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                <title>JNU - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>जेएनयू में छात्रों के दो गुटों के बीच झड़प के मामले में प्राथमिकी दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में रामनवमी समारोह के दौरान छात्रावास के मेस में कथित रूप से मांसाहारी भोजन करने को लेकर छात्रों के दो समूहों के बीच हिंसक झड़प के बाद सोमवार को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गयी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि सोमवार तड़के जेएनयूएसयू, एसएफआई, डीएसएफ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/fir-registered-in-case-of-clash-between-two-groups-of-students-in-jnu/article-32296"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/clash-in-jnu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में रामनवमी समारोह के दौरान छात्रावास के मेस में कथित रूप से मांसाहारी भोजन करने को लेकर छात्रों के दो समूहों के बीच हिंसक झड़प के बाद सोमवार को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गयी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि सोमवार तड़के जेएनयूएसयू, एसएफआई, डीएसएफ और आइसा के छात्रों के एक समूह ने कावेरी छात्रावास में हुई हिंसा की घटना को लेकर अज्ञात अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी है। पुलिस ने बताया कि तथ्यात्मक और वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने तथा दोषियों की पहचान करने के लिए जांच-पड़ताल शुरू कर दी गयी है। एबीवीपी के छात्रों ने भी पुलिस को सूचित किया है कि वे भी औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। दिल्ली पुलिस ने कहा कि शिकायत मिलने पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दक्षिणपंथी एबीवीपी और वाम दलों के बीच कल हुई झड़प के दौरान जेएनयू के 12 से अधिक छात्र घायल हो गये थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, वाम दल के छात्रों ने दावा किया कि एबीवीपी के छात्रों ने जेएनयू छात्रावास में रहने वालों को मांसाहारी भोजन करने से रोका। उन्होंने छात्रावास की मेस की सुरक्षा में लगे कर्मचारियों को धमकी भी दी, वहीं एबीवीपी के छात्रों ने दावा किया कि मांसाहारी भोजन को लेकर कोई समस्या नहीं हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी समर्थकों को रामनवमी उत्सव मनाये जाने से दिक्कत थी, जिसके कारण यह झड़प हुई।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Apr 2022 14:29:49 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जेएनयू में एबीवीपी और वाम गठबंधन के बीच क्यों हुई झड़प?</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों और वाम गठबंधन आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आईसा) एवं स्टूडेंट्स फेडरेशन आॅफ इंडिया (एसएफआई) के बीच झड़प हो गई जिसमें करीब 12 छात्र घायल हो गए और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। छात्रसंघ के सदस्यों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/clashes-broke-out-between-abvp-and-left-alliance-in-jnu/article-28379"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/jnu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों और वाम गठबंधन आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आईसा) एवं स्टूडेंट्स फेडरेशन आॅफ इंडिया (एसएफआई) के बीच झड़प हो गई जिसमें करीब 12 छात्र घायल हो गए और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। छात्रसंघ के सदस्यों ने बताया कि झड़प में गंभीर रूप से घायल लोगों का नयी दिल्ली स्थित एम्स में इलाज चल रहा है। घटना से संबंधित औपचारिक शिकायत दिल्ली पुलिस में की गई है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटना रविवार रात करीब 10 बजे विश्वविद्यालय के छात्र संघ कार्यालय में हुई। दोनों पक्षों के सदस्य एक दूसरे पर हिंसा शुरू करने का आरोप लगा रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">एबीवीपी-जेएनयू के अध्यक्ष शिवम चौरसिया ने कहा कि जब वे छात्रसंघ कार्यालय के छात्र गतिविधि केंद्र में बैठक कर रहे थे तब आईसा और एसएफआई के सदस्यों ने अंदर आकर एबीवीपी के छात्रों को बाहर जाने के लिए कहा। उन्होंने यूनीवार्ता से कहा, ‘हमसे कहा गया कि इस स्थान का इस्तेमाल सिर्फ छात्रसंघ ही कर सकता है, जो कि गलत है। यह