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                <title>बुद्धिजीवी बोले, देश की संस्कृति को रखें सहेज कर</title>
                                    <description><![CDATA[परिचर्चा। संस्कृति और आधुनिकता आमने-सामने सच कहूँ/देवीलाल बारना कुरुक्षेत्र। हिंदूस्तान में विशेष दिनों की बड़ी महत्ता है। कभी दीपावली के दीपों में पूरा हिंदूस्तान जगमग हो जाता है तो कभी ईद के मौके पर पूरा हिंदूस्तान आपस में गले मिलता है। कभी राखी का एक धागा भाई-बहन के प्रेम को मजबूत करने काम करता है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>परिचर्चा। संस्कृति और आधुनिकता आमने-सामने</h2>
<p><strong>सच कहूँ/देवीलाल बारना</strong><br />
<strong>कुरुक्षेत्र।</strong> हिंदूस्तान में विशेष दिनों की बड़ी महत्ता है। कभी दीपावली के दीपों में पूरा हिंदूस्तान जगमग हो जाता है तो कभी ईद के मौके पर पूरा हिंदूस्तान आपस में गले मिलता है। कभी राखी का एक धागा भाई-बहन के प्रेम को मजबूत करने काम करता है तो कभी होली के पर्व पर सभी एक हो जाते हैं। हिंदूस्तान के अनेक पर्व ऐसे हैं जो प्रेम रूपी भाईचारे की जड़ों को ओर गहरा करने का कार्य करते हैं। वहीं आजकल वैलेंटाईन डे भी काफी प्रचलन में आ रहा है।</p>
<p>वैलेंटाईन-डे को भारतीय संस्कृति के मुताबिक सही नहीं ंमाना जाता। अंग्रेजी बोलने वाले देशों में ये एक पारंपरिक दिवस है, जिसमें प्रेमी एक-दूसरे के प्रति अपने प्रेम का इजहार वैलेंटाइन कार्ड़ भेजकर या फूल देकर करते हैं। ये दिन प्रेम पत्रों के वैलेंटाइन के रूप में पारस्परिक आदान-प्रदान के साथ गहरे से जुड़ा हुआ है। भारत की यदि बात करें तो यहां के लोगों को मानना है कि भारत की संस्कृति इस त्योहार को मनाने की इजाजत नहीं देती। वैलेंटाईन डे को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे बुद्धिजीवियों से जब बात की गई तो उन्होंने इस प्रकार अपनी प्रतिक्रिया दी।</p>
<h2>कोई स्थान ऐसा नहीं जहां प्रेम न हो: डा. हुड्डा</h2>
<p>शिक्षिका डॉ. प्रीतिका हुड्डा का कहना है कि दुनिया में कोई स्थान व प्राणी ऐसा नहीं जो प्रेम व स्रेह से रहित हो। हम ईश्वर से, देश से, माता-पिता से, अपने सगे संबंधियों से सबसे प्रेम करते हैं। स्वाभाविक है कि पुरुष व स्त्री के बीच भी प्रेम रहता है। प्रेम को मात्र विपरीत लिंग से जोड़ने की बजाय प्रेम के विस्तृत रूप को समझ कर हम बात करें तो यह समझ आता है कि प्रेम सबसे करें, प्रेम में न कोई अपेक्षा हो न तनाव, प्रेम के लिए जिएं लेकिन मरें नहीं।</p>
<h2>पश्चिमी सभ्यता को हिंदूस्तान में न पसारने दें पांव: मलिक</h2>
<p>75 वर्षीय हुकम चंद मलिक का कहना है कि आज हिंदूस्तान में पश्चिमी सभ्यता पांव पसारती जा रही है, जोकि देश की संस्कृति के लिए खतरनाक है। भारतीय संस्कृति इससे बिल्कुल अलग है। आज जो वैलेंटाईन डे मनाया जा रहा है। युवा इसे बेशक मनाएं लेकिन अपने माता-पिता व गुरुजनों से प्रेम जताकर। मलिक ने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश की संस्कृति को जिंदा रखने का प्रयास करें व पश्चिमी सभ्यता को देश में पांव न पसारने दें।</p>
<h2>पता नी कित तै आया वैलेंटाईन-डे: रामकरण शर्मा</h2>
<p>वैलेंटाईन डे पर अपने विचार सांझा करते हुए शांति नगर निवासी रामकरण शर्मा ने ठेठ हरियाणवी में अपनी राय देते हुए कहा कि पता नी कित आया यू वैलेंटाईन डे। म्हारे उरै तो होली, दिवाली, सक्रांत अर तीज जिसे त्योहार होवैं सैं। इन त्योहारां नै मना कै देश मै भाईचारा अर प्रेम जागृत होवै सै। वैलेंटाईन नाम का यू विदेशी त्यौहार भारत मै मनाने का कोई औचित्य नही है।</p>
<h2>देश के साथ प्रम करें युवा: कश्यप</h2>
<p>आकाशवाणी कुरुक्षेत्र में युववाणी कार्यक्रम की प्रस्तुतकर्ता कविता कश्यप का कहना है कि आज जरूरत है कि हर युवा देश से प्रेम करे। जब हमारे अंदर देश प्रेम जागृत होगा तो हम देश को बहुत आगे ले जा सकते हैं।</p>
<h2>आधुनिकता की दौड़ में संस्कृति को न छोड दें पीछे: आरडी शर्मा</h2>
<p>80 वर्षीय आर.डी शर्मा ने कहा कि आज देश की संस्कृति को जीवित रखना बेहद जरूरी है। वैलेंटाईन जैसे त्योहारों के देश में आ जाने से देश की संस्कृति को काफी क्षति हुई है। उन्होने कहा कि जब हम पढ़ा करते थे तो हमे तो वैलेंटाईन नामक दिन का पता भी नही था। आधुनिकता की इस दौड में कभी हम अपनी संस्कृति को ही न पीछे छोड दें।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Feb 2019 20:12:09 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पेट्रोल-डीजल की कीमत पर हो राष्ट्रीय बहस</title>
                                    <description><![CDATA[पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की परेशानी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में आम आदमी पर मंहगाई का बोझ बढ़ेगा ये तय है। लेकिन पेट्रोल डीजल की कीमतों को लेकर जिस तरह की सियासत हो रही है, उससे न तो कीमतें कम होंगी और न ही आम आदमी को कोई राहत पहुंचेगी। