong>आईआईटी मद्रास के चौथे वर्ष के बीटेक छात्र ने खुदकुशी की</strong></a></p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह सही है कि भारत उस समय कमजोर था, गरीब था, इसलिए उसे विकास की राह पर रफ्तार पकड़ने में समय लगा। मगर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 1950 में भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। 1960 में वह लुढ़क कर आठवें और 1970 में 9वें और 1980 में तो वह टाप टेन की सूची से ही बाहर हो गई। नब्बे के दशक में थोड़ा सुधार हुआ मगर टॉप टेन की रैंकिंग में तब भी भारत बाहर ही था। उन्होंने कहा,्न‘दुनिया की ‘टाप टेन’ अर्थव्यवस्थाओं में भारत की वापसी पिछले दस वर्षों में हुई जब वह नवीं पायदान पर आया। आज 2022 में भारत की अर्थव्यवस्था ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़कर दुनिया की ह्यटॉप फाइवह्ण इकोनोमी में पांचवी पायदान पर है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Sep 2022 15:51:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Indian Economy: क्या विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकती है?</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ताजा रपट पर भारत का ध्यान सबसे ज्यादा जाएगा, क्योंकि उसके अनुसार Indian (भारतीय अर्थव्यवस्था) (Indian Economy)अब ब्रिटेन से बड़ा सेठ बन गया है। इस वर्ष ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 816 अरब डालर की रही, जबकि भारत की 854.7 डालर की हो गई। यानि ब्रिटेन से हम लगभग 38 अरब डालर आगे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/indian-economy-can-it-become-the-worlds-largest-economy/article-37660"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/विशाल-बन-सकती-है-भारत-की-अर्थव्यवस्था.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ताजा रपट पर भारत का ध्यान सबसे ज्यादा जाएगा, क्योंकि उसके अनुसार Indian (भारतीय अर्थव्यवस्था) (Indian Economy)अब ब्रिटेन से बड़ा सेठ बन गया है। इस वर्ष ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 816 अरब डालर की रही, जबकि भारत की 854.7 डालर की हो गई। यानि ब्रिटेन से हम लगभग 38 अरब डालर आगे निकल गए। लेकिन हम यह न भूलें कि ब्रिटेन की आबादी मुश्किल से 7 करोड़ है और India की आबादी उससे 20 गुना ज्यादा है यानि करीब 140 करोड़! हमारी अर्थ-व्यवस्था ब्रिटेन से बड़ी जरूर हो गई है और इसका हमें गर्व भी होना चाहिए लेकिन भारत के आम आदमी को क्या इतनी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जितनी ब्रिटिश लोगों को है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें – <a href="http://10.0.0.122:1245/five-thousand-billion-dollar-economy-can-be-made-in-four-years-debroy/">भारत चार साल में बन सकता है पांच हजार अरब डालर की अर्थव्यवस्था</a></strong></p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>संपन्नता के मामले में भारत से बहुत आगे ब्रिटेन</strong> | Indian Economy</h3>
<p style="text-align:justify;">वहां औसत आदमी की वार्षिक आमदनी 47000 डालर है और उसके मुकाबले भारत में वह सिर्फ 2500 डालर है। यह ठीक है कि हमारे देश के कुछ मुट्ठीभर लोग ऐसे हैं, जो ब्रिटेन के औसत अमीरों से भी ज्यादा अमीर हैं लेकिन 100 करोड़ से भी ज्यादा लोगों की हालत कैसी है? क्या उनको शिक्षा, चिकित्सा, भोजन, निवास और रोजगार आदि पर्याप्त मात्रा में हम दे पाते हैं? नहीं, उनकी फिक्र हमारे नेताओं को बस तभी होती है जब वोट का त्योहार याने चुनाव सामने आता है। यह ठीक है कि ब्रिटेन और यूरोप के कई राष्ट्र एशिया और अफ्रीका के कई देशों का बरसों खून चूसते रहे और अपने उपनिवेशों के दम पर मालामाल हो गए लेकिन दुनिया के कई देश ऐसे हैं, जो 70-75 साल पहले तक भारत की तुलना में बहुत पिछड़े हुए थे लेकिन संपन्नता के मामले में भारत से बहुत आगे निकले हुए हैं।</p>
<h3><strong>चीन के कई शहर और गांव अमेरिका के शहरों और गांवों से भी आगे </strong></h3>
