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                <title>Citizenship Amendment Bill - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Citizenship Amendment Bill RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नागरिकता व जनसंख्या रजिस्टर पर भी भ्रम</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र व राज्य सरकारें सत्तापक्ष व विपक्ष ने एक ऐसा माहौल बना दिया है
कि आम व्यक्ति को समझ ही नहीं आ रही कि संविधान की महत्वता का आधार क्या है?
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/confusion-on-citizenship-and-population-register/article-12041"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/confusion.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नागरिकता संशोधन बिल और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर पर हो रही राजनीतिक बयानबाजी को लेकर जनता में असमंजस की स्थिति बन गई है। केंद्र सरकार और विपक्षी दलो ने इस मुद्दों पर अलग-अलग परिभाषाएं, व्याख्याएं व बयानबाजी की, जो अनिश्चितता का माहौल पैदा करती है। संघीय ढांचें के बावजूद हमारे देश का एक संविधान और एक ही कानून है जिस पर दोहरी व्याख्या व भ्रम की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। केंद्र सरकार ने कहा कि सिटीजनशिप की व्याख्या को पूर्व कांग्रेसी मंत्री पी. चिदम्बरम नागरिकता की बजाय रिहायश के तौर पर कर रहे हैं। यूपीए सरकार के समय एपीआर और एनडीए सरकार के एनपीआर में भाजपा और कांग्रेस के दावे अलग-अलग हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डीटैंशन सेंटरों पर भी दोनों पार्टियां एक-दूसरे को कोस रही हैं। कानूनों को लागू करने के मामले में केंद्र व विरोधी पार्टियों की सरकारों वाले राज्यों में खींचतान चल रही है। नागरिकता संशोधन बिल की तरह केरल ने एनपीआर न लागू करने की घोषणा कर दी है। केंद्र व राज्य सरकारें सत्तापक्ष व विपक्ष ने एक ऐसा माहौल बना दिया है कि आम व्यक्ति को समझ ही नहीं आ रही कि संविधान की महत्वता का आधार क्या है? दरअसल नीतियों की अपेक्षा विचारों की भिन्नता को अधिक महत्व दिया जा रहा है लेकिन हिंसक प्रचार देश के लिए घातक है, जो किसी कानून के निर्माण में बाधा बनता है। सरकार को अपना रूख स्पष्ट करने और विरोधियों के शंकाओं को दूर करने के लिए पूरी जिम्मेदारी से काम करने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या एनपीआर को एनआरसी के लिए आधार के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा? एवं डिटेंशन सेंटरों का उद्देश्य क्या है? इसे लेकर भी सभी भ्रमों को दूर किया जाना चाहिए। आज सूचना प्रौद्यौगिकी का युग है। फिर सूचना प्राप्त करना नागरिकों के अधिकारों में शामिल किया जा चुका है। सूचना अधिकार कानून बनने के बावजूद जनता अंधेरे में रहे तब भी कानून की सार्थकता पर सवाल है? सही सूचना ही भ्रम और असमंजस को खत्म करती है। तथ्यों व सबूतों को छिपाना जनता को भ्रमित करना है। छल-कपट की राजनीति देश का नुक्सान ही करेगी। लोकतंत्र सच्चाई व जनता के प्रति जवाबदेही का तंत्र है इसीलिए जनता को गुमराह न किया जाए।</p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Dec 2019 20:31:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गहलोत की आमजन से शांति बनाये रखने की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[गहलोत ने शनिवार को पत्रकारों को बताया कि हिंसा में उत्तर प्रदेश के ग्यारह लोगों की जान चली गई
 तथा कई लोग घायल हुए है। उन्होंने कहा कि संविधान में धार्मिक समानता की बात कही गई
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/gehlot-appealed-to-the-common-man-to-maintain-peace/article-11905"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/citizenship-amendment-bill3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर</strong>। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हो रहे हिंसक प्रदर्शनों पर चिंता व्यक्त करते हुए आम जन से सौहार्द एवं शांति बनाये रखने की अपील की है। गहलोत ने शनिवार को पत्रकारों को बताया कि हिंसा में उत्तर प्रदेश के ग्यारह लोगों की जान चली गई तथा कई लोग घायल हुए है। उन्होंने कहा कि संविधान में धार्मिक समानता की बात कही गई लेकिन इस मामले में कई तरह के भ्रम पैदा किये जा रहे है। इससे लोगों में असंतोष है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की यह जिम्मेदारी है कि लोगों का भ्रम दूर करे ताकि शांति एवं सद्भाव कायम रह सके। उन्होंने कहा कि कानून को लेकर हो रही हिंसा से विदेशों में भी भारत की छवि खराब हो रही है। विदेशी अखबारों में यहां के हिंसा की खबरे मुख्य समाचार के रुप में प्रकाशित हो रही है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Dec 2019 15:49:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएए के विरोध में जामिया नगर बंद</title>
