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                <title>decision - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>CBSE का सराहनीय फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित हो गए हैं, ऐसे में केंद्रीय माध्यमिक स्कूल शिक्षा (CBSE) बोर्ड ने मैरिट सूची न जारी करने का सराहनीय निर्णय लिया, जो समय की आवश्यकता है। किसी भी परीक्षा में रैकिंग अच्छा माहौल पैदा कर सकती है लेकिन बाल मन पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है। आधुनिक शिक्षा में मेरिट […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/education-employement/commendable-decision-of-cbse/article-47603"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/cbse.jpg" alt=""></a><br /><p>12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित हो गए हैं, ऐसे में केंद्रीय माध्यमिक स्कूल शिक्षा (CBSE) बोर्ड ने मैरिट सूची न जारी करने का सराहनीय निर्णय लिया, जो समय की आवश्यकता है। किसी भी परीक्षा में रैकिंग अच्छा माहौल पैदा कर सकती है लेकिन बाल मन पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है। आधुनिक शिक्षा में मेरिट और अच्छे नंबरों का दबाव स्टूडेंट्स पर इतना बढ़ चुका है कि वे मानसिक रूप से उबर नहीं पा रहे हैं। इसी दबाव की नीति में स्टूडेंट हताश और तनावग्रस्त हो जाता है और आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर मजबूर हो जाता है।</p>
<p>कोचिंग संस्थानों को अपनी व्यवस्था में परिवर्तन लाना चाहिए। जब छात्रों (CBSE) पर पढ़ाई के दबाव की बात आती है तो प्राय: उस मानसिक तनाव की ही चर्चा होती है जिससे वे प्राय: जूझते हैं। मगर इस पर कम ही लोग ध्यान देते हैं कि जिन बच्चों पर पढ़ाई और प्रदर्शन का दबाव होता है, उनकी शारीरिक गतिविधियां भी कम हो जाती हैं। आजकल जो छात्र सातवीं-आठवीं क्लास से ही डॉक्टरी-इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोचिंग क्लास में दाखिला ले रहे हैं, उन पर अच्छा परिणाम लाने का इतना दबाव होता है कि वह खेलने-कूदने तक के लिए समय नहीं निकाल पाते।</p>
<p>अब सोचने वाली बात यह है कि जिस पीढ़ी के लोग अपने बचपन और जवानी में (CBSE) खूब खेले हैं, चले-दौड़े हैं, वह भी 45-50 साल की उम्र में बढ़ते वजन, घुटने के दर्द और सर्वाइकल जैसी बीमारियों से परेशान हो जाते हैं। ऐसे में जो बच्चे बचपन से शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं हैं, चिकित्सकों का कहना है कि उनके जल्दी बीमार होने की संभावनाएं अधिक होती हैं। दरअसल, प्रतियोगिता परीक्षाओं में 12वीं के अंकों की बजाए ज्ञान की समझ को प्रमुख माना जाता है। यही कारण है कि एनडीए/एनए/नीट जेईई मेन्स परीक्षाओं को कई विद्यार्थी बिना किसी कोचिंग के घर में बैठकर तैयारी कर पास कर लेते हैं। यह सब ज्ञान की बदौलत है न कि रट्टे लगाना। विद्यार्थियों के मन पर किसी भी प्रकार की परीक्षा का बोझ न डाला जाए और न ही परिणाम वाले दिन बच्चे अभिभावकों से छुपते रहें, इसीलिए आवश्यक है कि शिक्षा का मनोविज्ञान, समाज विज्ञान से टूटा नाता जोड़ा जाए।</p>
<p>आइंस्टीन ने कहा था, ‘यदि कोई मछली पेड़ पर नहीं चढ़ सकती तो इसका मतलब (CBSE) यह नहीं कि वह स्मार्ट नहीं है। उसकी अपनी अलग कुछ खूबी है।’ इस बात पर छात्रों और युवाओं को थोड़ा सोचने की जरूरत है। युवा और छात्र भी समझें कि कोई भी परीक्षा, समस्या या दबाव इतना बड़ा नहीं है कि उसमें असफलता से घबराना चाहिए। स्कूल में शिक्षा व रोजगार में एक पुल स्थापित किया जाए। विद्यार्थियों को छोटी कक्षाओं में ही उसकी रूचि के अनुसार किसी पेशे की शिक्षा के साथ जोड़ा जाए ताकि जब वह स्कूल छोड़े तब किसी रोजगार के समर्थ हो। सरकार को चाहिए कि शिक्षा नीति को और मजबूत बनाए। इसके साथ ही सामाजिक सरोकारों पर भी मंथन किया जाए। शिक्षा को जितना व्यवहारिक बनाया जाएगा, विद्यार्थी उतनी लगन से पढ़ाई करेंगे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:–</strong><a title="Wrestlers Protest: पहलवानों के धरने के बीच भारतीय ओलंपिक संघ का बड़ा फैसला, उठाए ये बड़े कदम" href="http://10.0.0.122:1245/indian-olympic-associations-big-decision/">Wrestlers Protest: पहलवानों के धरने के बीच भारतीय ओलंपिक संघ का बड़ा फैसला, उठाए ये बड़े कदम</a></p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 May 2023 09:42:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Article 370 : याचिकाओं को वृहद पीठ को भेजने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[महाराजा हरि सिंह ने भारत की मदद इसलिए मांगी थी क्योंकि वहां विद्रोही घुस चुके थे। वहां पर आपराधिक घटनाएं हुईं और आंकड़े बताते हैं कि अलगाववादियों को पाकिस्तान से ट्रेनिंग दी गई ताकि यहां बबार्दी की जा सके।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/article-370-the-decision-in-the-supreme-court-about-dispatch-of-orders-to-the-larger-bench-is-safe/article-12699"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/article-370.