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                <title>Sitharaman - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>मुद्दों के समाधान के लिए राज्यों से संपर्क में रहें उद्योग: सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उद्योगों को अपने मुद्दों के समाधान के लिए अपने-अपने राज्य की सरकार के साथ संपर्क रखने का सुझाव दिया है। श्रीमती सीतारमण ने कारोबार के लिए नीति और प्रक्रियाओं में सुधार के मामले में राज्यों की तुलनात्मक रैंकिंग संबंधी रिपोर्ट व्यावसायिक सुधार कार्य योजना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/industry-should-be-in-touch-with-states-to-resolve-issues-sitharaman/article-35056"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/nirmala-sitharaman.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उद्योगों को अपने मुद्दों के समाधान के लिए अपने-अपने राज्य की सरकार के साथ संपर्क रखने का सुझाव दिया है। श्रीमती सीतारमण ने कारोबार के लिए नीति और प्रक्रियाओं में सुधार के मामले में राज्यों की तुलनात्मक रैंकिंग संबंधी रिपोर्ट व्यावसायिक सुधार कार्य योजना (बीआरएपी) 2020 जारी करते हुए यहां गुरुवार को कहा, ‘मैं उद्योगों से राज्यों के साथ संपर्क रखने की अपील करती हूं।</p>
<p style="text-align:justify;">जब उद्योग राज्य सरकार के पास जाते हैं और उनसे संपर्क में बने रहते हैं तो सरकारें कठिनाई के बावजूद उनकी मदद के लिए कदम जरूर उठाती हैं। उद्योगों की भूमिका बहुत बड़ी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर संवाद करते रहते हैं और वे मिलते भी हैं। इससे यह संकेत है कि केंद्र सरकार सुनने और कदम उठाने के लिए तत्पर रहती है। श्रीमती सीतारमण ने राज्य सरकारों के दृष्टिकोण में बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि भारत में राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा शुरू हुयी है और वे आर्थिक सुधारों से परहेज नहीं करते।</p>
<h3><strong>राज्य और जिला स्तर पर करने की जरूरत</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘कई राज्यों में अच्छी पद्धतियों को अच्छी तरह रिकॉर्ड किया गया है, इससे दूसरे राज्यों के नीति निमार्ताओं को उन्हें अपनाने में आसानी होगी। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि महामारी के दौरान और उसके पहले जो कदम उठाए गए थे, उसके फल मिलने लगे हैं और अब यह दिख रहा है कि बदलाव की एक भूख जगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने सरकारी विभागों में क्षमता निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल केंद्र ही नहीं राज्य और जिला स्तर पर करने की जरूरत है। सीतारमण ने कहा कि 1990 के दशक के विपरीत आज कोई सुधार शीर्ष नेतृत्व से थोपा नहीं जा रहा है और इसके लिए न ही कोई विवशता है। उन्होंने राज्य सरकारों की सराहना की कि वे केंद्र के साथ मिल-जुलकर काम कर रहे हैं और ऐसी सूचनाएं साझा करती हैं जिससे वस्तु एवं सेवाकर संग्रह में सुधार हो रहा है।</p>
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                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jun 2022 16:56:06 +0530</pubDate>
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                <title>फारूक सरकार में शुरू हुयी थी कश्मीरी पंडितों पर हिंसात्मक कार्रवाई: सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जम्मू और कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाने के लिए कांग्रेस की कड़ी निंदा करते हुये आज कहा कि इसके कारण जम्मू कश्मीर वैश्विक मुद्दा बन गया। उन्होंने कहा कि 29 जनवरी 1989 में उस समय कश्मीरी पंडितों (Kashmiri […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/violent-action-against-kashmiri-pandits-started-under-farooq-government-sitharaman/article-31740"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/sitharaman.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जम्मू और कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाने के लिए कांग्रेस की कड़ी निंदा करते हुये आज कहा कि इसके कारण जम्मू कश्मीर वैश्विक मुद्दा बन गया। उन्होंने कहा कि 29 जनवरी 1989 में उस समय कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandits) के विरूद्ध हिंसात्मक गतिविधियां शुरू हुयी थी जब कांग्रेस के सहयोग से नेशनल कांफ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला मुख्यमंत्री थे।</p>
