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                <title>बिजली एवं जेल मंत्री चौधरी रणजीत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[लगभग 15 मिनट तक चलने वाली इस मुलाकात में चौधरी रणजीत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए धन्यवाद किया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/power-and-jail-minister-chaudhary-ranjit-singh-calls-on-prime-minister-narendra-modi/article-12907"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/60ec3318-b56d-4085-af05-26e8573e4d35.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">(Ranjit Singh)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/चंडीगढ़(अनिल कक्कड़)।</strong> हरियाणा प्रदेश के बिजली एवं जेल मंत्री चौधरी रणजीत सिंह ने आज दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। गौरतलब है कि प्रदेश की मौजूदा सरकार में मंत्री बनने के बाद बिजली मंत्री रणजीत सिंह की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहली मुलाकात थी। लगभग 15 मिनट तक चलने वाली इस मुलाकात में चौधरी रणजीत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए धन्यवाद किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कैबिनेट मंत्री रणजीत सिंह को मंत्री बनने की शुभकामनाएं दी। इस मुलाकात के दौरान प्रदेश के विकास को लेकर विभिन्न मुद्दों पर सौहादपूर्ण माहौल में चर्चा हुई।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2020 15:50:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मीडिया राई का पहाड़ न बनाए : रंजीत सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[ये बात बिजली मंत्री चौ. रणजीत सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि किसी भी मंत्री द्वारा विधायकों को चाय पर बुलाना कैसे गलत है, जैसी कि चर्चा में चल रही है। उन्होंने मीडिया को आगाह किया कि वह बात की तह में जरूर जाए।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/power-minister-chaudhary-ranjit-singh/article-12680"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/meeting.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">विधायकों को बुलाया था चाय पर, नहीं कोई विरोधाभास (Meeting)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>अश्वनी चावला/सच कहूँ चंडीगढ़।</strong> मंत्री बनने के पश्चात आजाद विधायकों के साथ कोई खास मीटिंग (Meeting) नहीं हो पाई थी, जिसके चलते ही उन्होंने कुछ विधायकों को अपने पास चाय पर बुलाया था। ये बात बिजली मंत्री चौ. रणजीत सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि किसी भी मंत्री द्वारा विधायकों को चाय पर बुलाना कैसे गलत है, जैसी कि चर्चा में चल रही है। उन्होंने मीडिया को आगाह किया कि वह बात की तह में जरूर जाए। बिना किसी बात के राई का पहाड़ न बनाए। मनोहर सरकार को लेकर विधायकों में कोई विरोधाभास नहीं है, ये महज मीडिया की अटकलें भर हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"> चाय पर किसी विधायक या आम इंसान को बुलाना बुरी बात नहीं है</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">वह भी एक मंत्री बनने से पहले विधायक ही हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">कुछ साथी विधायकों को उन्होंने गेट टु गेदर करने के लिए चाय पर बुलाया था।</li>
<li style="text-align:justify;">उसी दौरान कुछ बातें हुई हैं, जिस का गलत मतलब निकाला जा रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">इस दौरान किसी भी तरह के विरोध या फिर सरकार के प्रति कोई बातचीत ही नहीं हुई है।</li>
<li style="text-align:justify;">तो विरोधाभास का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू के विरुद्ध मामला दर्ज होने के पश्चात हरियाणा के कुछ आजाद विधायकों की तरफ से बलराज कुंडू के पक्ष में आवाज उठाने की खबरें आई थी। इसमें विधायकों द्वारा बलराज कुंडू पर मामले दर्ज होने पर नाराजगी जताने की बातें कही जा रही हैं। विधायक बलराज कुंडू ने तो पहले ही मामला नहीं निपटने की सूरत में मनोहर लाल खट्टर की सरकार से समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया है। ऐसे में बिजली मंत्री व आजाद विधायक रंजीत सिंह की अगुवाई में निर्दलीय विधायकों की मीटिंग (Meeting) होने से अटकलें तेज हो गई थी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jan 2020 18:26:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्पेस वार की चुनौतियों के बीच अंतरिक्ष महाशक्ति बनता भारत</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने मिशन शक्ति के अंतर्गत अंतरिक्ष में एंटी सैटेलाइट मिसाइल से एक लाइव सैटेलाइट को नष्ट करके अपना नाम अंतरिक्ष महाशक्ति के तौर पर दर्ज करा लिया है और भारत ऐसी क्षमता प्राप्त करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। अब तक यह क्षमता अमेरिका, रूस और चीन के पास ही थी। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">भारत ने मिशन शक्ति के अंतर्गत अंतरिक्ष में एंटी सैटेलाइट मिसाइल से एक लाइव सैटेलाइट को नष्ट करके अपना नाम अंतरिक्ष महाशक्ति के तौर पर दर्ज करा लिया है और भारत ऐसी क्षमता प्राप्त करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। अब तक यह क्षमता अमेरिका, रूस और चीन के पास ही थी। दुनिया के सभी विश्लेषक और रणनीतिकार इस मसले पर एक मत हैं कि भविष्य में वही विश्व पर हुकूमत करेगा, जिसके जखीरे में “स्पेस वार ” जीतने के ब्रहास्त्र होंगे। भविष्य के युद्ध परंपरागत युद्धों से अलग अंतरिक्ष सामर्थ्य पर ही निर्भर होंगे। ऐसे में भारत ने स्पेस वार में अब अपना पहला सुरक्षात्मक कदम रख दिया है। मिशन शक्ति के अंतर्गत एंटी सैटेलाइट(एसैट) का प्रक्षेपण कलाम आइलैंड से किया गया। इसके अंतर्गत अंतरिक्ष में 300 किमी दूर लो अर्थ आॅर्बिट (एलईओ) में केवल तीन मिनट में लाइव सैटेलाइट को मार गिराया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पेस वार की ओर बढ़ती दुनिया और भारत पिछले वर्ष जून में में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन को अलग अंतरिक्ष बल या स्पेस फोर्स तैयार करने का आदेश दिया। ट्रंप ने अंतरिक्ष को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया। इस तरह ट्रंप ने स्पेस फोर्स को को अमेरिकी सेना की 6 ठी शाखा के रूप में विकसित करने का आदेश दिया। अमेरिकी इंटिलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार रूस और चीन ऐसे हथियार विकसित कर रहे हैं, जिसका प्रयोग स्पेस वार में कर सकते हैं। यहाँ जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि इस समय अमेरिका के अतिरिक्त 4 देशों के पास मिलिट्री स्पेस कमांड है। इसमें चीन के पास पीपुल्स लिबरेशन आर्मी स्ट्रेटजिक सपोर्ट फोर्स, रूस के पास रूसी स्पेस फोर्सेज, फ्रांस के पास ज्वाइंट स्पेस कमांड तथा इंग्लैंड के पास रॉयल एयर फोर्स कमांड।</p>