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">संविधान पीठ के समक्ष एक-एक कर ऐतिहासिक घटनाक्रम का दिया ब्योरा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित अनुच्छेद 370 (Article 370) को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं को वृहद पीठ के सुपुर्द करने या ना करने के मामले में गुरुवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति एन वी रमन की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने याचिकाकर्ताओं और केंद्र सरकार की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से दिनेश द्विवेदी, राजीव धवन एवम् संजय पारिख ने दलीलें दी, जबकि एटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">महाराजा हरि सिंह ने भारत की मदद इसलिए मांगी थी क्योंकि वहां विद्रोही घुस चुके थे</h3>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले सुनवाई की शुरूआत करते हुए वेणुगोपाल ने दलील दी कि अलगाववादी वहां जनमत संग्रह का मुद्दा उठाते आए हैं क्योंकि वह जम्मू कश्मीर को अलग संप्रभु राज्य बनाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि महाराजा हरि सिंह ने भारत की मदद इसलिए मांगी थी क्योंकि वहां विद्रोही घुस चुके थे।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">वहां पर आपराधिक घटनाएं हुईं और आंकड़े बताते हैं ।</li>
<li style="text-align:justify;">अलगाववादियों को पाकिस्तान से ट्रेनिंग दी गई ताकि यहां बबार्दी की जा सके।</li>
<li style="text-align:justify;">एटॉर्नी जनरल ने कहा कि जनमत संग्रह कोई स्थायी समाधान नहीं था।</li>
<li style="text-align:justify;">संविधान पीठ के समक्ष एक-एक कर ऐतिहासिक घटनाक्रम का ब्योरा दिया।</li>
<li style="text-align:justify;">साथ ही कश्मीर का भारत में विलय और जम्मू कश्मीर संविधान सभा के गठन के बारे में विस्तार से बताया।</li>
</ul>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2020 16:36:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अकाली दल का अजीब निर्णय</title>
                                    <description><![CDATA[शिरोमणी अकाली दल ने राष्ट्रीय नागरिकता संशोधन कानून में मुस्लमानों को शामिल न करने के विरोध में दिल्ली विधान सभा चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया, जो अजीबो-गरीब निर्णय है। भले ही अकाली दल इसके पीछे पार्टी के सिद्धांतों का दावा करता है लेकिन राजनीतिक नफे-नुक्सान में सिद्धांतों की बात हजम होना मुश्किल है। देश […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/editorial/akali-dals-strange-decision/article-12664"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/strange-decision.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">शिरोमणी अकाली दल ने राष्ट्रीय नागरिकता संशोधन कानून में मुस्लमानों को शामिल न करने के विरोध में दिल्ली विधान सभा चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया, जो अजीबो-गरीब निर्णय है। भले ही अकाली दल इसके पीछे पार्टी के सिद्धांतों का दावा करता है लेकिन राजनीतिक नफे-नुक्सान में सिद्धांतों की बात हजम होना मुश्किल है। देश के गृहमंत्री व भाजपा नेता अमित शाह बार-बार कह चुके हैं कि वह सीएए से पीछे हटने वाले नहीं। अकाली दल के निर्णय के बाद उन्होंने लखनऊ रैली में फिर दोहराया,‘मैं डंके की चोट पर कह रहा हूँ कि सीएए वापिस नहीं होगा।’</h4>
<h4 style="text-align:justify;">अमित शाह के इस बयान के बाद अकाली दल का अगला कदम क्या होगा इसको लेकर अकाली दल चुप है। हैरानी वाली बात यह है कि सीएए पर सहमति न होने के बावजूद अकाली-भाजपा केंद्र सरकार की हिस्सेदार भी हैं, यहीं नहीं पंजाब में भी अकाली दल-भाजपा का गठबंधन बरकरार है। संसद में भी सीएए बिल पास होने के दौरान अकाली दल ने समर्थन किया था। वास्तव में अकाली दल ने भी बिहार में जनता दल (यू) की तरह चाल चली है। सीएए के साथ असहमत जनता दल राज्य में भाजपा के साथ मिलकर सरकार चला रहा है और दिल्ली में भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहा है। जहां तक पंजाब में अकाली दल की भाजपा को लेकर रणनीति का सवाल है, अकाली दल भाजपा को दिल्ली के माध्यम से कड़ा संकेत दे गया है। दिल्ली चुनाव अकाली दल के लिए कोई प्रतिष्ठा का सवाल भी नहीं हैं।</h4>
<h4 style="text-align:justify;">अकाली दल का आधार पंजाब में ही है जहां पार्टी तीन बार भाजपा के सहयोग के साथ सरकार बना चुकी है। यहां भाजपा के साथ गठबंधन के बावजूद अकाली दल का सरकार में दबदबा रहा है। पिछले दिनों पंजाब के कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने 2022 की विधान सभा चुनाव में भाजपा की सीटों का हिस्सा बढ़ाने के बयान दिए थे। अकाली दल के पास दिल्ली चुनाव से बड़ा कोई मौका नहीं था जब उसने सीएए के नाम पर भाजपा को दिखा दिया कि भविष्य में अकाली दल भाजपा के प्रति सख्त रवैया भी अपना सकता है। इस पैंतरे से अकाली दल पंजाब में सीएए का खुला समर्थन करने से भी पीछे हट गया है और ज्यादा हिस्सा लेने का सुर पकड़े हुए पंजाब भाजपा को भी संकेत दे दिया। यूं भी अब राजनीति में सिद्धांतों के प्रति स्पष्टता कम व सत्ता के लिए पैंतरेबाजी ज्यादा है। अकाली दल केंद्र में मंत्री पद भी नहीं छोड़ना चाहता और सीएए के विरोध का राग भी अलाप रहा है। यह कहना उचित होगा कि राजनीति में सिद्धांतों की पालना की अपेक्षा सिद्धांतों का शोर ज्यादा है।</h4>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/editorial/akali-dals-strange-decision/article-12664</link>