<p style="text-align:justify;">श्रीमती सीतारमण ने राज्यसभा में जम्मू कश्मीर के वर्ष 2022-23 के बजट और विनियोग विधेयकों पर हुयी चर्चा का जबाव देते हुये कहा कि बजट पर कम और ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म पर अधिक चर्चा हुयी है। इसलिए उनको इसका भी जबाव देना होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समर्थित नेशनल कांफ्रेंस की सरकार 1986 से 1990 तक रही। इसी दौरान 29 जनवरी 1989 को घाटी में कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandits) को निशाना बनाने की शुरूआत हुयी। इस संबंध में पुलिस में दर्ज मामलों का तिथिबार ब्योरा देते हुये उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस नीत सरकार की देन थी। उन्होंने कहा कि इसके बाद जगमोहन को 1990 में दोबारा राज्य का राज्यपाल नियुक्त किया गया और राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">1963 में पंडित नेहरू ने धारा 370 को धीरे धीरे समाप्त होने की बात कही थी</h4>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्री ने जम्मू कश्मीर के मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाने के लिए प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की कड़ी आलोचना करते हुये कहा कि अब तक हमारा पड़ोसी देश इसका दुरूपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि नवंबर 1963 में पंडित नेहरू ने धारा 370 को धीरे धीरे समाप्त होने की बात कही थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका जबकि भारतीय जनता पार्टी के हर घोषणा पत्र में इसको समाप्त करने की बात कही गयी थी और उसी के अनुरूप इसको समाप्त भी किया गया है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Mar 2022 02:31:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सबको मिलकर अर्थव्यवस्था को गति देने की जरूरत : सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण से न सिर्फ उस क्षेत्र में रोजगार और अन्य गतिविधियाँ बढ़ेगी बल्कि कई उद्योगों को भी गति मिलेगी। सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अगुवा की भूमिका निभा रही है और इंफ्रा में निवेश कर रही है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/everyone-needs-to-accelerate-the-economy-together-sitharaman/article-12889"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/nirmala-sitharaman.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के माध्यम से संपदा निर्माण पर जोर दिया गया है</h2>
<h2 style="text-align:center;">(Nirmala Sitharaman)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> वित्त मंत्री निमार्ला सीतारमण ने सबको मिलकर अर्थव्यवस्था को गति देने की आवश्यकता बताते हुये रविवार को कहा कि बजट के माध्यम से सरकार इसके लिए सुविधा प्रदाता और बुनियादी ढाँचों के माध्यम से संपदा निमार्ता की भूमिका निभा रही है। (Nirmala Sitharaman) श्रीमती सीतारमण ने शनिवार को वर्ष 2020-21 का बजट पेश करने के बाद आज यहाँ संवाददाताओं से कहा कि अर्थव्यवस्था को कोई एक जैसे सरकार, निजी क्षेत्र, विदेशी निवेश, कारोबारी या एमएसएमई गति प्रदान नहीं कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबको मिलकर इसके लिए काम करना होगा। उन्होंने कहा कि इसलिए सरकार ने अपने दायित्व को समझते हुये बजट के माध्यम से अर्थव्यवस्था को गति देने के मार्ग प्रशस्त किये हैं। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के माध्यम से संपदा निर्माण पर जोर दिया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण से न सिर्फ उस क्षेत्र में रोजगार और अन्य गतिविधियाँ बढ़ेगी बल्कि कई उद्योगों को भी गति मिलेगी। सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अगुवा की भूमिका निभा रही है और इंफ्रा में निवेश कर रही है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">बजट में घोषित कृषि रेल और कृषि उड़ान योजना का उल्लेख करते हुये कहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके माध्यम से जल्द खराब होने वाले कृषि उत्पादोें को तीव्रता से बाजार तक पहुँचने में मदद मिलेगी।</li>
