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                <title>Highcourt - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>पंजाब पुलिस को हाईकोर्ट का बड़ा झटका, बग्गा को हरियाणा में रोकने की मांग ठुकराई</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के नेता तजिंदर बग्गा को हरियाणा पुलिस ने दिल्ली पुलिस को सौंप दिया है। दिल्ली पुलिस बग्गा को लेकर दिल्ली पहुंच गई है। इस मामले पर पंजाब पुलिस ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई की। हाईकोर्ट ने आधे घंटे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/high-courts-big-blow-to-punjab-police-demand-to-stop-bagga-in-haryana-rejected/article-33033"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/baga.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के नेता तजिंदर बग्गा को हरियाणा पुलिस ने दिल्ली पुलिस को सौंप दिया है। दिल्ली पुलिस बग्गा को लेकर दिल्ली पहुंच गई है। इस मामले पर पंजाब पुलिस ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई की। हाईकोर्ट ने आधे घंटे में हरियाणा सरकार से जवाब मांगा जिसके जवाब में हरियाणा सरकार ने कहा कि दिल्ली पुलिस के मैसेज के बाद उन्हें कुरूक्षेत्र में रोका गया। पंजाब पुलिस ने बग्गा को हरियाणा में ही रोकने की मांग की थी लेकिन हाईकोर्ट ने उसे ठुकरा दिया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि मोहाली पुलिस ने आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सनी आहलूवालिया की शिकायत पर गत एक अप्रैल को बग्गा तथा कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। उसी प्राथमिकी के आधार पर बग्गा को आज दिल्ली उसके घर से गिरफ्तार किया गया था। विपक्ष का आरोप है कि पंजाब पुलिस आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के इशारे पर राजनीतिक बदले की भावना से पंजाब पुलिस का दुरुपयोग कर रही है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कथित तौर पर धमकी देने के आरोप में पंजाब पुलिस के 10 से अधिक कर्मियों की एक टीम ने शुक्रवार सुबह भाजपा नेता बग्गा को पश्चिमी दिल्ली स्थित उनके निवास से गिरफ्तार कर जब पंजाब ला रही थी । घटना की खबर फैलते ही मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया गया है कि पंजाब पुलिस की यह कार्रवाई नियम विरुद्ध है क्योंकि उन्होंने दिल्ली पुलिस को सूचित करने एवं आवश्यक प्रक्रिया के बिना की है। इस कारण से दिल्ली पुलिस ने बग्गा को गिरफ्तार कर ले जाने वाले पंजाब पुलिस की टीम पर दिल्ली के जनकपुरी थाने में अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है जबकि पंजाब पुलिस का कहना है कि उसका एक डीएसपी जनकपुरी थाने मेंं अब तक बैठा है जो दिल्ली पुलिस को गिरफ्तारी की लिखित जानकारी देने गया था। उन्होंने आधिकारिक तौर पर लिखित जानकारी नहीं ली। पंजाब पुलिस के अनुसार बग्गा को पांच बार नोटिस दिया गया था लेकिन वह उनके सामने पेश नहीं हुए। लिहाजा उन्हें गिरफ्तार करना पड़ा।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 May 2022 17:16:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोविड संकट के कारण उत्पन्न शिकायतों पर तुरंत जानकारी लें’</title>
                                    <description><![CDATA[पानीपत (सन्नी कथूरिया)। हाईकोर्ट ने सचिवों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को निर्देश दिए हैं कि वे कोविड संकट के कारण उत्पन्न होने वाली शिकायतों पर त्वरित जानकारी लें और कार्रवाई के लिए नोडल एजेंसियों का हिस्सा बनें। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अमित शर्मा ने बताया कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/get-instant-information-on-complaints-caused-by-covid-crisis/article-23194"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/get-instant-information-on-complaints-caused-by-covid-crisis.