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                <pubDate>Tue, 21 Jan 2020 20:32:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर धमाके: चारों दोषियों की सजा का ऐलान आज</title>
                                    <description><![CDATA[13 मई 2008 को परकोटे में 8 जगहों पर सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इनमें 71 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 185 जख्मी हुए थे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/jaipur-serial-blast-case-final-decision-at-special-court/article-11881"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/jaipur-blast...jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">13 मई 2008 को जयपुर में 8 जगह धमाके हुए थे, 185 लोग हुए थे घायल |<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Jaipur Serial Blast</span></span></h2>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (एजेंसी)।</strong> साढ़े 11 साल पहले जयपुर में सीरियल <strong>(<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Jaipur Serial Blast</span></span>)</strong> धमाके करने वाले 4 दोषियों की सजा पर  आज शाम शुक्रवार को 4 बजे फैसला होगा। गुरुवार को ब्लास्ट मामलों के विशेष कोर्ट में चारों मोहम्मद सैफ उर्फ करीऑन, सरवर आजमी, सैफुर उर्फ सैफुर्रहमान और मोहम्मद सलमान को पेश किया गया था। सरकारी वकील ने मामले को दुर्लभतम मानते हुए चारों को फांसी की सजा देने की मांग की। करीब आधा घंटे की बहस के दौरान चारों परेशान दिखे। 13 मई 2008 को परकोटे में 8 जगहों पर सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इनमें 71 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 185 जख्मी हुए थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">बम ब्लास्ट केस में 8 केस दर्ज किए गए</h2>
<p style="text-align:justify;">13 मई 2008 की शाम परकोटा इलाके में 12 से 15 मिनट के अंतराल में चांदपोल गेट, बड़ी चौपड़, छोटी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार, जौहरी बाजार और सांगानेरी गेट पर बम धमाके हुए थे। पहला ब्लास्ट खंदा माणकचौक, हवामहल के सामने शाम 7:20 बजे हुआ था, फिर एक के बाद एक 8 धमाके हुए। बम ब्लास्ट केस में 8 केस दर्ज किए थे। अभियोजन की ओर से मामले में 1293 गवाहों के बयान कराए थे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कोर्ट ने इंडियन मुजाहिदीन को सीरियल ब्लास्ट के लिए जिम्मेदार माना</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>कोर्ट ने सीरियल ब्लास्ट के लिए आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) को जिम्मेदार माना है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> साथ ही, बाटला मुठभेड़ में मारे गए दोनों आतंकियों को भी कोर्ट ने दोषी करार दिया।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इसमें आतिफ अमीन को ब्लास्ट का मुख्य साजिशकर्ता माना है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि जेहाद की आड़ में जेहादी मानसिकता से विस्फोट किए गए।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> यह मानसिकता यहीं नहीं थमी।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इसके बाद अहमदाबाद और दिल्ली में भी विस्फोट किए गए।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Dec 2019 13:07:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गहलोत सरकार का यू-टर्न ! जनता नहीं, अब पार्षद चुनेंगे मेयर-सभापति-निकाय प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में इसे मंज़ूरी दे दी गई। Gehlot Cabinet Decision जयपुर (एजेंसी)। राजस्थान की गहलोत सरकार (Gehlot Cabinet Decision ) ने आखिरकार निकाय प्रमुख, मेयर और सभापति के चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से करवाने का फैसला ले ही लिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/gehlot-cabinet-decision-direct-elections-of-local-bodies-heads/article-10771"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/gehlot-cabinet-decision.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में इसे मंज़ूरी दे दी गई। <strong>Gehlot Cabinet Decision</strong></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (एजेंसी)।