                                    <description><![CDATA[इस बीच हवाई, रेल और बस सेवा अभी भी प्रभावित है। राज्य में हालांकि सीएए के खिलाफ प्रदर्शन अभी भी जारी है।
यहां विद्यार्थी, युवा और कलाकार शांतिपूर्ण तरीके से इसका विरोध कर रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/jamia-nagar-closed-in-protest-against-cs/article-11779"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/citizenship-amendment-bill2.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;"> सड़कों पर उतरे हजारों लोग (Citizenship Amendment bill)</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>प्रदर्शनकारियों का कहना है सरकार मुसलमानों को निशाना बना रही है</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> नागरिकता (संशोधन) कानून (सीएए) के (Citizenship Amendment bill) खिलाफ जामिया नगर आज बंद है और हजारों की तादात में लोग सड़कों पर मार्च कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे लोग दो किलोमीटर लंबी मौलाना मोहम्मद अली जौहर मार्ग पर मार्च कर रहे हैं। ओखला मोड़ के पास बड़ी संख्या में लोग जमा है और सीएबी के विरोध में नारेबाजी कर रहे हैं। इसके अलावा कालिंदी कुंज के पास भी बड़ी संख्या में लोग जमा है और नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है सरकार मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए ऐसे कानून लेकर आ रही है। सरकार मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाना चाहती है। जामिया विश्विद्यालय में हालांकि शीतकालीन छुट्टी की घोषणा हो गई है लेकिन आज स्थानीय लोगों के साथ छात्र भी सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">असम में स्थिति सामान्य, सीएए के खिलाफ प्रदर्शन जारी</h2>
<p style="text-align:justify;">नागरिकता (संशोधन) कानून (सीएए) के विरोध असम में हिंसा के बाद अब यहां हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं और गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ सहित अन्य सभी जगह कर्फ्यू में ढील दी गयी है लेकिन इंटरनेट सेवा अभी भी ठप है। गत 12 दिसंबर को हुए प्रदर्शन के दौरान गुवाहाटी में पुलिस की गोलीबारी में घायल दो लोगों की आज मौत हो गयी और हिंसा में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर चार हो गया।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इस बीच हवाई, रेल और बस सेवा अभी भी प्रभावित है।</li>
<li style="text-align:justify;">राज्य में हालांकि सीएए के खिलाफ प्रदर्शन अभी भी जारी है।</li>
<li style="text-align:justify;">यहां विद्यार्थी, युवा और कलाकार शांतिपूर्ण तरीके से इसका विरोध कर रहे हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">गुवाहाटी में सुबह 0900 बजे से शाम 1800 बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गयी है</li>
<li style="text-align:justify;"> इस दौरान कलाकार बिरादरी में शांति के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया था जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/jamia-nagar-closed-in-protest-against-cs/article-11779</link>
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                <pubDate>Sun, 15 Dec 2019 09:03:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नागरिकता संशोधन विधेयक और आबादी आक्रमण</title>
                                    <description><![CDATA[मुस्लिम आबादी आक्रमण के माध्यम से भारत को एक इस्लामिक मजहबी राज में तब्दील करने की एक गहरी साजिश है।