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/national-debate-at-the-cost-of-petrol-and-diesel/article-5934"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/fdsxdsxd-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की परेशानी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में आम आदमी पर मंहगाई का बोझ बढ़ेगा ये तय है। लेकिन पेट्रोल डीजल की कीमतों को लेकर जिस तरह की सियासत हो रही है, उससे न तो कीमतें कम होंगी और न ही आम आदमी को कोई राहत पहुंचेगी। उलटा भारत बंद के नाम पर देश के खजाने को चूना और आम आदमी को परेशानी जरूरत हुई। अगर बंद करने से कीमतों का समाधान होना होता तो यह देश काफी समय पहले ही तमाम चीजोें पर काबू पा लेता। बीते 10 सितंबर को जिस कांग्रेस के नेतृत्व में भारत बंद का आह्वान किया गया है और उसके 18 सहयोगी दलों ने भी समर्थन किया है, उसके बाद पेट्रोल-डीजल एक पैसा भी सस्ते नहीं हुए, उल्टा बढ़ोत्तरी जरूर हुई है। यह भी नहीं है कि कांग्रेस नेतृत्व की केंद्र सरकार के दौरान पेट्रोलियम पदार्थ महंगे नहीं हुए। आज दाम 80-90 रुपए के बीच हैं, तो तब भी 70 रुपए के करीब रहे। बल्कि एक दौर में तो पेट्रोल 83 रुपए लीटर तक बिका। दरअसल बंद विरोध प्रदर्शन के बजाय शक्ति प्रदर्शन ज्यादा है। कांग्रेस इस भारत बंद के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत दिखाना चाहती थी और विपक्ष की गोलबंदी भी साफ करना चाहती थी, लेकिन दरारें स्पष्ट रहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">जमीन पर साथ और सहयोग में गहरे फासले सामने आए। बंद के दौरान जो हिंसात्मक घटनाएं प्रकाश में आई वो शर्मनाक हैं। वास्तव में पेट्रोल की कीमत का 25 फीसदी केंद्र सरकार और 21 फीसदी राज्य सरकारें टैक्स लगाती रही हैं। डीजल पर केंद्र 22 फीसदी कर वसूलता है। पेट्रोल-डीजल के दाम तय करने का अधिकार यूपीए सरकार के दौरान तेल कंपनियों को ही दिया गया था। केंद्र सरकार का इतना ही दखल है कि वह कंपनियों से अनुरोध ही कर सकती है कि दामों पर पुनर्विचार किया जाए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कच्चे तेल के दाम हमारे रोजाना के दामों को प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित नहीं करते, क्योंकि उनमें वैट, उत्पाद कर, बेसिक और एडीशनल कस्टम ड्यूटी, स्पेशल सेनवेट ड्यूटी और प्रदूषण अधिभार आदि शामिल किए जाते हैं। वित्त मंत्री अरुण जेतली ने एक्साइज टैक्स कम करने से इनकार किया है। उनका सवाल है कि फिर विकास कार्य और विभिन्न लाभ कैसे दिए जा सकते हैं? बहरहाल ये दाम बढ़ने का एक अर्थशास्त्र यह भी है कि हमारे वित्तीय और चालू खाते के घाटे बेहद बढ़ गए हैं, लिहाजा सरकार घाटों की पूर्ति के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के पक्ष में है। बीती 16 अगस्त से ये दाम रोजाना बढ़े हैं या स्थिर रहे हैं, लेकिन घटे नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">2018 में ही अभी तक पेट्रोल 15 फीसदी महंगा हो चुका है। कच्चे तेल की कीमतें भी करीब 125 फीसदी बढ़ी हैं। अहम सवाल यह भी है कि देश में हिंसात्मक आग लगाने के बाद क्या अब तेल की कीमतें घटेंगी? बंद, बवाल, विरोध और अमानवीय प्रदर्शनों के बाद क्या अब पेट्रोल-डीजल सस्ते होंगे? ऐसा बिलकुल नहीं होगा, क्योंकि मोदी सरकार ने इनकार कर दिया है, बल्कि अपनी असमर्थता जता दी है। दरअसल पेट्रोल-डीजल की अर्थव्यवस्था क्या है और केंद्र-राज्यों के राजस्व में उनकी कितनी हिस्सेदारी है, यह हम अपने पिछले संपादकीय में विस्तार से स्पष्ट कर चुके हैं। इसे विडंबना या विवशता ही मानेंगे कि सरकार को तेल की कीमतें बढ़ानी पड़ती हैं और विपक्ष को आंदोलन करना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकृत तौर पर प्राप्त आंकड़ों ने भी ये बात स्पष्ट कर दी है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से केन्द्र और राज्यों का भंडार लबालब हो गया है। ऐसे में जब केन्द्र सरकार कर घटाने पर अपनी कमाई कम होने का तर्क देती है तब वह ये तथ्य छिपा लेती है कि पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले कर प्रति लिटर के हिसाब से न होकर प्रतिशत के आधार पर हैं। इसलिए जब दाम बढ़ते हैं तब उसी अनुपात में कर की राशि भी बढ़ जाती है। वहीं यदि केन्द्र व राज्य ये तय कर दें कि एक्साईज तथा वैट आदि की राशि प्रति लिटर निश्चित रहेगी तब उपभोक्ता दोहरी मार से बच जायेगा। इस दृष्टि से देखें तो विकास कार्य रुक जाने का बहाना गले नहीं उतरता लेकिन सरकार चाहे केन्द्र की हो या राज्यों की, दोनों अपना आर्थिक प्रबंधन सुधारने की बजाय आम जनता को निचोड़ने पर आमादा हैं। इन तमाम बिंदुओं के मद्देनजर कहा जा सकता है कि भारत बंद कोई समाधान नहीं है। जनता सड़कों पर बिछा दी जाएगी, तो उससे क्या होगा? बेहतर यह होगा कि विभिन्न विपक्षी दलों को जिला और राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक बहस का आगाज करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">और फिर वह बहस मीडिया में जाए। यदि कांग्रेस पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने के ठोस सुझाव देती है और मोदी सरकार अपने फैसलों पर अड़ी रहती है, तो फिर अनशन किए जाएं, विरोध-प्रदर्शन किए जाएं। यह ऐसा मुद्दा है, जिससे आम आदमी भी सीधा प्रभावित है। वह ऐसी बहस को गंभीरता से ग्रहण करेगा और अपने चुनावी फैसले भी ले सकता है। रुपये की विनिमय दर में निरंतर गिरावट तथा पेट्रोल-डीजल की अनियंत्रित होती कीमतों के लिए अंतर्राष्ट्रीय कारण निरूसंदेह जिम्मेदार हैं परन्तु जिस तरह प्राकृतिक आपदाएं रोकना अपने बस में नहीं होने पर भी सरकार प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के हरसंभव प्रयास करती है ठीक वैसे ही आर्थिक विपदाओं के समय भी कोई आपदा प्रबंधन तो होना ही चाहिए। शकील सिद्दीकी</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Sep 2018 20:17:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईयू के राजनीतिक तूफान में फंसे प्रवासी पहुंचेंगे स्पेन</title>
