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                <title>Source of Inspiration - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Source of inspiration: सच्चे सतगुुरु जी ने छुड़वाया श्रद्धालु का नशा, दिया स्वस्थ जीवन!</title>
                                    <description><![CDATA[Source of inspiration: जीवोद्धार यात्रा के दौरान पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज श्री गंगानगर में पधारे हुए थे। किसी सेवा संस्था का मुखिया मेहर चंद नामक एक व्यक्ति आप जी के पास आया और सत्संग के दौरान आप जी से प्रेमपूर्वक सेवा मंजूर करवा ली। मेहर चंद के साथ कुछ और लोग भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/true-satguru-ji-freed-the-devotee-from-his-addiction-and-gave-him-a-healthy-life/article-64241"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-11/shah-satnam-singh-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Source of inspiration: जीवोद्धार यात्रा के दौरान पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज श्री गंगानगर में पधारे हुए थे। किसी सेवा संस्था का मुखिया मेहर चंद नामक एक व्यक्ति आप जी के पास आया और सत्संग के दौरान आप जी से प्रेमपूर्वक सेवा मंजूर करवा ली। मेहर चंद के साथ कुछ और लोग भी आए हुए थे। उस समय पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज सत्संग फरमा रहे थे। बिना सेवा लिए ही आप जी ने खुश होकर उन लोगों को एक सौ रूपये दिए। सच्चे फकीर के दर्शन पाकर उन सभी पर गहरा प्रभाव पड़ा। सत्संग के दौरान आप जी ने भारी संख्या में आई हुई साध-संगत को बुराईयों को त्यागने का संदेश देते हुए समझाया, ‘‘फकीरों को दुनिया से कुछ भी लेना नहीं होता। किसी न किसी बहाने हकदार जीवों को काल से बचाते हैं। Shah Satnam Ji</p>
<p style="text-align:justify;">ऐ इन्सान! जे तूं परमेश्वर दा नाम जपें ते खूबसूरत चन्न वरगे सतगुरू को देखें, जे रात नूं तूं ना सोवें, तां तैनू अमर पद्दवी दा खजाना दिस्स पवे। अक्खां खुल जाण। ते तूं उस नूर नूं देख सकें।’’ समस्त साध-संगत पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज का आध्यात्मिक सत्संग सुनकर मंत्रमुग्ध हो रही थी। नाम की बख्शिश के समय श्री मेहर चंद भी अपने कुछ साथियों के साथ नाम-शब्द लेने वालों में आकर बैठ गया। मेहर चंद के मन में प्रश्न उठा कि उसने एक सन्यासी से पहले ही नाम लिया हुआ है। जब नाम-शब्द देने का समय आया तो मेहर चंद को उठाकर बाहर भेज दिया गया, वह बहुत ही निराश हुआ। उसके नाम लेने की तड़प और बढ़ गई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रार्थना करने से मन की मैल धुल गई। तब उसको नाम लेने वाले जीवों में बैठा दिया गया। नाम देते समय सभी को आप जी ने समझाया कि जो मांस खाते हैं उनको मांस का बदला मांस देना पड़ेगा। शराब बिल्कुल नहीं पीएं, ये नर्कों की नानी है। पराई स्त्री को मां तथा बहन समझो। स्त्रियां पराये मर्द को बाप व भाई समझें। अब जो नाम आपको दिया है, उसे जपें। आगे से मांस, शराब, पर-स्त्री, पर-मर्द का परहेज है। भक्त मेहर चंद ने आप जी से अपने घर चरण टिकाने की प्रार्थना की। उसकी प्रार्थना को स्वीकार करते हुए आप जी उसके निवास स्थान पर जा पधारे।</p>
<p style="text-align:justify;">उस समय घर में मेहर चंद की धर्मपत्नी ज्वर से पीड़ित थी। आप जी ने अपने कर-कमलों से उसे एक तरबूज का टुकड़ा खाने को दिया। थोड़ी देर बाद भक्त मेहर चंद की धर्मपत्नी का रोग ठीक हो गया और वह खुशी के साथ साध-संगत की सेवा में लग गई। भक्त ने आप जी को बताया कि मुझे बीड़ी पीने की लत है जो छूट नहीं रही है, आप जी कृपा करें। शहनशाह जी ने सहज रूप से फरमाया कि आपकी लत छूट जाएगी। हुक्म मानकर उसी समय भक्त ने बीड़ी का बंडल तोड़कर फैंक दिया। फिर उसने जीवनभर बीड़ी नहीं पी। Shah Satnam Ji</p>
<p><a title="सचखंड व रूहानियत का अजूबा है शाह सतनाम-शाह मस्तान जी धाम व मानवता भलाई केंद्र, डेरा सच्चा सौदा सरसा" href="http://10.0.0.122:1245/param-pita-shah-satnam-ji-dham-sirsa/">सचखंड व रूहानियत का अजूबा है शाह सतनाम-शाह मस्तान जी धाम व मानवता भलाई केंद्र, डेरा सच्चा सौदा सरसा</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sun, 10 Nov 2024 17:00:05 +0530</pubDate>
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                <title>Source of inspiration: ‘‘यह तो देने वाला फकीर है, लेने वाला नहीं।’’</title>
                                    <description><![CDATA[Source of inspiration: सन् 1958, दिल्ली। एक बार जीवोद्धार यात्रा के दौरान पूजनीय बेपरवाह साँईं शाह मस्ताना जी महाराज दिल्ली पधारे हुए थे। बेपरवाह जी ने कपड़े की खरीददारी करने की इच्छा व्यक्त की। कुछ सेवादारों को साथ लेकर आप जी दिल्ली के चांदनी चौक बाजार में एक दुकान पर गए। उस समय सरसा से भक्त चरण […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/this-is-a-fakir-who-gives-not-a-taker/article-63694"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/mastana-ji-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Source of inspiration: सन् 1958, दिल्ली। एक बार जीवोद्धार यात्रा के दौरान पूजनीय बेपरवाह साँईं शाह मस्ताना जी महाराज दिल्ली पधारे हुए थे। बेपरवाह जी ने कपड़े की खरीददारी करने की इच्छा व्यक्त की। कुछ सेवादारों को साथ लेकर आप जी दिल्ली के चांदनी चौक बाजार में एक दुकान पर गए। उस समय सरसा से भक्त चरण दास भी आप जी के साथ था। दुकान पर पहुंचकर बेपरवाह जी ने गर्म कपड़ा खरीदा। कीमत पूछने पर दुकानदार ने 4000/- रूपये मांगे। बेपरवाह जी ने दुकानदार को फरमाया, ‘‘बेटा, हम किताब के पन्ने पलटेंगे तुम रूपये निकालते रहना तथा गिनते रहना।’’ Shah Mastana Ji</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रकार दुकानदार पुस्तक में से नोट निकालता रहा। जब सौ-सौ के चालीस नोट हो गए तो उसने कहा कि बस। परंतु बेपरवाह जी ने एक पन्ना और पलटा तथा सौ रूपये का वह नोट निकालकर दुकानदार को दे दिया। उसके बाद बेपरवाह जी ने उसको पुस्तक के बाकी पन्ने पलटकर दिखाए परंतु उनमें से अब कुछ नहीं निकला। दुकानदार यह सब देखकर हैरान रह गया।  आश्चर्यचकित होकर दुकानदार यह सोचने लगा कि पैसे कम करवाने की बजाय अधिक दे दिये। ये कैसा फकीर है! आज तक ऐसा कोई भी ग्राहक नहीं देखा जो कम करवाने की बजाय पैसे अधिक दे दे। दुकानदार ने ईमानदारी दिखाते हुए वो सौ रूपये का नोट आपजी को वापिस देना चाहा, परंतु बेपरवाह जी ने लेने से इन्कार कर दिया और फरमाया,</p>
<h3>‘‘हम जो देते हैं, वापिस नहीं लेते”</h3>
<p style="text-align:justify;">‘‘हम जो देते हैं, वापिस नहीं लेते। यह तो देने वाला फकीर है, लेने वाला नहीं।’’ उस दिन दिल्ली में सत्संग का कार्यक्रम था। बेपरवाह जी ने यह कपड़ा सेवादार भाईयों को ‘दातें’ देने के लिए खरीदा था। बातों-बातों में दुकानदार को भी सत्संग के कार्यक्रम के बारे में पता चला। वह आप जी से इतना प्रभावित हुआ कि साथ चलने को तैयार हो गया। उसने उसी समय अपनी दुकान बंद की व आप जी की जीप में बैठ गया। रास्ते में एक खुली छत वाली कार मिली, जिसमें बढ़िया नस्ल के दो सुंदर कुत्ते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">बेपरवाह जी ने उस कार की ओर इशारा करके दुकानदार से कहा, ‘‘देखा भाई! ये कुत्ते अपने पिछले जन्म में बहुत रईस थे। इन्होंने बहुत दान किया था और उसके बदले में इनको ऐसी जगह जन्म मिला कि आदमी इनकी सेवा करते हैं परंतु संत-महापुरूषों के मिलाप के बिना चौरासी नहीं कट सकती।’’ ऐसे रूहानी वचन सुनकर दुकानदार आपजी का दीवाना हो गया तथा सत्संग के बाद उसने ‘नाम-शब्द’ ले लिया। बाद में उसके साथ सैकड़ों लोग आप जी के दर्शन करने के लिए आए और नाम-शब्द लेकर मोक्ष के अधिकारी बने। Shah Mastana Ji</p>