भारत का एक बार मजहब के आधार पर बंटवारा हो चुका है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/citizenship-amendment-bill-and-population-invasion/article-11740"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/citizenship-amendment-bill-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर भूचाल मचा हुआ है, देश की संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष की स्थिति बन गयी है और इस विधेयक को मुसलमानों के खिलाफ करार दिया जा रहा है। क्या यह विधेयक सही में मुसलमानों के खिलाफ है, क्या इस विधेयक से समता के अधिकार का उल्लंघन होता है, क्या इस विधेयक से भाजपा सरकार अपने हिन्दू वोट बैंक का फिर से एकीकरण करना चाहती है, क्या कांग्रेस भी भाजपा की देखा-देखी अपने मुस्लिम वोट की चिंता में जिहादी भूमिका में खडी हुई है, क्या कम्युनिस्ट राजनीतिक पार्टियां भी इस विधेयक को लेकर अपनी हिन्दू विरोधी मानसिकता पर ही कायम है? क्या इस विधेयक से जातिवादी और क्षेत्रीयवादी राजनीतिक पार्टियों के जनाधार में कोई कमी आयेगी?</p>
<p style="text-align:justify;">क्या यह विधेयक देश में आबादी आक्रमण को रोक पायेगा, क्या यह विधेयक भारत को घुसपैठिओं के लिए धर्मशाला समझने की मानसिकता को जमींदोज करेगा, क्या यह विधेयक विदेशी घुसपैठियों को संरक्षण देने वाली सभी मानसिकताओं का समाधान कर पायेगा? क्या नरेन्द्र मोदी सरकार विदेशी घुसपैठियों को देश से बाहर करने की वीरता सुनिश्चित कर पायेंगे? क्या नरेन्द्र मोदी सरकार की छवि एक हिन्दू सरकार के तौर पर बन रही है, क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक कटटरवादी हिन्दू नेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं, क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक हिन्दू नेता के रूप में स्थापित होने के खतरे भी देश के सामने हैं, क्या इन खतरों पर कोई गंभीर विचार प्रवाह चल सकता है? क्या कांग्रेस और ओवैसी की एक ही भाषा कांग्रेस के लिए नुकसान के संकेत हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">यह विधेयक पूरी तरह से समता मूलक सिद्धांत पर आधारित है। नरेन्द्र मोदी की सरकार के तर्क भी हवाहवाई हैं। दुनिया यह जानती है कि इस्लामिक आधार पर शासन वाले देशों में संविधान भी बर्बर होता है, कानून भी बर्बर होता है, मजहबी आधार पर गैर इस्लामिक धर्मों के लोगों की धार्मिक आजादी लूटी जाती है, जमींदोज की जाती है। निश्चित तौर पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश एक घोर और लोमहर्षक रूप से इस्लामिक देश हैं। धर्म के नाम पर पाकिस्तान बना था, भाषा के आधार पर बांग्लादेश बना था।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान जब मजहब के आधार पर बना था तब लगभग बीस प्रतिशत आबादी गैर मुस्लिम थी, लेकिन आज पाकिस्तान के अंदर गैर मुस्लिम की आबादी दो प्रतिशत तक भी नहीं रही है, अधिकतर लोगों को इस्लाम स्वीकार करने के लिए बाध्य होना पड़ा या फिर भारत जैसे देशों में पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। बांग्लादेश के निर्माण के समय हिन्दुओं की आबादी लगभग एक तिहाई थी पर आज लगभग चार प्रतिशत हिन्दू ही वहां बचे हुए हैं, अधिकतर हिन्दू अपनी जान बचा कर भारत भाग कर आ गये। तसलीमा नसरीन की पुस्तक लज्जा इसकी सबूत है। अफगानिस्तान भी घोर मजहबी और लोमहर्षक मानसिकता वाला देश है जहां पर तालिबान और अलकायदा ने अल्पसंख्यकों पर कैसी हिंसक मानसिकताएं कायम की हैं, यह भी जगजाहिर है।</p>
<p style="text-align:justify;">हमें देखना यह होगा कि जिन हिन्दुओं, ईसाइयों, जैनों, बौद्धों और पारसियों की नागरिकता सुरक्षित करने की बात करता है यह नागरिक संशोधन विधेयक , उसकी सच्चाई क्या है? पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भाग कर आयी हिन्दू, बौद्ध, जैन, ईसाई तथा पारसी आबादी को आबादी आक्रमण के तौर पर नहीं देखा जा सकता है। ये पीड़ित थे और पीड़ित होने के कारण भारत में आए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान से कई हजार हिन्दू प्रताड़ना से गुजरते हुए भारत आये हैं पर इन्हें नागरिकता का अधिकार नहीं मिला है और न इन्हें संविधान का संरक्षण मिला है। अब नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पास हो गया है तब देश में रह रहे लाखों हिन्दुओं, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों के नागरिकता मिलने के अधिकार का संरक्षण होना भी संभव है। खास कर राष्टÑीय नागरिकता रजिस्टर के प्रावधान से असम की स्थिति बहुत ही नाजुक है।