                                    <description><![CDATA[यूरोप में व्यापक पैमाने पर बहस शुरू वेलेंसिया (Varta): स्पेन के वेलेंसिया बंदरगाह पर रविवार को नावों पर सवार 620 प्रवासियों के साथ नौ सेना का एक काफिला पहुंचेगा। इसके साथ ही प्रवासियों द्वारा समुद्र में बिताये नौ दिनों की भयावह यात्रा का अंत हो जाएगा लेकिन इस घटना को लेकर आप्रवासन को संभलने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/the-debate-started-in-europe-on-a-widespread-scale/article-4241"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/yurop.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">यूरोप में व्यापक पैमाने पर बहस शुरू</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>वेलेंसिया (Varta):</strong></p>
<p style="text-align:justify;">स्पेन के वेलेंसिया बंदरगाह पर रविवार को नावों पर सवार 620 प्रवासियों के साथ नौ सेना का एक काफिला पहुंचेगा। इसके साथ ही प्रवासियों द्वारा समुद्र में बिताये नौ दिनों की भयावह यात्रा का अंत हो जाएगा लेकिन इस घटना को लेकर आप्रवासन को संभलने के तरीके पर यूरोप में व्यापक पैमाने पर बहस शुरू हो गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पेन ने दान से चलने वाले जहाज पर सवार उप सहारा अफ्रीकी समूह के प्रवासियों को गत सप्ताह अपने यहां शरण देने की पेशकश की थी। उस समय जहाज 700 समुद्री मील की दूरी पर था और इटली तथा माल्टा ने इसे अपने बंदरगाहों पर शरण देने से इंकार कर दिया था। इटली की नई सरकार ने जहाज को अपने अप्रवासी विरोधी रवैये पर जोर देने के लिए इस्तेमाल किया। पर इसके तुरंत बाद करीब एक हफ्ते का कार्यकाल पूरा करने वाले स्पेनिश प्रधान मंत्री पेड्रो सांचेज़ को अपना उदार रुख दिखाने का बेहतर अवसर मिला।</p>
<h1 style="text-align:center;">लोग यूरोपीय मूल्यों, एकजुटता और समर्थन की मांग<br />
करने के लिए यूरोप आ रहे हैं</h1>
<p style="text-align:justify;">लेकिन प्रवासियों की दुर्दशा ने गरीबी और संघर्ष से भागने वाले लोगों की बड़ी संख्या के प्रबंधन के तरीके पर सहमत होने के लिए यूरोपीय संघ की विफलता पर प्रकाश डाला है। रेड क्रॉस के महासचिव इल्हाद एज सी ने शनिवार को वेलेंसिया में कहा,“लोग यूरोपीय मूल्यों, एकजुटता और समर्थन की मांग करने के लिए यूरोप आ रहे हैं। इससे कम कुछ भी यूरोप (का) के साथ विश्वासघात है।”</p>
<p style="text-align:justify;">स्वयंसेवकों, अनुवादकों, पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों सहित 2,320 कर्मचारी प्रवासियों और दो इतालवी जहाजों का इंतजार कर रहे हैं, जिन्होंने प्रवासियों की यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए अपने जहाज साझा किये। स्पेनिश रेड क्रॉस के अधिकारियों ने कहा कि जैसे ही नावें आती हैं, उनपर सवार सात गर्भवती महिलाओं को तुरंत चेक-अप के लिए जमीन पर लाया जाएगा और 123 नाबालिगों सहित नावों पर सवार हर किसी व्यक्ति का मनोवैज्ञानिक ध्यान दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इटली में प्रवासी विरोधी भावनायें बढ़ी हैं क्योंकि पिछले पांच वर्षों में 600,000 से अधिक लोग वहां पहुंचे हैं, जो राष्ट्रवादी लीग की गठबंधन सरकार को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। स्पेन में यह संख्या अभी काफी कम है लेकिन इसमें तेजी से वृद्धि हो रही है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 Jun 2018 09:01:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहुल पर टिप्पणी को लेकर जेटली से भिड़े सुरजेवाला</title>
                                    <description><![CDATA[समझ तो अनुभवों से आती है, विरासत में नहीं मिलती: जेतली बिना विभाग के मंत्री’ जेटली राजनीतिक प्रासंगिकता हासिल करने की कोशिश में: सुरजेवाला चंडीगढ़ (ब्यूरो)। केंद्रीय मंत्री अरूण जेटली की ओर से कल राहुल गांधी पर निशाना साधे जाने के बाद कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने आज पलटवार किया जिसके बाद दोनों नेताओं के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/debate-on-social-media/article-4182"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/jethily.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">समझ तो अनुभवों से आती है, विरासत में नहीं मिलती: जेतली</h1>
<ul>
<li><strong>बिना विभाग के मंत्री’ जेटली राजनीतिक प्रासंगिकता हासिल करने की कोशिश में: सुरजेवाला</strong></li>
</ul>
<p><strong>चंडीगढ़ (ब्यूरो)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय मंत्री अरूण जेटली की ओर से कल राहुल गांधी पर निशाना साधे जाने के बाद कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने आज पलटवार किया जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच ‘राजनीतिक विमर्श’ को लेकर बहस देखने को मिली है। जेटली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आक्षेपों के लिए कल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की समझ पर सवाल उठाया था और कहा कि यह तो अनुभवों से ही आती है, विरासत में नहीं मिलती।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर सुरजेवाला ने एक बयान जारी कर पलटवार किया और दावा किया कि ‘बिना विभाग के मंत्री’ जेटली राजनीतिक प्रासंगिकता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।  सुरजेवाला के इस बयान के बाद जेटली ने ट्वीट कर कहा, ‘रणदीप सुरजेवाला, यह राजनीतिक विमर्श है।</p>
