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                <title>अब परमाणु समझौते का पालन नहीं करेगा ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका की ओर से बगदाद हवाई अड्डे के पास ड्रोन हमले में ईरानी कमांडर मेजर जनरल कासिम सुलेमानी के मारे से दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है। बयान के अनुसार ईरान ने कहा कि वह अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने के पांचवें चरण में परमाणु समझौते को छोड़ रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/iran-will-no-longer-follow-nuclear-deal/article-12261"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/nuclear-deal.jpg" alt=""></a><br /><h2>प्रतिबंध हटाने की रखी शर्त  | <span lang="en" xml:lang="en">Nuclear Deal</span></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>तेहरान (एजेंसी)।</strong> ईरान (Iran) ने कहा कि अब वह 2015 के परमाणु समझौते (<span lang="en" xml:lang="en">Nuclear Deal</span>) का पालन नहीं करेगा। उसने शर्त रखी है कि पहले उसके ऊपर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं, तभी वह सोचेगा। इराना संवाद समिति ने सरकारी बयान के हवाले यह जानकारी दी। अमेरिका की ओर से बगदाद हवाई अड्डे के पास ड्रोन हमले में ईरानी कमांडर मेजर जनरल कासिम सुलेमानी के मारे से दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है। बयान के अनुसार ईरान ने कहा कि वह अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने के पांचवें चरण में परमाणु समझौते को छोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपनी उच्च तकनीकी की जरुरत है।ईरान ने कहा है कि अगर प्रतिबंध हटा दिए जाते हैं तो वह अपनी परमाणु प्रतिबद्धताओं का फिर से पालन करेगा।</p>
<h3>अमेरिका को कड़ा सबक सिखाने की धमकी | <span lang="en" xml:lang="en">Nuclear Deal</span></h3>
<ul>
<li><strong>बगदाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अमेरिकी ड्रोन हमले में सुलेमानी और ईरान समर्थित संगठन शिया पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स के उप प्रमुख मारे गए थे। </strong></li>
<li><strong>ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस हमले का ‘कड़ा प्रतिशोध’ लेने का संकल्प लिया है। </strong></li>
<li><strong>ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भी कहा है कि अमेरिका को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।</strong></li>
<li></li>
</ul>
<h3>ईरान-अमेरिका में तलवारें खिंचने की प्रमुख वजहें</h3>
<ul>
<li><strong>1953  तख्तापलट : इस साल दोनों की दुश्मनी की शुरूआत हुई। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने ब्रिटेन के साथ मिलकर ईरान में तख्तापलट करवाया। निर्वाचित प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसाद्दिक को हटाकर ईरान के शाह रजा पहलवी के हाथ में सत्ता दे दी गई। इसका प्रमुख कारण था-तेल। मोसाद्दिक तेल के उद्योग का राष्ट्रीयकरण करना चाहते थे।</strong></li>
<li><strong>1979  ईरानी क्रांति : ईरान में आयतोल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी नए नेता के रूप में उभरे थे। वे पाश्चात्यकरण और अमेरिका पर ईरान की निर्भरता के विरुद्ध थे। शाह पहलवी उनके निशाने पर थे। खुमैनी के नेतृत्व में ईरान में असंतोष बढ़ने लगा। इस बीच शाह को ईरान छोड़ना पड़ा। एक फरवरी 1979 को खुमैनी निर्वासन से लौट आए।</strong></li>
<li><strong>1979-81  दूतावास संकट : इस वक्त में ईरान-अमेरिका के राजनयिक संबंध समाप्त हो गए थे। तेहरान में ईरानी छात्रों ने अमेरिकी दूतावास को अपने कब्जे में ले लिया। 52 अमेरिकी नागरिकों को 444 दिनों तक बंधक बनाए रखा। 2012 में इस विषय पर हॉलीवुड फिल्म-आर्गो आई। इसी बीच इराक ने अमेरिका की मदद से ईरान पर हमला बोल दिया। युद्ध 8 साल चला।</strong></li>
<li><strong>2015  परमाणु समझौता : जब ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो दोनों देशों के रिश्ते सुधरने लगे थे। ईरान के साथ परमाणु समझौता हुआ। जिसमें ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की बात कही। बदले में आर्थिक प्रतिबंधों में थोड़ी ढील दी गई। लेकिन ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही समझौता रद्द कर दिया गया। दुश्मनी फिर शुरू हो गई।</strong></li>