कई लाख हिन्दू जो नागरिकता रजिस्टर में आने से वंचित हो गये थे उन्हें नागरिकता के अधिकार मिलने में सहुलियत होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या देश में पाकिस्तान, अफगानिस्तान या फिर बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ कर आयी मुस्लिम आबादी किसी प्रताड़ना का शिकार हुई है? इस प्रश्न पर राजनीतिक बहस की जरूरत है। सरकार को यह बताना चाहिए कि देश के अंदर में अवैध रूप से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से कितनी मुस्लिम आबादी भारत में रह रही है। कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलोें और नेताओं को भी यह बताना होगा कि पाकिस्तान, बांगलादेश और अफगानिस्तान से आयी मुस्लिम आबादी क्या किसी राजनीतिक षडयंत्र का शिकार होकर आने के लिए विवश हुई, क्या किसी राजनीतिक उत्पीडन का शिकार होकर भारत में आने के लिए विवश हुई है?</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रश्न पर कांग्रेस और अन्य समर्थक संवर्ग के पास कौन सा तर्क होगा? भारत में जो मुस्लिम आबादी पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आ रही है वह किसी राजनीतिक षडयंत्र का शिकार हो कर नहीं आ रही है, किसी राजनीतिक प्रताडना व उत्पीडन का शिकार होकर नहीं आ रही है। फिर क्यों और कैसे आ रही है, इस प्रश्न का भी खुलासा होना चाहिए। सही तो यह है कि भारत पर मुस्लिम आबादी आक्रमण जारी है। मुस्लिम आबादी आक्रमण के माध्यम से भारत को एक इस्लामिक मजहबी राज में तब्दील करने की एक गहरी साजिश है। भारत का एक बार मजहब के आधार पर बंटवारा हो चुका है। मुसलमानों को आबादी के अनुसार भूभाग बना कर दे दिया गया और मजहब के आधार पर पाकिस्तान बना था। देश का बहुसंख्यक वर्ग और देश के बहुसंख्यक वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाली नरेन्द्र मोदी की सरकार फिर से भारत का बंटवारा नहीं होने देना चाहती है, भारत को एक मजहबी राज में तब्दील नहीं होना देना चाहती है, इस तर्क को स्वीकार किया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार को शरणार्थियों को नागरिकता का अधिकार देने जैसे कार्य तो करने ही चाहिए पर अवैध रूप-आपराधिक ढंग से सीमा के अंदर प्रवेश कर रह रही आबादी को भी देश से बाहर निकालने की वीरता दिखानी चाहिए। केन्द्रीय गृहमत्री अमित शाह ने अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने का जो संकल्प व्यक्त किया है वह देश की अस्मिता और सुरक्षा की ही गांरटी देता है। निश्चित तौर पर नागरिकता संशोधन बिल का विरोध कांग्रेस और अन्य विरोधी राजनीतिक दल के लिए घाटे का राजनीतिक जिहाद है।<br />
<strong><em>-विष्णुगुप्त</em></strong></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 11 Dec 2019 19:57:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा: नागरिकता संशोधन बिल पर कांग्रेस ने किया विरोध प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस नागरिकता संशोधन बिल में
सत्ताधारी पार्टी ने दुर्भावना से प्रेरित ऐसी व्यवस्थायें लाने का प्रयत्न किया है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-congress-protests-over-citizenship-amendment-bill/article-11738"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/citizenship-amendment-bill.jpg-.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">भारत का संविधान सभी धर्मों का समान आदर करता है(citizenship amendment bill)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)।</strong> प्रदेश कांग्रेस ने मोदी सरकार द्वारा लाए जा रहे (citizenship amendment bill) नागरिक संशोधन बिल-2019 का पंचकुला में विरोध किया। पूर्व संसदीय सचिव रामकिशन गुर्ज्जर के नेतृत्व में यह प्रदर्शन हुआ जिसमें भारी संख्या में कांग्रेसजन शामिल हुए। रोष प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल-2019 के असंवैधानिक होने और इसमें अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने की विशेष तौर पर चर्चा की। उन्होंने यह भी कहा कि यह बिल देश के संविधान की धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के विरूद्ध है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यह बिल नागरिकों के राष्ट्रीय पंजीकरण जैसे खतरनाक मंसूबे की कार्यवाही का हिस्सा है</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">देश में साम्प्रदायिक तनाव पैदा होने का डर है।</li>