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पानीपत (सन्नी कथूरिया)</strong>। हाईकोर्ट ने सचिवों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को निर्देश दिए हैं कि वे कोविड संकट के कारण उत्पन्न होने वाली शिकायतों पर त्वरित जानकारी लें और कार्रवाई के लिए नोडल एजेंसियों का हिस्सा बनें। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अमित शर्मा ने बताया कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की एक खंडपीठ जिसमें न्यायमूर्ति राजन गुप्ता और न्यायमूर्ति करमजीत सिंह शामिल थे। उन्होंने निर्देशित किया है कि हर जिले में सचिव, कानूनी सेवा प्राधिकरण, उपायुक्त/नोडल एजेंसियों के सदस्य होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसमें उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, नगर काउंसिल/निगम के प्रतिनिधि और सिविल सर्जन शामिल होंगे। कोविड की स्थिति से उत्पन्न शिकायतों के निपटान के लिए गठित की जाएगी। यह आदेश पारित करते समय पीठ ने निर्देश दिया कि यदि आवश्यक हो तो समिति की बैठक इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से आयोजित की जाएगी। निर्देशित किया गया कि समिति के सदस्यों में से किसी के द्वारा हेल्पलाइन नंबर पर कॉल आने पर, प्रशासन द्वारा तुरंत प्रतिक्रिया दी जाए।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Apr 2021 20:56:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुंवर विजय प्रताप ने बदनीयती से की जांच, मर्जी से बनाए ब्यान: उच्च न्यायलय</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व आईजी और एसआईटी के मैंबर द्वारा तैयार रिपोर्ट पर की सख्त टिप्पणियां सच कहूँ/अश्वनी चावला चंडीगढ़। कोटकपूरा व बहबल कलां गोलीकांड के मामले पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एसआई के मैंबर व पूर्व आईजी कुंवर विजय प्रताप की कार्यशैली को लेकर तल्ख टिप्पणियां की हैं। जांच बदनीयती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/kunwar-vijay-prataps-malicious-investigation-made-a-statement-of-free-will-high-court/article-23168"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/kunwar-vijay-prataps-malicious-investigation-made-a-statement-of-free-will-high-court.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व आईजी और एसआईटी के मैंबर द्वारा तैयार रिपोर्ट पर की सख्त टिप्पणियां</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/अश्वनी चावला चंडीगढ़</strong>। कोटकपूरा व बहबल कलां गोलीकांड के मामले पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एसआई के मैंबर व पूर्व आईजी कुंवर विजय प्रताप की कार्यशैली को लेकर तल्ख टिप्पणियां की हैं। जांच बदनीयती से की गई और जिसे माननीय उच्च न्यायलय ने गलत करार दिया है। अदालत ने अपना आदेश सार्वजनिक किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आदेश में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि कोटकपूरा गोलीकांड मामले की जांच दौरान जिन गवाहों द्वारा ब्यान दिए गए थे, वह सभी ब्यान कुंवर विजय प्रताप ने अपने अनुसार दिलवाए हैं। पूरी रिपोर्ट ही कुंवर विजय प्रताप ने अपने अनुसार तैयार की है। साथ ही हाईकोर्ट ने चार्जशीट को खारिज कर दिया। कई दिनों के इंतजार के बाद शुक्रवार को 89 पन्नों वाली आदेश की कॉपी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जारी की।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है कि यदि कुंवर विजय प्रताप वाली एसआईटी सबकुछ ठीक काम कर रही थी, तब उनके साथी जांच आधिकारियों द्वारा रिपोर्ट पर अपने हस्ताक्षर क्यों नहीं किए? केवल उनके ही हस्ताक्षर क्यों थे? साथ ही हाईकोर्ट ने देर रात पंजाब के मुख्यमंत्री की पुलिस अधिकारियों से बातचीत को भी गलत करार नहीं दिया, जबकि कुंवर विजय प्रताप सिंह ने इसे गलत करार देते हुए अपनी जांच में इसको लेकर भी सवाल उठाए थे। कुंवर विजय प्रताप द्वारा की गई जांच के हर पहलू पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए उसे बदनीयती पूर्ण और गलत करार दिया है। जिस कारण