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                <title>Animal Care - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Animal Care RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Animal Care: बारिश के मौसम में पशु कभी बीमार नहीं होंगे, इन बातों का रखें ध्यान ..</title>
                                    <description><![CDATA[Animal Care:  भगत सिंह। बरसात का मौसम न केवल मनुष्यों के लिए, बल्कि पशुओं के लिए भी कई बीमारियां लेकर आता है। इस  मौसम में नमी, गीलापन और कीटाणुओं के कारण पशु जल्दी बीमार पड़ जाते हैं। ऐसे समय में उनकी देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। इसी विषय पर पशु चिकित्सक डॉ. कमल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/animals-will-never-get-sick-during-the-rainy-season-keep-these-things-in-mind/article-75548"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/animal-care.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Animal Care:  भगत सिंह।</strong> बरसात का मौसम न केवल मनुष्यों के लिए, बल्कि पशुओं के लिए भी कई बीमारियां लेकर आता है। इस  मौसम में नमी, गीलापन और कीटाणुओं के कारण पशु जल्दी बीमार पड़ जाते हैं। ऐसे समय में उनकी देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। इसी विषय पर पशु चिकित्सक डॉ. कमल कुमार ने विस्तार से जानकारी दी और किसानों व पशुपालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कीटाणुनाशक दवाई का छिड़काव जरूरी | Animal Care</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ. कमल कुमार ने बताया कि बरसात में जहां पशुओं को बांधा जाता है, वहां बैक्टीरिया और कीटाणुओं का खतरा बढ़ जाता है। इसे रोकने के लिए कीटाणुनाशक दवाई का छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा विभाग यह सुविधा घर पर भी उपलब्ध कराता है। नियमित छिड़काव से मच्छर, मक्खी और अन्य हानिकारक कीटों से पशुओं की सुरक्षा होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पशुओं के बांधने की जगह को सूखा रखें</h3>
<p style="text-align:justify;">बरसात में गीली और नम जगह पर पशु रखने से उन्हें बुखार, खांसी, जुकाम और निमोनिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए पशुओं को बांधने की जगह को हमेशा सूखा रखें। इसके लिए फर्श पर सूखी मिट्टी, भूसा या बुरादा बिछाना एक अच्छा उपाय है। अगर कोई पशु बीमार हो जाए तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक को दिखाना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">छोटे बछड़ों की विशेष देखभाल</h3>
<p style="text-align:justify;">बरसात में छोटे बछड़े अधिक संवेदनशील होते हैं। डॉ. कमल कुमार ने बताया कि इस समय मां और बच्चे, दोनों को कीड़ों की दवाई जरूर देनी चाहिए। छोटे बछड़े को मोटे कपड़े से ढककर रखना चाहिए ताकि बारिश की ठंड से उसका बचाव हो सके। साथ ही, उन्हें गीली या गंदी जगह पर न बैठने दें, क्योंकि इससे दस्त और पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">भोजन और पानी की स्वच्छता</h4>
<p style="text-align:justify;">बरसात के मौसम में पशुओं के भोजन और पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। चारा सड़ा-गला या फफूंद लगा हुआ न हो, और पानी हमेशा साफ व ताजा हो। यदि संभव हो तो पानी को उबालकर ठंडा करके दें। संतुलित आहार में खनिज मिश्रण और विटामिन सप्लीमेंट शामिल करना भी आवश्यक है, जिससे पशु स्वस्थ और तंदुरुस्त रहें।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मक्खी और मच्छरों से बचाव</h4>
<p style="text-align:justify;">बरसात में मक्खी और मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है, जो खुरपका-मुंहपका और त्वचा संबंधी रोग फैलाते हैं। इनके बचाव के लिए पशुशाला में कीटनाशक स्प्रे या धुआं करना चाहिए। साथ ही, आसपास पानी जमा न होने दें, ताकि मच्छरों के पनपने की संभावना कम हो।<br />