<li style="text-align:justify;">असम और पूर्व के अन्य राज्यों में इस बिल के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किए जा रहे हैं</li>
<li style="text-align:justify;"> कई जगहों पर तो नागरिकों ने पूरी तरह बंद किया हुआ है।</li>
<li style="text-align:justify;">कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस नागरिकता संशोधन बिल में सत्ताधारी पार्टी ने दुर्भावना से प्रेरित ऐसी व्यवस्थायें लाने का प्रयत्न किया है</li>
<li style="text-align:justify;">जिनसे देश की एकता और अखंडता को भारी हानि हो सकती है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">  भारत का संविधान सभी धर्मों का समान आदर करता है</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> इसके अनुसार धर्म के आधार पर किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता</li>
<li style="text-align:justify;">परंतु मोदी सरकार ने तानाशाही तरीके से मनमर्जी के अनुसार</li>
<li style="text-align:justify;"> सभी सिद्धांतों को ताक पर रखते हुए यह बिल पेश किया है</li>
<li style="text-align:justify;"> कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार की बदनियती की जोरदार निन्दा करती है।</li>
<li style="text-align:justify;">कांग्रेस जनों ने केन्द्र की भाजपा सरकार के विरूद्ध जोरदार नारे लगाकर अपना रोष व्यक्त किया</li>
<li style="text-align:justify;">नागरिकता संशोधन बिल-2019 का सांकेतिक तौर पर उसकी प्रतिकृति फाड़ कर अपना विरोध दर्ज किया।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">विधायक प्रदीप चौधरी व शैली चौधरी, प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रोहित जैन, महिला कांग्रेस की संयोजक रंजीता मेहता, विजय मोहन वर्मा, गफुर मोहम्मद आदि नेताओं ने रोष प्रदर्शन को संबोधित किया।</p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Dec 2019 16:37:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नागरिकता संशोधन बिल पर राजनीति</title>
                                    <description><![CDATA[देश के मुसलमानों के कोई अधिकार छीनने की कोशिश इस कानून के जरिए नहीं की गई है।
 यह कानून असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा और मणिपुर के आदिवासी इलाकों में लागू नहीं होगा
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/politics-on-citizenship-amendment-bill/article-11731"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/citizenship-amendment-bill1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आखिरकार नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित हो गया। अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां सरकार की असली परीक्षा होगी। गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के कड़े विरोध के बीच कहा कि विधेयक अल्पसंख्यकों की बजाय घुसपैठियों के खिलाफ हैं। यह संविधान के किसी भी अनुच्छेद की अवज्ञा नहीं करता है। न ही यह धर्म के परिप्रेक्ष्य में भेदभाव करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के मुसलमानों के कोई अधिकार छीनने की कोशिश इस कानून के जरिए नहीं की गई है। यह कानून असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा और मणिपुर के आदिवासी इलाकों में लागू नहीं होगा। लोक-संपदा व संस्कृति के सरंक्षण के लिए मणिपुर को ईनर लाइन परमिट में शामिल किया गया है। विधेयक के पक्ष में 311 और विपक्ष को महज 80 मत मिल पाए। महाराश्ट्र में कांग्रेस और राश्ट्रीय कांग्रेस पार्टी से गठबंधन कर सरकार बना लेने के बावजूद शिवसेना विधेयक के पक्ष में रही।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि शिवसेना ने यह मांग जरूर की, कि शरणार्थियों को नागरिकता का हक मिलने के बाद 25 साल तक मतदान का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। जेडीयू ने भी विधेयक का सर्मथन किया। अलबत्ता विधेयक के विरोध में पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में जबरदस्त गुस्सा दिखाई दे रहा है। असम बंद रहा और ममता बनर्जी ने विधेयक का विरोध करते हुए, नागरिकों को शरणार्थी नहीं बनने देने का दावा किया है। पूर्वोत्तर के वामपंथी दल भी विरोध में शामिल हैं। दरअसल, पाक, बांग्लादेश और अफगानिस्तान ऐसे मुस्लिम बहुल देश हैं, जिनमें गैर-मुस्लिम नागरिकों पर अत्याचार और स्त्रियों के साथ दुश्कर्म किए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चूंकि ये देश एक समय अखंड भारत का हिस्सा थे, इसलिए इन तीनों देशों में हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी बड़ी संख्या में रहते थे। 