<p><a title="इंसानियत की खातिर मासूम की जिंदगी बचाने को युवा भाई-बहन दे रहे सैंपल" href="http://10.0.0.122:1245/for-the-sake-of-humanity-young-brother-and-sister-are-giving-samples-to-save-the-life-of-an-innocent/">इंसानियत की खातिर मासूम की जिंदगी बचाने को युवा भाई-बहन दे रहे सैंपल</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sat, 26 Oct 2024 12:22:27 +0530</pubDate>
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                <title>सच्चे सतगुरु जी ने डॉक्टरों का भम्र किया दूर</title>
                                    <description><![CDATA[Source of inspiration: एक बार सरसा शहर के कुछ प्रशासनिक अधिकारी व डॉक्टर आपस में मिलकर बातें करने लगे कि डेरा सच्चा सौदा के संत पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज सच्चे फकीर हैं। वहां डेरे में सेवादार बिना आराम किए लम्बे समय तक कठोर मेहनत करते हैं। उन्होंने सलाह की कि बाबा जी से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/the-true-satguru-ji-dispelled-the-misconceptions-of-the-doctors/article-61758"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/saint-dr.-msg-5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Source of inspiration: एक बार सरसा शहर के कुछ प्रशासनिक अधिकारी व डॉक्टर आपस में मिलकर बातें करने लगे कि डेरा सच्चा सौदा के संत पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज सच्चे फकीर हैं। वहां डेरे में सेवादार बिना आराम किए लम्बे समय तक कठोर मेहनत करते हैं। उन्होंने सलाह की कि बाबा जी से इस बारे में पूछा जाए। सभी एकत्रित होकर डेरे में पहुंचे। कुछ सेवादार मकान बनाने की सेवा में जुटे हुए थे। सभी के चेहरे दमक रहे थे और मस्ती में ये पंक्तियां सामूहिक रूप से गुनगुना रहे थे ‘‘धन-धन की आवाज पई आवे, गुरू जी तेरे मंदरां विचों, कोई करे नसीबां वाला सत्संग दो घड़ियां। सच्चा सौदा दी आवाज पई आवे, सत्संग दो घड़ियां।’’ Source of inspiration</p>
<p style="text-align:justify;">थोड़ी देर में ही शहनशाह जी सेवा वाली जगह पर आकर मूढ़े पर विराजमान हो गए। सांई जी के दर्शन पाकर सभी को अपार प्रसन्नता हुई। ‘धन-धन सतगुुरू तेरा ही आसरा’ नारे की आवाज सभी ओर से आने लगी। पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने नारा स्वीकार करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया। सेवादार भाई सतगुरू जी के दर्शन कर दुगुने उत्साह से फिर से सेवा में जुट गए। फिर सरसा शहर से आए हुए अधिकारीगण व डॉक्टर भी आपजी के पास आकर बैठ गए। शहनशाह जी ने पूछा कैसे आए भई! एक डॉक्टर बोला कि सांई जी, कोई बात सुनाओ। आप जी ने फरमाया, ‘‘आपके दिल में जो शंका है, पहले वह बताओ। क्या पूछना चाहते हो?’’ Source of inspiration</p>
<p style="text-align:justify;">डॉक्टर हैरान हुआ और बोला कि सांई जी, यहां सेवादार दिन-रात काम करते हैं और भोजन भी कम लेते हैं और सोते भी बहुत ही कम हैं। डॉक्टरी हिसाब से तो यह अंधे, गूंगे और बहरे भी हो सकते हैं और इनका दिमाग भी खराब हो सकता है। इस पर आप जी ने एक सेवादार को कोई शब्द सुनाने को कहा। वह सेवादार खुश होता हुआ सुरीली आवाज में शब्द बोलने लगा- ‘फु ल्लां वांगू महकणां जे विच संसार दे, कन्डेयां दे नाल बीबा हस के गुजार दे…’ आप जी ने डॉक्टर से पूछा, ‘‘इस सेवादार का दिमाग कैसा लगता है?’’ डॉक्टर बोला यह तो बड़ा ही मस्त है। फिर आप जी ने एक और सेवादार से यह वचन पढ़वाए कि रात को जागना फकीर की खुराक है और यह हमारी जिंदगी का अमृत है, जिसके लिए हम जागते हैं। दिमाग भी उसी का बनाया है, उसी के सहारे हम जी रहे हैं। Source of inspiration</p>
<p style="text-align:justify;">यह देखकर व सुनकर डॉक्टरों व अफसरों का भ्रम दूर हो गया। आप जी का संग करके वे अपने आप को नसीबों वाला समझ रहे थे। आप जी ने सभी पर दृष्टि डालते हुए वचन फरमाए, ‘‘ऐ इन्सान! क्या यह अच्छा नहीं कि तुम अपनी जान अपनी आजादी के लिए अपने सतगुरू के हवाले कर दो। नहीं तो मौत तुम्हारी जान एक दिन जरूर ले जाएगी। तुम खुद ही बताओ कि यह बात अच्छी है या वो।’’ फिर आगे आप जी ने मीठी मुस्कान बिखेरते हुए फरमाया,‘‘सुनो डॉक्टर, यह सब सेवादार कभी भी अंधे नहीं होंगे, यह तो अंधों को आंख देने वाले बन जाएंगे।’’ यह सुनकर वह सभी डॉक्टर व अफसर बहुत ही प्रभावित हुए। उन्हें पता चल गया कि कुल मालिक की कृपा द्वारा ही यहां तो मस्ती व शांति का साम्राज्य है और यहां का काम दिमाग से परे है। Source of inspiration</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="…जब पूज्य गुरू जी के दयालु हृदय में हमदर्दी के झरने फूट पड़े!" href="http://10.0.0.122:1245/when-fountains-of-sympathy-burst-forth-in-the-compassionate-heart-of-revered-guruji/">…जब पूज्य गुरू जी के दयालु हृदय में हमदर्दी के झरने फूट पड़े!</a></p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/inspiration/the-true-satguru-ji-dispelled-the-misconceptions-of-the-doctors/article-61758</link>
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                <pubDate>Tue, 03 Sep 2024 16:06:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Source of Inspiration : देखते ही देखते मृत बच्चे ने आंखें खोल दीं, सच्चे सतगुरू जी ने उसे जीवित कर दिया!</title>
                                    <description><![CDATA[Source of Inspiration : सन् 1957, बुधरवाली, राजस्थान राजस्थान के गांव बुधरवाली में 27 सिंतबर, 1957 की रात को शहनशाह शाह मस्ताना जी सत्संग फरमा रहे थे। काफी संख्या में साध-संगत बड़े प्रेम व मस्ती से सत्संग सुन रही थी। इस गांव का माड़ू राम नामक व्यक्ति मेहनत-मजदूरी कर हक-हलाल की खाने वाला श्रद्धापूर्वक सत्संग […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/the-true-satguru-brought-him-back-to-life/article-60534"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/shah-mastana-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Source of Inspiration : सन् 1957, बुधरवाली, राजस्थान</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान के गांव बुधरवाली में 27 सिंतबर, 1957 की रात को शहनशाह शाह मस्ताना जी सत्संग फरमा रहे थे। काफी संख्या में साध-संगत बड़े प्रेम व मस्ती से सत्संग सुन रही थी। इस गांव का माड़ू राम नामक व्यक्ति मेहनत-मजदूरी कर हक-हलाल की खाने वाला श्रद्धापूर्वक सत्संग सुन रहा था। उसका इकलौता लड़का कुछ समय पहले ही पैदा हुआ था। घर के पड़ोसी द्वारा सत्संग के दौरान माड़ू राम के पास एक संदेश आया कि तेरा लड़का बहुत ही बीमार है। तो माड़ूू राम ने उस आदमी को यह कहकर वापिस भेज दिया कि मेरे लड़के को दवा दिलवा दो। मैं अभी थोड़ी देर में आ रहा हूं, क्योंकि उसे अंदर से आप जी के दर्श-दीदार का सच्चा रस आ रहा था। Shah Mastana Ji</p>
