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                <title>Child Labour - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र से होती है सबसे ज्यादा बाल तस्करी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उत्तर प्रदेश, बिहार और आंध्र प्रदेश से वर्ष 2016 से? वर्ष 2022 के बीच सबसे ज्यादा बाल तस्करी हुई है, जबकि कोरोना महामारी के बाद दिल्ली में बच्चों की तस्करी  (Child Trafficking) में 68 फीसद की भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। यह जानकारी देश में बाल तस्करी पर जारी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/most-child-trafficking-happens-from-uttar-pradesh-bihar-andhra-pradesh/article-50608"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/child-labour.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उत्तर प्रदेश, बिहार और आंध्र प्रदेश से वर्ष 2016 से? वर्ष 2022 के बीच सबसे ज्यादा बाल तस्करी हुई है, जबकि कोरोना महामारी के बाद दिल्ली में बच्चों की तस्करी  (Child Trafficking) में 68 फीसद की भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। यह जानकारी देश में बाल तस्करी पर जारी एक रिपोर्ट में सामने आई है। यह रिपोर्ट नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के संगठन कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन (केएससीएफ) ने ‘गेम्स 24 गुणा 7’ के साथ संयुक्त रूप से रविवार को जारी की। यह रिपोर्ट ‘चाइल्ड ट्रैफिकिंग इन इंडिया : इनसाइट्स फ्राम सिचुएशनल डाटा एनालिसिस एंड द नीड फॉर टेक-ड्रिवेन इंटरवेंशन स्ट्रेटजी’ आज विश्व मानव दुव्यार्पार निषेध दिवस के मौके पर जारी की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में वर्ष 2016 से वर्ष 2022 के बीच 21 राज्यों और 262 जिलों में केएससीएफ और इसके सहयोगी संगठनों द्वारा जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण कर इस रिपोर्ट को तैयार गया किया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बाल श्रम और बाल तस्करी से मुक्त कराया गया | Child Trafficking</h3>
<p style="text-align:justify;">बाल मजदूरी के शिकार बच्चों की हालत पर प्रकाश डालते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि 13 से 18 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चे ज्यादातर दुकानों, ढाबों और उद्योगों में काम करते हैं लेकिन सौंदर्य प्रसाधन एक ऐसा उद्योग है जिसमें पांच से आठ साल तक के बहुत छोटे उम्र के बच्चों से भी काम लिया जाता है। छुड़ाए गए 80 प्रतिशत बच्चों की उम्र 13 से 18 वर्ष के बीच थी। साथ ही 13 प्रतिशत बच्चे नौ से बारह साल के बीच थे जबकि पांच प्रतिशत बच्चे नौ साल से भी छोटे थे। वर्ष 2016 से वर्ष 2022 के बीच 18 साल से कम उम्र के 13,549 बच्चों को बाल श्रम और बाल तस्करी से मुक्त कराया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">बाल मजदूरों का सबसे बड़ा हिस्सा होटलों और ढाबों में बचपन गंवा रहा है जहां 15.6 फीसद बच्चे काम कर रहे हैं। इसके बाद आटोमोबाइल और ट्रांसपोर्ट उद्योग में 13 फीसद और कपड़ा और खुदरा दुकानों में 11.18 फीसद बच्चे काम कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी के पश्चात देश के हर राज्य में बाल तस्करी में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। सबसे खराब स्थिति उत्तर प्रदेश की है। यहां कोरोना से पूर्व वर्ष 2016 से वर्ष 2019 के बीच सालाना औसतन 267 बच्चों की तस्करी होती थी जो महामारी के बाद 2021-22 में 1214 तक पहुंच गई। महामारी के बाद कर्नाटक में बच्चों की तस्करी के मामले सीधे 18 गुना बढ़ गए। Child Trafficking</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र, राज्य सरकारों और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) जैसी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की फौरी और त्वरित कार्रवाइयों से बाल दुव्यार्पार में संलिप्त तत्वों की धरपकड़ में मदद मिली है। साथ ही, इससे बच्चों की ट्रैफिकिंग के खिलाफ जागरूकता के प्रसार