<li style="text-align:justify;">इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ ही इस काम में लगे क्षेत्र में भी तेजी आयेगी।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Feb 2020 17:34:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आम-बजट में राहत की उम्मीदें</title>
                                    <description><![CDATA[वित्तमंत्री से इस बार प्रस्तुत होने वाले बजट में राहत की दरकार भी है और उम्मीद भी।
 इस बार भी यदि यह बजट जनभावनाओं पर खरा नहीं उतरा तो देश का आर्थिक धरातल चरमरा सकता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/expect-relief-in-general-budget/article-11944"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/expect-relief-in-general-bu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अगर लोगों को बड़े पैमाने पर नौकरी मिलनी शुरू हुई तो इससे आम उपभोक्ताओं में विश्वास और उत्साह पैदा होगा। सरकार वक्त की नजाकत समझे। अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने के लिए वह दलीय भेदभाव भुलाकर सबको साथ ले और कुछ ठोस व कारगर फैसले करे। भ्रष्टाचार एवं बेईमानी की स्थितियों पर वर्तमान सरकार ने नकेल डाली है। उसका व्यापक असर भी देखने को मिला है, अब उसे इन कठोर कदमों के बीच जनता की तकलीफों एवं परेशानियों पर नियंत्रण पाने के लिये कुछ नये कदम उठाने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, व्यापार की टूटती सांसें, आर्थिक सुस्ती एवं विकास की रफ्तार में लगातार आ रही गिरावट चिंता का कारण है। जनता महंगाई एवं नवीन आर्थिक परिवर्तनों से जार-जार है, लोग बढ़ती महंगाई को लेकर चिंतित हैं, वे चाहते हैं कि आयकर सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। वित्तमंत्री से इस बार प्रस्तुत होने वाले बजट में राहत की दरकार भी है और उम्मीद भी। इस बार भी यदि यह बजट जनभावनाओं पर खरा नहीं उतरा तो देश का आर्थिक धरातल चरमरा सकता है। प्रश्न है कि आमजन किस तरह की राहत चाहते हैं और केन्द्र सरकार क्या सौगात देती हैं? हालांकि यह तो 28 फरवरी को ही तय होगा कि वित्तमंत्री जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">देश की अर्थव्यवस्था की विकास दर लगातार गिर रही है और बाजार में मांग नहीं है। मांग इसलिए नहीं है कि लोगों की जेब में पैसे नहीं हैं। लोगों की जेब में अतिरिक्त धन हो तो वे बाजार में जाएं और कुछ न कुछ जरूरत के अनुसार खरीदें। जब खरीदारी बढ़ेगी, खपत बढ़ेगी तभी उद्यमी उत्पादन करेंगे। इसलिये देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये छोटे आयकरदाताओं और मध्यम वर्ग को आयकर स्लैब में राहत देनी ही होगी, इसी से जो पैसा उनके पास बचेगा उससे उनकी कुछ क्रय-शक्ति बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने पिछले अनेक सालों में महंगाई, कर और हर वस्तु के भाव इतने बढ़ा दिए हैं कि हम कैसे उम्मीद करें कि वे कितनी राहत देंगे और लोग अपनी आमदनी से अपना घर आसानी से कैसे चला पाएंगे? जितना सरकार ने लोगों को आहत किया है उससे ज्यादा राहत की आशा करना आम लोगों के लिए बेमानी साबित होगा। लेकिन इन जन-शंकाओं एवं आशंकाओं से परे जाकर सरकार कुछ अनूठा एवं विलक्षण कर पाई तो अनेक समस्याओं का समाधान होगा। सरकार की मुश्किल यह है कि व्यक्तिगत आयकर में छूट का दायरा बढ़ाने से राजकोषीय घाटा बढ़ेगा, लेकिन तरह-तरह के राहत पैंकेज देने की बजाय सरकार इस मूल में कुछ अनोखा कर सके, तो यह चमत्कार ही होगा, और जनता इस चमत्कार को नमस्कार करेंगी। नरेन्द्र मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पिछले दिनों जो उपाय किए हैं, उनका असर कब से दिखना शुरू होगा, यह अनिश्चित है, लेकिन आयकर में राहत का असर तत्काल दृश्यमान होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अर्थव्यवस्था अजीब विरोधाभासी दौर में है जिसमें लगातार महंगाई बढ़ रही है, नये रोजगार के अवसर सामने आने की बजाय रोजगार में कटौती हो रही है, उत्पादन गतिविधियां कमजोर हो रही हैं, निवेश घट रहा है, बाजार में मांग कम हो रही है और निर्यात घाटा भी बढ़ रहा है तथा विदेशी मुद्रा डॉलर महंगी हो रही है मगर शेयर बाजार बढ़ रहा है और सोने की कीमतों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। मुद्रास्फीति की दर या महंगाई में कमी को भी इन्हीं सब आधारभूत आर्थिक मानकों से बांध कर देखना होगा। इसका सीधा मतलब यह होता है कि बाजार में सक्रिय आर्थिक शक्तियां निराशा एवं हताशा की स्थिति में हैं। प्रश्न है कि यह स्थिति क्यों बन रही है? सरकारी बजट को आम लोग समझते ही नहीं कि उनके धन का कितना उपयोग या दुरुपयोग हो रहा है। जो समझते हैं वे सिवाय विरोध के कुछ नहीं करते।