उनकी रिपोर्ट के साथ ही चार्जशीट को खारिज कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने इस मामले में नई एसआईटी बनाने के आदेश जारी किए हैं। इस जांच टीम में कुंवर विजय प्रताप से वरिष्ठ अधिकारी शामिल करने के लिए कहा है और कुंवर विजय प्रताप को शामिल न करने के लिए कहा है। नई जांच टीम को पूरी जांच कर छह महीने में पूरा करने के आदेश दिए हैं। नई जांच कमेटी पंजाब सरकार बनाएगी लेकिन जांच टीम बनने के बाद वह जांच टीम पंजाब पुलिस या फिर पंजाब सरकार को रिपोर्ट नहीं करेगी। यह जांच टीम सीधे अदालत को रिपोर्ट करेगी। साथ ही जांच टीम को आदेश है कि उनके द्वारा जांच रिपोर्ट को किसी भी तरीके से लीक न किया जाए और मीडिया से रिपोर्ट संबंधी बिल्कुल भी बात न की जाए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुंवर विजय प्रताप ने जांच के दौरान व जांच रिपोर्ट में निम्न गलतियां की जिन्हें कोर्ट ने बदनीयती से की गई माना और आईपीएस कुंवर विजय प्रताप को ‘राजनीतिक घोड़ा’ कहकर पुकारा।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>1</strong>. कुंवर विजय प्रताप ने कहा कि उनकी जांच को हाईकोर्ट के दो जजो ने सराहा है पर ऑन रिकॉर्ड ऐसा कुछ भी नहीं है।<br />
<strong>2</strong>. बेअदबी के मामलों की पैरवी कर रहे वकीलों के उच्च न्यायलय में जज बन जाने का जिक्र किया जिसे उच्च न्यायलय ने अप्रासंगिक बताया और नाटकीय कहा।<br />
<strong>3</strong>. कुंवर विजय प्रताप ने फरीदकोट जिला व सेशन जज को पत्र लिखकर ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री व उप-मुख्यमंत्री का नजदीकी बताकर गोलीकांड व बेअदबी से जुड़ा कोई केस उनकी अदालत को न सौंपने की गुजारिश की।<br />
<strong>4.</strong> बरगाड़ी बेअदबी व कोटकपूरा गोलीकांड के तथ्य राजनीति व जनभावना से प्रेरित एवं कल्पनाओं पर आधारित लिखे गए जबकि सबूतों पर कोई गौर नहीं किया गया।<br />
<strong>5</strong>. जांच रिपोर्ट की मीडिया को जानकारी दी गई ताकि कुछ राजनेताओं के विरुद्ध द्वेष पैदा किया जा सके।<br />
<strong>6</strong>. सबसे महत्वपूर्ण कुंवर विजय प्रताप ने जांच में अक्षय कुमार की फिल्म ‘सिंह इज बलिंग’ व डेरा सच्चा सौदा के पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का जिक्र किया गया, जोकि षड्यंत्रपूर्वक व बेतुका है क्योंकि कुंवर विजय प्रताप एक मकसद बनाकर कुछ राजनेताओं को इस केस में फंसाना चाहता था।<br />
<strong>7</strong>. कुंवर विजय प्रताप ने अपनी जांच रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व सुखबीर सिंह बादल पर आरोप लगाए लेकिन उन्हें चार्जशीट में नामजद नहीं किया गया, शायद इनके खिलाफ कुंवर विजय प्रताप के पास कोई सबूत नहीं होंगे।<br />
<strong>8</strong>. पंजाब के तत्कालीन डीजीपी सुमेध सैनी व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की टेलीफोन पर बातचीत को साजिश बताया, जबकि सरकार व प्रशासन के बीच बातचीत होना किसी घटना की साजिश कैसे हो सकती है, स्पष्ट नहीं किया।<br />
<strong>9</strong>. कुंवर विजय प्रताप ने अपनी सुविधा के गवाहों के अनुरूप रिपोर्ट को तैयार किया जिस पर साथी अधिकारियों के हस्ताक्षर भी नहीं करवाए गए और पीड़ित पुलिस कर्मियों का पक्ष नहीं लिया गया।<br />
<strong>10</strong>. पुलिस इंस्पेक्टर गुरदीप सिंह को धमकाया गया कि वह कुंवर विजय प्रताप द्वारा की जा रही जांच का विरोध नहीं करे, उक्त इंस्पेक्टर द्वारा ही इस जांच के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय में जांच रिपोर्ट को खारिज करने की याचिका दी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उक्त गंभीर खामियों के कारण माननीय उच्च न्यायलय ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए नई टीम गठित करने के आदेश दिए हैं।