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                <title>Kissan - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>लॉकडाउन में सब्जी उत्पादक किसान बेहाल, खेतों में बहाई पकी पकाई फसलें, सरकार ने मदद न की तो कर लेंगे खुदकुशी </title>
                                    <description><![CDATA[ टमाटर की पकी-पकाई फसल पर ट्रैक्टर चलाते किसान।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/if-the-government-did-not-help-you-would-commit-suicide/article-15409"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-05/tomato-growers-warning.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">धरने पर बैठे तोशाम क्षेत्र के टमाटर उत्पादक किसानों ने दी चेतावनी</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4><strong>बोले : मंडियों में लागत का चौथा हिस्सा भी नहीं मिलता</strong></h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ/इन्द्रवेश दुहन)।</strong> कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिला दिया। इस दौरान आमजन को भले थोड़ी परेशानी हो रही है, लेकिन अन्नदाता बेहाल हो गया है। भिवानी में टमाटर उत्पादक किसान इतने मजबूर हो चुके हैं कि अब वो अपनी पकी-पकाई टमाटर की फसल पर ट्रैक्टर चला रहे हैं। इनके खेतों में टमाटर व शिमला मिर्च के ढेर कूड़े के ढ़ेर बन चुके हैं। मुंह छुपाने को जगह ना मिलने पर ये धरने पर बैठे हैं और मदद ना मिलने पर जान देने की कह रहे हैं। किसान नेताओं ने सरकार से इन्हें बचाने के लिए प्रति एकड़ 70 हजार रुपए मुआवजा देने की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिले के तोशाम क्षेत्र में रमेश नामक किसान ने साल 2007 में सरकार द्वारा बागवानी की बढ़ावे देने से प्रेरित होकर परंपरागत खेती छोड़ सब्जी उगानी शुरू की। रमेश से प्रभावित होकर आसपास के गांवों के किसान भी सब्जी उगाने लगे। आज इनके हजारों एकड़ में टमाटर व शिमला मिर्च के ढेर लगे हैं। आज इन ढेरियों की हकीकत और असलियत सुनकर सरकार का दिल पसीजे या ना पसीजे पर आपका दिल भी पसीजेगा और रोंगटे भी खड़े हो जाएंगे।</p>
<h4><strong>भावांतर योजना को बताया छलावा, बंद हो ये योजना</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान के सटे तोशाम क्षेत्र के इन किसानों ने बालू रेत के तपते टिलों में हजारों टन टमाटर व शिमला मिर्च का उत्पादन किया। लेकिन लॉकडाउन के चलते कुछ मंडियां बंद हो गई तो कुछ में इनके टमाटर कौड़ियों के भाव बिक रहे हैं। कई बार तो कोई खरीदार ना मिलने पर वापस अपने खेत में लाकर डालना पड़ता है। टमाटर व शिमला मिर्च ना बिकने या कौड़ियों के भाव बिकने पर अनाथ अन्नदाता अब आंदोलन पर है। ये अपने खेतों में धरने पर बैठे हैं। देश के प्रगतिशिल किसान रमेश की बात करें तो इन्हें हर सरकार व विभाग से गोल्ड मैडल मिल चुके हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इन्हें किसानों के लिए बनने वाली पांच सदस्यीय कमेटी का सदस्य भी बनाया गया।</li>
<li style="text-align:justify;">इनसे प्रभावित होकर आसपास के गांवों के किसानों ने परंपरागत खेती करना बंद किया था।</li>
<li style="text-align:justify;">पर आज रमेश खुद धरने पर है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">रमेश का कहना है कि जो किसान मुझ से प्रभावित हुए थे, आज वे उन्हें मुंह दिखाने लायक नहीं हैं। रमेश ने बताया कि टमाटर के उत्पादन पर प्रति किलो चार रुपए और उसे तोड़ने, छटाई करने और मंडी तक पहुंचे में चार रुपये प्रति किलो मिलाकर 8 रुपये प्रति किलो खर्च आता है जबकि मंडियों में करीब दो रुपए किलो बिकता है और फिर वहीं टमाटर लोगों को दुकानों व रेहड़ियों पर 20 से 30 रुपये किलो मिलता है। साथ ही उन्होंने भावांतर योजना को किसानों के सत्यानाश की योजना बताते हुए इसे बंद करने की मांग की।</p>
<h4><strong>लॉकडाऊन में किसान पर बहुत बड़ी मार पड़ी है</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वहीं रोशन व सुरेश नामक किसान ने भी बताया कि टमाटर ने उन्हें बर्बाद कर दिया है। राजकुमार ने यहां तक कहा कि उसने 53 एकड़ में टमाटर की बुआई की और बिक्री न होने पर बर्बाद हो गया। अब घर वाले घर में नहीं घुसने देते। किसानों का कहना है कि अगली फसल की बुआई बिजाई कैसे करें, कैसे खाने के लिए गेहूं व तूड़ी खरीदें, कैसे बच्चों के स्कूल की फीस दें। इन किसानों का कहना है कि सरकार ने उनकी मदद नहीं कि तो खुदकुशी के लिए मजबूर हो जाएंगे।<br />