<p style="text-align:justify;">थोड़ी देर बाद फिर से समाचार आया कि तेरा लड़का मर गया है और तुझे तुरंत घर बुलाया गया है। यह सुनकर माडू राम ने उसे यह कहकर फिर से वापिस भेज दिया कि मेरा लड़का तो मर ही गया है तो अब मैं क्या कर सकता हूं? तुम घर चलो और मैं अब पूरा सत्संग सुनकर ही घर आऊंगा। सचमुच ही उसे ईलाही सत्संग का इतना आनंद आ रहा था, जिसे वह किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं था। इकलौते लड़के की मौत की दुखदायी खबर सुनकर भी वह सत्संग से नहीं उठा। सत्संग की समाप्ति पर साध-संगत उठकर अपने-अपने घरों को जाने लगी तो किसी सेवादार भाई ने माड़ू राम के लड़के की मृत्यु की खबर पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज को भी बता दी।</p>
<h3>‘‘माड़ू राम, सुना है तेरा लड़का चल बसा है” | Shah Mastana Ji</h3>
<p style="text-align:justify;">पूरी बात सुनकर पूजनीय दातार जी ने फरमाया, ‘‘माड़ू राम, सुना है तेरा लड़का चल बसा है और तू उठकर अपने घर क्यों नहीं गया?’’ उसने बताया कि बाबा जी, आपके प्रेम में इतना रस आ रहा था कि इसे छोड़कर कैसे चला जाता? मैं इसमें कर ही क्या सकता था? यह तो आप जी की ही अमानत है। आपजी का वचन ही सत्य वचन है। आप जी ने अपनी तवज्जोह (भरपूर दृष्टि) भक्त माड़ू राम पर डालते हुए फरमाया, ‘‘पुट्टर, घबराना नहीं। ‘धन-धन सतगुरू तेरा ही आसरा’ का नारा बोलकर बच्चे को हिला-डुलाकर देख लेना, जल्दबाजी बिल्कुल भी नहीं करना। क्या पता उसके श्वास कहीं रूके हुए हों।’’ सच्चे पातशाह जी का आशीर्वाद प्राप्त करके जब वह अपने घर पहुंचा तो घर में कोहराम मचा हुआ था। लोग तरह-तरह की बातें करने व ताने देने लगे। Shah Mastana Ji</p>
<p style="text-align:justify;">तब तक उसके लड़के को मरे हुए तीन घंटे बीत चुके थे। माड़ू राम अपने लड़के के पास ही बैठकर रोने लगा। तभी उसे शहनशाह जी के ईलाही वचन याद आ गए। वचनानुसार उसने ‘धन-धन सतगुरू तेरा ही आसरा’ का नारा लगाकर बच्चे को हिलाया-डुलाया और बेपरवाह जी के आगे विनती की कि सांईं जी, आप जी हमारे यहां जीवों के उद्धार के लिए पधारे हैं परंतु मेरा यह अभागा लड़का आपजी के दर्शन भी नहीं कर सका। तभी बच्चे की टांग थोड़ी सी हिली। अचानक उसके शरीर में कुछ हरकत महसूस होती देखकर सभी की आंखें उस बच्चे के शरीर पर टिक गई। धीरे-धीरे लड़के का रंग भी बदलने लगा और थोड़ी देर के बाद सभी के देखते ही देखते बच्चे ने आंखें खोल दीं।</p>
<h3>सभी ने प्रसन्नतापूर्वक ‘धन-धन सतगुरू तेरा ही आसरा’ का नारा लगाया</h3>
<p style="text-align:justify;">अपने सतगुरू जी की इस रहमत को प्रत्यक्ष में देख सभी ने प्रसन्नतापूर्वक ‘धन-धन सतगुरू तेरा ही आसरा’ का नारा लगाया तथा मुर्शिद-ए-कामिल का धन्यवाद करने लगे। गांव के घर-घर में यह खबर फैल चुकी थी। चारों और आपजी की महिमा हो रही थी। सुबह-सुबह ही माड़Þू राम अपने पूरे परिजनों एवं कई गांववासियों के साथ प्यारे सतगुरू जी का धन्यवाद करने आश्रम में आ गया। भगत तो खुशी के मारे बोल भी नहीं पा रहा था। आप जी ने फरमाया, ‘‘पुट्टर कैसे आए हो?’’ सेवादारों ने बताया कि बाबा जी, माड़ू राम का लड़का रात को शरीर त्याग गया था। आप जी की दया-मेहर रहमत से अब वह फिर से जिंदा हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ये आपके दर्शनों के लिए आए हैं। अंतर्यामी दातार जी ने फरमाया, ‘‘यह सब झूठ है। मरा हुआ भी कभी दोबारा जिंदा हो जाता है?’’ माड़ू राम के साथ आए सभी भक्तों ने बताया कि लड़का आपजी की रहमत से ही जिंदा हुआ है। इस पर पूज्य शहनशाह जी ने मुस्कुराते हुए फरमाया, ‘‘सभी की एक ही राय है? पुट्टर, तेरी सेवा व सच्ची भक्ति के कारण ही सच्चे पातशाह दाता सावण शाह जी महाराज जी ने तेरे बच्चे को जिंदगी बख्शी है। इसका यह नया जन्म हुआ है। अब असीं इसका नाम गंगा राम रखते हैं।’’ इस अद्भुत करिश्में को देखकर सारी साध-संगत बहुत ही खुश हुई। Shah Mastana Ji</p>
<p><a title="Maharashtra : महाराष्ट्र, ब्लॉक धनौरा के गणेश इन्सां की मानवता भलाई कार्य में गजब की शिद्दत!" href="http://10.0.0.122:1245/ganesh-insan-of-block-dhanaura-maharashtra-has-amazing-dedication-towards-his-humanitarian-work/">Maharashtra : महाराष्ट्र, ब्लॉक धनौरा के गणेश इन्सां की मानवता भलाई कार्य में गजब की शिद्दत!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/the-true-satguru-brought-him-back-to-life/article-60534</link>
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                <pubDate>Wed, 31 Jul 2024 11:13:50 +0530</pubDate>
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                <title>Source of inspiration: नाम दान लेते ही यूं बदली तकदीर!</title>
                                    <description><![CDATA[Source of inspiration: प्रमुख दास गांव खजूरी (फतेहाबाद) में रहता था। उसका पहला नाम राम गोपाल शर्मा था। सन् 1952 में परम पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने पहली बार जब महमदपुर रोही में सत्संग फरमाया था तो गांव में सबसे पहले राम गोपाल ने नाम-दान प्राप्त किया था। पूजनीय शहनशाह जी ने अपार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/this-is-how-luck-changed-after-receiving-naam-daan/article-58063"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/mahamadpur-rohi-dera.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Source of inspiration: प्रमुख दास गांव खजूरी (फतेहाबाद) में रहता था। उसका पहला नाम राम गोपाल शर्मा था। सन् 1952 में परम पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने पहली बार जब महमदपुर रोही में सत्संग फरमाया था तो गांव में सबसे पहले राम गोपाल ने नाम-दान प्राप्त किया था। पूजनीय शहनशाह जी ने अपार रहमत करते हुए राम गोपाल का नाम प्रमुख दास रख दिया था। Shah Mastana Ji</p>
<p style="text-align:justify;">राम गोपाल के दो भाई थे। वह सबसे छोटा था। उसने बताया कि उन दोनों के यहां तो अच्छी पैदावार थी परंतु मेरे घर में गरीबी थी। नाम दान मिलने के बाद वह लगभग आश्रम में ही सेवा करता रहता था। पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज जहां भी सत्संग करने के लिए जाते वह भी साथ ही चला जाता। घर पर तो कभी-कभी ही आया करता था। घर में कई बार तो इतनी तंगी आ जाती थी कि घर में आटा तक नहीं होता था और मुश्किल से गुजारा करना पड़ता था। शहनशाह शाह मस्ताना जी महाराज, डेरा सच्चा सौदा अमरपुरा धाम, महमदपुर रोही में सत्संग करने के लिए पधारे। भक्त प्रमुख दास भी आप जी के साथ था। Shah Mastana Ji</p>
<h3>घट-घट के जाननहार दयालु दातार जी सब कुछ समझ गए | Shah Mastana Ji</h3>
<p style="text-align:justify;">घर में जबरदस्त गरीबी थी। खाने को कुछ भी नहीं था। भक्त के परिवार वाले सभी सदस्य भूखे बैठे हुए थे। इतने में भक्त का एक बड़ा भाई घर पर आया और परिवारजनों को इस प्रकार भूख के कारण उदास बैठे देखकर ताना मारते हुए कहने लगा कि तुम्हारे बाप ने और बाबे (पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज) ने बाजरी इक्ट्ठी कर रखी है जाओ और लाद लाओ। बच्चों ने ताऊ की इस बात को सच समझा और वे ऊंटनी लेकर डेरा सच्चा सौदा अमरपुरा धाम में पहुंच गए। बच्चों को क्या पता था कि उनके ताऊ ने उनसे मजाक करते हुए ताना मारा है। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज स्टेज पर विराजमान थे। Shah Mastana Ji</p>
<p style="text-align:justify;">रूहानी सत्संग चल रहा था और ऊंटनी सहित अपने बच्चों को दरबार में आता देखकर प्रमुख दास ने उन्हें बाहर ही रोकते हुए पूछा कि वे यहां पर किस लिए आए हैं? इस पर बच्चों ने अपनी ताऊ वाली सारी बात ज्यों की त्यों ही बता दी। यह सुनकर उसको बहुत दु:ख पहुंचा परंतु उसने बच्चों को बहुत ही प्यार से समझाया कि बैठकर सत्संग सुन लें। सत्संग के बाद तुम्हारे साथ ही गांव को चलूंगा। Shah Mastana Ji</p>
