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                <title>World Population Day : जनसंख्या शिखर : उपलब्धि नहीं चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[World Population Day: चीन को पछाड़कर भारत जनसंख्या (Population) का सिरमौर देश बन गया है। ऐसी संभावनाएं पहले से ही जाहिर की जा रही थीं कि भारत जल्द ही चीन को जनसंख्या वृद्धि के मामले में पीछे छोड़ देगा पर यह संभावना 2028 के आसपास जाहिर की जा रही थी मगर भारत ने यह काम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/population-peak-a-challenge-not-an-achievement/article-49843"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/india-population.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">World Population Day: चीन को पछाड़कर भारत जनसंख्या (Population) का सिरमौर देश बन गया है। ऐसी संभावनाएं पहले से ही जाहिर की जा रही थीं कि भारत जल्द ही चीन को जनसंख्या वृद्धि के मामले में पीछे छोड़ देगा पर यह संभावना 2028 के आसपास जाहिर की जा रही थी मगर भारत ने यह काम 2023 में ही कर दिया है। भारत में जनसंख्या का ग्राफ जिस तेजी से बढ़ा है वह हैरतअंगेज है और सुरसा की तरह बढ़ती हुई विशाल जनसंख्या ने हर उपलब्धि को बौना साबित कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जनसंख्या संबंधित समस्याओं पर वैश्विक चेतना जागृत करने के लिए प्रतिवर्ष 11 जुलाई को ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ मनाया जाता है। भारत के संदर्भ में देखें तो तेजी से बढ़ती आबादी के कारण ही हम सभी तक शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को पहुंचाने में पिछड़ रहे हैं। बढ़ती आबादी की वजह से ही देश में बेरोजगारी की समस्या विकराल हो चुकी है। अशिक्षा, गरीबी, रूढ़िवादिता, धार्मिक कट्टरता और अपने संप्रदाय विशेष को हावी करने की कुटिल इच्छा जैसे कारण हैं, जो जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ और भी चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं। यह समस्या प्रत्येक भारतीय के हिस्से में आने वाली वस्तुओं को कम कर रहा है। World Population Day</p>
<p style="text-align:justify;">1947 में आजाद हुआ 36 करोड़ लोगों का देश महज 75 साल में ही 142.86 करोड़ जनसंख्या वाला दुनिया के सबसे बड़े जनसंख्या राष्ट्र में बदल गया। इन 75 सालों में भारत की जनसंख्या तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ी है। जनसंख्या वृद्धि दर इतनी ऊंची है कि प्रतिवर्ष न्यूजीलैंड व आॅस्ट्रेलिया जैसे देशों की कुल जनसंख्या से भी ज्यादा लोग हमारी आबादी में जुड़ रहे हैं। स्वाभाविक रूप से सुरसा के मुख सी बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए खाने, पहनने और रहने की समस्याएं भी विकराल रूप लेती गई।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय सरकारों में जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को लागू करने के लिए जो प्रतिबद्धता चाहिए थी वह हर सरकार से गायब रही है। इसके पीछे सबसे बड़ी राजनीतिक मजबूरी थी देश के एक खास वर्ग का वोट पैकेज में तब्दील हो जाना। जब तक देश में कांग्रेस की सरकारें रही यह वोट पैकेज उसको सत्ता दिलाता रहा और इसी सत्ता के लालच ने जनसंख्या नियंत्रण कानून को अस्तित्व में आने से रोके रखा।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां हिंदू धर्म के उच्च वर्गों में ‘हम दो हमारे दो’ के नारे से जन जागृति आई, वहीं डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा दिया गया नारा ‘बच्चा एक ही सही दो के बाद नहीं’ के सिद्धांत पर एक बहुत बड़ा वर्ग चल रहा है। इस वर्ग ने अपनी जनसंख्या की वृद्धि पर काफी हद तक नियंत्रण कर लिया है। हालांकि हिंदू समाज के भी निचले तबकों में अभी वह जागृति देखने को नहीं मिलती जो होनी चाहिए। अब समय आ गया है कि समय के साथ केंद्र एवं राज्य सरकारों को निष्पक्ष तरीके से ‘सबका साथ सबका विकास’ नारे को धरातल पर उतारते हुए, पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरे देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू कर ही देना चाहिए। World Population Day</p>
<p style="text-align:justify;">जनसंख्या नियंत्रण कानून के अंतर्गत इस प्रकार के प्रावधानों का होना आवश्यक हो कि एक सीमित संख्या तक ही परिवार बढ़ने पर लोगों को सब्सिडी, लोन या राशन आदि की सुविधा मिले। निर्धारित संख्या से ऊपर संतान उत्पत्ति पर प्रतिबंधात्मक प्रावधानों का होना जरूरी है। ऐसी नीति के क्रियान्वयन में धार्मिक एवं सामाजिक प्रतिरोध भी खड़ा किया सकता है अत: जनसंख्या नियंत्रण कानून को चरण दर चरण लागू करने की नीति अपनाई जा सकती है। जिस प्रकार से कई दूसरे देशों में संतान उत्पत्ति के नियम हैं उसी प्रकार से देश की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकारों को भी ऐसे प्रावधान अस्तित्व में लाने ही चाहिए। World Population Day</p>
<p style="text-align:justify;">जनसंख्या नियंत्रण प्रावधानों को लागू एवं क्रियान्वित करते समय सबसे अधिक जरूरी है अभिप्रेरक तरीके से जन जागरण अभियान चलाए जाएं। खास तौर पर कम शिक्षित या अशिक्षित एवं धार्मिक विचारों से अधिक प्रभावित होने वाले लोगों के लिए ऐसे ही धार्मिक संस्थानों की सहायता ली जा सकती है जो उन्हें बताएं कि संतान ईश्वर की देन तो है ही अपितु यह एक शारीरिक प्रजनन क्षमता का परिणाम भी है। Population</p>
<p style="text-align:justify;">लोगों को समझाया जाए कि जितने अधिक बच्चे होंगे उसी अनुपात में उन्हें उतना ही कम खाना-पीना, पहनना एवं रहने का स्थान उपलब्ध हो पाएगा जिसके परिणाम स्वरूप वे हमेशा नीचे के पायदान पर ही रहेंगे और उनका जीवन स्तर भी निम्न श्रेणी का ही रहेगा। उन्हें यह भी समझाया जाए कि अधिक संख्या में बच्चे पैदा करना कोई सबाब का काम नहीं अपितु पाप का सबब है क्योंकि ऐसे जीव उत्पन्न करना जिनका हम सही तरीके से शिक्षण एवं पालन पोषण भी न कर पाए एक पाप ही है। विभिन्न पाठ्यक्रमों में भी जन वृद्धि के दुष्परिणाम एवं उन्हें रोकने की व्यवहारिक उपायों की जानकारी दी जानी जरूरी है। यह कार्य केवल सरकारी स्कूलों वह कॉलेजों में ही नहीं अपितु धार्मिक स्कूलों व महाविद्यालय में भी लागू किया जाए। World Population Day</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही साथ कम बच्चे पैदा करने वाले लोगों के लिए मुफ्त शिक्षा एवं अन्य सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए इससे भी एक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यदि सरकारों में प्रतिबद्धता हो तो बिजली, पानी जैसी आवश्यक आपूर्ति वाली वस्तुओं की दरें भी एकल परिवारों के सदस्यों की संख्या के आधार पर तय करने में भी कोई बुराई नहीं है। जनसंख्या नियंत्रण की ढुलमुल नीति और प्रतिबंधात्मक व नकारात्मक प्रेरणा देते उपायों से हम चीन को पछाड़कर जनसंख्या में सर्वोच्च स्थान पर तो आ गए पर चीन जैसी सख्त जनसंख्या नियंत्रण नीतियां हम कभी भी नहीं अपना सके। हमें जनसंख्या पर नियंत्रण करना ही होगा कैसे भी और किसी भी तकनीक से। अब उसके लिए चाहे जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाना पड़े या लोगों में जन जागरण करके एक चेतना लानी पड़े अथवा कुछ और करना पड़े। Population</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे भारत अभी भी युवाओं का देश है एवं यदि दूरगामी नीति के साथ चला जाए तो इस बढ़ती हुई जनसंख्या का उपयोग देश के विकास के लिए किया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि कम से कम 2054 तक भारत बूढ़ो का देश नहीं होने जा रहा है। आज समय की मांग है कि देश की शिक्षा को दक्षता एवं प्रवीणता की शिक्षा बनाया जाए। स्कूलों में किताबी ज्ञान से अधिक तकनीकी एवं उत्पादकता का व्यवहारिक ज्ञान दिया जाए। बच्चों का स्कूल में बिताए जाने वाला कम से कम 50% समय उत्पादक कार्यों में लगाया जाना चाहिए। ज्यादा नहीं तो नवीं कक्षा के बाद इस प्रकार की शिक्षा होनी चाहिए कि बच्चे की शिक्षा का आंशिक खर्च उसके द्वारा बनाए गए उत्पादों से निकलना शुरू हो जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">12वीं एवं उसके बाद की शिक्षा के लिए प्रावधान होना चाहिए कि अपनी शिक्षा का खर्च शिक्षार्थी ही अपने उत्पादक कार्यों से पूरा करे। इसके लिए विद्यालय के भवनों को विस्तार देना होगा एवं उन्हें अपडेट करना होगा। हर महा विद्यालय एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय में उत्पादक कक्षों का होना अनिवार्य किया जाना चाहिए जहां बच्चे दक्ष प्रशिक्षकों के निर्देशन में समय की मांग के अनुसार वस्तुओं का उत्पादन करें एवं विद्यालय में एक सेल एंड परचेज जैसा विभाग भी होना चाहिए जो कच्चे माल की आपूर्ति तथा बनाए गए माल की बिक्री की दक्षता पूर्वक व्यवस्था करे। जिस तरह निजी महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों को अनुमति दी जा रही हैं उन्हें कड़े मानकों द्वारा नियंत्रित करना बहुत जरूरी है अन्यथा ये संस्थान कागज के टुकड़ों के रूप में डिग्रियां बांटते रहेंगे और भारत का युवा बेरोजगार होकर सड़कों पर घूमता रहेगा। बेशक, जनसंख्या के शिखर पर पहुंचना उपलब्धि नहीं अपितु बहुत बड़ी चुनौती है और इससे निपटने के रास्ते हमें हर हाल में खोजने होंगे। World Population Day</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. घनश्याम बादल, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2023 15:09:21 +0530</pubDate>
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                <title>पूज्य गुरु जी ने बताया जनसंख्या नियंत्रण जरूरी क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[बरनावा (सच कहूँ न्यूज)। सच्चे, रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने (Ram Rahim) शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा (यूपी) से अपने अमृतमयी वचनों की वर्षा करते हुए फरमाया कि मालिक के नाम में सुख है, आत्मिक शांति है, मालिक के नाम में तंदुरुस्ती है। मालिक के नाम में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/respected-guru-ji-told-why-population-control-is-necessary/article-43478"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-02/ram-rahim.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरनावा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सच्चे, रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने (Ram Rahim) शाह सतनाम जी आश्रम, बरनावा (यूपी) से अपने अमृतमयी वचनों की वर्षा करते हुए फरमाया कि मालिक के नाम में सुख है, आत्मिक शांति है, मालिक के नाम में तंदुरुस्ती है। मालिक के नाम में वो सब नियामतें हैं जो आपने कभी सोची भी नहीं होंगी। वो सब खुशियां हैं जिसकी आपने कभी कल्पना नहीं की होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि राम, ओउम, हरि, अल्लाह, गॉड, ख़ुदा, रब्ब सब कुछ देने वाला है, सब कुछ बनाने वाला है, वो दया का सागर, रहमत का दाता है, अन्दर बाहर किसी को कोई कमी नहीं छोड़ता। पर आज का दौर बड़ा ही भयानक दौर है। जनसंख्या विस्फोट होता जा रहा है, जनसंख्या बढ़ती जा रही है और ज्यों-ज्यों जनसंख्या बढ़ रही है, कोई कितना भी जोर लगा ले, फिर भी सब कुछ लगाने के बावजूद भी जनसंख्या के कारण बहुत लोग बेरोजगार भी हो रहे हैं और बेरोजगारी की वजह से पूरी दुनिया में झगड़े, नफरतें, आतंकवाद, मार कुटाई, लड़ाई ये चलती रहती हैं। तो इसलिए बहुत जरूरी है संयम से काम लेना। अपने आप को कंट्रोल करना और जनसंख्या पर भी कंट्रोल करना।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी  (Ram Rahim) ने फरमाया कि एक आदमी सोचता है कि मेरे कंट्रोल करने से क्या होगा? ऐसे ही नहीं कहा कि बूंद-बूंद से तालाब भर जाता है। आप शुरूआत कीजिये, भगवान ने चाहा तो आपको खुशियां मिलेंगी। तो दूसरे भी आपको देखकर जरूर आपको फॉलो करेंगे और जनसंख्या कंट्रोल होगी। वरना ये जनसंख्या का विस्फोट कैसे फूटेगा, कितनी जल्दी फूट जाए, कुछ भरोसा नहीं है। अपनी इगो, अपने अहंकार में डूबकर इन्सान राम से मुनकर हो जाता है, प्रभु से दूर हो जाता है तो फिर उसे गम, दु:ख-दर्द, चिन्ता, परेशानी उठानी पड़ती है। तो अपने विचारों का शुद्धिकरण करना बेहद जरूरी है।</p>
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                                            <category>अध्यात्म</category>
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                <pubDate>Tue, 14 Feb 2023 17:13:31 +0530</pubDate>
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                <title>पर्यावरण के लिए समस्या बन रही जनसंख्या</title>
                                    <description><![CDATA[पूरी दुनिया की आबादी इस समय करीब 7.7 अरब है, जिसमें सबसे ज्यादा चीन की आबादी 1.45 अरब है जबकि भारत आबादी के मामले में 1.4 अरब जनसंख्या के साथ विश्व में दूसरे स्थान पर है। विश्व की कुल आबादी में से करीब 18 फीसदी लोग भारत में रहते हैं और दुनिया के हर 6 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/population-becoming-a-problem-for-the-environment/article-36334"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/population-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूरी दुनिया की आबादी इस समय करीब 7.7 अरब है, जिसमें सबसे ज्यादा चीन की आबादी 1.45 अरब है जबकि भारत आबादी के मामले में 1.4 अरब जनसंख्या के साथ विश्व में दूसरे स्थान पर है। विश्व की कुल आबादी में से करीब 18 फीसदी लोग भारत में रहते हैं और दुनिया के हर 6 नागरिकों में से एक भारतीय है। अगर भारत में जनसंख्या की सघनता का स्वरूप देखें तो जहां 1991 में देश में जनसंख्या की सघनता 77 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर थी, 1991 में बढ़कर वह 267 और 2011 में 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर हो गई। भारत में बढ़ती आबादी के बढ़ते खतरों को इसी से बखूबी समझा जा सकता है कि दुनिया की कुल आबादी का करीब छठा हिस्सा विश्व के महज ढ़ाई फीसदी भूभाग पर ही रहने को अभिशप्त है।</p>