में भी मदद मिली है जिससे बहुत से बच्चों को तस्करी का शिकार होने से बचाया जा सका है और इसकी वजह से दर्ज मामलों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="सीएम गहलोत 1514 राजस्व गांवों को सड़कों से जोड़ेंगे" href="http://10.0.0.122:1245/chief-minister-ashok-gehlot-will-connect-villages-with-roads-on-monday/">सीएम गहलोत 1514 राजस्व गांवों को सड़कों से जोड़ेंगे</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Jul 2023 18:17:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>World Child Labor Prohibition Day: एक भारतीय के प्रयास से हुई अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस की शुरूआत</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। World Child Labor Prohibition Day: अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस की शुरूआत वर्ष 2002 में एक भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के प्रयासों से हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून को मनाने के लिए एक लंबा सफर तय करना पड़ा है। श्री सत्यार्थी ने इस मुद्दे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/international-child-labor-prohibition-day-started-with-the-efforts-of-an-indian/article-48716"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/world-child-labor-prohibition-day.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>World Child Labor Prohibition Day: अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस की शुरूआत वर्ष 2002 में एक भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के प्रयासों से हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून को मनाने के लिए एक लंबा सफर तय करना पड़ा है। श्री सत्यार्थी ने इस मुद्दे को लेकर विभिन्न देशों में एक सशक्त अभियान चलाया और आम जनता से लेकर राष्ट्राध्यक्ष राष्ट्रप्रमुखों, राजा – रानियों और महाराजा- महारानियों का समर्थन प्राप्त किया। करोड़ों बच्चों के शोषण के खिलाफ और उनके अधिकारों को लेकर आवाज उठाने के लिए वर्ष 2014 में प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। World Child Labor Prohibition Day</p>
<p style="text-align:justify;">सत्यार्थी ने बाल श्रम के बारे में दुनिया को जागरूक करने और उसे एक गंभीर अपराध के तौर पर स्वीकार करने को लेकर वर्ष 1998 में ‘ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर’ यानी वैश्विक जन जागरूकता यात्रा की शुरूआत की थी। यह यात्रा 17 जनवरी, 1998 को फिलीपींस के मनीला से शुरू हुई और छह जून, 1998 को जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में समाप्त हुई। करीब पांच महीने तक चली इस यात्रा में सत्यार्थी के साथ 36 बच्चे भी थे ,जिन्होंने कभी बाल मजदूर के रूप में काम किया था। इस यात्रा को करीब डेढ़ करोड़ लोगों का व्यापक समर्थन भी प्राप्त हुआ। World Child Labor Prohibition Day</p>
<p style="text-align:justify;">इस यात्रा की दो प्रमुख मांगें बाल श्रम के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने और साल में एक विशेष दिन बाल मजदूरों को समर्पित करने की थी। यह यात्रा छह जून, 1998 को जब जेनेवा पहुंची तो उस समय संयुक्त राष्ट्र भवन में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन- आईएलओ का एक महत्वपूर्ण वार्षिक सम्मेलन चल रहा था। इस सम्मेलन में 150 से अधिक देशों के मंत्री और प्रतिनिधि सहित 2,000 से अधिक व्यक्ति मौजूद थे। इन सबके बीच जब संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के गलियारे इन बच्चों के नारों और मांगों से गूंज उठे। World Child Labor Prohibition Day</p>
