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                <title>india china - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>BRICS Summit: चीन ने इतने अरसे बाद फिर कहा&amp;#8230;‘‘चीनी-हिन्दी भाई-भाई’’</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध खत्म करने को भारत के साथ समझौते को राजी लद्दाख (एजेंसी)। चीन आज 22 अक्तूबर को पूर्वी लद्दाख में सीमा गतिरोध खत्म करने के लिए भारत के साथ एक समझौते के लिए तैयार हो गया है।, इस बात की पुष्टि चीन द्वारा एक मीडिया रिपोर्ट में की गई है। BRICS Summit […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/china-agrees-with-india-to-end-border-standoff-in-eastern-ladakh/article-63546"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/bricks-submitt.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध खत्म करने को भारत के साथ समझौते को राजी</h3>
<p style="text-align:justify;">लद्दाख (एजेंसी)। चीन आज 22 अक्तूबर को पूर्वी लद्दाख में सीमा गतिरोध खत्म करने के लिए भारत के साथ एक समझौते के लिए तैयार हो गया है।, इस बात की पुष्टि चीन द्वारा एक मीडिया रिपोर्ट में की गई है। BRICS Summit</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान के हवाले से बताया गया ‘‘हाल के समय में, चीन और भारत चीन-भारत सीमा से संबंधित मुद्दों पर कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से निकट संपर्क में हैं, और चीन भारत के साथ हाथ मिलाना चाहता है। अब दोनों पक्ष प्रासंगिक मामलों पर एक समाधान पर पहुँच गए हैं, जिसकी चीन बहुत प्रशंसा करता है। आगे बढ़ते हुए, चीन इन प्रस्तावों को लागू करने के लिए भारत के साथ काम करेगा।’’ रिपोर्ट में जियान ने दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते की कोई विशेष जानकारी या विवरण साझा नहीं किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक में प्रवक्ता ने कहा, ‘‘अगर कुछ भी सामने आता है तो हम आपको अपडेट रखेंगे।’’ 21 अक्तूबर को भारत ने कहा कि उसने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त करने के लिए चीन के साथ समझौता कर लिया है। जून 2020 से दोनों सेनाओं के बीच चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद इस खबर को ‘बड़ी सफलता’ के रूप में देखा गया। BRICS Summit</p>
<p><a title="US Presidential Poll 2024: अमेरिकी चुनावों का शेयर बाजार पर पड़ने वाले असर को लेकर ब्लैकरॉक के सीईओ ने दिया बड़ा ब्यान!" href="http://10.0.0.122:1245/us-presidential-poll-2024/">US Presidential Poll 2024: अमेरिकी चुनावों का शेयर बाजार पर पड़ने वाले असर को लेकर ब्लैकरॉक के सीईओ न…</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
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                <pubDate>Tue, 22 Oct 2024 14:47:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>पूर्वी लद्दाख: गोगरा में पीछे हटी भारत और चीन की सेना</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। भारत और चीन के सैन्य कमांडरों के बीच 12 वें दौर की वार्ता के बाद दोनों सेनाओं ने नियंत्रण रेखा पर गोगरा क्षेत्र से अपने-अपने सैनिकों को पीछे हटा लिया है और अब दोनों पक्षों के सैनिक अपने पुराने स्थायी बेस में पहुंच गये हैं। सेना ने आज एक वक्तव्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/eastern-ladakh-indian-and-chinese-forces-retreated-in-gogra/article-25802"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/india-china-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> भारत और चीन के सैन्य कमांडरों के बीच 12 वें दौर की वार्ता के बाद दोनों सेनाओं ने नियंत्रण रेखा पर गोगरा क्षेत्र से अपने-अपने सैनिकों को पीछे हटा लिया है और अब दोनों पक्षों के सैनिक अपने पुराने स्थायी बेस में पहुंच गये हैं। सेना ने आज एक वक्तव्य जारी कर कहा कि गत 31 जुलाई को चुशुल मोल्दो में दोनों पक्षों के बीच कोर कमांडर स्तर की बारहवें दौर की बातचीत के परिणामस्वरूप दोनों पक्षों ने गोगरा क्षेत्र से अपने सैनिकों को पीछे हटा लिया है और यह कार्रवाई बुधवार और गुरूवार को हुई तथा अब दोनों के सैनिक अपने पुराने स्थायी बेस में पहुंच गये हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वक्तव्य में कहा गया है कि दोनों पक्षों के बीच भारत-चीन सीमा के पश्चिमी सेक्टर में नियंत्रण रेखा के साथ-साथ विवाद के बाकी बचे विषयों पर स्पष्ट रूप से विचारों का विस्तार से आदान प्रदान हुआ। दोनों पक्ष गोगरा क्षेत्र से सैनिकों को पीछे हटाने पर सहमत हुए थे। इस क्षेत्र में दोनों सेनाओं के सैनिक गत वर्ष मई से आमने सामने टकराव की स्थिति में थे।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Aug 2021 17:30:29 +0530</pubDate>