<p style="text-align:justify;">जैसे चीन, सिंगापुर, मलेशिया, कोरिया आदि! इन देशों ने किन्हीं उपनिवेशों का खून नहीं चूसा है। ये अपने दम पर आगे बढ़े हैं। ये ठीक है कि इन देशों में भारत की तरह खुली लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं पनप पाई लेकिन क्या यह कम बड़ी बात है कि वहां लोग भूखे नहीं मरते, दवा के अभाव में दम नहीं तोड़ते, प्राय: सभी बच्चे स्कूल जाते हैं। इन देशों में भारत की तरह मुट्ठीभर बेहद अमीर लोग भी रहते हैं लेकिन गरीबी और अमीरी की जैसी खाई भारत में खिंची हुई है, वैसी वहां नहीं है। इन पूर्वी देशों में चीन के अलावा मैंने भूखों और भिखारियों की भीड़ कहीं नहीं देखी। चीन में भी गैर-हान इलाकों में गरीब, अशक्त, अनपढ़ और भिखारियों को अभी देखा जा सकता है लेकिन चीन के कई शहर और गांव अमेरिका के शहरों और गांवों से भी आगे हैं।</p>
<h4><strong>भारत की अर्थव्यवस्था ब्रिटेन से 20 गुना बड़ी | Indian Economy</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">हम भारत को भी कई मामलों में दुनिया के ज्यादातर देशों से आगे गिना सकते हैं। जैसे इंटरनेट के उपभोक्ताओं की संख्या, नए काम-धंधे शुरू करने में, डिजिटल लेन-देन में, परमाणु शस्त्रों और विमानवाहक पोत के निर्माण आदि में भारत तीसरी दुनिया के देशों में चीन को छोड़ दें तो सबसे आगे है। भारत यों तो अर्थ-व्यवस्था के मामले में ब्रिटेन से आगे निकल गया है लेकिन दिमागी तौर पर अभी भी वह ब्रिटेन का उपनिवेश ही बना हुआ है।</p>
<h4><strong>Indian Economy</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">भारत पर आज भी ब्रिटिश संस्कृति हावी है। उससे पिंड छुड़ाने वाला गांधी और लोहिया के बाद कोई नेता देश में अब तक हुआ नहीं। यदि भारत को कोई सांस्कृतिक और बौद्धिक आजादी दिला सके तो भारत की अर्थव्यवस्था ब्रिटेन से 20 गुना बड़ी हो सकती है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Sep 2022 16:09:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>10 बैंकों को मिलाकर बनेंगे 4 बैंक</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय अर्थव्यवस्था: देश की आर्थिक हालत बिगड़ी, जीडीपी गिरी, वित्त मंत्री ने कई बैंकों के विलय का किया ऐलान  पीएनबी में यूबीआई-ओबीसी का मर्जर  बैंक कर्मियों की छँटनी नहीं होगी नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। सरकारी बैंकों को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने 10 बैंकों का विलय कर चार बड़े […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/10-banks-will-be-merged-to-form-4-banks/article-10351"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-08/indian-economy-gdp-4-banks-will-be-formed-by-joining-10-banks.jpg" alt=""></a><br /><h3>भारतीय अर्थव्यवस्था: देश की आर्थिक हालत बिगड़ी, जीडीपी गिरी, वित्त मंत्री ने कई बैंकों के विलय का किया ऐलान</h3>
<ul>
<li> पीएनबी में यूबीआई-ओबीसी का मर्जर</li>
<li> बैंक कर्मियों की छँटनी नहीं होगी</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>सरकारी बैंकों को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने 10 बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने की शुक्रवार को घोषणा की जिसके बाद देश में सर्वाजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या घटकर 12 रह जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यहाँ संवाददाता सम्मेलन में बताया कि ओरियंटल बैंक आॅफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक का पंजाब नेशनल बैंक में विलय किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार केनरा बैंक में सिंडिकेट बैंक का विलय और इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय होगा। यूनियन बैंक के साथ आँध्रा बैंक और कॉपोर्रेशन बैंक का विलय किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इन विलय प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद देश में