<p style="text-align:justify;">जाहिर है कि किसी भी देश की जनसंख्या तेज गति से बढ़ेगी तो वहां उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव भी उसी के अनुरूप बढ़ता जाएगा। आंकड़ों पर नजर डालें तो आज दुनियाभर में करीब एक अरब लोग भुखमरी के शिकार हैं और अगर वैश्विक आबादी बढ़ती रही तो भुखमरी की समस्या बहुत बड़ी वैश्विक समस्या बन जाएगी, जिससे निपटना इतना आसान नहीं होगा। बढ़ती आबादी के कारण ही दुनियाभर में तेल, प्राकृतिक गैसों, कोयला इत्यादि ऊर्जा के संसाधनों पर दबाव अत्यधिक बढ़ गया है, जो भविष्य के लिए बड़े खतरे का संकेत है। जिस अनुपात में भारत में आबादी बढ़ रही है, उस अनुपात में उसके लिए भोजन, पानी, स्वास्थ्य, चिकित्सा इत्यादि सुविधाओं की व्यवस्था करना किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ दशकों में देश में शिक्षा और स्वास्थ्य के स्तर में निरन्तर सुधार हुआ है, उसी का असर माना जा सकता है कि धीरे-धीरे जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट आई है लेकिन यह इतनी भी नहीं है, जिस पर खूब जश्न मनाया जा सके। बेरोजगारी और गरीबी ऐसी समस्याएं हैं, जिनके कारण भ्रष्टाचार, चोरी, अनैतिकता, अराजकता और आतंकवाद जैसे अपराध पनपते हैं और जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण किए बिना इन समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। विगत दशकों में यातायात, चिकित्सा, आवास इत्यादि सुविधाओं में व्यापक सुधार हुए हैं लेकिन तेजी से बढ़ती आबादी के कारण ये सभी सुविधाएं भी बहुत कम पड़ रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ती जनसंख्या जहां समूचे विश्व के लिए गहन चिन्ता का विषय बनी है, वहीं बढ़ती आबादी का सर्वाधिक चिंतनीय पहलू यह है कि इसका सीधा प्रभाव पर्यावरण पर पड़ रहा है। विश्व विकास रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक संसाधनों से जितनी भी आमदनी हो रही है, वह किसी भी तरह पूरी नहीं पड़ रही, दशकों से यही स्थिति बनी है और इसे लाख प्रयासों के बावजूद सुधारा नहीं जा पा रहा। अत: जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण पाने के लिए हमें कुछ कठोर और कारगर कदम उठाते हुए ठोस जनसंख्या नियंत्रण नीति पर अमल करने हेतु कृतसंकल्प होना होगा ताकि कम से कम हमारी भावी पीढ़ियां तो जनसंख्या विस्फोट के विनाशकारी दुष्परिणामों भुगतने से बच सकें।</p>
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                <pubDate>Sat, 06 Aug 2022 09:47:35 +0530</pubDate>
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                <title>जनसंख्या नियंत्रण और धर्मांतरण की बहस के बीच आरएसएस प्रमुख का बयान, मानव बने</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरू (एजेंसी)। जनसंख्या नियंत्रण पर गरमा गरम चचार्ओं के बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरआरएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि योग्यतम की उत्तरजीविता का नियम (सर्ववाइल आॅफ दी फिटेस्ट) उन जानवरों पर लागू होता है, जो खाते है पीते और आबादी बढ़ाते हैं। जब मानव की बात आती है तो योग्यतम व्यक्ति वह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/rss-chief-statement-amid-debate-on-population-control-and-conversion/article-35486"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/sangh-chief-mohan-bhagwat.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बेंगलुरू (एजेंसी)।</strong> जनसंख्या नियंत्रण पर गरमा गरम चचार्ओं के बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरआरएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि योग्यतम की उत्तरजीविता का नियम (सर्ववाइल आॅफ दी फिटेस्ट) उन जानवरों पर लागू होता है, जो खाते है पीते और आबादी बढ़ाते हैं। जब मानव की बात आती है तो योग्यतम व्यक्ति वह है जो सबसे कमजोर को जीवित रहने में मदद करता है। भागवत ने बुधवार देर रात जनसंख्या विस्फोट का जिक्र किये बिना यहां कहा , सिर्फ खाना, पीना और आबादी बढाना यह काम तो जानवर भी करते हैं। है ना? जो मजबूत है वह बच जाएगा। यह जंगल का कानून है। योग्यतम की उत्तरजीविता। यह सच्चाई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>जनसंख्या अराजकता का कारण बन सकता है</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, उन्होंने कहा कि यह नियम जानवरों के लिए लागू है, मनुष्यों के लिए नहीं। मनुष्यों में, सबसे योग्य व्यक्ति वह है जो दूसरों को जीवित रहने देंगे। योग्यतम व्यक्ति सबसे कमजोर को जीवित रहने में मदद करेगा। यही मानवीय उत्कृष्टता का अर्थ है। भागवत ने मानव उत्कृष्टता के लिए श्री सत्य साई विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह में यह बयान दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां उन्होंने महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर, इसरो के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन, भारतीय हिंदुस्तानी गायक एम वेंकटेश कुमार, परमाणु-भौतिक विज्ञानी आर चिदंबरम, पर्यावरणविद् पूर्णिमा देवी बर्मन और सी श्रीनिवास को कई लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवा देने के लिए सम्मानित किया। सरसंघचालक के इस बयान को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुछ दिनों पूर्व दिये गये बयान के परिपेक्ष्य में देखा जा रहा है जिसमे उन्होंने कहा था जनसंख्या असंतुलन को जारी रखा गया तो यह अव्यवस्था और अराजकता का कारण बन सकता है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Jul 2022 14:56:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सर्वे में खुलासा : देश में बढ़ती जनसंख्या पर लग रहा नियंत्रण</title>
                                    <description><![CDATA[देश में बच्चे पैदा करने की रफ्तार पहले 2.2 फीसदी थी, जो घटकर 2 फीसदी हुई देश में पुरुषों की साक्षरता दर 84 प्रतिशत, जबकि महिलाओं की 72 प्रतिशत गुरुग्राम(सच कहूँ/संजय मेहरा)। स्वास्थ्य मंत्रालय की नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की पांचवीं रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश में बच्चे पैदा करने की रफ्तार घटी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/controlling-the-growing-population-in-the-country/article-33377"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/dangerous-signs-of-population-decline.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>देश में बच्चे पैदा करने की रफ्तार पहले 2.2 फीसदी थी, जो घटकर 2 फीसदी हुई</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>देश में पुरुषों की साक्षरता दर 84 प्रतिशत, जबकि महिलाओं की 72 प्रतिशत</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम(सच कहूँ/संजय मेहरा)।</strong> स्वास्थ्य मंत्रालय की नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की पांचवीं रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश में बच्चे पैदा करने की रफ्तार घटी है। यानी अब बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण लग रहा है। पहले यह रफ्तार 2.2 फीसदी थी जो अब घटकर 2 फीसदी हो गई है। हर क्षेत्र में बढ़ती महंगाई के चलते विशेषज्ञ जनसंख्या नियंत्रण को सही मान रहे हैं। इससे बच्चों का सही पालन-पोषण हो सकेगा। सर्वे के माध्यम से पता चला है कि देश में शिक्षा की स्थिति में भी सुधार हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां पुरुषों की साक्षरता दर 84 फीसदी है, जबकि महिलाएं देश में 72 प्रतिशत साक्षर हैं। रोजगार की बात करें तो सर्वे में बताया गया है कि देश में 75 फीसदी पुरुषों और 25 फीसदी महिलाओं के पास रोजगार है। 