<p style="text-align:justify;">अशोभनीय बातें करना जवाब देना नहीं है। तथ्यों के साथ जवाब दीजिए।’ इस पर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ने आज कहा, ‘‘जेटली जी, जब आप तथ्यों को तोड़-मरोड़कर कांग्रेस नेतृत्व, यहां तक कि उच्चतम न्यायालय और कई अन्य लोगों के बारे में भला-बुरा कहते हैं तो वह राजनीतिक विमर्श होता है, लेकिन जब आपको ठोस तथ्यों के साथ ‘सच का आइना’ दिखाया जाता है तो आप असहज हो जाते हैं और इसे ‘अशोभनीय बात’ करार देते हैं।’’</p>
<h1 style="text-align:center;">सोशल मीडिया पर तीखी बहस</h1>
<p>भाजपा के वरिष्ठ नेता जेटली ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘रणदीप सुरजेवाला, अगर आर्थिक कुप्रबंधन होता तो कमजोर अर्थव्यवस्था वाले पांच देशों (फरगाइल फाइव) और नीतिगत पंगुता से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का सफर संभव नहीं हो सकता था। यह जानकारी नहीं होने का एक और मामला है।’’</p>
<p>इस पर सुरजेवाला ने कहा, ‘‘जेटली जी, मोदी सरकार में पिछले चार साल में विकास दर सबसे निचले स्तर पर है। निर्यात गिर गया है, दो करोड़ों नौकरियों का वादा जुमला निकला, एनपीए 10 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है, निवेश गिर गया है, बैंकों की हालत खराब हो चुकी है क्या यह सब आर्थिक कुप्रबंधन नहीं है?’’</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 15 Jun 2018 09:10:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओदों सिद्धू वी मैनूं बापू-बापू कहंदा हुंदा सी: बादल</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री ने सिद्धू दंपती पर साधा निशाना लंबी/श्री मुक्तसर साहिब (सच कहूँ न्यूज)। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान उन्होंने नवजोत सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू के लिए क्या नहीं किया। ओदों नवजोत सिद्धू वी मैनूं बापू-बापू कहंदा हुंदा सी। बादल ने यह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/parkash-singh-comment-on-sidhu/article-2983"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/parkash-singh-badal.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">पूर्व मुख्यमंत्री ने सिद्धू दंपती पर साधा निशाना</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>लंबी/श्री मुक्तसर साहिब (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान उन्होंने नवजोत सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू के लिए क्या नहीं किया। ओदों नवजोत सिद्धू वी मैनूं बापू-बापू कहंदा हुंदा सी। बादल ने यह बात मंगलवार को अपने लंबी हलके के गांवों के दौरे के दौरान पत्रकारों के साथ बातचीत करते ही कही। स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की ओर से अकसर बहस के लिए ललकारने के सवाल पर बादल ने कहा कि वह उससे बहस करते क्या अच्छे लगेंगे। उसके साथ बहस तो उनके शिअद एमएलए ही कर लेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">जीएसटी लागू करने की जब बात चल रही थी, उस समय गुरु घर के राशन पर इसे लागू करने से रोकने के लिए शिअद की ओर से केंद्र सरकार के समक्ष मुद्दा न उठाने के सवाल पर बादल ने कहा कि तब जीएसटी लागू नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार प्रत्येक मुद्दे पर फेल हो चुकी है। हरियाणा भाजपा अध्यक्ष के बेटे पर लड़की को छेड़ने के लगे आरोपों के जवाब में बादल ने कहा कि कानून अपना काम करेगा। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने हलके के गांव हाकूवाला, कंदूखेड़ा तथा ढाणी तेलियांवाली में 17 मृतक लोगों के घरों में जा कर उनके पारिवारिक सदस्यों के साथ शोक व्यक्त किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>इस मौके पर अवतार सिंह वनवाला, बलकरन सिंह, तेजिंदर सिंह मिड्डूखेड़ा, मनदीप सिंह तरमाला, रणजोध सिंह लंबी, गोपी तरमाला, मनजीत सिंह लालबाई आदि भी मौजूद थे।</em></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Tue, 08 Aug 2017 07:12:45 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बहस के दायरे में निर्वाचन आयोग</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया के सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायालय की टिपण्णी को भले ही समाचार पत्रों में बहुत जगह न मिली हो, लेकिन देश की शीर्ष अदालत ने बिल्कुल सटीक बहस को शुरू किया है। देश के हालिया मुख्य चुनाव आयुक्त रहे नसीम जैदी का कार्यकाल समाप्ति के पश्चात अचल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/election-commission-in-the-scope-of-debate/article-2363"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/nivarchan-sadan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया के सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायालय की टिपण्णी को भले ही समाचार पत्रों में बहुत जगह न मिली हो, लेकिन देश की शीर्ष अदालत ने बिल्कुल सटीक बहस को शुरू किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के हालिया मुख्य चुनाव आयुक्त रहे नसीम जैदी का कार्यकाल समाप्ति के पश्चात अचल कुमार जोती को नया मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है। यह बात राजनीतिक व प्रशासनिक विश्लेषकों के विमर्श में गंभीरता से उठनी चाहिए कि आखिर दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव कराने का जिम्मा जिस संस्था के ऊपर है, उसकी नियुक्ति की कोई संवैधानिक प्रक्रिया क्यों नहीं है?</p>