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Apr 2021 20:00:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोना पर हाईकोर्ट की सुनवाई रोकने का कोई इरादा नहीं: सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई मंगलवार तक टली साल्वे न्याय मित्र से हटे नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय में कोविड-19 महामारी के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई मंगलवार तक के लिए शुक्रवार को टल गयी। साथ ही, न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे को न्याय मित्र की जिम्मेदारी से मुक्त कर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/no-intention-to-stop-high-court-hearing-on-corona-supreme-court/article-23140"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/no-intention-to-stop-high-court-hearing-on-corona-supreme-court.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई मंगलवार तक टली</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>साल्वे न्याय मित्र से हटे</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)</strong>। उच्चतम न्यायालय में कोविड-19 महामारी के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई मंगलवार तक के लिए शुक्रवार को टल गयी। साथ ही, न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे को न्याय मित्र की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि उसका इरादा उच्च न्यायालयों से मामले वापस लेना नहीं है, इसलिए आलोचना की आवश्यकता नहीं थी।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति बोबडे ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन कहा, ‘हम वरिष्ठ अधिवक्ताओं के बयान पढ़कर खुश नहीं हैं, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति का अपना-अपना दृष्टिकोण होता है। साल्वे ने मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट की खंडपीठ से आग्रह किया कि न्याय मित्र की जिम्मेदारी से उन्हें मुक्त कर दें। साल्वे का यह कदम कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा उनकी आलोचना किए जाने के बाद आया है। उन्होंने कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि यह मामला इस आरोप के साए में सुना जाए कि मुख्य न्यायाधीश के साथ दोस्ती होने के नाते ही मेरी नियुक्ति न्याय मित्र के तौर पर हुई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है पूरा मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि न्यायालय ने वीरवार को सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। न्यायालय ने कोरोना महामारी के भीषण संक्रमण के मद्देनजर ऑक्सीजन और दवा की आपूर्ति, टीकाकरण नीति और लॉकडाउन लगाने के राज्य सरकारों के अधिकारों के मामले का स्वत: संज्ञान लिया है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Apr 2021 17:55:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्यों न एडमीशन प्रक्रिया को रोक दिया जाए : हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[एमबीबीएस में कम वार्षिक आय पर दाखिले का मामला  हरियाणा सरकार व मेडिकल काउंसिल आॅफ इंडिया से मांगा जवाब चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)। प्रदेश में एमबीबीएस एडमिशन प्रक्रिया में पिछड़े वर्ग में तीन लाख से (Why, Admission, Process, Should, Stopped, HighCourt) कम वार्षिक आय वाले परिवार के बच्चों को एडमिशन में प्राथमिकता देने के निर्णय को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/why-the-admission-process-should-be-stopped-high-court/article-4563"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/haryana-1.jpg" alt=""></a><br /><h1>एमबीबीएस में कम वार्षिक आय पर दाखिले का मामला</h1>
<h3> हरियाणा सरकार व मेडिकल काउंसिल आॅफ इंडिया से मांगा जवाब</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(सच कहूँ न्यूज)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश में एमबीबीएस एडमिशन प्रक्रिया में पिछड़े वर्ग में तीन लाख से <strong>(Why, Admission, Process, Should, Stopped, HighCourt)</strong></p>