50 फीसदी पुरुषों और 45 फीसदी महिलाओं ने कम से कम 10 साल तक स्कूलों में शिक्षा ली है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी के इस दौर में भी आज की तारीख में 32 फीसदी पुरुष और 41 फीसदी महिलाएं अखबार, टीवी, रेडियो, सिनेमा से दूर हैं। यह सब उन तक नहीं पहुंच पाए हैं। इंटरनेट के उपयोग की बात करें तो देश में 15 से 49 साल के बीच 32 फीसदी पुरुष और 41 फीसदी महिलाएं इंटरनेट क उपयोग करते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सब सुख चाहिए तो जनसंख्या घटाइये : डॉ. राम सिंह</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त जीव विज्ञानी डा. (प्रो.) राम सिंह कहते हैं कि जनसंख्या पर नियंत्रण बहुत जरूरी है। अगर सब सुख चाहिए तो जनसंख्या को घटाइये। हमें अपने बच्चों को सब कुछ देना है तो बच्चों की संख्या भी सीमित रखनी होगी। आज सुविधाओं की कमी का बड़ा कारण ही जनसंख्या है। लाइफस्टाइल बढ़ने के साथ खर्चे भी उसी हिसाब से हो जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में मध्यम व उच्च वर्ग के लोग खुद ही इस बात के प्रति जागरुक हुए हैं कि कम जनसंख्या से ही अच्छा जीवन जिया जा सकता है। सरकार अगर जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बना सकती तो कम से कम ऐसा जागरुकता कार्यक्रम चलाए, जिससे कि हर व्यक्ति इस बात को सोचे की भविष्य सीमित जनसंख्या से ही सुरक्षित है। समय रहते हमें संभलना भी चाहिए। सिर्फ जनसंख्या ही नहीं, प्रकृति के साथ और भी बहुत से खिलवाड़ हो रहे हैं, जिन्हें बंद करना जरूरी है। नहीं तो प्रकृति इंसान से लड़ेगी और सब नष्ट कर देगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>मोटापे से भी अछूते नहीं हैं लोग</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सर्वे में सामने आया है कि देश में मोटापा भी बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2015-16 में 21 फीसदी महिलाओं का वजन अधिक था, जो अब बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई हैं। पुरुषों में मोटापे का आंकड़ा 19 फीसदी से बढ़कर 23 फीसदी हो गया है।<br />
अब अधिक उम्र में हो रही शादियां देश में शादी की भी उम्र बढ़ी है। सरकार की तरफ से ऐसा कोई नियम नहीं बनाया गया है, लेकिन अब अधिक उम्र में युवाओं की शादियां हो रही हैं। पुरुषों की शादी की औसत उम्र अब 24.9 वर्ष (24 साल 9 महीने) आंकी गई है, जबकि महिलाओं की शादी की उम्र 18.8 वर्ष (18 साल 8 महीने) हो गई है। इसी तरह परिवार नियोजन की बात करें तो इस मामले में महिलाओं की संख्या 48 फीसदी से बढ़कर 56 फीसदी हो गई है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 May 2022 15:03:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेश में 50 सालों में हिंदुओं की संख्या 75 लाख तक घटी :जनगणना</title>
                                    <description><![CDATA[ढाका (एजेंसी)। बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी लगातार घटती जा रही है। पिछले 50 सालों में देश की कुल जनसंख्या दोगुनी से अधिक हो गई है, लेकिन हिंदुओं की संख्या में लगभग 75 लाख तक की गिरावट आ चुकी है। हिंदुओं के अलावा बौद्ध, ईसाई और अन्य धर्म के लोगों की संख्या कमोबेश स्थिर रही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/hindu-population-in-bangladesh-reduced-by-7-5-million-in-50-years-census/article-28389"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/bangladesh-population.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ढाका (एजेंसी)।</strong> बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी लगातार घटती जा रही है। पिछले 50 सालों में देश की कुल जनसंख्या दोगुनी से अधिक हो गई है, लेकिन हिंदुओं की संख्या में लगभग 75 लाख तक की गिरावट आ चुकी है। हिंदुओं के अलावा बौद्ध, ईसाई और अन्य धर्म के लोगों की संख्या कमोबेश स्थिर रही है। आजाद बांग्लादेश में पहली जनगणना 1974 में हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उस वक्त हिंदुओं की जनसंख्या 13.5 फीसदी थी। इसके बाद बाद चार और जनगणना की गई। साल 2011 में की गई जनगणना से पता चला कि बंगलादेश की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 8.5 फीसदी है। साल 2011 के लिए बांग्लादेश सांख्यिकी ब्यूरो (बीबीएस) ने जनसंख्या और आवास जनगणना की अपनी रिपोर्ट में देश में हिंदुओं की आबादी में कमी के दो कारण बताए थे। इनमें से एक हिंदुओं का देश छोड़कर चले जाना है और दूसरी वजह हिंदुओं में कुल प्रजनन दर का तुलनात्मक रूप से कम होना है, मतलब हिंदुओं के घरों में अपेक्षाकृत कम बच्चे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बांग्लादेश में डायरिया की बीमारी के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र ने दो और संगठनों के साथ मिलकर देश के एक छोटे से हिस्से में एक अध्ययन किया और पाया कि हिंदुओं के पलायन और प्रजनन दर कम होने के अलावा इस समुदाय में शिशुओं की मृत्यु दर तुलनात्मक रूप से अधिक होने की वजह से इनकी जनसंख्या कम होती जा रही है। राजनीतिक नेता, समाज के जानकार, हिंदू समुदाय के नेता और शोधकर्ता कमोबेश इस बात पर सहमत हैं कि हिंदुओं का बाहरी देशों में पलायन देश में उनकी आबादी में कमी होने का मुख्य कारण है। इस पलायन के पीछे एक ऐतिहासिक प्रवृत्ति रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">हिंदू पलायन क्यों कर रहे हैं</h4>
<p style="text-align:justify;">ढाका विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर अबुल बरकत तीन दशकों से अधिक समय से अल्पसंख्यकों के देश छोड़ने के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक कारणों पर शोध कर रहे हैं। उन्होंने इस विषय पर बात करते हुए कहा, ”कोई भी अपनी मातृभूमि, अपने घर को छोड़कर किसी और देश में नहीं जाना चाहता। यह उत्पीड़न ही है, जिसकी वजह से हिंदू पलायन कर रहे हैं और उनकी संख्या तेजी से घट रही है।” उन्होंने बताया, ”कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें शत्रु संपत्ति अधिनियम (निहित) की वजह से अपना सब कुछ गंवाना पड़ा है और उन्होंने देश छोड़ दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा अधिकतर गांव के कमजोर हिंदू परिवारों के साथ होता होता है तथा इसके अलावा और भी कारण हैं। इस साल दुर्गा पूजा के दौरान पवित्र कुरान को अपवित्र किए जाने की घटना के बाद हिंदुओं के पूजा मंडप और मंदिर नष्ट कर दिए गए, उनके घरों और उनकी दुकानों में आग लगा दी गई । इस दौरान अनेक लोगों की मौत भी हुई ।