<p style="text-align:justify;">इन सभी फोर्सेज का काम अंतरिक्ष में अपने उपग्रहों की सुरक्षा करना व मिसाइलों से होने वाले हमलों की निगरानी करना है। इस दृष्टि से भारतीय ‘आॅपरेशन शक्ति’ के महत्व को समझा जा सकता है। जब दुनिया की महाशक्तियाँ संभावित स्पेस वार की तैयारियाँ कर रही हैं, उसमें अब भारत कैसे पीछे रह सकता है। एंटी सैटेलाइट हथियारों अर्थात एसैट का इतिहास: बता दें कि एंटी सैटेलाइट हथियार(ए-सैट), जो सामरिक सैन्य उद्देश्यों के लिए उपग्रहों को निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया जाता है। अमेरिका ने पहली बार 1958 में, रूस ने 1964 में तथा चीन ने 2007 में ए-सैट का परीक्षण किया था। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महाशक्तियों को इसमें सफलता कई प्रयासों के बाद मिली, जबकि भारत को प्रथम प्रयास में। अमेरिका ने 26 मई 1958 से लेकर 13 अक्टूबर 1959 के बीच 12 परीक्षण किए थे,</p>
<p style="text-align:justify;">परंतु अमेरिका के ये सभी प्रयास असफल रहे थे। रूस ने फरवरी 1970 में दुनिया का पहला सफल इंटरसेप्ट मिसाइल परीक्षण किया। अमेरिका ने 1985 में एफ-15 लड़ाकू विमान से एजीएम -135 मिसाइल दागकर सोलविंड पी78-1 सैटेलाइट को नष्ट किया था। चीन ने भी कई प्रयासों के बाद 2007 में इसमें सफलता प्राप्त की। इसमें चीन ने 800 किमी दूर के एक मौसम सैटेलाइट को नष्ट किया। इस परीक्षण से अंतरिक्ष में इतिहास का सबसे ज्यादा सैटेलाइट कचारा फैला, जिसकी दुनिया भर में काफी आलोचना हुई।भारतीय अंतरिक्ष संपदा के सुरक्षा के दृष्टि से भी महत्वपूर्ण: इस समय 803 अमेरिकी उपग्रह अंतरिक्ष में हैं। चीन के 204 और 142 उपग्रहों के साथ रूस तीसरे स्थान पर है। आॅपरेशन शक्ति के अंतर्गत काइनेटिक हथियार का प्रयोग सैटेलाइट नष्ट करने के भारतीय क्षमता से अंतत: अब भारत की अंतरिक्ष संपदा भी सुरक्षित हुई है। भारत के 48 अत्याधुनिक उपग्रह अंतरिक्ष में परिक्रमा कर रहे हैं और यह इंडो पैसेफिक क्षेत्र में उपग्रहों का सबसे बड़ा जखीरा है, जिसकी सुरक्षा बेहद जरूरी है। भारतीय ए-सैट से मलबे की चिंता भी नहीं: अंतरिक्ष में मौजूद मलबा भविष्य में किसी भी अंतरिक्ष अनहोनी के लिहाज से बड़ी चिंता का विषय है। एंटी</p>
<p style="text-align:justify;">सैटेलाइट अर्थात एसैट से उत्पन्न मलबा दूसरे सैटेलाइटों के लिए काफी कठिनाई उत्पन्न करता है। हालांकि ये आकर में काफी छोटे होते हैं, लेकिन राइफल से दागी गई गोली से भी कई गुना तेज रफ्तार के कारण ये कक्षा में घूम रहे, दूसरे उपग्रहों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इन्हीं मलबों के कारण अंंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र नियमित रुप से अपनी कक्षा में बदलाव करता रहता है। 2007 में चीनी परिक्षण से से अब तक का सबसे ज्यादा मलबा उत्पन्न हुआ। चूँकि चीनी मलबा 800 किमी की ऊँचाई में पैदा हुआ, इसलिए उसके तमाम छोटे-छोटे हिस्से अब भी कक्षा में मौजूद है। लेकिन भारतीय परीक्षण निचली कक्षा में हुआ है, इसलिए पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से ज्यादातर टुकड़े उसकी तरफ आकर रास्ते में ही नष्ट हो गए। इसलिए भारतीय परीक्षण को मलबा मुक्त कहा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत का उद्देश्य अंतरिक्ष को विसैन्यीकृत करना है: भारत का अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। भारत सदैव इस बात का पक्षधर रहा है कि अंतरिक्ष का इस्तेमाल शांति के लिए होना चाहिए। भारत अंतरिक्ष में हथियारों को जमा करने के किसी भी प्रतिस्पर्धा के खिलाफ है। भारत का मानना है कि अंतरिक्ष मानवीय दृष्टिकोण रखने वाले सभी लोगों का है। भारत इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासभा के रेगुलेशन 69/32 के तहत अंतरिक्ष में पहले कोई हथियार नहीं तैनात करने की नीति का समर्थन करता है। अंतरिक्ष में हथियारों के इस्तेमाल को लेकर अंतर्राष्ट्रीय कानून और भारत: 1963 में अमेरिका ने अंतरिक्ष में जमीन से छोड़े गए एक परमाणु बम का परीक्षण किया। इस विस्फोट से अंतरिक्ष में मौजूद अमेरिका और रूस के कुछ सैटेलाइट नष्ट हो गए थे। इसके बाद 1967 में “आउटर स्पेस ट्रीटी”नाम से एक अंतर्राष्ट्रीय संधि हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">निष्कर्ष: अंतरिक्ष और उससे जुड़े तकनीकी प्रयोगों के मामले में भारत स्पेस इंडस्ट्री में दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों के दबदबे को चुनौती दे रहा है। एंटी सैटेलाइट क्षमता के प्रदर्शन से यह दावेदारी और भी मजबूत हुई है। 2018 में स्पेस इंडस्ट्री का आकार 360 अरब डॉलर रहा है, जो 2026 में 558 अरब डॉलर का हो जाएगा। भारत को स्पेस प्रोग्राम को चलाने वाली सरकारी एजेंसी इसरो का करीब 33 देशों और बहुराष्ट्रीय निगमों के साथ स्पेस प्रोजेक्ट को लेकर करार है और वह दुनियाभर के अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए लांचपैड का सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा है। ऐसे में आॅपरेशन शक्ति भारतीय अंतरिक्ष संपदा के रक्षा तथा भविष्य में संभावित स्पेस वार में आपातकालीन दृष्टि से भी भारतीय रक्षा तैयारियों को और भी मजबूत करता है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>राहुल लाल</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Mar 2019 20:15:52 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में अमेरिका लगाएगा छह परमाणु ऊर्जा प्लांट</title>
                                    <description><![CDATA[दोनों देशों की सुरक्षा को लेकर सहमति वाशिंगटन, एजेंसी। भारत और अमेरिका ने सुरक्षा व असैन्य परमाणु सहयोग को बढ़ावा देते हुए भारत में छह अमेरिकी परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने पर सहमति जताई हैं। बुधवार को दोनों देशों ने भारत-अमेरिका रणनीतिक सुरक्षा वार्ता के 9 वें दौर के समापन पर जारी एक संयुक्त बैठक में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:justify;">दोनों देशों की सुरक्षा को लेकर सहमति</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन, एजेंसी।</strong> भारत और अमेरिका ने सुरक्षा व असैन्य परमाणु सहयोग को बढ़ावा देते हुए भारत में छह अमेरिकी परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने पर सहमति जताई हैं। बुधवार को दोनों देशों ने भारत-अमेरिका रणनीतिक सुरक्षा वार्ता के 9 वें दौर के समापन पर जारी एक संयुक्त बैठक में सहमति जताई। भारत की तरफ से विदेश सचिव विजय गोखले और अमेरिका के स्टेट फॉर आर्म्स कंट्रोल एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी विभाग की अंडर सेक्रेटरी एंड्रिया थॉम्पसन ने बातचीत में हिस्सा लिया। को।