<p style="text-align:justify;">आईएलओ ने अपनी परंपरा को तोड़ते हुए इतिहास में पहली बार एक सामाजिक कार्यकर्ता श्री सत्यार्थी और दो बच्चों को बाल श्रम, बाल दासता, बाल वेश्यावृत्ति और तस्करी के बारे में अपनी बात रखने का अवसर दिया। वैश्विक जन जागरूकता यात्रा के एक साल बाद यानी 17 जून, 1999 को बाल श्रम उन्मूलन के लिए आईएलओ समझौता- 182 पारित किया गया। इसपर बहुत ही कम समय में संयुक्त राष्ट्र के सभी 187 देशों ने अपने हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही बाल श्रम निषेध को लेकर एक विशेष दिन घोषित किए जाने की मांग को भी मान लिया गया‌। वर्ष 2002 में इसकी घोषणा की गई कि अब से हर साल 12 जून को अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाएगा। World Child Labor Prohibition Day</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले बाल श्रम रोकने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1986 में बाल श्रम(निषेध और विनियमन) अधिनियम लागू किया। इससे कालीन निर्माण, चूड़ी बनाने, पटाखा फैक्ट्री, सर्कस, ताला उद्योग, पीतल के बर्तन बनाने, खेती के काम, साड़ी कढ़ाई, ईंट भट्ठों और घरों काम में कम कर रहे बच्चों को बचाया गया। लेकिन अभी तक कोई ऐसा अंतरराष्ट्रीय कानून या ढांचा नहीं था,जो बच्चों से मजदूरी कराने, उनकी तस्करी और उन्हें वेश्यावृत्ति या दूसरे खतरनाक कामों में धकेलने से रोकता हो। World Child Labor Prohibition Day</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jun 2023 13:21:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पटियाला में बाल मजदूरी के खिलाफ छापेमारी में 19 बच्चों को बचाया : डॉ. कौर</title>
                                    <description><![CDATA[19 बच्चों में से 9 की उम्र 14 साल से कम और बाकी किशोर चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर के दिशा-निर्देशों पर बाल मजदूरी (Child Labour) के विरुद्ध महीना भर चलने वाली कार्रवाई के हिस्से के तौर पर पटियाला में की गई सफल छापेमारी और बचपन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/nineteen-children-rescued-in-raid-against-child-labor-in-patiala-dr-baljit-kaur/article-48657"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/chandigarh-news-2.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">19 बच्चों में से 9 की उम्र 14 साल से कम और बाकी किशोर</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर के दिशा-निर्देशों पर बाल मजदूरी (Child Labour) के विरुद्ध महीना भर चलने वाली कार्रवाई के हिस्से के तौर पर पटियाला में की गई सफल छापेमारी और बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के सहयोग से की गई छापेमारी में अलग-अलग क्षेत्रों से 19 बच्चों को बचाया गया। (Chandigarh News)</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. बलजीत कौर ने शुक्रवार को बताया कि बचाए गए 19 बच्चों में से नौ की उम्र 14 साल से कम थी, जबकि बाकी नौ किशोर थे। उनके दस्तावेजों की पूरी तरह तस्दीक करने के बाद, उनकी तंदुरुस्ती को सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कार्यवाहियों और पुनर्वास के उपाय शुरु किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि आॅपरेशन के दौरान मोटर रिपेयर की दुकान से बचाए गए 14 वर्षीय बच्चे ने मैकेनिकल इंजीनियर बनने की तीव्र इच्छा अभिव्यक्त की। उसकी इच्छाओं को पहचानते हुए, हमने गैर सरकारी संगठन मानवीय अधिकार मिशन के साथ हिस्सेदारी की है, जिसने उसकी शिक्षा को प्रायोजित करने की सहमति दे दी है। (Chandigarh News)</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. बलजीत कौर ने बचपन बचाओ आंदोलन का इस प्रयास के दौरान भरपूर सहयोग और समर्थन के लिए धन्यवाद किया। मंत्री ने कहा कि बाल मजदूरी बच्चों के अधिकारों और सम्मान का घोर उल्लंघन है और हमारी सरकार इस मुद्दे को हमारे समाज से खत्म करने के लिए वचनबद्ध है। हम अधिकारों की रक्षा और राज्य भर में बच्चों की भलाई को यकीनी बनाने के लिए अथक काम करना जारी रखेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जालंधर में 11 जून को केबिनेट मंत्री सुनेंगी महिलाओं की समस्याएं</h3>