</strong> राजस्थान की गहलोत सरकार <strong>(Gehlot Cabinet Decision )</strong> ने आखिरकार निकाय प्रमुख, मेयर और सभापति के चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से करवाने का फैसला ले ही लिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होने के बाद इसे मंज़ूरी दे दी गई। गौरतलब है कि निकाय प्रमुखों के चुनाव प्रत्यक्ष रूप से करवाए जाने को लेकर तत्कालीन गहलोत सरकार ने ही फैसला लिया था। लेकिन अब अपनी ही तत्कालीन सरकार का फैसला पलटते हुए चुनाव को अप्रत्यक्ष करवाने का फैसला लिया गया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पसोपेश में थी सरकार | <strong>Gehlot Cabinet Decision</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">निकाय चुनाव प्रमुखों के चुनाव प्रत्यक्ष करवाए जाएं या अप्रत्यक्ष, इसे लेकर सरकार पसोपेश में थी। सीएम गहलोत ने साफ़ किया था कि सभापति और महापौर के चुनाव अप्रत्यक्ष करवाए जाने को लेकर पार्टी मंच से वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की मांग उठ रही थी। इसी को मद्देनज़र रखते हुए यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल को प्रदेश भर के नेताओं से फीडबैक लेकर रिपोर्ट बनाने का ज़िम्मा सौंपा गया था। बताया गया था कि धारीवाल की रिपोर्ट के बाद ही सरकार महापौर और सभापतियों के चुनाव को लेकर कोई फैसला लेगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">… तो इसलिए गहलोत सरकार बैकफुट पर! <strong>Gehlot Cabinet Decision</strong></h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>राज्य में कांग्रेस की सरकार बनते ही गहलोत सरकार ने विधानसभा में शैक्षणिक बाध्यता की शर्त हटाते हुए निगम महापौर और निकाय के सभापतियों के चुनाव सीधे करवाने का निर्णय कर दिया था। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>लेकिन लोकसभा चुनावों में राष्ट्रवाद के मुद्दे पर प्रदेश में सभी 25 सीटों पर सूपड़ा होने और हाल ही में जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद राजनीतिक हालात बदल गए। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जानकार बताते हैं कि कांग्रेस नेताओं को डर सता रहा था कि राष्ट्रवाद और धारा 370 के मामले में लोकसभा की तरह महापौर और सभापतियों के चुनाव में कांग्रेस को नुकसान न उठाना पड़ जाए। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इसे लेकर कांग्रेस नेताओं ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी महापौर और सभापतियों के चुनाव सीधे नहीं कराने का सुझाव दिया था।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Oct 2019 14:11:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अध्यापकों की नौकरी पर लटकी तलवार</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार के प्राईवेट स्कूलों को अप्रैल 2019 से बंद करने के निर्णय के चलते अध्यापकों में रोष मानसा/बुढ़लाडा। पंजाब सरकार की ओर से पकी ऐफीलेशन के लिए शर्तें पुरी न करते प्राईवेट स्कूलों को अप्रैल 2019 से बंद करने के निर्णय के साथ लाखों अध्यापक बेरोजगार हो जाएंगे। उपरोक्त शब्द शनिवार को यहां प्राईवेट स्कूलों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;">सरकार के प्राईवेट स्कूलों को अप्रैल 2019 से बंद करने के निर्णय के चलते अध्यापकों में रोष</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>मानसा/बुढ़लाडा। </strong>पंजाब सरकार की ओर से पकी ऐफीलेशन के लिए शर्तें पुरी न करते प्राईवेट स्कूलों को अप्रैल 2019 से बंद करने के निर्णय के साथ लाखों अध्यापक बेरोजगार हो जाएंगे। उपरोक्त शब्द शनिवार को यहां प्राईवेट स्कूलों के विभिन्न विषयों के अध्यापकों ने सरकार के इस निर्णय के खिलाफ रोष प्रकट करते हुए कहे। इस निर्णय पर सरकार को पुन विचार करने की अपील करते ऐसोसीएटड स्कूलों के यहां इकट्ठे हुए सैंकड़ों अध्यापक ने कहा कि एक तरफ सरकार बेरोजगारी को खत्म करने के लिए रोजगार के साधन पैदा करने के लिए रोजगार मेलों का आयोजन कर रही है व वहीं दूसरी तरफ एसोसीएटड स्कूलों में काम करते एक लाख अध्यापकों के रोजगार को स्कूल बंद कर बेरोजगार कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पंजाब में एसोसीएटड के 2100 स्कूलों में लगभग मध्य वर्गीय जैसे लोगों के 5लाख बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में मध्य वर्गीय लोगों को शिक्षा प्रदान करन वाले इन स्कूलों को 2011 में अकाली सरकार समय एसोसीएटड स्कूलों का दर्जा देकर स्कूलों की बहाली की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल एसोसीएटड के नेता जगदीश सिंह ने कहा कि एसोसीएटड स्कूल 1988 की एक्ट अधीन सरकार की ओर से अमल में लाया गया था। उन्होंने बताया कि इन स्कूलों में टैट पास उच्च योग्यता वाले अध्यापक विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। बैठक दौरान सैंकड़ों अध्यापकों ने मुख्य मंत्री पंजाब को एक पत्र लिख कर अपना रोजगार बचाने की अपील की गई।</p>