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Nov 2021 16:24:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनसंख्या कानून के पहले जन समर्थन जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण नीति लागू करने के फैसले ने इस विषय को राजनैतिक गलियारों में चर्चा से लेकर आम लोगों के बीच सामाजिक विमर्श का केंद्र बना दिया है। राजनैतिक दल और अन्य संगठन अपने अपने वोटबैंक और राजनैतिक नफा नुकसान को ध्यान में रखकर इसका विरोध अथवा समर्थन कर रहे हैं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/public-support-needed-before-population-law/article-25593"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/population-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण नीति लागू करने के फैसले ने इस विषय को राजनैतिक गलियारों में चर्चा से लेकर आम लोगों के बीच सामाजिक विमर्श का केंद्र बना दिया है। राजनैतिक दल और अन्य संगठन अपने अपने वोटबैंक और राजनैतिक नफा नुकसान को ध्यान में रखकर इसका विरोध अथवा समर्थन कर रहे हैं। लेकिन अगर राजनीति से इतर बात की जाए तो यह विषय अत्यंत गम्भीर है जिसे वोटबैंक की राजनीति ने संवेदनशील भी बना दिया है। दरअसल आज भारत जनसंख्या के हिसाब से विश्व में दूसरे स्थान पर आता है और यूएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2027 तक भारत विश्व की सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बनकर इस सूची में पहले स्थान पर आ जाएगा। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि जनसंख्या के विषय में पहले स्थान पर आने वाले भारत के पास इतने संसाधन और इतनी जगह है जिससे यह भारतमूमि अपने सपूतों को एक सम्मान एवं सुविधाजनक जीवन दे सके ? तो आइए इसे कुछ आंकड़ों से समझने की कोशिश करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के पास विश्व की कुल भूमि क्षेत्र का मात्र 2.4 प्रतिशत है जबकि भारत की आबादी दुनिया की कुल आबादी का 16.7 प्रतिशत है। कल्पना कीजिए कि जब भारत यूएन की रिपोर्ट के अनुसार इन्हीं सीमित संसाधनों के साथ चीन को पछाड़ कर विश्व की सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएगा तो क्या स्थिति होगी। क्या इन परिस्थितियों में कोई भी देश गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा जैसी समस्याओं से लड़कर अपने नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने की कल्पना भी कर सकता है? लेकिन इसे भारत का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि इस देश की राजनीति उस मोड़ पर पहुंच गई है जहाँ हर विषय वोटबैंक से शुरू हो कर वोटबैंक पर ही खत्म हो जाता है। खेती किसानी हो या फिर शिक्षा, स्वास्थ्य अथवा जनसंख्या जैसे मूलभूत विषय ही क्यों न हों सभी को वोटबैंक की राजनीति से होकर गुजरना पड़ता है। हमारे राजनेता अपने राजनैतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर कुछ सोच ही नहीं पाते।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे हमने प्लास्टिक को कानून का रूप देकर प्रतिबंधित करने से पूर्व देश में प्लास्टिक मुक्ति को जन आंदोलन बनाया, उसी प्रकार जनसंख्या नियंत्रण के लिए भी कानून के साथ-साथ लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जाएं, ताकि लोग स्वेच्छा से इसमें भागीदार बनें और विपक्ष अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके। जम्मू-कश्मीर इसका सबसे बेहतर उदाहरण है। चूँकि वहाँ के लोग जागरूक हो चुके थे इसलिए जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के समय विपक्षी दलों के विरोध को जनता का समर्थन नहीं मिला। इसी प्रकार जम्मू-कश्मीर के जिला विकास परिषद के चुनावों में भी स्थानीय लोगों ने राजनैतिक स्वार्थ से प्रेरित गुपकार गठबंधन को नकार दिया था। इसलिए जनसंख्या विस्फोट के दुष्परिणामों और सीमित परिवार के फायदों के प्रति अगर लोग जागरूक होंगे तो कोई दल कोई संगठन वोट बैंक की राजनीति नहीं कर पाएगा। अत: वर्तमान परिस्थितियों में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून जितना जरूरी है उतना ही जनसमर्थन भी जरूरी है जो जनजागरण से ही संभव है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/public-support-needed-before-population-law/article-25593</link>
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                <pubDate>Fri, 30 Jul 2021 10:06:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएम योगी ने यूपी में नई जनसंख्या नीति का किया ऐलान, जानें, क्या है जनसंख्या नीति?</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ (एजेंसी)। विश्व जनसंख्या दिवस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसंख्या नीति 2021-30 का ऐलान कर दिया है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी विकास की राह में बाधा हो सकती है। पिछले 4 दशकों में इसे लेकर काफी चर्चा हुई है। जनसंख्या नियंत्रण को लेकर एक मसौदा उत्तर प्रदेश सरकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-population-policy-of-yogi-government-will-be-released-today/article-25071"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/population-policy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ (एजेंसी)। </strong>विश्व जनसंख्या दिवस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसंख्या नीति 2021-30 का ऐलान कर दिया है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी विकास की राह में बाधा हो सकती है। पिछले 4 दशकों में इसे लेकर काफी चर्चा हुई है। जनसंख्या नियंत्रण को लेकर एक मसौदा उत्तर प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर पहले अपलोट किया जा चुका है और लोगों से 19 जुलाई तक सुझाव मांगे गए हैं। यदि अधिनियमित हो जाता है तो यह प्रस्तावित कानून गजट प्रकाशित होने के एक साल बाद लागू हो जाएगा। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की आबादी 220 मिलियन है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">नौकरी में मिलेगा प्रमोशन</h4>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश सरकार उन कर्मचारियों को पदोन्नति (प्रमोशन), वेतन वृद्धि (इनक्रीमेंट), आवास योजनाओं में रियायतें और अन्य भत्ते देगी जो जनसंख्या नियंत्रण मानदंडों का पालन करेंगे या जिनके दो या उससे कम बच्चे हैं। दो संतानों के मानदंड को अपनाने वाले सरकारी कर्मचारियों को पूरी सेवा के दौरान दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि, पूरे वेतन और भत्तों के साथ 12 महीने का मातृत्व या पितृत्व अवकाश और राष्ट्रीय पेंशन योजना के तहत नियोक्ता अंशदान कोष में तीन प्रतिशत की वृद्धि मिलेगी।</p>
<blockquote class="wp-embedded-content"><p><a href="http://10.0.0.122:1245/yogi-government-has-prepared-a-new-formula-on-population-control/">जनसंख्या नियंत्रण पर योगी सरकार ने तैयार किया नया फॉर्मूला</a></p></blockquote>
<p><iframe class="wp-embedded-content" title="“जनसंख्या नियंत्रण पर योगी सरकार ने तैयार किया नया फॉर्मूला” — Sach kahoon - Best Online Hindi News" src="http://10.0.0.122:1245/yogi-government-has-prepared-a-new-formula-on-population-control/embed/#?secret=M0HIruVjYX%23?secret=8CTNE1rwrf" width="500" height="282" frameborder="0"></iframe></p>
<h4 style="text-align:justify;">20 साल तक फ्री मिलेंगी चिकित्सा सुविधा</h4>
<p style="text-align:justify;">जो लोग सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और जनसंख्या को नियंत्रित करने में योगदान देते हैं, उन्हें पानी, आवास, गृह ऋण आदि करों में छूट जैसे लाभ मिलेंगे। यदि किसी बच्चे के माता-पिता या कोई एक नसबंदी का विकल्प चुनता है तो उन्हें 20 साल की उम्र तक मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है यह मसौदा</h4>