<p style="text-align:justify;">देश में सभी शीर्ष पदों पर नियुक्ति की एक विशेष प्रक्रिया है, चाहे वह राष्ट्रपति का पद हो, महालेखा परीक्षक हो या ऊपरी अदालतों के न्यायाधीश हों। परन्तु भारत में चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल की अनुशंसा पर राष्ट्रपति के द्वारा ही की जाती है और तीन चुनाव आयुक्तों में से श्रेणी में वरिष्ठतम आयुक्त ही मुख्य चुनाव आयुक्त बनता है, लेकिन कई अवसरों पर इस परम्परा को तोड़ा भी गया।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से सम्बंधित एक विवाद 2009 में उस दौरान भी खड़ा हुआ था, जब लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नवीन चावला की मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में नियुक्ति की गई थी, जबकि नवीन चावला के चुनाव आयुक्त होने के दौरान तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी ने उन्हें पद से हटाने के सम्बन्ध में राष्ट्रपति को अनुशंसाएं की थी,</p>
<p style="text-align:justify;">जिसे यूपीए सरकार के द्वारा नजर अंदाज कर दिया गया था और नवीन चावला को मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त कर दिया गया। दरअसल एन गोपालस्वामी ने नवीन चावला पर आरोप लगाया था कि वे आयोग की बैठकों के दौरान गुप्त सूचनाओं को कांग्रेस को लीक करते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि अभी तक नियुक्ति को लेकर किसी कानूनी फ्रेमवर्क को तैयार नहीं किया जा सका है।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि वर्ष 1974 में ही तारकुंडे समिति ने सिफारिश की थी कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष लोकसभा तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश की समिति द्वारा की जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रश्न को पुन: जीवित करते हुए पिछले दिनों सर्वोच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते समय सरकार से पूछा कि क्यों अभी तक मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की कोई कानूनी प्रक्रिया निर्धारित नहीं की गई है?</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि संविधान में इस बात का उल्लेख है कि चुनाव आयुक्त व मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कानून के द्वारा की जायेगी। यह प्रश्न इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि नवनियुक्त मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार जोती मोदी सरकार के दौरान गुजरात के मुख्य सचिव रह चुके हैं और सरकार पर अपने ही खेमे के लोगों को इस पद पर बैठाने का आरोप लग रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल चुनाव आयोग एक ऐसी संस्था है, जिसके ऊपर पूरे लोकतंत्र का विश्वास टिका रहता है। निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने का जिम्मा चुनाव आयोग पर ही होता है। ऐसे में इस संस्था का स्वयं निष्पक्ष एवं पारदर्शी होना बेहद जरूरी हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में सीबीआई प्रमुख एवं मुख्य सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति तक के सम्बन्ध में एक समिति होती है, जिसमें प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित विपक्ष का नेता शामिल होता है और इस समिति की अनुशंसा पर राष्ट्रपति इनकी नियुक्ति करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह की समिति का प्रावधान चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त के सम्बन्ध में भी होना चाहिए। हालांकि इतिहास को खंगाला जाए, तो अभी तक दागदार दामन किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त का नहीं रहा है, लेकिन आगे भी यही सिलसिला बना रहेगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता। इसलिए एक स्थापित कानूनी फ्रेमवर्क का होना अत्यंत जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यद्यपि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाये जाने के सम्बन्ध में महाभियोग के समान ही प्रक्रिया है, जोकि उन्हें स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर प्रदान करती है, लेकिन कोई भी व्यक्ति निष्ठापूर्वक स्वतंत्र रूप से कार्य तब कर सकेगा, जब वह स्वयं उस प्रवृत्ति का हो। हालांकि चुनाव आयोग के इतिहास में निष्ठावान मुख्य चुनाव आयुक्तों की एक मजबूत परंपरा रही है, जिसमें टी.एन. शेषन को चुनाव सुधार के प्रति अपनी कटिबद्धता को लेकर मील का पत्थर माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व में चुनाव आयोग को राजनीतिक हस्तक्षेप का शिकार होना पड़ा है। 1993 में तत्कालीन सरकार ने आयोग को बहुसदस्यीय बना दिया और दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति कर दी। निर्वाचन आयोग को बहुसदस्यीय बनाने का निर्णय तत्कालीन सरकार ने इस वजह लिया,</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि नवम्बर 1993 में कई राज्यों की विधानसभा के चुनाव होने थे और निर्वाचन आयोग ने कहा था कि चुनाव कराने के लिए सशस्त्र बलों की पर्याप्त संख्या न मिलने पर और चुनाव कार्य में लगे कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक शक्ति न मिलने पर वह चुनाव को रोक देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन के इस कदम ने सरकार और चुनाव आयुक्त के बीच टकराव को बढ़ा दिया और एक व्यक्ति में संकेंद्रित शक्तियों को कम करने के लिए 2 अक्टूबर 1993 को राष्ट्रपति ने एक अध्यादेश जारी कर दो अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का प्रावधान किया और मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों को चुनाव आयुक्त की शक्तियों के समान कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह देश में सशक्त चुनाव आयोग की शक्तियों पर प्रथम कुठाराघात था और सरकार की इस मनोवृत्ति को स्पष्ट कर दिया था कि वह किसी भी संस्था को इतना भी स्वतंत्र नहीं चाहती कि वह सरकार से ज्यादा भी अपने को सशक्त समझने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि सर्वोच्च न्यायालय में जब यह मामला गया, तो न्यायालय ने भी बहुमत के आधार पर सरकार के निर्णय को सही माना और टी.एन. शेषन द्वारा दिखाए जा रहे अतिसक्रियता पर कटाक्ष किया। न्यायालय ने तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त शेषन के द्वारा व्यक्तिगत रूप से टीवी मीडिया में इंटरव्यू देने और लोक संवाद स्थापित करने को सही नहीं ठहराया गया। लेकिन यदि इस तर्क को मान भी लिया जाए</p>