वहीं धरने पर पहुंचे किसान नेता कमल प्रधान ने कहा कि ये वो किसान हैं, जो सरकार की नीतियों से प्रभावित हुए थे। लेकिन लॉकडाऊन में इन पर बहुत बड़ी मार पड़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कमल प्रधान ने सरकार से मांग की है कि पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर बनाने के लिए जो 20 लाख करोड़ रुपये का पैकज दिया है, उसमें किसानों को भी शामिल किया जाए और इन किसानों को भरपाई के तौर पर 70 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। अन्नदाता की इस हालत पर भले सरकार का दिल नापिघले, पर जिस फसल को किसान हजारों रुपये खर्च कर, दिन रात मेहनत कर, अपने बच्चों की तरह पालता है, उस पर ट्रैक्टर चलाते किसान का दिल जरूर रोता है। अब देखना होगा कि जिस बागवानी योजना को बढ़ावा देने की सरकार बात करती है, उसी की मार झेल रहे इन किसानों के आंसु पोछने कोई आएगा या नहीं।</p>
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<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/if-the-government-did-not-help-you-would-commit-suicide/article-15409</link>
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                <pubDate>Sun, 17 May 2020 17:22:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रचंड सर्दी, घने कोहरे में ठिठुरा समूचा उत्तर भारत</title>
                                    <description><![CDATA[हालांकि डॉक्टरों ने सर्दी के मौसम में सर्दी से बचने के लिए सुबह, शाम जरूरत हो तो घर से निकलने की सलाह दी है।
 डाक्टरों के मुताबिक इस मौसम में सबसे अधिक परेशानी दिल के मरीज को होती है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/severe-cold-thick-fog-across-north-india/article-11937"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/severe-cold.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">हरियाणा में नारनौल का पारा एक डिग्री रहा</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>हवाई,रेल तथा सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पश्चिमोत्तर क्षेत्र में पिछने कुछ दिनों से पड़ रही भीषण ठंड तथा कोहरे से हवाई, रेल और सड़क यातायात पर बुरा असर पड़ने से आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम केन्द्र के अनुसार अगले कुछ दिनों तक कड़ाके की ठंड तथा घने कोहरे से राहत के आसार नहीं हैं। अगले दो दिन अनेक स्थानों पर घने कोहरे की चेतावनी दी गई है। इस चेतावनी को देखते हुए पंजाब तथा हरियाणा में भी पुलिस तथा संबंधित विभागों को सतर्कता बरतने के बारे में चालकों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। उसके बावजूद सड़क दुर्घटनाएं घट रही हैं तथा कल ही लुधियाना के समीप सड़क दुर्घटना में चार लोगों की मौत हो गई।</p>
<h3>बढ़ रही ठंड गेहूं की फसल के लिए कारगार साबित होगी</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> भीषण सर्दी के बीच पड़ रहे कोहरे से गेहूं की फसल को निश्चित रूप से फायदा होगा।</li>
<li style="text-align:justify;">पंजाब तथा हरियाणा में हाड कंपाती सर्दी से बचाव के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे है।</li>
<li style="text-align:justify;">बाजारों, मंडी, गल्ली-मोहल्लों में अलाव जला का सर्दी से बचाव कर रहे है।</li>
<li style="text-align:justify;">बढ़ रही ठंड गेहूं की फसल के लिए कारगार साबित होगी।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा में नारनौल का पारा तेजी से गिरकर एक डिग्री रह गया। हिसार, अंबाला ,भिवानी का पारा क्रमश: छह डिग्री , करनाल तथा रोहतक सात डिग्री ,सिरसा पांच डिग्री, अमृतसर पांच डिग्री ,लुधियाना ,पटियाला सात डिग्री , पठानकोट आठ डिग्री , बठिंडा चार डिग्री , आदमपुर आठ डिग्री और चंडीगढ़ का पारा नौ डिग्री तक पहुंच गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जितनी ठंड होगी उतना गेहूं का उत्पादन बढ़़ेगा: किसान</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong><em>किसानों का मानना है कि जितनी ठंड होगी उतना गेहूं का उत्पादन बढ़़ेगा। हालांकि डॉक्टरों ने सर्दी के मौसम में सर्दी से बचने के लिए सुबह, शाम जरूरत हो तो घर से निकलने की सलाह दी है। डाक्टरों के मुताबिक इस मौसम में सबसे अधिक परेशानी दिल के मरीज को होती है।</em></strong></p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सर्दी के मौसम में जरूरत हो तो ही सुबह, शाम घर से निकले।</li>