</ul>
<h3>अब तक क्या असर हुआ?</h3>
<ul>
<li><strong>बगदाद में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों से तत्काल इराक छोड़ देने को कहा है।</strong></li>
<li><strong>ब्रिटेन ने मिडिल ईस्ट में अपने सैन्य अड्डों की सुरक्षा भी बढ़ा दी।</strong></li>
<li><strong>क्रूड के दाम 4 प्रतिशत बढ़ गए हैं।</strong></li>
</ul>
<h3>सैन्य क्षमता से आंके दोनों की ताकत</h3>
<p><strong>                   अमेरिकी                                                 ईरानी ताकत</strong></p>
<ul>
<li><strong>सैन्य क्षमता              12.81 लाख                                           5.23 लाख</strong></li>
<li><strong>थल शक्ति                (टैंक, व्हीकल्स, तोपें) 48422               8577</strong></li>
<li><strong>जल शक्ति               (जहॉज, पनडब्बियां आदि) 415               398</strong></li>
<li><strong>वायु शक्ति               (एयर क्रॉफ्ट, हेलीकॉप्टर्स) 10170           512</strong></li>
<li><strong>मिसाइलें                   07                                                         12</strong></li>
<li><strong>रक्षा बजट                  716 बिलियन डॉलर                                6.3 बिलियन डॉलर</strong></li>
</ul>
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</span></span></p>
</div>
</div>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2020 12:02:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहल: ट्रेनों में अब एयर हाेस्टेस की तरह यात्रियों से व्यवहार करेंगे वेंडर, सुबह मिलने पर बाेलेंगे गुड माॅर्निंग</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व-मध्य रेल में इसकी शुरुआत राजधानी एक्सप्रेस और संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस से हाेगी पटना (एजेंसी)। फ्लाइट की एयर हाेस्टेस की तरह अब ट्रेनाें के वेंडर भी यात्रियाें से तहजीब से पेश आएंगे। सुबह में चाय पेश करने से पहले गुड माॅर्निंग बाेलेंगे। हर वक्त सेवा को तैयार रहेंगे। वेंडराें काे आईआरसीटीसी विशेष ट्रेनिंग दिला रही है। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/vendors-of-trains-will-now-deal-with-travelers-like-air-hostess/article-9783"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-07/untitled-6.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">पूर्व-मध्य रेल में इसकी शुरुआत राजधानी एक्सप्रेस और संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस से हाेगी</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटना (एजेंसी)।</strong> फ्लाइट की एयर हाेस्टेस की तरह अब ट्रेनाें के वेंडर भी यात्रियाें से तहजीब से पेश आएंगे। सुबह में चाय पेश करने से पहले गुड माॅर्निंग बाेलेंगे। हर वक्त सेवा को तैयार रहेंगे। वेंडराें काे आईआरसीटीसी विशेष ट्रेनिंग दिला रही है। वेंडराें काे वेल ड्रेसप भी किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व-मध्य रेल में इसकी शुरुआत राजधानी एक्सप्रेस और संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस से हाेगी। आईआरसीटीसी के रीजनल मैनेजर राजेश कुमार ने बताया कि यात्रियाें काे शुद्ध, स्वच्छ और हाइजीनिक नाश्ता और खाना उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसी याेजना के तहत वेंडराें काे स्मार्ट बनाने की कवायद चल रही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पेंट्रीकार और बेस किचन में रखा जा रहा शुद्धता का ख्याल</h2>