<h2 style="text-align:center;">स्कूलों को पकी मान्यता देने के लिए शर्तों को बंद किए जाने की मांग</h2>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने एसोसीएटड स्कूलों को बंद करने की कोशिश की गई तो इन स्कूलों में काम करते उच्च योग्यता वाले अध्यापकों को कम से कम 5000 रुपए महीना गुजारा भत्ता दिया जाये। बैठक दौरान प्रस्ताव पास किया गया कि इन स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे उच्च योग्यता टैट पास अध्यापक गवर्नर पंजाब, शिक्षा मंत्री व चेयरमैन स्कूल शिक्षा बोर्ड को रोजगार बचाओ एसोसीएटड स्कूल बचाओ मुहिम को घर-घर तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने मांग की कि इन स्कूलों को पकी मान्यता देने के लिए शर्ताें को बंद किया जाए।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/fear-in-teachers-by-the-decision-to-shut-down-private-schools/article-7617</link>
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                <pubDate>Sun, 10 Feb 2019 15:47:02 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदूषण के खिलाफ एनजीटी का कड़ा निर्णय</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली सरकार की लापरवाही को जिम्मेवार ठहराते हुए 25 करोड़ रुपए जुर्माना ठोका नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल  (NGT strong decision against pollution) ने बढ़ रहे प्रदूषण के पीछे दिल्ली सरकार की लापरवाही को जिम्मेवार ठहराते हुए 25 करोड़ रुपए जुर्माना ठोका है। नई बात यह है कि जुर्माना सरकार की बजाय अधिकारियों को अपनी जेब से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/editorial/ngt-strong-decision-against-pollution/article-6804"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/77.jpg" alt=""></a><br /><h2>दिल्ली सरकार की लापरवाही को जिम्मेवार ठहराते हुए 25 करोड़ रुपए जुर्माना ठोका</h2>
<p style="text-align:justify;">नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल  <strong>(NGT strong decision against pollution)</strong> ने बढ़ रहे प्रदूषण के पीछे दिल्ली सरकार की लापरवाही को जिम्मेवार ठहराते हुए 25 करोड़ रुपए जुर्माना ठोका है। नई बात यह है कि जुर्माना सरकार की बजाय अधिकारियों को अपनी जेब से भरना होगा। नि:संदेह ट्रिब्यूनल की यह कार्रवाई उचित है, क्योंकि सरकारी खजाने से पैसा जा रहा था जिसकी अधिकारियों को रत्ती भर भी सिरदर्दी नहीं थी। आम तौर पर अधिकारी कानून की उल्लंघना करने वाले फैक्ट्री मालिकों के साथ मिलकर प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते।</p>
<h2>अधिकारी चाहकर भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते</h2>
<p style="text-align:justify;">इससे रिश्वतखोरी का धंधा बढ-फूल रहा है। अधिकारी वेतन के अलावा कई गुणा ज्यादा पैसा रिश्वत के रूप में वसूलकर अपनी जेब भर रहे थे। इस निर्णय का मजबूत पक्ष यह है कि अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ेगी लेकिन निर्णय का एक कमजोर पक्ष यह भी है कि जो फैक्ट्री मालिक अधिकारियों की परवाह न करते हुए सीधा राजनेताओं के साथ सांठगांठ कर लेते हैं, अधिकारी चाहकर भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते, यह उन अधिकारियों के साथ अन्याय भी होगा। दरअसल एनजीटी का निर्णय अधिकारियों की लापरवाही के खिलाफ केवल सजा जुर्माने तक ही सीमित है।</p>
<h2>राजनेता अधिकारियां के हाथ बांधकर रखते हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">इस मामले का प्रशासनिक व्यवस्था से सबंधित पक्ष गायब है। यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वे प्रशासनिक व्यवस्था को ऐसा बनाएं कि गैर-कानूनी कार्य करने वालों की राजनैतिक पहुंच खत्म हो। मंत्रियों व विधायकों की भी जिम्मेदारी तय की जाए। आम तौर पर मंत्री/ विधायक अपनी नाकामी अधिकारियों के सिर मढ़ देते हैं। एक तरफ राजनेता अधिकारियां के हाथ बांधकर रखते हैं दूसरी तरफ किसी नुकसान के लिए अधिकारियों को आगे कर देते हैं। ऐसे में यदि कोई उपलब्धि हो तो श्रेय मंत्री या सरकार को मिलता है।</p>
<h2>बड़े-बड़े घोटालों में मंत्री बरी हो रहे हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">देश की समस्याएं जवाबदेही व इमानदारी की कमी के कारण बढ़ रही हैं। बड़े-बड़े घोटालों में मंत्री बरी हो रहे हैं लेकिन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट जरूर दायर हो जाती है। यहां प्रश्न यह उठता है कि यदि अधिकारी चालाक हैं तो फिर मंत्री किस मर्ज की दवा हैं जो भ्रष्ट अधिकारियों की निगरानी करने में नाकाम रहते हैं। मंत्रियों को पद केवल वेतन और भत्तों के लिए ही नहीं दिए जाते। एनजीटी मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकता लेकिन यह तो मुख्यमंत्री ने देखना है कि उसके मंत्री सरकार की नीतियों के अनुसार काम कर भी रहे हैं या नहीं।</p>
<h2>एनजीटी का अधिकारियों के खिलाफ सख्ती का निर्णय सही</h2>
<p style="text-align:justify;">एनजीटी का अधिकारियों के खिलाफ सख्ती का निर्णय सही है, लेकिन बीमारी की जड़ को हाथ डालने के लिए सरकारों को अपनी व्यवस्था में भी सुधार करना होगा। ‘राइट टू रीकाल’ की चर्चा भी हमारे देश में चल चुकी है लेकिन यह काम सरकारों ने करना है। अपने ही मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कौन बहादुरी दिखाता है? कौन नियम बनाता है? भ्रष्टाचार या राजनीति में बढ़ रहे अपराधीकरण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ही फैसले सुना रही है। राजनेता भी अपनी आत्मा की आवाज सुनें और कानून कायदों को लागू करने की जिम्मेदारी निभाएं।</p>