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                <title>लद्दाख गतिरोध: भारत और चीन के कोर कमांडरों के बीच 12वें दौर की वार्ता कल</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच बने सैन्य गतिरोध को दूर करने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के कोर कमांडरों की 12वें दौर की वार्ता रविवार को होगी। सेना के सूत्रों के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारियों की यह बैठक नियंत्रण रेखा पर चीन की सीमा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ladakh-standoff-12th-round-of-talks-between-corps-commanders-of-india-and-china-tomorrow/article-25613"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/ladakh-standof.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">
<strong>नई दिल्ली।</strong> पूर्वी लद्दाख में नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच बने सैन्य गतिरोध को दूर करने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के कोर कमांडरों की 12वें दौर की वार्ता रविवार को होगी। सेना के सूत्रों के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारियों की यह बैठक नियंत्रण रेखा पर चीन की सीमा में मोल्दो क्षेत्र में सुबह साढ़े दस बजे होगी। दोनों पक्षों के बीच अब तक 11 दौर की वार्ता हो चुकी है और कमांडो के बीच अंतिम दौर की वार्ता 09 अप्रैल को हुई थी। सूत्रों के अनुसार दोनों पक्ष बातचीत के दौरान हॉट स्प्रिंग और गोगरा हाइट्स क्षेत्र से सैनिकों को पीछे हटाने के बारे में मुख्य रूप से चर्चा करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों पक्षों के बीच पिछले एक वर्ष से भी अधिक समय से पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध बना हुआ है। अब तक सैन्य कमांडरों की बातचीत में बनी सहमति के आधार पर पैगोंग झील क्षेत्र से सैनिकों को पीछे हटाया गया है। लेकिन कुछ अन्य विवादास्पद क्षेत्रों से सैनिकों को पीछे हटाने को लेकर अभी तक दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई है। पिछले वर्ष रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने-अपने समकक्ष मंत्रियों के साथ अलग-अलग मौकों पर विदेशों में आयोजित कार्यक्रमों में बातचीत की थी जिसके आधार पर दोनों पक्षों में नियंत्रण रेखा पर शांति तथा परस्पर विश्वास बढ़ाने के लिए सहमति बनी थी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jul 2021 19:19:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>चीन की एक और शरारत</title>
                                    <description><![CDATA[वास्तव में नियंत्रण रेखा से सैनिक हटाने के समझौते के बावजूद चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र में दाखिल होकर एक बार फिर सीमावर्ती विवाद को गर्मा दिया है। यह घटना तिब्बत से निर्वासित धार्मिक नेता दलाईलामा, जो भारत में मौजूद हैं, के जन्मदिन पर घटित हुई। इस दिन ऐसी कार्रवाई कर चीन ने यह संदेश […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/another-prank-from-china/article-25109"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/indo-china.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वास्तव में नियंत्रण रेखा से सैनिक हटाने के समझौते के बावजूद चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र में दाखिल होकर एक बार फिर सीमावर्ती विवाद को गर्मा दिया है। यह घटना तिब्बत से निर्वासित धार्मिक नेता दलाईलामा, जो भारत में मौजूद हैं, के जन्मदिन पर घटित हुई। इस दिन ऐसी कार्रवाई कर चीन ने यह संदेश दिया है कि भारत द्वारा दलाईलामा को शरण देना उसे मंजूर नहीं है। दलाईलामा का मामला भले ही कुछ भी हो लेकिन सीमा का उल्लंघन कर इस संवेदनशील मुद्दे के साथ चीन खिलवाड़ कर रहा है। करीब दो वर्ष पूर्व गलवान घाटी में चीनी सैनिकों का भारतीय सेना पर किए हमले के बाद टकराव वाले हालात पैदा हो गए थे, फिर भी भारत ने संयम में रहकर कमांडर स्तर की कई मीटिंगों के बाद मामले को शांत किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">आखिरकार दोनों देश सैनिकों की वापिसी के लिए सहमत हुए थे। विगत माह भी सीमा पर चीन की सेना के इक्ट्ठा होने की खबरें चर्चा में रहीं। यह जरूरी है कि चीन समझौते की सही तरीके से पालना करे। यहां चिंताजनक बात यह है कि चीन अपनी कही गई बात से बार-बार पीछे हट रहा है। 