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि पिछले दिनों सरकार ने विदेशी निवेशकों से सरचार्ज हटाया और कॉपोर्रेट टैक्स में कटौती की। आॅटो सेक्टर की बेहतरी के लिए घोषणाएं की गईं, संकटग्रस्त रीयल एस्टेट और नॉन बैंकिंग फाइनैंशल कंपनियों के लिए भी कदम उठाए गए। इन सबसे बाजार में सुधार की आशा है। संभव है, बाजार में डिमांड बढ़ाने के लिए बजट में कुछ बड़ी राहत की घोषणाएं एवं प्रावधान किये जाएं। इन सबके साथ-साथ सरकार को रोजगार बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा। अगर लोगों को बड़े पैमाने पर नौकरी मिलनी शुरू हुई तो इससे आम उपभोक्ताओं में विश्वास और उत्साह पैदा होगा। सरकार वक्त की नजाकत समझे। अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने के लिए वह दलीय भेदभाव भुलाकर सबको साथ ले और कुछ ठोस व कारगर फैसले करे। भ्रष्टाचार एवं बेईमानी की स्थितियों पर वर्तमान सरकार ने नकेल डाली है। उसका व्यापक असर भी देखने को मिला है, अब उसे इन कठोर कदमों के बीच जनता की तकलीफों एवं परेशानियों पर नियंत्रण पाने के लिये कुछ नये कदम उठाने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार को जनता की जेब पर कर के रूप में हमला न करते हुए, उदार दृष्टिकोण अपनाना होगा। चाणक्य नीति में कहा गया है कि जिस प्रकार फूल से भंवरा मधुकरी कर बिना फूल को नुकसान पहुंचाए काम चलाता है, ठीक उसी प्रकार सरकार को जनता से कर लेना चाहिए। अधिक नहीं। मनुस्मृति में कहा गया है कि सरकार को यथोचित मात्रा में ही कर लेना चाहिए अन्यथा साधारण जन तो क्या साधु-संत भी विद्रोह पर उतारू हो जाते हैं। हमें मितव्ययता की वृत्ति नहीं बल्कि खर्च करने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन देना होगा, तभी हम देश की आर्थिक अस्मिता एवं अखण्डता को बचा सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आठ दशकों के सफर के बावजूद देश के आयकर अधिनियम में भी कई छिद्र थे। लोग अच्छी आय होने के बावजूद आयकर की चोरी करते थे और इसके लिए कई अनैतिक तरीके अपनाते थे। मोदी सरकार ने इन स्थितियों में सुधार के लिये अनेक क्रांतिकारी कदम उठाये, नोटबंदी और जीएसटी लागू की गयी। नोटबंदी के बाद 2016-17 में आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में भारी इजाफा हुआ। कालाधन जमा करने वालों की संख्या बढ़ी लेकिन नोटबंदी और जीएसटी के बाद छोटे उद्योगों को हानि हुई, व्यापार में अंधेरा व्याप्त हुआ, जीएसटी की पेचिदा एवं जटिल प्रणाली ने लोगों की उलझने बढ़ाई। पूरा देश एक बाजार तो बन गया लेकिन छोटे उद्योगों को राज्य की सीमा में जो संरक्षण मिलता था वह समाप्त हो गया। छोटे उद्योगों पर बोझ बढ़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">रिटर्न भरने का बोझ तो बहुत जटिल और दबावपूर्ण बना हुआ ही है। अब जीएसटी में नए स्लैब बनाने की तैयारी की जा रही है। जब देश एक बाजार बन गया तो सस्ते माल को बनाने वाले बड़े उत्पादकों के हाथ पूरा मैदान आ गया जिसमें छोटे उद्योगों को कोई जगह नहीं मिलती। फलस्वरूप रोजगार खत्म हो गए। छोटे उद्योगों से कर्मचारी निकाल दिए गए और मंदी के दौर में आटोमोबाइल कम्पनियों ने भी हजारों लोगों को नौकरी से निकाल दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सही है कि कापोर्रेट टैक्स में कटौती के बाद वित्त मंत्रालय ने ऐसे कोई राहत के कदम नहीं उठाये हंै, जिन्हें तात्कालिक असर डालने वाला कहा जा सके। उद्योग व्यापार जगत के लोग लगातार निरुत्साहित हैं। उनकी शिकायतें बेवजह नहीं है। सरकार उनकी नाराजगी एवं परेशानी से भलीभांति भिज्ञ है, माहौल को ढांपने का प्रयास करती है। बेहतर यही होगा कि सरकार दीर्घकालीन उपाय करे और आम आदमी, छोटे उद्योगों एवं व्यापारियों को राहत प्रदान करे। नए बजट में उसे ऐसे उपाय करने होंगे ताकि आम आदमी के साथ व्यापारियों एवं उद्यमियों के चेहरों पर मुस्कुराहट आ सके।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><em>ललित गर्ग</em></strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/expect-relief-in-general-budget/article-11944</link>