<h3>वचन सुनते ही प्रमुख दास वैराग्य में आ गया | Shah Mastana Ji</h3>
<p style="text-align:justify;">घट-घट के जाननहार दयालु दातार जी सब कुछ समझ गए। प्रमुख दास वापिस शहनशाह जी के पास आया तो पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने पूछा, ‘‘प्रमुख दास! ये मुंडे (लड़के) किस लिए आए हैं?’’ उसने सच्चाई को छुपाते हुए प्रार्थना की कि सार्इं जी! यह पास के गांव बड़ोपल से आए हैं और अपने गांव जा रहे हैं जी। इस पर दातार जी ने फरमाया , ‘‘भई! तू गरीब मस्ताने से क्या छुपा रहा है, सच-सच बता क्या कहा है उन्होंने?’’ अपने मुर्शिद जी के पवित्र मुख ये यह वचन सुनते ही प्रमुख दास वैराग्य में आ गया और उसने सारी बात ज्यों की त्यों ही बयान कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पर पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने उन्हें अपना भरपूर प्यार बख्शते हुए पवित्र मुख से वचन फरमाया, ‘‘अच्छा! तो उन लोगों ने गरीब मस्ताने को ताना मारा है। जाओ पुट्टर! ऐसा बोलने वाले को कह देना कि इन लड़कों की गाड़ियां चलेंगी। अच्छा कारोबार होगा।’’ इसके साथ ही सच्चे पातशाह जी ने उन्हें नोटों के हार पहनाए और अपनी अलौकिक खुशियां प्रदान की। अपने मुर्शिद के ऐसे इलाही प्रेम व बेपरवाही खुशी को पाकर भक्त व उसके लड़के दाता जी के हजूरी में खूब नाचे। इस प्रकार अपने मुर्शिद का भरपूर प्यार प्राप्त कर वे अपने गांव आ गए।</p>
<p style="text-align:justify;">बस! फिर क्या था? उसी दिन से ही उनके दिन फिर गए। कुल-मालिक की उन पर ऐसी अपार रहमत हुुई कि उन्होंने कारोबार शुरू कर लिया, दुकानें खोल ली। खूब आमदनी होने लगी। कारोबार दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही गया। प्यारे मुर्शिद जी की कृपा से आज उनके घर में उपरोक्त वचनानुसार गाड़ियां भी हैं और अच्छा कारोबार भी है। Shah Mastana Ji</p>
<p><a title="Sangaria : वरदान सिद्ध हो रही है मानसिक रोगियों के लिए ‘इंसानियत मुहिम’" href="http://10.0.0.122:1245/insaniyat-campaign-is-proving-to-be-a-boon-for-mentally-ill-patients/">Sangaria : वरदान सिद्ध हो रही है मानसिक रोगियों के लिए ‘इंसानियत मुहिम’</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 May 2024 16:31:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Source of inspiration: &amp;#8221;चौधरी बस पर नहीं जाना। भैंस के साथ जाना है।’’</title>
                                    <description><![CDATA[Source of inspiration: हंसराज पुत्र श्री जीवन राम गांव कोटली, जिला सरसा ने बताया कि मेरे बापू श्री जीवन राम जी अक्सर ही डेरा सच्चा सौदा सरसा में जाया करते थे। सन् 1959 की बात है कि वह पूजनीय शहनशाह मस्ताना जी महाराज के दर्शन करने के लिए डेरा सच्चा सौदा सरसा में आ गए। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/precious-words-of-shah-satnam-singh-ji-maharaj/article-57798"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/shah-satnam-ji1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Source of inspiration: हंसराज पुत्र श्री जीवन राम गांव कोटली, जिला सरसा ने बताया कि मेरे बापू श्री जीवन राम जी अक्सर ही डेरा सच्चा सौदा सरसा में जाया करते थे। सन् 1959 की बात है कि वह पूजनीय शहनशाह मस्ताना जी महाराज के दर्शन करने के लिए डेरा सच्चा सौदा सरसा में आ गए। उन्होंने अगले दिन ही अपने घर वापिस लौटना था। उस दिन, रात के समय मजलिस थी। जब आप जी मजलिस की समाप्ति के बाद तेरावास में जाने लगे तो मेरे बापू जी ने आप जी के चरणों में अर्ज कर दी कि सांई जी! मैने पहली बस से घर जाना है। Shah Satnam Ji</p>
<p style="text-align:justify;">मुझे जरूरी काम है। आप जी कुछ पल रूककर बोले, ‘‘पुट्टर बस पर नहीं जाना। तूने भैंस लेकर जाना है। एक सेवादार को साथ ले जा। वह तेरे साथ भैंस तेरे घर पहुुंचा देगा।’’ शहनशाह जी ने आगे फरमाया, ‘‘भैंस तुम्हें तंग न करे। इसलिए दो आदमी साथ ले जाना।’’ दो आदमी साथ जाने के लिए तैयार हो गए। मेरे बापू जी के मन में ख्याल आया कि जब दो आदमी भैंस के साथ जा रहे हैं तो मैंने साथ जाकर क्या करना है। Shah Satnam Ji</p>
<h3>फिर मेरा बापू भैंस लेकर उन दोनों के साथ चल पड़ा | Shah Satnam Ji</h3>
<p style="text-align:justify;">मेरे बापू ने सेवादार को यह कह दिया कि तुम भैंस लेकर आ जाना और खुद बस पकड़ने के लिए बस स्टैंड की तरफ चल पड़े। जब पूजनीय शहनशाह मस्ताना जी महाराज को इस बात को पता चला तो उन्होंने मेरे बापू के पीछे एक आदमी भेजकर उन्हें वापिस बुला लिया। सतगुरू जी ने मेरे बापू जी को हुक्म फरमाया,‘‘हमनें तुम्हें बोला है, चौधरी बस पर नहीं जाना। भैंस के साथ जाना है।’’ फिर मेरा बापू भैंस लेकर उन दोनों के साथ चल पड़ा। Shah Satnam Ji</p>
<p style="text-align:justify;">वे तीनों भैंस लेकर जब सिकंदरपुर के बराबर पहुंचे तो वही हिसार जाने वाली बस हमसे थोड़ा पीछे दुर्घटनाग्रस्त हो गई। बस का बजरी से भरे ट्रक के साथ भयानक हादसा हो गया। कई लोग मौके पर ही मर गए। जानमाल का अत्यंत नुक्सान हुआ। इस प्रकार सच्चे सतगुरू जी ने अपने वचनों के द्वारा मेरे बापू को बस पर चढ़ने से रोका तथा उनकी जान बचाई। Shah Satnam Ji</p>
<p><a title="Shah Mastana Ji: अपने भक्त की सुनीं पुकार, बख्शी ‘खुशियाँ बेशुमार’!" href="http://10.0.0.122:1245/precious-words-of-shah-mastana-ji-listened-to-the-call-of-the-devotee-gave-immense-happiness/">Shah Mastana Ji: अपने भक्त की सुनीं पुकार, बख्शी ‘खुशियाँ बेशुमार’!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/precious-words-of-shah-satnam-singh-ji-maharaj/article-57798</link>
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                <pubDate>Wed, 22 May 2024 10:31:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>‘‘बेटा, बहुत भयानक कर्म था, सूली से सूल हो गया। यह साध-संगत की सेवा का ही फल है’’</title>
                                    <description><![CDATA[Source of inspiration : प्रेमी जंगीर सिंह निवासी लोहाखेड़ा, फतेहाबाद सतगुरु की साक्षात रहमत को इस प्रकार बयां करते हैं। ये बात 10 अक्तूबर, 1988 की है। मैं बिजली बोर्ड में लाइनमैन के पद पर नियुक्त था। मुझे मासिक सत्संग पर आश्रम में जाना था, परंतु छुट्टी न मिलने के कारण नहीं जा सका। उसी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/lover-jangir-singh-described-the-true-mercy-of-satguru-in-this-way/article-57246"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/shah-satnam-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Source of inspiration : प्रेमी जंगीर सिंह निवासी लोहाखेड़ा, फतेहाबाद सतगुरु की साक्षात रहमत को इस प्रकार बयां करते हैं। ये बात 10 अक्तूबर, 1988 की है। मैं बिजली बोर्ड में लाइनमैन के पद पर नियुक्त था। मुझे मासिक सत्संग पर आश्रम में जाना था, परंतु छुट्टी न मिलने के कारण नहीं जा सका। उसी शाम को मैं सांगला गाँव में ग्यारह हजार वोल्टेज की बिजली लाइन पर काम कर रहा था। Shah Satnam Ji</p>