गतिविधि केंद्र सभी छात्रों के लिए खुला है। जब हमने उनकी इस बात का विरोध किया तो उन्होंने हम पर कुर्सियों से हमला करना शुरू कर दिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>औपचारिक शिकायत दिल्ली पुलिस में की गई</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की अध्यक्ष आइशी घोष ने एबीवीपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एबीवीपी ने हिंसा शुरू की थी। उन्होंने कहा, ‘वह स्थान पहले से ही एक अन्य संगठन के एक कार्यक्रम के लिए बुक किया गया था। इस बीच एबीवीपी ने वहां पहुंचकर अपनी बैठक शुरू कर दी। मैं और जेएनयूएसयू के अन्य सदस्य उनसे बात करने के लिए मौके पर पहुंचे। जब हमने एबीवीपी के सदस्यों से अपनी बैठक को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए कहा तब वे हिंसक हो गए और अंत में हम पर हमला कर दिया। इस दौरान हमारे एक सदस्य को गंभीर चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि झड़प में घायल हुए वाम गठबंधन के छात्रों ने एबीवीपी के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Nov 2021 10:17:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जेएनयू के शरजील इमाम की जमानत की अर्जी खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। दिल्ली की साकेत अदालत ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ दिल्ली में आंदोलन के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में बंदी जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र शरजील इमाम की जमानत की अर्जी शुक्रवार को खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि शरजील […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/jnu-sharjeel-imam-bail-application-rejected/article-27792"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/jnu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> दिल्ली की साकेत अदालत ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ दिल्ली में आंदोलन के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में बंदी जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र शरजील इमाम की जमानत की अर्जी शुक्रवार को खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि शरजील इमाम का भाषण भड़काऊ तथा समाज की अमन-शांति और सौहार्द्र को बिगाड़ने वाला है।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय की अतिरिक्त सत्र-न्यायाधीश अंजू अग्रवाल ने शर्जिल इमाम की जमानत की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि अभियुक्त का 13 दिसंबर 2019 का बयान सरसरी तौर पर देखने से साम्प्रादायिक और विभाजनकारी लगता है। उन्होंने कहा कि इस भाषण का स्वर और अंदाज भड़काऊ है तथा यह सामाजिक अमन शांति और सौहार्द्र में खलल पैदा करने वाला लगता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि अभियोजन पक्ष ने सीएए और एनआरसी आंदोलन के दौरान 15 दिसंबर 2019 को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में करीब 3,000 लोगों की भीड़ के द्वारा की गयी हिंसा और तोड़-फोड़ की वारदात प्रार्थी शरजील इमाम के भाषण के उकसावे पर थी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी में बहुत ढील है। उसके द्वारा पेश किसी चश्मदीद गवाह के बयान या अन्य साक्ष्य से यह साबित नहीं होता है कि वहां भीड़ इमाम के भाषण से भड़की थी। अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत तस्वीर अधूरी है लेकिन इसे कानून द्वारा केवल पुलिस के समक्ष दिए गये बयानों के या अभियोजन पक्ष की कल्पना के आधार पर पूरा नहीं किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 19 में प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार के महत्व रेखांकित करते हुए अंग्रेजी के कवि जॉन मिल्टन के इस कथन का उद्धरण दिया कि मुझे सभी प्रकार की स्वतंत्रता से बढ़कर जानने, स्वतंत्र रूप से तर्क करना और अपनी अंतरात्मा के अनुसार अपनी बात रखने की स्वतंत्रता चाहिए। न्यायाधीश ने इस अधिकार के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द्र के महत्व को रेखांकित किया।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Oct 2021 16:25:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>एप्पल-वॉट्सऐप और गूगल को दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[जेएनयू हिंसा का डेटा सुरक्षित रखने के दिए आदेश  | JNU violence नई दिल्ली (एजेंसी)। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पाँच जनवरी को हुई हिंसा (JNU violence) पर सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने हिंसा से जुड़े वीडियो को लेकर एप्पल, वॉट्सऐप और गूगल को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/jnu-violence-apple-whatsapp-and-google-notice-to-delhi-high-court/article-12453"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/jnu-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">जेएनयू हिंसा का डेटा सुरक्षित रखने के दिए आदेश  | <span lang="en" xml:lang="en">JNU violence</span></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पाँच जनवरी को हुई हिंसा (JNU violence) पर सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने हिंसा से जुड़े वीडियो को लेकर एप्पल, वॉट्सऐप और गूगल को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने वीडियो को सुरक्षित करने को कहा है। हिंसा के वक्त वॉट्सऐप समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई तरह के वीडियो, फोटो वायरल हुए थे। जिसमें कई प्रदर्शनकारियों की पहचान हो सकती है। जेएनयू प्रोफेसर अमीत परमेश्वरन, अतुल सूद और विनायक शुक्ला हिंसा के मामले में याचिका दायर की थी। इस याचिका में हिंसा से जुड़े वीडियो की फुटेज को यूनिवर्सिटी को सौंपने के लिए कहा था। याचिका में कुछ वॉट्सऐप ग्रुप के नाम का जिक्र भी किया गया था। जिनमें ह्यूमनिटी अगेंस्ट लेफ्ट, फ्रेंड्स आफ आरएसएस के मैसेज, फोटो, वीडियो भी शामिल हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कोर्ट में क्या बोली दिल्ली पुलिस</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>हमने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर सीसीटीवी फुटेज की मांग की है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>प्रशासन ने अभी पत्र पर कोई जवाब नहीं दिया।</strong></li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है पूरा मामला</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>जेएनयू में 5 जनवरी को दर्जनों नकाबपोश हमलावरों ने कैंपस में हमला किया </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>छात्रों, शिक्षकों को निशाना बनाया गया और तोड़फोड़ की गई </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>हमले में तीस से अधिक लोग घायल हुए </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली पुलिस को हिंसा को लेकर एक दर्जन से ज्यादा शिकायतें मिलीं </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पुलिस ने शिकायतों पर एक्शन लेते हुए 9 छात्रों की सीसीटीवी फुटेज जारी की </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>छात्रों में जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष का नाम भी शामिल</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2020 13:11:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुलिस दावों पर उठते सवालों के बीच जांच टीम पहुंची जेएनयू कैम्पस</title>
                                    <description><![CDATA[Aaj Ki Khabar Hindi Mai. इस ग्रुप में 60 लोग हैं जिसमें से करीब 37 लोगों की पहचान हो गई। इनमें से कई लोग जेएनयू के छात्र नहीं है। इनमें से ज्यादातर लोगों के फोन बंद होने के कारण व्हाट्सएप ग्रुप में चिह्नित किए गए लोगों तक पहुंचने में देरी हो रही है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/investigation-team-reached-jnu-campus-amid-questions-arising-on-police-claims/article-12406"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/jnu.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">इस ग्रुप में 60 लोग हैं जिसमें से करीब 37 लोगों की पहचान हो गई</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में नकाबपोश हमलावरों की पहचान को लेकर पुलिस के दावों पर उठ रहे सवालों के बीच शनिवार को एक बार फिर अपराध शाखा के उपाध्यक्ष जॉय टिर्की अपने टीम के साथ कैम्पस पहुंचे और हिंसा से जुड़े अन्य साक्ष्यों को जुटाने का प्रयास किया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि हिंसा वाले दिन ‘यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। इस ग्रुप में 60 लोग हैं जिसमें से करीब 37 लोगों की पहचान हो गई। इनमें से कई लोग जेएनयू के छात्र नहीं है। इनमें से ज्यादातर लोगों के फोन बंद होने के कारण व्हाट्सएप ग्रुप में चिह्नित किए गए लोगों तक पहुंचने में देरी हो रही है।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">इसके साथ ही यह भी सामने आया है कि गत रविवार की हिंसा में करीब 10 से अधिक लोग बाहर से आए थे।</li>