<p style="text-align:justify;">कम वार्षिक आय वाले परिवार के बच्चों को एडमिशन में प्राथमिकता देने के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार सहित मेडिकल काउंसिल आॅफ इंडिया और एडमिशन कमेटी को तीन जुलाई के नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है, साथ ही पूछा है कि क्यों न इस एडमीशन प्रक्रिया पर रोक लगा दी जाए।</p>
<h1 style="text-align:justify;">क्यों न एडमीशन प्रक्रिया…</h1>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस अजय तिवारी एवं जस्टिस महाबीर सिंधु की वकेशन बेंच ने यह नोटिस रोहतक निवासी निशा द्वारा एडवोकेट पृथ्वी राज यादव के जरिये दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है। दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने हरियाणा सरकार द्वारा 18 अगस्त 2016 को जारी उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी है, जिसके तहत हरियाणा सरकार ने पिछड़े वर्ग को आय के आधार पर दो भागों में विभाजित किये जाने का निर्णय लिया है। इस नोटिफिकेशन के तहत एमबीबीएस कोर्स में एडमीशन में पिछड़े वर्ग के उन आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके परिवार की वार्षिक आय ३ लाख रुपए से कम है। इस नोटिफिकेशन को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए बताया गया है कि यह नोटिफिकेशन सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंदिरा साहनी के मामले में तय किये गए दिशा-निर्देशों का उलंघन है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे ये निर्देश</h1>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी मामले में यह साफ कर दिया था कि आरक्षण के लाभ को सिर्फ आर्थिक आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। आरक्षण में आर्थिक और समाजिक दोनों तरह के पिछड़ेपन को कारक के रूप में शामिल किया जाना जरूरी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने क्रीमी लेयर को स्वीकार किया था।</p>
<h1 style="text-align:justify;">यह है याचिकाकर्ता का आरोप</h1>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता का कहना है कि इस मामले में सरकार ने क्रीमी लेयर को तो बाहर रखा है, लेकिन 3 लाख से कम वार्षिक आय वाले परिवार के आवेदकों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है, जो पूरी तरह से गलत है। इस आधार पर पिछड़े वर्ग को दो वर्गों में विभाजित नहीं किया जा सकता है।</p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Jun 2018 22:28:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिवाली पर सिर्फ 3 घंटे ही पटाखे फोड़ पाएंगे हरियाणा व पंजाब के बाशिंदे</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने शाम साढे 6 बजे से 9:30 बजे तक पटाखा जलाने का समय तय किया है। शुक्रवार को कोर्ट ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में दिवाली के दिन पटाखे शाम 6:30 बजे से लेकर 9:30 बजे तक ही बजेंगे। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस अमित रावल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/highcourt-decided-3-hours-for-fireworks-on-diwali/article-3392"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/high-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong> पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने शाम साढे 6 बजे से 9:30 बजे तक पटाखा जलाने का समय तय किया है। शुक्रवार को कोर्ट ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में दिवाली के दिन पटाखे शाम 6:30 बजे से लेकर 9:30 बजे तक ही बजेंगे। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस अमित रावल की खंड पीठ में शुक्रवार को पंजाब और हरियाणा सरकार व चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिया कि पटाखों की बिक्री में भी कमी आनी चाहिए उसके लिए कोर्ट ने पटाखों की बिक्री के लिए पिछले साल दिए गए टेंपरेरी लाइसेंस में से इस साल 20 फीसदी लाइसेंस जारी करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">गुड़गांव में हो चुका बैन</h2>