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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2019 20:48:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व की 100 शक्तिशाली महिलाओं की सूची में सीतारमण शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[अरुण जेटली ने अस्वस्थ होने की वजह से इस बार मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने से मना कर दिया था
और श्रीमती सीतारमण को देश की पहली पूर्ण वित्त मंत्री होने का श्रेय मिला है ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sitharaman-is-included-in-the-list-of-100-powerful-women-of-the-world/article-11754"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/sitharaman-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">फोर्ब्स की सूची सूची में पहले स्थान पर जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल (Nirmala Sitharaman )</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>न्यूयार्क (एजेंसी)।</strong> वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण फोर्ब्स को विश्व की 100 शक्तिशाली महिलाओं की सूची में 34 वां स्थान मिला है। सूची में पहले स्थान पर जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और दूसरे नंबर पर यूरोपीय केंद्रीय बैंक की अध्यक्ष क्रिश्टिन लागार्ड हैं। फोर्ब्स की विश्व की 100 शक्तिशाली महिलाओं की जारी सूची में श्रीमती सीतारमण ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी और सलाहकार इवांका ट्रंप से क्रमश:छह और आठ पायदान ऊपर हैं । महारानी को 40 वां और इवांका ट्रंप को सूची में 42 वां स्थान मिला है। यही नहीं श्रीमती सीतारमण का सूची में स्थान न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंदा अर्डर्न से भी ऊपर हैं। सुश्री अर्डन सूची में 38 वें स्थान पर हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बंगलादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना 29 वें स्थान पर</h3>
<p style="text-align:justify;">सूची में स्थान पानी वाली अन्य भारतीय महिलाओं में एचसीएल कापोर्रेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और कार्यकारी निदेशक रोशनी नडार मल्होत्रा और बायोकान संस्थापक किरन मजूमदार शा भी शामिल हैं। दोनों का सूची में स्थान क्रमश: 54 वां और 65 वां है। सूची में पहले स्थान पर लगातार नौवीं बार जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल का नाम है। दूसरे नंबर पर यूरोपीय केंद्रीय बैंक की अध्यक्ष क्रिश्टिन लागार्ड हैं । अमेरिकी कांग्रेस की प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी का सूची में तीसरा स्थान है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">बंगलादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना 29 वें स्थान पर हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में श्रीमती सीतारमण को वित्त मंत्री का प्रभार दिया गया था ।</li>
<li style="text-align:justify;">पिछली सरकार में वह रक्षा मंत्रालय संभाल रही थी।</li>
<li style="text-align:justify;">अरुण जेटली ने अस्वस्थ होने की वजह से इस बार मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने से मना कर दिया था</li>
<li style="text-align:justify;">और श्रीमती सीतारमण को देश की पहली पूर्ण वित्त मंत्री होने का श्रेय मिला है ।</li>
<li style="text-align:justify;">इससे पहले स्वर्गीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पास कुछ समय के लिए वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार था।</li>
<li style="text-align:justify;">फोर्ब्स की शक्तिशाली 100 महिलाओं की सूची में वित्त मंत्री नयी हैं।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">मिलिंडा गेट्स को छठा स्थान मिला</h3>