<p style="text-align:justify;">अचानक दुर्घटना हुई और बिजली की तार मेरे कन्धे से छू गई और कपड़ों में आग लग गई, जिससे मेरा शरीर बुरी तरह झुलस गया। मैं दो दिन तक अस्पताल में बेहोश रहा। मेरी हालत बेहद गंभीर थी। इस सारी दुर्घटना की जानकारी मेरे रिश्तेदार पुरुषोत्तम लाल के माध्यम से पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज तक पहुँची। पूजनीय परम पिता जी ने पुरुषोत्तम लाल को प्रसाद देते हुए फरमाया, ‘‘यह प्रसाद जंगीर सिंह को जाकर खिला देना।’’ उन्होंने वह प्रसाद लाकर मुझे दे दिया। Shah Satnam Ji</p>
<p style="text-align:justify;">मैंने उस प्रसाद को ग्रहण किया और लगभग 20 दिन में मैं बिल्कुल स्वस्थ हो गया, जबकि डॉक्टरों के अनुसार मुझे ठीक होने में लगभग एक वर्ष लगना था। मैं साध-संगत के सहयोग से मासिक सत्संग में पहुँचा तो पूजनीय परम पिता जी ने वचन फरमाए, ‘‘बेटा, बहुत भयानक कर्म था, सूली से सूल हो गया। यह साध-संगत की सेवा का ही फल है।’’ इस प्रकार पूजनीय परम पिता जी ने मुझे नई जिन्दगी बख़्शी। Shah Satnam Ji</p>
<p><a title="Nasa: नए अंतरिक्ष मिशन को लेकर नासा की बड़ी अपडेट!" href="http://10.0.0.122:1245/astronaut-sunita-williams-new-space-mission-postponed/">Nasa: नए अंतरिक्ष मिशन को लेकर नासा की बड़ी अपडेट!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 May 2024 11:55:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>साईं जी ने मीठे वचनों से आलोचना करने वालों को भगत बनाया!</title>
                                    <description><![CDATA[डेरा सच्चा सौदा सतलोक पुर धाम नेजिया खेड़ा आश्रम सरसा से चौपटा सड़क पर स्थित है। जो इस गांव की शान है। एक बार की बात है। उन दिनों सरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम का मुख्य दरवाजा पूर्व दिशा की ओर से जाती पुरानी सड़क पर था। एक दिन पूजनीय बेपरवाह सांई शाह मस्ताना […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/sai-ji-converted-his-critics-into-devotees-with-sweet-words/article-56714"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/shah-mastana-ji-maharaj-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा सतलोक पुर धाम नेजिया खेड़ा आश्रम सरसा से चौपटा सड़क पर स्थित है। जो इस गांव की शान है। एक बार की बात है। उन दिनों सरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम का मुख्य दरवाजा पूर्व दिशा की ओर से जाती पुरानी सड़क पर था। एक दिन पूजनीय बेपरवाह सांई शाह मस्ताना जी महाराज आश्रम के अंदर मुख्य द्वार के साथ की एक दीवार के पास धूप में विराजमान थे। लोगों के आने जाने का रास्ता भी उसी ओर ही था। वहां से इसी गांव नेजिया खेड़ा के कुछ व्यक्ति ऊंटों पर सवार होकर वहां से गुजरते समय अज्ञानतावश आपस में पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज के बारे में कुछ अनाप-शनाप बातेें करते हुए जा रहे थे जैसे ये सच्चे सौदे वाला कोई जासूस है, यह पाखण्ड करते होंगे, पता नहीं इनके पास इनता धन कहां से आता है जो लोगों में बांटते रहते हैं इत्यादि। Shah Mastana Ji</p>
<p style="text-align:justify;">साईं जी ने उनकी ये बातें साफ-साफ सुन ली और उन सबको बुलवाने के लिए एक सेवादार को भेज दिया। उनके आने पर उनसे पूछा कि वे सच्चा सौदा के बारे में क्या कह रह थे? पहले तो वो लोग डर गए कि उन्होंने बिना जांच पड़ताल के पूज्य गुरू जी के बारे में काफी कुछ बोल दिया। लेकिन पूजनीय बेपरवाह जी उनके साथ बड़े ही सहजता के साथ बातें करने लगे। आप जी ने उनका हौसला बढ़ाया और बेशुमार प्यार दिया। फिर उन्होंने सारी बातें ज्यों की त्यों दोहरा दीं। वे बहुत ही शर्मिंदा हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय बेपरवाह जी ने उनसे पूछा कि आप कभी सच्चा सौदा आए हैं? या कभी सत्संग सुना है? वे कहने लगे कि हम आज यहां पर पहली बार ही आएं हैं। पूज्य बेपरवाह जी ने बड़े ही प्यार से उनसे कहा कि जब आप यहां कभी आए ही नहीं, कभी सत्संग सुना ही नहीं तो आप को क्या पता कि यहां पाखण्ड हैं? पूजनीय दातार ने उनको समझाया, ‘‘भाई! हमें चाहे आप कुछ भी कहो लेकिन जीवन में हर बात हमेशा सोच समझकर बोलनी चाहिए। बिना देखे-परखे किसी को भी बुरा नहीं कहना चाहिए। तुम्हारा भी कोई कसूर नहीं। यह सब मन का काम है, जो सबको गुमराह करता है और संतों की बातें सुनने नहीं देता। न हम कोई चोर हैं और न ही ठग हैं। Shah Mastana Ji</p>
<p style="text-align:justify;">हम तो अंदर वाले जिंदाराम की बात बताते हैं कि तुम्हारा सतगुरू तुम्हारे अंदर ही बैठा है, उसको पकड़ो। उसने ही यह दुर्लभ मनुष्य जन्म दिया है। उसका शुक्राना अदा करो व उसे हमेशा याद करो।’’ इसके बाद पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने सभी को बूंदी का प्रशाद दिया। प्रशाद रूपी अमृत जैसे ही उनके अंदर गया तो वह अर्ज करने लगे कि बाबा जी! बड़ा आनंद आया, बहुत शांति मिली है। हमारा तो यहां जाने का दिल ही नहीं कर रहा है। आप जी ने फरमाया, ‘‘पुट्टर! सत्संग पर आना फिर तुम्हें नाम-शब्द देंगे। जिसका जाप सुखों की खान है।’’ रूहानी संत से भरपूर प्यार पाकर उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने बहुत ही पश्चाताप किया कि हम ईश्वरीय स्वरूप गुरू को पहचान न सके। ये तो स्वयं ही भगवान के अवतार हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन आप जी ने सत् ब्रह्मचारी सेवादार दादू बागड़ी को अपने पास बुलाकर फरमाया कि वैसे तो पुट्टर! हमें सरसा का ये एक ही आश्रम काफी है लेकिन जहां आश्रम बनाया जाता है वहां सतगुरू का कोई न कोई राज जरूर होता है। इसरार सबकुछ जानता है। वहां पुरानी संस्कारी रूहें होती हैं और उनको ईश्वर अल्लाह से जोड़ना होता है इसीलिए वहां डेरा बनाया जाता है। इसके साथ ही पूजनीय बेपरवाह जी ने दादू जी व एक अन्य भक्त जो नेजिया में राम नाम की चर्चा करने, भजनों शब्दों आदि द्वारा मालिक का यश गाने के लिए भेज दिया। Shah Mastana Ji</p>
<p style="text-align:justify;">अपने मुर्शिद-कामिल का आशीर्वाद लेकर नेजिया खेड़ा गांव में पहले दिन उन्होंने नंबरदार जोत राम के घर नामचर्चा द्वारा मालिक का गुणगान गाया और दूसरे दिन की नामचर्चा तेजा राम नंबरदार के घर की। लोग मालिक के नाम की चर्चा से बहुत ही प्रभावित हुए। उन्होंने आपस में राय बनाकर अपने गांव में आश्रम बनाने की इच्छा जाहिर की। अगले ही दिन गांव के कुछ मुखिया लोग डेरा सच्चा सौदा सरसा में आप जी से मिले। आप जी ने संगत को आशीर्वाद देते हुए वचन फरमाया,‘‘वरी! सतगुरू स्वयं तुम्हें यहां लेकर आया है और तुमसे धन धन सतगुरू तेरा ही आसरा का नारा बुलवाया है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी ने नेजिया की संगत को अपने अमृतमयी वचनों द्वारा खूब प्यार दिया। सतगुरू के प्यार ने ऐसा रंग दिखाया कि जो कभी आश्रम की तरफ से मुंह फेरकर निकलते थे, वो भी मस्ती में नाच रहे थे। साध-संगत ने पूजनीय गुरु जी के पवित्र चरणों में अपने गांव में आश्रम बनाने के लिए अर्ज की। पूज्य बेपरवाह जी ने फरमाया, ‘‘वरी! पहले आप जगह तलाशो वहीं सत्संग करेंगे।’’ साध-संगत ने समस्त गांव की रजामंदी से 10 कनाल जगह डेरा सच्चा सौदा के लिए चुन ली। Shah Mastana Ji</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य बेपरवाह जी की आज्ञा पाकर आश्रम का निर्माण कार्य शुरू कर दिया। मात्र 8-10 दिनों में कच्ची ईटों से तेरावास, दो कमरे व कांटेदार झाड़ियां लगाकर आश्रम की चारदीवारी बनाई गई। आश्रम का निर्माण निश्चित होने के उपरांत पूजनीय बेपरवाह जी ने इस आश्रम का नाम ‘डेरा सच्चा सौदा सतलोकपुर धाम’ रखा और साथ ही 28-29 दिसंबर का सत्संग कर कई नामाभिलाषी जीवों को नाम-दान प्रदान किया।</p>