<li style="text-align:justify;">पुलिस ने कल पांच जनवरी के सिलसिलेवार घटनाओं के बारे में जानकारी दी थी</li>
<li style="text-align:justify;"> हिंसक घटनाओं में शामिल नौ लोगों की पहचान को उजागर किया था।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके बाद जेएनयू छात्र संघ, शिक्षक संघ और कुछ राजनीतिक दलों ने पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए थे।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">स्टिंग आपरेशन में एबीवीपी छात्रों ने घटना की बात स्वीकार किया</h3>
<p style="text-align:justify;">इस बीच एक निजी समाचार चैनल पर जेएनयू हिंसा का स्टिंग आॅपरेशन दिखाया जिसमें रविवार शाम की घटना के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के दो छात्रों ने इसे स्वीकार किया जबकि आॅल इंडिया स्टूडेंट असोसिएशन (आईसा) की छात्रा ने सर्वर को ठप करने की बात कबूली है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">स्टिंग आॅपरेशन के बाद जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों ने कहा</li>
<li style="text-align:justify;">वह घटना वाले दिन से ही हिंसा के लिए एबीवीपी के छात्रों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं</li>
<li style="text-align:justify;"> पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत के कारण जांच को गलत दिशा में ले जाया जा रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">रविवार जेएनयू में नकाबपोश हमले में छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशा घोष समेत 34 लोग घायल हुए थे।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jan 2020 16:11:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेएनयू हिंसा मामले में प्राथमिकी दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[दंगा फैलाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराएं लगाई | JNU violence नई दिल्ली (एजेंसी)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रविवार को हुई हिंसा मामले (JNU violenc) में दिल्ली पुलिस ने सोमवार को प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। दंगा फैलाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराओं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/fir-registered-in-jnu-violence-case/article-12262"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/jnu-violence.jpg" alt=""></a><br /><h2>दंगा फैलाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराएं लगाई | <span lang="en" xml:lang="en">JNU violence</span></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रविवार को हुई हिंसा मामले <strong>(<span lang="en" xml:lang="en">JNU violenc</span>)</strong> में दिल्ली पुलिस ने सोमवार को प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। दंगा फैलाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस को जेएनयू हिंसा को लेकर कई शिकायतें मिली थी।</p>
<p style="text-align:justify;">रविवार को जेएनयू कैंपस में नाकाबपोशों ने छात्रों और शिक्षकों पर हमले किए थे। इस घटना में जेएनयू छात्र संगठन की अध्यक्ष आइशी घोष सहित 20 से अधिक लोगों को चोटें आई हैं। हिंसा के दौरान दो दर्जन से अधिक छात्र घायल हो गए हैं। पुलिस की एक टीम भी जेएनयू पहुंचकर प्रशासन के कुछ अधिकारियों से मुलाकात की है। हिंसा वाले स्थान की सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।  <strong>(JNU <span lang="en" xml:lang="en">violence</span>)</strong></p>
<ul>
<li><strong>नकाबपोश छात्रों ने की थी तोड़फोड़</strong></li>
<li><strong>छात्राओं और शिक्षकों पर लाठी डंडों से किया था हमला</strong></li>
<li><strong>जेएनयू छात्र संगठन अध्यक्ष सहित 20 को लगी गंभीर चोटें</strong></li>
<li><strong>पुलिस टीम ने जेएनयू प्रशासन के अधिकारियों से की मुलाकात</strong></li>
<li><strong>हिंसा करने वालों के वीडियो खंगाल रही पुलिस</strong></li>
</ul>
