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                <title>Jharkhand Election - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Jharkhand Vidhan Sabha Chunav 2024: झारखंड में भाकपा ने 12 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की</title>
                                    <description><![CDATA[रांची (एजेंसी)। Jharkhand Vidhan Sabha Chunav 2024: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर मंगलवार को 12 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है। सूची के अनुसार नाला विधानसभा क्षेत्र से कनाई चंद्र मॉल पहाड़िया, सारठ से छाया कोल, बरकट्ठा से महादेव राम, मांडू से महेन्द्र पाठक, डाल्टेनगंज से रुचिर तिवारी, कांके […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/communist-party-of-india-released-the-first-list-of-twelve-candidates-in-jharkhand/article-63593"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/jharkhand-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची (एजेंसी)।</strong> Jharkhand Vidhan Sabha Chunav 2024: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर मंगलवार को 12 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है। सूची के अनुसार नाला विधानसभा क्षेत्र से कनाई चंद्र मॉल पहाड़िया, सारठ से छाया कोल, बरकट्ठा से महादेव राम, मांडू से महेन्द्र पाठक, डाल्टेनगंज से रुचिर तिवारी, कांके से संतोष रजक, सिमरिया से सुरेश कुमार भुईयां, चतरा से डोमेन भुईया, विशुनपुर से महेंद्र उरांव, भवनाथपुर से घनश्याम पाठक शामिल है। Jharkhand News</p>
<p style="text-align:justify;">जारी सूची के अनुसार मांडू से महेंद्र पाठक, नाला से कन्हाई चंद्र माल पहाड़िया, सारठ से छाया कोल, बरकट्ठा से महादेव राम, डाल्टनगंज से रुचिर तिवारी, कांके से संतोष रजक, सिमरिया से सुरेश कुमार भुईयां, चतरा से डोमेन भुईयां, बिशुनपुर से महेंद्र उरांव, भवनाथपुर से घनश्याम पाठक, बड़कागांव से अनिरुद्ध कुमार और पोड़ैयाहाट से रामचंद्र हेंब्रम को विधानसभा चुनाव में भाकपा का उम्मीदवार बनाया गया है। इस अवसर पर भाकपा के राज्य सचिव महेन्द्र पाठक, राष्ट्रीय परिषद के पीके पांडेय, केडी सिंह,और अजय सिंह उपस्थित थे। Jharkhand News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जाखल बीडीपीओ कार्यालय में समाधान शिविर का आयोजन, मौके पर किया शिकायतों का निपटारा" href="http://10.0.0.122:1245/solution-camp-organized-in-jakhal-bdpo-office/">जाखल बीडीपीओ कार्यालय में समाधान शिविर का आयोजन, मौके पर किया शिकायतों का निपटारा</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 23 Oct 2024 17:56:20 +0530</pubDate>
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                <title>Maharashtra-Jharkhand Election Dates: महाराष्ट्र में 20 नवम्बर, झारखंड में 13 और 20 नवम्बर को चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Maharashtra-Jharkhand Election Dates: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव एक चरण में 20 नवम्बर को और झारखंड में दो चरणों में 13 तथा 20 नवम्बर को कराये जायेंगे जबकि दोनों राज्यों में मतों की गिनती 23 नवम्बर को होगी। पन्द्रह राज्यों की 47 विधानसभा सीटों और केरल की वायनाड संसदीय सीट पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/maharashtra-jharkhand-election-dates/article-63312"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-10/maharashtra-jharkhand-election-dates.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>Maharashtra-Jharkhand Election Dates: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव एक चरण में 20 नवम्बर को और झारखंड में दो चरणों में 13 तथा 20 नवम्बर को कराये जायेंगे जबकि दोनों राज्यों में मतों की गिनती 23 नवम्बर को होगी। पन्द्रह राज्यों की 47 विधानसभा सीटों और केरल की वायनाड संसदीय सीट पर उपचुनाव 13 नवम्बर को होगा। महाराष्ट्र की नांदेड़ संसदीय सीट और एक अन्य विधानसभा सीट पर उप चुनाव 20 नवम्बर को होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने मंगलवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए मतदाताओं विशेष रूप से शहरी मतदाताओं से लोकतंत्र के उत्सव में बढचढ कर हिस्सा लेने की पुरजोर अपील की। उनके साथ चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधु भी थे। इसी के साथ इन दोनों राज्यों में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गयी है। कुमार ने बताया कि महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों के लिए चुनाव की अधिसूचना 22 अक्टूबर को जारी की जायेगी और नामांकन 29 अक्टूबर तक दायर किये जा सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 30 अक्टूबर को होगी और नाम 4 नवम्बर तक वापस लिये जा सकेंगे। राज्य में एक चरण में चुनाव 20 नवम्बर को होगा। Maharashtra-Jharkhand</p>
<h3>झारखंड में नामांकन पत्र 25 अक्टूबर तक दायर किये जा सकेंगे</h3>
<p style="text-align:justify;">झारखंड विधानसभा की 81 में से 43 सीटों के लिए पहले चरण के चुनाव की अधिसूचना 18 अक्टूबर को जारी की जायेगी और नामांकन पत्र 25 अक्टूबर तक दायर किये जा सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 28 अक्टूबर को होगी जबकि नाम 30 अक्टूबर तक वापस लिये जा सकेंगे। चुनाव 13 नवम्बर को होगा। राज्य में दूसरे चरण के चुनाव में 38 सीटों के लिए अधिसूचना 22 अक्टूबर को जारी की जायेगी और नामांकन पत्र 29 अक्टूबर तक दायर किये जायेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 30 अक्टूबर को होगी जबकि नाम चार नवम्बर तक वापस लिये जा सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस चरण में 20 नवम्बर को मत डाले जायेंगे। दोनों राज्यों में मतगणना 23 नवम्बर को होगी। कुमार ने कहा कि 15 राज्यों की 48 विधानसभा और दो राज्यों में लोकसभा की दो सीटों के उपचुनाव भी इन विधानसभा चुनाव के साथ संपन्न कराये जायेंगे। केरल की वायनाड संसदीय सीट और 47 विधानसभा सीटों के उपचुनाव 13 नवम्बर को झारखंड विधानसभा के पहले चरण के साथ ही 13 नवम्बर को कराये जायेंगे। इसके अलावा महाराष्ट्र की नांदेड़ संसदीय सीट और एक अन्य विधानसभा सीट का उपचुनाव महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के साथ 20 नवम्बर को कराया जायेगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Credit Card: क्रेडिट कार्ड चुनते वक्त ध्यान देने योग्य 5 बुनियादी बातें" href="http://10.0.0.122:1245/information-about-credit-cards/">Credit Card: क्रेडिट कार्ड चुनते वक्त ध्यान देने योग्य 5 बुनियादी बातें</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 15 Oct 2024 17:11:03 +0530</pubDate>
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                <title>नाकाफी रहा स्थिरता के साथ सुशासन</title>
                                    <description><![CDATA[यह मान्यता रही है कि ऐसी पार्टियां उद्देश्य में बहुत सीमित रहती हैं बावजूद इसके केन्द्र में इनकी भूमिका भी बड़े पैमाने पर समय-समय पर देखी गयी है। भारत की राजनीति के क्षितिज में गठबंधन की सरकार क्षेत्रीय दलों की सरकार और एक दल की सरकार की अवधारणा बीते सात दशकों से देखी जा सकती है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/good-governance-with-insufficient-stability/article-11996"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/jharkhand-election-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><em>-भारत में समय-समय पर क्षेत्रीय दलों की सत्ता उभरती रही है। भारत में बहुदलीय व्यवस्था अभी भी कहीं गयी नहीं है। अब तो ऐसा हो गया है कि सियासत में कमजोर पड़ चुके राश्ट्रीय दल, क्षेत्रीय दलों के सहारे अपनी राजनीतिक पारी आगे बढ़ा रहे हैं। कांग्रस और भाजपा दोनों इसमें शामिल है मसलन हरियाणा इसका ताजा उदाहरण है। यही स्थिति झारखण्ड से लेकर महाराष्ट्र तक कांग्रेस की देखी जा सकती है। इसमें कोई दुविधा नहीं कि क्षेत्रीय दल स्थानीय समस्याओं से तुलनात्मक अधिक संलग्न होते हैं।