<p style="text-align:justify;">नवीन नीति में एक अहम प्रस्ताव 11 से 19 वर्ष के किशोरों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य के बेहतर प्रबंधन के अलावा, बुजुर्गों की देखभाल के लिए व्यापक व्यवस्था करना भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आबादी विस्तार के लिए गरीबी और अशिक्षा बड़ा कारक है। प्रदेश की निवर्तमान जनसंख्या नीति 2000-16 की अवधि समाप्त हो चुकी है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jul 2021 15:50:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जनसंख्या नियंत्रण पर योगी सरकार ने तैयार किया नया फॉर्मूला</title>
                                    <description><![CDATA[एक बच्चा हो तो राहत, दो से अधिक पर आफत लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर योगी सरकार ने फॉमूर्ला तैयार कर लिया है, जिसके तहत जिनके पास दो से अधिक बच्चे होंगे, वे न तो सरकारी नौकरी के लिए योग्य होंगे और न ही कभी चुनाव लड़ पाएंगे। दरअसल, उत्तर प्रदेश […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/yogi-government-has-prepared-a-new-formula-on-population-control/article-25041"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/instructions-to-yogis-officers.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">एक बच्चा हो तो राहत, दो से अधिक पर आफत</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर योगी सरकार ने फॉमूर्ला तैयार कर लिया है, जिसके तहत जिनके पास दो से अधिक बच्चे होंगे, वे न तो सरकारी नौकरी के लिए योग्य होंगे और न ही कभी चुनाव लड़ पाएंगे। दरअसल, उत्तर प्रदेश की राज्य विधि आयोग ने सिफारिश की है कि एक बच्चे की नीति अपनाने वाले माता पिता को कई तरह की सुविधाएं दी जाएं, वहीं दो से अधिक बच्चों के माता-पिता को सरकारी नौकरियों से वंचित रखा जाए। इतना ही नहीं, उन्हें स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने से रोकने समेत कई तरह के प्रतिबंध लगाने की सिफारिश इस प्रस्ताव में की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने जनसंख्या नियंत्रण कानून के तैयार मसौदे में इस तरह के कई प्रस्ताव रखे हैं। आयोग ने इस मसौदे पर लोगों ने आपत्तियां व सुझाव भी मांगे हैं, जो 19 जुलाई तक आयोग को ई-मेल <span style="color:#0000ff;">(statelawcommission2018@gmail.com)</span> या फिर डाक के जरिए भेजे जा सकते हैं। अगर योगी सरकार इस फॉमूर्ले को हरी झंडी दे देती है तो फिर यूपी में जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मसौदा तैयार करके राज्य सरकार को सौंपा जाएगा</h3>
<p style="text-align:justify;">राज्य विधि आयोग अध्यक्ष न्यायमूर्ति एएन मित्तल के मार्ग-दर्शन में यह मसौदा तैयार किया गया है। आपत्तियों एवं सुझावों का अध्ययन करने के बाद संशोधित मसौदा तैयार करके राज्य सरकार को सौंपा जाएगा। देश के अन्य राज्यों में लागू कानूनों का अध्ययन करने के बाद यह मसौदा तैयार किया गया है। इसे उत्तर प्रदेश जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण एवं कल्याण) एक्ट 2021 के नाम से जाना जाएगा और यह 21 वर्ष से अधिक उम्र के युवकों और 18 वर्ष से अधिक उम्र की युवतियों पर लागू होगा। यह मसौदा आयोग की वेबसाइट <span style="color:#0000ff;">(upslc.upsdc.gov.in)</span> पर अपलोड किया गया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jul 2021 13:04:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनसंख्या पर नियंत्रण आवश्यक</title>
                                    <description><![CDATA[देशे की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठजोड (एनडीए) सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हल्फनामा देकर स्पष्ट कर दिया है कि सरकार दो से अधिक बच्चों के जन्म पर पाबंदी नहीं लगाएगी। भले ही सरकार के इस निर्णय से कुछ इस्लामिक संगठन चिंतामुक्त हो गए हैं, लेकिन बढ़ रही जनसंख्या को स्व-इच्छा से नियंत्रण करने की मुहिम को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/population-control-necessary/article-20550"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/dangerous-signs-of-population-decline.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देशे की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठजोड (एनडीए) सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हल्फनामा देकर स्पष्ट कर दिया है कि सरकार दो से अधिक बच्चों के जन्म पर पाबंदी नहीं लगाएगी। भले ही सरकार के इस निर्णय से कुछ इस्लामिक संगठन चिंतामुक्त हो गए हैं, लेकिन बढ़ रही जनसंख्या को स्व-इच्छा से नियंत्रण करने की मुहिम को जारी रखना होगा। एनडीए 2.0 सरकार आने पर इस बात की चर्चा थी कि सरकार दो बच्चों से अधिक के जन्म पर पाबंदी लगाएगी। तीन तलाक और धारा 370 हटाने जैसे निर्णय के बाद जनसंख्या नियंत्रित को सरकार का अगला एजेंडा माना जा रहा था। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के इस तरह के बयान चर्चा में रहे थे। यूं भी कुछ कांग्रेसी नेता और मुस्लिम नेता भी दो बच्चों के कानून के समर्थन में हैं, लेकिन यह 21वीं सदी का समय है, अब मुस्लिम धर्म के नाम पर देश की जनसंख्या को घटाने या बढ़ाने का समय नहीं रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">तकनीक व विकास के युग में जनसंख्या नियंत्रण को कानून बनाने की बजाय, इसे स्व-इच्छा आधारित समझा जाए, साथ ही बढ़ रही जनसंख्या से समस्याओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। स्व-इच्छा से परिवार नियोजन अभियान को बल देने की आवश्यकता है। यूं भी हमारे संविधान में नागरिक शब्द का प्रयोग है न कि हिंदू, सिख, मुस्लमान लिखा गया है, लेकिन सांप्रदायिक संगठनों के नेता आज भी लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने या कम से कम चार बच्चे पैदा करने का प्रचार कर रहे हैं, जो किसी भी तरह से देशहित में नहीं है। यहां सरकार के लिए नई चुनौती यह भी खड़ी हुई है कि सरकार जनसंख्या बढ़ाने वालों के प्रचार से निपटने के लिए कौन सा कानूनी आधार बनाएगी?</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में जागरूकता ही सबसे बड़ा समाधान है, जिससे लोगों को बढ़ रही जनसंख्या की समस्या से अवगत करवाया जा सकता है। चीन आज ज्यादा अधिक जनसंख्या होने के कारण कई समस्याओं का सामना कर रहा है। बढ़ती जनसंख्या भोजना, आवास, पेयजल, स्वास्थ्य परिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा बन रही है। आज हमारे देश में भी बेरोजगारी, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं की कमी और बढ़ रहे अपराध जैसी समस्याओं की जड़, बढ़ रही जनसंख्या को बताया जाता है। इन परिस्थितियों में केंद्र सरकार द्वारा दो बच्चों से अधिक पर पाबंदी न लगाने की घोषणा से सरकार की जिम्मेवारियों में भारी वृद्धि होगी।</p>
<p> </p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/population-control-necessary/article-20550</link>