1962 के हमले से पूर्व यही चीन हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा लगा चुका था। गलवान घाटी में समझौते के अनुसार गोली चलाने पर मनाही थी, लेकिन चीनी सैनिकों ने कंटीली तार वाले डंडों का प्रयोग कर भारत के 20 सैनिकों को शहीद कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद गोली चलने की घटना भी हुई। अब फिर समझौते का उल्लंघन कर सीमा पार की गई। चीन लद्दाख में भी अपनी अवैध गतिविधियों को अंजाम देता रहा है। नि:संदेह भारत ने चीनी सैनिकों को खदेड़ने के लिए सख्त कदम उठाया है लेकिन समझौते के बावजूद नियमों का बार-बार उल्लंघन चीन की नीयत पर संदेह पैदा करता है। चीन के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह दो कदम आगे बढ़कर एक कदम पीछे हटता है लेकिन विश्वास में लेकर फिर धोखा करता है। भारत सरकार को चीन की ताकत पर नजर रखने के साथ-साथ उसकी नीयत पर ज्यादा नजर रखनी होगी।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jul 2021 09:00:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>चीन के साथ समझौता देश की अखंडता से खिलवाड : एंटनी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने आरोप लगाया है कि सीमा पर शांति के लिए जो सहमति बनी है उससे देश की जमीन चीन के कब्जे में गयी है और इससे हमारे लिए खतरा बढ़ गया है। एंटोनी ने रविवार को यह पार्टी मुख्यालय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/agreement-with-china-messing-up-the-integrity-of-the-country-antony/article-21772"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/agreement-with-china-messing-up-the-integrity-of-the-country-antony.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)</strong>। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने आरोप लगाया है कि सीमा पर शांति के लिए जो सहमति बनी है उससे देश की जमीन चीन के कब्जे में गयी है और इससे हमारे लिए खतरा बढ़ गया है। एंटोनी ने रविवार को यह पार्टी मुख्यालय में विशेष संवादाता सम्मेलन में कहा कि समझौते में भारत की सीमा चीन को दी गयी है और देश की सुरक्षा के लिए इससे बड़ा कोई खतरा नहीं हो सकता है। चीन के साथ हुए इस समझौते को लेकर उन्होंने सरकार से कहा कि उसने सेना के शौर्य और पराक्रम को कम करके आंका है। पूरा देश शांति चाहता है लेकिन देश की सरजमीं चीन को सौंपने की कीमत पर शांति स्थापित नही की जा सकती।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी सरकार ने गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो झील इलाके के अंदर अपनी सरजमीं को चीन को सौंप कर राष्ट्रीय सुरक्षा और भूभागीय अखंडता से खिलवाड़ किया है इसलिए सरकार को बतान चाहिये कि उसने उस गलवान वेली से जहाँ हमारे सैनिको ने सरजमीं की सुरक्षा के लिए शहादत दी वहाँ पर पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 से पीछे अपनी सेना को क्यों हटाया गया है। सरकार यह भी बताए कि भारतीय सीमा में बफर जोन क्यों बनाया है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Feb 2021 21:21:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सैन्य कमांडर वार्ता: सैनिकों को पीछे हटाने पर नहीं बनी सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्लीl पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले छह महीने से भी अधिक समय से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त करने के लिए भारत और चीन के सैन्य कमांडरों के बीच आठवें दौर की बातचीत में भी सैनिकों को पीछे हटाने के बारे में सहमति नहीं बनी। सैन्य कमांडरों के बीच आठवें दौर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/military-commander-talks-no-agreement-agreed-to-withdraw-troops/article-19777"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/military-commander-talks-no-agreement-agreed-to-withdraw-troops.