<p style="text-align:justify;">राजेश कुमार ने बताया, ‘‘चलती ट्रेन की पेंट्रीकार हाे या बेस किचन, दाेनाें जगह खाना बनाने में शुद्धता का खास ख्याल रखा जा रहा है। चाॅपिंग बाेर्ड अब अलग-अलग कलर के हाेंगे। लाल चाॅपिंग बाेर्ड पर चिकन और सफेद पर पनीर काटा जाएगा। वाॅशरूम से वापस आने पर वेंडर काे अपने हाथाें काे सैनीटाइज करना हाेगा, ताकि किसी तरह की गंदगी की संभावना नहीं रहे। स्टील के बर्तन का प्रयाेग अब ज्यादा किया जाएगा।’’</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jul 2019 12:01:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओलांद के बयान पर बोली फ्रांस सरकार: राफेल डील में हमने नहीं चुनी भारतीय कंपनी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली(एजेंसी)। राफेल पर छिड़ी सियासी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है।पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान के बाद फ्रांस की वर्तमान सरकार ने कहा कि वह राफेल फाइटर जेट डील के लिए भारतीय औद्योगिक भागीदारों को चुनने में किसी भी तरह से शामिल नहीं थी। सरकार ने जोर देते हुए कहा कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/french-government-we-have-not-selected-indian-company-in-rafael-deal/article-6021"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/rafel.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> राफेल पर छिड़ी सियासी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है।पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान के बाद फ्रांस की वर्तमान सरकार ने कहा कि वह राफेल फाइटर जेट डील के लिए भारतीय औद्योगिक भागीदारों को चुनने में किसी भी तरह से शामिल नहीं थी। सरकार ने जोर देते हुए कहा कि फ्रांसीसी कंपनियों को करार करने के लिए भारतीय कंपनियों का चयन करने की पूरी आजादी है। फ्रांस सरकार का ये बयान तब आया है जब पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा कि राफेल डील के लिए भारत सरकार की ओर से अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस का नाम प्रस्तावित किया गया था और दसॉ एविएशन कंपनी के पास कोई और विकल्प नहीं था।</p>
<p>ओलांद के इस बयान के बाद देश में राजनीति फिर गर्मा गई है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोलने का एक और कारण मिल गया. राहुल ने ओलांद के इस बयान को दोनों हाथों से लपका और बिना देरी किए पीएम मोदी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने बंद दरवाजे के पीछे निजी तौर पर राफेल डील पर बात की और इसमें बदलाव कराया।राहुल गांधी ने कहा कि फ्रांस्वा ओलांद को धन्यवाद, हम अब जानते हैं कि उन्होंने दिवालिया हो चुके अनिल अंबानी के लिए बिलियन डॉलर्स की डील कराई. प्रधानमंत्री ने देश को धोखा दिया है। उन्होंने हमारे सैनिकों की शहादत का अपमान किया है।</p>
<h3>कंपनी को पार्टनर चुनने की आजादी</h3>
<p>फ्रांस सरकार के बयान में आगे कहा गया कि भारत की अधिग्रहण प्रक्रिया के अनुसार, फ्रांसीसी कंपनियों को भारतीय कंपनियों को साझेदार चुनने की पूरी आजादी है। वे जिसे सबसे प्रासंगिक मानती हैं वे उसको चुन सकती हैं।फ्रांस सरकार ने कहा कि 36 राफेल विमानों की आपूर्ति के लिए भारत के साथ किए गए अंतर-सरकारी समझौते से विमान की डिलीवरी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के संबंध में पूरी तरह से उसे अपने दायित्वों की चिंता है।</p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/french-government-we-have-not-selected-indian-company-in-rafael-deal/article-6021</link>
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                <pubDate>Sat, 22 Sep 2018 08:13:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राफेल डील मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अाज</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ, Edited By Vijay Sharma )। मोदी सरकार के लिए फांस बन चुका राफेल विमान सौदे का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है और अब इस मामले की सुनवाई मंगलवार को होने जा रही है। मनोनीत चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच राफेल विमान सौदे से जुड़े मामले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/hearing-in-supreme-court-today-in-rafael-deal-case/article-5975"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/rafael-deal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ, Edited By Vijay Sharma )</strong>। मोदी सरकार के लिए फांस बन चुका राफेल विमान सौदे