<p style="text-align:justify;">उधर गुड़गांव के डीसी विनय प्रताप सिंह ने कहा कि इस कदम से वायु प्रदूषण की जांच करने में मदद मिलेगी जो पिछले साल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में दिवाली के दौरान खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था। त्योहार के दौरान और बाद में पटाखे जलाए जाने के कारण वायु गुणवत्ता ‘काफी और चिंताजनक रूप से’ बिगड़ती जा रही है। डीसी विनय प्रताप सिंह ने कहा, ‘एेहतियाती कदम उठाते हुए दीपावली के शांतिपूर्ण ढंग से मनाए जाने को लेकर सीआरपीसी की धारा 144 लागू की गई। जिले में पटाखों की बिक्री पर 31 अक्तूबर तक प्रतिबंध रहेगा। हमने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को लागू करने के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं और उनसे गोदामों और दुकानों का निरीक्षण करने के लिए कहा है। टीमें यह सुनिश्चित करेंगी कि जिले के प्रवेश और निकास द्वार पर किसी भी तरह के पटाखे की अनुमति नहीं दी जाए।’</p>
<h3 style="text-align:justify;">चंडीगढ़ में 17 जगह पर ही बेच सकेंगे पटाखे</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सेक्टर-49 मेंरेयान स्कूल के पास खाली ग्राउंड में</li>
<li style="text-align:justify;">सेक्टर-43 में सब्जी मंडी ग्राउंड</li>
<li style="text-align:justify;">सेक्टर-38 वेस्ट में गवर्नमेंट स्कूल के सामने</li>
<li style="text-align:justify;">से.-46 में रामलीला ग्राउंड के पास</li>
<li style="text-align:justify;">सेक्टर-45 में सब्जी मंडी ग्राउंड</li>
<li style="text-align:justify;">सेक्टर-33 सी में ओपन ग्राउंड</li>
<li style="text-align:justify;">पलसोरा में विश्वकर्मा मंदिर के पास ओपन स्पेस</li>
<li style="text-align:justify;">37 सी में मंदिर के साथ लगता ग्राउंड</li>
<li style="text-align:justify;">सेक्टर-24 में दशहरा ग्राउंड और गुजरात भवन के सामने</li>
<li style="text-align:justify;">धनास मिल्क काॅलोनी में गुरुद्वारा के सामने ग्राउंड</li>
<li style="text-align:justify;">सेक्टर-29 में सब्जी मंडी ग्राउंड</li>
<li style="text-align:justify;">रामदरबार में ओपन ग्राउंड</li>
<li style="text-align:justify;">मनीमाजरा में हाउसिंग बोर्ड चौक के पास ओपन ग्राउंड</li>
<li style="text-align:justify;">मनीमाजरा में गोविंदपुरा पार्क के सामने</li>
<li style="text-align:justify;">मनीमाजरा में फायर स्टेशन एवं उप्पल हाउसिंग सोसाइटी के सामने</li>
<li style="text-align:justify;">सेक्टर-20 में मस्जिद ग्राउंड</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Oct 2017 04:35:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेरा और पूज्य गुरु जी का रिश्ता ‘पाक पवित्र’: हनीप्रीत इन्सां </title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु जी की बेटी हनीप्रीत इन्सां ने अपने व डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ किए जा रहे झूठे प्रचार को सिरे से नकारते हुए पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से अपने पिता-पुत्री के रिश्ते को पाक- पवित्र बताया। उक्त शब्द हनीप्रीत इन्सां ने अलग-अलग निजी टीवी चैनलों के साथ मुलाकात दौरान कहे। हनीप्रीत ने कहा कि पिछले दिनों उसके पूज्य […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/false-allegation-on-honeypreet-insan/article-3366"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/honeypreet.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु जी की बेटी हनीप्रीत इन्सां ने अपने व डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ किए जा रहे झूठे प्रचार को सिरे से नकारते हुए पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से अपने पिता-पुत्री के रिश्ते को पाक- पवित्र बताया। उक्त शब्द हनीप्रीत इन्सां ने अलग-अलग निजी टीवी चैनलों के साथ मुलाकात दौरान कहे। हनीप्रीत ने कहा कि पिछले दिनों उसके पूज्य गुरु जी के साथ रिश्ते को लेकर जो झूठा प्रचार किया जा रहा है, वह बेबुनियाद व