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली</strong>l पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले छह महीने से भी अधिक समय से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त करने के लिए भारत और चीन के सैन्य कमांडरों के बीच आठवें दौर की बातचीत में भी सैनिकों को पीछे हटाने के बारे में सहमति नहीं बनी। सैन्य कमांडरों के बीच आठवें दौर की वार्ता भारतीय सीमा क्षेत्र के चुशूल में गत शुक्रवार काे हुई थी लेकिन करीब दस घंटे चली बातचीत का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया और यह तय हुआ कि दोनों पक्षों के बीच जल्द ही फिर से वार्ता होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सैन्य कमांडरों की वार्ता समाप्त होने के करीब 48 घंटे बाद रक्षा मंत्रालय ने इस बारे में संक्षिप्त बयान जारी कर कहा कि दोनों पक्षों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव तथा गतिरोध समाप्त करने के लिए स्पष्ट दृष्टिकोण तथा विस्तार से बातचीत हुई। दोनों के बीच सैनिकों की वापसी को लेकर सकारात्मक विचारों का आदान प्रदान हुआ। यह भी सहमति बनी कि दोनों पक्ष दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति को गंभीरता के साथ अमल में लायेंगे। वे यह भी सुनिश्चित करेंगे कि अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिक संयम बरतेंगे और गलतफहमी तथा नासमझी से से बचेंगे।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sun, 08 Nov 2020 11:23:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-चीन गतिरोध: लगातार तीसरे दिन बात करेंगे सैन्य अधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में पेगोंग झील के निकट पिछले सप्ताह के घटनाक्रम के बाद से भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच मुद्दों के समाधान के लिए आज लगातार तीसरे दिन भी बैठक हो रही है। इससे पहले सोमवार और मंगलवार को दोनों पक्षों के बीच ब्रिगेड कमांडर स्तर की वार्ता के बाद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-china-deadlock-military-officials-will-talk-for-the-third-consecutive-day/article-18047"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/india-china.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> पूर्वी लद्दाख में पेगोंग झील के निकट पिछले सप्ताह के घटनाक्रम के बाद से भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच मुद्दों के समाधान के लिए आज लगातार तीसरे दिन भी बैठक हो रही है। इससे पहले सोमवार और मंगलवार को दोनों पक्षों के बीच ब्रिगेड कमांडर स्तर की वार्ता के बाद आज सुबह दस बजे तीसरे दौर की वार्ता फिर शुरू हुई। चीन के अनुरोध पर चुशूल मोल्डो में हो रही बातचीत में पेगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर गत सप्ताह हुई घटनाक्रम से संबंधित मुद्दों पर बातचीत होगी। इस बातचीत का उद्देश्य ताजा घटनाक्रम के बाद एक बार फिर सीमा पर बने तनाव को कम करना और स्थिति को सामान्य बनाना है। सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच पहले दौर की दो वार्ताओं में किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच ताजा घटनाक्रम के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने चीन , नेपाल और भूटान से लगती सीमाओं पर तैनात सुरक्षा बलों को पूरी तरह चौकस और सतर्क रहने का आदेश दिया है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस को उत्तराखंड, अरूणाचल प्रदेश , हिमाचल प्रदेश , लद्दाख और सिक्किम में जबकि सीमा बल को नेपाल और भूटान सीमा पर सख्त निगरानी रखने को कहा गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार , चीफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे और सैन्य संचालन महानिदेशक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक में स्थिति की समीक्षा की और भविष्य की योजना पर चर्चा की। सिंह शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए आज मास्को रवाना हो रहे हैं। इस बैठक में चीन के रक्षा मंत्री भी शामिल होंगे।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2020 13:11:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लद्दाख झड़प: प्रधानमंत्री ने कल बुलाई सर्वदलीय बैठक, प्रधानमंत्री ने चीन को चेताया, कहा-</title>
                                    <description><![CDATA[वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के सैनिकों के साथ हुई झड़प में शहीद होने वाले भारतीय जवानों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि उनकी शहादत बेकार नहीं जाएगी। पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं देश को इस बात के लिए आश्वस्त करता हूं। हमारे लिए देश की एकता और अखंडता सर्वोपरि है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ladakh-clash-prime-minister-convened-all-party-meeting-yesterday-prime-minister-warned-china-said/article-16150"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/ladakh-clash-prime-minister-convened-all-party-meeting-yesterday-prime-minister-warned-china-said-.