बरसात के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी पशुओं के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। इसलिए पशुपालकों को चाहिए कि वे समय-समय पर कीटाणुनाशक छिड़काव करें, पशुओं को सूखी जगह पर रखें, स्वच्छ भोजन-पानी दें और छोटे बछड़ों को ठंड से बचाएं। डॉ. कमल कुमार के ये सुझाव अपनाकर पशुओं को बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Sep 2025 11:32:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैटल फ्री शहर में पशुओं की भरमार, हादसों का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[रात्रि के समय सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं से हो सकता है हादसा नप ने नहीं शुरू किया पशुओं को पकडऩे के लिए अभियान सरसा (सुनील वर्मा)। नगर परिषद ने कैटल फ्री शहर (Cattle free city ) में घूम रहे बेसहारा पशुओं को पकडऩे के लिए अभियान अभी शुरू नहीं किया है, जबकि सर्दी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cattle-free-city/article-39823"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/destitute-animals-causing-road-accidents.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>रात्रि के समय सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं से हो सकता है हादसा</strong></li>
<li><strong>नप ने नहीं शुरू किया पशुओं को पकडऩे के लिए अभियान</strong></li>
</ul>
<p><strong>सरसा (सुनील वर्मा)।</strong> नगर परिषद ने कैटल फ्री शहर <strong>(Cattle free city )</strong> में घूम रहे बेसहारा पशुओं को पकडऩे के लिए अभियान अभी शुरू नहीं किया है, जबकि सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है। शहर में जगह जगह सड़कों पर रात्रि के समय बेसहारा पशु घूमते रहते हैं जिनके कारण कभी भी हादसा हो सकता है। शहर की सड़कों व बाजारों में करीब 1500 पशुओं की संख्या है। नगर परिषद द्वारा बेसहारा पशुओं को पकडऩे के लिए पहले कई बार अभियान भी चलाया गया है। इसके बाद भी पशुओं की भरमार है। नगर परिषद द्वारा बेसहारा पशुओं को पकडऩे के लिए ठेका दिया हुआ है।</p>
<h3><strong>– सड़कों पर नजर आते हैं दुधारू पशु | Cattle free city<br />
</strong></h3>
<p>शहर की सड़कों पर कई लोगों ने दुधारू पशुओं को भी छोड़ा हुआ है। सुबह शाम दूध दोहने के बाद इनको सड़कों पर छोड़ देते है। खास बात ये भी है कि इन दुधारू पशुओं का बीमा भी करवाया हुआ है। नगर परिषद द्वारा इन दुधारू पशुओं को सड़कों पर न छोडऩे की चेतावनी भी दी है। इसके बाद भी लोग बाज नहीं आ रहे हैं।</p>
<h3><strong>– रात्रि के समय होते रहते हैं हादसे</strong></h3>
<p>शहर की सड़कों पर बेसहारा पशुओं के कारण हादसे भी होते रहते हैं। सड़कों पर रात्रि के समय बेसहारा पशु दिखाई नहीं देते हैं। क्योंकि कई जगह पर स्ट्रीट लाइट की भी व्यवस्था नहीं है। वहीं पशुओं के रेडियम की बेल्ट भी गले में डाली हुई नहीं होती है। जिससे रात्रि के समय अंधेर में दिखाई नहीं देते हैं।</p>
<h3><strong>– इन जगह पर सबसे ज्यादा पशु</strong></h3>
<ul>
<li><strong> शहर में बेगू रोड पर जगदंबे पेपर मील के पास</strong></li>
<li><strong> बेगू रोड पर राजकीय गल्र्ज स्कूल के समीप</strong></li>
<li><strong> अनाज मंडी में राजकीय स्कूल के समीप</strong></li>
<li><strong> डबवाली रोड पर कई जगह</strong></li>
<li><strong> रानियां रोड पर सब्जी मंडी व अन्य जगह पर</strong></li>
<li><strong> गोशाला मोहल्ला में अनेक जगह पर</strong></li>
</ul>
<p>————————————————<br />
<em><strong>शहर में बेसहारा पशुओं को पकडऩे के लिए समय समय पर पहले अभियान चलाए जाते रहे हैं। बेसहारा पशुओं को पकडऩे के लिए ठेके पर दिया हुआ है। जल्द पशुओं को पकडऩे के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों से भी बातचीत हो चुकी है। इस पर जल्द ही कार्य किया जाएगा। इसके बाद शहर में कहीं भी बेसहारा पशु नजर नहीं आएगा।</strong></em><br />