</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">झारखण्ड अपने निर्माण काल से एक स्थिर सरकार की अवधारणा से वंचित रहा। पिछले 19 वर्षों में जितनी भी सरकारें आईं केवल भाजपा की तत्कालीन सरकार को छोड़कर सभी स्वयं में असुरक्षित रहीं। हालांकि इस सरकार को भी 81 विधानसभा सीट के मुकाबले 2014 में 37 पर ही जीत मिली थी जो अब सिमट कर 25 रह गयी है। पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मराण्डी से लेकर अब नये मुख्यमंत्री की तैयारी कर रहे हेमंत सोरेन तक इस सत्य को साझा करते हैं कि इन्होंने झारखण्ड में अस्थिर सरकार दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि अब वही हेमंत सोरेन गठबंधन से भरी पूर्ण बहुमत की सरकार का मुखिया होने जा रहे हैं। रघुबर दास से पहले नौ बार सत्ता परिवर्तन और तीन बार राष्ट्रपति शासन वाला झारखण्ड अपना कोई विकास मॉडल विकसित ही नहीं कर पाया। जब 2014 में स्थायी तौर पर भाजपा की सरकार आयी तो इसके बनने के पीछे प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा था। हार से यह प्रतीत होता है कि भाजपा की सत्ता हांक रहे रघुबर दास का विकास मॉडल विफल रहा। हालांकि इसके पीछे राज्यों में भाजपा की जादुई छवि का बेअसर होना भी देखा जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस विजय रथ पर सवार होकर भाजपा भारत पर कब्जा जमा रही थी और मार्च 2018 तक तीन-चौथाई क्षेत्र पर उसकी पताका लहरा रहा थी आज वही एक तिहाई पर सिमट कर रह गई और यह सिमटने का सिलसिला 2018 से तब शुरू हुआ जब कांग्रेस और जीडीएस गठबंधन ने कर्नाटक में सरकार बना ली। हालांकि अब उसी कर्नाटक में भाजपा की पूर्ण सत्ता है पर सिमटने की दस्तक वहां से शुरू हो चुकी है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से सत्ता पिछले साल इन्हीं दिनों गवांने वाली भाजपा इस साल महाराष्टÑ और झारखण्ड से विदा हो गयी। जबकि जैसे-तैसे हरियाणा को बचाने में कामयाब रही।</p>
<p style="text-align:justify;">सवाल है कि क्या झारखण्ड का कोई विकास मॉडल नहीं था यदि था तो लोगों को रास नहीं आया या फिर लोगों में सरकार विश्वास ही नहीं भर पायी। ऐसा लगता है कि राष्ट्रीय दलों की सरकारें राज्यों में व्यापक सोच के साथ तो होती हैं पर जनहित के जरूरी कदम उठाने में हांफ जाती हैं। 1989 की राजनीति में एक दौर ऐसा था जब क्षेत्रीय दलों का पर्दापण भारतीय राजनीति में तेजी से हुआ। हालांकि यह पूरी तरह तो नहीं पर स्थिति को देख कर कहा जा सकता है कि तीन दशक बाद 2019 के दौर में एक बार फिर क्षेत्रीय दल राज्य में स्थान घेर रहें हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र में शिवसेना, सरकार का भले ही निर्माण कैसे भी क्यों न हुआ हो और हरियाणा में जेजेपी के समर्थन से भाजपा की सत्ता में वापसी और अब झारखण्ड मुक्ति मोर्चा का कांग्रेस व अन्य के साथ झारखण्ड में एक बार फिर अवतार लेना इस बात को पुख्ता करते हैं। आंकड़े यह दशार्ते हैं कि झारखण्ड कोई मॉडल राज्य बन ही नहीं पाया और बीजेपी भी ऐसा करने में नाकाम रही। साक्षरता का प्रतिशत 66.4 फीसदी जो केवल तीन राज्यों से ऊपर है और निर्धनता अपनी बसावट लिए हुए है। लिंग सम्बद्ध विकास सूचकांक में भी राष्ट्रीय स्तर पर बहुत आशातीत आंकड़े नहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि झारखण्ड में जनजातियों की संख्या 28 फीसद है जो हर सरकार से संतुलित विकास की बाट जोहती रही। इस पर कितना काम हुआ भाजपा की हार इसे स्पष्ट कर देती है। स्थानीय मुद्दों को हल करने के बजाय वहां के भावनात्मक मुद्दों को छेड़ना बीजेपी के लिए गले की फांस बनी। जल, जंगल और जमीन के साथ छेड़छाड़ हार को और पुख्ता कर दिया। जाहिर है राज्यों की स्थानीय आवश्यकताओं पर पूरी तरह शोध और बोध किये बगैर यदि सियासी