का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है और अब इस मामले की सुनवाई मंगलवार को होने जा रही है। मनोनीत चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच राफेल विमान सौदे से जुड़े मामले की सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ता ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पक्षकार बनाया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राफेल डील में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले कांग्रेस ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा था कि पार्टी नहीं समझती है कि ये मसला उठाने के लिए सुप्रीम कोर्ट उचित फोरम है और पार्टी का न तो तहसीन पूनावाला से कोई संबंध और न ही उनकी याचिका से। कांग्रेस ने कहा था कि मीडिया में ऐसी भ्रम की स्थिति रहती है कि तहसीन पूनावाला कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ऐसे में हम साफ करना चाहते हैं कि राफेल डील के खिलाफ तहसीन पूनावाला की याचिका और उनसे पार्टी का कोई संबंध नहीं है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्या है राफेल डील?</h2>
<p style="text-align:justify;">राफेल सौदे के तहत 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए भारत और फ्रांस की सरकारों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। राफेल लड़ाकू विमान दोहरे इंजन वाला अनेक भूमिकाएं निभाने वाला मध्यम लड़ाकू विमान है। इसका निर्माण फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन करती है। राफेल विमान फ्रांस की डेसाल्ट कंपनी द्वारा बनाया गया 2 इंजन वाला लड़ाकू विमान है। राफेल लड़ाकू विमानों को ओमनिरोल विमानों के रूप में रखा गया है, जो कि युद्ध के समय अहम रोल निभाने में सक्षम हैं। हवाई हमला, जमीनी समर्थन, वायु वर्चस्व, भारी हमला और परमाणु प्रतिरोध ये सारी राफेल विमान की खूबियां हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/national/hearing-in-supreme-court-today-in-rafael-deal-case/article-5975</link>
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                <pubDate>Tue, 18 Sep 2018 08:38:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चुनौतियों से समझौता नहीं, बल्कि सामना करें</title>
                                    <description><![CDATA[क्या आपको दशरथ मांझी याद है? वही दशरथ मांझी जिसने 22 वर्षों तक कठोर परिश्रम करते हुए छैनी-हथौड़े से 360 फुट लम्बे, 30 फुट चौड़े और 25 फुट ऊंचे पहाड़ को काटकर सड़क बना दी। जिसके प्रयासों से अतरी और वजीरगंज की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर 15 किलोमीटर रह गई। हालांकि, यह घटना लगभग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/do-not-deal-with-challenges-but-face-it/article-4442"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/article.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">क्या आपको दशरथ मांझी याद है? वही दशरथ मांझी जिसने 22 वर्षों तक कठोर परिश्रम करते हुए छैनी-हथौड़े से 360 फुट लम्बे, 30 फुट चौड़े और 25 फुट ऊंचे पहाड़ को काटकर सड़क बना दी। जिसके प्रयासों से अतरी और वजीरगंज की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर 15 किलोमीटर रह गई। हालांकि, यह घटना लगभग 36 वर्ष पुरानी है, लेकिन हाल ही में ओड़िशा के एक व्यक्ति ने ऐसा ही वाकया दोहराया। बैतरणी गांव के एक ओर गोइनसिका नाम का पहाड़ है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके दूसरी ओर नहर बहती है, लेकिन पहाड़ बीच में होने के कारण दइतरी और उसके आस-पास के खेतों में पानी पहुंचा पाना बहुत मुश्किल था। पानी के अभाव में दइतरी को मेहनत का आशातीत लाभ नहीं मिल पा रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए दइतरी ने पहाड़ के बीच से रास्ता निकालने की ठानी। उसके पास साधन-संसाधन नहीं थे, लेकिन फिर भी उसने हार नहीं मानी। अपने भाईयों की मदद से उसने पहाड़ को चीरते हुए रास्ता निकालने का प्रण किया और जुट गया इस कार्य में। चार वर्षों तक अथक मेहनत करते हुए आखिर उसने सफलता हासिल कर ही ली।