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<p>NGT, Strong, Decision, Against, Pollution</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/editorial/ngt-strong-decision-against-pollution/article-6804</link>
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                <pubDate>Tue, 04 Dec 2018 10:25:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसी मर्ज की दवा न बना नोटबंदी का फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[नोटबंदी लागू करने के दो साल बाद भी वे परिणाम नहीं दिख सके जिनके दावे सरकार ने जोर-शोर से किए थे। सैद्धांतिक तौर पर नोटबन्दी एक आर्थिक-राजनैतिक निर्णय होता है जिसे लागू करने की जिम्मेदारी सरकार की होती है किंतु जब इस निर्णय का संतुलन बिगड़कर केवल राजनेताओं के हाथों में आ जाए तो अर्थ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/editorial/no-merger-decision-made-by-the-court/article-6554"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/no-merger-decision-made-by-the-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नोटबंदी लागू करने के दो साल बाद भी वे परिणाम नहीं दिख सके जिनके दावे सरकार ने जोर-शोर से किए थे। सैद्धांतिक तौर पर नोटबन्दी एक आर्थिक-राजनैतिक निर्णय होता है जिसे लागू करने की जिम्मेदारी सरकार की होती है किंतु जब इस निर्णय का संतुलन बिगड़कर केवल राजनेताओं के हाथों में आ जाए तो अर्थ का अनर्थ हो जाता है। अब यह बात समझ आती है कि नोटबन्दी आर्थिक की अपेक्षा अधिक राजनीतिक निर्णय था जिस संदर्भ में केंद्रीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों या आर्थिक विशेषज्ञों की कोई ज्यादा बैठकें नहीं हुई बल्कि जल्दबाजी में यह निर्णय लिया गया। नोटबन्दी का निर्णय एक राजनैतिक दबाव व राजनैतिक इच्छा के तहत लिया गया। भले ही यह निर्णय बेहद गुप्त तरीके से लेने होते हैं लेकिन किसी एक नेता की इच्छा या जिद्द की बजाए इस संबंधी आर्थिक विशेषज्ञों की सलाह ही मुख्य होती है। केंद्रीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों ने नोटबन्दी से कुछ घंटे पहले हुई मीटिंग में सरकार के इस दावे को नकार दिया था कि नोटबन्दी से कालेधन पर रोक लगेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारी यदि नोटबन्दी के विरुद्ध नहीं थे, तो वह इसे सभी समस्याओं का समाधान भी नहीं मानते थे, नतीजे भी सामने हैं। बैंक आधिकारियों के अनुसार नोटबन्दी वाले नोटों में से 99.3 प्रतिशत नोट बैंकों में जमा हो गए हैं। दरअसल नोटबन्दी एक आर्थिक इंकलाब की तरह होता है जिसने देश को नया जन्म देना होता है लेकिन देश में नोटबन्दी से बने हालातों के कारण सिवाय आम लोगों को कतारों में लगने की परेशानियों से कुछ नहीं मिला। कश्मीर में आतंकवाद नहीं घटा बल्कि आतंकवादी हमले बढ़ते ही जा रहे हैं। कश्मीर में आए दिन पुलिस व सुरक्षा कर्मियों पर हमले हो रहे हैं। पत्थरबाजों की भीड़ भी पहले के मुकाबले बढ़ रही है। विकास व रोजगार के अवसर नहीं बढ़े। यह मानने में कोई इंकार नहीं होना चाहिए कि विकास के लिए नोटबंदी ही एकमात्र समाधान नहीं है। अमेरिका व यूरोपीय देश बिना नोटबन्दी से तरक्की कर रहे हैं</p>
<p style="text-align:justify;">आज भी हमें कृषि के लिए इजराइल जैसे देशों की तरफ देखना पड़ रहा है। हथियारों में हम समर्थ बन रहे हैं लेकिन आर्थिक तौर पर लगातार नीचे जा रहे हैं। भुखमरी में हमारे की अपेक्षा नेपाल व बांग्लादेश जैसे देशों में भी हालात हमारे से अच्छे हैं। नोटबन्दी के बावजूद दुकानदार, किसान, छोटा उद्योगपति व व्यापारी परेशान है जब तक देश के आर्थिक विशेषज्ञों को अनदेखाकर आर्थिक निर्णय राजनैतिक नेताओं द्वारा लिए जाएंगे तब तक उम्मीद के अनुसार परिणाम नहीं आएंगे। सरकार को नोटबन्दी पर चुप्पी की बजाय इसकी समीक्षा इमानदारी से करनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/editorial/no-merger-decision-made-by-the-court/article-6554</link>
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                <pubDate>Sat, 10 Nov 2018 11:59:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निर्भया केस:  दोषियों की फांसी रहेगी बरकरार या मिलेगी राहत?  