पैंतरे अजमाये जायेंगे तो हिस्से में हार ही आयेगी। यह पहले भी होता रहा है और अभी भी यह सियासत से लुप्त नहीं हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में समय-समय पर क्षेत्रीय दलों की सत्ता उभरती रही है। भारत में बहुदलीय व्यवस्था अभी भी कहीं गई नहीं है। अब तो ऐसा हो गया है कि सियासत में कमजोर पड़ चुके राष्ट्रीय दल, क्षेत्रीय दलों के सहारे अपनी राजनीतिक पारी आगे बढ़ा रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों इसमें शामिल हैं मसलन हरियाणा इसका ताजा उदाहरण है। यही स्थिति झारखण्ड से लेकर महाराष्ट्र तक कांग्रेस की देखी जा सकती है। इसमें कोई दुविधा नहीं कि क्षेत्रीय दल स्थानीय समस्याओं से तुलनात्मक अधिक संलग्न होते हैं। न केवल अच्छी समझ रखते हैं बल्कि सत्ता में बने रहने के लिए लोगों की सुविधा को जमीन देने का पूरा इरादा जताते हैं। दक्षिण भारत में तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना वर्तमान में इसके बेहतर उदाहरण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां स्थानीय दल सत्ता चला रहे हैं। हर समय कोई भी पार्टी इतनी सक्षम नहीं है कि हर जगह जीत दर्ज करे। भाजपा हो या कांग्रेस यह दोनों पर लागू है। चुनाव जीतने के लिए समस्याओं की सही समझ और जनता के रूख को भांपना आवश्यक है। हर बार चुनावी रूख एक ही तरफ नहीं होता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से लेकर स्मृति ईरानी जैसे दर्जनों दिग्गज ने झारखण्ड में तूफानी दौरे किये। आदिवासी मतदाताओं को अपने एजेण्डे बताये उनका मन जीतने के लिए हथकण्डे अपनाये मगर सब बेकार सिद्ध हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">81 विधानसभा क्षेत्र के मुकाबले 54 में बीते लोकसभा चुनाव में बढ़त बनाने वाली भाजपा की हार क्यों हुई, यह उनके चिंतकों का विषय है। अर्मत्यसेन की पुस्तक एन अनसर्टेन ग्लोरी में लिखा है कि हिमाचल का अपना विकास मॉडल है, उत्तराखण्ड भी विकास मॉडल के साथ प्रयास कर रहा है लेकिन झारखण्ड भ्रष्टाचार, गुटबंदी और संसाधनों की लूट, माओवादियों के साथ राजनीतिक लड़ाई के चलते कई आंतरिक कलह से जूझ रहा है यह बात बरसों पुरानी है। क्या 5 बरस बाद रघुबर सरकार ने झारखण्ड को विकास मॉडल दिया, संसाधनों की लूट को समाप्त किया और वहां के निवासियों में विकास भरा। जाहिर है यदि ऐसा हुआ होता तो सत्ता उनके हाथ होती।</p>
<p style="text-align:justify;">सुशासन गढ़ने हेतु प्रान्तों को विकास मॉडल देना ही होगा और यह जमीन पर तब उतरेगा जब भाषा, संस्कृति, धर्म और जाति आदि का संज्ञान होगा। वैसे देखा जाय तो क्षेत्रीय पार्टियों का जन्म भी इसी आधार पर हुआ है। यह मान्यता रही है कि ऐसी पार्टियां उद्देश्य में बहुत सीमित रहती हैं बावजूद इसके केन्द्र में इनकी भूमिका भी बड़े पैमाने पर समय-समय पर देखी गयी है। भारत की राजनीति के क्षितिज में गठबंधन की सरकार क्षेत्रीय दलों की सरकार और एक दल की सरकार की अवधारणा बीते सात दशकों से देखी जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में झारखण्ड में भाजपा की हार कोई चौकाने वाली बात नहीं है। मगर उन सवालों के जवाब तो खोजने ही पड़ेंगे जिसे लेकर बीते पांच वर्षों में भाजपा ने देश में अपनी कूबत बढ़ाई और अब गिर क्यों रही है। क्या भाजपा को अति आत्मविश्वास डूबो रहा है। क्या वहां के क्षेत्रीय दलों से गठबंधन न करना भारी पड़ रहा है या फिर रघुबर दास जैसे गैरआदिवासी को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने कोई गलती की है। पार्टी में टूट हुई और नेता बेअसर रहे या फिर जीतने वाले गठबंधन को हल्के में लिया। वजह कुछ भी हो भाजपा के हाथ से एक और प्रान्त जा चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब लकीर पर लट्ठ पीटने से कुछ नहीं होगा। सवाल तो यह भी है कि अनुच्छेद 370 का जम्मू-कश्मीर से खात्मा, भले ही सर्वोच्च न्यायालय का फैसला हो पर मन्दिर के पक्ष में निर्णय का होना कुछ भी यहां भाजपा के पक्ष में नहीं रहा। इसमें यह भी संकेत है कि राष्ट्रीय मुद्दे राज्यों में नहीं चलते।</p>