<p style="text-align:justify;">महिलाओं को विदेशों भेजकर उनके साथ हो रहे शोषण को राज्य सरकार द्वारा गंभीरता से लिया जा रहा है। महिलाओं के साथ हो रहे शोषण को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रदेश स्तरीय पॉलिसी बनाने के लिए जालंधर में 11 जून को सामाजिक सुरक्षा, स्त्री एवं बाल विकास विभाग मंत्री डॉ. बलजीत कौर की अध्यक्षता में चर्चा की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसे लेकर जानकारी देते हुए सामाजिक सुरक्षा, स्त्री एवं बाल विकास विभाग मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब की महिलाएं जो विदेशों में जाने की इच्छुक हैं, वहां रहती हैं और वापस आ चुकी है, ऐसी महिलाओं के हकों की रक्षा के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई वाली पंजाब सरकार द्वारा विशेषतौर पर ध्यान दिया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कुछ एजेंडों द्वारा राज्य की महिलाओं को विदेशों में गैर कानूनी ढंग से भेजने के उद्देश्य से नौकरी का झांसा देने तथा गलत बयानबाजी करके उनसे कई तरह का शोषण किया जाता है। इस स्थिति पर काबू पाने के लिए पंजाब सरकार द्वारा एक राज्य स्तरीय पॉलिसी तैयार करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पालिसी में हर तरह का शोषण भुगत चुकी महिलाओं के दुखांत को सुनने व उनके सुझावों को पालिसी में शामिल करने के लिए 11 जून को डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर में सुबह 11 से 1 बजे तक विचार चर्चा का आयोजन किया जा रहा है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जरनैल सिंह हत्याकांड के 3 आरोपी हथियार सहित गिरफ्तार" href="http://10.0.0.122:1245/three-accused-of-jarnail-singh-murder-case-arrested-with-weapons/">जरनैल सिंह हत्याकांड के 3 आरोपी हथियार सहित गिरफ्तार</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/nineteen-children-rescued-in-raid-against-child-labor-in-patiala-dr-baljit-kaur/article-48657</link>
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                <pubDate>Fri, 09 Jun 2023 19:34:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बाल श्रमिक मिलने पर दुकानदारों को नोटिस जारी</title>
                                    <description><![CDATA[कैराना (सच कहूँ न्यूज)। बाल श्रम विभाग, वन स्टॉप सेंटर, चाइल्ड लाइन शामली (Shamli) और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीम ने कस्बे में संयुक्त रूप से छापेमारी अभियान चलाया। इस दौरान दुकानों पर तीन बाल श्रमिक काम करते पाए गए। इस पर दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए हैं। शुक्रवार को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/notice-issued-to-shopkeeper-on-getting-child-labour/article-48369"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/kairana-news-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कैराना (सच कहूँ न्यूज)।</strong> बाल श्रम विभाग, वन स्टॉप सेंटर, चाइल्ड लाइन शामली (Shamli) और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की टीम ने कस्बे में संयुक्त रूप से छापेमारी अभियान चलाया। इस दौरान दुकानों पर तीन बाल श्रमिक काम करते पाए गए। इस पर दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शुक्रवार को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (Anti Human Trafficking) यूनिट के प्रभारी निरीक्षक अवनीश कुमार, बाल श्रम विभाग से श्रम प्रवर्तन अधिकारी विप्लव दीक्षित, जिला चाइल्ड लाइन से विनोद कुमार तथा वन स्टॉप सेंटर से पल्लवी टीमों के साथ में कैराना पहुंचे। टीमों ने बचपन बचाओ अभियान के तहत मुख्य मार्ग पर स्थित दुकानों पर छापेमारी की। इस दौरान विभिन्न दुकानों पर 18 वर्ष से कम आयु के तीन श्रमिक काम करते हुए पाए गए, जिस पर दुकान संचालकों को नोटिस जारी किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही, बाल श्रमिकों को बाल कल्याण समिति शामली के सामने पेश करने की हिदायत दी गई। छापेमार कार्यवाही के चलते दुकानदारों में हड़कंप मचा रहा। श्रम प्रर्वतन अधिकारी ने बताया कि बाल श्रम (Child labour) पर दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें बाल श्रमिकों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करने की हिदायत दी गई है। इसके बाद अग्रिम कार्यवाही की जाएगी। इस दौरान उपनिरीक्षक इंद्रपाल सिंह, हेड कांस्टेबल विजयपाल सिंह, अनिल कुमार आदि मौजूद रहे।