<li style="text-align:justify;">बच्चों को घर से बाहर बिल्कुल न जाने दे क्योंकि ठंड के मौसम में बाहर जाने पर बीमार होने का डर बना रहेगा।</li>
<li style="text-align:justify;">किसान रामसरूप, बलबीर, दलजीत ने कहा कि गेहूं की फसल के लिए कोहरा फाएदमंद है।</li>
<li style="text-align:justify;">जितनी अधिक ठंड अब होगी उतना फायदा गेहूं की फसल को होगा।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/severe-cold-thick-fog-across-north-india/article-11937</link>
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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2019 16:50:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब किसानों को नहीं जलानी पड़ेगी पराली</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व उप प्रधानमंत्री एवं किसान नेता चौधरी चरण सिंह व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में
 आयोजित किए जा रहे किसान दिवस के मौके पर आयोजित समारोह में दुष्यंत चौटाला मुख्य अतिथि होंगे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/now-farmers-will-not-have-to-burn-stubble/article-11906"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/straw.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">सराहनीय: पराली निस्तारण संयंत्र का उद्घाटन आज (Straw)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिसार (सच कहूँ न्यूज)।</strong> धान के खेत में अब किसानों को पराली जलाने की (Straw) जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि पराली का उपयोग अब बिजली-गैस बनाने और अवशेष जैविक खेती में काम आएगा। कृषि वैज्ञानिकों ने पराली प्रबंधन संयंत्र को इजाद कर लिया है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला रविवार को चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में इस संयत्र का उदघाटन करेंगे। पूर्व उप प्रधानमंत्री एवं किसान नेता चौधरी चरण सिंह व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे किसान दिवस के मौके पर आयोजित समारोह में दुष्यंत चौटाला मुख्य अतिथि होंगे।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">दिल्ली और एनसीआर में अक्टूबर-नवंबर माह में छाने वाला स्मॉग देश भर में बड़ा मुद्दा बना था</li>
<li style="text-align:justify;"> हवा की गुणवत्ता में आई कमी के लिए पराली जलाने को मुख्य वजह माना जा रहा था।</li>
<li style="text-align:justify;">किसानों के पास इस पराली से निपटने के सीमित विकल्प कृषि वैज्ञानिकों के लिए सिर दर्द बने हुए हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">अब कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पराली प्रबंधन के आधुनिक संयंत्र का आविष्कार कर लिया है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">इस संयंत्र में पराली का उपयोग बिजली व गैस का उत्पादन किया जाएग (Straw)</h3>
<p style="text-align:justify;">इस संयंत्र को हिसार स्थित हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के दीन-दयाल उपाध्याय जैविक खेती फार्म में स्थापित किया गया है। इस संयंत्र में पराली का उपयोग करबिजली व गैस का उत्पादन किया जाएगा। बचे अवशेष का प्रयोग जैविक खेतों में खाद के रूप में किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीबन एक करोड़ लागत से स्थापित इस संयंत्र में 2500 क्विंटल पराली खपाने की क्षमता है। इसकी सफलता से हरियाणा के अन्य हिस्सों में भी इस प्रकार के संयंत्र स्थापित करने के रास्ते खुलेंगे और किसानों को पराली जलाने की नौबत नहीं आएगी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Dec 2019 15:58:13 +0530</pubDate>
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