1947 में जब भारत से अलग होकर पाकिस्तान नया देश बना था, तब वहां 20 से 22 प्रतिशत गैर-मुस्लिमों की आबादी थी, जो अब घटकर दो प्रतिशत रह गई है। इसमें कोई दो राय नहीं कि विधेयक को लेकर सरकार के सामने पूर्वोत्तर भारत बड़ी चुनौती के रूप में पेश आ सकता है। क्योंकि इसके लोकसभा से पारित होने के साथ ही असम सहित अन्य पूर्वोत्तर के राज्यों और पश्चिम बंगाल में विरोध शुरू हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">खिलाफत से जुड़े दल प्रमुखों का कहना है कि सरकार ने उन्हें भरोसे में नहीं लिया। दरअसल भाजपा और असम गण परिशद् को छोड़ यहॉ ज्यादातर राजनीतिक दल कांग्रेस और मार्क्सवादी विचारधारा के प्रभाव में हैं। राजनीतिक पार्टियां इस बिल को वोट बैंक के रूप में देख रही है। हर पार्टी इस बिल के द्वारा राजनैतिक लाभ लेने की फिराक में है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/politics-on-citizenship-amendment-bill/article-11731</link>
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                <pubDate>Tue, 10 Dec 2019 20:57:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Live: लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने पेश किया नागरिकता संशोधन बिल</title>
                                    <description><![CDATA[अमित शाह जी, वोट बैंक बनाने के आरोपों को विराम दें और
 उन्हें मताधिकार न दें – इस पर आप क्या कहते हैं? और हां, कश्मीरी पंडितों का क्या हुआ,
 क्या अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वे कश्मीर लौट गए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/home-minister-amit-shah-introduced-the-citizenship-amendment-bill-in-the-lok-sabha/article-11706"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/citizenship-amendment-bill.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">नागरिकता विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी तकरार की संभावना</h2>
<h2 style="text-align:center;">( <strong>Citizenship Amendment Bill)</strong></h2>
<p><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। ‘</strong>नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 <strong>(Citizenship Amendment Bill) </strong> को लोकसभा में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पेश किया। इस पर इसपर अधीर रंजन चौधरी ने विरोध जताया जिसपर अमित शाह ने जवाब दिया। अमित शाह ने अधीर रंजन को जवाब देते हुए कहा कि ये बिल कहीं पर भी इस देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है।</p>
<h2>नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन कर सकती है शिवसेना</h2>
<h2>( <strong>Citizenship Amendment Bill)</strong></h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">शिवसेना संसद में सोमवार को पेश होने वाले नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) विधेयक का समर्थन कर सकती है।</li>
<li style="text-align:justify;">शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने ट्वीट किया, ‘गैरकानूनी घुसपैठियों को देश से बाहर किया जाना चाहिए</li>
<li style="text-align:justify;">अप्रवासी हिंदुओं को नागरिकता देनी होगी लेकिन अमित शाह जी, वोट बैंक बनाने के आरोपों को विराम दें</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong><em> – उन्हें मताधिकार न दें – इस पर आप क्या कहते हैं? और हां, कश्मीरी पंडितों का क्या हुआ, क्या अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वे कश्मीर लौट गए। शुक्रवार को महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों के मुद्दे पर आमने-सामने आये विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच सोमवार को भी लोकसभा में तीखी नोक-झोक की संभावना है।</em></strong></p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करे।</p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2019 12:57:57 +0530</pubDate>
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