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="दोराहा नहर में मिले जिंदा कारतूस, पुलिस ने कब्जे में लेकर जांच की शुरु" href="http://10.0.0.122:1245/cartridges-found-in-ludhiana-doraha-canal/">दोराहा नहर में मिले जिंदा कारतूस, पुलिस ने कब्जे में लेकर जांच की शुरु</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2023 18:39:23 +0530</pubDate>
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                <title>सरसा में 8 बच्चों को बालश्रम से कराया मुक्त</title>
                                    <description><![CDATA[उपायुक्त ने शिकायतें मिलने के बाद गठित की थी टीम सरसा (सच कहूँ न्यूज)। प्रशासन की लाख कोशिश के बाद भी शहर में बाल मजदूरी का सिलसिला थम नहीं रहा है। गत दिवस बाल कल्याण समिति व श्रम विभाग ने संयुक्त रूप से शहर के बाजारों में औचक कार्रवाई की। अचानक की गई इस कार्रवाई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/8-children-were-freed-from-child-labor-in-ffzo/article-34826"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/child-labour.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;"><strong>उपायुक्त ने शिकायतें मिलने के बाद गठित की थी टीम</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्रशासन की लाख कोशिश के बाद भी शहर में बाल मजदूरी का सिलसिला थम नहीं रहा है। गत दिवस बाल कल्याण समिति व श्रम विभाग ने संयुक्त रूप से शहर के बाजारों में औचक कार्रवाई की। अचानक की गई इस कार्रवाई से दुकानदारों व कारोबारियों में हड़कंप मच गया। कुछ दुकानदार तो दुकान बंद कर चले गए। उक्त कार्रवाई के दौरान 8 बाल मजदूरों को मुक्त कराया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">बाल कल्याण समिति ने नियमानुसार कार्रवाई कर बच्चों को उनके अभिभावकों के सुपुर्द कर दिया। बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष अनीता वर्मा ने बताया कि शहर में ऐसी शिकायतें मिली रही थी कि बाजारों में दुकानों पर नाबालिग से मजदूरी कराई जाती है। इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए उपायुक्त ने टीम का गठन किया। इस टीम में समिति अध्यक्ष अनीता वर्मा, श्रम विभाग के अतिरिक्त आयुक्त आकाश मित्तल, एलपीओ मोनिका चौधरी सहित अन्य सोशल वर्कर शामिल थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>दुकानदारों को जारी किए नोटिस</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">अनीता वर्मा का कहना है कि बाल कल्याण समिति कई दिनों से बाजारों में रेकी कर बाल मजदूरों को चिन्हित कर रही थी। गत दिवस टीम ने पुलिस का सहयोग लेकर रोड़ी बाजार,सदर बाजार, मोहता मार्केट,गीता भवन वाली गली,सदर बाजार,पीएनबी वाली गली सहित अन्य जगहों पर जाकर औचक कार्रवाई शुरू की। इस दौरान 8 बाल मजदूरों को मुक्त करवाया गया। इसके बाद दुकानदारों को नोटिस जारी कर बाल कल्याण समिति समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया। बच्चों के परिजनों व रिश्तेदारों को भी बुलाया गया।</p>
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<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 24 Jun 2022 16:18:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>बाल श्रम की गिरफ्त में सिसकता बचपन!</title>
                                    <description><![CDATA[झुग्गी बस्तियों में रहते हैं या वंचित परिवारों से आते हैं,
 उनकी शिक्षा तथा सुरक्षा के लिए शहरों में ‘बाल शिक्षण-प्रशिक्षण केंद्र’
नाम से आवासीय विद्यालय की स्थापना की जा सकती है, जहां बच्चे रहकर ना सिर्फ पढ़ाई कर सकें,