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;">भारत शांति चाहता है पर जवाब देने में भी सक्षम</h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h6>हमारे जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा पीएम मोदी</h6>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h6>सेना, वायुसेना और नेवी अलर्ट</h6>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h6>देश की संप्रभुता से कभी समझौता नहीं किया जाएगा</h6>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h6>लद्दाख में मारते-मारते शहीद हुए भारतीय जवान: पीएम</h6>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h6>शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में दो मिनट का मौन रखा गया</h6>
</li>
</ul>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong>। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के सैनिकों के साथ हुई झड़प में शहीद होने वाले भारतीय जवानों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि उनकी शहादत बेकार नहीं जाएगी। पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं देश को इस बात के लिए आश्वस्त करता हूं। हमारे लिए देश की एकता और अखंडता सर्वोपरि है। भारत शांति चाहता है, लेकिन माकूल जवाब देने का सामर्थ रखता है।’ अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मैं शहीदों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं, जवानों और उनके परिवार को भरोसा दिलाता हूं कि देश आपके साथ है, स्थिति कुछ भी हो देश आपके साथ है। भारत अपने स्वाभिमान और हर एक इंच जमीन की रक्षा करेगा।’ प्रधानमंत्री ने कहा देश को इस बात का गर्व होगा कि हमारे शहीद वीर जवान मारते-मारते मरे हैं। प्रधानमंत्री ने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में दो मिनट का मौन रखा गया। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी सेना के साथ हिंसक झड़प के बाद उत्पन्न स्थिति पर चर्चा के लिए शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक बुलायी है। उधर, सूत्रों के मुताबिक सेना, वायुसेना और नौसेना को उच्चतम स्तर पर अलर्ट रहने को कहा गया है। सभी सेनाओं को बुरी से बुरी स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है। सेना, वायुसेना और नेवी उच्चतम स्तर के अलर्ट पर हैं और बताया जा रहा है कि हथियारों का मूवमेंट भी शुरू हो चुका है। सूत्रों ने बताया कि लोकल कमांडरों को चीन से निपटने के लिए खुली छूट दे दी गई है।</h6>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2020 21:58:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीनी सेना के साथ झड़प में 20 सैनिक शहीद: सेना</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सोमवार की रात गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए हैं। सेना ने देर रात जारी वक्तव्य में पुष्टि की है कि इस झड़प में उसके 20 सैनिक शहीद हुए हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/20-soldiers-martyred-in-clash-with-chinese-army-army/article-16147"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/20-soldiers-martyred-in-clash-with-chinese-army-army.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong> l पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सोमवार की रात गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए हैं। सेना ने देर रात जारी वक्तव्य में पुष्टि की है कि इस झड़प में उसके 20 सैनिक शहीद हुए हैं। इससे पहले दिन में सेना ने एक बयान जारी कर कहा था कि दोनों सेनाओं के बीच हिंसक झड़प में उसका एक अधिकारी और दो जवान शहीद हुए हैं। लेकिन देर रात आये बयान में कहा गया है कि दोनों सेनाओं के सैनिकों के सोमवार रात पीछे हटने की प्रक्रिया के दौरान हुई झड़प में भारत के 17 सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गये थे। घायल सैनिकों ने ऊंचाई वाले और दुर्गम क्षेत्र में शून्य से कम तापमान में रहने के कारण बाद में दम तोड़ दिया जिससे शहीद होने वाले सैनिकों की संख्या बढकर 20 हो गयी है। सेना ने कहा है कि वह देश की सीमाओं की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगभग दो घंटे तक गृह मंत्री अमित शाह और अन्य मंत्रियों के साथ इस मसले पर बैठक की और समूचे घटनाक्रम पर गहन विचार विमर्श किया गया।