सरकारी बैंकों की संख्या घटकर 12 रह जाएगी। वर्ष 2017 में देश में 27 सरकारी बैंक थे। वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया कि विलय के बावजूद बैंक कर्मचारियों की छँटनी नहीं की जाएगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले वर्ष 2017 में मोदी सरकार ने भारतीय स्टेट बैंक में उसके पाँच अनुषंगी बैंकों का विलय किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद विजया बैंक और देना बैंक का बैंक आफ बड़ौदा में विलय किया गया था। इन विलय प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र में भारतीय स्टेट बैंक, बैंक आफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, इंडियन बैंक, बैंक आफ इंडिया, सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, बैंक आॅफ महाराष्ट्रा और यूको बैंक रह जाएंगे। उधर देश की जीडीपी 5.8% से घटकर 5 प्रतिशत हुई।</p>
<ul>
<li>
<h2>इन बैंकों का विलय</h2>
</li>
<li> विलय-1- पंजाब नैशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक आॅफ कॉमर्स तथा यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया (दूसरा सबसे बड़ा बैंक, कारोबार-17.95 लाख करोड़ रुपये)</li>
<li> विलय-2-केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक (चौथा सबसे बड़ा बैंक, कारोबार-15.20 लाख करोड़ रुपये)</li>
<li> विलय-3-यूनियन बैंक, आंध्रा बैंक तथा कॉरपोरेशन बैंक (पांचवां सबसे बड़ा बैंक, कारोबार-14.6 लाख करोड़ रुपये)</li>
<li> विलय-4-इंडियन बैंक, इलाहाबाद बैंक (सातवां सबसे बड़ा बैंक, कारोबार-8.08 लाख करोड़ रुपये)</li>
</ul>
<h2 style="text-align:center;">6 साल में विकास दर सबसे निम्न स्तर पर</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3> जीडीपी 8.2 प्रतिशत से घटकर हुई 5.0 प्रतिशत</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून की तिमाही में स्थिर मूल्य पर जीडीपी 35.85 लाख करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 34.14 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस प्रकार जीडीपी विकास दर पाँच प्रतिशत दर्ज की गयी। विनिर्माण क्षेत्र के सकल मूल्य वर्द्धन की विकास दर जो पिछले साल अप्रैल-जून के दौरान 12.1 प्रतिशत रहा था, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में घटकर 0.6 प्रतिशत रह गया।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि, वानिकी एवं मात्स्यिकी की विकास दर 5.1 प्रतिशत से घटकर 2% प्रतिशत रह गयी। हालाँकि, खनन क्षेत्र की विकास दर 0.4 प्रतिशत से बढ़कर 2.7 प्रतिशत पर पहुँच गयी। बिजली, गैस, जलापूर्ति और यूटिलिटी सेवाओं की विकास दर 8.6 प्रतिशत और लोक प्रशासन, रक्षा एवं अन्य सेवाओं की विकास दर 8.5 प्रतिशत दर्ज की गयी। व्यापार, होटल, परिवहन, संचार एवं प्रसारण से जुड़ी सेवाओं की विकास दर 7.1 प्रतिशत दर्ज की गयी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/10-banks-will-be-merged-to-form-4-banks/article-10351</link>
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                <pubDate>Fri, 30 Aug 2019 21:20:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लुढ़कती भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकार के प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो गई है। अर्थव्यवस्था का हर क्षेत्र मांग की कमी से प्रभावित है। उद्योगों के बहुत से सेक्टर में विकास दर कई सालों में सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है। वर्ष 2016-17 में जीडीपी विकास दर 8.2 प्रतिशत थी,जो 2017-18 में घटकर 7.2 प्रतिशत रह गई और वर्ष 2018-19 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-declining-indian-economy-and-the-efforts-of-the-government/article-10327"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-08/indian-economygdp-growth-rate-financial-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो गई है। अर्थव्यवस्था का हर क्षेत्र मांग की कमी से