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देश के संयुक्त बयान में कहा गया, ” भारत में छह अमेरिकी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना सहित द्विपक्षीय सुरक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग को मजबूत करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।” आपको बता दें कि भारत और अमेरिका ने अक्टूबर 2008 में असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस सौदे ने द्विपक्षीय संबंधों को एक मजबूती प्रदान की। हालांकि बयान में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के बारे में कुछ ज्यादा जानकारी नहीं दी गई। लेकिन भारत में अमेरिका के इस रुख से तमाम संभावनाएं पैदा होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक सौदे का एक प्रमुख पहलू परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) था, जिसने भारत को एक विशेष छूट दी जिससे वह एक दर्जन देशों के साथ सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर कर सके। छूट के बाद, भारत ने अमेरिका, फ्रांस, रूस, कनाडा, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, यूके, जापान, वियतनाम, बांग्लादेश, कजाकिस्तान और दक्षिण कोरिया के साथ असैन्य परमाणु सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए है।</p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार को संयुक्त बैठक के दौरान अमेरिका ने 48-सदस्यीय एनएसजी में भारत की शुरुआती सदस्यता के लिए अपने मजबूत समर्थन की भी बात कही हैं। बता दें कि चीन ने भारत को एनएसजी में शामिल नहीं होने दिया था। वो भारत के परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना चाहता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्यों महत्व रखता है ये समझौता?</h2>
<p style="text-align:justify;">यह समझौता, ऊर्जा की कमी की समस्‍या का समाधान करने में सहायता करेगा जो भारत की बढ़ती विकास दर से संबंधित एक प्राथमिक समस्‍या के रूप में उभरी है। इस समय भारत की केवल 3 % ऊर्जा जरूरतें परमाणु स्रोतों से पूरी की जाती हैं। भारत की सन् 2020 तक परमाणु क्षेत्र से 20,000 एमडब्‍ल्‍यूई के उत्‍पादन की योजना है जो वर्तमान 3700 एमडब्‍ल्‍यूई के मुकाबले काफी अधिक है।</p>
<p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
<p>Nuclear, Power, Plant</p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Mar 2019 12:39:59 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कर्नाटक में सत्ता का नाटकः गिर सकती है कुमारस्वामी सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)।विधानसभा चुनावों के करीब सात माह बाद कर्नाटक में फिर सत्ता का नाटक शुरू हो गया है। प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जदएस गठबंधन ने भाजपा पर ‘ऑपरेशन लोटस’ के तहत विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है। वहीं, भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उलटा कांग्रेस-जदएस गठबंधन भाजपा विधायकों को […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong>विधानसभा चुनावों के करीब सात माह बाद कर्नाटक में फिर सत्ता का नाटक शुरू हो गया है। प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जदएस गठबंधन ने भाजपा पर ‘ऑपरेशन लोटस’ के तहत विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है। वहीं, भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उलटा कांग्रेस-जदएस गठबंधन भाजपा विधायकों को लुभाने की कोशिश कर रहा है। लिहाजा पार्टी के सभी विधायकों को गुरुग्राम शिफ्ट कर दिया है।</p>
<h2>भाजपा की कोशिश है कि ये 13 विधायक जल्द से जल्द इस्तीफा दे दें।</h2>
<p style="text-align:justify;">हालांकि सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के 10 और जेडीएस के तीन विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। भाजपा की कोशिश है कि ये 13 विधायक जल्द से जल्द इस्तीफा दे दें। भाजपा अगले हफ्ते प्रदेश सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी ला सकती है। बताते चलें कि विधानसभा चुनावों में भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें हासिल हुई थीं और पार्टी नेता बीएस येद्दयुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली थी, लेकिन बाद में कांग्रेस और जेडीएस ने हाथ मिलाकर एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में सरकार बना ली थी।</p>
<p style="text-align:justify;">ताजा घटनाक्रम में कांग्रेस-जदएस के 13 विधायक बेंगलुरु से गायब हैं। मुख्यमंत्री कुमारस्वामी का आरोप है कि भाजपा सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों को लुभाने का प्रयास कर रही है, लेकिन गठबंधन का कोई भी विधायक पाला नहीं बदलेगा, लेकिन कांग्रेस के अंदर बेचैनी है। दरअसल, कर्नाटक में कांग्रेस और जदएस ने मिलकर सरकार तो बना ली थी, लेकिन उनके पास बड़ा बहुमत नहीं है। ऐसे में अगर 13 विधायकों ने इस्तीफा दिया तो दिक्कत बढ़ जाएगी। रविवार को राज्य के जल संसाधन मंत्री डीके शिवकुमार ने भी माना था कि तीन कांग्रेस विधायक मुंबई के एक होटल में ठहरे हुए हैं। इस बारे में जब उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर से पूछा गया तो उनका जबाव था, ‘उन्हें रहने दीजिए.. वे वहां क्यों गए हैं, कोई नहीं जानता। वे छुट्टियां मनाने गए होंगे या मंदिर दर्शन को गए होंगे या फिर नेताओं से मिलने गए होंगे।’</p>
<h2 style="text-align:justify;">कुमारस्वामी ने कहा, भाजपा के सभी विधायक मेरे लोग</h2>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा है कि राज्य में कांग्रेस-जेडीएस सरकार की ‘अस्थिरता’ का सवाल ही नहीं है। उन्होंने उन रिपोटरे को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा गया है कि भाजपा उनकी सरकार गिराने के लिए ‘ऑपरेशन लोटस’ चला रही है। जब उनसे डीके शिवकुमार के उस दावे के बारे में पूछा गया कि कांग्रेस के तीन विधायक मुंबई में कुछ भाजपा नेताओं के साथ हैं, तो कुमारस्वामी ने कहा, ‘वे मेरे मित्र हैं। जो विधायक मुंबई में हैं या भाजपा के सभी 104 विधायक जो दिल्ली में हैं, सभी मेरे लोग हैं। इसलिए इस सरकार की अस्थिरता का सवाल ही नहीं उठता। (कांग्रेस) विधायक मेरी जानकारी के बाद मुंबई गए थे, वे मेरे साथ संपर्क में हैं।’</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/drama-of-power-in-karnataka/article-7371</link>
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                <pubDate>Tue, 15 Jan 2019 08:49:10 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फाइनल में भिड़ेंगे घरेलू क्रिकेट के पावर हाऊस</title>