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                <pubDate>Mon, 14 Dec 2020 09:50:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनाधिक्य से बढ़ती सामाजिक-आर्थिक समस्याएं</title>
                                    <description><![CDATA[किसी भी देश का आर्थिक विकास प्राकृतिक संसाधनों तथा जनसंख्या के आकार, बनावट तथा कार्यक्षमता पर निर्भर करता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जनसंख्या के लिहाज से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। 30 अप्रैल 2013 को जारी जनगणना 2011 के अंतिम आंकड़ों के अनुसार देश की जनसंख्या बढ़कर 121.07 करोड़ हो गयी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/increasing-socio-economic-problems-by-population-growth/article-16638"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/population-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">किसी भी देश का आर्थिक विकास प्राकृतिक संसाधनों तथा जनसंख्या के आकार, बनावट तथा कार्यक्षमता पर निर्भर करता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जनसंख्या के लिहाज से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। 30 अप्रैल 2013 को जारी जनगणना 2011 के अंतिम आंकड़ों के अनुसार देश की जनसंख्या बढ़कर 121.07 करोड़ हो गयी है। इस तरह देश की जनसंख्या में 17.7 फीसद की वृद्धि हुई है। एक अनुमान के मुताबिक आज की तारीख में भारत की जनसंख्या 135 करोड़ के आसपास पहुंच गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">वैश्विक आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो भारत विश्व के 2.4 फीसद क्षेत्रफल पर विश्व की 1.5 आय के द्वारा 17.5 फीसद जनसंख्या का पालन-पोषण कर रहा है जो कि क्षेत्रफल के हिसाब से बहुत ज्यादा है। इन आंकड़ों से एक बात स्पष्ट है कि भारत में जनाधिक्य की समस्या बढ़ती जा रही है और विगत पांच दशकों में जनसंख्या में निरंतर तीव्र वृद्धि के कारण जनसंख्या विस्फोट की स्थिति उत्पन हो गयी है। विशेषज्ञों की मानें तो जनसंख्या की यह तीव्र वृद्धि आर्थिक विकास के मार्ग को अवरुद्ध कर रही है और कई तरह की समस्याएं खड़ी हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण बेरोजगारी, खाद्य समस्या, कुपोषण, प्रति व्यक्ति निम्न आय, निर्धनता में वृद्धि, मकानों की समस्याएं, कीमतों में वृद्धि, कृषि विकास में बाधा, बचत तथा पूंजी निर्माण में कमी, जनोपयोगी सेवाओं पर अधिक व्यय, अपराधों में वृद्धि तथा शहरी समस्याओं में वृद्धि जैसी ढेर सारी समस्याएं उत्पन हुई हैं। इनमें सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की है। देश में पूंजीगत साधनों की कमी के कारण रोजगार मिलने में कठिनाई उत्पन हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक 2017-18 में बेरोजगारी की दर 6.1 फीसद रही जो कि विगत दशकों में सर्वाधिक है। यह हालात तब है जब देश में बेरोजगारी से निपटने के लिए ढेर सारे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इनमें राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम, समन्वित विकास कार्यक्रम, जवाहर रोजगार योजना, स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना, संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) सर्वाधिक रुप से महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सीआईआई की इंडिया स्किल रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर साल तकरीबन सवा करोड़ शिक्षित युवा तैयार होते हैं। ये नौजवान रोजगार के लिए सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र में अपनी किस्मत आजमाते हैं। लेकिन सिर्फ 37 फीसद ही कामयाब हो पाते हैं। गौर करें तो रोजगार न मिलने के दो कारण हैं। एक, यह कि सरकारी क्षेत्र में नौकरियां लगातार सिकुड़ रही हैं वहीं दूसरी ओर प्राइवेट क्षेत्र में उन्हीं लोगों को रोजगार मिल रहा है जिन्हें कारोबारी प्रशिक्षण हासिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे अधिक बेरोजगारी ग्रामीण क्षेत्रों में है। लेकिन अगर गांव के पढ़े-लिखे नौजवानों को बागवानी, पशुपालन, वृक्षारोपण, कृषि यंत्रों की मरम्मत के संबंध में आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाए तो बेरोजगारी से निपटने में मदद मिलेगी। तीव्र जनसंख्या वृद्धि के कारण प्रति व्यक्ति खाद्यान्न की उपलब्धता कम पड़ रही है जिससे लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है और उनकी कार्यकुशलता घट रही है। तीव्र जनसंख्या वृद्धि के कारण कुपोषण की समस्या भी लगातार सघन हो रही है। यूनाइटेड नेशन के फूड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट से उद्घाटित हो चुका है कि भारत में पिछले एक दशक में भुखमरी की समस्या से जूझने वालों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। इफको की रिपोर्ट में भी कहा जा चुका है कि कुपोषण की वजह से देश के लोगों का शरीर कई तरह की बीमारियों का घर बनता जा रहा है। गौर करें तो कुपोषण वास्तव में घरेलू खाद्य असुरक्षा का सीधा परिणाम है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोगों तक खाद्य की पहुंच सुनिश्चित करके ही कुपोषण को मिटाया जा सकता है। भारत में कुपोषण का सर्वाधिक संकट महिलाओं को झेलना पड़ रहा है। हर वर्ष लाखों गर्भवती महिलाएं उचित पोषण के अभाव में दम तोड़ रही हैं। विश्व बैंक के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत में कुपोषण की दर लगभग 55 फीसद है जबकि उप सहारीय अफ्रीका में यह 27 फीसद के आसपास है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि भारत में हर साल कुपोषण के कारण मरने वाले पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों की संख्या दस लाख से भी अधिक है। दक्षिण एशिया में भारत कुपोषण के मामले में सबसे बुरी हालत में है। गत वर्ष एसीएफ की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में कुपोषण जितनी बड़ी समस्या है वैसे पूरे दक्षिण एशिया में और कहीं देखने को नहीं मिलता।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत में अनुसूचित जनजाति 28 फीसद, अनुसूचित जाति 21 फीसद, पिछड़ी जाति 20 फीसद और ग्रामीण समुदाय के 21 फीसद पर कुपोषण का बहुत अधिक बोझ है। तीव्र जनसंख्या वृद्धि के कारण गरीबी से निपटने में भी कठिनाई आ रही है। रंगराजन कमेटी की रिपोर्ट से पहले ही उद्घाटित हो चुका है कि देश में गरीबों की संख्या 36 करोड़ से भी ज्यादा है यानी देश में हर तीसरा आदमी गरीब है। यह दर्शाता है कि आर्थिक नियोजन के साढ़े छ: दशक वर्ष पूर्ण होने के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था किस तरह निर्धनता के दुष्कचक्र में फंसी हुई है। तीव्र जनसंख्या वृद्धि के कारण भारत में मकानों की समस्या भी लगातार गहराती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आजादी के साढ़े छ: दशक बाद भी आज देश में करोड़ों लोग ऐसे हैं जो सुविधाहीन झुग्गी-झोपड़ियों में जीवन गुजारने को विवश हैं। गौर करें तो 2011 की जनगणना के अनुसार देश के ग्रामीण इलाकों में बेघरों की संख्या तीन करोड़ के आसपास है। कुछ ऐसा ही हाल शहरों का भी है। अर्थव्यवस्था और वातावरण पर गत वर्ष केंद्रित वैश्विक आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले दो दशकों में भारत की शहरी आबादी 21 करोड़ 70 लाख बढ़कर 37 