</h6>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2020 23:29:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिसंक झड़प के बाद भारत ने चीन को दिया जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में सोमवार रात को भारतीय एवं चीनी सैनिकों के बीच हुए हिंसक टकराव के लिए चीनी पक्ष को जिम्मेदार ठहराया है और कहा है कि यदि चीनी पक्ष ने दोनों देशों के बीच बनी उच्च स्तरीय सहमति का पालन किया होता तो यह घटना नहीं होती।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-responded-to-china-after-its-violent-clash/article-16146"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/india-responded-to-china-after-its-violent-clash.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;">चीनी पक्ष सहमति का पालन करता तो हिंसक झड़प नहीं होती</h4>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong> । भारत ने पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में सोमवार रात को भारतीय एवं चीनी सैनिकों के बीच हुए हिंसक टकराव के लिए चीनी पक्ष को जिम्मेदार ठहराया है और कहा है कि यदि चीनी पक्ष ने दोनों देशों के बीच बनी उच्च स्तरीय सहमति का पालन किया होता तो यह घटना नहीं होती। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने संवाददाताओं के सवालों के जवाब में यह भी साफ किया कि भारत दोनों देशों की सीमाओं पर शांति एवं स्थिरता बनाये रखने के महत्व को अच्छी तरह से समझता है लेकिन अपनी संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता की रक्षा करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। प्रवक्ता ने कहा कि भारत एवं चीन पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में सीमा पर बनी स्थिति में तनाव घटाने के लिए सैन्य एवं कूटनीतिक चैनलों से बातचीत कर रहे थे। वरिष्ठ कमांडरों के बीच छह जून को एक सार्थक बैठक हुई और तनाव घटाने की प्रक्रिया पर सहमति बनी। उसी के अनुरूप क्षेत्रीय कमांडरों के बीच उक्त उच्चस्तरीय सहमति को क्रियान्वित करने के लिए कई दौर की बैठकें हुईं।</h6>
<h5 style="text-align:justify;">15 जून की रात में दोनों पक्षों में हिंसक झड़प हुई</h5>
<h6 style="text-align:justify;">श्रीवास्तव ने कहा, ‘हम अपेक्षा कर रहे थे कि यह सब सुचारू रूप से क्रियान्वित हो जाएगा, पर चीनी पक्ष गलवान घाटी से वास्तविक नियंत्रण रेखा का सम्मान किये जाने की सहमति से अलग हट गया। 15 जून की रात में दोनों पक्षों में हिंसक झड़प हुई क्योंकि चीनी पक्ष ने एकतरफा ढंग से यथास्थिति बदलने की कोशिश की। दोनों पक्षों के सैनिक हताहत हुए। यदि चीनी पक्ष उच्च स्तर पर हुए समझौते का पालन करता तो इससे बचा जा सकता था।</h6>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2020 22:12:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत का विकल्प बनने की फिराक में चीन</title>
                                    <description><![CDATA[रात्रिभोज के दौरान नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी को चीनी राष्ट्रपति ने यह भी जताया
 कि हमारी दोस्ती दुनिया में आदर्श है और दोनों देशों के बीच कोई भी विवाद नहीं है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/china-tries-to-become-an-alternative-to-india/article-10801"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इसमें कोई दुविधा नहीं कि भारत और नेपाल के बीच सम्बंध हमेशा अच्छे रहे हैं और सम्भवत: आगे भी अच्छे रहेंगे। धार्मिक और सांस्कृतिक दृश्टि से ही नहीं बल्कि रीति-रिवाज, परम्परा और व्यापार के आधार पर भी इस कथन को पुख्ता माना जा सकता है। इतना ही नहीं दोनों देशों की सीमाएं खुली और बिना वीजा, पासपोर्ट के आवाजाही सदैव रही है। जबकि चीन इस स्वतंत्रता को हमेशा अपनी रूकावट मानता रहा और दोनों देशों के बीच खुली सीमाओं को बंद करने और पासपोर्ट लागू करने के लिए कूटनीतिक पासे फेंकता रहा है। इस हेतु नेपाल को मनाने के लिए उसने बीते कुछ वर्षों में वहां बेशुमार निवेश भी किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि चीन ने 2017 में नेपाल के साथ ‘वन बेल्ट, वन रोड’ के लिए द्विपक्षीय समझौता किया। हालांकि अभी तक इस परियोजना के तहत कोई कार्य शुरू नहीं किया गया है और अब एक बार फिर अपनी ताजी यात्रा में चीन नेपाल को 350 करोड़ जो 56 अरब नेपाली रूपए के बराबर है, की सहायता अगले दो साल में देने की बात कही है साथ ही काठमाण्डू को तातापानी ट्रांजिट प्वाइंट से जोड़ने वाले अर्निको राजमार्ग को भी दुरूस्त करने का जिनपिंग ने वादा किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि यह राजमार्ग अप्रैल 2015 के भूकम्प के बाद से ही बंद है। इसके अलावा चीन ट्रांस हिमालय रेलवे की फिजिबिलिटी को लेकर भी अध्ययन शीघ्र शुरू करने की बात कह रहा है। रात्रिभोज के दौरान नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी को चीनी राष्ट्रपति ने यह भी जताया कि हमारी दोस्ती दुनिया में आदर्श है और दोनों देशों के बीच कोई भी विवाद नहीं है। दो टूक यह है कि इस आड़ में जिनपिंग नेपाल को यह भी बता गये कि नेपाल की संवृद्धि और विकास में वह भारत से बेहतर विकल्प साबित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11-12 अक्टूबर को भारत में थे और 12-13 अक्टूबर को नेपाल की यात्रा पर थे। लम्बे अंतराल 23 साल बाद कोई चीनी राष्ट्रपति नेपाल गया। इससे पहले 1996 में जियांग जेमिन ने यहां की यात्रा की थी। जिनपिंग दक्षिण एशिया के लगभग सभी देशों की यात्रा कर चुके हैं। हालांकि इसमें भूटान शामिल नहीं है और अब नेपाल की भी यात्रा करके उन्होंने दक्षिण एशिया की परिक्रमा पूरी कर ली है। नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा औली को चीन परस्त और कुछ हद तक भारत विरोधी के रूप में भी जाना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब पहली बार साल 2015 में सुशील कोइराला के बाद प्रधानमंत्री का पद औली ने संभाला था तब मधेशी आंदोलन के चलते नेपाल और भारत के बीच सब कुछ ठीक नहीं था। नेपाल में उत्तर प्रदेश और बिहार मूल के तराई में रहने वाले नेपाली नागरिकों को मधेशी कहा जाता है। जब 20 सितम्बर, 2015 को नेपाल में नया संविधान लागू हुआ तब इनके साथ दोहरा रवैया के चलते ये उग्र हुए। खास यह भी है कि औली ने तब भारत को धमकाते हुए कहा था कि यदि वह उसके अंदरूनी मामलों में दखल देगा तो वे चीन की ओर झुक जायेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी का परिणाम है कि औली ने अपनी पहली विदेश यात्रा बीजिंग से शुरू की जबकि हर नेपाली प्रधानमंत्री इसकी शुरूआत भारत से करता रहा है। हालांकि वही औली जब एक बार फिर 2018 में प्रधानमंत्री बने तब अपनी पहली विदेश यात्रा की शुरूआत भारत से ही की थी तब प्रधानमंत्री मोदी ने अप्रत्यक्ष तौर पर इन्हें आड़े हाथ लिया था। बावजूद इसके भारत सड़क, बिजली समेत कई बुनियादी विकास में नेपाल पर करोड़ों की नियामत लुटाता रहा है। सच तो यह है कि आर्थिक सहायता के मामले में भारत ने नेपाल को हमेशा तवज्जो दिया पर वहां की सरकार के अनुपात में सम्बंध कमोबेश उतार-चढ़ाव वाले बने रहे परन्तु भारत और नेपाल के आपसी सरोकार में चीन अभी कुछ खास असर नहीं डाल पा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां सवाल भारत-नेपाल के सम्बंधों का नहीं बल्कि नेपाल में चीन के दखल का है। चीन नेपाल के करीब जाने की हमेशा कोशिश करता रहा। यही नहीं अमेरिका भी लगातार यही कर रहा है। एक ओर चीन अपनी बेल्ट एण्ड रोड परियोजना चला रहा है तो अमेरिका इण्डो पेसिफिक नीति पर काम कर रहा है। बीते जून में जो रिपोर्ट आयी उससे पता चला कि अमेरिका नेपाल के साथ अपना रक्षा सहयोग बढ़ाना चाहता है। तब नेपाल ने स्पष्ट किया था कि वह ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा जिसका निशाना चीन हो।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल चीन ने ही अमेरिका से दूर रहने की नेपाल को नसीहत दी थी। प्रश्न यह है कि जिनपिंग की नेपाल यात्रा से भारत को किस प्रकार की चुनौती हो सकती है। राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक छाप नेपाल पर चीन छोड़ रहा है और उसका प्रभाव दक्षिण एशिया में लगातार बढ़ रहा है। यह हिन्द महासागर के श्रीलंका और मालदीव तक देखा जा सकता है। पाकिस्तान पूरी तरह और कमोबेश बांग्लादेश भी इसकी चपेट में है। भारत में लगी सीमाओं तक अपनी पहुंच बनाने के चलते चीन नेपाल में रेल और सड़क के विस्तार को अंजाम देने की ओर है। चीन के केरूंग से काठमाण्डू तक रेलवे ट्रैक और लुम्बिनी तक इस योजना के विस्तार का मनसूबा पाले हुए है। यह बदले हुए समीकरण भारत को बड़े स्तर पर प्रभावित कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत अब तक नेपाल का सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी है साथ ही नेपाल के लिए दुनिया का प्रवेश द्वार भी है। गौरतलब है कि नेपाल का कुल व्यापार करीब 7 बिलियन है जिसमें भारत का हिस्सा 6.5 बिलियन है। चीन का नेपाल पर बढ़ता प्रभाव इस आंकड़े को चोट पहुंचा सकता है। गौरतलब है कि चीन और भारत के बीच नेपाल एक बफर स्टेट है। जिनपिंग की यात्रा से चीन-नेपाल का आपसी राजनीतिक विश्वास और मजबूत हो सकता है। गौरतलब है कि जिनपिंग के भारत आने से पहले पाकिस्तान का सेना प्रमुख बाजवा और प्रधानमंत्री इमरान खान जिनपिंग से मिलने गये थे और ठीक दो दिन बाद जिनपिंग महाबलिपुरम में एक स्ट्रैटेजिक मीट के अंतर्गत मोदी से मिलने आये तब पाकिस्तान की नीति पूरी तरह बौनी प्रतीत होने लगी</p>