झूठा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि क्या उसे बताने की जरूरत हैकि एक पिता-पुत्री का रिश्ता क्या होता है? उन्होंने कहा कि मेरा व पूज्य गुरु जी का रिश्ता पिता-पुत्री का पवित्र रिश्ता है। उन्होंने कहा कि क्या एक पिता अपनी बेटी के सिर पर हाथ नहीं रख सकता? उन्होंने कहा कि पूरा परिवार उसे बहुत ज्यादा प्यार करता है। उन्होंने पंचकुला में अपने पर लगे दंगा भड़काने के आरोपों को भी झूठा करार दिया। हनीप्रीत ने कहा कि उसे बेहद दुख है कि जिस देश के लिए उन्होंने व उनके पिता ने देश भक्ति की फिल्में बनाई उस पर ही देशद्रोह का मामला दर्ज कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि पूज्य गुरु जी को सजा सुनाए जाने व अपने पर लगे देशद्रोह के मामले से वह बेहद परेशान है। उन्होंने कहा कि जिसने एक कीड़ी (चींटी) भी न मारी हो उस पर देशद्रोह का मामला दर्ज करना हैरानी की बात है। उन्होंने कहा कि मुझे माननीय न्यायलय पर पूरा भरोसा है, मैं व मेरे पिता जी बेगुनाह हैं और हमें न्याय मिलेगा। पूज्य गुरु जी के लिए हम हाईकोर्ट जाएंगे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Oct 2017 00:49:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन तलाक महिलाओं से क्रूरता</title>
                                    <description><![CDATA[इलाहाबाद हाईकोर्ट फैसला: संविधान से ऊपर नहीं कोई पर्सनल लॉ बोर्ड इलाहाबाद: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ‘तीन तलाक’ को महिलाओं के साथ क्रूरता करार देते हुए वीरवार को कहा कि कोई भी पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान से ऊपर नहीं है। तीन तलाक मसले पर उच्च न्यायालय में दाखिल दो याचिकाओं पर न्यायाधीश सुनीत कुमार ने वीरवार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/three-divorced-women-toughness/article-445"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/allahabad-high-court.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट फैसला: संविधान से ऊपर नहीं कोई पर्सनल लॉ बोर्ड</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>इलाहाबाद: </strong>इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ‘तीन तलाक’ को महिलाओं के साथ क्रूरता करार देते हुए वीरवार को कहा कि कोई भी पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान से ऊपर नहीं है। तीन तलाक मसले पर उच्च न्यायालय में दाखिल दो याचिकाओं पर न्यायाधीश सुनीत कुमार ने वीरवार को यह फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि तीन तलाक असंवैधानिक है। यह मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन करता है।<br />
अदालत ने फैसले में कहा, ‘मुस्लिम पति को स्वेच्छाचारिता से, एकतरफा तुरंत तलाक देने की शक्ति की धारणा इस्लामिक रीतियों के मुताबिक नहीं है। यह आम तौर पर भ्रम है कि मुस्लिम पति के पास कुरान के कानून के तहत शादी को खत्म करने की स्वच्छंद ताकत है।’ अदालत ने कहा, ‘पूरा कुरान पत्नी को तब तक तलाक देने के बहाने से व्यक्ति को मना करता है जब तक वह विश्वसनीय और पति की आज्ञा का पालन करती है।’ उन्होंने कहा, ‘इस्लामिक कानून व्यक्ति को मुख्य रूप से शादी तब खत्म करने की इजाजत देता है जब पत्नी का चरित्र खराब हो, जिससे शादीशुदा जिंदगी में नाखुशी आती है। लेकिन गंभीर कारण नहीं हों तो कोई भी व्यक्ति तलाक को उचित नहीं ठहरा सकता चाहे वह धर्म की आड़ लेना चाहे या कानून की।’ अदालत ने 23 वर्षीय महिला हिना और उम्र में उससे 30 वर्ष बड़े पति की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। हिना के पति ने ‘अपनी पत्नी को तीन बार तलाक देने के बाद’ उससे शादी की थी। पश्चिम उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले दंपत्ति ने अदालत का दरवाजा खटखटाकर पुलिस और हिना की माँ को निर्देश देने की मांग की थी कि वे याचिकाकर्ताओं का उत्पीड़न बंद करें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।<br />