<p style="text-align:justify;">कि वर्तमान में चुनाव आयोग की संरचना इस प्रकार है कि वह सशक्त तो है, लेकिन बेलगाम नहीं और सरकार का दो अन्य आयुक्तों की नियुक्ति का कदम उसे अधिक संतुलित बनाने के लिए था, तो ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि सरकार ने 1993 के बाद से लेकर अभी तक चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की डोर अपने ही हाथ में क्यों रखी?</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि ऐसा प्रावधान है कि निर्वाचन सम्बन्धी सभी निर्णय सर्वसम्मति अथवा बहुमत से लिए जायेंगे, तो ऐसे में यदि अन्य निर्वाचन आयुक्त सरकार के प्रभावाधीन होंगे तो आयोग की निष्पक्षता कहां बचेगी और वह कैसे स्वतंत्रता व निष्पक्षता के साथ काम कर पायेगा। सर्वोच्च न्यायालय की चिंता बिल्कुल वाजिब प्रतीत होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुद्दा यह भी है एक यही चिंता बृहद स्तर पर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच भी होनी चाहिए और तत्कालिक रूप से सरकार को एक कानून के द्वारा नियुक्ति समिति का गठन किया जाना चाहिए और इस समिति की संरचना भी वही होनी चाहिए, जिसकी तारकुंडे समिति द्वारा अनुशंसा की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल नियुक्ति समिति में विपक्ष के नेता की जगह सरकार में न होने वाले सबसे बड़े दल के नेता को शामिल किये जाने का प्रावधान होना चाहिए, ताकि वर्तमान स्थिति की तरह सरकार विपक्ष के नेता को नियुक्त ही न करके उस स्थिति से बच न सके।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसा सीवीसी की नियुक्ति के संदर्भ में हुआ। चुनाव आयोग एक संविधानिक गरिमा वाली संस्था है, जिसका लोकतंत्र को सुदृढ़ करने में अतुलनीय योगदान है, इसीलिए इस संस्था को स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-पार्थ उपाध्याय</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Sun, 16 Jul 2017 22:07:05 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नारनौंद में विपक्ष पर जमकर बरसे वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यू</title>
                                    <description><![CDATA[हुड्डा व चौटाला को खुली बहस की चुनौती हुड्डा को बताया लाक्ष्यगृह में झुलसाने वाला दुर्योधन हिसार/नारनौंद(संदीप सिंहमार)। नारनौंद की अनाज मंडी में आयोजित भाईचारा संदेश रैली में प्रदेश के वित्त एवं राजस्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला पर जमकर व्यंग्य बाण […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/finance-minister-captain-abhimanyu-did-the-sarcasm-on-hooda-and-chautala/article-1342"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/17-hisar-10.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">हुड्डा व चौटाला को खुली बहस की चुनौती</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>हुड्डा को बताया लाक्ष्यगृह में झुलसाने वाला दुर्योधन</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><strong>हिसार/नारनौंद(संदीप सिंहमार)।</strong> नारनौंद की अनाज मंडी में आयोजित भाईचारा संदेश रैली में प्रदेश के वित्त एवं राजस्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला पर जमकर व्यंग्य बाण छोड़े। रैली को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री पूरी तरह से आक्रामक मूड में दिखाई दिए। चाहे वर्तमान परिदृश्य का किसानों का मुद्दा हो या हरियाणा की धरती से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन एसवाईएल का मुद्दा हो।</p>
<p style="text-align:justify;">इन दोनों ही मुद्दों पर उन्होंने हुड्डा व चौटाला को खुली बहस की चुनौती तक दे डाली। उन्होंने कहा कि वे पूर्व की कांग्रेस व इनेलो सरकार के दौरान किसान हित में किए गए कामों तथा वर्तमान सरकार के ढाई साल के कामों पर दोनों नेताओं से खुली बहस करने को तैयार हैं। सुरेश एमसी के संयोजन में आयोजित रैली में नारनौंद विधानसभा क्षेत्र के गांवों व नारनौंद शहर से उपस्थित लोगों की मौजूदगी में कैप्टन ने कहा कि आज कांग्रेस व इनेलो हमें किसान विरोधी बता रहे हैं। यदि इन दोनों पार्टियों के नेताओं को लगता है कि इन्होंने अपने 16 साल के कार्यकाल में किसानों के हित में वर्तमान सरकार के ढाई साल से ज्यादा काम किए हैं तो किसी भी दिन कहीं भी खुले मंच से बहस के लिए आ सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कस्सी-फावड़े उठाकर माहौल खराब करना चाहती है इनेलो</h3>
<p style="text-align:justify;">अपनी तीखी वाणी से कैप्टन अभिमन्यू ने कहा कि भूपेंद्र हुड्डा ने 10 साल के दौरान एसवाईएल मामले की उचित पैरवी के लिए एक ढंग का वकील नहीं किया जबकि अब खुद कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं तो करोड़ों रुपयों के वकील हायर कर रहे हैं। इधर इनेलो व्यर्थ की बयानबाजी करके तथा कस्सी-फावड़े उठाकर माहौल को खराब करना चाहती है ताकि इस मामले को बिगाड़ा जा सके।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हुड्डा सरकार में क्यों चुप रहे चौटाला</h3>