<p><a title="Pink Full Moon: आज रात है गुलाबी पूर्णिमा, गुलाबी दिखेगा चंद्रमा?" href="http://10.0.0.122:1245/today-aprils-pink-full-moon/">Pink Full Moon: आज रात है गुलाबी पूर्णिमा, गुलाबी दिखेगा चंद्रमा?</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
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                <pubDate>Tue, 23 Apr 2024 21:12:21 +0530</pubDate>
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                <title>Source of Inspiration: सतलोक को उड़ान: यूं ओड़ निभा जाते हैं सतगुरु के प्यारे शिष्य?</title>
                                    <description><![CDATA[Source of Inspiration एक बार गांव चूनावढ़ (राजस्थान) में सुबह का सत्संग था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज (Shah Satnam Ji Maharaj) शाही स्टेज पर आकर विराजमान हो गए। पूजनीय परम पिता जी की आज्ञा से भाई हाथी राम को शब्द बोलने का समय दिया गया। जैसे ही हाथी राम ने नारा बोला […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/flight-to-satlok-this-is-how-satgurus-beloved-disciples-leave-their-bodies/article-56420"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/shah-satnam-singh-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Source of Inspiration एक बार गांव चूनावढ़ (राजस्थान) में सुबह का सत्संग था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज (Shah Satnam Ji Maharaj) शाही स्टेज पर आकर विराजमान हो गए। पूजनीय परम पिता जी की आज्ञा से भाई हाथी राम को शब्द बोलने का समय दिया गया। जैसे ही हाथी राम ने नारा बोला तो पूजनीय परम पिता जी फरमाने लगे, ‘‘हाथी राम, आज तू अपनी आप बीती सुना।’’ वह अपनी आप बीती सुनाने लगा। उसने कहा, ‘‘पिता जी, शुरू में हम बहुत ही गरीब थे। Source of Inspiration</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज से नाम-दान लेने के बाद हमारे घर में बरकतें होने लगी और अब आपकी मेहर से हमारे पास सबकुछ है।’’ फिर पूजनीय परम पिता जी साध-संगत को बताने लगे, ‘‘इसकी अब अस्सी साल उम्र है अभी भी इसमें पूरा दमखम है। जिस प्रकार इस उम्र में यह उछल-उछलकर नाचता है, यह मालिक की कृपा ही तो है।’’ इसके बाद शाम को श्रीगंगानगर में सत्संग था। वहां पर श्री मेहर चंद के घर में पूजनीय परम पिता जी का उतारा था। सत्संग में पूजनीय परम पिता जी शाही स्टेज पर विराजमान हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्ञानी दलीप सिंह ने हारमोनियम पर एक नाचने वाली धुन लगा दी। हाथी राम खूब नाचा। नाचते-नाचते उसका चेहरा लाल हो गया। फिर जैसे ही धुन बंद हुई, हाथी राम अपने दोनों हाथों से स्टेज का सहारा लेकर खड़ा रहा। पूजनीय परम पिता जी ने सेवादारों को उसे सहारा देकर बैठाने का इशारा किया। शब्द की धुन के साथ जब वह नाचने के लिए उठने की कोशिश करता तो उसे फिर से बैठा दिया जाता। हाथी राम पूजनीय परम पिता जी को एकटक देख रहा था। उसने अपनी टांगें सीधी कर ली और आंखें पूजनीय परम पिता जी को देखते-देखते एक जगह पर टिक गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उसकी आत्मा अपना शरीर छोड़कर पूजनीय परम पिता जी की गोद में बैठकर सचखंड के लिए उड़ान भर चुकी थी। उसे देखकर पूजनीय परम पिता जी ने सेवादारों को फरमाया, ‘‘उसे किसी डॉक्टर के पास ले जाओ।’’ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दौरान सत्संग चलता रहा। साध-संगत को आभास तक नहीं हुआ कि हाथी राम ने चोला छोड़ दिया है। इस प्रकार मुर्शिद अपने भक्तों को बिना कोई कष्ट दिए ही इस भवसागर से पार कर देते हैं। Source of Inspiration</p>
<p style="text-align:right;"><strong>श्री जगतार सिंह, रामगढ़ (पंंजाब)</strong></p>
<p><a title="मुर्शिद का दर: ‘खैरा’ को मिली दया-मेहर की खैर" href="http://10.0.0.122:1245/murshid-ka-dar-khaira-got-the-bounty-of-mercy/">मुर्शिद का दर: ‘खैरा’ को मिली दया-मेहर की खैर</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Apr 2024 15:39:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मुर्शिद का दर: ‘खैरा’ को मिली दया-मेहर की खैर</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा से 35 किलोमीटर दूर सरसा-फतेहाबाद सड़क पर डिंग मोड़ से सरदूलगढ़ लिंक रोड पर स्थित है। गाँव खैरा खुर्द के भक्त दल्लू राम, डॉ. सम्पत राम तथा माता मूली देवी (सरपंच रामेश्वर दास की माता) डेरा सच्चा सौदा सरसा में मासिक सत्संग पर पहुँचे। सत्संग सुना और पूजनीय बेपरवाह मस्ताना जी महाराज के आगे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/murshid-ka-dar-khaira-got-the-bounty-of-mercy/article-56212"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/inspiration-dss.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सरसा से 35 किलोमीटर दूर सरसा-फतेहाबाद सड़क पर डिंग मोड़ से सरदूलगढ़ लिंक रोड पर स्थित है। गाँव खैरा खुर्द के भक्त दल्लू राम, डॉ. सम्पत राम तथा माता मूली देवी (सरपंच रामेश्वर दास की माता) डेरा सच्चा सौदा सरसा में मासिक सत्संग पर पहुँचे। सत्संग सुना और पूजनीय बेपरवाह मस्ताना जी महाराज के आगे अपने गाँव खैरा खुर्द में सत्संग करने के लिए विनती की। उनकी सच्ची लगन को देखकर आप जी ने उनके गाँव में सत्संग मंजूर कर दी। तीसरे दिन शहनशाह मस्ताना जी महाराज सत्संग करने के लिए खैरा खुर्द पधारे। गाँव वालों ने सच्चे सतगुरु जी का अपने गाँव आने पर गर्मजोशी से स्वागत किया। बेपरवाह जी का उतारा (पड़ाव) भक्त रामेश्वर दास के घर में था। Source of Inspiration</p>
<p style="text-align:justify;">रात्रि को गाँव की चौपाल में चौधरी गणपत राम के मकान के आगे बड़ी धूमधाम से सत्संग हुआ। जिन-जिन कविराजों ने शब्द बोला, उनको शहनशाह जी ने नोटों के हार पहनाए। फिर अगले दिन शहनशाह जी ने नाम-शब्द दिया। भक्तों ने विनती की, साईं जी! यहाँ आश्रम बनाओ। इस पर परम दयालु सतगुरु जी ने फरमाया, ‘भई! कल देखेंगे।’ गाँव के पास आश्रम के लिए जगह पसंद कर ली गई। गांव के भक्तों ने आश्रम के लिए जगह दिखाते हुए पूज्य मस्ताना जी महाराज के चरणों में अर्ज की कि यहाँ आश्रम बनाओ।</p>
<h3>डेरे का नाम ‘हरिपुरा’ धाम रखो। यह हरा-भरा ही रहेगा</h3>
<p style="text-align:justify;">जगह देखकर पूज्य शहनशाह जी ने फरमाया, ‘यहाँ आश्रम नहीं बनाते, यहाँ काल का बहुत जोर है।’ किसी भक्त ने अर्ज की कि साईं जी, आपके होते हुए काल हमारा क्या कर सकता है। इस पर बेपरवाह जी ने फरमाया, ‘यहाँ काल और दयाल की टक्कर होगी पर जीत दयाल की ही होगी। अगर तुम बनाना ही चाहते हो तो इस डेरे का नाम ‘हरिपुरा’ धाम रखो। यह हरा-भरा ही रहेगा। Source of Inspiration</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य साईं जी ने आगे फरमाया, ‘असीं तुम्हें एक बहुत कीमती बात बताते हैं। तीसरी बॉडी गुप्त है। जब वह ताकत आएगी हजारों गुणा संगत हो जाएगी। अनेक आश्रम बनेंगे।’ आश्रम बनाने की मंजूरी देते हुए पूजनीय बेपरवाह जी ने वचन फरमाया, ‘यहाँ तीन किस्म के वृक्ष लगाना-बड़, पीपल व नीम। यहाँ एक डिग्गी भी बनाना और इन वृक्षों को उस में से पानी दे दिया करना। हर किसी को सुमिरन, हक-हलाल की कमाई एवं मानवता की सेवा करना जरूरी है।’</p>