                                    <description><![CDATA[विजय हजारे ट्रॉफी एकदिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में मुंबई और दिल्ली में भिड़ंत आज बेंगलुरु (एजेंसी)। घरेलू क्रिकेट के पावर हाऊस कहे जाने वाले दिल्ली और मुुंबई शनिवार को यहां विजय हजारे ट्रॉफी एकदिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में आमने-सामने होंगे। दिल्ली ने सेमीफाइनल में झारखंड को कड़े संघर्ष में दो विकेट से और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/power-house-in-the-final-of-the-domestic-cricket/article-6359"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/power-house-in-the-final-of-the-domestic-cricket-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">विजय हजारे ट्रॉफी एकदिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में मुंबई और दिल्ली में भिड़ंत आज</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बेंगलुरु (एजेंसी)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">घरेलू क्रिकेट के पावर हाऊस कहे जाने वाले दिल्ली और मुुंबई शनिवार को यहां विजय हजारे ट्रॉफी एकदिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में आमने-सामने होंगे। दिल्ली ने सेमीफाइनल में झारखंड को कड़े संघर्ष में दो विकेट से और मुंबई ने हैदराबाद को एकतरफा अंदाज़ में 60 रन से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। मुंबई अपने युवा ओपनर पृथ्वी शॉ से खासी उम्मीदें रहेंगी जो इस समय जबरदस्त फार्म में हैं। दिल्ली को अपने कप्तान गौतम गंभीर से सबसे अधिक उम्मीदें रहेंगी जो इस सत्र में 9 मैचों में दो शतकों की मदद से 517 रन बना चुके हैं और सर्वाधिक रन बनाने में दूसरे स्थान पर हैं। गंभीर ने क्वार्टरफाइनल में हरियाणा के खिलाफ शतक बनाया था। दिल्ली के नीतीश राणा ने इस सत्र में आठ मैचों में 362 रन और ध्रुव शौरी ने नौ मैचों में 301 रन बनाए हैं। दिल्ली के तेज़ गेंदबाज़ कुलवंत खेजरोलिया ने टीम के लिए इस सत्र में शानदार प्रदर्शन किया है। वह चार मैचों में 14 विकेट ले चुके हैं जिनमें हरियाणा के खिलाफ हैट्रिक सहित 6 विकेट शामिल हैं। नवदीप सैनी ने 7 मैचों में 13 विकेट लिए हैं जबकि ललित यादव ने भी 9 मैचों में 13 विकेट लिए हैं। आॅलराउंडर पवन नेगी का सेमीफाइनल में मैच विजयी प्रदर्शन दिल्ली की उम्मीदों को मजबूत कर सकता है। मुंबई की तरफ से लेफ्ट आर्म स्पिनर शम्स मुलानी ने इस सत्र में शानदार प्रदर्शन किया है और 21 साल के इस गेंदबाज़ ने 8 मैचों में 16 विकेट लिए हैं। धवल कुलकर्णी आठ मैचों में 15 विकेट ले चुके हैं। दोनों टीमों के बीच दिलचस्प भिड़ंत होने<br />
की पूरी उम्मीद है।</p>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Oct 2018 13:45:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विदेशों में ही क्यों बढ़ रही है हिन्दी की ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[भारत एक है, संविधान एक है। लोकसभा एक है। सेना एक है। मुद्रा एक है। राष्ट्रीय ध्वज एक है। लेकिन इन सबके अतिरिक्त बहुत कुछ और है जो भी एक होना चाहिए। बात चाहे राष्ट्र भाषा हो या राष्ट्र गान या राष्ट्र गीत- इन सबको भी समूचे राष्ट्र में सम्मान एवं स्वीकार्यता मिलनी चाहिए। राष्ट्र […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/why-is-the-power-of-hindi-growing-in-foreign-countries/article-5409"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/unnamed-file.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत एक है, संविधान एक है। लोकसभा एक है। सेना एक है। मुद्रा एक है। राष्ट्रीय ध्वज एक है। लेकिन इन सबके अतिरिक्त बहुत कुछ और है जो भी एक होना चाहिए। बात चाहे राष्ट्र भाषा हो या राष्ट्र गान या राष्ट्र गीत- इन सबको भी समूचे राष्ट्र में सम्मान एवं स्वीकार्यता मिलनी चाहिए। राष्ट्र भाषा हिन्दी को आजादी के 72वर्ष बीत जाने पर भी अपने ही देश में घोर उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है, जो राष्ट्रीय शर्म का विषय है, जबकि विश्व में हिन्दी की ताकत बढ़ रही है, जिसका ताजा प्रमाण है कि संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) द्वारा हिन्दी में ट्वीटर सेवा शुरू करना। देश के सम्मान में उस समय और अधिक इजाफा हुआ जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने ट्विटर पर हिंदी में अपना अकाउंट बनाया और हिंदी भाषा में ही पहला ट्वीट किया। पहले ट्वीट में लिखा संदेश पढ़कर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र संघ ने फेसबुक पर भी हिंदी पेज बनाया है। साथ ही साथ साप्ताहिक हिन्दी समाचार भी सुने जा सकेंगे। भारत सरकार के प्रयत्नों से हिन्दी को विश्वस्तर पर प्रतिष्ठापित किया जा रहा है, यह सराहनीय बात है। लेकिन भारत में उसकी उपेक्षा कब तक होती रहेगी?</p>
<p style="text-align:justify;">मॉरिशस में होने वाले 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में गोस्वामी तुलसीदास, महानकवि अभिमन्यु अनंत व गोपालदास के नाम पर सभागार बनाए गए हैं। विदेशमंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज के इस कथन से एक नया विश्वास जगा है कि वैश्विक स्तर पर हिंदी को मान्यता दिलाने के सरकार के प्रयास सफल होते दिखाई पड़ रहे हैं। आने वाले समय में विदेश मंत्रालय दुनिया भर में और खासकर गिरमिटिया देशों में हिंदी को बचाने के लिए और भी कदम उठाएगा। नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन 1975 से लेकर भोपाल में आयोजित 2015 के सम्मेलन तक बार-बार यह प्रश्न खड़ा होता रहा है कि संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी कब अधिकारिक भाषा बनेगी। इसके लिये सबसे बड़ी बाधा 193 देशों के दो तिहाई सदस्य देशों की सहमति-समर्थन नहीं है बल्कि इन सभी देशों को इस पर होने वाले खर्च की है। इसी बाधा की वजह से जर्मनी और जापान की भाषा भी वह स्थान हासिल नहीं कर पाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे पहले 1977 में हिंदी में भाषण दिया था अटल बिहारी बाजपेयी ने। उस वक्त वे जनता पार्टी सरकार में विदेश मंत्री थे और यूएन में भारत की अगुवाई कर रहे थे। संयुक्त राष्ट्र में किसी भी भारतीय के पहले हिंदी भाषण का पूरे देश में जोरदार स्वागत हुआ था। उनके भाषण की जगह-जगह चर्चा होती थी। इसके बाद उन्होंने सन 2002 में भारत के प्रधानमंत्री के रूप में दोबारा इस अंतरराष्ट्रीय मंच से हिंदी में अपनी बात रखी थी। लेकिन प्रश्न यह है कि दोनों ही सक्षम नेताओं ने हिन्दी को अपने ही देश में क्यों उपेक्षित रहने दिया। क्या कारण है कि आजादी के 70 साल बाद भी सरकारें अपना काम-काज अंग्रेजी में करती हैं, यह देश के लिये दुर्भाग्यपूर्ण एवं विडम्बनापूर्ण स्थिति