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</span></span></p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2020 12:21:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेएनयू: शिक्षा की आड़ में पनप रही देशविरोधी संस्कृति</title>
                                    <description><![CDATA[जेएनयू छात्रों ने हिस्सा लिया।
 इसके अलावा, इन तत्वों ने 2010 में दंतेवाडा में सीआरपीएफ के 74 जवानों की हत्या पर जश्न भी मनाया था।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/jnu-anti-national-culture-flourishing-under-the-guise-of-education/article-11255"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/jnu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">फीस वृद्धि को लेकर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने तीन सदस्यीय एक समिति गठित की है, जो जेएनयू की सामान्य कार्यप्रणाली बहाल करने के तरीकों पर सुझाव देगी। इसके बावजूद छात्रों ने संसद तक मार्च निकाला। छात्रों का कहना है जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में देश के गरीब परिवार के बच्चे आसानी से शिक्षा हासिल करते हैं। शुल्क बढ़ने से ऐसा हो पाना कठिन होगा। छात्रों का कहना है कि हॉस्टल नियमों के तहत फीस बढ़ोतरी का असर 40 फीसदी छात्रों पर पड़ेगा। पिछले कई सालों से जेएनयू किसी न किसी तरह से चचार्ओं में बना हुआ है। समय-समय पर जेएनयू के छात्रों पर देशद्रोही होने के आरोप लगते रहे हैं। विश्वविद्यालय कैम्पस से जो आवाजें बाहर आ रही हैं या जो कुछ भी मीडिया के माध्यम से देश को पता चल रहा है, उसका सार यह है कि जेएनयू का कैम्पस देशविरोधी ताकतों का अड्डा बनता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें कोई दो राय नहीं है कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय एक प्रसिद्ध विश्वविद्यालय है। इसने शिक्षा के क्षेत्र में असंख्य होनहार विद्वान देश को दिए हैं। शोधार्थियों की एक भरी-पूरी जमात है, जो विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ा रहे हैं, अन्य सम्मानित पदों पर हैं, पत्रकार हैं और विदेशों में सक्रिय हैं। इस साल अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. अभिजीत बनर्जी भी जेएनयू के छात्र रहे हैं। ऐसी महान परंपरा के बावजूद हिंदू धर्म और भारतीय सभ्यता-संस्कृति के महानायक स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अपमान किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">उसके नीचे ‘भगवा जलाओ’ और ‘फासिज्म’ सरीखे शब्द लिख दिए जाएं, देशविरोधी हरकतों का अड्डा बन जाए और कई स्तरों पर ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ की गुंडई दिखाई दे, महिला पत्रकार से बदसलूकी, हाथापाई की जाए, तो इसे जेएनयू की कौन-सी परंपरा और जमात कहेंगे? स्वामी विवेकानंद ने हमारी युवा पीढ़ी में उच्च नैतिकता, हमारी महान संस्कृति और देशभक्ति की भावना भरने का आह्वान किया था। लेकिन, जेएनयू में युवा विभाजनकारी एजेंडे की शिक्षा पाते दिखाई देते हैं। कमोबेश देश की सरकार भी अब सोचना शुरू कर दे कि शिक्षा की आड़ में तो देशविरोधी संस्कृति नहीं पनप रही है?</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा के सरकार में आने के बाद जेएनयू पर लगातार देशद्रोह के आरोप लगते रहे हैं। दो साल पहले 9 फरवरी 2016 को जेएनयू विश्वविद्यालय परिसर में हुए एक कार्यक्रम में कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगे थे। इस सिलसिले में जेएनयू छात्रसंघ के उस समय के अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उनके दो साथियों उमर खालिद और अनिर्बन को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि तीनों बाद में जमानत पर छूट गए। लेकिन कन्हैया कुमार इससे पहले 23 दिन जेल में रहे। इस केस को तीन साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक दिल्ली पुलिस की तरफ से मामले में कोई चार्जशीट फाइल नहीं की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">कैंपस के अंदर कथित रूप से देशद्रोह के नारे लगाने वाली घटना के बाद सेना से रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल निरंजन सिंह की अगुवाई में आठ सैनिकों ने वीसी से मुलाकात की थी और विश्वविद्यालय के अंदर का माहौल बदलने की गुजारिश की थी। बेशक यह भारत सरकार के दायित्वों में शामिल है कि उच्च शिक्षा भी सुलभ और सस्ती हो, ताकि शिक्षित और बौद्धिक पीढियां सामने आ सकें। शायद इसीलिए जेएनयू का बजट 556 करोड़ रुपए है और सबसिडी 352 करोड़ रुपए की है।</p>