<p style="text-align:justify;">। मगर नेपाल की यात्रा के चलते भारत की कूटनीति को भी जिनपिंग ने काफी सोचनीय बना दिया। फिलहाल दोनों देशों मसलन चीन व नेपाल ने बीते 13 अक्टूबर को 18 समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं। हालांकि दोनों के बीच हुआ कुछ भी हो पर नेपाल जानता है कि उसका पहला विकल्प भारत ही है। बावजूद इसके बदले कूटनीतिक समीकरण के बीच चीन से भारत को नेपाल के मामले में होने वाले नुकसान को लेकर चौकन्ना रहना चाहिए।<br />
<strong>सुशील कुमार सिंह</strong></p>
<p> </p>
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                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Oct 2019 20:41:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दक्षिण एशिया में चीन का दबदबा भारत के लिए किसी चुनौती से कम नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[एक तरीके से चीन भारत की सीमा तक अपनी सीधी पहुंच बनाने की फिराक में है।
 नेपाल भी भारत से अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/chinas-dominance-in-south-asia-is-no-less-than-a-challenge-for-india/article-10765"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/india-china.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चीनी राष्टपति शी जिनफिंग भारत से सीधे नेपाल रवाना हुए। किसी चीनी राष्टÑपति की भारत में यह 23 साल बाद यात्रा है। इस यात्रा से नेपाल बहुत उत्साहित है। चीनी राष्टÑपति के स्वागत में नेपाल की राष्टÑपति विद्या देवी भंडारी व प्रधानमंत्री केपी ओली स्वयं त्रिभुवन अन्तर्राष्टÑीय हवाई अड्डे पहुंचे। चीन नेपाल को भारत से अलग-थलग कर वहां अपना दबदबा कायम करना चाहता है और काफी हद तक वह इसमें सफल भी हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन की वन वेल्ट वन रोड़ परियोजना को नेपाल मंजूरी दे चुका है। चीन केरूंग से काठमांडू तक रेलमार्ग भी बिछाना चाहता है और इसका विस्तार लुम्बिनी तक करना चाहता है। एक तरीके से चीन भारत की सीमा तक अपनी सीधी पहुंच बनाने की फिराक में है। नेपाल भी भारत से अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है और इसी कारण चीन के हर प्रस्ताव पर सहमति प्रकट कर रहा है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी आॅफ चाइना ने नेपाल की सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के साथ मिलकर काम करना भी शुरू कर दिया है। नेपाल ने चीन की भाषा मंदारिन को अपने कुछ स्कूलों में अनिवार्य कर रखा है</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं हिन्दी भाषा की वकालत करने वालों को देशद्रोही कहा जाता है। हिन्दी में शपथ लेने वाले नेपाल के उपराष्टÑपति परमानंद झा को अपने पद से इस्तीफा देकर दोबारा शपथ लेनी पड़ी थी। नेपाल की संसद में हिन्दी में भाषण देने वाले सांसदों का सीधा टीवी प्रसारण बंद कर दिया जाता है। दरअसल नेपाल के नए संविधान पर भारत ने एतराज जताया था जिसे नेपाल ने अपने अंदरुनी मामलों में इसे दखल समझा। 2015 में भारत द्वारा नेपाल की सीमा पर अघोषित नाकाबंदी की गई थी</p>
<p style="text-align:justify;">जिससे नेपाल में जरूरत के सामान की कमी पड़ी इस बात से भी नेपाल भारत से खफा है। चीन ने इन अवसरों को लपककर नेपाल से नजदीकियां बढ़ाई। इस समय नेपाल चीन को प्राथमिकता देता है। पिछली बार काठमांडू में हुए बिम्सटेक सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिम्सटेक देशों के समक्ष संयुक्त सैन्य अभ्यास का प्रस्ताव रखा जिसे नेपाल ने ठुकरा दिया और बाद में नेपाल ने चीन के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास किया। इन सब कारणों से लगता है कि चीन नेपाल से भारत के रिश्तों में ग्रहण लगा चुका है। चीन ने श्रीलंका, बांग्लादेश के साथ भी अपने रिश्तों को बेहतर किया है इस प्रकार दक्षिण एशिया में चीन अपना दबदबा बढ़ा रहा है जो भारत के लिए किसी चुनौती से कम नहीं।</p>
<p> </p>
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                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Oct 2019 21:43:55 +0530</pubDate>
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