<em><strong>– पवन कुमार, उप सफाई निरीक्षक, नगर परिषद, सरसा।</strong> </em></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Nov 2022 20:18:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गर्मियों में पशुओं की देखभाल</title>
                                    <description><![CDATA[पशुओं को अफारा बीमारी से बचाने के लिए 1 लीटर मीठे तेल में 100 ग्राम काला नमक, 100 ग्राम मीठा खाने वाला सोडा, 30 ग्राम अजवाइन व 20 ग्राम हिंग मिला कर दें, अफारा से बचाव के लिए जरूरत से ज्यादा बरसीम, खड़ा गेहूं व ज्यादा राशन न खिलाएं। गर्मी के मौसम में पशुओं को […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/summer-animal-care/article-10406"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-09/animal-care.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><em>पशुओं को अफारा बीमारी से बचाने के लिए 1 लीटर मीठे तेल में 100 ग्राम काला नमक, 100 ग्राम मीठा खाने वाला सोडा, 30 ग्राम अजवाइन व 20 ग्राम हिंग मिला कर दें, अफारा से बचाव के लिए जरूरत से ज्यादा बरसीम, खड़ा गेहूं व ज्यादा राशन न खिलाएं।</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">गर्मी के मौसम में पशुओं को अपने शरीर का तापमान सामान्य बनाएं रखने में काफी दिक्कतें आती हैं। हीट स्ट्रेस के कारण जब पशुओं के शरीर का तापमान 101.5 डिग्री फेरनेहाइट से 102.8 फेरनहाइट तक बढ़ जाता है, तब पशुओं के शरीर में इसके लक्षण दिखने लगते हैं। भैंसों एवं गायों के लिए थर्मोन्यूट्रल जोन 5 डिग्री सेंटीग्रेड से 25 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">थर्मोन्यूट्रल जोन में सामान्य मेटाबोलिक क्रियाओं से जितनी गर्मी उत्पन्न होती है, उतनी ही मात्रा में पशु पसीने के रूप में गर्मी को बाहर निकालकर शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हीट स्ट्रेस के दौरान गायों में सामान्य तापक्रम बनाए रखने के लिए खनपान में कमी, दुग्ध उत्पादन में 10 से 25 फीसदी की गिरावट, दूध में वसा के प्रतिशत में कमी, प्रजनन क्षमता में कमी, प्रतिरक्षा प्रणाली में कमी आदि लक्षण दिखाई देते हैं। गर्मियों में पशुओं को स्वास्थ्य रखने एवं उनके उत्पादन के स्तर को सामान्य बनाए रखने के लिए पशुओं की विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।</p>
<h2>प्रमुखतया दो वजह से होता है पशुओं पर गर्मी का प्रभाव</h2>
<h2 style="text-align:justify;">1. इनवायरमेंटल हीट</h2>
<h2 style="text-align:justify;">2. मेटावालिक हीट</h2>
<p style="text-align:justify;">सामान्यतया इनवायरमेंटल हीट की अपेक्षा मेटावालिक हीट द्वारा कम गर्मी उत्पन्न होती है, लेकिन जैसे-जैसे दुग्ध उत्पादन और पशु की खुराक बढ़ती है उस स्थिति में मेटावालिज्म द्वारा जो हीट उत्पन्न होती है वह इनवायरमेंटल हीट की अपेक्षा अधिक होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी वजह से अधिक उत्पादन क्षमता वाले पशुओं में कम उत्पादन क्षमता वाले पशुओं की अपेक्षा गर्मी का प्रभाव ज्यादा दिखाई देता है। इनवायरमेंटल हीट का प्रमुख स्त्रोत सूर्य होता है। अत: धूप से पशुओं का बचाव करना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पशुपालकों के खूब काम आएंगे ये टिप्स</h2>
<p style="text-align:justify;">दूध उत्पादन के लिए पशुपालकों के लिए जरूर है कि वे हमेशा दुधारू नस्ल के पशु ही पालें। गाय में साहिवाल, हरियाणा, करनस्विस, करन फ्रिज वैगरह और भैंस में मुर्रा, मेहसाना वैगरह नस्लें माली नजरिए से फायदेमंद साबित होती हैं। दुधारू पशु (गाय भैंस) खरीदने से पहले उस की नस्ल, दूध देने की कूवत वैगरह की जांच जरूर करनी चाहिए। पशु का वंशावली का रिकार्ड भी जरूर देखना चाहिए, यानी उस की माँ, नानी, परनानी वैगरह कितना दूध देती थी। इस के अलावा अपने इलाके और सुविधाओं के आधार पर ही पशु का चुनाव करें।</p>