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने खेतों तक कल-कल करता पानी पहुंचा, तो मानो ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। पहले विरोध करने वाले लोग भी अब दइतरी के साथ खड़े दिखे और खड़े हों भी क्यों नहीं, अब सौ एकड़ क्षेत्र में खेती करने वालों को धान की पैदावार के लिए तरसना नहीं पड़ेगा। आज दइतरी खुश है, क्योंकि उसका सपना साकार हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">अब लोग उसे ‘कैनाल मेन’ के नाम से पुकारने लगे हैं। ठीक उसी तरह जिस तरह दशरथ मांझाी को आज भी लोग ‘माउंटेन मेन’ के नाम से जानते हैं। हालांकि दशरथ का माउंटेन मेन बनने का सफर भी बेहद चुनौतियों भरा था। वह बिहार के गहलौर गांव का रहने वाला था। वह जिस गांव में रहते थे, वहां से कस्बे के बीच एक पर्वत था।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार मांझी इसी क्षेत्र में कार्य कर रहा था। उसकी पत्नी फाल्गुनी देवी उसके लिए खाना लेकर जा रही थी। रास्ते में वह एक दर्रे में गिर गई और दवाईयों के अभाव में उसकी मौत हो गई। इस घटना ने दशरथ का जीवन बदल कर रख गया। दु:खी मांझी ने यह प्रण लिया कि जो घटना उसके साथ हो गई, वह किसी और के साथ नहीं हो।</p>
<p style="text-align:justify;">बस, इसी संकल्प के साथ छैनी और हथौड़ी लेकर वह जुट गया और 1960 में प्रारम्भ हुई उसकी यह कर्मयात्रा 1982 में पूर्ण हुई। अब वह एक रास्ता बना चुका था और जैसा कि पहले बताया गया कि अब वहां से कस्बे तक पहुंचने की दूरी 55 से घटकर 15 किलोमीटर हो चुकी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">आज दशरथ मांझी दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके द्वारा किया गया कार्य उन्हें सदैव जिंदा रखेगा। मांझी के जीवन पर फिल्म बन चुकी है। उनकी कर्मण्यता ने अनेक पुस्तकों में स्थान पाया। उन्होंने इतिहास रचा, क्योंकि उन्होंने सिर्फ सपना देखा ही नहीं बल्कि इसे साकार किया। इसके लिए पूरे 22 साल तपस्या की। दइतरी भी इसी राह पर चला।</p>
<p style="text-align:justify;">एक ओर आज भी जहां ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन चुनौतीपूर्ण है। जहां पर्याप्त साधन नहीं हैं, इसके बावजूद दशरथ और दइतरी ने बता दिया कि इच्छाशक्ति हो और चुनौतियों का सामना करने का माद्दा हो तो यह बाधाएं मनुष्य के आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से बड़ी नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">दशरथ और दइतरी के साथ यही तो हुआ। उनसे पहले किसी ने समस्या का सामना करने का साहस नहीं जुटाया। वे मुसीबतों से समझौता करते गए। इस कारण वे अपनी कोई पहचान नहीं बना पाए।</p>
<p style="text-align:justify;">अपनी छाप नहीं छोड़ पाए, लेकिन दशरथ और दइतरी इनसे जुदा थे। मानो, ऐसे लोग मुसीबतों को हराने के लिए ही बनते हैं और ऐसे ही लोगों को दुनिया हमेशा याद रखती है। तो इस ‘संडे’ का ‘फंडा’ यह है कि चुनौती से समझौता नहीं बल्कि उसका सामना करना चाहिए। कठोर परिश्रम करते हुए हम हरेक बाधा को लांघकर सफलता को चूम सकते हैं और यही सफलता हमें भीड़ से अलग अलहदा पहचान दिला पाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हरि शंकर आचार्य</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Jun 2018 08:13:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आर्थिक मुद्दे राजनीतिक सोच से नहीं निपटते</title>
                                    <description><![CDATA[नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री ने इस बात को कबूल किया है कि अभी दो अंकों की विकास दर भारत के लिए सपना ही है, जिसके लिए बहुत कुछ करना पड़ेगा। मीटिंग में मुद्दों की बात तो हुई पर कारणों पर विचार करने के लिए जोर नहीं दिया गया। कहनेभर को यह केन्द्र व […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/economic-issues-do-not-deal-with-political-thinking/article-4307"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/modi-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री ने इस बात को कबूल किया है कि अभी दो अंकों की विकास दर भारत के लिए सपना ही है, जिसके लिए बहुत कुछ करना पड़ेगा। मीटिंग में मुद्दों की बात तो हुई पर कारणों पर विचार करने के लिए जोर नहीं दिया गया। कहनेभर को यह केन्द्र