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/childhood-in-the-grip-of-child-labor/article-11338"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/child-labour.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बचपन मानव जीवन की ऐसी अवस्था है, जहां एक बच्चे को स्वतंत्र एवं तनाव रहित जीवन जीकर पोषण तथा खेलकूद संग सीखते रहने और आगे बढ़ने की लालसा होती है। लेकिन यह विडंबना ही है कि देश में बाल श्रम के कारण अनचाहे रूप से करोड़ों बच्चों का बचपन तबाह हो रहा है। इनमें से बहुतेरे बच्चों को चोरी-छिपे बाल श्रम रूपी बेबसी के दलदल में धकेला गया है, तो कई बच्चे अनाथ होने या दयनीय पारिवारिक स्थिति की वजह से मजबूर होकर अपने बचपन को दांव पर लगाने को राजी हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बाल श्रम की गिरफ्त में सिसकते बचपन को चाय की दुकानों, ढाबों, होटलों और रेस्तराओं में अक्सर देखा जा सकता है!2011 की जनगणना के अनुसार देश में चौदह वर्ष से कम उम्र के सवा करोड़ से भी अधिक बाल मजदूर हैं। ये बाल-श्रमिक स्कूल जाने के बजाय पेट की आग बुझाने के लिए विभिन्न स्थानों पर कठोर श्रम करने को लाचार हैं। इन बच्चों से ईंटभट्ठों, गैरेजों, कारखानों तथा अन्य प्रतिबंधित और जोखिम भरे स्थानों पर भी काम लिया जाता है! भारतीय समाज में देश के भविष्य के रूप में देखे जाने वाले बच्चों के शोषण की यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 24 में वर्णित 14 वर्ष से कम आयु वाले बच्चे को कारखानों या अन्य किसी जोखिम भरे काम पर नियोजन का प्रतिशोध तथा अनुच्छेद 21(क) के तहत निहित नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार कानून का मुंह चिढ़ा रहा है!</p>
<p style="text-align:justify;">बचपन बचाने के प्रति हम कितने गंभीर हैं, इसकी झलक राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा हाल ही में पेश की गई एक रिपोर्ट से होती है, जिसके मुताबिक 2017 में प्रत्येक दिन बच्चों के खिलाफ हिंसा की 350 वारदातें सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2016-2017 के बीच बाल-अपराध में 20 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं उतर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, हरियाणा और असम जैसे राज्य बच्चों के खिलाफ हिंसा में अन्य राज्यों के मुकाबले आगे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">झारखंड में महज एक साल के भीतर बाल अपराध में 73 फीसद की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इसी समयंतराल में मणिपुर बाल अपराध को 18 फीसद घटाने में सफल रहा है। इससे जाहिर होता है कि बचपन सहेजने का काम बहुत हद तक कागजों पर ही सिमटकर रह गया है। कुछ माह पहले अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के 108वें वार्षिक अधिवेशन में सम्मिलित होने जेनेवा गये केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने बाल श्रम रोकने की दिशा में भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा था कि भारत को बाल श्रम से मुक्त कराने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं और हमें पूरा भरोसा है कि भारत जल्द ही ये लक्ष्य हासिल कर लेगा। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 1.4 मिलियन बच्चों को वापस पुनर्वासित किया जा चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">जाहिर है, बाल श्रम की बेड़ियों में कैद होने के बाद बच्चे समाज की मुख्यधारा से दूर चले जाते हैं और ‘मानव संसाधन’ के रूप में विकसित होने से पूर्व ही राह भटक जाते हैं। देश में बचपन बचाने के लिए आगे आईं कई सामाजिक संगठनों का काम सराहनीय रहा है। ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ चलाकर हजारों बच्चों को नया जीवन देने वाले कैलाश सत्यार्थी को इस कार्य के लिए 2014 में नोबेल पुरस्कार मिलने से काफी उम्मीदें बढ़ी हैं। देश में बाल श्रम की खाई इतनी गहरी हो चुकी है कि इसके संपूर्ण खात्मे के लिए देश को ऐसे हजारों समर्पित कैलाश सत्यार्थी की आवश्यकता है!</p>