फैसला आज</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। निर्भया गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट चार में से तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका पर आज  सोमवार को फैसला सुनाएगा। बता दें कि निर्भया कांड के चार दोषियों में शामिल अक्षय कुमार सिंह (31) ने सुप्रीम कोर्ट के पांच मई 2017 के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की है। अक्षय कुमार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/nirbhaya-case-will-the-culprits-be-hanged-or-will-they-get-relief-todays-decision/article-4747"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/high-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> निर्भया गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट चार में से तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका पर आज  सोमवार को फैसला सुनाएगा। बता दें कि निर्भया कांड के चार दोषियों में शामिल अक्षय कुमार सिंह (31) ने सुप्रीम कोर्ट के पांच मई 2017 के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की है। अक्षय कुमार सिंह के वकील एपी सिंह ने कहा कि अक्षय ने अब तक पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की है, हम इसे दाखिल करेंगे। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ के. मुकेश (29), पवन गुप्ता (22) और विनय शर्मा की याचिकाओं पर सोमवार को अपना फैसला सुनाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2017 के फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट और निचली अदालत द्वारा 23 वर्षीय पैरामेडिक छात्रा से 16 दिसंबर 2012 को गैंगरेप और हत्या के मामले में उन्हें सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा था. निर्भया के साथ दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में छह लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया था और गंभीर चोट पहुंचाने के बाद सड़क पर फेंक दिया था। सिंगापुर के माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल में 29 दिसंबर 2012 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल था, उसे किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी ठहराया और तीन साल के लिए सुधार गृह में रखे जाने के बाद रिहा कर दिया गया था।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Jul 2018 02:59:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>कुमारस्वामी को पांच साल देने पर नहीं हुआ फैसला: डिप्टी सीएम</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरु (एंजेसी)। कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार के विश्वास मत से पहले ही कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि जदएस के नेतृत्व में पांच साल तक सरकार चलाने पर फैसला नहीं हुआ है। कांग्रेस कोटे से उप मुख्यमंत्री बने जी परमेश्वरा ने कहा, पांच साल तक किन शर्तो के साथ कर्नाटक में गठबंधन की सरकार चलेगी, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/decision-not-to-give-kumaraswamy-five-years-deputy-cm/article-3785"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/dp-cm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बेंगलुरु (एंजेसी)। </strong>कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार के विश्वास मत से पहले ही कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि जदएस के नेतृत्व में पांच साल तक सरकार चलाने पर फैसला नहीं हुआ है। कांग्रेस कोटे से उप मुख्यमंत्री बने जी परमेश्वरा ने कहा, पांच साल तक किन शर्तो के साथ कर्नाटक में गठबंधन की सरकार चलेगी, यह अभी तय नहीं हुआ है। साथ ही किस पार्टी को किन विभागों की जिम्मेदारी मिलेगी, यह भी अभी तय नहीं हुआ है। परमेश्वरा कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">विश्वास मत से पहले कांग्रेसी उप मुख्यमंत्री परमेश्वरा का बयान</h3>
<p style="text-align:justify;">उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सारे लाभ-हानि देखकर सरकार चलाने के भविष्य पर विचार करेंगे। हमारा उद्देश्य प्रदेश को अच्छा शासन देना है। इससे पहले मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी 30-30 महीने के सरकार के नेतृत्व के फॉर्मूले को खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसा कोई फॉर्मूला उनके सामने नहीं रखा गया और न ही यह उन्हें स्वीकार है। परमेश्वरा ने अपनी पार्टी में किसी भी नेता या विधायक के नाराज होने से इन्कार कहा।</p>
<p style="text-align:justify;">कहा, किसी ने भी उनसे या पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से कोई शिकायत नहीं की। पार्टी में कोई नाराजगी नहीं है, यह केवल मीडिया में चर्चा का विषय है। कर्नाटक में कांग्रेस में कई नेता मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री बनने की काबिलियत रखते हैं, यही पार्टी की ताकत है। पार्टी नेता डीके शिवकुमार के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में परमेश्वरा ने कहा, कांग्रेस एकजुट है और गठबंधन सरकार आसानी से विश्वास मत हासिल करेगी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 May 2018 08:16:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>आप विधायकों पर अदालत का फैसला अच्छा संदेश : शत्रुघ्न</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों की बर्खास्तगी को खारिज करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को देश और लोकतंत्र के लिए अच्छा संदेश बताया।