<p style="text-align:justify;">कैप्टन अभिमन्यू ने कहा कि प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि किस समझौते के तहत हुड्डा सरकार के कार्यकाल में अभय चौटाला एसवाईएल के मामले में चुपचाप बैठे रहे। उन्होंने कहा कि इनेलो और कांग्रेस नहीं चाहती कि एसवाईएल का पानी लाने का श्रेय भाजपा को मिले।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Sat, 17 Jun 2017 09:17:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>बजट सत्र- तीसरा दिन : विभिन्न मुद्दों पर जब आपस में भिड़े दिग्गज</title>
                                    <description><![CDATA[Chandigarh, Anil Kakkar: Budget Session विधानसभा में जारी बजट सत्र के तीसरे दिन विभिन्न मुद्दों पर सत्ता व विपक्ष के दिग्गज नेता आपस में भिड़ गए। सदन का माहौल गर्म करने वाले विभिन्न मुद्दों पर नेताओं की तल्ख टिप्पणियों एवं आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला देर शाम तक चला। Budget Session | अनिल विज और अभय चौटाला की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p><strong><a href="https://www.facebook.com/neal.arora">Chandigarh, Anil Kakkar:</a> </strong>Budget Session विधानसभा में जारी बजट सत्र के तीसरे दिन विभिन्न मुद्दों पर सत्ता व विपक्ष के दिग्गज नेता आपस में भिड़ गए। सदन का माहौल गर्म करने वाले विभिन्न मुद्दों पर नेताओं की तल्ख टिप्पणियों एवं आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला देर शाम तक चला।</p>
<h3>Budget Session | अनिल विज और अभय चौटाला की भिड़ंत</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रश्न काल के दौरान नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला द्वारा सीएम विंडो पर उठाए गए सवाल का जवाब प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने दिया। चौटाला ने सीएम विंडो पर शिकायतों की संख्या तथा लंबित शिकायतों के साथ साथ कहा कि सरकार ने यह योजना बंद ही कर दी गई जबकि लोगों को केवल गुमराह किया जा रहा है।<br />
जवाब में विज ने कहा कि ये कहना गलत होगा कि सीएम विंडो बंद कर दी गई है जबकि ये जिला स्तर से सब-डिवीजन तक पहुंच गई है। वहीं सीएम विंडो पर आने वाली शिकायतों का निपटारा हो रहा है।<br />
इसी बीच अनिल विज पर टोंट करते हुए चौटाला ने कहा कि वे उनकी ओर नहीं बल्कि स्पीकर की ओर देख कर उनके सवाल का जवाब दें। इस पर दोनों नेताओं की गर्मागर्म बहस हो गई। जिसे स्पीकर को बंद करवाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।</p>
<h3>Budget Session | चौटाला एवं मंत्री कृष्ण बेदी भिड़े</h3>
<p style="text-align:justify;">विपक्षी नेता अभय चौटाला ने जाट आंदोलन पर भाषण के दौरान सरकार के मंत्री कृष्ण बेदी के एक ब्यान का हवाला दिया, जिस पर सभा में मौजूद मंत्री कृष्ण बेदी ने चौटाला पर पलटवार किया।<br />
चौटाला ने कहा कि बेदी ने अपने ब्यान में कहा था कि ‘‘लट्ठ के जोर पर आरक्षण नहीं लिया जा सकता’’। इस पर बेदी ने कहा कि यह आरोप बेबुनियाद है जबकि उन्होंने कुछ ओर कहा था। इस बात पर दोनों नेताओं की खूब बहस हुई और सदन में खूब हंगामा हुआ।</p>
<h3>Budget Session<strong> | </strong>रामबिलास शर्मा और भूपेंद्र हुड्डा की नोक-झोंक</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार की ओर से एक जवाब में जब प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कांग्रेस पर पांच जातियों को आरक्षण देने के लिए चुनाव के नजदीक 2014 में समय चुने जाने आने का आरोप लगाया जब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि शर्मा सदन को गुमराह कर रहे हैं आरक्षण का नॉटीफिकेशन कांग्रेस सरकार ने 2013 में ही जारी कर दिया गया। इस पर मामला गर्म हो गया और दोनों नेताओं की खूब बहस हुई।</p>
<h3>Budget Session | कैप्टन अभिमन्यु एवं रघुवीर कादयान का टकराव</h3>
<p>सदन में सत्ता पक्ष द्वारा रखी जा रही दलीलों पर विपक्षी नेता रघुवीर कादयान ने सवाल उठाया तो सत्ता पक्ष के मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि हारती हुई फौजें, वापिस भागते हुए कुएं नदियों में जहर मिलाया करती थी।</p>
<p>उसी तरह कांग्रेस ने जाते-जाते प्रदेश के भाईचारे में जहर मिलाया था। इस पर विपक्षी नेताओं ने खूब हल्ला किया। इसी बीच रघुवीर कादयान ने कैप्टन अभिमन्यु को अगला चुनाव नारनौंद से उनके खिलाफ लड़ने की चुनौती दे दी। रघुवीर कादयान ने कहा कि कैप्टन उनके खिलाफ नारनौंद से लड़ें अगला चुनाव वो उनकी जमानत जब्त करवा दें।</p>
<p>वहीं पलटवार करते हुए कैप्टन ने कहा कि पिछली बार एक नेता ने कहा था कि कैप्टन अभिमन्यु अगर चुनाव जीत जाएं तो वे राजनीति छोड़ देंगे परंतु अभी तक उन्होंने राजनीति नहीं छोड़ी। फिर कैप्टन ने कहा कि समय आने पर वे उनकी चुनौती जरूर स्वीकार करेंगे।</p>
<h3>Budget Session | कैप्टन अभिमन्यु एवं गीता भुक्कल टकराए</h3>
<p>विपक्षी नेता गीता भुक्कल ने मौजूदा वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु पर आरोप लगाया कि उन्हें उनके पैसे का घमंड है। वहीं गीता पर पलटवार करते हुए कैप्टन ने कहा कि उनके पास उनका खून-पसीने का कमाया हुआ पैसा है। लेकिन गीता बताएं कि उन्होंने सरकार में रहते हुए जो काली कमाई की है उसका हिसाब कौन देगा।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/budget-session-various-issues-debate/article-728</link>