<p style="text-align:justify;">सूची में मिलिंडा गेट्स को छठा और आईबीएम की सीईओ गिन्नी रोमेट्टी को नौवां स्थान मिला है। फेसबुक की मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) श्रेयाल सेंडबर्ग 18 वें और गायिका रिहाना 61 वें नंबर पर है। बेयोंस 66 और टेलर स्विफ्ट 71 ,जलवायु के क्षेत्र में कार्यरत ग्रेट थुनबर्ग को अंतिम स्थान मिला है जबकि टेनिस खिलाड़ी सेरेना विलियम्स 81 वें नंबर पर हैं। इसके अलावा सूची में पहले दस स्थान पर रहने वाली महिलाओं उर्रसुला वान डेर लियेन, मैरी बर्रा, अबीगेल जानसन, अना पैट्रीसिया बोटिन और मार्लिन हेवसन शामिल हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Dec 2019 16:24:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें स्थिर रखना संभव नहीं: निर्मला सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[बीजद सांसद पिनाकी मिश्रा ने पीएमसी बैंक में हुए वित्तीय घोटाले और इसमें जमाकर्ताओं के धन के मसले पर कहा
 कि हजारों खाताधारकों के खून पसीने की गाढ़ी कमाई बैंक में फंसी हुई है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/it-is-not-possible-to-keep-the-prices-of-petrol-products-stable-nirmala-sitharaman/article-11587"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/nirmala-sitharaman.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने की कोई योजना नहीं (Nirmala Sitharaman)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि देश में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें फिलहाल एक दर पर रखना फिलहाल संभव नहीं है क्योंकि इनकी कीमतें वैश्विक स्तर से जुड़ी हैं। श्रीमती सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में मेश विधूड़ी के इस सवाल पर कि जब रूस और अमेरिका में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें स्थिर रखी जा सकती है तो देश में यह क्यों संभव नहीं है, का जवाब देते हुए कहा कि विश्व में कहीं भी पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें स्थिर नहीं है और यह वैश्विक स्तर पर मांग और आपूर्ति से संबद्ध है। छोटे किसानों को डीजल पर छूट अथवा सब्सिडी दिए जाने के एक सवाल पर उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जो भी सुझाव आएंगे उन पर गौर किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने की कोई योजना नहीं है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में देश के विभिन्न राज्यों में एकरूपता की कमी : दयानिधि</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong><em>-द्रमुक सांसद दयानिधि मारन ने पेट्रोलियम पदार्थों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में देश के विभिन्न राज्यों में एकरूपता की कमी है और इन पर एक समान कर लगाया जाना चाहिए। बीजद सांसद पिनाकी मिश्रा ने पीएमसी बैंक में हुए वित्तीय घोटाले और इसमें जमाकर्ताओं के धन के मसले पर कहा</em> </strong></p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> हजारों खाताधारकों के खून पसीने की गाढ़ी कमाई बैंक में फंसी हुई है</li>
<li style="text-align:justify;">और सरकार को इस दिशा में कोई कदम उठाना चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;">श्रीमती सीतारमन ने कहा कि सरकार बैंक के घटनाक्रम से पूरी तरह वाकिफ है</li>
<li style="text-align:justify;">और छोटे जमाकर्ताओं जिनकी संख्या लगभग 78 प्रतिशत है</li>
<li style="text-align:justify;">उन्हें रिजर्व बैंक के दिशानिर्देश पूरी राशि निकासी की अनुमति दी गई है।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके अलावा अगर किसी खाताधारक को कोई कोई गंभीर बीमारी है</li>
<li style="text-align:justify;">या परिवार में कोई बीमार है, अथवा परिवार में शादी है या शिक्षा के लिए वह एक लाख रूपए तक की राशि निकासी कर सकता है।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Dec 2019 16:22:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अटके हुए अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए अलग से फंड बनेगा, सरकार 10 हजार करोड़ देगी : सीतारमण</title>