<p style="text-align:justify;">औसतन एक छात्र पर चार लाख रुपए की सालाना सबसिडी खर्च की जाती है। सुविधाएं ऐसी हैं कि होस्टल में मात्र 10 रुपए माहवार किराए पर कमरा उपलब्ध है। बिजली, पानी, सर्विस चार्ज अभी तक निशुल्क रहे हैं। क्या ये सुविधाएं भारत-विरोधी नस्लें तैयार करने को दी जाती हैं? सरकार को केवल जेएनयू ही नहीं देश के सभी विश्वविद्यालयों में सस्ती शिक्षा की सुविधा प्रदान करने का प्रबंध करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इन सबके बीच भारत के गरिमामय महानायक विवेकानंद ने छात्रों का क्या बिगाड़ा था कि उनकी प्रतिमा को अपमानित किया गया? उन्हें ‘फासीवादी’ करार दिया गया? प्रतिमा को तोड़ने तक की कोशिशें की गईं? उस पर हिंसक प्रहार भी किए गए और लिख दिया गया-‘‘भगवा जलाओ।’’ कौन-सा भगवा ? और उसे क्यों जलाया जाए? क्या इसलिए कि वह भाजपा का एक प्रतीक-रंग है ? लेकिन भगवा रंग तो राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगे’ में भी है। दरअसल जेएनयू के भीतर यह जमात वह है, जो मृतप्राय: वामपंथ का झंडा उठाने का काम करती रही है। और शिक्षा की आड़ में और छात्र हितों की मांग की आड़ में वो देशविरोधी और वामपंथी एजेण्डे का आगे बढ़ाने का काम करती है। जेएनयू को एक खास विचारधारा का अड्डा भी माना जाता है। लोकतंत्र में विभिन्न विचारधाराओं का सदैव स्वागत किया जाता है, लेकिन वो विचारधारा किस काम की जो देश को बांटने और देश के दुश्मनों के साथ खड़ी दिखाई दे।</p>
<p style="text-align:justify;">कश्मीर आर्टिकल 370 हटाने के खिलाफ जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन हुआ और नारे लगे थे। इस सभा के वीडियो सामने आए हैं जिसमें कई नारे सुनाई दे रहे हैं और इन पर सवाल उठने लगे थे। वास्तव में जेएनयू में एक जमात भारत की बर्बादी तक जंग के नारे लगाती है। वजह यह है कि माओवादियों, जेहादियों और कश्मीरी अलगाववादियों के बीच सांठगांठ लंबे समय से जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका जीता-जागता सबूत अक्टूबर 2010 में जेएनयू में वह सेमिनार था जिसमें हुर्रियत के नेता सैयद अली शाह गिलानी, अरुंधति राय और माओवादी नेता वरवरा राव ने मंच साझा किया था। सेमिनार का विषय था ‘आजादी ही एकमात्र रास्ता।’ उसमें बड़ी संख्या में जेएनयू छात्रों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा, इन तत्वों ने 2010 में दंतेवाडा में सीआरपीएफ के 74 जवानों की हत्या पर जश्न भी मनाया था। इससे इन तत्वों के इरादों का पता चलता है। 2000 में जेएनयू में एक वामपंथी संगठन के दोस्ताना मुशायरे में सेना के दो जवानों को बुरी तरह पीटा गया, क्योंकि उन्होंने मुशायरे में देशविरोधी शायरी का विरोध किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में करीब 800 विवि हैं, लेकिन यह चिंतनीय सवाल होना चाहिए कि जेएनयू के भीतर ही विवाद क्यों पनपते हैं? बात-बात पर आजादी के नारे लगाने वाले जेएनयू के छात्रों को किससे और क्यों आजादी चाहिए। क्या उन्हें आजादी अपनी मातृभूमि के खिलाफ साजिश रचने के लिए चाहिए? या बंटवारे का एक और माहौल तैयार करने के लिए? हमारी अपनी ही संस्कृति को बर्बाद करने की आजादी का तो मतलब यह है कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत का पालन न किया जाए। हमारे महान भारतवर्ष में सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों का पालन किया जाता है, जहां सभी धर्मों को समान नजरिए से देखा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सनातन धर्म का विचार इतना व्यापक है कि उसके दायरे में सभी धर्म और सिद्धांत समा जाते हैं। इसलिए यह स्वाभाविक है कि हमारी सांस्कृतिक सीमाओं से बाहर के इन गुमराह तत्वों की विभाजनकारी नीतियों को स्वीकार न किया जाए, न ही किसी को हमारे युवाओं के दिलोदिमाग को प्रदूषित करने की इजाजत दी जाए। जेएनयू में जो पिछले दो-तीन साल में में हुआ, वह बेहद निंदनीय है। यह सतर्क हो जाने की चेतावनी की तरह है। आखिर राष्ट्रीय चरित्र का एक विश्वविद्यालय, जिसकी शिक्षा की गुणवत्ता, बौद्धिक और संतुलित असहमति के नाते सराहना की जाती रही हो, आज गलत वजहों से बगावत का केंद्र बन गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><em>-राजेश माहेश्वरी</em></strong></p>
<p> </p>
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                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Nov 2019 20:38:17 +0530</pubDate>
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