प्रभावित है। उद्योगों के बहुत से सेक्टर में विकास दर कई सालों में सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है। वर्ष 2016-17 में जीडीपी विकास दर 8.2 प्रतिशत थी,जो 2017-18 में घटकर 7.2 प्रतिशत रह गई और वर्ष 2018-19 में जीडीपी की विकास दर 6.8 प्रतिशत रह गई। ताजा अधिकारिक आँकड़ों पर यकीन करें तो वर्ष 2019 की जनवरी से मार्च की तिमाही में जीडीपी की विकास दर 5.8 फीसदी रह गई थी,जो 5 साल में सबसे कम है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह तीन साल में विकास की रफ्तार में 1.5 प्रतिशत की कमी आ गई है। पिछले 20 वर्षों में ऐसा पहले सिर्फ दो बार हुआ है कि लगातार तीन तिमाही में वृद्धि दर गिरी हो। जीडीपी की विकास दर घटने से लोगों की आमदनी, खपत और निवेश,सब पर असर पड़ रहा है। जिन सेक्टरों पर इस मंदी का सबसे ज्यादा असर पड़ा है,वहाँ पर नौकरियाँ घटाने के ऐलान हो रहे हैं। आरबीआई ने अपनी मौद्रिक समिति की बैठक में भारतीय अर्थव्यवस्था के जीडीपी ग्रोथ रेट के पूवार्नुमानों को घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार बढ़ी अर्थव्यवस्था के मामले में भारत की रैंकिंग 7 वें नंबर पर आ गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दौर में प्रभावशाली निजी विमान सेवा कंपनी जेट एयरवेज आज बंद हो चुकी है। एयर इंडिया काफी घाटे में चल रही है। किसी दौर में टेलीकॉम सेक्टर की पहचान रही बीएसएनएल आज अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है। सरकारी कंपनी हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स ने हाल ही में बाजार से एक हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेकर अपने कर्मचारियों को वेतन दिया। यह इस दशक में पहली बार था। भारतीय डाक सेवा का वित्त वर्ष 2019 में वार्षिक घाटा 15 हजार करोड़ हो चुका है। भारत की सबसे बड़ी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कंपनी ओएनजीसी का अतिरिक्त कैश रिजर्व तेजी से घट रहा है। सरकार द्वारा गैर जरूरी अधिग्रहण के चलते आज यह कंपनी एक बड़े कर्ज के दबाव में आ गई है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3><em>खपत में गिरावट:</em></h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">विकास दर घटने से लोगों की आमदनी पर बुरा असर पड़ रहा है। देश में बाजार की सबसे बड़ी रिसर्चर कंपनी नील्सन की रिपोर्ट कहती है कि तेजी से खपत वाले सामान यानी फास्ट मूविंग कंजपशन गुड्स अर्थात एफएमसीजी की बिक्री की विकास दर इस साल जनवरी से मार्च के बीच 9.9 प्रतिशत थी, लेकिन इसी साल अप्रैल से जून की तिमाही में ये घटकर 6.2 फीसदी रह गई। एफएमसीजी के उपरोक्त आँकड़ों से स्पष्ट है कि लोग अब अनिवार्य आवश्यकताओं में भी कटौती कर रहे हैं। ब्रिटेनिया बिस्किट का कहना है कि अब लोग 5 रू के बिस्कुट को भी खरीदने से पहले सोच रहे हैं। इसी तरह पारले जी बिस्कुट कंपनी की हालत बिगड़ती जा रही है और लगभग 10 हजार लोगों की नौकरियाँ छंटनी के कगार पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्राहकों की खरीददारी के उत्साह में कमी का बड़ा असर आॅटो उद्योग पर पड़ा है। बिक्री घटी है और नौकरियों में बड़े पैमाने पर कटौती हो रही है। भारत की सबसे बड़ी कार निमार्ता मारूति सुजुकी ने जुलाई माह में पिछले साल के मुकाबले में कारों की बिक्री में 36 प्रतिशत की गिरावट की बुरी खबर दी है। खपत में कमी की वजह से टाटा मोटर्स जैसी कंपनियों को अपनी गाड़ियों के निर्माण में कटौती करनी पड़ी है। इसका नतीजा ये हुआ है कि कल पुर्जे और दूसरे तरीके से आॅटो सेक्टर से जुड़े हुए लोगों पर भी इसका बुरा असर पड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उदाहरण के लिए जमशेदपुर का टाटा मोटर्स का प्लांट दो माह से 30 दिनों में केवल 15 दिन ही चलाया जा रहा है। इससे जमशेदपुर और आस-पास के इलाकों में 1,100 से ज्यादा कंपनियाँ बंदी के कगार पर खड़ी हैं,जो टाटा मोटर्स को सप्लाई कर रही थी। आॅटो सेक्टर में अगर यही हालत रही तो तकरीबन 10 लाख लोगों को नौकरियाँ गंवानी पड़ सकती