<p style="text-align:justify;">–<strong><em>सुशील कुमार सिंह</em></strong></p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Dec 2019 20:36:53 +0530</pubDate>
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                <title>Jharkhand Election : महागठबंधन को बहुमत</title>
                                    <description><![CDATA[30 नवंबर से 20 दिसंबर तक पांच चरणों में हुए थे चुनाव | Jharkhand Election Edited By VIjay Sharma रांची (एजेंसी)। झारखंड में सोमवार को हो रही मतगणना के रुझान में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का महागठबंधन 47 सीटों पर बढ़त बनाकर सरकार बनाने की स्थिति में नजर आ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/jharkhand-election-counting-continues-in-81-seats/article-11927"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/jharkhand-election.jpg" alt=""></a><br /><h2>30 नवंबर से 20 दिसंबर तक पांच चरणों में हुए थे चुनाव <strong>| Jharkhand Election<br />
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<h5><strong>Edited By VIjay Sharma</strong></h5>
<p><strong>रांची (एजेंसी)।</strong> झारखंड में सोमवार को हो रही मतगणना के रुझान में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का महागठबंधन 47 सीटों पर बढ़त बनाकर सरकार बनाने की स्थिति में नजर आ रही है वहीं मुख्यमंत्री रघुवर दास के साथ विधानसभा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष चुनाव हारते दिख रहे हैं। राज्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, झारखंड विधानसभा की 81 सीटों के लिए हो रही मतगणना में अपराह्न तीन बजे तक झामुमो 29 और उसकी सहयोगी कांग्रेस 14 तथा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) 04 सीटों पर आगे है। वहीं, भाजपा 24, झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) 03, आॅल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) 04 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) 01, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) एक और निर्दलीय ने दो सीट पर बढ़त बनायी है।</p>
<p>आज 1,215 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला हो जाएगा। 30 नवंबर से 20 दिसंबर तक पांच चरणों में चुनाव हुए थे। एग्जिट पोल में किसी भी दल को बहुमत न मिलने से पूरे देश की उत्सुकता झारखंड विस चुनाव के नतीजों को लेकर है।सबसे पहले तोरपा और चंदनकियारी का परिणाम आएगा, क्योंकि यहां 13-13 राउंड की ही गिनती होनी है। सबसे अधिक 28 राउंड की गिनती चतरा में होनी है। इस कारण इस सीट का परिणाम सबसे अंत में आएगा।</p>
<p><strong> UPDATES:-</strong></p>
<ul>
<li><strong> रुझानों में JMM+ बहुमत से 2 सीटें दूर</strong></li>
<li><strong>झारखंड में सरकार बनाने की जोड़ तोड़ शुरू, BJP ने AJSU-JVM से किया संपर्क</strong></li>
<li><strong> पहले राउंड के लिए वोटों की गिनती पूरी, 11 सीटों पर भाजपा आगे, 7 पर कांग्रेस</strong></li>
<li><strong> सिसई सीट से BJP प्रत्याशी दिनेश उरांव और पोड़ैयाहाट सीट से JVM नेता प्रदीप यादव आगे</strong></li>
<li><strong>कोडरमा सीट से BJP प्रत्याशी नीरा यादव और राजमहल सीट से BJP के अनंत ओझा आगे</strong></li>
<li><strong> दोनों सीटों पर पीछे चल रहे हेमंत सोरेन</strong></li>
<li><strong> AJSU के सुदेश महतो हो सकते हैं किंगमेकर</strong></li>
<li><strong> रुझानों में त्रिशंकु सरकार बनने के आसार</strong></li>
<li><strong> AJSU के लंबोदर महतो गोमिया सीट से आगे</strong></li>
<li><strong> शुरुआती रुझानों में BJP को बढ़त</strong></li>
<li><strong> रूझानों में जेएमएम को बढ़त </strong></li>
</ul>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2019 11:21:21 +0530</pubDate>
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