<p style="text-align:justify;">पशुशाला हमेशा ऐसी जगह बनाएं, जहाँ बारिश का पानी नहीं भरता हो। जगह हवादार व साफ सुथरी होनी चाहिए। पशुशाला का फर्श पक्का खुरदरा रखें। गोबर को पशुशाला से उठा कर दूर खाद के गड्ढे में डालें। पशुशाला से पानी की निकासी का भी सही बंदोबस्त रखें। पशुशाला के आसपास गन्दा पानी जमा न होने दें।</p>
<p style="text-align:justify;">पशुशाला में मक्खी मच्छर से बचाव का भी इंतजाम करें। पशुओं को सर्दीगर्मी व बरसात से बचाने के लिए पशुशाला में बचाव का इंतजाम करें। ध्यान रखें कि पशुओं को किसी भी तरह की परेशानी न हो। सर्दी के मौसम में पशुशाला में बिछावन के लिए भूसा, लकड़ी का बुरादा, पेड़ों की सूखी पत्तियों या गन्ने के सूखी पत्तियाँ इस्तेमाल करें। बिछावन गीला होने के बाद उसे गोबर के साथ उठा कर खाद के गड्ढे में डाल दें। हर रोज सुखा बिछावन ही इस्तेमाल में लाएं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">गर्मियों में इन बातों का रखें ध्यान</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>पशुओं को दिन के समय सीधी धूप से बचाएं, उन्हें बाहर चराने न ले जाएं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>हमेशा पशुओं को बांधने के लिए छायादार और हवादार स्थान का ही चयन करें। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पशुओं के पास पीने का पानी हमेशा रखें। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पशुओं को हरा चारा खिलाएं। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>यदि पशुओं में असमान्य लक्षण नजर आते हैं तो नजदीकी पशुचिकित्सक से संपर्क करें। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>यदि संभव हो तो डेयरी शेड में दिन के समय कूलर, पंखे आदि का इस्तेमाल करें। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पशुओं को संतुलित आहार दें। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>अधिक गर्मी की स्थिति में पशुओं के शरीर पर पानी का छिड़काव करें।</strong></li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">गर्मी का पशुओं की शारिरिक क्रियाओं पर प्रभाव</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong><em>अपने शरीर के तापमान को गर्मी में भी सामान्य रखने के लिए पशुओं की शारीरिक क्रियाओं में कुछ बदलाव देखने को मिलते हैं।</em> </strong></p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>गर्मी के मौसम में पशुओं की श्वसन गति बढ़ जाती है, पशु हांपने लगते हैं, उनके मुंह से लार गिरने लगती है।</strong></li>
<li><strong><span style="text-align:justify;">पशुओं के शरीर में बाइकार्बोनेट आयनों की कमी और रक्त के पी.एच. में वृद्धि हो जाती है।</span></strong></li>
<li><strong><span style="text-align:justify;">पशुओं के रियुमन में भोज्य पदार्थों के खिसकने की गति कम हो जाती है, </span></strong></li>
<li><strong><span style="text-align:justify;">जिससे पाच्य पदार्थों के आगे बढ़ने की दर में कम हो जाती </span><span style="text-align:justify;">है</span></strong></li>
<li><strong><span style="text-align:justify;"> रियुमन की फर्मेन्टेशन क्रिया में बदलाव आ जाता है। </span></strong></li>
<li><strong><span style="text-align:justify;">त्वचा की ऊपरी सतह का रक्त प्रभाव बढ़ जाता है, जिसके कारण आंत्रिक ऊतकों का रक्त प्रभाव कम हो जाता है।</span></strong></li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/summer-animal-care/article-10406</link>
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                <pubDate>Tue, 10 Sep 2019 18:07:02 +0530</pubDate>
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