<p style="text-align:justify;">रोजाना की तरह अगले दिन भी सुबह के समय सोहणे सतगुरु जी बाहर घूमते हुए नहर के पार चले गए व साध-संगत को हुक्म फरमाया, ‘वापिस आकर आश्रम में सत्संग करेंगे।’ गाँव में सत्संग का ढिंढोरा पिटवा दिया गया। वापिस आकर शहनशाह जी ने सत्संग शुरू कर दिया। सत्संग के बाद साध-संगत को हुक्म फरमाया, ‘वृक्ष लगाओ, डिग्गी खोदो और डेरे की सीमा पर जो लकीर खींची है, वहाँ कांटेदार झाड़ियों की बाड़ लगा दो। खैरा खुर्द की साध-संगत ने डिग्गी खोद ली, वृक्ष भी लगा दिए और काँटेदार झाड़ियों की बाड़ लगा दी। पहले गुफा बनाई फिर चार कमरे और साथ में एक रसोई भी बना दी। Source of Inspiration</p>
<h3>शाह मस्ताना जी महाराज ने नोट बांटे व नामशब्द से अनेकों रूहों का उद्धार किया</h3>
<p style="text-align:justify;">जब आश्रम बनकर तैयार हो गया तो गांव के सत्संगी डेरा सच्चा सौदा सरसा में सत्संग में आए व पूजनीय साईं शाह मस्ताना जी महाराज के चरणों में अपने गांव में सत्संग करने के लिए अर्ज की। फिर सत्संग मंजूर कर दिया गया। आप जी ने यह सत्संग बहुत ही धूमधाम से दरबार में किया। इसी सत्संग में पूजनीय साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने कपड़े व अपनी खाकी पोटली में से नोट निकालकर बांटे व नामशब्द प्रदान करते हुए अनेकों रूहों का उद्धार किया। सन् 1990 में सारी साध-संगत इक्ट्ठी होकर डेरा सच्चा सौदा सरसा पहुंची। साध-संगत ने पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के चरणों में अर्ज की कि पिता जी! दरबार में पक्के मकान बनाए जाएं। परम दयालु दातार जी ने मंजूरी दे दी।</p>
<p style="text-align:justify;">कच्चा मकार गिराकर पक्के बनाने शुरू कर दिए गए। चार कमरे पक्के, एक रसोई व बाथरूम व टीन का एक बरांडा तैयार कर दिया। सारे कमरे, रसोई, बाथरूम व बरांडे पक्के कर दिए गए। साध-संगत का उत्साह देखकर दरबार की चारदीवारी भी पक्की कर दी गई। दरबार में एक बड़ा कमरा भी बना दिया गया। इस तरह दरबार की चिनाई का काम पूरा हो गया। दरबार के सत्ब्रह्मचारी सेवादार व साध-संगत दरबार की जमीन पर सब्जियां आदि की पैदावार ले रहे हैं। साध-संगत मिलकर हरीपुरा धाम में नामचर्चा भी करती है। सतगुरू जी की कृपा से अब दरबार दिन-दुगुनी, रात-चौगुनी तरक्की कर रहा है। Source of Inspiration</p>
<h3>कच्चा आश्रम गिराकर पक्का बनाना शुरू कर दिया | Source of Inspiration</h3>
<p style="text-align:justify;">जब आश्रम बनकर तैयार हो गया तो गाँव के भक्त डेरा सच्चा सौदा सरसा सत्संग पर आए और मस्ताना जी महाराज के चरणों में अपने गाँव में सत्संग करने के लिए विनती की। फिर सत्संग मंजूर कर दिया। आप जी ने यह सत्संग बड़ी धूमधाम से आश्रम में ही किया। इसी सत्संग पर सतगुरु दातार जी ने कपड़े और अपनी खाकी पोटली में से नोट निकालकर बाँटे और नाम प्रदान करके अनेक रुहों का उद्धार किया।</p>
<p style="text-align:justify;">सन् 1990 में सारी संगत इकट्ठी होकर डेरा सच्चा सौदा सरसा पहँुची। संगत ने पूज्य परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज के चरणों में प्रार्थना की कि पिता जी! हमारा कच्चा आश्रम गिरवाकर पक्का बनाया जाए। इस पर परम दयालु दातार जी ने मंजूरी दे दी। कच्चा आश्रम गिराकर पक्का बनाना शुरू कर दिया। चार कमरे पक्के, एक रसोई व बाथरूम और टीन का एक बरामदा तैयार कर दिया। सभी कमरे, रसोई, बाथरुम व बरामदे पक्के कर दिए गए। साध-संगत का उत्साह देखकर आश्रम की पक्की चारदीवारी भी हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">आश्रम के सत ब्रहचारी सेवादार व साध-संगत दरबार की जमीन से सब्जियों आदि की पैदावार लेते हैं। साध-संगत मिलकर हरीपुरा धाम में नाम-चर्चा भी करती है। सतगुरु जी की कृपा से अब दरबार दिन-दौगुनी, रात-चौगुनी उन्नति कर रहा है।’ जब आश्रम बनकर तैयार हो गया तो गांव के सत्संगी डेरा सच्चा सौदा सरसा में सत्संग में आए व शाह मस्ताना जी महाराज के चरणों में अपने गांव में सत्संग करने के लिए अर्ज की। फिर सत्संग मंजूर कर दिया गया। आप जी ने यह सत्संग बहुत ही धूमधाम से दरबार में किया।</p>
<h3>सतगुरू जी की कृपा से अब दरबार दिन-दुगुनी, रात-चौगुनी तरक्की कर रहा है</h3>
<p style="text-align:justify;">इसी सत्संग में बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने कपड़े व अपनी खाकी पोटली में से नोट निकालकर बांटे व नामशब्द प्रदान करते हुए अनेकों रूहों का उद्धार किया। सन् 1990 में सारी साध-संगत इक्ट्ठी होकर डेरा सच्चा सौदा सरसा पहुंची। साध-संगत ने पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के चरणों में अर्ज की कि पिता जी! दरबार में पक्के मकान बनाए जाएं। परम दयालु दातार जी ने मंजूरी दे दी।</p>
<p style="text-align:justify;">कच्चा मकार न गिराकर पक्के बनाने शुरू कर दिए गए। चार कमरे पक्के, एक रसोई व बाथरूम व टीन का एक बरांडा तैयार कर दिया। सारे कमरे, रसोई, बाथरूम व बरांडे पक्के कर दिए गए। साध-संगत का उत्साह देखकर दरबार की चारदीवारी भी पक्की कर दी गई। दरबार में एक बड़ा कमरा भी बना दिया गया। इस तरह दरबार की चिनाई का काम पूरा हो गया। दरबार के सत्ब्रह्मचारी सेवादार व साध-संगत दरबार की जमीन पर सब्जियां आदि की पैदावार ले रहे हैं। साध-संगत मिलकर हरीपुरा धाम में नामचर्चा भी करती है। सतगुरू जी की कृपा से अब दरबार दिन-दुगुनी, रात-चौगुनी तरक्की कर रहा है। Source of Inspiration</p>
<p><a title="इस पंचायत ने की डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरूजी की सराहना!" href="http://10.0.0.122:1245/panchayat-praised-revered-guruji-of-dera-sacha-sauda/">इस पंचायत ने की डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरूजी की सराहना!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 10 Apr 2024 15:41:20 +0530</pubDate>
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                <title>पावन वचनानुसार धन्ना राम के गांव लालपुरा में कभी सूखा नहीं पड़ा!</title>
                                    <description><![CDATA[यह डेरा सरसा से लगभग 64 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। सन् 1951 की बात है। चौधरी धन्ना राम गोदारा, गांव लालपुरा ने किसी से सुना कि सरसा के एक डेरे में एक पहुंचा हुआ फकीर है जो मालिक का ही रूप है। उसके दर्शन करने से किसी चीज की इच्छा ही नहीं रहती। धन्ना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/there-was-never-a-drought-in-dhanna-rams-village-lalpura/article-55919"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/mastana-ji-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">यह डेरा सरसा से लगभग 64 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। सन् 1951 की बात है। चौधरी धन्ना राम गोदारा, गांव लालपुरा ने किसी से सुना कि सरसा के एक डेरे में एक पहुंचा हुआ फकीर है जो मालिक का ही रूप है। उसके दर्शन करने से किसी चीज की इच्छा ही नहीं रहती। धन्ना राम ने अपने मन में फैसला कर लिया कि मैं ऐसे फकीर के दर्शन कल ही करूंगा। धन्ना राम अपने गांव से पैदल चलकर शाह मस्ताना जी धाम के सामने पहुंच गया। उस समय डेरे के चारों तरफ कांटेदार बाड़ लगी हुई थी, केवल एक ही दीवार थी। अंदर जाने के सभी रास्ते बंद थे, क्योंकि दीवार से सीढी लगाकर ही अंदर और बाहर जाया जाता था। Source of Inspiration</p>
<p style="text-align:justify;">धन्ना राम अंदर जाना चाहता था, परंतु एक सेवादार ने उसे रोक लिया। लेकिन बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के दर्शन की तीव्र इच्छा के कारण सेवादारों की भी एक न चली। जैसे ही धन्ना राम ने अंदर प्रवेश किया तो सामने बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज सामने खड़े थे। आप जी ने उससे पूछा कि तू कैसे आया तो धन्ना राम ने कहा भगवान को मिलने आया हूूं। बेपरवाह जी बहुत ही खुश हुए और कहा कि कोई तो आया भगवान से मिलने वाला। आज तक सभी माया वाले ही मिले।</p>