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                <pubDate>Thu, 02 Mar 2017 00:28:58 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जाट आंदोलन पर बहस, मांगों पर नहीं बनी बात</title>
                                    <description><![CDATA[Budget Session। तीसरे दिन दो घंटे थमा कामकाज Chandigarh, Anil Kakkar:  Budget Session हरियाणा विधानसभा में बजट सत्र के तीसरे दिन जाट आंदोलन पर विपक्ष काम रोको प्रस्ताव लाने में कामयाब रहा। स्पीकर कंवर पाल गुर्जर ने प्रश्न काल के बाद 2 घंटे के लिए बहस का समय निश्चित किया। जाट आंदोलन पर हुई गरमागरम बहस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/budget-session-debate-on-jat-reservation/article-721"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-03/manoharlalkhattar.jpg" alt=""></a><br /><h2>Budget Session। तीसरे दिन दो घंटे थमा कामकाज</h2>
<p><strong><a href="https://www.facebook.com/neal.arora">Chandigarh, Anil Kakkar:</a>  </strong>Budget Session<strong> </strong>हरियाणा विधानसभा में बजट सत्र के तीसरे दिन जाट आंदोलन पर विपक्ष काम रोको प्रस्ताव लाने में कामयाब रहा। स्पीकर कंवर पाल गुर्जर ने प्रश्न काल के बाद 2 घंटे के लिए बहस का समय निश्चित किया। जाट आंदोलन पर हुई गरमागरम बहस के बीच सरकार तथा विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते नज़र आए, वहीं जाट समुदाय की विभिन्न मांगों पर भी सरकार व विपक्ष में पेंच फसे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">Budget Session| काम रोको प्रस्ताव लाने में कामयाब रहा विपक्ष</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं सरकार की तरफ से मामला सुलझाने के लिए बातचीत के सभी रास्ते खुले रखने तथा विपक्ष की मांग पर राजनेताओं की भी एक कमेटी बनाने की बात स्वीकार की गई। बता दें कि गत दिवस विधानसभा में विपक्ष द्वारा जाट आंदोलन को लेकर काम रोको प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसे स्पीकर ने मंजूर करते हुए इस पर बुधवार को बहस का समय दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार सुबह 10 बजे प्रश्न काल से सदन की कार्रवाई शुरू हुई तथा इसके पश्चात स्पीकर ने अगले दो घंटे ‘काम रोको प्रस्ताव’ मंजूर करते हुए जाट आंदोलन पर बहस के लिए निश्चित कर दिए। जाट आंदोलन पर कांग्रेस के विधायक रघुवीर कादयान ने कहा कि पिछले तीस दिनों से प्रदेश के जाट समुदाय द्वारा न्याय के लिए प्रदर्शन किए जा रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">Budget Session | मामला सुलझाने के लिए सरकार राजनेताओं की कमेटी बनाने को तैयार</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जाट समुदाय के लोग अपने हक़ की बात कर रहे हैं। पिछले वर्ष हुए आंदोलन में 30 से ज्यादा नौजवानों की जान गई, हजारों नौजवानों को जेलों में ठूंस दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं पिछली बार आंदोलन को शांत करने के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ प्रदेश सरकार एवं जाट नेताओं की दिल्ली में हुई मीटिंग में जाटों की मांगें माने जाने का आश्वासन दिया गया था, जिन्हें आज तक पूरा नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि प्रदेश सरकार द्वारा अधिकारियों की कमेटियां बनाए जाने की बजाय नेताओं की कमेटी बने जो कि जाट नेताओं से सीधा संवाद कर सकें और मामले को शांत कर सकें।</p>
<h3>Budget Session | मुख्यमंत्री के आश्वासन से असंतुष्ट विपक्ष का सदन से वॉकआउट</h3>
<p>वहीं इनेलो ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि जब कांग्रेस सरकार सत्ता से रुखसत होने वाली थी जाते-जाते इन्होंने के.सी. गुप्ता की रिपोर्ट को लागू कर 5 जातियों को आरक्षण दे दिया था, जबकि किसी जाति को कुछ नहीं मिला, ये केवल कांग्रेस द्वारा लोगों को गुमराह करने की कोशिश थी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि वहीं पिछले वर्ष मौजूदा सरकार ने हजारों लोगों पर मुकद्दमें दर्ज किए। वहीं एक विशेष जाति के खिलाफ ज्यादा सख्त कार्रवाई हुई जबकि बाकि लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। वहीं उन्होंने प्रदेश के कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद राजकुमार सैनी द्वारा की गई कथित भड़काऊ ब्यानबाज़ी पर भी सरकार द्वारा कार्रवाई न करने पर सवाल उठाया।</p>
<h2>टिप्पणियां मुझ पर भी हुई पर धैर्य नहीं खोया : मनोहर</h2>
<p>विपक्ष द्वारा भाजपा सांसद राजकुमार सैनी के बहाने जब लगातार सत्ता पक्ष पर वार किए गए, तब सत्ता पक्ष के मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि विपक्ष राजकुमार सैनी की बात तो करता है लेकिन रोहतक से सांसद ने जिस तरह प्रदेश के मुख्यमंत्री के बारे में अपशब्द कहे, वहीं जाट समुदाय के धरनों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति भड़काऊ ब्यानबाज़ी पर कोई बात नहीं करता।</p>
<p>विपक्षी इनेलो नेता, कांग्रेस की गीता भुक्कल, रघुवीर कादियान जब कैप्टन अभिमन्यु से उलझे तो बीच में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वे कभी अपना धैर्य नहीं खोते। उन पर कैसी-कैसी टिप्पणी किस-किस ने की है सभी को पता है। उनके भी जज्बात को ठेस पहुंचती है। उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई वैचारिक है, इसे निजी तौर पर न लिया जाए।</p>
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2017 22:29:35 +0530</pubDate>
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