है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीयता एवं राष्ट्रीय प्रतीकों की उपेक्षा एक ऐसा प्रदूषण है, एक ऐसा अंधेरा है जिससे ठीक उसी प्रकार लड़ना होगा जैसे एक नन्हा-सा दीपक गहन अंधेरे से लड़ता है। छोटी औकात, पर अंधेरे को पास नहीं आने देता। राष्ट्र-भाषा को लेकर छाए धूंध को मिटाने के लिये कुछ ऐसे ही ठोस कदम उठाने ही होंगे। विकास की उपलब्धियों से हम ताकतवर बन सकते हैं, महान नहीं। महान् उस दिन बनेंगे जिस दिन राष्ट्र भाषा, राष्ट्र ध्वज, राष्ट्र-गान एवं राष्ट्र-गीत को उचित स्थान एवं सम्मान देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">कितने दुख की बात है कि आजादी के 70 साल बाद भी हमारे दूर-दराज के जिलों में राज्य सरकारें अपना काम-काज अंग्रेजी में करती हैं। हिन्दी विश्व की एक प्राचीन, समृद्ध तथा महान भाषा होने के साथ ही हमारी राजभाषा भी है, यह हमारे अस्तित्व एवं अस्मिता की भी प्रतीक है, यह हमारी राष्ट्रीयता एवं संस्कृति की भी प्रतीक है। भारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी। इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद ही हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रचारित-प्रसारित करने के लिए 1953 से सम्पूर्ण भारत में 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है। राजभाषा बनने के बाद हिन्दी ने विभिन्न राज्यों के कामकाज में आपसी लोगों से सम्पर्क स्थापित करने का अभिनव कार्य किया है। लेकिन अंग्रेजी के वर्चस्व के कारण आज भी हिन्दी भाषा को वह स्थान प्राप्त नहीं है, जो होना चाहिए। चीनी भाषा के बाद हिन्दी विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली विश्व की दूसरी सबसे बड़ी भाषा है। भारत और अन्य देशों में 70 करोड़ से अधिक लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। पाकिस्तान की तो अधिकांश आबादी हिंदी बोलती व समझती है। किसी भी देश की भाषा और संस्कृति किसी भी देश में लोगों को लोगों से जोड़े रखने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। भाषा राष्ट्र की एकता, अखण्डता तथा प्रगति के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/why-is-the-power-of-hindi-growing-in-foreign-countries/article-5409</link>
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                <pubDate>Thu, 16 Aug 2018 21:17:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समय का मोल पहचानें, शक्ति क्षरण से बचें</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. दीपक आचार्य व्यक्ति की अपनी पूरी जिन्दगी में 50 फीसदी से ज्यादा वह समय होता है जिसको वह फालतू के कामों और बेकार की सोच में गंवा देता है। जो व्यक्ति जीने का अर्थ समझते हैं वे हर क्षण को कीमती मानकर उसका पूरा उपयोग करने की कला में पारंगत हो जाते हैं और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/identify-the-value-of-time-avoid-power-degradation/article-4073"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/time-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>डॉ. दीपक आचार्य</strong></p>
<p style="text-align:justify;">व्यक्ति की अपनी पूरी जिन्दगी में 50 फीसदी से ज्यादा वह समय होता है जिसको वह फालतू के कामों और बेकार की सोच में गंवा देता है। जो व्यक्ति जीने का अर्थ समझते हैं वे हर क्षण को कीमती मानकर उसका पूरा उपयोग करने की कला में पारंगत हो जाते हैं और जीवन में सफलता के झण्डे गाड़ते हुए मार्गदर्शी और प्रेरणा पुंज बन जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर ऐसे लोगों की संख्या 90 फीसदी से अधिक है जिनका ज्यादातर समय अनुपलब्धिमूलक और निरर्थक गुजर जाता है। इनमें से भी अधिकांश समय सोने, बेवजह बोलने अर्थात बकवास करने और सुनने में गुजर जाता है। हम इतना अधिक बोलते और सुनते हैं जिसकी हमें आवश्यकता ही नहीं होती मगर बोलना और सुनना तथा फालतू के कामों में रमे रहना आदमी की फितरत में सर्वोपरि होता है और ऐसे में उसे वे सारे काम बेकार लगते हैं जो इनके सिवा हैं।ज्ञानेन्द्रियों और कर्मेन्द्रियों के बेजा इस्तेमाल से इनकी कार्यक्षमता का ह्रास होता है तथा जीवन की पूणार्यु तक पहुँचते-पहुँचते ये जवाब देने लग जाती हैं जबकि इनका सही और युक्तिपूर्वक इस्तेमाल किया जाए तो आजीवन इनकी क्षमता बनी रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर व्यक्ति के जीवन में 70 फीसदी समय ऐसा होता है जिसके बारे में यदि वह जान ले तो निहाल हो जाए, मगर अधिकतर लोगों में न जानने की जिज्ञासा होती है न कुछ कर पाने की ललक। बहुत सारे लोग पशुओं की तरह ही जीते हैं। इनके लिए जिन्दगी केवल खाने-पीने और सोने तक ही सीमित रहा करती है। इसके अलावा उनके जीवन का कोई लक्ष्य नहीं है।और इस खान-पान और अपने-पराये के चक्कर में अधिकांश लोग अपनी सारी नैतिकता और मानवीय मूल्यों को भुला देते हैं। जो समय हमारे सामने है उसके बारे में जानकर पूरा-पूरा उपयोग कर लिया जाए तो हमारी जिन्दगी सुनहरी रश्मियों से भरी-पूरी रह सकती है और इसका लाभ न सिर्फ हमें, बल्कि उन सभी को प्राप्त होता है जो हमारे सम्पर्क में एक बार भी आ जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन मेंं आने वाले ऐसे तमाम अवसरों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। इन अवसरों को शक्ति संचय का माध्यम बनाकर हम दुनिया में चाहें जो कर सकने का सामर्थ्य पा सकते हैं। बात चाहे सफर की हो, कहीं प्रतीक्षा की हो या उन क्षणों की जब हमारे पास कोई दूसरा काम न हो। इन अवसरोंं पर आत्मचिन्तन करें और उनका रचनात्मक प्रवृत्तियों के लिए उपयोग करें। कई बार बैठकों, सभाओं और समारोहों का देरी से शुरू होना, बस या रेल विलम्ब से आना, कहीं काम के लिए जाने पर लम्बे समय तक प्रतीक्षा करते रहने की विवशता या और कोई ऐसा समय, जिसके बारे में हमें यह कहना पड़ता है कि समय काट रहे हैं या प्रतीक्षा कर रहे हैंं, इसका उपयोग अपने हक में शक्ति संचय के लिए अवश्य हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन में सफर के अवसर हों या कहीं भी किसी काम के लिए प्रतीक्षा की विवशता, इन क्षणों में कुढ़े नहीं, न ही रंज या खीज निकालें। इन अवसरों का महत्त्व समझें और इनका दोहन करें। कुछ नहीं तो इन क्षणों को साधना का माध्यम बनाएँ और जिस किसी भगवान या ईष्ट में रुचि हो, उनके किसी छोटे से मंत्र का मन ही मन लगातार जप करते रहें। यों तो आम आदमी घर-गृहस्थी के फण्डों में घनचक्कर होने की वजह से साधना या ईश्वर स्मरण के लिए समय नहीं निकाल पाता है लेकिन सफर और प्रतीक्षा ये दो ऐसे सुअवसर पर हैं जिनका सदुपयोग किया जाना संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन क्षणों में हरि स्मरण का फायदा यह होगा कि हम फालतू की चर्चाओं, निन्दा और आलोचनाओंं आदि से दूर रह