<h3>‘‘धन्ना राम ने मालिक को खुश कर लिया, धन्ना राम बरसात ले गया।’’</h3>
<p style="text-align:justify;">धन्ना राम वहां आश्रम में सेवा पर लग गया और शहनशाह जी से नाम-दान प्राप्त कर लिया। धन्ना राम अपने गांव लालपुरा में गया और वहां अपने घर से दो क्विंटल बाजरी ऊंट पर लादकर ले आया। उसने बाजरी को अपने हाथों से चक्की में पीस-पीसकर साध-संगत को भोजन करवाया। शहनशाह जी उस पर बहुत खुश हुए। एक बार उसके गांव में वर्षा न होने के कारण सूखा पड़ा हुुआ था। उसकी तड़प को देखते हुए बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने उसको बिना मांगें वचन किए, ‘‘धन्ना राम ने मालिक को खुश कर लिया, धन्ना राम बरसात ले गया।’’</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मालिक पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन वचनानुसार धन्ना राम के गांव के क्षेत्र में उसके बाद से कभी सूखा नहीं पड़ा। भगत धन्ना राम द्वारा अर्ज करने पर शहनशाह जी सन् 1956 में गांव लालपुरा पधारे। इस गांव में आप जी दो महीने तक रहे। दिन में आसपास के गांवों में सत्संग कर आप जी फिर उसके घर आ जाते। आप जी ने फरमाया, ‘‘धन्ना राम के घर और डेरे में कोई फर्क नहीं हैं।’’ इस समय के दौरान धन्ना राम तथा साध-संगत के आग्रह करने पर आप जी ने इस गांव में डेरा बनाना मंजूर कर लिया। Source of Inspiration</p>
<h3>अंतरयामी दातार जी ने फरमाया, ‘‘पुट्टर! डेरा आपके गांव में जरूर बनेगा</h3>
<p style="text-align:justify;">एक बार गांव ननेऊ में बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज का सत्संग था। सत्संग की समाप्ति के बाद नाम लेने वाले लोगों को इक्ट्ठा किया गया। रात का समय था। शहनशाह मस्ताना जी महाराज जब नाम देने लगे तो उनमें से एक आदमी को खड़ा कर दिया गया। सच्चे पातशाह ने उससे पूछा,‘‘मांस कब खाया?’’ वह बोला कि बाबा जी! दिन को ठाकुरों के घर खाया था।</p>
<p style="text-align:justify;">शहनशाह जी बोले, ‘‘आठ दिन पलीती यानि बदबू नहीं जाएगी। आठ दिनों के बाद बात करेंगे।’’ उसे नाम लेने वालों में से बाहर निकाल दिया गया। गांव के भगत धन्ना राम, पतराम और ख्याली राम ने एक दिन शहनशाह शाह मस्ताना जी महाराज के आगे प्रार्थना की कि साईं जी ! हमारे गांव में डेरा जरूर बनाओ जी। इस पर अंतरयामी दातार जी ने फरमाया, ‘‘पुट्टर! डेरा आपके गांव में जरूर बनेगा, लेकिन समय लगेगा। भजन-सुमिरन करो।’’ Source of Inspiration</p>
<p style="text-align:justify;">‘‘पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के पावन वचनों अनुसार पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज ने गांव लालपुरा में डेरा सच्चा सौदा का एक दरबार स्थापित कर दिया व इसका नाम ‘अनामी धाम’ रख दिया। यह डेरा 60 कनाल जमीन में बना हुआ है। इसमें दो कमरे, एक तेरावास व पानी के लिए एक तालाब बनाया गया है। डेरे के चारों तरफ कंटीली झाड़ियों की बाड़ की गई है।</p>
<h3>लेकिन सतगुरू ने अपनी दया-मेहर के साथ डेरा बनवा ही लिया</h3>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परमपिता जी ने डेरे की संभाल के लिए सत् ब्रह्मचारी सेवादारों की ड्यूटी लगा दी। इसके बाद साध-संगत की सुख-सुविधा के लिए डेरे के भवनों का और विस्तार किया गया। दो कमरे, एक बड़ा हॉल, एक चोबारा, उसके आगे बरामदा, सीढ़ियां व पानी के लिए डिग्गी बनाई गई। एक बार पूजनीय परमपिता जी ने जबरदस्त रूहानी सत्संग फरमाया। अधिकारी लोगों को राम-नाम से जोड़कर भवसागर से पार किया। पूजनीय परमपिता जी ने वचन फरमाए, ‘‘भाई! काल ने झगड़ा तो बहुत किया, लेकिन सतगुरू ने अपनी दया-मेहर के साथ डेरा बनवा ही लिया। यह बहुत ही अच्छा काम हुआ।’’ Source of Inspiration</p>
<p style="text-align:justify;">सन् 1996 में पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने लालपुरा डेरे में पवित्र चरण कमल टिकाए। लालपुरा की साध-संगत ने सतगुरू जी के खूब दर्शन किए व अपना जन्म सफल किया। फिर सेवादार जय नारायण ने सच्चे पातशाह जी के सामने अर्ज की कि शहनशाह जी! यहां कांटों की बाड़ है। कृप्या दीवार ऊंची बनवा दो। सच्चे पातशाह जी के हुक्मानुसार फ ट्टियों के साथ कच्ची दीवार तैयार की गई। डेरा सच्चा सौदा अनामी धाम लालपुरा में नियमित नामचर्चा होती है व साध-संगत द्वारा अपने सतगुरू का गुणगान किया जाता है।</p>
<p><a title="Railways: ये ट्रेन रहेगी रद्द, आपको हुई असुविधा के लिए हमें खेद है!" href="http://10.0.0.122:1245/bhagat-ki-kothi-tiruchirappalli-express-will-remain-cancelled/">Railways: ये ट्रेन रहेगी रद्द, आपको हुई असुविधा के लिए हमें खेद है!</a></p>
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                <pubDate>Tue, 02 Apr 2024 16:07:04 +0530</pubDate>
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                <title>प्रेरणास्त्रोत: भक्ति और संपत्ति</title>
                                    <description><![CDATA[यह देख वहां अफरा-तफरी मच गई। कई लोग स्वर्ण मुद्राएं लेने के लिए गंगा में कूद गए।
 भगदड़ में कई लोग घायल हो गए। राजा को समझ में नहीं आया कि आखिर गुरू नानक जी ने यह सब क्यों किया।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/inspiration-devotion-and-wealth/article-11703"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/source-of-inspiration.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">एक बार काशी के निकट के एक इलाके के राजा ने गुरु नानक जी से पूछा, ‘आपके प्रवचन का महत्व ज्यादा है या हमारी दौलत का?’ गुरू नानक जी ने कहा, ‘इसका जवाब उचित समय पर दूंगा।’ कुछ समय बाद नानक ने राजा को काशी के अस्सी घाट पर एक सौ स्वर्ण मुद्राएं लाने को कहा। नानक वहां प्रवचन कर रहे थे। राजा ने स्वर्ण मुद्राओं से भरा थाल गुरू नानक जी के पास रख दिया और पीछे बैठकर प्रवचन सुनने लगा। वहां एक थाल पहले से रखा हुआ था। प्रवचन समाप्त होने के बाद गुरू नानक जी ने थाल से स्वर्ण मुद्राएं मुट्ठी में लेकर कई बार खनखनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">भीड़ को पता चल गया कि स्वर्ण मुद्राएं राजा की तरफ से नानक को भेंट मिली हैं। थोड़ी देर बाद अचानक गुरू नानक जी ने थाल से स्वर्ण मुद्राएं उठाकर गंगा में फेंकना शुरू कर दिया। यह देख वहां अफरा-तफरी मच गई। कई लोग स्वर्ण मुद्राएं लेने के लिए गंगा में कूद गए। भगदड़ में कई लोग घायल हो गए। राजा को समझ में नहीं आया कि आखिर गुरू नानक जी ने यह सब क्यों किया। तभी उन्होंने जोर से कहा, ‘भाइयों, असली स्वर्ण मुद्राएं मेरे पास हैं। गंगा में फैंकी गई मुद्राएं नकली हैं। आप लोग शांति से बैठ जाइए।’</p>
<p style="text-align:justify;">जब सब लोग बैठ गए तो राजा ने पूछा, ‘आप ने यह तमाशा क्यों किया? धन के लालच में तो लोग एक दूसरे की जान भी ले सकते थे।’ गुरू नानक जी ने कहा, ‘मैंने जो कुछ किया वह आपके प्रश्न का उत्तर था। आपने देख लिया कि प्रवचन सुनते समय लोग सब कुछ भूलकर भक्ति में डूब जाते हैं। लेकिन माया लोगों को सर्वनाश की ओर ले जाती है। प्रवचन लोगों में शांति और सद्भावना का संदेश देता है मगर दौलत तो विखंडन का रास्ता है।’ राजा को अपनी गलती का अहसास हो गया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Dec 2019 21:19:26 +0530</pubDate>
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