हैं। ज्ञात हो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आॅटोमोबाइल सेक्टर की अहमियत इसी से समझी जा सकती है कि मैन्युफैक्चरिंग में इसकी हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3><em>निर्यात में लगातार गिरावट:</em></h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">आमतौर पर जब घरेलू बाजार में खपत कम हो जाती है,तो भारतीय उद्योगपति,अपना सामान निर्यात करने और विदेश में बाजार तलाशतें हैं। अभी स्थिति ये है कि विदेशी बाजार में भी भारतीय सामान के खरीददार का विकल्प बहुत सीमित है। पिछले दो सालों से जीडीपी विकास दर में निर्यात का योगदान घट रहा है। मई माह में निर्यात की विकास दर 3.9 प्रतिशत थी,लेकिन इस साल जून में निर्यात में 9.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। ये 41 महीनों में सबसे कम निर्यात दर है। चीन-अमेरिका ट्रेड वार का विस्तार भारत के साथ भी हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में निर्यात वृद्धि के लिए विशिष्ट रणनीति की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए चीन में अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ने से एक रिक्तता पैदा हुई है,ऐसे में भारत लगभग 57 प्रकार के उत्पादों को चीन में बेच सकता है,जो चीन के साथ हमारे एकपक्षीय व्यापार में संतुलन बना सकता है। हम लोग देख सकते हैं कि किस तरह ट्रेड वार के संकट को वियतनाम और बांग्लादेश ने अपने लिए अवसर में बदला। जब चीन ने टेक्सटाइल सेक्टर को छोड़कर अधिक मूल्य वाले उत्पादों पर जोर दिया तो उस जगह को भरने के लिए बांग्लादेश और वियतनाम तेजी से आएँ,वहीं भारतीय टेक्सटाइल इसका लाभ नहीं उठा सका।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><em>बचत में गिरावट:</em></h3>
<p style="text-align:justify;">अर्थव्यवस्था का विकास धीमा होने का रियल स्टेट सेक्टर पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है। एक आकलन के अनुसार इस वक्त देश के 30 बड़े शहरों में 12.76 लाख मकान बिकने को पड़े हुए हैं। कोच्चि में मकानों की उपलब्धता 80 महीनों के उच्चतम स्तर पर है,वहीं जयपुर में 59 महीनों ,लखनऊ में 55 महीनों और चैन्नई में ये 75 महीनों के अधिकतम स्तर पर है। इसका ये मतलब है कि इन शहरों में जो मकान बिकने को तैयार हैं,उनके बिकने में 5 से 7 वर्ष लग रहे हैं। आमदनी बढ़ नहीं रही है और बचत की रकम बिना बिके मकानों में फंसी हुई है। वित्त वर्ष 2011-12 में घरेलू बचत ,जीडीपी का 34.6 प्रतिशत थी,लेकिन अब यह बचत दर जीडीपी के अनुपात में घटकर 17% पर आ गई है,जो पिछले 20 वर्षों में सबसे कम है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3><em>वित्त मंत्री द्वारा उठाए गए कदम</em></h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्री ने आर्थिक मंदी के बीच अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए “32 सूत्रीय” उपायों की घोषणा की । इसमें सर्वप्रथम कदम फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफपीआई) और घरेलू इक्विटी इन्वेस्टर्स पर बढ़ाए गए सुपर रिच सरचार्ज को वापस लेना। इसके अतिरिक्त सरकार ने बैंक लॉन और रेपो रेट को जोड़ने की भी घोषणा की। ज्ञात हो,पिछले दिसंबर से अब तक रेपो रेट में लगातार चार बार कटौती की गई है,लेकिन स्वयं आरबीआई का कहना है कि यह कटौती उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँच रही है। ऐसे में यह घोषणा भी महत्वपूर्ण है। जहाँ तक बात है गहन ढ़ाँचागत दिक्कतों की, तो उन्हें हल करना शेष है और निवेश भी बढ़ाना है। इसके लिए केंद्र सरकारी को काफी काम करना होगा। सरकार ने आर्थिक मंदी को दूर करने के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है,लेकिन इसके लिए ढ़ांचागत सुधारों के तरफ भी प्रतिबद्धता आवश्यक है।<br />
<strong><em>-राहुल लाल</em></strong></p>
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                <pubDate>Wed, 28 Aug 2019 20:52:51 +0530</pubDate>
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