अदालत ने कहा, ‘जो सवाल अदालत को परेशान करता है वह यह है कि क्या मुस्लिम पत्नियों को हमेशा इस तरह की स्वेच्छाचारिता से पीड़ित रहना चाहिए? क्या उनका निजी कानून इन दुर्भाग्यपूर्ण पत्नियों के प्रति इतना कठोर रहना चाहिए? क्या इन यातनाओं को खत्म करने के लिए निजी कानून में उचित संशोधन नहीं होना चाहिए? न्यायिक अंतरात्मा इस विद्रूपता से परेशान है?’ अदालत ने टिप्पणी की, ‘आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष देश में कानून का उद्देश्य सामाजिक बदलाव लाना है। अदालत ने टिप्पणी की, ‘भारत प्रगतिशील राष्ट्र है, भौगोलिक सीमाएं ही किसी देश की परिभाषा तय नहीं करतीं। इसका आकलन मानव विकास सूचकांक सहित कई अन्य पैमाने पर किया जाता है, जिसमें समाज द्वारा महिलाओं के साथ होने वाला आचरण भी शामिल है। इतनी बड़ी आबादी को निजी कानून के मनमानेपन पर छोड़ना प्रतिगामी है, समाज और देश के हित में नहीं है। यह भारत के एक सफल देश बनने में बाधा है और पीछे की तरफ धकेलता है।’<br />
इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में भी एक मामला विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट में आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड(एआईएमपीएलबी) तीन तलाक का समर्थन और केन्द्र सरकार इसका विरोध कर रही है। एआईएमपीएलबी ने कहा है कि तीन तलाक की व्यवस्था में परिवर्तन की कोई गुंजाईश नहीं है। उसने कुछ मुस्लिम संगठनों द्वारा तलाक को अन्तिम रूप देने से पहले सहमति बनाने के लिए तीन माह की ‘नोटिस की अवधि’ को अनिवार्य करने के सुझावों को भी नकार दिया है। इसके पहले 1986 में सुप्रीम कोर्ट के शाहबानो मामले पर फैसले के बाद केन्द्र की तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को कुछ शर्तों के साथ जीवनपर्यन्त भरण-पोषण वृत्ति का हक देने के लिए कानून बनाया था।<br />
%%%%<br />
इस्लामिक कानून व्यक्ति को मुख्य रूप से शादी तब खत्म करने की इजाजत देता है जब पत्नी का चरित्र खराब हो, जिससे शादीशुदा जिंदगी में नाखुशी आती है। लेकिन गंभीर कारण नहीं हों तो कोई भी व्यक्ति तलाक को उचित नहीं ठहरा सकता चाहे वह धर्म की आड़ लेना चाहे या कानून की।’ <em>(एजेंसी)। </em></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Dec 2016 00:27:07 +0530</pubDate>
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                <title>डीडीसीए ने लांघी अपनी सीमा: उच्च न्यायालय</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली:  दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ(डीडीसीए) को अपने तीन चयनकर्ताओं को हटाने के निर्णय पर फटकार लगाते हुये सोमवार को कहा कि क्रिकेट संघ ने न सिर्फ अपनी सीमा लांघी है बल्कि इस कदम से अदालत की अवमानना भी की है। डीडीसीए ने अपने तीन चयनकर्ताओं को हाल ही में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/delhi-high-court-raps-ddca-on-its-decision-to-remove-three-selectors/article-264"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/ddca.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नयी दिल्ली:</strong>  दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ(डीडीसीए) को अपने तीन चयनकर्ताओं को हटाने के निर्णय पर फटकार लगाते हुये सोमवार को कहा कि क्रिकेट संघ ने न सिर्फ अपनी सीमा लांघी है बल्कि इस कदम से अदालत की अवमानना भी की है।<br />
डीडीसीए ने अपने तीन चयनकर्ताओं को हाल ही में पद से हटा दिया था जिन्हें अदालत द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक न्यायाधीश मुकुल मुद्गल के निर्देश के बाद चुना गया था।<br />
न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और दीपा शर्मा की खंडपीठ ने डीडीसीए के इस कदम की निंदा करते हुये कहा कि अदालत ने इस मामले पर पहले ही अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था और ऐसा करके क्रिकेट संस्था ने अपनी हदें पार की हैं। <em>(वार्ता) </em></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Nov 2016 12:48:32 +0530</pubDate>
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