करोड़ 70 लाख हो चुकी है, जो 2031 तक 60 करोड़ हो जाएगी। अगर जनसंख्या इसी तरह बढ़ती रहो तो मकानों की समस्या और जटिल होगी। जनसंख्या में तीव्र वृद्धि कृषि पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">परिवार के सदस्यों में वृद्धि से भूमि का उप-विभाजन और विखंडन बढ़ता जा रहा है जिससे खेतों का आकार छोटा तथा अनार्थिक होता जा रहा है। इसका कुपरिणाम यह है कि देश में भूमिहीन किसानों की संख्या बढ़ रही है। साथ ही कृषि में छिपी हुई बेरोजगारी भी बढ़ रही है। जनसंख्या में तीव्र वृद्धि से बचत तथा पूंजी निर्माण में भी कमी आ रही है। भारत की जनसंख्या में 36 फीसद बच्चे हैं। इसका नतीजा यह है कि कमाने वाले लोगों को अपनी आय का एक बड़ा भाग बच्चों के पालन-पोषण पर खर्च करना पड़ रहा है जिससे बचत घट रही है और पूंजी निर्माण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पूंजी की कमी के कारण विकास योजनाओं को पूर्ण करने में कठिनाई उत्पन हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण सरकार को बिजली, परिवहन, चिकित्सा, जल-आपूर्ति, भवन निर्माण इत्यादि जनोपयोगी सेवाओं पर अधिक व्यय करना पड़ रहा है जिससे अन्य क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। दो राय नहीं कि राष्ट्र के विकास में जनसंख्या की महती भूमिका होती है और विश्व के सभी संसाधनों में सर्वाधिक शक्तिशाली तथा सर्वप्रमुख संसाधन मानव संसाधन ही है। लेकिन अतिशय जनसंख्या किसी भी राष्ट्र की सेहत के लिए ठीक नहीं है। ऐसे में आवश्यक है कि भारत जनसंख्या की तीव्र वृद्धि को रोकने के लिए ठोस नीति को आकार दे। इस पर विचार करे कि भारत के लिए अनुकूलतम जनसंख्या क्या हो? अभी तक जितनी भी राष्ट्रीय जनसंख्या नीति बनी है उसका सकारात्मक असर देखने को नहीं मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">1976 की राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के तहत जन्म दर तथा जनसंख्या वृद्धि में कमी लाना, विवाह की न्यूनतम आयु में वृद्धि करना, परिवार नियोजन को प्रोत्साहित करना तथा स्त्री शिक्षा पर विशेष जोर देना इत्यादि का लक्ष्य रखा गया था। कमोवेश इसी तरह का उद्देश्य और लक्ष्य सन् 2000 की नई राष्ट्रीय नीति में भी रखा गया। लेकिन उसका कोई सकारात्मक असर देखने को नहीं मिला। सच तो यह है कि यह जनसंख्या नीति पूरी तरह असफल साबित हुई। अगर जनसंख्या नीति में व्यापक बदलाव नहीं हुआ तो जनसंख्या वृद्धि की यह प्रवृत्ति पहले से भी ज्यादा समस्याओं और अव्यवस्थाओं को जन्म देगी जिससे निपटना फिर आसान नहीं होगा। उचित होगा कि सरकार नई जनसंख्या नीति लाए।<br />
<strong>-अरविंद जयतिलक</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2020 08:13:23 +0530</pubDate>
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                <title>बठिंडा : स्वच्छता पर दाग लगा रहा ‘कचरा प्लांट’</title>
                                    <description><![CDATA[सफाई पक्ष से पहले नंबर पर आए बठिंडा शहर के माथे से कचरा प्लांट का कलंक अभी तक नहीं मिटा है।
स्वच्छ भारत मुहिम में अग्रणी स्थान हासिल होने पर बठिंडा के अधिकारी और राजनीतिक तक नेता बागोबाग हैं परन्तु कचरा प्लांट ने बड़ी संख्या लोगों के नाक में दम कर रखा है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/waste-plant-not-transferred-from-the-population-despite-tough-struggles/article-12276"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/waste-plant.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सख्त संघर्षों के बाद भी आबादी के पास से तबदील नहीं हुआ कचरा प्लांट | <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Waste Plant</span></span></h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा(सुखजीत मान)।</strong> सफाई पक्ष से पहले नंबर पर आए बठिंडा शहर के माथे से कचरा प्लांट का कलंक अभी तक नहीं मिटा है। स्वच्छ भारत मुहिम में अग्रणी स्थान हासिल होने पर बठिंडा के अधिकारी और राजनीतिक तक नेता बागोबाग हैं परन्तु कचरा प्लांट ने बड़ी संख्या लोगों के नाक में दम कर रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">विधान सभा चुनावों से पहले इस प्लांट का मुद्दा काफी उठा था परंतु चुनावों के दौरानु किसी ने इसकी सार नहीं ली। विवरणों मुताबिक अकाली -भाजपा सरकार दौरान नगर निगम बठिंडा की ओर से एक कंपनी के साथ किए गए समझौते के अंतर्गत आईटीआई चौंक बठिंडा के नजदीक म्युनिंसिपल सालिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना के अंतर्गत यह प्लांट लगाया गया था, जिसकी मियाद नवंबर 2030 तक है।</p>
<h2>कचरा प्लांट के लगने के बाद में रिश्तेदार भी आने हुए बंद | <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Waste Plant</span></span></h2>
<p>शहर भर में से सारा कूड़ा उठाकर इस प्लांट में लाया जाता है, जिसके नजदीक भाई मति दास नगर, जोगा नगर, नक्षत्र नगर, हरबंस नगर, उधम सिंह नगर आदि सहित एक दर्जन के करीब अलग -अलग नामों के साथ बसे हुए नगर हैं जिनमें बड़ी संख्या लोगों की जनसंख्या है। गत दिवस जब इन नगरों का दौरा किया गया तो कई लोगों ने कहा कि बठिंडा को पहला दर्जा मिला इसकी खुशी है परन्तु यह दर्जा उनके क्षेत्र की हवा प्रदूषित कर रहा है।</p>
<p>कुछ लोगों का तर्क था कि इस प्लांट के लगने के बाद में रिश्तेदारों ने भी यहां रात काटनी बंद कर दी। लोगों में गुस्सा है कि कचरा पलांट को आबादी से दूर स्थापित किया जाना चाहिए था परंतु उनके घरों नजदीक लगाकर उन का सांस लेना कठिन कर दिया है। इस प्लांट की तबदीली के लिए काफी संघर्ष भी हुए परंतु इसमें कोई सफलता हाथ नहीं लगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">तबदीली का प्रस्ताव पास हो चुका है : मेयर</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">नगर निगम बठिंडा के मेयर बलवंत राय नाथ का कहना है कि<br />
कचरा प्लांट की तबदीली संबंधी प्रस्ताव निगम हाऊस में पास हो चुका है।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि उम्मीद है जल्द ही कचरा प्लांट यहां से तबदील कर दिया जाएगा।</li>
<li style="text-align:justify;">मेयर ने बताया कि प्लांट में मौजूद कूड़े को साफ करने हित भी 80 लाख रूपये के टैंडर हो चुके हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">जितने समय तक प्लांट तबदील नहीं होता लोगों को कोई समस्या न आए उसके हल के लिए वह प्रयास करते रहेंगे।</li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">आंखें बंद कर लिए गए फैसले : वित्त मंत्री</h2>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल को जब चुनाव मैनीफैस्टो में किए गए वायदे मुताबिक कचरा प्लांट तबदील न करने संबंधी पूछा तो उन्होंने कहा कि यह पहले के आंखें बंद कर लिए हुए फैसले हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद चाहते हैं कि इस कचरा प्लांट का ठोस हल किया जाये, जिसके लिए वह प्रयत्नशील हैं।</p>
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</span></span></p>
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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2020 20:18:45 +0530</pubDate>
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