पाएंगे और दूसरा ईश्वरीय ऊर्जा लगातार संग्रहित होनी शुरू हो जाएगी जिसका लाभ हमें पूरी जिन्दगी अपने आप प्राप्त होता रहता है। केवल इन्हीं क्षणों का ईमानदारी के साथ ईश्वर स्मरण मात्र में ही उपयोग कर लिया जाए तो सिद्धि और सफलता में ये खूब मददगार हो सकते हैं, यह कई साधकों का अनुभव है। इसी प्रकार स्वाध्याय, स्वास्थ्य लाभ की मुद्राएं और विद्वजनों से सत्संग या चर्चा भी की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ नहीं तो इन क्षणों में उद्विग्न हुए बिना निर्विचार की स्थिति लाने का प्रयास करें। यदि कोई भी व्यक्ति मात्र पाँच-दस मिनट के लिए भी निर्विचार हो जाए तो उसे असीम मानसिक शांति का अहसास होगा। यह भी अनुभूत है। ये भी न कर पाएँ तो अपनी रुचि के कामों का चिन्तन करें और इनसे संबंधित गतिविधियों के बारे में चर्चा करें या व्यवहार में लाएं। इससे भी बौद्धिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक बल बढ़ने लगता है। इससे शरीर ऊब और थकान से भी दूर रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़े-बड़े लोग जिनका अधिकांश समय सफर में गुजरता है वे इसी प्रकार साधना से सिद्धि प्राप्त करने का मार्ग खोज लेते हैं। जबकि ऐसा नहीं करने वाले लोग प्रतीक्षा करते-करते इतना थक जाते हैं कि उन्हें हर थोड़ी-थोड़ी देर में उबासियाँ आनी शुरू हो जाती है, बार-बार झल्ला उठते हैं और प्रतीक्षा के अंत न होने की बात कहते हुए खिसियाते रहते हैं। ये स्थितियां मनुष्य को कमजोर ही करती हैं और इससे चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है जो अन्ततोगत्वा किसी न किसी तनाव और बीमारी को जन्म देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन सारी स्थितियों से बचने का एकमात्र यही उपाय है कि जहाँ कहीं प्रतीक्षा करनी पड़े, लम्बा सफर हो तथा हमारे पास कोई काम नहीं हो तब इसी प्रकार की साधना करें। छोटे-छोटे समय का दोहन करते हुए शक्ति संचय की आदत पड़ जाने पर हम किसी भी परिस्थिति में कहीं भी रहें, न कभी तनाव होगा, न खीज या गुस्से की स्थिति आएगी। बल्कि ऐसे मौके जब भी आएंगे, आनंद देंगे। समय का अपने हक में इस्तेमाल कर लेने की कला सीख जाने पर जीवन के कई सारे आनंद बहुगुणित हो जाते हैं और इसी से व्यक्तित्व की सफलता को मिलने लगती हैं ऊंचाइयां।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Jun 2018 09:00:09 +0530</pubDate>
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                <title>सत्ता प्राप्ति की आपाधापी से उपजी समस्याएं</title>
                                    <description><![CDATA[ललित गर्ग किसान आन्दोलन, शिलांग में हिंसा, रामजन्म भूमि विवाद, कावेरी जल, नक्सलवाद, कश्मीर मुद्दा आदि ऐसी समस्याएं हैं, जो चुनाव के निकट आते ही मुखर हो जाती है। ये मुद्दे एवं समस्याएं आम भारतीय नागरिक को भ्रम में डालने वाली है एवं इनको गर्माकर राजनीतिक स्वार्थ की रोटियां सेंकने का सोचा-समझा प्रयास किया जा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/problems-stemming-from-the-emergence-of-power/article-4029"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/sathaa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ललित गर्ग</strong></p>
<p style="text-align:justify;">किसान आन्दोलन, शिलांग में हिंसा, रामजन्म भूमि विवाद, कावेरी जल, नक्सलवाद, कश्मीर मुद्दा आदि ऐसी समस्याएं हैं, जो चुनाव के निकट आते ही मुखर हो जाती है। ये मुद्दे एवं समस्याएं आम भारतीय नागरिक को भ्रम में डालने वाली है एवं इनको गर्माकर राजनीतिक स्वार्थ की रोटियां सेंकने का सोचा-समझा प्रयास किया जा रहा है। सभी राजनैतिक दल सत्ता प्राप्ति की आपाधापी में लगे हुए हैं। देश की जनता उन्हें जिन लक्ष्यों एवं उद्देश्यों के लिये जनादेश देती है, चुनकर आने के बाद राजनीतिक दल उन्हें भुला देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक दल न अपना आचरण बदलती है, नहीं ही तोर-तरीके, वे ही बातें, वैसा ही चरित्र- जैसे सारी कवायद मतदाता को ठगने के लिये होती है। बात चाहे पक्ष की हो या विपक्ष की- येन-केन-प्रकारेण सत्ता हासिल करने का उन्माद सवार है। इन स्थितियों में जो बात उभरकर सामने आई है वह यह है कि ‘हम बंट कितने जल्दी जाते हैं, हम ठगे कितनी जल्दी जाते हैं।’ अयोध्या में श्रीराम मन्दिर निर्माण को लेकर जिस तरह का निरर्थक विवाद खड़ा करने की कोशिश की जा रही है उसका लक्ष्य 2019 के लोकसभा चुनाव ही हैं। सबसे आश्चर्यजनक प्रसंग यह है कि कुछ हिन्दू साधु-सन्त सरकार को धमकी दे रहे हैं कि यदि मन्दिर निर्माण नहीं कराया गया तो चुनावों में भाजपा की जीत नहीं होगी। राष्ट्र जब आर्थिक एवं आतंकवाद की समस्याओं से जूझ रहा है तब इस प्रकार की घटनाएं देशवासियों की भावनाओं को घायल कर देती हैं। एक सदी पुराने इस विवाद को किसी भी पक्ष को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">न ही किसी फैसले को हार या जीत समझना चाहिए। यह श्रीराम के नाम पर आम भारतीय नागरिक को बांटने का षडयंत्र है। भारतीय लोकतान्त्रिक प्रशासन प्रणाली के तहत कोई भी सरकार किसी भी धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं करा सकती है। मन्दिर, मस्जिद या गुरुद्वारे बनाने का काम सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं का होता है, सरकारों का नहीं। सरकार का काम केवल धार्मिक सौहार्द बनाये रखने व सभी धर्मों का समान आदर करने का होता है। ऐसा लग रहा है वर्तमान सरकार को इस मुद्दे पर दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है। भारत ने स्वतन्त्रता के बाद जिस धर्मनिरपेक्षता के सिद्धान्त को अपना कर अपने विकास का सफर शुरू किया उसकी पहली शर्त यही थी कि इस देश के नागरिक उन अन्ध विश्वासों को ताक पर रखकर बहुधर्मी समाज की संरचना वैज्ञानिक नजरिये से करेंगे, जो उन्हें आपस में एक- दूसरे को जोड़ सके न कि तोडे़।</p>
<p style="text-align:justify;">शिलांग में मामूली झगडे़ को स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा बनाने के पीछे भी राजनीति साजिश के ही संकेत मिल रहे हैं। व्यापक हिंसा एवं तनाव के बाद वहां करीब तीन हजार दलित सिख जिस पंजाब लेन में रहते हैं, वे या तो भयाक्रांत होकर घरों में बन्द हैं या फिर गुरुद्वारा अथवा सेना के शिविरों में शरण लिये हुए हैं। कुछ सेवाभावी संगठन उन्हें राशन और अन्य सहायता पहुंचा रहे हैं। सेना तेनात है, कर्फ्यू लगा है। लगभग एक सप्ताह हो जाने के बाद भी वहां की हवाओं में पेट्रोल बमों एवं आंसू गेस के गोलों की गंध व्याप्त है। देश की एकता एवं सामाजिक सामंजस्य को उग्र संगठन एवं सत्ता के लिये लालायित राजनेता ध्वस्त करने पर तुले हैं। अपने ही देश में अपने लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार आखिर कब तक?</p>