                                    <description><![CDATA[वित्त मंत्री ने कहा- ऐसे प्रोजेक्ट जो एनपीए नहीं हैं और दिवालिया अदालत में नहीं हैं, उन्हें पूरा करने के लिए स्पेशल विंडो के जरिए मदद दी जाएगी नई योजना रिमिसन ऑफ ड्यूटीज-टैक्सेस ऑन एक्सपोर्ट के जरिए एक्सपोर्टर के लिए 50 हजार करोड़ रुपए का इन्सेंटिव दिया जाएगा नई दिल्ली| अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/a-separate-fund-will-be-created-for-stalled-affordable-housing-projects/article-10432"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-09/separate-fund-will-be-created-for-the-affordable-housing-project-government-will-give-10-thousand-crores-sitharaman.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>वित्त मंत्री ने कहा- ऐसे प्रोजेक्ट जो एनपीए नहीं हैं और दिवालिया अदालत में नहीं हैं, उन्हें पूरा करने के लिए स्पेशल विंडो के जरिए मदद दी जाएगी</strong></li>
<li><strong>नई योजना रिमिसन ऑफ ड्यूटीज-टैक्सेस ऑन एक्सपोर्ट के जरिए एक्सपोर्टर के लिए 50 हजार करोड़ रुपए का इन्सेंटिव दिया जाएगा</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली| </strong>अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को हाउसिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए कई ऐलान किए। देशभर में अटके पड़े ऐसे अफोर्डेबल और मिडिल क्लास हाउसिंग प्रोजेक्ट जो एनपीए नहीं हैं और दिवालिया अदालत में नहीं हैं, उन्हें स्पेशल विंडो के जरिए उन्हें मदद दी जाएगी। ऐसे प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए अलग अलग फंड बनाया जाएगा। इसमें सरकार 10 हजार करोड़ रुपए का योगदान देगी। इतनी ही रकम अन्य निवेशक देंगे। इनमें एलआईसी, कुछ अन्य संस्थान, बैंक और सॉवरेन फंड शामिल होंगे। इस योजना से 3.5 लाख अटके हुए प्रोजेक्ट पूरे करने में मदद मिलेगी।</p>
<h2>एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए 5 ऐलान</h2>
<ul>
<li>प्राथमिकता वाले सेक्टर के तहत एक्सपोर्ट क्रेडिट के लिए 36,000 करोड़ से 68,000 करोड़ रुपए अतिरिक्त जारी किए जाएंगे।</li>
<li>नई योजना रिमिसन ऑफ ड्यूटीज-टैक्सेस ऑन एक्सपोर्ट के जरिए एक्सपोर्टर के लिए 50 हजार करोड़ रुपए का इन्सेंटिव दिया जाएगा।</li>
<li>हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री एक्सपोर्ट के लिए ई-कॉमर्स का इस्तेमाल कर पाएगी। एक्सपोर्ट का समय कम करने के लिए दिसंबर तक विशेष योजना शुरू की जाएगी।</li>
<li>एक्सपोर्ट क्रेडिट इंश्योरेंस स्कीम का दायरा बढ़ेगा। एक्सपोर्ट के लिए कर्ज देने वाले बैंकों को ज्यादा इंश्योरेंस कवर दिया जाएगा। इससे यह फायदा होगा कि बैंकों को ज्यादा सुरक्षा मिलेगी तो वे एक्सपोर्टर को ज्यादा कर्ज देंगे। इस पर सालाना 1700 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।</li>
<li>मार्च 2020 में 4 थीम पर 4 अलग-अलग जगहों पर एनुअल मेगा शॉपिंग फेस्टिवल आयोजित किए जाएंगे।</li>
</ul>
<h2>तिमाही जीडीपी ग्रोथ 6 साल में सबसे कम</h2>
<p style="text-align:justify;">अप्रैल-जून में जीडीपी ग्रोथ घटकर 5% रह गई। यह 6 साल में सबसे कम है। वाहन बिक्री लगातार घटने की वजह से ऑटो सेक्टर दबाव में है। अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए सरकार ने पिछले दिनों बैंकों के मर्जर, स्टार्टअप को एंजल टैक्स से छूट और शेयर बाजार में विदेशी और घरेलू निवेशकों पर सरचार्ज बढ़ोतरी वापस लेने समेत कई ऐलान किए थे।</p>
<h2>अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार कन्फ्यूज: प्रियंका गांधी</h2>
<p style="text-align:justify;">अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर कांग्रेस लगातार सरकार पर निशाना साध रही है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने गुरुवार को कहा कि सरकार कन्फ्यूज है। पार्टी नेता कपिल सिब्बल ने अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े बताकर शुक्रवार को कहा कि इस सरकार का ट्रेलर ही काफी है हमें पूरी पिक्चर नहीं देखनी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/a-separate-fund-will-be-created-for-stalled-affordable-housing-projects/article-10432</link>
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                <pubDate>Sat, 14 Sep 2019 16:28:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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