<p style="text-align:justify;">देश में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए अब तक ढेर सारे कानूनी उपाय किये गये हैं। समाज की मुख्यधारा से वंचित देश के करोड़ों बच्चों के भविष्य को संवारने और बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में नरेंद्र मोदी सरकार ने तीन साल पहले बाल-श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन)संशोधन कानून-2016 को अमलीजामा पहना चुकी है। बालश्रम रोकथाम अधिनियम-1986 को तीन दशक बाद संशोधित कर इसे सख्त और ताकतवर बनाने की कोशिश की गई। इस कानून को शिक्षा का अधिकार कानून-2009 से जोड़ते हुए कहा गया कि बच्चे अपने स्कूल के समय के बाद पारिवारिक व्यवसाय में घरवालों की मदद कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस कानून में 14 साल से कम उम्र के बच्चों से काम करवाने और 18 साल तक के किशोरों से खतरनाक क्षेत्रों में काम लेने पर रोक का प्रावधान है। कानून के उल्लंघन पर नियोक्ता के साथ-साथ माता-पिता को भी दंडित किया जाना इस कानून की प्रमुख विशेषता रही है। अगर सही मायनों में बाल श्रम उन्मूलन के लिए बनाए गए कानूनों को सतही स्तर पर लागू किया जाता है, तो करोड़ों बच्चों के बचपन को सुरक्षित करने में सफलता मिल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर याद रहे, ‘सर्व शिक्षा अभियान’ की थीम ‘सब पढ़ें, सब बढ़ें’ और छह वर्ष से चौदह वर्ष तक के बच्चों के लिए लाई गई शिक्षा का अधिकार कानून तब तक सार्थक सिद्ध नहीं होगा, जब तक हमारा समाज गरीबी, बेरोजगारी व निरक्षरता के जाल से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता। बालश्रम, बंधुआ मजदूरी, रंपरागत रूप से व्याप्त अशिक्षा, गरीबी और बेरोजगारी जैसे कारक ही तय करते हैं। गौरतलब है कि 1979 में बाल श्रम अध्ययन पर गठित गुरुपाद स्वामी समिति ने अपनी रिपोर्ट में बाल श्रम उन्मूलन के लिए गरीबी दूर करना एकमात्र उपाय बतलाया था। जाहिर है, बाल श्रम के खात्मे से पूर्व सबसे पहले हमें गांवों की उन्नति हेतु बनाए गये कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर उतारना होगा। हर हाथ को काम मिले, हर पेट को भोजन मिले तथा समाज में स्वच्छ, स्वस्थ व सुरक्षित वातावरण का निर्माण हो;तभी जाकर कलंकित करने वाली सामाजिक समस्याएं हमारा पीछा छोड़ेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में सरकार से ज्यादा अभिभावकों का योगदान सर्वोपरि साबित होगा। अभिभावकों से अपेक्षा की जाती है कि वो आर्थिक मजबूरियों को अपने बच्चों पर हावी न होने दें। अपने बच्चे को बेहतर परवरिश देकर उसके शिक्षा तथा स्वास्थ्य की व्यवस्था करें ताकि वह शिक्षित होकर अपने अधिकारों को जान सके तथा राष्ट्र-कर्तव्यों का पालन कर एक सफल नागरिक की भूमिका निभा सके। जिस उम्र में बच्चे को खिलौने और स्लेट-पैंसिल की आवश्यकता होती है, उस कच्ची उम्र में उन्हें ढाबे, होटल, ईंट-भट्ठों या औद्योगिक संयंत्रों पर किसी भी कीमत पर न भेजें। अभिभावक जितने जागरुक होंगे, स्थिति उतनी ही नियंत्रण में होगी। यही बाल श्रम उन्मूलन का मूलमंत्र है।<br />
बाल श्रम पर रोक लगाने के लिए शिक्षा के अधिकार कानून को कारगर बनाना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हर एक बच्चा विद्यालय से जुड़कर ज्ञानार्जन कर रहा है या नहीं, सरकार और समाज को इसकी सुनिश्चितता तय करनी होगी। वे बच्चे जो अनाथ हैं, झुग्गी बस्तियों में रहते हैं या वंचित परिवारों से आते हैं, उनकी शिक्षा तथा सुरक्षा के लिए शहरों में ‘बाल शिक्षण-प्रशिक्षण केंद्र’ नाम से आवासीय विद्यालय की स्थापना की जा सकती है, जहां बच्चे रहकर ना सिर्फ पढ़ाई कर सकें, बल्कि अपनी रुचि और हूनर के अनुसार काम का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सके। बच्चे देश के भविष्य हैं। छोटी उम्र में उनका समाजीकरण जिस प्रकार से होगा, उससे उसका भविष्य और क्रमश: देश का भविष्य तय होगा। हमारी कोशिश बच्चों को एक सुखद बचपन देने की होनी चाहिए। देश के नौनिहालों के बाल्यावस्था को सुरक्षित किये बिना कैसे कोई बच्चा भविष्य में जाकर चाचा नेहरू और कलाम साहब के सपने को साकार कर पाएगा?<br />
<strong><em>-सुधीर कुमार</em></strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Nov 2019 20:55:28 +0530</pubDate>
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