<p style="text-align:justify;">एक और समस्या ने देश की जनता को घायल किये हुए हैं। दस दिन तक चलने वाली किसानों की हड़ताल भले ही शांतिपूर्ण हो, लेकिन इससे अराजक माहौल तो बना ही है। देश के कई राज्यों में किसानों ने आंदोलन किया है। इस दौरान उन्होंने फलों, सब्जियों सहित दूध को सड़कों पर गिरा दिया। गौरतलब है कि किसान सब्जियों के न्यूनतम समर्थन मूल्य और न्यूनतम आय, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू किए जाने समेत कई मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों के आंदोलन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि आंदोलन के चलते देश के कुछ हिस्सों में फल, सब्जी और दूध लोगों तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहा है। किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश में देखा जा रहा है। किसानों को भड़काया जा रहा है, उनको जगह-जगह सरकार के विरोध में खड़ा किया जा रहा है। यह सही है कि किसानों की बहुत-सी समस्याएं है, मगर सरकार उन्हें दूर करने के लिये लगातार प्रयास करती रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह समस्या आज की नहीं है, जब बारडोली आन्दोलन के बाद किसानों की मांगें तत्कालीन अंग्रेजी सरकार ने स्वीकार कर ली, उस आन्दोलन का नेतृत्व करने वाले सरदार पटेल ने अपने अनुयायियों को विजय उत्सव नहीं मनाने दिया। उन्होंने कहा कि, आन्दोलन का अर्थ है कि किसानों के साथ जो अन्याय हो रहा था, वह मिटा दिया गया। किसी की जीत व हार का प्रश्न नहीं है।’ आज भी वही भावना पैदा करनी होगी, समस्या का निदान होना चाहिए। लेकिन उस पर राजनीति न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">पानी जीवन है। किन्तु इस पानी ने कर्नाटक एवं तमिलनाडु दो पड़ोसी प्रान्तों को जैसे दो राष्ट्र बना दिया है। कावेरी नदी जो दोनों राष्ट्रों के बीच बहती है, वहाँ के राजनीतिज्ञ उसे फाड़ देना चाहते हैं। सौ से अधिक वर्षों से चल रहा आपसी विवाद एक राय नहीं होने के कारण आज इस मोड़ पर पहुंच गया है तथा दोनों प्रान्तों के लोगों की जन भावना इतनी उग्र बना दी गई है कि परस्पर एक-दूसरे को दुश्मन समझ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि कावेरी नदी में पानी जोर-शोर से बह रहा है। बांधों में पानी समा नहीं रहा है। कावेरी को राजनीतिज्ञ और कानूनी बनाया जा रहा है। जब देश की अखण्डता के लिए देशवासी संघर्ष कर रहे हैं तब हम इन छोटे-छोटे मुद्दे उठाकर देश को खण्ड-खण्ड करने की सीमा तक चले जाते हैं। जब-जब कावेरी के पानी को राजनीति के रंग से रंगने की कोशिश की जाती है, तब तब दक्षिण भारत की इस नदी में भले ही उफान न आया हो लेकिन पूरे भारत की राजनीति इससे प्रभावित हो जाती है। बहुत वर्षों से नदी के पानी को लेकर अनेक प्रान्तों में विवाद है- पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि। राजनीतिज्ञ केवल यही दृष्टिकोण रखते हैं कि नदी का पानी उसका, जहां से नदी निकलती है। पर मानवीय नियम यह है कि नदी का पानी उसका, जहां प्यास है। आज एक प्रान्त की मिट्टी उड़कर दूसरी जगह जाती है तो कोई नहीं रोक सकता। बिजली कहीं पैदा होती है, कोयला कहीं निकलता है, पैट्रोल कहीं शुद्ध होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गेहूँ, चावल, रुई, पाट, फल पैदा कहीं होते हैं और जाते सब जगह हैं। अगर हम थोड़ा ऊपर उठकर देखें तो स्पष्ट दिखाई देगा कि अगर इस प्रकार से एक प्रान्त दूसरे प्रान्त को अपना उत्पाद या प्राकृतिक स्रोत नहीं देगा तब दूसरा प्रांत भी कैसे अपेक्षा कर सकता है कि शेष प्रान्त उसकी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति करते रहें। पानी की कमी नहीं है, विवेक की कमी है। राष्ट्रीय भावना की कमी है। क्या हमें अभी भी देश के मानचित्र को पढ़ना होगा?</p>
<h3 style="text-align:justify;">राष्ट्रीय एकता को समझना होगा?</h3>
<p style="text-align:justify;">कश्मीर में रमजान के दौरान सीजफायर की भारत सरकार की घोषणा के बावजूद हिंसा और पत्थरबाजी का क्रम बढ़ रहा है। लेकिन भारत अपनी अहिंसक भावना, भाईचारे एवं सद्भावना के चलते ऐसे खतरे मौल लेता रहता है। हर बार उसे निराशा ही झेलनी पड़ती है, लेकिन कब तक? पाकिस्तानी सेना का छल-छद्म से भरा रवैया नया नहीं है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की सरकार द्वारा पत्थरबाजों की माफी देने का परिणाम भी क्या निकला?</p>
<p style="text-align:justify;">विश्वशांति एवं भाईचारे के सिद्धांत में जिसका विश्वास होता है, वह किसी को धोखा नहीं देता, किसी के प्रति आक्रामक नहीं होता। फिर भी पाकिस्तान अपनी अमानवीय एवं हिंसक धारणाओं से प्रतिबद्ध होकर जिस तरह की धोखेबाजी करता है, उससे शांति की कामना कैसे संभव है? बात चले युद्ध विराम की, शांति की, भाईचारे की और कार्य हो अशांति के, द्वेष के, नफरत के तो शांति कैसे संभव होगी?</p>
<p style="text-align:justify;">इन राष्ट्रीय एकता को ध्वस्त करने की घटनाओं में भी हमारे राजनेताओं द्वारा राजनीति किया जाना, आश्चर्यजनक है। कब तक सत्ता स्वार्थो के कंचन मृग और कठिनाइयों के रावण रूप बदल-बदलकर आते रहेंगे और नेतृत्व वर्ग कब तक शाखाओं पर कागज के फूल चिपकाकर भंवरों को भरमाते रहेंगे। राजनैतिक दल नित नए नारों की रचना करते रहते हैं।<br />
जो मुद्दे आज देश के सामने हैं वे साफ दिखाई दे रहे हैं। वह मन्दिर, किसान, पानी है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश को जरूरत है एक साफ-सुथरी शासन प्रणाली एवं आवश्यक बुनियादी सुविधाओं तथा भयमुक्त व्यवस्था की। लोकतंत्र लोगों का तंत्र क्यों नहीं बन रहा है व्याप्त अनगिनत समस्याएं राष्ट्रीय भय का रूप ले चुकी हैं। आज व्यक्ति बौना हो रहा है, परछाइयां बड़ी हो रही हैं। अन्धेरों से तो हम अवश्य निकल जाएंगे क्योंकि अंधेरों के बाद प्रकाश आता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर व्यवस्थाओं का और राष्ट्र संचालन में जो अन्धापन है वह निश्चित ही गढ्ढे में गिराने की ओर अग्रसर है। यह स्वीकृत सत्य है कि एक भी राजनैतिक पार्टी ऐसी नहीं जो देश की समस्याओं पर सच बोलती हो। भारतीय जनता ने बार-बार अपने जनादेश में स्पष्ट कर दिया कि जो हाथ पालकी उठा सकते हैं वे हाथ अर्थी भी उठा सकते हैं।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Jun 2018 10:31:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>आत्मा को शक्ति देता है राम-नाम</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि राम का नाम एक ऐसी दवा है, एक ऐसी औषधि है और जो इंसान इसे ले लेता है तो यह दवा चहूं तरफ असर करती है। आंतरिक तौर पर आत्मा को वह शक्ति, वह नशा देती है जिसके द्वारा आत्मा उस भगवान, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि राम का नाम एक ऐसी दवा है, एक ऐसी औषधि है और जो इंसान इसे ले लेता है तो यह दवा चहूं तरफ असर करती है। आंतरिक तौर पर आत्मा को वह शक्ति, वह नशा देती है जिसके द्वारा आत्मा उस भगवान, उस राम के दर्शन कर सकती है और बाहरी तौर पर ऐसी तंदुरुस्ती, ताजगी देती है जिससे इंसान को कोई भी गम, चिंता, टेंशन नहीं सताती। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मालिक के नाम में बेइंतहा खुशियां हैं, लेकिन नाम जपना इस कलियुग में मुश्किल लगता है। लोग और काम-धंधा कर लेते हैं, लेकिन जब राम-नाम की बात आती है तो कन्नी खिसकाते नजर आते हैं। मालिक के नाम से पतझड़ में भी बहार आ जाती है। मालिक के नाम से मुरझाई कलियां खिल जाती हंै। मालिक के नाम से सदियों से बिछड़ी आत्मा मालिक से मिलने के काबिल बन जाती है। मालिक का नाम सच्चे दिल से, तड़पसे लें तो इंसान जरूर प्रभु की कृपा-दृष्टि के काबिल बनता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उस पर रहमो-करम बरसता है और एक दिन वह सब पाप-गुनाहों से हल्का हो जाता है। आप जी फरमाते हैं कि जीव नाम ले लेता है तो दूसरी तरह नहीं लेता यानि जाप नहीं करता, सुमिरन नहीं करता। नाम लेकर सुमिरन करें, भक्ति-इबादत करें तो कोई गम, गम नहीं रहता कोई दु:ख, दु:ख नहीं रहता पर सुमिरन करें तो। सुमिरन करें ही न, भक्ति करें ही न तो कहां से अंत:करण में शांति आएगी, कहां से दिलो-दिमाग में खुशी आएगी। इंसान एक बोझ की तरह जीवन गुजारता रहता है। अगर आप चाहते हैं कि प्रभु की कृपा-दृष्टि हो, अगर आप चाहते हैं कि आपके गम, दु:ख, दर्द, चिंताएं दूर हो जाएं तो आप सच्ची तड़पसे, सच्ची लगन से चलते, बैठते, लेटके, काम-धंधा करते हुए ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब को याद किया करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Nov 2017 04:05:35 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सत्ता से बाहर हुए लालू की अवसरवादिता</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार से बाहर होने के बाद लालू प्रसाद यादव ने जिस तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ आरोपों की झड़ी लगा दी है, उससे लालू की अवसरवादिता और बौखलाहट का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। लालू ने नीतिश कुमार के खिलाफ सन् 1991 के सीताराम हत्याकांड मुद्दे को हवा दी, जिसके बाद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/lalu-opportunism-out-power/article-2764"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/lalu-parsad-yadav1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सरकार से बाहर होने के बाद लालू प्रसाद यादव ने जिस तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ आरोपों की झड़ी लगा दी है, उससे लालू की अवसरवादिता और बौखलाहट का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। लालू ने नीतिश कुमार के खिलाफ सन् 1991 के सीताराम हत्याकांड मुद्दे को हवा दी, जिसके बाद लालू खुद ही सवालों के घेरे में आ गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हें यह हत्याकांड तब याद आया जब नीतीश कुमार ने उन्हें सरकार से बाहर कर दिया। यदि नीतीश दोषी हैं तो लालू और भी बड़े दोषी बन जाएंगे, जिन्होंने एक संगीन मामले के आरोपी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया। जनता दल (यू) दूसरे नंबर की पार्टी थी। इसके बावजूद लालू ने नीतीश कुमार को राज्य की कमान सौंपते वक्त केवल एक ही निशाना मुख्य रखा कि किसी भी तरह भाजपा को सत्ता से दूर रखा जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">सत्ता के लोभ व विरोधी पार्टी को सबक सिखाने के लिए लालू ने नीतीश की अपराधिक पृष्ठ भूमि (लालू के अनुसार) भी कोई ध्यान नहीं रखा। आमतौर पर जब कोई नेता पार्टी बदले तो उसकी पैतृक पार्टी उसे भ्रष्ट कहने लगती है, लेकिन लालू ने तो इस मामले में छक्का ही मार दिया है। लालू प्रसाद के लिए बेहतर होगा कि अब वह फिजूल की बातें करने की बजाय अपना राजनैतिक आधार मजबूत बनाने के लिए जनता के बीच जाएं और जनसेवा करें।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक रणनीति का सवाल है, नीतीश कुमार अपनी पार्टी से भी बड़े नेता साबित हुए हैं। रणनीति में नीतीश ने लालू को बुरी तरह पटकनी दी है। नीतीश के इस्तीफे को कई महीने पहले तय होने का दावा करने वाले लालू कोई सुरक्षात्मक रणनीति बनाने में नाकाम रहे। अब वह हमलावर नीति अपना रहे हैं जो किसी भी तरह सफल होती नहीं दिख रही। नीतीश कुमार के पास पूर्ण बहुमत है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं को चाहिए कि वे विपक्ष की जिम्मेदारी पूरी तन्मयता से निभाएं। यह बात संतोषजनक है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने के हालात नहीं बने और दोबारा लोकतांत्रिक सरकार बन गई। सत्तापक्ष व विपक्ष दोनों अब राजनीति करने की बजाय, राज्य की बेहतरी के लिए मिलकर काम करें। सरकार को गिराने के पारंपरिक रुझान को छोड़कर मुद्दों की राजनीति ही बिहार के हित में है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Jul 2017 23:21:03 +0530</pubDate>
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                <title>मजीठिया के खिलाफ शक्ति-प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[AmritSar, SachKahoon News:  आम आदमी पार्टी के संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मजीठा की जनता उनके साथ है। सभी कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की कारगुजारी से परेशान हैं। यही कारण है कि लोग मजीठिया को इन चुनावों में सबक सिखाना चाहते हैं। केजरीवाल यहां आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/power-performance-against-majithia/article-678"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/04-13.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>AmritSar, SachKahoon News:</strong>  आम आदमी पार्टी के संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मजीठा की जनता उनके साथ है। सभी कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की कारगुजारी से परेशान हैं। यही कारण है कि लोग मजीठिया को इन चुनावों में सबक सिखाना चाहते हैं। केजरीवाल यहां आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी हिम्मत सिंह शेरगिल के समर्थन में रोड शो करने आए हैं। यह सीट बिक्रम सिंह मजीठिया की परंपरागत सीट मानी जाती है। वह इसी क्षेत्र से विधायक हैं और शिअद की तरफ से पार्टी प्रत्याशी हैं। केजरीवाल ने फिर दोहराया कि शिअद व कांग्रेस आपस में मिले हुए हैं। दोनों दल एक-दूसरे के मजबूत नेताओं के खिलाफ मजबूत प्रत्याशियों को नहीं उतार रहे हैं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Dec 2016 04:14:47 +0530</pubDate>
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