व राज्य की मीटिंग थी लेकिन में एकजुटता नजर नहीं आई। दरअसल अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए चुनावी वायदों व वास्तविकता में बड़ा अंतर है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब तक नीतियों को लागू करने के लिए व्यवहारिक जोर नहीं दिया जाता तब तक अच्छे परिणम नहीं मिल सकते। अभी तक सरकारी योजनाएं बेसिर-पैर घूमती हैं। कृषि की दुर्दशा मिटाने को केंद्र द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की गई है पर इस योजना का फायदा किसानों को कम बीमा कंपनियों को अधिक हुआ। तमिलनाडू के एक किसान को फसल के नुकसान होने पर महज सात रुपए दिए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी हालत में अर्थव्यवस्था में कृषि के योगदान की उम्मीद कैसे की जा सकती है? बिहार में गठबंधन सरकार ने ही इस योजना को लागू करने से मना कर दिया है। राज्य सरकार व केन्द्र सरकार द्वारा कंपनियों को दिया जा रहा प्रीमियम बीमा कंपनियों के लिए मोटी कमाई बना हुआ है। कई योजनाओं में के न्द्र तथा राज्यों की हिस्सेदारी के लिए कोई योजनाबंदी ही नहीं। उधर दलितों के लिए वजीफा योजना में के न्द्र सरकार का बड़ा हिस्सा है, अचानक केन्द्र सरकार अपना हिस्सा बंद कर देती है बाद में यह योजना राज्य के गले की फांस बन जाती है। ऐसी योजना के लिए ना केन्द्र कुछ देता है ना ही खाली खजाने का सामना कर रही राज्य सरकारें कुछ कर पा रही हैं</p>
<p style="text-align:justify;">। निष्कर्ष के तौर पर योजना सिर्फ एक दिखावा बनकर रह गई है। आर्थिक मामलों संबंधी राज्यों तथा केन्द्र के बीच सहमति नहीं। कम से कम कृषि प्रधान देश के लिए एक सामूहिक योजना तो बनाई जा सकती है। कर्ज माफी के लिए केन्द्र राज्यों को कोरा जवाब दे चुका है। भाजपा की सरकार वाले राज्य कर्जा माफी की घोषणा करते हैं परंतु केन्द्र भाजपा सरकार ही कर्ज माफी की मांग को वाजिब नहीं मानती। वोट की राजनीति पर तर्क का कोई अर्थ नजर नहीं आ रहा। यदि यह कहा जाए कि अनाज की खरीद को छोड़कर देश में कोई कृषि नीति ही नहीं है, तो गलत नहीं होगा। विकास दर में बढ़ोत्तरी के लिए वोट बैंक की नीति से ऊपर उठ कर कुछ करना होगा। आर्थिक मामलों से राजनीतिक सोच द्वारा निपटना मुश्किल ही नहीं असंभव है।</p>
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<p> </p>
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                <pubDate>Tue, 19 Jun 2018 08:25:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परमाणु समझौते पर जारी गतिरोध समाप्त हो: ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[वियना/पेरिस (एजेंसी)। ईरान ने कहा है कि वह परमाणु पर्यवेक्षकों के साथ पूरी तरह से तब तक सहयोग नहीं करेगा जब तक कि परमाणु समझौते पर जारी गतिरोध समाप्त नहीं हो जाता। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने  एक बयान जारी कर यह बात कही। गत माह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ending-the-deadlock-on-the-nuclear-deal-iran/article-4004"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/iran.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><span class="storydetails">वियना/पेरिस (एजेंसी)। </span></strong><span class="storydetails">ईरान ने कहा है कि वह परमाणु पर्यवेक्षकों के साथ पूरी तरह से तब तक सहयोग नहीं करेगा जब तक कि परमाणु समझौते पर जारी गतिरोध समाप्त नहीं हो जाता। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने  एक बयान जारी कर यह बात कही। गत माह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ हुए ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते से अमेरिका के अलग होने की घोषणा की थी। श्री ट्रम्प ने इस समझौते को अप्रासंगिक करार देते हुए ईरान पर अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को फिर से शुरू करने की भी घोषणा की थी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span class="storydetails"> अमेरिका के इस समझौते से अलग होने के बाद से ही यूरोपीय देश इस समझौते को बचाने के लिए काम कर रहे हैं। फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के विदेश तथा वित्त मंत्रियों ने अमेरिकी अधिकारियों को पत्र लिखकर ईरान परमाणु समझौते को बचाए रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता से अवगत कराया है। इसके अलावा तीनों देशों ने अमेरिका से ईरान में सक्रिय यूरोपीय कंपनियों को प्रतिबंधों से छूट देने का आग्रह किया है। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span class="storydetails">ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला खमनेई ने सोमवार को एक आदेश जारी कर यूरेनियम संवर्धन क्षमता में वृद्धि करने के लिए तैयारी करने के लिए कहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2015 में ईरान ने अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत ईरान ने उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जतायी थी।</span></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jun 2018 09:52:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ताइवान को हथियार बेचेगा अमेरिका , चीन को झटका</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन । अमेरिकी विदेश विभाग ने ताइवान को लगभग 1.4 अरब डालर के हथियार बेचने को मंजूरी दे दी। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से इस देश के साथ यह अपनी तरह का पहला सौदा है। क्योंकि अमेरिका अभी तक चीन के साथ ‘वन चाइना’ पॉलिसी अपनाता रहा है जिसके अंतर्गत अमेरिका चीन को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/us-sell-weapons-to-taiwan/article-1794"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/trump-11.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन ।</strong> अमेरिकी विदेश विभाग ने ताइवान को लगभग 1.4 अरब डालर के हथियार बेचने को मंजूरी दे दी। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से इस देश के साथ यह अपनी तरह का पहला सौदा है। क्योंकि अमेरिका अभी तक चीन के साथ ‘वन चाइना’ पॉलिसी अपनाता रहा है जिसके अंतर्गत अमेरिका चीन को एक राष्ट्र मानता है जिसमें ताइवान अलग देश नहीं है।</p>
<ul>
<li>लेकिन अमेरिका के इस हथियारों की डील से चीन नाराज हो सकता है, क्योंकि वह ताइवान को अपना हिस्सा मानता है।</li>
</ul>
<h3>संबंध हो सकते है प्रभावित</h3>
<p>यह फैसला अमेरिका ने उस समय लिया जब अमेरिका लगातार चीन से उत्तर कोरिया पर परमाणु हथियार प्रतिबंध लगाने के प्रयासों पर रोक लगाने के लिए कहता आया है इसलिए यह सौदा एक ऐसे नाज़ुक समय पर हुआ है, जिससे वाशिंगटन और बीजिंग के संबंध प्रभावित हो सकते हैं।</p>
<p> </p>
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2017 04:36:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदूषण से निबटने के लिए 365 दिन करना होगा काम:दवे</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली:  दिल्ली में खतरनाक स्थिति पर पहुंची प्रदूषण की समस्या पर केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने आज कहा कि यह एक गंभीर समस्या है जिससे निबटने के लिए कुछ दिन नहीं बल्कि 365 दिन आपात स्तर पर काम करना होगा। प्रदूषण से निबटने की कार्ययोजना पर विचार के लिए दिल्ली […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/pollution-deal-365-days-will-operate-dave/article-265"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/dve.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली:</strong>  दिल्ली में खतरनाक स्थिति पर पहुंची प्रदूषण की समस्या पर केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने आज कहा कि यह एक गंभीर समस्या है जिससे निबटने के लिए कुछ दिन नहीं बल्कि 365 दिन आपात स्तर पर काम करना होगा।<br />
प्रदूषण से निबटने की कार्ययोजना पर विचार के लिए दिल्ली के चार पड़ोसी पंजाब,हरियाणा,उत्तर प्रदेश और राजस्थान के पर्यावरण मंत्रियों के साथ आज एक आपात बैठक के बाद मीडिया से रूबरू हुए श्री दवे ने कहा कि यह समय एक दूसरे पर दोषारोपण करने का नहीं है।<br />
वैसे भी प्रदूषण की समस्या 80 फीसदी दिल्ली की पैदा की हुई है। <em>(वार्ता) </em></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 07 Nov 2016 12:52:15 +0530</pubDate>
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