अदालत ने आज अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग ने ‘लाभ के पद’ मामले में आप विधायकों की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/aap-mla-court-decision-good-message-shatrughan/article-3654"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/sinha.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली (वार्ता) </strong>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों की बर्खास्तगी को खारिज करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को देश और लोकतंत्र के लिए अच्छा संदेश बताया।अदालत ने आज अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग ने ‘लाभ के पद’ मामले में आप विधायकों की बर्खास्तगी की सिफारिश राष्ट्रपति से करने से पहले विधायकों को उनकी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया। उसने आयोग से दोबारा सुनवाई का मौका देने की बात कही और तब तक के लिए विधायकों की विधानसभा सदस्यता बहाल कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अपनी ही पार्टी के खिलाफ बेबाक बयानी के लिए जाने जानेवाले श्री सिन्हा ने आज यहाँ संसद परिसर में उच्च न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह आम आदमी पार्टी के लिए ही नहीं, देश और लोकतंत्र के लिए भी अच्छा संदेश है। इससे आप को बड़ी राहत मिली है।” भाजपा नेता ने कहा कि वह हर आदमी को महसूस हो रहा था कि बर्खास्त करने से पहले आप के विधायकों को उनकी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, “मुझे भी लगता नहीं था कि सही हो रहा है।” श्री सिन्हा ने कहा कि दूसरे राज्यों में भी कई विधायक लाभ के पदों पर रहे हैं और आप विधायकों की तुलना में लंबे समय तक रहे हैं। इसलिए, चुनाव आयोग की सिफारिश भेदभावपूर्ण थी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Mar 2018 07:49:55 +0530</pubDate>
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                <title>फेड के फैसले का दिखेगा बाजार पर असर</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई (एजेंसी)। वैश्विक स्तर पर संरक्षणवादी व्यापार नीति और रूस तथा ब्रिटेन के बीच तनातनी की चिंता के बीच बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स बीते सप्ताह 131.14 अंक की साप्ताहिक गिरावट में शुक्रवार को 33,176 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 31.70 अंक लुढ़ककर 10,195.15 अंक पर रहा। आने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/fade-s-decision-will-affect-the-market/article-3597"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/ami.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)। </strong>वैश्विक स्तर पर संरक्षणवादी व्यापार नीति और रूस तथा ब्रिटेन के बीच तनातनी की चिंता के बीच बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स बीते सप्ताह 131.14 अंक की साप्ताहिक गिरावट में शुक्रवार को 33,176 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 31.70 अंक लुढ़ककर 10,195.15 अंक पर रहा। आने वाले सप्ताह में मंगलवार और बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक होनी। इसमें ब्याज दरों में बढ़ोतरी लगभग तय है। फेड के फैसले का प्रभाव बाजार पर दिखेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा रूस और ब्रिटेन के बीच बढ़ती तनातनी तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों जैसे कारक भी बाजार का रुख तय करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। घरेलू स्तर पर शुक्रवार शाम जारी भुगतान संतुलन के आँकड़ों में चालू वित्त वर्ष में चालू खाते का घाटा तीन गुणा होकर जीडीपी के दो प्रतिशत पर पहुँचने से भी सोमवार को बाजार खुलने पर दबाव देखा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्लेषकों का कहना है कि मेघालय,त्रिपुरा और नागालैंड के बाद इस साल की पहली छमाही में कर्नाटक में चुनाव होने हैं। कर्नाटक कांग्रेस शासित राज्य है। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी शासित छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश ,मिजोरम और राजस्थान में चुनाव होने हैं। तेलुगु देशम पार्टी के साथ छोड़ देने से संसद में बहुमत पर भाजपा का ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है लेकिन इसने राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है। भाजपा हाल ही में उत्तर प्रदेश की दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हार चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनावी समीकरण को देखते हुए निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं जिससे बिकवाली का नया दौर शुरू हो गया है। उनके मुताबिक गत सप्ताह जारी खुदरा महंगाई, थोक महंगाई और निर्यात के आंकड़े सकारात्मक होते हुए भी निवेशकों के लिए बड़ी राहत लेकर नहीं आये। पंजाब नेशनल बैंक में हुई दो अरब डॉलर से ज्यादा की धोखाधड़ी ने बैंकिंग क्षेत्र पर लोगों के भरोसे को हिला कर रख दिया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Mar 2018 06:32:11 +0530</pubDate>
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